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                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>इलाहाबाद हाईकोर्ट RSS Feed</description>
                
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                <title>हाईकोर्ट की सख्ती बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविंद नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क में अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। माननीय न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकलपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया माना कि 22 अप्रैल 2026 को पारित आदेश की अवहेलना का मामला बनता है। हालांकि, न्यायालय ने इस स्तर पर नोटिस जारी किए बिना संबंधित अधिकारियों को एक माह का अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि पूर्व आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आदेश के अनुपालन की सूचना याची को भी उपलब्ध कराने को कहा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184391/high-courts-strictness-remains-intact"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002152235.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविंद नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क में अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। माननीय न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकलपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया माना कि 22 अप्रैल 2026 को पारित आदेश की अवहेलना का मामला बनता है। हालांकि, न्यायालय ने इस स्तर पर नोटिस जारी किए बिना संबंधित अधिकारियों को एक माह का अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि पूर्व आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आदेश के अनुपालन की सूचना याची को भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। यदि आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो याची को पुनः न्यायालय आकर अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता दी गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौरतलब है कि जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि नगर निगम एवं कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के अभिलेखों में ब्लॉक-8 पार्क/खेल मैदान के रूप में दर्ज सार्वजनिक भूमि का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त एवं केडीए उपाध्यक्ष को निर्देश दिया था कि पार्क को अतिक्रमणमुक्त कर उसका मूल स्वरूप बहाल किया जाए तथा भविष्य में उसका उपयोग केवल पार्क एवं खेल मैदान के रूप में ही सुनिश्चित किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अवमानना याचिका में कहा गया है कि 29 अप्रैल 2026 को न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई थी, लेकिन तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके विपरीत पार्क का मूल स्वरूप बहाल करने के बजाय विवादित निर्माणों को यथावत बनाए रखा गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम ने कथित विकास कार्यों के नाम पर पार्क में पहले से मौजूद अवैध निर्माणों की अनदेखी करते हुए तथा अवैध कब्जेदारों से मिलीभगत कर नगर निगम के पार्क के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से पर नियमों के विपरीत इंटरलॉकिंग बिछा दी। इससे पार्क का हरित क्षेत्र और मूल स्वरूप गंभीर रूप से प्रभावित हुआ तथा वर्षों पुराना हरा-भरा सार्वजनिक पार्क कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो गया। आरोप है कि यह कार्य न केवल सार्वजनिक पार्क के उद्देश्य के विपरीत है, बल्कि माननीय हाईकोर्ट के आदेश की भावना के भी प्रतिकूल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">याची प्रकाश वीर आर्य ने गंभीर आरोप लगाया कि माननीय हाईकोर्ट की आंखों में धूल झोंकने के उद्देश्य से 22 अप्रैल 2026 के आदेश के बाद नगर निगम ने रातोंरात पार्क के भीतर लगे तथाकथित विकास कार्यों के मूल शिलापट्ट को, जिस पर "ब्लॉक-8 पार्क" अंकित था, हटाकर उसकी जगह "बालाजी पार्क" नाम का नया शिलापट्ट स्थापित कर दिया। उनका कहना है कि यह परिवर्तन न्यायालय के समक्ष वास्तविक स्थिति को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया गया। उन्होंने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत नगर निगम के उद्यान अधीक्षक द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक सूचना में भी संबंधित स्थल का नाम "ब्लॉक-8 पार्क" ही दर्ज है। ऐसे में अभिलेखों के विपरीत नया शिलापट्ट लगाए जाने से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ब्लॉक-8 निवासी जे.पी. दुबे, एडवोकेट ने कहा कि यह मामला केवल एक पार्क का नहीं, बल्कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की गरिमा, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा तथा कानून के शासन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अभिलेखों के विपरीत शिलापट्ट बदला गया तथा अवैध निर्माणों को संरक्षण देते हुए पार्क के अधिकांश हिस्से को कंक्रीट में बदल दिया गया, तो पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी बीच केस्को की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। केस्को की जांच आख्या में उल्लेख किया गया है कि विवादित परिसर को क्षेत्रीय पार्षद द्वारा दिए गए एनओसी एवं अन्य प्रपत्रों के आधार पर नया विद्युत संयोजन स्वीकृत किया गया। केस्को यह स्पष्ट नहीं कर सका कि किस कानून, नियम या शासनादेश के तहत किसी नगर निगम पार्षद को सार्वजनिक पार्क की भूमि पर