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                <title>भ्रष्टाचार के आरोप - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भ्रष्टाचार के आरोप RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लखनऊ नगर निगम में बड़ा खेल ? जोनल अधिकारियों पर निजी ऑपरेटरों के जरिए राजस्व व्यवस्था प्रभावित करने के गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>विपिन शुक्ला लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">राजधानी के नगर निगम में कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कुछ जोनों में अधिकृत कर्मचारियों की बजाय निजी अथवा कार्यदायी संस्था से जुड़े कर्मियों से कंप्यूटर पर राजस्व संबंधी कार्य कराए जा रहे हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे विभागीय नियमों, डेटा सुरक्षा और राजस्व प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य संवेदनशील माना जाता है क्योंकि इसके माध्यम से कर निर्धारण, बिलिंग, डेटा फीडिंग और राजस्व से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों का संचालन होता है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183431/big-game-in-khanau-municipal-corporation-zonal-officers-accused-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-15-at-21.49.58.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>विपिन शुक्ला लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">राजधानी के नगर निगम में कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कुछ जोनों में अधिकृत कर्मचारियों की बजाय निजी अथवा कार्यदायी संस्था से जुड़े कर्मियों से कंप्यूटर पर राजस्व संबंधी कार्य कराए जा रहे हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे विभागीय नियमों, डेटा सुरक्षा और राजस्व प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य संवेदनशील माना जाता है क्योंकि इसके माध्यम से कर निर्धारण, बिलिंग, डेटा फीडिंग और राजस्व से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों का संचालन होता है। ऐसे कार्य सामान्यतः अधिकृत कर्मचारियों द्वारा किए जाने चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>जोन-3 को लेकर भी सवाल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों का दावा है कि जोन-3 में कंप्यूटर फीडिंग का दायित्व लिपिक राजीव जैन को सौंपा गया है। हालांकि, यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि उन्हें इस कार्य का पर्याप्त तकनीकी अनुभव नहीं है। इसी कारण एक कार्यदायी संस्था का कर्मचारी कथित तौर पर महत्वपूर्ण कंप्यूटर प्रणाली पर बैठकर काम कर रहा है। यदि ऐसा है, तो यह विभागीय प्रक्रिया और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े करता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>नियमों के पालन पर उठे सवाल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जानकारों का कहना है कि यदि पूरे नगर निगम के सभी जोनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई स्थानों पर ऐसे निजी या बाहरी कर्मियों के कार्य करने की स्थिति सामने आ सकती है। इससे राजस्व रिकॉर्ड की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित होने की आशंका है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>जांच की उठी मांग</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में नगर निगम के अधिकारियों से यह स्पष्ट करने की मांग उठ रही है कि यदि किसी बाहरी व्यक्ति से राजस्व संबंधी कार्य कराया जा रहा है, तो उसकी अनुमति किस स्तर से दी गई और उसकी जवाबदेही किसकी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 21:55:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टूटती तृणमूल कांग्रेस और ममता: संगठनात्मक कमजोरी और जनविश्वास का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181935/disintegrating-trinamool-congress-and-mamta-organizational-weakness-and-crisis-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(4).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे की कमी को दर्शाता है। नीचे के स्तर पर भी ब्लॉक और पंचायत स्तर पर गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है।</p>
