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                <title>उच्च शिक्षा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>उच्च शिक्षा RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना एक मील का पत्थर-जिला सूचना अधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">
<p><strong>लखनऊः </strong></p>
<p><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) </strong></p>
<p><strong>जिला सूचना अधिकारी </strong></p>
<p><strong>मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ ।  </strong></p>
</blockquote>
<p>मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना, उनके जन्म को प्रोत्साहित करना और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। लंबे समय से भारतीय समाज में बेटियों को लेकर कई प्रकार की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ रही हैं। कहीं बेटियों को बोझ समझा जाता था, तो कहीं उनकी शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी। इसी सोच को बदलने और बेटियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184439/chief-minister-kanya-sumangala-yojana-a-milestone-district-information-officer"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-31-at-19.15.33.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">
<p><strong>लखनऊः </strong></p>
<p><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) </strong></p>
<p><strong>जिला सूचना अधिकारी </strong></p>
<p><strong>मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ ।  </strong></p>
</blockquote>
<p>मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना, उनके जन्म को प्रोत्साहित करना और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। लंबे समय से भारतीय समाज में बेटियों को लेकर कई प्रकार की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ रही हैं। कहीं बेटियों को बोझ समझा जाता था, तो कहीं उनकी शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी। इसी सोच को बदलने और बेटियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई।</p>
<p><br />यह योजना वर्ष 2019 में प्रारंभ की गई, जिसका लक्ष्य बालिकाओं को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता प्रदान करना है। सरकार द्वारा दी जाने वाली यह सहायता बालिका के जीवन के विभिन्न चरणों में दी जाती है, जिससे उसके पालन-पोषण, शिक्षा और विकास में आर्थिक बाधाएँ कम हो सकें। योजना के अंतर्गत कुल 25,000 रुपये की सहायता राशि निर्धारित की गई है, जिसे छह अलग-अलग चरणों में सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जाता है। यह राशि क्ठज् यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से दी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम हो जाती है।</p>
<p><br />इस योजना के तहत बालिका के जन्म के समय 5,000 रुपये की सहायता दी जाती है, जिससे परिवार को प्रारंभिक खर्चों में सहयोग मिलता है। इसके बाद जब बालिका का टीकाकरण पूरा हो जाता है, तब 2,000 रुपये की राशि प्रदान की जाती है। जैसे-जैसे बालिका शिक्षा के विभिन्न चरणों में आगे बढ़ती है, उसे क्रमशः प्रथम कक्षा, छठी कक्षा, नौवीं कक्षा और बारहवीं के बाद उच्च शिक्षा में प्रवेश के समय आर्थिक सहायता दी जाती है। इस प्रकार यह योजना केवल जन्म तक सीमित नहीं है, बल्कि बालिका के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में निरंतर सहयोग प्रदान करती है।</p>
<p><br />इस योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना है। आज भी कई स्थानों पर बेटा और बेटी के बीच भेदभाव देखा जाता है, जिसके कारण बेटियों को शिक्षा और अवसरों से वंचित रहना पड़ता है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना इस सोच को बदलने का प्रयास करती है और यह संदेश देती है कि बेटियाँ भी परिवार और समाज की उतनी ही महत्वपूर्ण सदस्य हैं जितने बेटे। जब परिवार को यह विश्वास मिलता है कि सरकार उनके साथ खड़ी है और उनकी बेटी के भविष्य के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है, तो वे बेटियों के पालन-पोषण और शिक्षा के प्रति अधिक जागरूक होते हैं।</p>
<p><br />योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को रोकने में भी सहायक है। जब बालिकाएँ शिक्षा प्राप्त करती हैं और उनके भविष्य को लेकर परिवार सजग होता है, तो वे कम उम्र में विवाह करने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती हैं। इससे समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ता है और बालिकाएँ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ती हैं।इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ पात्रता शर्ते निर्धारित की गई हैं। लाभार्थी बालिका उत्तर प्रदेश की निवासी होनी चाहिए और उसके परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, एक परिवार की अधिकतम दो बालिकाएँ ही इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकती हैं। यदि दूसरी संतान के रूप में जुड़वा बेटियाँ जन्म लेती हैं, तो दोनों को योजना का लाभ दिया जाता है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे।</p>
<p><br />आवेदन प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए इसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराया गया है। ऑनलाइन आवेदन के लिए आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है, जहाँ सभी आवश्यक विवरण भरकर दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं। वहीं, ऑफलाइन आवेदन के लिए आंगनवाड़ी केंद्र, ब्लॉक कार्यालय या जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में जाकर आवेदन किया जा सकता है। इससे उन लोगों को भी सुविधा मिलती है जो डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं।</p>
