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                <title>महाराष्ट्र - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>महाराष्ट्र RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>समझाइश और सख्ती से बदली तस्वीर अमरावती के नशामुक्त गांवों ने दिखाया नया रास्ता</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महाराष्ट्र </strong>के अमरावती जिले के गांवों से निकली यह कहानी केवल एक बदलाव की नहीं बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण की कहानी है। कभी शराबखोरी के लिए बदनाम रहे ये गांव आज अनुशासन, आत्मसम्मान और जागरूकता के प्रतीक बन गए हैं। मेलबाट क्षेत्र से शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे 19 गांवों को नशामुक्त बना चुका है और अब यही गांव आसपास के 20 गांवों को भी इस दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। यह परिवर्तन अचानक नहीं आया बल्कि वर्षों की मेहनत, धैर्य और सामूहिक संकल्प का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इन गांवों का अतीत बेहद कठिन था। शराब यहां केवल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178068/the-picture-changed-through-persuasion-and-strictness-drug-free-villages"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महाराष्ट्र </strong>के अमरावती जिले के गांवों से निकली यह कहानी केवल एक बदलाव की नहीं बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण की कहानी है। कभी शराबखोरी के लिए बदनाम रहे ये गांव आज अनुशासन, आत्मसम्मान और जागरूकता के प्रतीक बन गए हैं। मेलबाट क्षेत्र से शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे 19 गांवों को नशामुक्त बना चुका है और अब यही गांव आसपास के 20 गांवों को भी इस दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। यह परिवर्तन अचानक नहीं आया बल्कि वर्षों की मेहनत, धैर्य और सामूहिक संकल्प का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन गांवों का अतीत बेहद कठिन था। शराब यहां केवल एक आदत नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा बन चुकी थी। पुरुष अपनी मेहनत की कमाई शराब में खर्च कर देते थे, जिससे परिवार आर्थिक संकट में फंस जाते थे। घरों में झगड़े होते थे, महिलाओं को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था और बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया था। सामाजिक स्तर पर भी इन गांवों की छवि खराब हो चुकी थी। रिश्तेदार तक शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रमों में इन्हें बुलाने से कतराते थे। यह सामाजिक बहिष्कार धीरे-धीरे लोगों के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने लगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थिति को बदलने के लिए आदिवासी पंचायत, समाजसेवकों, ग्रामीणों और पुलिस ने मिलकर प्रयास शुरू किए। गांवों में लगातार बैठकें आयोजित की गईं। लोगों को समझाया गया कि नशा उनके शरीर, परिवार और भविष्य के लिए कितना घातक है। शुरुआत में इन प्रयासों का विरोध हुआ। कई लोग अपनी आदत छोड़ने को तैयार नहीं थे, लेकिन समझाइश का सिलसिला रुका नहीं। धीरे-धीरे लोगों की सोच में बदलाव आने लगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब केवल समझाने से बात नहीं बनी तो पंचायत ने सख्ती का रास्ता अपनाया। गांव में शराब पीने वाले और शराब परोसने वाले दोनों पर पांच हजार रुपये का जुर्माना तय किया गया। यह नियम सभी पर समान रूप से लागू किया गया और इसका कड़ाई से पालन किया गया। इस निर्णय ने लोगों को झकझोर दिया। शुरुआत में लोग डर के कारण शराब से दूर रहने लगे, लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने इसके सकारात्मक परिणाम देखे, यह बदलाव उनकी आदत बन गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगातार सात वर्षों तक चले इस अभियान ने आखिरकार सफलता दिलाई। 19 गांव पूरी तरह नशामुक्त हो गए। यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बन गई। गांवों में नियमित बैठकों का आयोजन जारी रहा जिससे लोगों को लगातार जागरूक किया जाता रहा। यह निरंतर प्रयास ही इस सफलता की असली ताकत बना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नशा छोड़ने के बाद इन गांवों में सबसे बड़ा बदलाव सामाजिक सम्मान के रूप में देखने को मिला। जिन लोगों को पहले समाज में तिरस्कार झेलना पड़ता था, उन्हें अब सम्मान के साथ स्वीकार किया जाने लगा। शादी-ब्याह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में उन्हें बुलाया जाने लगा। यह बदलाव उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक स्तर पर भी बड़ा परिवर्तन आया। पहले जो पैसा शराब में बर्बाद होता था, अब वही पैसा घर के सुधार, बच्चों की पढ़ाई और बचत में खर्च होने लगा। टूटे-फूटे घरों की जगह पक्के मकान बनने लगे। कई लोगों ने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए। कोई किराना दुकान चलाने लगा तो कोई दूध बेचने लगा। इससे गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बदलाव का सबसे सकारात्मक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ा। पहले महिलाएं आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान रहती थीं, लेकिन अब उनके जीवन में स्थिरता आई है। उनके हाथ में पैसे बचने लगे हैं और वे परिवार के निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने लगी