बने निर्माण के लिए एनओसी जारी करने का अधिकार प्राप्त है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि सार्वजनिक पार्क के रूप में दर्ज भूमि और हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद सक्षम प्राधिकारी से सत्यापन किए बिना विद्युत संयोजन प्रदान करना नियमों के विपरीत है। अब पूरे शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एक माह की अवधि में संबंधित अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हैं या नहीं। यदि निर्धारित अवधि में आदेश का अनुपालन नहीं हुआ, तो मामला पुनः हाईकोर्ट पहुंचेगा और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 21:52:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> उच्च न्यायालय का बड़ा आदेश: पुलिस एसआई भर्ती में विवादित ऊंचाई मापी जाएगी, वीडियोग्राफी अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>सचिन बाजपेई </strong><br /><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर सिविल पुलिस भर्ती 2025 में ऊंचाई मापने को लेकर उठे विवाद में याचिकाकर्ता   शुभम शर्मा को महत्वपूर्ण राहत देते हुए उनकी ऊंचाई दोबारा मापने का आदेश दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकलपीठ ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता शुभम शर्मा की ऊंचाई 6 जुलाई 2026 को सुबह 11:30 बजे लखनऊ स्थित रिजर्व पुलिस लाइंस में विशेषज्ञों की पैनल द्वारा दोबारा मापी जाए। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य रूप से की जाएगी और रिपोर्ट अदालत में 16 जुलाई 2026 को पेश की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182684/big-order-of-high-court-controversial-height-measurement-in-police"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/high-court-lucknow.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>सचिन बाजपेई </strong><br /><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर सिविल पुलिस भर्ती 2025 में ऊंचाई मापने को लेकर उठे विवाद में याचिकाकर्ता   शुभम शर्मा को महत्वपूर्ण राहत देते हुए उनकी ऊंचाई दोबारा मापने का आदेश दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकलपीठ ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता शुभम शर्मा की ऊंचाई 6 जुलाई 2026 को सुबह 11:30 बजे लखनऊ स्थित रिजर्व पुलिस लाइंस में विशेषज्ञों की पैनल द्वारा दोबारा मापी जाए। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य रूप से की जाएगी और रिपोर्ट अदालत में 16 जुलाई 2026 को पेश की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में शुभम शर्मा ने आरोप लगाया था कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण में उनकी ऊंचाई गलत तरीके से 167.0 सेमी और 167.1 सेमी मापी गई, जबकि आगरा जिला अस्पताल के मेडिकल अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र में उनकी ऊंचाई 168.2 सेमी बताई गई है। याचिकाकर्ता ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन दोबारा मापने पर भी वही ऊंचाई दर्ज की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने याचिकाकर्ता के आगरा जिला अस्पताल के प्रमाण-पत्र को गंभीरता से लिया और मामले में हस्तक्षेप किया। राज्य की ओर से अतिरिक्त मुख्य स्थायी वकील ने तर्क दिया कि ऊंचाई मापने की उचित प्रक्रिया है और आपत्ति पर दोबारा माप लिया गया था, इसलिए अदालती हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता सुभाष चन्द्र यादव  ने याची की तरफ से पूरा मामला कोर्ट को बताया जिसपर कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर विचार योग्य पाया और ऊंचाई मापने की नई प्रक्रिया शुरू करने का आदेश पारित किया। अधिवक्ता सुभाष चन्द्र यादव के पक्ष में यह आदेश  भर्ती प्रक्रिया के लिए प्रेरणा दायक बन सकता है l </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह आदेश उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो भर्ती परीक्षा में ऊंचाई मापने को लेकर विवाद में फंस जाते हैं। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:46:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मदरसों की ATS जांच पर रोक से इनकार, टीचर्स एसोसिएशन की याचिका खारिज।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div>  </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसों की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा की जा रही जांच के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ATS की जांच पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।</div>
<div>  </div>
<div>याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदेश के विभिन्न मदरसों में ATS द्वारा की जा रही जांच से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182665/big-decision-of-allahabad-high-court-refusal-to-ban-ats"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/ald.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div> </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसों की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा की जा रही जांच के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ATS की जांच पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।</div>
<div> </div>
<div>याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदेश के विभिन्न मदरसों में ATS द्वारा की जा रही जांच से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई थी। हालांकि, डिवीजन बेंच ने मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए याचिका को ही खारिज कर दिया।</div>