<p><br />इस योजना का प्रभाव समाज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। बेटियों के जन्म को लेकर लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। अब अधिक से अधिक परिवार बेटियों को शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। स्कूलों में बालिकाओं की उपस्थिति बढ़ी है और वे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। इसके साथ ही, यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि शिक्षित और आत्मनिर्भर महिलाएँ ही समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।</p>
<p><br />हालांकि योजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण कई लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा पाते। कई बार आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता भी एक बड़ी बाधा बन जाती है। इसके अलावा, डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण ऑनलाइन आवेदन में भी कठिनाइयाँ आती हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जैसे जागरूकता अभियान चलाना, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जानकारी पहुँचाना और आवेदन प्रक्रिया को और सरल बनाना।</p>
<p><br />कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना एक ऐसी पहल है जो न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सोच को बदलने का कार्य भी करती है। यह योजना इस बात का प्रतीक है कि सरकार बालिकाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है और उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह निश्चित रूप से एक सशक्त, शिक्षित और समान समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 18:25:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण की दिशा में लखनऊ में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की 09 वर्षों में हुई उल्लेखनीय प्रगति</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong><strong>लखनऊः   </strong></strong></blockquote>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जिला सूचना अधिकारी</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग लखनऊ सामाजिक न्याय, शैक्षिक उन्नयन, आर्थिक सशक्तीकरण तथा समावेशी विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। विगत 09 वर्षों में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और आर्थिक सहायता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की गई हैं। विभाग की योजनाओं ने पिछड़े वर्ग के लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं। विभाग द्वारा संचालित पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184363/divisional-district-information-office-lucknow-remarkable-progress-in-09-years"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas17.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong><strong>लखनऊः   </strong></strong></blockquote>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जिला सूचना अधिकारी</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग लखनऊ सामाजिक न्याय, शैक्षिक उन्नयन, आर्थिक सशक्तीकरण तथा समावेशी विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। विगत 09 वर्षों में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और आर्थिक सहायता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की गई हैं। विभाग की योजनाओं ने पिछड़े वर्ग के लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं। विभाग द्वारा संचालित पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में कुल 2,01,414 छात्रों को रु0 421.20 लाख की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इस योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में सहायता प्रदान की और विद्यालयी शिक्षा को प्रोत्साहन मिला।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी प्रकार दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में कुल 2,91,263 छात्रों को रु0 12,026.36 लाख की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इससे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को आर्थिक संबल मिला तथा पिछड़े वर्ग के छात्रों की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढी । दशमोत्तर शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में कुल 2,69,954 छात्रों को रु0 55,343.84 लाख की शुल्क प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराई गई। इस योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के द्वार खोले और प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया। यदि इन तीनों प्रमुख शैक्षिक योजनाओं को सम्मिलित रूप से देखा जाए तो कुल 7,62,631 छात्रों को लाभान्वित करते हुए लगभग रु0 67,791.40 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास के क्षेत्र में भी विभाग ने उल्लेखनीय कार्य किया है। O-Level एवं CCC लेवल प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में कुल 4,255 छात्रों को रु0 529.22 लाख की लागत से प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। डिजिटल युग में कंप्यूटर शिक्षा और तकनीकी दक्षता युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह योजना युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल से जोड़ने तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में शादी अनुदान योजना भी विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। इस योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में कुल 4,964 जोड़ों को रु. 