<p><br />नियोग, कोयला, गोरू तस्करी और राशन घोटाले जैसे मामलों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए। ED और CBI की कार्रवाई ने संगठन की साख को नुकसान पहुंचाया। आम लोगों में यह धारणा मजबूत हुई है कि सत्ता के साथ भ्रष्टाचार भी जड़ें जमा चुका है। इससे जमीनी कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं और मतदाता का एक हिस्सा विकल्प तलाश रहा है।<br />                  टीएमसी आज भी पूरी तरह ममता बनर्जी के व्यक्तित्व पर टिकी है। पार्टी का ढांचा संस्थागत कम, परिवार और करीबी नेताओं के इर्द-गिर्द ज्यादा केंद्रित है। अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद ने भी पुराने नेताओं में असहजता पैदा की है। जब कोई संगठन एक व्यक्ति पर निर्भर हो जाता है, तो उस व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और राजनीतिक रणनीति ही पार्टी का भविष्य तय करने लगती है। फिलहाल ताजा खबर यह है कि टीएमसी एक और बड़ी टूट की कगार पर खड़ी है और यह निश्चित हो गया है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब टीएमसी को उभरने का मौका शायद ही मिल सके। कल सोमवार को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी उपस्थित नज़र आईं तो वहीं दावा है कि उनकी पार्टी के 20 सांसदो ने बगावत कर दी है। सूचना है कि पार्टी के कई सांसद भाजपा नेताओं से मिलकर बगावत की रणनीति बना रहे थे।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर सोमवार को ही टीएमसी के कई सांसदों ने मुलाकात के बाद अलग गुट बनाने का दावा किया है। पता चला है कि इस बैठक में टीएमसी के पांच सांसद मौजूद रहे। इनमें शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश बसुनिया, कालिपद सोरेन व अनूप चक्रवर्ती शामिल हैं। टीएमसी के लोकसभा में 28 व राज्यसभा में 12 सांसद हैं। सूत्र बताते हैं कि बागी सांसदों ने रविवार को एक बैठक की थी, और उसी वक्त अलग गुट बनाने का ऐलान कर टीएमसी को झटका दिया जाने पर विचार हुआ है।</p>
<p>जब विधायक दल में टूट हुई थी तो सांसदों के बग़ावत की चर्चाओं ने तूल पकड़ लिया था। ऐसा बताया जा रहा है कि बाग़ी सांसद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भी संपर्क में हैं और बहुत ही जल्द एक नये गुट का ऐलान हो सकता है। टीएमसी की सांसद काकोली घोष ने दावा किया है कि बागी सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है और लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। कोई भी पार्टी जब चुनाव हारती है तब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है</p>
<p>अपनी पार्टी को टूट से बचाने की क्यों कि हर कोई सत्ता के लड्डू खाना चाहता है, बेकार में विपक्ष में अब कोई बैठना नहीं चाहता है। इसके लिए केंद्र में कांग्रेस में टूट, दिल्ली में आप में टूट उत्तर प्रदेश में सपा में टूट और महाराष्ट्र का उदाहरण देखा जा सकता है। यही संकट अब इस समय टीएमसी के ऊपर मंडरा रहा है। अब देखना यह है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को टूटने से कितना बचा पातीं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आख़िरकार सीएमओ, डिप्टी सीएमओ व बाबू ने जांच के नाम पर कर दिया खेला</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मनमानी ड्यूटी चल रही है लगभग 10% कर्मचारी सीएमओ के अंदर में नहीं आ रहे हैं कैसे होगा स्वास्थ्य विभाग का बेड़ा पार आख़िरकार मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा० राजीव निगम, डिप्टी सीएमओ अशोक कुमार चौधरी व बाबू अभिषेक पाल ने बिना सूचना के डियूटी से गायब रहने वाले व निजी क्लीनिक चलाने वाले डेन्टल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता के मामले में जांच पड़ताल के नाम पर लेन देन करके मामले को रफा - दफा कर दिया है जो कि मामला उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री / उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निजी सचिव</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181639/ultimately-cmo-deputy-cmo-and-babu-played-with-the-name"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0106.