हैं। बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलने लगी है। जो बच्चे पहले स्कूल नहीं जा पाते थे, अब वे शहरों में पढ़ाई कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरी कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि जो लोग कभी शराब के आदी थे, वही अब नशामुक्ति के सबसे बड़े प्रचारक बन गए हैं। उन्होंने अपनी गलतियों से सीख ली और अब वे दूसरों को उसी रास्ते पर चलने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने टीम बनाकर आसपास के 20 गांवों में जागरूकता अभियान शुरू किया है। वे गांव-गांव जाकर लोगों को बताते हैं कि शराब किस तरह शरीर और परिवार को नुकसान पहुंचाती है और कैसे इससे बाहर निकलकर जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनकी बातों का असर इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि वे खुद इस अनुभव से गुजर चुके हैं। वे लोगों को केवल सलाह नहीं देते बल्कि अपनी जीवन कहानी साझा करते हैं। यह सच्चाई लोगों को गहराई से प्रभावित करती है और उन्हें सोचने पर मजबूर करती है। आज यह पहल एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। लोग एक-दूसरे को प्रेरित कर रहे हैं और नशामुक्ति को अपनी जिम्मेदारी मान रहे हैं। यह सामूहिक जागरूकता ही इस सफलता की सबसे बड़ी वजह है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में नशे की समस्या एक गंभीर चुनौती है। हर साल हजारों लोग शराब और तंबाकू के कारण अपनी जान गंवाते हैं। इसके बावजूद लोग इस खतरे को नजरअंदाज करते रहते हैं। ऐसे में अमरावती के गांवों की यह पहल एक नई दिशा दिखाती है। यह साबित करती है कि अगर समाज जागरूक हो जाए और मिलकर प्रयास करे तो किसी भी बुराई को खत्म किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">समझाइश और सख्ती का संतुलित मेल इस सफलता की कुंजी रहा है। केवल कानून से बदलाव संभव नहीं होता और केवल समझाने से भी हर बार परिणाम नहीं मिलता। जब दोनों का सही संतुलन बनाया जाता है तब स्थायी परिवर्तन संभव होता है। अमरावती के गांवों ने यही कर दिखाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">आज जब ये गांव दूसरे गांवों को नशामुक्त करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं तो यह स्पष्ट है कि यह पहल केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। यह धीरे-धीरे एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है। अगर देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के प्रयास किए जाएं तो नशामुक्त भारत का सपना साकार हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">अमरावती की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि बदलाव बाहर से नहीं बल्कि भीतर से आता है। जब समाज खुद अपने दोषों को पहचानकर उन्हें सुधारने का प्रयास करता है तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं रहती। यह केवल नशामुक्ति की कहानी नहीं बल्कि आत्मसम्मान, एकता और बेहतर भविष्य की दिशा में उठाए गए मजबूत कदम की कहानी है।</div>
<div style="text-align:justify;">        <strong>*कांतिलाल मांडोत*</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:19:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में फर्जी विश्वविद्यालयों का बढ़ता जाल, 12 राज्यों में सक्रिय 32 संस्थान; UGC ने जारी की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">देश में शिक्षा के नाम पर चल रहे फर्जी संस्थानों का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है। हालात यह हैं कि दो साल पहले जहां ऐसे विश्वविद्यालय केवल आठ राज्यों तक सीमित थे, वहीं अब इनकी पहुंच बढ़कर 12 राज्यों तक हो गई है। इसी अवधि में फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या भी 20 से बढ़कर 32 हो चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए प्रभावित राज्यों में हरियाणा, राजस्थान, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने छात्रों और अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है और ऐसे संस्थानों में दाखिला न लेने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170438/growing-network-of-fake-universities-in-the-country-32-institutions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/देश-में-फर्जी-विश्वविद्यालयों-का-बढ़ता-जाल,-12-राज्यों-में-सक्रिय-32-संस्थान;-ugc-ने-जारी-की-चेतावनी.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में शिक्षा के नाम पर चल रहे फर्जी संस्थानों का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है। हालात यह हैं कि दो साल पहले जहां ऐसे विश्वविद्यालय केवल आठ राज्यों तक सीमित थे, वहीं अब इनकी पहुंच बढ़कर 12 राज्यों तक हो गई है। इसी अवधि में फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या भी 20 से बढ़कर 32 हो चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए प्रभावित राज्यों में हरियाणा, राजस्थान, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने छात्रों और अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है और ऐसे संस्थानों में दाखिला न लेने की चेतावनी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में कर्नाटक के बेंगलुरु में “ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी” नाम से संचालित एक फर्जी संस्थान के मामले में अलर्ट जारी करते हुए यूजीसी ने यह निर्देश दिए।