992.80 लाख का लाभ प्रदान किया गया है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर पिछड़े वर्ग परिवारोंकी बेटियों के विवाह में सहयोग देकर सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक सहायता प्रदान कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यदि छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, शादी अनुदान और कौशल विकास योजनाओं को एक साथ देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि विभाग केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, सामाजिक संरक्षण और रोजगारपरक सशक्तीकरण का व्यापक मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और अन्य योजनाओं की प्रक्रिया को ऑनलाइन एवं पारदर्शी बनाया गया है। आवेदन, सत्यापन और डीबीटी के माध्यम से लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />विभाग द्वारा स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में भी कार्य किया गया है। पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से विभिन्न ऋण योजनाओं, मार्जिन मनी सहायता और उद्यमिता प्रोत्साहन कार्यक्रमों से युवाओं और कारीगरों को जोड़ा गया है। इससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिला और आत्मनिर्भरता को बल मिला। पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े समुदायों के उत्थान हेतु भी विभाग ने प्रशिक्षण, उपकरण सहायता और वित्तीय सहयोग प्रदान किया है। इससे कारीगरों और लघु उद्यमियों की आजीविका सुदृढ़ हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में विभाग की योजनाओं का विशेष प्रभाव देखा गया है। महिला लाभार्थियों को प्रशिक्षण, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़कर उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाई गई है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी योजनाओं का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचाया गया है। विभाग की उपलब्धियों में नियमित समीक्षा और प्रभावी मॉनिटरिंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समय-समय पर योजनाओं की समीक्षा कर पात्र लाभार्थियों तक लाभ सुनिश्चित किया गया है। पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की यह व्यवस्था विभागीय कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पिछले 09 वर्षों की प्रगति दर्शाती है कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग लखनऊ ने शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। लाखों विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, हजारों युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण और हजारों जरूरतमंद परिवारों को शादी अनुदान प्रदान कर विभाग ने सामाजिक न्याय को मजबूत किया है। आज विभाग की योजनाएं केवल सहायता कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और अवसर की समानता का माध्यम बन चुकी हैं। शिक्षा से लेकर रोजगार और सामाजिक सुरक्षा तक विभाग की बहुआयामी पहलें पिछड़े वर्ग के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग लखनऊ ने विगत 09 वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। 2,01,414 छात्रों को पूर्वदशम छात्रवृत्ति, 2,91,263 छात्रों को दशमोत्तर छात्रवृत्ति, 2,69,954 छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति, 4,964 जोड़ों को शादी अनुदान तथा 4,255 युवाओं को O-Leve एवं CCC प्रशिक्षण प्रदान कर विभाग ने सामाजिक और शैक्षिक सशक्तीकरण की दिशा में प्रभावशाली कार्य किया है। यह उपलब्धियां लखनऊ के समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और जनकल्याण की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184363/divisional-district-information-office-lucknow-remarkable-progress-in-09-years</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 23:35:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दशम दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण,  भव्य आयोजन आज</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में 29 जून 2026 को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। आज विश्वविद्यालय में विद्या परिषद एवं कार्य परिषद की बैठक आयोजित की गई, जिसके उपरांत संपूर्ण कार्यक्रम का अंतिम पूर्वाभ्यास सम्पन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">  इस अवसर पर कुलपति प्रो. कविता शाह, कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यों ने विद्वत पारियात्र के साथ दीक्षांत समारोह की तैयारियों का पूर्वाभ्यास किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में जनभवन द्वारा नामित दो नए सदस्य, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182237/all-preparations-for-tenth-convocation-ceremony-completed-grand-event-today"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782655142971.