<div> </div>
<div>अदालत के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में मदरसों को लेकर ATS की ओर से चल रही जांच पर फिलहाल कोई न्यायिक रोक नहीं रहेगी और जांच एजेंसी अपनी कार्रवाई जारी रख सकेगी।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 21:41:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजू पाल हत्याकांड: आरोपी आबिद प्रधान को जमानत मिलने पर बढ़ा विवाद, पूजा पाल जाएंगी सुप्रीम कोर्ट।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> बहुचर्चित राजू पाल हत्याकांड में आरोपी आबिद प्रधान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विधायक पूजा पाल ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया तथा मामले से जुड़े गंभीर पहलुओं को छिपाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पूजा पाल ने कहा कि उनके पति राजू पाल की हत्या का मामला वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन है और वह न्याय की</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181386/controversy-increases-over-raju-pal-murder-accused-abid-pradhan-getting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0079.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> बहुचर्चित राजू पाल हत्याकांड में आरोपी आबिद प्रधान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विधायक पूजा पाल ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया तथा मामले से जुड़े गंभीर पहलुओं को छिपाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूजा पाल ने कहा कि उनके पति राजू पाल की हत्या का मामला वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन है और वह न्याय की इस लड़ाई को अंत तक लड़ती रहेंगी। उन्होंने कहा कि आरोपी को जमानत मिलने से पीड़ित पक्ष और गवाहों में चिंता का माहौल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोपी पर धमकी भरा वीडियो जारी करने का आरोप</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूजा पाल ने आरोप लगाया कि जमानत मिलने के बाद आरोपी आबिद प्रधान की ओर से एक धमकी भरा वीडियो जारी किया गया है, जिससे उनके परिवार और मामले के गवाहों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि इस वीडियो की जांच कराई जानी चाहिए और यदि इसमें कोई आपत्तिजनक या भय पैदा करने वाली सामग्री पाई जाती है तो आरोपी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुरक्षा बढ़ाने की मांग</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विधायक ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से अपनी तथा मामले के प्रमुख गवाहों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि राजू पाल हत्याकांड जैसे संवेदनशील और चर्चित मामले में गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की तैयारी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूजा पाल ने स्पष्ट किया कि वह अपने अधिवक्ताओं के साथ परामर्श कर हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी। उनका कहना है कि न्यायालय के समक्ष सभी तथ्यों को रखते हुए जमानत निरस्त कराने का प्रयास किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फिर चर्चा में आया राजू पाल हत्याकांड</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आबिद प्रधान को जमानत मिलने के बाद एक बार फिर राजू पाल हत्याकांड चर्चा के केंद्र में आ गया है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों के बीच इस फैसले को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। वहीं पीड़ित पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा के बाद मामले की अगली कानूनी लड़ाई पर सभी की नजरें टिक गई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूजा पाल ने कहा, “मैं अपने पति राजू पाल के हत्याकांड में न्याय की लड़ाई लगातार लड़ती रहूंगी। न्याय मिलने तक मेरा संघर्ष जारी रहेगा।”</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181386/controversy-increases-over-raju-pal-murder-accused-abid-pradhan-getting</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:49:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार दीवारों के भीतर, सार्वजनिक शांति में कोई खलल नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1980 (एनएसए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-</span>II <span lang="hi" xml:lang="hi">की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें केवल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180333/no-disturbance-of-public-peace-within-the-four-walls"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/allahabad-high-court1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1980 (एनएसए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-</span>II <span lang="hi" xml:lang="hi">की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें केवल एक गाय की हत्या शामिल थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके कारण न तो कोई हिंसा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में कोई खलल पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">उपर्युक्त चर्चा के आलोक में यह अकाट्य निष्कर्ष निकलता है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एनएसए</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश न तो कानून की दृष्टि से और न ही तथ्यों के आधार पर कायम रखा जा सकता है। अतः</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह आदेश इस न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने योग्य है।