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मनमानी ड्यूटी चल रही है लगभग 10% कर्मचारी सीएमओ के अंदर में नहीं आ रहे हैं कैसे होगा स्वास्थ्य विभाग का बेड़ा पार आख़िरकार मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा० राजीव निगम, डिप्टी सीएमओ अशोक कुमार चौधरी व बाबू अभिषेक पाल ने बिना सूचना के डियूटी से गायब रहने वाले व निजी क्लीनिक चलाने वाले डेन्टल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता के मामले में जांच पड़ताल के नाम पर लेन देन करके मामले को रफा - दफा कर दिया है जो कि मामला उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री / उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निजी सचिव के जानकारी में था जब स्वास्थ्य मंत्री के निजी सचिव के जानकारी में होने के बावजूद भी मामले में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों ने लीपापोती करके पूरा मामला खत्म कर दिया है तो आमजन के शिकायत पर कैसे जांच व कार्यवाही होगी ? इस प्रकार स्पष्ट है कि अब स्वास्थ्य विभाग में पीड़ितों को न्याय मिलना आसान नही रह गया है । सीएमओं डा० राजीव निगम *पैसा फेकों तमासा देखों* की नीति पर पूरी तरह कार्य कर रहे हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप को बता दे कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरपुर पर तैनात डेन्टल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता दिनांक - 20-04-2026 से लेकर दिनांक - 23-04-2026 को बिना किसी सूचना के डियूटी से गायब थे और डियूटी के दौरान घर पर निजी क्लीनिक पर इलाज कर रहे थे जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था । सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरपुर अधीक्षक डा० पवन वर्मा ने नोटिस जारी किया था और डेन्टल हाईजिनिस्ट ने अधीक्षक के नोटिस का जबाव ही नही दिया था बाद में अधीक्षक ने मजबूर होकर बिना सूचना के डियूटी से गायब रहने के मामले में वेतन कटौती करने का आदेश दिनांक - 28-04-2026 को दिया था और निजी क्लीनिक चलाने के मामले की जांच डिप्टी सीएमओ डा० ए० के ० चौधरी को मिली थी । डिप्टी सीएमओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच किया था और जांच के दौरान निजी क्लीनिक पर कार्य करते डेन्टल हाईजिनिस्ट मिले थे । जांच अधिकारी ने तत्काल निजी क्लीनिक को सीज किया था और भविष्य में पुनः संचालित न करने की चेतावनी दी थी । डिप्टी सीएमओ ने समस्त जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी है लेकिन दो महीने से अधिक का समय बीतने के बाद भी मनमानी डियूटी करने वाले डेन्टल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही नही हो पाई है । जांच रिपोर्ट प्रेषित होने के बाद भी डेन्टल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई न होने से डेन्टल हाईजिनिस्ट का मनोबल जबरदस्त बढ़ा है जिससे स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है यदि ऐसे ही स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया रहा तो स्वास्थ्य विभाग में कभी भी भ्रष्टाचार खत्म नही होगा ।</div>
<div style="text-align:justify;"> इस संम्बध में डिप्टी सीएमओ डा० अशोक चौधरी ने फोन के माध्यम से बताया है हमने जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दिया है और कार्यवाही सीएमओ के स्तर से होगी कह कर मामले से पल्ला झाड़ लिया और सीएमओ डा० राजीव निगम ने बताया कि कार्यवाही हेतु बाबू अभिषेक पाल को निर्देशित किया है वही बाबू अभिषेक पाल ने बताया कि लेन - देन करके मामले को रफा-दफा कर दिया गया है अर्थात् सभी ने मिलकर जांच व कार्यवाही के नाम पर खेला करने में भरपूर सहयोग किया है ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 20:41:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>13 वर्षों से साऊँघाट सीएचसी पर जमे स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी बृजेन्द्र कुमार ने मचाया लूट</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार इस तरह बढ़ रहा है की सालों सालों तक लोग ड्यूटी नहीं करते हैं जिम्मेदार पद पर रहते हुए भी मौके