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                <title>शरद पवार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>शरद पवार RSS Feed</description>
                
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                <title>&quot;महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए बहुमत की तलाश में एनडीए की नई राजनीतिक चाल&quot;</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है जहां संसद के भीतर संख्या बल सबसे बड़ी ताकत बन गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से पारित कराना चाहती है। इन दोनों विषयों पर संविधान संशोधन आवश्यक है और इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए लगातार अपना संख्याबल बढ़ाने में जुटे हैं। इसी रणनीति के तहत अब महाराष्ट्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183677/ndas-new-political-move-in-search-of-majority-for-women"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/women-reservation-bil-final-1776339283956_m.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है जहां संसद के भीतर संख्या बल सबसे बड़ी ताकत बन गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से पारित कराना चाहती है। इन दोनों विषयों पर संविधान संशोधन आवश्यक है और इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए लगातार अपना संख्याबल बढ़ाने में जुटे हैं। इसी रणनीति के तहत अब महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों को फिर से एक करने और उन्हें एनडीए में शामिल करने की कोशिशों की चर्चा तेज हो गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भाजपा नेतृत्व ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के बीच समझौते का रास्ता निकालने का सुझाव दिया है। चर्चा यह भी है कि यदि दोनों गुट एक हो जाते हैं और एनडीए का हिस्सा बनते हैं तो केंद्र सरकार में दो कैबिनेट पद देने का प्रस्ताव भी सामने रखा गया है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरी कवायद के पीछे सबसे बड़ा कारण संसद में दो तिहाई बहुमत का लक्ष्य है। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता। सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विशेष बहुमत चाहिए। पिछले विशेष सत्र में सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया था जिसके बाद भाजपा ने अपने सहयोगियों का दायरा बढ़ाने और विपक्षी दलों में नए राजनीतिक समीकरण बनाने की रणनीति तेज कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार आज भी सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। पांच दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने राज्य की राजनीति की दिशा कई बार बदली है। वे चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और केंद्र में रक्षा मंत्री तथा कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद भी संभाल चुके हैं। सहकारी क्षेत्र चीनी मिलों कृषि संस्थाओं और ग्रामीण राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। यही वजह है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी राजनीतिक उपयोगिता कम नहीं हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना शरद पवार ने 10 जून 1999 को पी ए संगमा और तारिक अनवर के साथ की थी। वर्ष 2023 में पार्टी दो हिस्सों में बंट गई जब उनके भतीजे अजित पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग हो गए और बाद में भाजपा तथा शिवसेना शिंदे गुट की सरकार में शामिल हो गए। फरवरी 2024 में चुनाव आयोग ने मूल एनसीपी का नाम और घड़ी चुनाव चिन्ह अजित पवार गुट को दे दिया। इसके बाद शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी का नाम एनसीपी शरदचंद्र पवार रखा गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान समय में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शरदचंद्र पवार राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा मानी जाती है। महाराष्ट्र में भी यह दल महा विकास अघाड़ी के साथ रहा है जिसमें कांग्रेस और शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट शामिल हैं। हालांकि हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि पार्टी के भीतर भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर अलग अलग राय है। कुछ नेता भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं जबकि कुछ कांग्रेस के साथ और मजबूत संबंध चाहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में शरद पवार की पार्टी के पास फिलहाल 8 सांसद हैं जबकि महाराष्ट्र विधानसभा में उसके लगभग 10 विधायक हैं। संख्या बहुत बड़ी नहीं है लेकिन संविधान संशोधन जैसे मामलों में हर वोट की अहमियत बढ़ जाती है। यदि शरद पवार का पूरा दल एनडीए के साथ आता है तो लोकसभा और राज्यसभा दोनों में सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है। यही वजह है कि भाजपा इस संभावना को गंभीरता से देख रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार भाजपा की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि यदि दोनों एनसीपी गुट एक हो जाते हैं तो सत्ता और संगठन में उचित भागीदारी दी जाएगी। वहीं दूसरी ओर शरद पवार गुट के भीतर भी अलग अलग मांगों की चर्चा है। सुप्रिया सुले को बड़ी भूमिका देने की बात हो रही है जबकि कुछ रिपोर्टों में केंद्रीय मंत्री पद और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर भी बातचीत का दावा किया गया है। हालांकि इन सभी बातों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी पक्ष ने नहीं की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम में अजित पवार गुट की भूमिका भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले से ही महाराष्ट्र की एनडीए सरकार का हिस्सा है। यदि दोनों गुटों का विलय होता है तो सत्ता और संगठन में संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच पदों और जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद की खबरें भी सामने आई हैं। यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला आरक्षण कानून और परिसीमन दोनों ही ऐसे मुद्दे हैं जिनका सीधा संबंध देश की भविष्य की राजनीतिक संरचना से है। महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित होंगी। वहीं परिसीमन के बाद जनसंख्या के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या तथा सीमाओं में बदलाव हो सकता है। इन दोनों विषयों पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में एनडीए के पास बहुमत तो है लेकिन संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो तिहाई संख्या तक पहुंचने के लिए अभी भी अतिरिक्त समर्थन चाहिए। राज्यसभा में भी स्थिति लगभग यही है। ऐसे में छोटे और क्षेत्रीय दलों का महत्व अचानक बढ़ गया है। यही वजह है कि भाजपा केवल नए सहयोगी जोड़ने पर ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों के प्रभावशाली नेताओं से भी संवाद बनाए हुए है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शरद पवार की खासियत यह रही है कि उन्होंने हमेशा परिस्थितियों के अनुसार राजनीतिक फैसले लिए हैं। वे कई बार विरोधी दलों के साथ भी काम कर चुके हैं और अलग अलग विचारधाराओं के नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे माने जाते हैं। इसी अनुभव और प्रभाव के कारण आज भी वे महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि शरद पवार अपनी पार्टी को किस दिशा में ले जाते हैं। यदि वे विपक्षी गठबंधन में बने रहते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति का मौजूदा संतुलन कायम रह सकता है। लेकिन यदि वे किसी नए राजनीतिक समझौते की ओर बढ़ते हैं तो इसका असर केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि संसद में भी सरकार के संख्याबल और राष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल इतना तय है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े विधेयकों को पारित कराने की कोशिशों ने शरद पवार और उनकी पार्टी को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 22:39:00 +0530</pubDate>
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                <title>एनसीपी गुटों का विलय रद्दः विधायकों के बयान पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एनसीपी (अजित पवार) ने विधायकों के बयान देने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ विलय की बातचीत फिलहाल खत्म हो गई है। सुनेत्रा पवार को 26 फरवरी को अगला अध्यक्ष चुना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीपी गुटों के विलय की अटकलों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। पार्टी नेतृत्व ने अपने विधायकों पर सख्त 'गैग ऑर्डर' (मौन आदेश) जारी कर दिया है। इससे साफ हो गया है कि फिलहाल दोनों एनसीपी गुटों का विलय संभव नहीं है। कहा जा रहा है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170143/merger-of-ncp-factions-cancelled-ban-on-statements-of-mlas"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/एनसीपी-गुटों-का-विलय-रद्दः-विधायकों-के-बयान-पर-रोक.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एनसीपी (अजित पवार) ने विधायकों के बयान देने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ विलय की बातचीत फिलहाल खत्म हो गई है। सुनेत्रा पवार को 26 फरवरी को अगला अध्यक्ष चुना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीपी गुटों के विलय की अटकलों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। पार्टी नेतृत्व ने अपने विधायकों पर सख्त 'गैग ऑर्डर' (मौन आदेश) जारी कर दिया है। इससे साफ हो गया है कि फिलहाल दोनों एनसीपी गुटों का विलय संभव नहीं है। कहा जा रहा है कि कुछ विधायक विलय की ज़ोरदार वकालत कर रहे हैं। विलय न होने की स्थिति में कुछ विधायक बीजेपी में जा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह निर्देश सोमवार को उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के आधिकारिक निवास 'देवगिरि' में विधायकों की बैठक में जारी किया गया। बैठक में पार्टी ने यह भी औपचारिक रूप से तय किया कि दिवंगत पार्टी प्रमुख अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को अगला एनसीपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाएगा। अजित पवार की 28 जनवरी को एक विमान हादसे में मौत हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर कमेटी की बैठक में सभी विधायकों ने हाथ उठाकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने बाद में बताया कि चुनाव 26 फरवरी को मुंबई में होगा और सुनेत्रा पवार के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधायकों पर लगाए गए मौन आदेश के बारे में पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व यह जानना चाहता है कि कुछ विधायकों द्वारा एनसीपी (एसपी) के साथ विलय की मांग क्यों की जा रही है। क्या यह बाहरी प्रभावों से प्रेरित है या विधायकों की अपनी मान्यता है कि विलय से उनके क्षेत्रों में स्थिति मजबूत होगी? हाल ही में इस बात के संकेत मिले थे कि अगर विलय नहीं होता है तो कुछ विधायक बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 23:37:34 +0530</pubDate>
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