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में 29 जून 2026 को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। आज विश्वविद्यालय में विद्या परिषद एवं कार्य परिषद की बैठक आयोजित की गई, जिसके उपरांत संपूर्ण कार्यक्रम का अंतिम पूर्वाभ्यास सम्पन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर कुलपति प्रो. कविता शाह, कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यों ने विद्वत पारियात्र के साथ दीक्षांत समारोह की तैयारियों का पूर्वाभ्यास किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में जनभवन द्वारा नामित दो नए सदस्य, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल कुमार तथा बापू महाविद्यालय, पीपीगंज, गोरखपुर की प्राचार्य डॉ. मंजू मिश्रा भी समारोह में सम्मिलित होंगी। दीक्षांत समारोह में 19 कार्य परिषद सदस्य एवं 51 विद्या परिषद सदस्य सहभागिता करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दशम दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल करेंगी। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पर्यावरणविद् डॉ. मधुलिका अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री  रजनी तिवारी उपस्थित रहेंगी। रविवार सायंकाल  राज्यपाल का सिद्धार्थ विश्वविद्यालय आगमन प्रस्तावित है तथा उनके सम्मान में विश्वविद्यालय के कला संकाय सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कल दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ प्रातः 10:00 बजे वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगीत की प्रस्तुति से होगा तथा समापन राष्ट्रगान एवं विद्वत पारियात्रा के प्रत्यावर्तन के साथ किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष दीक्षांत समारोह का मुख्य आकर्षण स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी होंगे। विश्वविद्यालय द्वारा कुल 37 स्वर्ण पदक, जिनमें 13 डोनर स्वर्ण पदक शामिल हैं, प्रदान किए जाएंगे। विशेष रूप से 13 ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्हें दो या दो से अधिक स्वर्ण पदक प्राप्त हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह में पीएच.डी. उपाधि प्राप्त करने वाले शोधार्थियों को उपाधि प्रदान की जाएगी। साथ ही विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चार शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखित आठ पुस्तकों का लोकार्पण, दीक्षा उत्सव कार्यक्रम की झलकियां पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन, नवनिर्मित बालगृह ‘किलकारी’ एवं दिव्यांगजन सुविधायुक्त डिजिटलाइज्ड लाइब्रेरी का लोकार्पण भी कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गोद लिए गए गांवों के बच्चों द्वारा पर्यावरण एवं जल संरक्षण विषयक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट वितरण का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि, दशम दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की उपलब्धियों, समाज के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता और नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य का उत्सव है। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय के साथ निरंतर नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। यह दीक्षांत समारोह हमारे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समस्त विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों का गौरवपूर्ण प्रतीक बनेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182237/all-preparations-for-tenth-convocation-ceremony-completed-grand-event-today</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 22:34:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>37 टॉपर्स को राज्यपाल के हाथों आज मिलेगा गोल्ड मेडल</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>  स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्र में जब सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी, तब इसके पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य पिछड़े और सीमांत क्षेत्रों के युवाओं, विशेषकर बेटियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना था। एक दशक बाद विश्वविद्यालय का 10वां दीक्षांत समारोह उस उद्देश्य की सफलता की गवाही देता नजर आ रहा है। इस बार दिए जाने वाले 37 स्वर्ण पदकों में 28 पदक छात्राओं के नाम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  भगवान गौतम बुद्ध की तपोभूमि में स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना 17 जून 2015 में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद के कपिलवस्तु में</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182235/37-toppers-will-get-gold-medal-today-from-the-hands"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782656585168.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong> स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्र में जब सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी, तब इसके पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य पिछड़े और सीमांत क्षेत्रों के युवाओं, विशेषकर बेटियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना था। एक दशक बाद विश्वविद्यालय का 10वां दीक्षांत समारोह उस उद्देश्य की सफलता की गवाही देता नजर आ रहा है। इस बार दिए जाने वाले 37 स्वर्ण पदकों में 28 पदक छात्राओं के नाम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> भगवान गौतम बुद्ध की तपोभूमि में स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना 17 जून 2015 में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद के कपिलवस्तु में एक राज्य विश्वविद्यालय के रूप में की गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में विश्वविद्यालय से छह जिलों (सिद्धार्थनगर, महराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, श्रावस्ती और बलरामपुर) के संबद्ध 289 महाविद्यालयों के माध्यम से लगभग दो लाख विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है।  