पर अस्पताल में हाजिर नहीं रहते हैं सरकार भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने के भले ही एक हजार उपाय करे परन्तु भ्रष्टाचारी ' भ्रष्टाचार करने के दस हजार बनाने ढूँढ़ लेते हैं जिसका ताजा उदाहरण साऊँघाट में तैनात स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी बृजेन्द्र कुमार हैं जो विगत तेरह साल से एक ही स्थान पर अंगद की तरह पाँव जमाए हुए लूट व तांडव मचाए हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार 17</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178979/health-education-officer-brijendra-kumar-who-had-been-working-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260511-wa0029.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार इस तरह बढ़ रहा है की सालों सालों तक लोग ड्यूटी नहीं करते हैं जिम्मेदार पद पर रहते हुए भी मौके पर अस्पताल में हाजिर नहीं रहते हैं सरकार भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने के भले ही एक हजार उपाय करे परन्तु भ्रष्टाचारी ' भ्रष्टाचार करने के दस हजार बनाने ढूँढ़ लेते हैं जिसका ताजा उदाहरण साऊँघाट में तैनात स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी बृजेन्द्र कुमार हैं जो विगत तेरह साल से एक ही स्थान पर अंगद की तरह पाँव जमाए हुए लूट व तांडव मचाए हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार 17 जुलाई 2013 को बृजेन्द्र कुमार की तैनाती सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र साऊँघाट में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के रूप में हुई थी । तैनाती से अद्यतन तिथि तक बृजेन्द्र सीएचसी साऊँघाट में ही जमें हैं जिसको लेकर क्षेत्र में तरह - तरह की चचाएं चल रही हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नियमों की यदि बात करें तो कोई कर्मचारी जनपद में तीन वर्ष तथा मंडल में अधिकतम 7 वर्ष तक सेवा दे सकता हैं परन्तु बृजेन्द्र कुमार के मामले में जिम्मेदारों ने इतनी क्यों दरियादिली दिखाई और अधिकतम 3 वर्ष के बजाए 13 साल क्यों जमें हैं को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है । प्रकरण में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जाँच कर आवश्यक कार्यवाही की जायेगी ।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 19:58:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुआटस कॉलेज में वेतन बकाया को लेकर , शिक्षकों-कर्मचारियों का  प्रदर्शन।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong>नैनी एग्रीकल्चर क्षेत्र स्थित (सुआटस) कॉलेज में शिक्षकों और कर्मचारियों का आक्रोश अपने बकाया वेतन को लेकर लगातार बढ़ता जा रहा है। लंबे समय से वेतन न मिलने से नाराज शिक्षकों और कर्मचारियों ने बुधवार को यूनिवर्सिटी परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने रजिस्ट्रार ऑफिस के सामने एकत्र होकर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कुलपति आर.बी. लाल सहित अन्य अधिकारियों का पुतला फूंका। इस दौरान “मुर्दाबाद” के नारे भी लगाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षकों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन भ्रष्टाचार में लिप्त है और कर्मचारियों का वेतन रोककर “वेतन चोरी” कर रहा है। वहीं कर्मचारियों का कहना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178381/demonstration-of-teachers-and-employees-regarding-salary-arrears-in-suatas"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260506-wa0118.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong>नैनी एग्रीकल्चर क्षेत्र स्थित (सुआटस) कॉलेज में शिक्षकों और कर्मचारियों का आक्रोश अपने बकाया वेतन को लेकर लगातार बढ़ता जा रहा है। लंबे समय से वेतन न मिलने से नाराज शिक्षकों और कर्मचारियों ने बुधवार को यूनिवर्सिटी परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने रजिस्ट्रार ऑफिस के सामने एकत्र होकर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कुलपति आर.