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत जारी करने वाले प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शामली) ने मूल रूप से एनएसए की धारा 3(2) के तहत विवादित हिरासत आदेश जारी किया। यह आदेश याचिकाकर्ताओं के खिलाफ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">यूपी गोहत्या निवारण अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1955</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 3</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">5</span>A <span lang="hi" xml:lang="hi">और 8 के तहत दर्ज </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एफआईआर </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के आधार पर जारी किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत के कारणों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस को 23 अप्रैल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 को शिकायतकर्ता से सूचना मिली थी कि कुछ लोग गोहत्या कर रहे हैं। घर के भीतर तलाशी लेने पर पुलिस को एक कटा हुआ सिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खाल और मांस बरामद हुआ। पशु चिकित्सक द्वारा किए गए वैज्ञानिक परीक्षण के बाद बरामद मांस की पहचान </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बीफ</span>' (<span lang="hi" xml:lang="hi">गोमांस) के रूप में हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शेष सामग्री की पहचान गाय की संतान (बछड़े/बछिया) के अवशेषों के रूप में की गई। जहां आरोपी हासिम को अगले ही दिन (24 अप्रैल) गिरफ्तार कर लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं आरोपी समीर को 27 जून को ही गिरफ्तार किया जा सका।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आगे भेजी गई रिपोर्ट मिलने पर ज़िला मजिस्ट्रेट ने 7 जुलाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 को हिरासत के आदेश जारी किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं को 12 महीने की अवधि के लिए हिरासत में रखा जाए। राज्य सरकार ने आखिरकार 19 अगस्त को इस आदेश की पुष्टि की। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">   </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील गौतम बघेल ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं का कथित कृत्य उनके घर की सीमाओं के बाहर नहीं हुआ। इसलिए यह निजी तौर पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों की नज़र से दूर किया गया। यह भी कहा गया कि प्रतिवादियों द्वारा दायर जवाबी हलफनामे में ऐसा कोई दावा नहीं था कि याचिकाकर्ता के कृत्य के कारण कोई सांप्रदायिक हिंसा हुई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक शांति भंग हुई हो या किसी व्यक्ति को चोट लगी हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपरोक्त के परिणामस्वरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न तो कोई हिंसा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में कोई बाधा आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही सांप्रदायिक सौहार्द में कोई खलल पड़ा।" इसलिए इस निष्कर्ष पर पहुंचते हुए कि हिरासत का आदेश न तो कानून की नज़र में और न ही तथ्यों के आधार पर सही ठहराया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंच ने हिरासत के आदेश को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए पुष्टि आदेश को भी रद्द कर दिया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:21:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संगमरमर मस्जिद मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई, 6 जुलाई तक ध्वस्तीकरण पर रोक बरकरार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बइलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को प्रयागराज जंक्शन सिटी साइड स्थित संगमरमर मस्जिद को लेकर दाखिल याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मस्जिद कमेटी की ओर से ध्वस्तीकरण कार्रवाई को चुनौती देते हुए कोर्ट में अपना पक्ष रखा गया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अगली तारीख 6 जुलाई निर्धारित करते हुए तब तक ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर अंतरिम रोक जारी रखने का आदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि यदि रेलवे परियोजना के तहत मस्जिद को हटाना आवश्यक है, तो प्रशासन पहले मस्जिद के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराए। साथ</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179331/the-ban-on-demolition-remains-in-place-till-july-6"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260515-wa0110.