शिक्षाविदों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का आंकड़ा नहीं है बल्कि उस सामाजिक बदलाव का भी संकेत है, जिसकी उम्मीद विश्वविद्यालय की स्थापना के समय की गई थी। जिन क्षेत्रों में कभी उच्च शिक्षा तक पहुंच सीमित थी, वहां की बेटियां आज विश्वविद्यालय की मेधा सूची में सबसे आगे खड़ी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> तराई और सीमावर्ती जिलों में लंबे समय तक उच्च शिक्षा के अवसर सीमित रहे। आर्थिक स्थिति, दूरी और सामाजिक परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती थीं। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध महाविद्यालयों के विस्तार ने इस स्थिति में बदलाव लाने का काम किया। अब छात्राओं को घर के नजदीक ही स्नातक, परास्नातक और शोध स्तर तक पढ़ाई का अवसर मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षकों का कहना है कि पिछले वर्षों में छात्राओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। इसका परिणाम अब स्वर्ण पदकों और शैक्षणिक उपलब्धियों के रूप में सामने आ रहा है। 37 में 28 स्वर्ण पदक छात्राओं को मिलना इस बात का प्रमाण है कि अवसर मिलने पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:39:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दशम दीक्षांत समारोह के लिए तैयारियां अंतिम चरण में, 28 जून को विश्वविद्यालय पहुंचेंगी कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर की कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने बताया कि विश्वविद्यालय का दशम दीक्षांत समारोह आगामी 29 जून, 2026 को अत्यंत गरिमामय एवं भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।कुलपति ने अपने विज्ञप्ति में बताया कि जन भवन से प्राप्त सूचना के आधार पर विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 28 जून को अपराह्न विश्वविद्यालय परिसर में आगमन करेंगी तथा अगले दिन आयोजित दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर विद्यार्थियों को उपाधि एवं पदक प्रदान करेंगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. मधूलिका अग्रवाल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182187/chancellor-anandiben-patel-will-reach-the-university-on-june-28"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782570999060.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर की कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने बताया कि विश्वविद्यालय का दशम दीक्षांत समारोह आगामी 29 जून, 2026 को अत्यंत गरिमामय एवं भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।कुलपति ने अपने विज्ञप्ति में बताया कि जन भवन से प्राप्त सूचना के आधार पर विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 28 जून को अपराह्न विश्वविद्यालय परिसर में आगमन करेंगी तथा अगले दिन आयोजित दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर विद्यार्थियों को उपाधि एवं पदक प्रदान करेंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. मधूलिका अग्रवाल होंगी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय अति विशिष्ट अतिथि तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि दीक्षांत कार्यक्रम में एक से अधिक स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के माता-पिता को भी मंच तक आमंत्रित किया जाएगा, जिससे वे अपने बच्चों की उपलब्धि के इस गौरवपूर्ण क्षण के साक्षी बन सकें। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के छोटे बच्चों द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">पर्यावरण संरक्षण विषयक आयोजित भाषण, निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन विद्यार्थियों को भी कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल द्वारा सम्मानित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाषण प्रतियोगिता में कक्षा-7 की खुशी कुमारी, निबंध प्रतियोगिता में कक्षा-8 की रंजनी गुप्ता तथा चित्रकला प्रतियोगिता में कक्षा-8 की मधु को पुरस्कृत किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">कुलपति ने बताया कि जनभवन से प्राप्त निर्देशों के आधार पर इस वर्ष दीक्षांत समारोह के अवसर पर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों से चार शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए निर्धारित प्रोफार्मा पूर्व में ही विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों को उपलब्ध करा दिया गया था। प्राप्त आवेदनों की स्क्रीनिंग के उपरांत चयनित शिक्षकों के नाम घोषित किए जाएंगे तथा उन्हें कुलाधिपति द्वारा मंच से सम्मानित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि दीक्षांत समारोह के अवसर पर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के आठ शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का लोकार्पण भी मंच से कुलाधिपति के कर-कमलों द्वारा किया जाएगा, जो विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोधपरक उपलब्धियों का महत्वपूर्ण प्रतिफल है।  