बी. लाल सहित अन्य अधिकारियों का पुतला फूंका। इस दौरान “मुर्दाबाद” के नारे भी लगाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षकों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन भ्रष्टाचार में लिप्त है और कर्मचारियों का वेतन रोककर “वेतन चोरी” कर रहा है। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार अपनी सैलरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं को सुनने के लिए आगे नहीं आ रहा है।बुधवार को बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी यूनिवर्सिटी कैंपस में एकत्र हुए और रजिस्ट्रार कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया। स्थिति को देखते हुए कॉलेज को बंद कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।बताया जा रहा है कि शिक्षक और कर्मचारी पिछले 27 महीनों से वेतन नहीं मिलने से परेशान हैं। उनका कहना है कि छात्रों से फीस वसूली के बावजूद वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर फीस की राशि कहां जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने प्रशासन पर मनमानी और दबंगई का आरोप लगाते हुए कहा कि वेतन न मिलने से उनके परिवारों का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।</p>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 20:02:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन में महाप्रबंधक उपकरण की नियुक्ति में खेल</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ -उत्तर प्रदेश</strong></blockquote>
<p>  </p>
<p>उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन की स्थापना इसलिए की गयी थी की सबसे बड़े सूबे की जनता को सूबे के अस्पतालों में विश्व स्तरीय जीवन रक्षक उपकरणों द्वारा स्वास्थ्य सेवाएं मिलें परन्तु उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन केवल भ्रष्ट-अधिकारीयों, कर्मचारियों और शातिर दलालों के गठजोड़ से लूट का एक अड्डा बन कर रह गया है l </p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/photo-2.jpg" alt="उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन में महाप्रबंधक उपकरण की नियुक्ति में खेल" width="884" height="589" /></p>
<p>उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को घटिया चीनी उपकरणों के जरिए बर्बाद करने वाले उत्तर प्रदेश मेडिकल कॉरपोरेशन के महाप्रबंधक उपकरण रहे उज्जवल कुमार के शातिर दलालों के साथ किए गए काले कारनामों को अभी प्रदेश भुला ही नहीं है की मेडिकल कॉरपोरेशन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175879/%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A4%95-%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%B2"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/photo-2.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ -उत्तर प्रदेश</strong></blockquote>
<p> </p>
<p>उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन की स्थापना इसलिए की गयी थी की सबसे बड़े सूबे की जनता को सूबे के अस्पतालों में विश्व स्तरीय जीवन रक्षक उपकरणों द्वारा स्वास्थ्य सेवाएं मिलें परन्तु उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन केवल भ्रष्ट-अधिकारीयों, कर्मचारियों और शातिर दलालों के गठजोड़ से लूट का एक अड्डा बन कर रह गया है l </p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/photo-2.jpg" alt="उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन में महाप्रबंधक उपकरण की नियुक्ति में खेल" width="884" height="589"></img></p>
<p>उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को घटिया चीनी उपकरणों के जरिए बर्बाद करने वाले उत्तर प्रदेश मेडिकल कॉरपोरेशन के महाप्रबंधक उपकरण रहे उज्जवल कुमार के शातिर दलालों के साथ किए गए काले कारनामों को अभी प्रदेश भुला ही नहीं है की मेडिकल कॉरपोरेशन के अधिकारियों द्वारा महाप्रबंधक उपकरण के पद पर उत्तर प्रदेश मेडिकल कॉरपोरेशन के पूर्व कर्मचारी और प्रबंधक उपकरण रहे सिद्धार्थ बहादुर सिंह उर्फ़ सिद्धार्थ सिंह की नियुक्ति की तैयारी चल रही है l </p>