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बइलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को प्रयागराज जंक्शन सिटी साइड स्थित संगमरमर मस्जिद को लेकर दाखिल याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मस्जिद कमेटी की ओर से ध्वस्तीकरण कार्रवाई को चुनौती देते हुए कोर्ट में अपना पक्ष रखा गया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अगली तारीख 6 जुलाई निर्धारित करते हुए तब तक ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर अंतरिम रोक जारी रखने का आदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि यदि रेलवे परियोजना के तहत मस्जिद को हटाना आवश्यक है, तो प्रशासन पहले मस्जिद के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराए। साथ ही यह भी मांग की गई कि मस्जिद हटाए जाने की स्थिति में क्षतिपूर्ति के रूप में दूसरी उपयुक्त जमीन दी जाए, ताकि धार्मिक स्थल को दूसरी जगह स्थापित किया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि संगमरमर मस्जिद लंबे समय से इलाके में मौजूद है और स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रही है। उनका कहना था कि बिना उचित पुनर्वास व्यवस्था के ध्वस्तीकरण कार्रवाई करना न्यायोचित नहीं होगा। वहीं प्रशासन और रेलवे से जुड़े पक्षों ने परियोजना की आवश्यकता और विकास कार्यों का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौरतलब है कि प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड क्षेत्र में रेलवे परियोजना और यातायात विस्तार कार्यों को लेकर कई निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इन्हीं के बीच संगमरमर मस्जिद का मामला भी विवाद का विषय बना हुआ है। मस्जिद को हटाने की संभावित कार्रवाई के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदालत के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल मस्जिद पर किसी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी। अब सभी पक्षों की नजर 6 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां मामले में आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है। </div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179331/the-ban-on-demolition-remains-in-place-till-july-6</link>
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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 17:43:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> स्व गणना अभियान में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश, सहित  कई न्याय मूर्तियों ने स्व-गणना की और सभी को स्व-गणन के लिए प्रेरित किया ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>स्व गणना अभियान में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह, न्यायमूर्ति एम.सी. त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन द्वारा स्व-गणना की गई एवं इसी दौरान सभी को स्व-गणना करने के लिए प्रेरित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी, जिलाधिकारी / प्रमुख जनगणना अधिकारी प्रयागराज, नगर आयुक्त / अपर प्रमुख जनगणना अधिकारी प्रयागराज, अपर नगर आयुक्त / नगर जनगणना अधिकारी तथा अपर जिलाधिकारी (एफ/आर) / जिला जनगणना अधिकारी प्रयागराज  की उपस्थिति रही एवं आभार व्यक्त किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही सभी प्रदेशवासियों से अपील की गई कि</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179093/under-the-self-enumeration-campaign--the-chief-justice-and-several-justices-of-the-allahabad-high-court-completed-their-self-enumeration-and-encouraged-everyone-to-do-the-same"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260511-wa0105.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>स्व गणना अभियान में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह, न्यायमूर्ति एम.सी. त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन द्वारा स्व-गणना की गई एवं इसी दौरान सभी को स्व-गणना करने के लिए प्रेरित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी, जिलाधिकारी / प्रमुख जनगणना अधिकारी प्रयागराज, नगर आयुक्त / अपर प्रमुख जनगणना अधिकारी प्रयागराज, अपर नगर आयुक्त / नगर जनगणना अधिकारी तथा अपर जिलाधिकारी (एफ/आर) / जिला जनगणना अधिकारी प्रयागराज  की उपस्थिति रही एवं आभार व्यक्त किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही सभी प्रदेशवासियों से अपील की गई कि वे स्व-गणना पोर्टल पर जाकर स्व-गणना कर सकते हैं तथा स्व-गणना उपरांत प्राप्त SEID को सुरक्षित रखें एवं प्रगणक के घर आने पर उनसे साझा करें।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179093/under-the-self-enumeration-campaign--the-chief-justice-and-several-justices-of-the-allahabad-high-court-completed-their-self-enumeration-and-encouraged-everyone-to-do-the-same</link>
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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:54:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोविंद नगरके ब्लॉक-8 पार्क पर कब्जे की कोशिश के खिलाफ डीएम से कार्यवाही मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर स्थित ब्लॉक-8 के सार्वजनिक पार्क पर कथित अवैध कब्जों और निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश वीर आर्य ने जिलाधिकारी कानपुर को शिकायती पत्र देकर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पार्क में हो रहे नए निर्माण एवं मूर्ति स्थापना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के चलते पार्क के लगभग 70% हिस्से पर कब्जा हो चुका है तथा वहां अवैध निर्माण एवं धार्मिक संरचनाएं खड़ी कर दी गई हैं। कई बार IGRS</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178854/demand-for-action-from-dm-against-attempt-to-capture-block-8"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001895508.