साथ ही स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों को उनके संबंधित संकायाध्यक्षों के माध्यम से प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे। इस बार समारोह की व्यवस्था पूर्व वर्षों की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित एवं सहभागी स्वरूप में की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुलपति ने बताया कि कुलाधिपति की उपस्थिति गौतम बुद्ध प्रेक्षागृह के सभागार में रहेगी तथा वहां से संपूर्ण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों में किया जाएगा। संबंधित संकायों के विद्यार्थी अपने-अपने संकायों में बैठकर कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देख सकेंगे तथा इन स्थलों पर शिक्षकों की भी उपस्थिति रहेगी, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थी इस ऐतिहासिक अवसर के सहभागी बन सकें।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 22:21:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिव्यांग विद्यार्थियों हेतु डिजिटल रीडिंग मशीन एवं किलकारी बाल देखभाल केंद्र का लोकार्पण करेंगी कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में आगामी 29 जून, 2026 को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल द्वारा विश्वविद्यालय में नवस्थापित केंद्रीय डिजिटल लाइब्रेरी में दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधा हेतु स्थापित डिजिटल रीडिंग मशीन तथा किलकारी बाल देखभाल केंद्र का लोकार्पण किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में पुस्तकालय प्रभारी डॉ. आशुतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय का केंद्रीय पुस्तकालय पूर्णतः डिजिटल स्वरूप में विकसित किया गया है। इसमें दिव्यांग विद्यार्थियों के पठन-पाठन को सुगम बनाने के लिए कीबोर्ड सॉफ्टवेयर एवं अत्याधुनिक स्कैनिंग मशीन की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182169/chancellor-anandiben-patel-will-inaugurate-digital-reading-machine-and-kilkari"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782570686719-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में आगामी 29 जून, 2026 को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल द्वारा विश्वविद्यालय में नवस्थापित केंद्रीय डिजिटल लाइब्रेरी में दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधा हेतु स्थापित डिजिटल रीडिंग मशीन तथा किलकारी बाल देखभाल केंद्र का लोकार्पण किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में पुस्तकालय प्रभारी डॉ. आशुतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय का केंद्रीय पुस्तकालय पूर्णतः डिजिटल स्वरूप में विकसित किया गया है। इसमें दिव्यांग विद्यार्थियों के पठन-पाठन को सुगम बनाने के लिए कीबोर्ड सॉफ्टवेयर एवं अत्याधुनिक स्कैनिंग मशीन की व्यवस्था की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मशीन के माध्यम से किसी भी पुस्तक को स्कैन कर उसे 100 से अधिक भाषाओं में अनुवादित किया जा सकता है। अनुवादित सामग्री को वॉइस सुविधा के माध्यम से सुना भी जा सकता है, जो विशेष रूप से दृष्टिबाधित एवं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दशम दीक्षांत समारोह की तैयारियों के क्रम में आज विश्वविद्यालय में कार्यक्रम का पूर्ण एवं व्यवस्थित पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) भी किया गया। इस वर्ष समारोह स्थल में परिवर्तन किए जाने के कारण पूर्वाभ्यास विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। पूर्वाभ्यास के दौरान मंच संचालन, अतिथियों के आगमन, पदक एवं उपाधि वितरण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा समस्त व्यवस्थाओं का क्रमबद्ध अभ्यास किया गया, जिससे समारोह का सफल एवं गरिमामय आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182169/chancellor-anandiben-patel-will-inaugurate-digital-reading-machine-and-kilkari</link>
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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 21:45:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के एमबीए छात्र दीपक कुमार वर्मा का 7 लाख वार्षिक पैकेज पर चयन</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर के प्रबंध अध्ययन विभाग के लिए अत्यंत गर्व एवं हर्ष का विषय है कि एमबीए पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के छात्र दीपक कुमार वर्मा का चयन प्रतिष्ठित कंपनी एक्स पावर सलूशन एलएलपी  में वार्षिक 7 लाख रुपये के आकर्षक पैकेज पर हुआ है। छात्र की इस उल्लेखनीय उपलब्धि से विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष का वातावरण व्याप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दीपक कुमार वर्मा ने अपनी मेहनत, लगन एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के बल पर यह सफलता प्राप्त की है। उनका चयन विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है तथा यह सिद्ध करता है कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178512/mba-student-of-siddharth-university-kapilvastu-deepak-kumar-verma-selected"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1778164748369.