<p>सिद्धार्थ बहादुर सिंह उर्फ़ सिद्धार्थ सिंह वर्तमान में असम सरकार के मेडिकल कॉरपोरेशन में वरिष्ठ प्रबंधक उपकरण के पद पर तैनात हैं और बिहार सरकार के मेडिकल कॉरपोरेशन से भर्ष्टाचार में बर्खास्त कर्मचारी हैं,  बिहार मेडिकल कॉरपोरेशन में वर्ष 2014 में हुए उपकरण घोटाले में सिद्धार्थ बहादुर सिंह उर्फ़ सिद्धार्थ सिंह,  उज्जवल कुमार और उनके बॉस त्रिपुरारी कुमार बर्खास्त हुए थे, उक्त घोटाले में आठ कर्मचारी बर्खास्त हुए थे और वहां भी यह लोग सरकार की बजाय शातिर दलालों के साथ काम करते रहे थे l </p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/photo-4.jpg" alt="उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन में महाप्रबंधक उपकरण की नियुक्ति में खेल" width="869" height="579"></img></p>
<p>हमेशा घोटाले में लिप्त रहने वाले और शातिर दलालों को फायदा पहुंचाने वाले सिद्धार्थ बहादुर सिंह उर्फ़ सिद्धार्थ सिंह का शातिर दलालों के साथ गठजोड़ बहुत पुराना है, सिद्धार्थ बहादुर सिंह उर्फ़ सिद्धार्थ सिंह जब उत्तर प्रदेश मेडिकल कॉरपोरेशन में प्रबंधक उपकरण के पद पर थे, तब उनके भ्रष्टाचार की गाथाएं मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी,  कठोर कार्रवाई होने के डर से सिद्धार्थ बहादुर सिंह उर्फ़ सिद्धार्थ सिंह उत्तर प्रदेश मेडिकल कॉरपोरेशन की नौकरी से इस्तीफा देकर आसाम भाग गया था l </p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/photo-3.jpg" alt="उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन में महाप्रबंधक उपकरण की नियुक्ति में खेल" width="1200" height="800"></img></p>
<p>भष्टाचार के कारन महाप्रन्धक उपकरण उज्जवल कुमार की विदाई के बाद शातिर दलालों द्वारा महाप्रबंधक उपकरण के पद पर अपने खास व्यक्ति की नियुक्ति कराने  का खेल चल रहा है, जिससे कि प्रदेश के अस्पतालों में घटिया चीनी जीवन रक्षक उपकरणों की आपूर्ति शातिर दलालों द्वारा बाजार दर से कई गुना अधिक दर पर की जा सके और जमकर लूट मचाकर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्वस्त किया जा सके, </p>
<p> प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को इसका संज्ञान लेना होगा अगर सिद्धार्थ बहादुर सिंह उर्फ़ सिद्धार्थ सिंह की नियुक्ति महाप्रबंधक उपकरण के पद पर होती है तो यह सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति का उल्लंघन होगा</p>
<p><strong>अगले अंक में नए घोटाले के खुलासे के साथ स्वतंत्र प्रभात की खोजी टीम...........</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 07:31:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्याय या साजिश ? एसडीएम हर्रैया का आदेश सवालों कघेरेमें - ऐसे आदेश ही बनते हैं खूनी संघर्ष का कारण।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के तहसील हर्रैया के एसडीएम (न्यायिक) शशिबिंदु कुमार द्विवेदी इन दिनों अपने एक ऐसे कारनामे को लेकर चर्चा में हैं, जिसने न्याय व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक औद्योगिक भूमि का है, जिससे संबंधित भागीदार वर्ष 1992 में ही अपनी लायबिलिटी और एसेट से मुक्त हो चुके थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 34 साल बाद, 2026 में, उन्हीं को दोबारा नाजायज कब्जा दिलाने की कवायद शुरू कर दी  कि इस कार्रवाई में दो जालसाजों को उक्त औद्योगिक भूमि पर कब्जा दिलाने की मंशा से पहले से लागू स्टे को खत्म</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174998/justice-or-conspiracy-sdm-harraiyas-order-is-in-question"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260403-wa0028.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के तहसील हर्रैया के एसडीएम (न्यायिक) शशिबिंदु कुमार द्विवेदी इन दिनों अपने एक ऐसे कारनामे को लेकर चर्चा में हैं, जिसने न्याय व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक औद्योगिक भूमि का है, जिससे संबंधित भागीदार वर्ष 1992 में ही अपनी लायबिलिटी और एसेट से मुक्त हो चुके थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 34 साल बाद, 2026 में, उन्हीं को दोबारा नाजायज कब्जा दिलाने की कवायद शुरू कर दी  कि इस कार्रवाई में दो जालसाजों को उक्त औद्योगिक भूमि पर कब्जा दिलाने की मंशा से पहले से लागू स्टे को खत्म करने की योजना बनाई गई। और इसके लिए 2016 के एक मुकदमे को ही खारिज करने का रास्ता चुना गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब जब नीयत पहले से तय हो, तो तर्क जुटाने में भला कितना समय लगता है! साहब ने एक नहीं, कई आधार गढ़े और आनन फानन में मुकदमा खारिज भी कमुकदमे की खारिजी के साथ ही स्टे भी समाप्त हो गया, जो इन कथित जालसाजों के लिए सबसे बड़ी बाधा था। अब आगे क्या होगा ? यह तो किसी घटना के घटित होने के बाद कानून-व्यवस्था ही तय करेगी !