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर स्थित ब्लॉक-8 के सार्वजनिक पार्क पर कथित अवैध कब्जों और निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश वीर आर्य ने जिलाधिकारी कानपुर को शिकायती पत्र देकर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पार्क में हो रहे नए निर्माण एवं मूर्ति स्थापना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के चलते पार्क के लगभग 70% हिस्से पर कब्जा हो चुका है तथा वहां अवैध निर्माण एवं धार्मिक संरचनाएं खड़ी कर दी गई हैं। कई बार IGRS पर शिकायतें किए जाने के बावजूद नगर निगम द्वारा “पुराना निर्माण” बताकर फर्जी निस्तारण किया जाता रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> प्रकाश वीर आर्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 22 अप्रैल 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय ने स्वयं पार्क भूमि पर हुए निर्माण पर गंभीर टिप्पणी की थी तथा समस्त अतिक्रमण हटाकर पार्क को मूल स्वरूप में बहाल करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद वर्तमान में फिर से निर्माण और मूर्ति स्थापना कर कब्जा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जो न्यायालय की अवमानना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में मांग की गई है कि पार्क से सभी अवैध कब्जे हटाए जाएं, नगर निगम द्वारा कराई गई इंटरलॉकिंग हटाकर पार्क को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए तथा दोषी अधिकारियों और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:16:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- वकीलों के कब्जे हटाने के लिए दें पर्याप्त पुलिस फोर्स </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कैसरबाग स्थित जनपद न्यायालय के आसपास वकीलों की ओर से किए गए कब्जों पर सख्त रुख जारी रखा है। कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि इन कब्जों को हटाने के लिए नगर निगम को पर्याप्त पुलिस फोर्स उपलब्ध कराए। मामले में 25 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह आदेश अनुराधा सिंह और दो अन्य की याचिका पर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मामले में नगर निगम की ओर से दाखिल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178827/high-courts-big-decision-provide-adequate-police-force-to-remove"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/image-2026-05-08t120542.964.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कैसरबाग स्थित जनपद न्यायालय के आसपास वकीलों की ओर से किए गए कब्जों पर सख्त रुख जारी रखा है। कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि इन कब्जों को हटाने के लिए नगर निगम को पर्याप्त पुलिस फोर्स उपलब्ध कराए। मामले में 25 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह आदेश अनुराधा सिंह और दो अन्य की याचिका पर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले में नगर निगम की ओर से दाखिल रिपोर्ट के अनुसार संबंधित क्षेत्र में 72 अतिक्रमण पाए गए हैं। इनमें ज्यादातर अधिवक्ताओं के चैंबर और अवैध दुकानें हैं। इससे पहले कोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिया था कि इन कब्जों को हटाने के लिए जो भी आवश्यक कदम उठाए गए हैं, उन्हें तार्किक अंत तक पहुंचाया जाए। यह भी कहा था कि इसके लिए पुलिस बल की जरूरत हो तो नगर निगम को तत्काल उपलब्ध कराया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बुधवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने डीसीपी (मुख्यालय) और डीसीपी ( पश्चिम) समेत लखनऊ के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिमी) के पत्र पेश किए। इनमें वे कारण बताए गए थे, जिनकी वजह से अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम के अफसरों को पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया जा सका।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नगर निगम की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए 12 मई की नई तारीख तय करने की जानकारी कोर्ट को दी गई। इस पर अदालत ने कहा कि इन पत्रों से स्पष्ट है कि कुछ अपरिहार्य वजहों से 25 अप्रैल को पुलिस बल मुहैया नहीं कराया जा सका, लेकिन अगली तय तिथि पर अवैध निर्माण, अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम को समुचित पुलिस बल मुहैया कराया जाएगा। अदालत ने इसके लिए जरूरी कदम उठाने और कार्रवाई से अवगत कराने के लिए 15 दिन का समय दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले में अदालत ने पहले कहा था कि जनपद न्यायालय, पुराना हाईकोर्ट परिसर, कलेक्ट्रेट, राजस्व परिषद, पुराना सदर तहसील परिसर, उप-निबंधक कार्यालय, मंडलायुक्त कार्यालय, रेजिडेंसी पावर सब स्टेशन, बलरामपुर अस्पताल, कैसरबाग बस अड्डा व टेढ़ी कोठी के आसपास रहने वाले लोग वकीलों के कब्जों से बुरी तरह त्रस्त हैं। न्यायालय ने संज्ञान में लाई गई घटना का भी जिक्र किया था, जिसमें इस इलाके में अतिक्रमण के कारण एंबुलेंस नहीं निकल सकी थी। इस कारण एंबुलेंस में मौजूद मरीज की मौत हो गई थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 22:17:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'प्रयागराज में समानांतर मेडिकल इंडस्ट्री चला रहे हैं सरकारी डाॅक्टर'- इलाहाबाद हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले मोतीलाल नेहरू (एमएलएन) मेडिकल काॅलेज प्रयागराज के डाॅक्टरों की उच्च स्तरीय जांच करा कर कार्रवाई करने का निर्देश मुख्य सचिव को दिया है। साथ ही कहा है कि मुख्य सचिव स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में फंड की उपलब्धता के बावजूद पिछले 20 साल से निर्माणाधीन कार्डियोलॉजी भवन की मानीटरिंग करें।