</p>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>प्रवेश से पहले यूजीसी की वेबसाइट पर जरूर जांचें सूची</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">यूजीसी ने कहा है कि किसी भी विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने से पहले उसकी मान्यता की पुष्टि यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध सूची से अवश्य करें। पिछले कुछ वर्षों में यूजीसी लगातार फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी करता रहा है, लेकिन इसके बावजूद ये संस्थान अलग-अलग नामों से छात्रों को गुमराह कर रहे हैं।ग्रामीण क्षेत्रों तक फैले इन फर्जी विश्वविद्यालयों के जाल में हर साल हजारों छात्र फंस रहे हैं।</p>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली में सबसे ज्यादा 12 फर्जी विश्वविद्यालय</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">देश के 12 राज्यों में सक्रिय 32 फर्जी विश्वविद्यालयों में सबसे अधिक 12 दिल्ली में पाए गए हैं। इनमें से कुछ संस्थान यूजीसी मुख्यालय के आसपास ही संचालित हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यों के अनुसार स्थिति इस प्रकार है:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>दिल्ली – 12</p>
</li>
<li>
<p>उत्तर प्रदेश – 4</p>
</li>
<li>
<p>केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक – 2-2</p>
</li>
<li>
<p>हरियाणा, राजस्थान, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश – 1-1</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>विदेशी विश्वविद्यालयों के नाम का भी हो रहा दुरुपयोग</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">अब कई फर्जी संस्थान विदेशी विश्वविद्यालयों जैसा नाम अपनाकर छात्रों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे छात्रों के लिए असली और नकली संस्थानों में फर्क करना और भी मुश्किल हो गया है।यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि केवल मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ही डिग्री लेने पर ही उसका कानूनी महत्व होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/170438/growing-network-of-fake-universities-in-the-country-32-institutions</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 21:53:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनसीपी गुटों का विलय रद्दः विधायकों के बयान पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एनसीपी (अजित पवार) ने विधायकों के बयान देने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ विलय की बातचीत फिलहाल खत्म हो गई है। सुनेत्रा पवार को 26 फरवरी को अगला अध्यक्ष चुना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीपी गुटों के विलय की अटकलों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। पार्टी नेतृत्व ने अपने विधायकों पर सख्त 'गैग ऑर्डर' (मौन आदेश) जारी कर दिया है। इससे साफ हो गया है कि फिलहाल दोनों एनसीपी गुटों का विलय संभव नहीं है। कहा जा रहा है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170143/merger-of-ncp-factions-cancelled-ban-on-statements-of-mlas"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/एनसीपी-गुटों-का-विलय-रद्दः-विधायकों-के-बयान-पर-रोक.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एनसीपी (अजित पवार) ने विधायकों के बयान देने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ विलय की बातचीत फिलहाल खत्म हो गई है। सुनेत्रा पवार को 26 फरवरी को अगला अध्यक्ष चुना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीपी गुटों के विलय की अटकलों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। पार्टी नेतृत्व ने अपने विधायकों पर सख्त 'गैग ऑर्डर' (मौन आदेश) जारी कर दिया है। इससे साफ हो गया है कि फिलहाल दोनों एनसीपी गुटों का विलय संभव नहीं है। कहा जा रहा है कि कुछ विधायक विलय की ज़ोरदार वकालत कर रहे हैं। विलय न होने की स्थिति में कुछ विधायक बीजेपी में जा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह निर्देश सोमवार को उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के आधिकारिक निवास 'देवगिरि' में विधायकों की बैठक में जारी किया गया। बैठक में पार्टी ने यह भी औपचारिक रूप से तय किया कि दिवंगत पार्टी प्रमुख अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को अगला एनसीपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाएगा। अजित पवार की 28 जनवरी को एक विमान हादसे में मौत हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर कमेटी की बैठक में सभी विधायकों ने हाथ उठाकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने बाद में बताया कि चुनाव 26 फरवरी को मुंबई में होगा और सुनेत्रा पवार के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधायकों पर लगाए गए मौन आदेश के बारे में पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व यह जानना चाहता है कि कुछ विधायकों द्वारा एनसीपी (एसपी) के साथ विलय की मांग क्यों की जा रही है। क्या यह बाहरी प्रभावों से प्रेरित है या विधायकों की अपनी मान्यता है कि विलय से उनके क्षेत्रों में स्थिति मजबूत होगी? हाल ही में इस बात के संकेत मिले थे कि अगर विलय नहीं होता है तो कुछ विधायक बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 23:37:34 +0530</pubDate>
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