</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और साहब भी इसके लिए याद जरूर किए जाएंगे। लेकिन मुंसिफ बस्ती के आदेश के आधार पर दाखिल इस मुकदमे को खारिज करने के जो आधार दिए गए, वे खुद अपने आप में गम्भीर सवाल खड़े करते हैंअपने आदेश में साहब लिखते हैं, "खतौनी में पक्षकारों में किसी भी पक्षकार का नाम फर्म के पार्टनर के रूप में अंकित नहीं है। इस प्रकार इस वाद बिन्दु का निस्तारण वादी के पक्ष में नकारात्मक रूप में किया जाता है।अब सवाल यह उठता है कि, क्या किसी भी खतौनी में भूमिधर के नाम के साथ “किसान” या “मकान मालिक” आदि लिखा रहता है? जमीन का स्वरूप और उपयोग तो स्वतः स्पष्ट होता है, यह एक सामान्य समझ की बात है। लेकिन जब नीयत ही कुछ और हो, तो सामान्य समझ भी बेअसर हो जाती आगे आदेश में उल्लेख है, "प्रतिवादी श्री प्रवीश चन्द्र धर द्विवेदी द्वारा शपथ पत्र के साथ अवगत कराया है कि, प्रकीर्ण वाद संख्या 76/11/2024 श्रीश चंद्र धर द्विवेदी बनाम प्रवीश चन्द्र धर द्विवेदी को निरस्त किया जा चुका है।"हकीकत यह है कि ऐसा कोई मुकदमा अस्तित्व में ही नहीं है। और न ही इस कथित मुकदमे का इस आदेश से कोई सीधा संबंध ही हो सकता है। लेकिन "निरस्त" शब्द का जादू ऐसा चला कि उसे भी आधार बना लिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साहब आगे लिखते हैं, "वास्तव में एक ऐसे आदेश के आधार पर अनुतोष की मांग की गई है जो वर्तमान में माननीय न्यायालय में विचाराधीन है।" जबकि विधि का सामान्य सिद्धांत है कि किसी न्यायालय का आदेश तब तक प्रभावी रहता है, जब तक उस पर कोई नया आदेश पारित न हो जाए। केवल मुकदमे का विचाराधीन होना, आदेश को निष्प्रभावी नहीं करता। यहां जिस मुकदमे को आधार बताया गया, पात्रता के मुताबिक वह 2017 से अब तक केवल एडमिट अवस्था में ही पड़ा हुआ है। लेकिन आदेश लिखने के लिए आधार तो चाहिए थे, सो गढ़ लिएसाहब ने अपने आदेश में तर्क दिया कि, "वास्तव में प्रश्नगत वाद उभय पक्षों के मध्य भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के तहत साझेदारी विवाद से संबंधित है और वादी ने अभिलेखीय राजस्व दस्तावेजों से अपना कब्जा सिद्ध नहीं किया है।" साहब का यह तर्क स्पष्ट करता है कि, वे भी विपक्षियों की राह पर चलते हुए 'मुंसिफ बस्ती' के उस मूल आदेश को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं जो इस पूरे मुकदमे की बुनियाद है। ऐसे में साहब यह साबित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि, सच चाहे जो भी हो वे उसे हरगिज नहीं देखेंगे। और विपक्षियों के हित में इस मुकदमे का गला घोंटकर ही मानेंसाहब ने आधार गढ़ते समय प्रतिवादी का हवाला देते हुए राजस्व संहिता की सीमाओं से बाहर निकलकर इंडियन पार्टनरशिप एक्ट 1932 आदि पर भी लंबा व्याख्यान दे डाला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक्ट की धारा 63 का बाकायदा उल्लेख किया गया और प्रतिवादी की भाषा में यह स्थापित करने की कोशिश की गई कि रिटायरमेंट की सूचना सार्वजनिक नहीं की गई।  आदेश पढ़ते समय कई जगह ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रतिवादी बोल रहा हो और साहब केवल उसे लिख रहे हों। हैरत की बात यह है कि न तो यह जांचने की जरूरत समझी गई कि मूल मुकदमा क्या है? ना ही 27 अगस्त 2025 को फर्म आदि से संबंधित नामांतरण के लिए जारी "परिषदादेश" का अनुपालन करने की जरूरत समझी गई। और ना ही वाद के आधार, मुंसिफ के आदेश/ डिग्री को तरजीह दी गई। और न ही यह देखा गया कि, जिन आधारों पर साहब का आदेश टिका है, वे प्रासंगिक भी हैं या नहीं। सबसे अहम सवाल यह कि, प्रतिवादी सच बोल रहा है या झूठ ? इस पर तो मानो विचार करना भी जरूरी नहीं समझा गया। विडंबना यह भी है कि जिस प्रतिवादी के नाम के आगे साहब “श्री” लगाते नहीं थक रहे, उन्हीं पर आरोप है कि, उन्होंने मुकदमे के दौरान ही खतौनी में दर्ज अपने नामों का जमकर दुरुपयोग किया। फर्म की विवादित जमीन का नामांतरण कराया, खारिज-दाखिल कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और यहां तक कि समानांतर न्यायालय में बंटवारे का मुकदमा दाखिल कर एकपक्षीय प्राइमरी डिग्री तक हासिल कर ली। लेकिन इन सब तथ्यों का जिक्र आदेश में कहीं नहीं मिलता। कार्रवाई तो दूर की बात है।