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने टिप्पणी की कि स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल की हालत फंड व सुविधाओं की कमी के कारण नहीं बल्कि प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व लेक्चररों के अस्पताल में मरीजों का इलाज करने के बजाय प्राइवेट अस्पतालों में करने के कारण खराब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178553/government-doctors-are-running-parallel-medical-industry-in-prayagraj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/399626--.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले मोतीलाल नेहरू (एमएलएन) मेडिकल काॅलेज प्रयागराज के डाॅक्टरों की उच्च स्तरीय जांच करा कर कार्रवाई करने का निर्देश मुख्य सचिव को दिया है। साथ ही कहा है कि मुख्य सचिव स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में फंड की उपलब्धता के बावजूद पिछले 20 साल से निर्माणाधीन कार्डियोलॉजी भवन की मानीटरिंग करें।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने टिप्पणी की कि स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल की हालत फंड व सुविधाओं की कमी के कारण नहीं बल्कि प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व लेक्चररों के अस्पताल में मरीजों का इलाज करने के बजाय प्राइवेट अस्पतालों में करने के कारण खराब है। ये सरकारी डाक्टर प्रयागराज में समानांतर मेडिकल इंडस्ट्री चला रहे हैं। प्राइवेट नर्सिंग होम में ले जाकर मरीजों की सर्जरी करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 26 मई नियत करते हुए कोर्ट ने मुख्य सचिव से कृत कार्रवाई की जानकारी मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल काॅलेज के डाॅक्टर अरविंद गुप्ता की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। इनके खिलाफ प्राइवेट प्रैक्टिस में लापरवाही बरतने को लेकर उपभोक्ता फोरम ने कार्यवाही की थी, जिसे याचिका में चुनौती दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता से कहा है कि अस्पताल के पक्ष में जमीन स्थानांतरित करने संबंधी कैबिनेट के अनुमोदन की जानकारी दें। अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता सुरेश सिंह ने कोर्ट को बताया कि स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के लिए 31,314 वर्गमीटर जमीन स्थानांतरित करने के लिए सभी विभागों से अनापत्ति प्राप्त हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राचार्य डा विनोद कुमार पांडेय ने ब्वायज व गर्ल्स हास्टल के बारे में बताया कि भवन जर्जर है। खाली करने की नोटिस दी गई है। भवन ध्वस्त कर पुनर्निर्माण कराया जायेगा।कोर्ट ने आश्चर्य प्रकट किया कि दो मंजिला कार्डियोलॉजी भवन का निर्माण 2006 मे शुरू हुआ राजकीय निर्माण निगम निर्माण कर रहा। सरकार ने फंड मुहैया कराया है। अभी भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका। इसपर बताया गया कि अगस्त 26 मे तैयार होकर क्रियाशील हो जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट को बताया गया कि प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले एसोसिएट प्रोफेसर डा संतोष कुमार सिंह व उनकी पत्नी डा एलाक्षी शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जो एक्यूला हास्पिटल की डायरेक्टर हैं। जहां पर डा संतोष कुमार सिंह मरीज लेजाकर सर्जरी करते हैं। जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:17:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'फॉर्च्युनर के लिए महिला की जान ले ली और  आरोपी पति को जमानत दे दी'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>दहेज के लिए पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराध के आरोपी पति को जमानत देते वक्त हाईकोर्ट ने तथ्यों को पर गौर नहीं किया और सिर्फ इस आधार पर जमानत दे दी कि एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई.</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस बात पर भी चिंता जताई कि पिछले कुछ सालों में दहेज की वजह से शादीशुदा महिलाओं के साथ क्रूरता, हत्या और आत्महत्या जैसे मामलों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178549/woman-killed-for-fortuner-and-accused-husband-granted-bail"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images245.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>दहेज के लिए पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराध के आरोपी पति को जमानत देते वक्त हाईकोर्ट ने तथ्यों को पर गौर नहीं किया और सिर्फ इस आधार पर जमानत दे दी कि एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई.</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस बात पर भी चिंता जताई कि पिछले कुछ सालों में दहेज की वजह से शादीशुदा महिलाओं के साथ क्रूरता, हत्या और आत्महत्या जैसे मामलों में बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि खासतौर पर ऐसे मामले उत्तर प्रदेश में देखे गए हैं. कोर्ट ने कहा कि 2023 के डेटा के अनुसार दुनियाभर में 6,156 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 2,122 उत्तर प्रदेश और 1,143 बिहार के हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, 'हमें यह देखकर अत्यंत दुख हुआ कि हाईकोर्ट ने दहेज हत्या जैसे संगीन अपराध में आरोपी को जमानत देते वक्त तथ्यों पर गौर नहीं किया. हमारा मानना है कि कोर्ट ने अभियुक्तों के पक्ष में अपने विवेक का प्रयोग करने में घोर त्रुटि की है.' कोर्ट ने कहा कि यह मामला महिलाओं के साथ दहेज को लेकर बढ़ती क्रूरता को दर्शाता है.