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                <title>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस RSS Feed</description>
                
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                <title>AI मॉडल—फायदे और दुरुपयोग के बीच संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से दुनिया को बदल रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, सुरक्षा और मनोरंजन जैसे लगभग हर क्षेत्र में AI मॉडल का उपयोग बढ़ता जा रहा है। यह तकनीक जहां एक ओर मानव जीवन को आसान और प्रभावी बना रही है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। सबसे पहले अगर इसके फायदों की बात करें, तो AI ने काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। हेल्थ सेक्टर में AI की मदद से बीमारियों का जल्दी और सटीक निदान संभव हो रहा है।</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177041/ai-models%E2%80%94balancing-between-benefits-and-abuses"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1760091416405.png" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से दुनिया को बदल रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, सुरक्षा और मनोरंजन जैसे लगभग हर क्षेत्र में AI मॉडल का उपयोग बढ़ता जा रहा है। यह तकनीक जहां एक ओर मानव जीवन को आसान और प्रभावी बना रही है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। सबसे पहले अगर इसके फायदों की बात करें, तो AI ने काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। हेल्थ सेक्टर में AI की मदद से बीमारियों का जल्दी और सटीक निदान संभव हो रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा के क्षेत्र में यह छात्रों को पर्सनलाइज्ड लर्निंग अनुभव दे रहा है, जिससे उनकी समझ बेहतर हो रही है। बिजनेस में AI डेटा एनालिसिस के जरिए कंपनियों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है। इसके अलावा, ऑटोमेशन के कारण कई काम तेज, सस्ते और अधिक सटीक हो गए हैं।AI का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह इंसानों के जोखिम भरे कामों को कम कर सकता है। जैसे खतरनाक उद्योगों, अंतरिक्ष मिशन या आपदा प्रबंधन में AI का उपयोग मानव जीवन को सुरक्षित रखने में मदद करता है। साथ ही, चैटबॉट और वर्चुअल असिस्टेंट जैसे टूल्स ने लोगों के दैनिक जीवन को और भी सुविधाजनक बना दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन जहां फायदे हैं, वहीं AI के दुरुपयोग की संभावनाएं भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ा खतरा फेक न्यूज और डीपफेक तकनीक से है, जिसके जरिए किसी की भी आवाज या वीडियो को नकली रूप में तैयार किया जा सकता है। इससे समाज में भ्रम, अफवाह और गलत जानकारी तेजी से फैल सकती है। इसके अलावा, साइबर क्राइम में भी AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है। हैकिंग, फिशिंग और ऑनलाइन फ्रॉड जैसे मामलों में AI तकनीक का दुरुपयोग करके अपराधी और अधिक चालाक हो गए हैं। इससे आम लोगों की निजी जानकारी और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और चिंता का विषय रोजगार पर इसका प्रभाव है। ऑटोमेशन के कारण कई पारंपरिक नौकरियां खत्म हो सकती हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ने का खतरा है। हालांकि, इसके साथ नए अवसर भी पैदा होते हैं, लेकिन इसके लिए लोगों को नई स्किल्स सीखने की जरूरत होगी।AI का सही उपयोग तभी संभव है जब इसके लिए मजबूत नियम और नैतिक दिशा-निर्देश बनाए जाएं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार, कंपनियों और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि AI का उपयोग मानव कल्याण के लिए हो, न कि नुकसान के लिए। साथ ही, लोगों को भी जागरूक होना होगा ताकि वे तकनीक का सही और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकें। अंत में कहा जा सकता है कि AI एक शक्तिशाली उपकरण है, जो मानवता के लिए वरदान भी बन सकता है और अभिशाप भी। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कार्तिकेय बाजपेई</strong> </div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 18:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>साइबर धोखाधड़ी से लोगों का सम्पत्ति सुख चैन बर्बाद </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत में साइबर धोखाधड़ी का जाल तेजी से फैल रहा है, जिसमें 2022 के 10.29 लाख मामलों से बढ़कर 2024 में 22.68 लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में डिजिटल अरेस्ट, UPI फ्रॉड, और फिशिंग के माध्यम से करोड़ों की अवैध वसूली हो रही है, जिसमें 28 फरवरी 2025 तक 36.45 लाख से अधिक शिकायतों के साथ ही ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स से ₹400 करोड़ से अधिक के अपराधी लेनदेन का पता चला है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश में नये-नये और नायाब तरीकों से साईबर धोखाधड़ी के ज़रिये बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने समाज, राजनीति और प्रशासनिक धरातल पर गम्भीर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170186/peoples-property-and-peace-ruined-due-to-cyber-fraud"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/साइबर-धोखाधड़ी-से-लोगों-का-सम्पत्ति-सुख-चैन-बर्बाद.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत में साइबर धोखाधड़ी का जाल तेजी से फैल रहा है, जिसमें 2022 के 10.29 लाख मामलों से बढ़कर 2024 में 22.68 लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में डिजिटल अरेस्ट, UPI फ्रॉड, और फिशिंग के माध्यम से करोड़ों की अवैध वसूली हो रही है, जिसमें 28 फरवरी 2025 तक 36.45 लाख से अधिक शिकायतों के साथ ही ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स से ₹400 करोड़ से अधिक के अपराधी लेनदेन का पता चला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश में नये-नये और नायाब तरीकों से साईबर धोखाधड़ी के ज़रिये बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने समाज, राजनीति और प्रशासनिक धरातल पर गम्भीर चिन्ताजनक स्थिति पैदा कर दी है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि देश में पिछले पांच वर्ष में डिजिटल अपराधों के ज़रिये देश के जन-साधारण के 52,976 करोड़ रुपये साईबर अपराधियों ने लूट लिये हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग एक दशक पहले तक देश में साइबर अपराध जैसी कोई इक्का-दुक्का घटना ही घटित होती थी, किन्तु विगत पांच-सात वर्षों में देश में उपजी कथित डिजीटल क्रांति के बाद से ऐसी घटनाएं जैसे पंछी-पंख लगा कर फैलती गई हैं। वर्ष 2023 से लेकर अब तक के तीन वर्षों में 86 हज़ार से अधिक मामले दर्ज किये गये जिनमें अरबों रुपये की जन-धन राशि साईबर जालसाज़ी के माध्यम से लूट ली गई है।अपराधी खुद को सीबीआई पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर डराते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यूपीआई  फ्रॉड फिशिंग ईमेल निजी जानकारी चुराना।ऑनलाइन सट्टेबाजी और ऐप्स निवेश का लालच देकर।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से डीपफेक। साईबर अपराधी इतने शातिर होते हैं कि एक विफलता के बाद दूसरा विकल्प ढूंढ लेते हैं। साईबर अपराध जैसी एक घटना से एक बार रू-ब-रू हुई एक महिला उच्चाधिकारी के अनुसार विदेशों में भी ऐसे आपराधिक तत्व मौजूद हैं। उन्होंने एक घटना का हवाला देते हुए बताया कि कैसे टैक्सी चालक कृत्रिम मेधा यानि ए.आई. के ज़रिये शक्ल-ओ-सूरत बदल कर सवारी को अपना शिकार बनाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपनी आंखों के समक्ष घटित हुई ऐसी एक घटना का हवाला भी दिया। ऐसे अपराधों से लुटे-पिटे लोगों में से कई अपनी जीवन भर की अर्जित पूंजी तो गंवाते ही हैं, कई बार वे आत्महत्या कर लेने को भी विवश हो जाते हैं। डिजीटली अरेस्ट के ज़रिये लूटने की घटनाएं बेशक अब आम हो चुकी हैं। इनको लेकर समाचार पत्रों के माध्यम से बार-बार लोगों को जागरूक भी किया जाता है किन्तु इसके बावजूद लोग इनका शिकार बन जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अचानक धन हासिल होने अथवा अवैध कृत्यों से फोन सम्पर्क होने के आरोप लगा कर साईबर धोखाधड़ी करने के मामले भी आम हो चुके हैं। देश की राजधानी दिल्ली के बाद हरियाणा ऐसी घटनाओं के लिए जैसे बड़ी ज़रखेज़ भूमि बन कर उभरा है। हरियाणा में विगत छह वर्षों से साईबर ठगी के मामले निरन्तर बढ़ते चले गये हैं। पंजाब में भी एक समय ऐसे मामलों की बाढ़ सी आ गई प्रतीत हुई थी, किन्तु विगत दो-तीन वर्षों से प्रदेश में ऐसे मामलों की वृद्धि पर अंकुश लगा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय निवेश धोखाधड़ी सिंडिकेट के सदस्य रौनक ठक्कर को गोवा से गिरफ्तार किया है। वह दुबई से संचालित गिरोह के लिए भारत में म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराता था। राजस्थान के एक निवासी से 61.72 लाख रुपये की ठगी के बाद यह मामला सामने आया। ठग फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और शेल कंपनियों का उपयोग कर पैसे विदेश भेजते थे। इस मामले में अब तक 17 गिरफ्तारियां हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश भर में ऐसे अपराधों की निरन्तर बढ़ती संख्या को देखते हुए केन्द्र सरकार, प्रदेश सरकार और उनके प्रशासन तंत्रों की ओर से चलाये गये सुरक्षा एवं जागरूकता अभियान के दृष्टिगत आज ऐसे मामलों में अपेक्षाकृत कमी आते महसूस की गई है। पंजाब में भी प्रदेश सरकार, बैंकों, पुलिस तंत्र और प्रशासनिक इकाई की ओर से चलाये गये ज़बरदस्त सतर्कता अभियान एवं इससे उपजी जागरूकता के दृष्टिगत लोगों में समझदारी का दायरा बढ़ा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कारण जन-साधारण अब ऐसे मामलों से कन्नी कतराने लगे हैं। तथापि साईबर अपराधी 'तू डाल-डाल, मैं पात-पात' की तर्ज पर नये-नये तरीके ईजाद कर नई घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। इस हेतु उन्होंने बाकायदा नये-नये जाल बिछा रखे हैं। अपने तंत्र को बनाये रखने के लिए वे मोबाइल और सोशल मीडिया के ज़रिये बेरोज़गार और नव-शिक्षित हुए युवकों को लालच देकर अपने नेटवर्क में भर्ती करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि 2021 से 2025 के बीच साइबर ठगी के मामलों में लगातार तेज बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान साइबर अपराधियों ने लोगों के खातों से ₹55,000 करोड़ से ज्यादा की रकम निकाल ली. अकेले 2025 में ₹22,495 करोड़ की ठगी हुई और 24 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं.रिपोर्ट में बताया गया कि अकेले 2025 में ही साइबर ठगों ने ₹22,495 करोड़ की ठगी की. इसी साल 24 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. शिकायतों में हर साल बड़ा उछाल देखने को मिला.साल 2021 में 2,62,846 शिकायतें दर्ज हुईं, जो 2022 में बढ़कर 6,94,446 हो गईं. 2023 में यह संख्या 13,10,357 तक पहुंची. 2024 में 19,18,835 शिकायतें दर्ज हुईं और 2025 में यह आंकड़ा 24,02,579 हो गया.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार ठगी की रकम भी लगातार बढ़ी. 2021 में ₹551 करोड़, 2022 में ₹2,290 करोड़, 2023 में ₹7,465 करोड़, 2024 में ₹22,848 करोड़ और 2025 में ₹22,495 करोड़ की ठगी रिपोर्ट हुई. हालांकि मंत्रालय ने बताया कि I4C सिस्टम की मदद से 2025 में ₹8,189 करोड़ की रकम को साइबर फ्रॉड होने से बचाया भी गयाहालांकि सरकारी गुप्तचर एजेंसियों के तंत्र भी सक्रिय हुए हैं, और लाखों शिकायतों की त्वरित जांच के बाद 7130 करोड़ रुपये की राशि पीड़ित लोगों को लौटाई भी गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज़रा-सा संदेह होने पर बैंकों एवं प्रशासनिक तंत्र के अधिकारी स्वयं भी लोगों को सतर्क करने लगे हैं। साईबर अपराधों का तंत्र इतना व्यापक है कि गुप्तचर एजेंसियां भी कई बार आश्चर्यचकित रह जाती हैं। यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार स्वतः संज्ञान लेते हुए केन्द्र सरकार को एन.आई.ए., सी.बी.आई. और साईबर क्राइम तालमेल कमेटियों के सदस्यों पर आधारित समन्वय समितियां बनाने को भी प्रेरित किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि ऐसे अपराधों से बचने हेतु सर्वाधिक ज़िम्मेदारी स्वयं जन-साधारण पर भी आयद होती है। लोगों को ऐसे मामलों से बचने के लिए लालच में नहीं आना चाहिए, न ही भयभीत होकर आत्म-समर्पण करना चाहिए। ज़रा-सा संदेह होने पर अपने पारिवारिक सदस्यों, परिचितों, बैंक अथवा पुलिस अधिकारियों से तत्काल सम्पर्क करना चाहिए। हम समझते हैं कि थोड़े से अतिरिक्त साहस, चौकसी, सतर्कता और सूझ-बूझ के साथ ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है, अथवा इनकी तादाद को कम किया जा सकता है। मोबाइल कम्पनियों का अपना गुप्तचर सेवा तंत्र भी ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने हेतु कारगर तरीका बन सकता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 18:08:17 +0530</pubDate>
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