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर के प्रबंध अध्ययन विभाग के लिए अत्यंत गर्व एवं हर्ष का विषय है कि एमबीए पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के छात्र दीपक कुमार वर्मा का चयन प्रतिष्ठित कंपनी एक्स पावर सलूशन एलएलपी  में वार्षिक 7 लाख रुपये के आकर्षक पैकेज पर हुआ है। छात्र की इस उल्लेखनीय उपलब्धि से विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष का वातावरण व्याप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दीपक कुमार वर्मा ने अपनी मेहनत, लगन एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के बल पर यह सफलता प्राप्त की है। उनका चयन विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है तथा यह सिद्ध करता है कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के छात्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर प्रबंध अध्ययन विभागाध्यक्ष एवं वाणिज्य संकाय के अधिष्ठाता प्रो० सौरभ ने छात्र को बधाई देते हुए कहा कि विभाग निरंतर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दीपक की सफलता विभाग के गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं प्रशिक्षण का परिणाम है और इससे अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की  कुलपति प्रो० कविता शाह ने दीपक कुमार वर्मा को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में विश्वविद्यालय के और अधिक छात्र-छात्राएं विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों में चयनित होकर विश्वविद्यालय का नाम गौरवान्वित करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं ने दीपक कुमार वर्मा की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की कामना की है।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 20:13:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) का नया निर्देश 45 दिनों से अधिक अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार की आरक्षण नीति (एससी 15%, एसटी 7.5%, ओबीसी 27%) लागू होगी। यह नियम सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों पर लागू है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170974/university-grants-commissions-new-instruction-makes-reservation-mandatory-in-temporary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img_20260223_133812.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अस्थायी नियुक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर कहा है कि 45 दिनों या उससे अधिक अवधि की अस्थायी नियुक्तियों में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण नीति का कड़ाई से पालन किया जाए। यह निर्देश कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 2018 और 2022 के कार्यालय ज्ञापनों पर आधारित है, जिसे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और शिक्षा मंत्रालय ने भी मजबूती से दोहराया है।</p>
<p> </p>
<blockquote class="format1">यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी द्वारा 16 फरवरी 2026 को जारी इस पत्र में कहा गया है कि यह निर्देश सितंबर 2024 के पूर्व संचार का अनुवर्ती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिक्षण, गैर-शिक्षण और प्रशासनिक पदों पर संविदा आधारित नियुक्तियां यदि 45 दिनों से अधिक की हों, तो उनमें भारत सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। संस्थानों को 2023-24 और 2024-25 के दौरान की गई ऐसी नियुक्तियों का विवरण यूजीसी के यूएएमपी पोर्टल पर जमा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अनुपालन की जांच की जा सके।</blockquote>
<p> </p>
<p>यह कदम एससी-एसटी और ओबीसी संगठनों से प्राप्त शिकायतों के बाद उठाया गया है, जहां आरोप लगाया गया था कि कई संस्थान अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्देश आरक्षण को बाईपास करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाएगा, खासकर उन मामलों में जहां स्थायी पदों की भर्ती में देरी के कारण अस्थायी व्यवस्था की जाती है। एक वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह नीति दशकों से मौजूद है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय की दिशा में सकारात्मक कदम है।"</p>
<p> </p>
<p>हालांकि, इस निर्देश पर विवाद भी उत्पन्न हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि पत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, "यूजीसी ने ओबीसी, एससी और एसटी का जिक्र किया, लेकिन ईडब्ल्यूएस को क्यों छोड़ दिया? क्या यह जानबूझकर किया गया है?" वहीं, कुछ ने इसे निजी विश्वविद्यालयों पर अनुचित दबाव बताया। एक अन्य पोस्ट में कहा गया, "अस्थायी नौकरियां भी जाति से विभाजित? योग्यता मौसमी नहीं होनी चाहिए।" दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि यह मौजूदा डीओपीटी दिशानिर्देशों का सख्त प्रवर्तन मात्र है, न कि कोई नई नीति।</p>
<p> </p>
<p>शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह निर्देश सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा, जिसमें डीम्ड विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इससे पहले, 2018 के डीओपीटी ज्ञापन ने स्पष्ट किया था कि 45 दिनों से अधिक की अस्थायी नियुक्तियां आरक्षण के दायरे में आएंगी। यूजीसी ने इसकी निगरानी के लिए पोर्टल शुरू किया है, जो अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद करेगा।</p>
<p> </p>
<p>यह विकास ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में आरक्षण को लेकर बहस तेज है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे हजारों अस्थायी पदों पर प्रभाव पड़ेगा, जो मुख्य रूप से गेस्ट लेक्चरर, रिसर्च असिस्टेंट और प्रशासनिक भूमिकाओं में हैं। सरकार का लक्ष्य सामाजिक समावेश को मजबूत करना है, लेकिन आलोचक इसे नौकरशाही बढ़ावा मानते हैं। आने वाले दिनों में संस्थानों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:39:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[सचिन बाजपेई]]></dc:creator>
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