</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला साल 2024 का है, जब दहेज के लिए गाजियाबाद में एक महिला की हत्या कर दी गई थी. महिला की शादी फरवरी, 2019 में प्रिंस चौधरी नाम के शख्स से हुई थी. महिला के पिता ने एफआईआर में बताया कि उन्होंने शादी में 30 लाख रुपये खर्च किए, जिसमें एक आई20 कार और 10 लाख रुपये कैश शामिल हैं. कार एक एक्सीडेंट में डैमेज हो गई थी, जिसके बाद महिला का पति और ससुराल वाले एक फॉर्च्युनर कार और 10 लाख रुपये की डिमांड करने लगे.</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार जब ये मांग पूरी नहीं हुईं तो ससुरालवालों ने महिला का मारना शुरू कर दिया, उसको मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया. बाद में महिला के पिता ने 10 लाख रुपये की डिमांड पूरी कर दी. उन्होंने पति के रिश्तेदार के अकाउंट में 4 लाख रुपये ट्रांसफर किए और अलग-अलग मौकों पर 5 लाख रुपये कैश भी दिया. फिर भी ससुराल वाले महिला के साथ मारपीट करते रहे.</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार 11 जुलाई, 2024 को सुबह 7 बजे महिला ने रोते हुए पिता को फोन किया और बताया कि ससुराल में उसके साथ बहुत मारपीट हुई और उसको गला घोंटकर या फांसी लगाकर मारने की धमकी दी जा रही है. कुछ घंटे बाद महिला के घरवालों को एक रिश्तेदार ने फोन करके बताया कि उसको गला घोंटकर फांसी लगा दी गई है. जब महिला के पिता ससुराल पहुंचे तो वह वहां नहीं थी, उसको हॉस्पिटल ले जाया गया था, जहां पता चला कि वह मर चुकी है.</p>
<p style="text-align:justify;">हादसे के अगले ही दिन शिकायत दर्ज कर दी गई, जिसमें प्रिंस सहित 8 घरवालों को आरोपी बनाया गया. जांच के बाद प्रिंस और उसके माता पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और दहेज निषेध अधिनयम के तहत चार्जशीट दाखिल हुई.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:12:48 +0530</pubDate>
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                <title>तत्कालीन BJP MLA आरसी यादव के खिलाफ 2012 के दंगा मामले को वापस लेने की हाईकोर्ट ने दी अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज किया गया था, जिसमें 2012 की मूर्ति विसर्जन दंगा घटना के संबंध में BJP विधायक (रुदौली से) राम चंद्र यादव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा वापस लेने की मांग की गई थी। मुकदमा वापस लेने के राज्य का अनुरोध स्वीकार करते हुए जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का आवेदन "रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद सद्भावना में" दायर किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आदेश विधायक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178543/high-court-gives-permission-to-withdraw-2012-riots-case-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज किया गया था, जिसमें 2012 की मूर्ति विसर्जन दंगा घटना के संबंध में BJP विधायक (रुदौली से) राम चंद्र यादव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा वापस लेने की मांग की गई थी। मुकदमा वापस लेने के राज्य का अनुरोध स्वीकार करते हुए जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का आवेदन "रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद सद्भावना में" दायर किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आदेश विधायक यादव द्वारा दायर CrPC की धारा 482 के तहत याचिका और उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया। संक्षेप में मामला अभियोजन पक्ष के मूल मामले के अनुसार, 24 अक्टूबर, 2012 को मूर्तियां विसर्जन के लिए ले जा रहे कुछ ट्रैक्टरों के कारण रुदौली पुलिस स्टेशन के सामने ट्रैफिक जाम हो गया। हालांकि, पुलिस ने ड्राइवरों को आगे बढ़ने का निर्देश दिया, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह दावा किया गया कि आवेदक उस समय स्थानीय विधायक थे। उन्होंने उन्हें निर्देश दिया था कि वे मूर्तियों को वहीं रोककर रखें, जब तक कि वह पुलिस स्टेशन के सामने न पहुंच जाएं। इसके कारण, घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। इसके बाद जब विधायक यादव घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने पुलिस को बताया कि जब श्रद्धालु एक मस्जिद के पास से गुजर रहे थे, तो दूसरे समुदाय का एक लड़का गलती से रंग से सराबोर हो गया। कथित तौर पर इसके कारण गाली-गलौज और झगड़ा हुआ, जिसके दौरान एक मूर्ति भी टूट गई।</p>
<p style="text-align:justify;">एफआईआर  में आरोप लगाया गया कि आवेदक ने भड़काऊ बयान दिए। यह मांग की कि जुलूस आगे बढ़ने से पहले दोषियों को दंडित किया जाए। हालांकि, बाद में उनकी सलाह पर ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू हो गई, लेकिन तब तक गाँव में लगभग 2,000 से 3,000 लोग जमा हो चुके थे। इसके बाद आवेदक की कथित उकसाहट पर 250-300 लोग उस गाँव की ओर बढ़ने लगे, जहां दूसरे समुदाय के लोगों के साथ विवाद हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में, बेंच ने CrPC की धारा 321 के प्रावधानों के साथ-साथ इस प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों की जांच करते हुए पाया कि मुकदमा वापस लेने की अनुमति देने के लिए अंतिम मार्गदर्शक विचार हमेशा न्याय प्रशासन का हित ही होना चाहिए। बंसी लाल बनाम चंदन लाल और शिवनंदन पासवान बनाम बिहार राज्य जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को स्वतंत्र रूप से अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए और किसी गलत मकसद से न्याय की सामान्य प्रक्रिया में दखल नहीं देना चाहिए। CrPC की धारा 482 के तहत अर्जी, मुकदमा वापस लेने की अर्जी, और साथ ही आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:04:00 +0530</pubDate>
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