स्पष्ट है कि, आदेश की शुरुआत ही मुकदमे को खारिज करने की मंशा से हुई थी। और अंत तक प्रतिवादी के पक्ष को साधते हुए वही परिणाम हासिल भी कर लिया गया। अदालत अपनी थी, अधिकार अपने थे, तो परिणाम भी मनमाफिक ही आया। कुल मिलाकर साहब ने वही कहा और किया, जिसकी उम्मीद जालसाज विपक्षी करते रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वादी के पक्ष में तो सिर्फ कृत्रिम कमियां ही गिनाई गईं। और उसके द्वारा प्रस्तुत तमाम साक्ष्यों को भी दबाकर साक्ष्यों का अभाव बता दिया जिला अदालत के कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस आदेश को देखकर मुंह बिचकाते हुए इसे “पूर्व नियोजित ऑर्डर” तक कह डाला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और अंत में वही पुरानी बात याद आती है, "जब पैसे से वास्ता हो जाए, तो फिर इज्जत आबरू, न्याय अन्याय की चिंता भला कौन करता खैर, जीवन और जीविका की लड़ाई हर व्यक्ति पूरी ताकत से लड़ता है, और वादी भी लड़ेगा ही। यह जरूरी नहीं कि हर जगह ऐसे ही चेहरे बैठे हों। लेकिन असली चिंता इस बात की है कि, आखिर ये साहब कब तक न्यायिक चोला ओढ़कर न्याय का यूँ ही चीरहरण करते रहेंगे, और व्यवस्था देखती रहेगी ?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:53:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>लखीमपुर खीरी: कैमाखादर ग्राम पंचायत की सड़क समय से पहले जर्जर, भ्रष्टाचार के आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखीमपुर खीरी-</strong>    जिले के ब्लॉक लखीमपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कैमाखादर को जोड़ने वाली सड़कें बदहाल स्थिति में हैं। गांव तक आने-जाने के लिए बनी कोई भी सड़क सही हालत में नहीं बची है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ये सड़कें समय से पहले ही ध्वस्त हो गईं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों के अनुसार शारदा नहर की पटरी पर गांव को जोड़ने के लिए कुछ ही समय पहले सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन घटिया सामग्री और लापरवाही के चलते वह सड़क अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी हुई सतह हादसों को दावत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169842/road-of-lakhimpur-kheri-kaimakhadar-gram-panchayat-dilapidated-before-time"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/bhrastachar1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखीमपुर खीरी-</strong>  जिले के ब्लॉक लखीमपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कैमाखादर को जोड़ने वाली सड़कें बदहाल स्थिति में हैं। गांव तक आने-जाने के लिए बनी कोई भी सड़क सही हालत में नहीं बची है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ये सड़कें समय से पहले ही ध्वस्त हो गईं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों के अनुसार शारदा नहर की पटरी पर गांव को जोड़ने के लिए कुछ ही समय पहले सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन घटिया सामग्री और लापरवाही के चलते वह सड़क अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी हुई सतह हादसों को दावत दे रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण में भ्रष्ट ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के कारण सरकारी धन की खुली लूट हुई है। बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और गांव को जल्द से जल्द एक मजबूत व टिकाऊ सड़क उपलब्ध कराई जाए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 19:01:19 +0530</pubDate>
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