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                <title>Iran - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Iran RSS Feed</description>
                
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                <title>होर्मुज पर ईरान की हुकूमत: दुनिया की नब्ज पर हाथ</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div class="m_7345850882644653164WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज को खोल दिया गया है। युद्ध के बाद पहली बार यहां से </span>35<span lang="hi" xml:lang="hi">  पोत पास हुए जिसमें </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">  पोत भारत आ रहे हैं। इनमें कच्चा तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलपीजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उर्वरक व अन्य सामान है। लेकिन ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज पर उसकी हुकूमत चलती रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे छोटा लेकिन सबसे खतरनाक गलियारा है। चौड़ाई सिर्फ </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi">  किलोमीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी से होकर हर दिन दुनिया के </span>20%<span lang="hi" xml:lang="hi">  तेल और </span>30% LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरती है। मार्च </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  में ईरान ने इस गलियारे को</span>700</p></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182049/irans-rule-on-hormuz-has-its-hand-on-the-pulse"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas21.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div class="m_7345850882644653164WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज को खोल दिया गया है। युद्ध के बाद पहली बार यहां से </span>35<span lang="hi" xml:lang="hi"> पोत पास हुए जिसमें </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> पोत भारत आ रहे हैं। इनमें कच्चा तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलपीजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उर्वरक व अन्य सामान है। लेकिन ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज पर उसकी हुकूमत चलती रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे छोटा लेकिन सबसे खतरनाक गलियारा है। चौड़ाई सिर्फ </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोमीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी से होकर हर दिन दुनिया के </span>20%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तेल और </span>30% LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरती है। मार्च </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में ईरान ने इस गलियारे को बंद कर दिया। </span>700<span lang="hi" xml:lang="hi"> टैंकर फंस गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर पार कर गया। ये सिर्फ युद्ध की घोषणा नहीं थी। ये ईरान का ये कहना था कि "दुनिया की ऊर्जा की नब्ज मेरे हाथ में है"। होर्मुज क्या है और ईरान इसे क्यों चाहता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब</span>, UAE, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुवैत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कतर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इराक का पूरा तेल इसी रास्ते से जाता है। ईरान का दक्षिणी तट इस जलडमरूमध्य के उत्तर में है। भूगोल ने ईरान को स्ट्रेटेजिक लीवरेज दिया है। फरवरी </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के जरिए - पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी बना दी। अब नियम ये है: होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज को </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> सवालों का घोषणा पत्र जमा करना होगा। माल क्या है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मालिक कौन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रू की नेशनलिटी क्या है। जो नहीं मानेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस पर मिसाइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रोन हमला या कब्जे का खतरा है। मार्च </span>2026: <span lang="hi" xml:lang="hi">जब ईरान ने नल बंद कर दिया- </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को ईरान ने आधिकारिक रूप से होर्मुज बंद करने का ऐलान कर दिया। बंद होते ही</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य तेल यातायात में </span>86%<span lang="hi" xml:lang="hi"> गिरावट आई</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक मार्च को </span>19.8<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलियन बैरल/दिन की जगह सिर्फ </span>2.8<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलियन बैरल गुजरे। </span>706<span lang="hi" xml:lang="hi"> गैर-ईरानी टैंकर कतार में फंस गए। ब्रेंट क्रूड </span>10%<span lang="hi" xml:lang="hi"> उछलकर </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर पर पहुंच गया। ईरान ने कहा कि ये बंद सिर्फ अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इजरायल और यूरोपीय जहाजों के लिए है। चीन के झंडे वाले जहाजों को छूट दी गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या ईरान कानूनी तौर पर ऐसा कर सकता है</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसका छोटा सा जवाब है नहीं। </span>UNCLOS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि की धारा </span>37-44<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में सभी देशों को "ट्रांजिट पैसेज" का अधिकार है। न ईरान और न ओमान एकतरफा तरीके से इसे बंद कर सकते हैं। समुद्री कानून विशेषज्ञ रेड्जा जकारिया कहते हैं कि ईरान आत्मरक्षा का हवाला दे सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगर वो नेविगेशन रोकता है तो ये </span>UNCLOS <span lang="hi" xml:lang="hi">का उल्लंघन होगा। लेकिन असलियत में ईरान सैन्य शक्ति और भौगोलिक स्थिति से यातायात को प्रभावित कर रहा है। ये कानूनी संप्रभुता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन "डिफैक्टो कंट्रोल" है। ईरान ने अब "टोल-पास" सिस्टम शुरू कर दिया है। जहाजों को </span>PGSA <span lang="hi" xml:lang="hi">से पास लेना होगा। रिपोर्ट्स कहती हैं कि सुरक्षित गुजरने के लिए जहाजों से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख डॉलर तक मांगे जा रहे हैं। ईरान ने इनकार किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अमेरिका ने जहाजों को चेतावनी दी है कि टोल न दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे </span>IRGC <span lang="hi" xml:lang="hi">को फंड मिलेगा। दुनिया पर असर-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तेल और गैस: भारत अपनी जरूरत का </span>90%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तेल आयात करता है। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>160<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर का तेल आयात हुआ था। होर्मुज बंद होने से भारत सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। यूरोप: कतर ने </span>LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्पादन रोका तो यूरोपीय गैस कीमतें </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> बढ़ गईं। </span>LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर का किराया </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख डॉलर/दिन से ऊपर चला गया। अफ्रीका- </span>UN <span lang="hi" xml:lang="hi">महासचिव गुटेरेश ने चेताया कि अफ्रीका के तेल और उर्वरक आयात का </span>13%<span lang="hi" xml:lang="hi"> होर्मुज से आता है। बंद रहा तो महंगाई और खाद्य संकट बढ़ेगा। लेबनान में सीजफायर के बाद ईरान ने </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन के लिए होर्मुज खोल दिया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ये सिर्फ सीजफायर की अवधि के लिए है। भारत के लिए क्या मायने हैं- भारत के लिए होर्मुज "लाइफलाइन" है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">विकल्प सीमित हैं: केप ऑफ गुड होप से रास्ता </span>15 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन लंबा और </span>20% <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगा पड़ता है। रणनीति: चाबहार पोर्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के साथ डिप्लोमेसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाना। लेकिन ये सब शॉर्ट टर्म सॉल्यूशन हैं। अगर होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल स्थायी हो गया तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा हर </span>6 <span lang="hi" xml:lang="hi">महीने में दांव पर लगेगी। होर्मुज पर ईरान की हुकूमत कानून से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूगोल और मिसाइल से चलती है। वो जानता है कि दुनिया तेल के बिना </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन नहीं चल सकती। इसलिए वो कभी पूरी तरह बंद नहीं करेगा। वो सिर्फ "नल" को धीमा-तेज करेगा ताकि अमेरिका झुके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल महंगा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसकी बात मानी जाए। ये </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं सदी की नाकेबंदी है। बंदूक की जगह टोल-पास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध की जगह </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">सवालों का फॉर्म। और दांव पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था।</span></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 16:08:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय नवसंवत्सर : युगधर्म का उद्घोष बने</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारत में चैत्र मास की शुक्ल  प्रतिपदा तिथि (युगादि तिथि) से हिंदू नव वर्ष की अर्थात विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इस वर्ष यह पावन दिन(सवंत 2082 का प्रथम दिवस) भारत में सरकारी कामकाज के लिए स्वीकृत ग्रेग्ररियन कैलेंडर  जिसे हम अंग्रेज़ी/ईसाई कैलेंडर भी कहते हैं के अनुसार 30 मार्च,2025 को आ रहा है। शासन स्तर पर अंग्रेजी कैलेंडर के प्रचलन में होने के बाबजूद भारत अपनी धार्मिक, सामाजिक तथा अन्य सांस्कृतिक परंपराओं के निर्वहन के लिए भारतीय कैलेंडर को सदियों से महत्व देता रहा है।</div>
<div>  </div>
<div>भारत की ही तरह कुछ और देश भी है जो पूरी तरह ग्रेग्रेरियन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150506/indian-navasvatsar-became-the-announcement-of-yugadharma"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/hindi-divas53.jpg" alt=""></a><br /><div>भारत में चैत्र मास की शुक्ल  प्रतिपदा तिथि (युगादि तिथि) से हिंदू नव वर्ष की अर्थात विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इस वर्ष यह पावन दिन(सवंत 2082 का प्रथम दिवस) भारत में सरकारी कामकाज के लिए स्वीकृत ग्रेग्ररियन कैलेंडर  जिसे हम अंग्रेज़ी/ईसाई कैलेंडर भी कहते हैं के अनुसार 30 मार्च,2025 को आ रहा है। शासन स्तर पर अंग्रेजी कैलेंडर के प्रचलन में होने के बाबजूद भारत अपनी धार्मिक, सामाजिक तथा अन्य सांस्कृतिक परंपराओं के निर्वहन के लिए भारतीय कैलेंडर को सदियों से महत्व देता रहा है।</div>
<div> </div>
<div>भारत की ही तरह कुछ और देश भी है जो पूरी तरह ग्रेग्रेरियन कैलेंडर को नहीं मानते हैं तथा धार्मिक आदि कारणों से अपने देश के कैलेंडर को भी महत्व देते हैं जैसे ईरान, अफगानिस्तान (हिजरी कैलेंडर), इथियोपिया (इथियोपियन कैलेंडर), नेपाल (विक्रम संवत),सऊदी अरब (इस्लामिक हिजरी कैलेंडर), चीन (चीनी चंद्र कैलेंडर), भारत (विक्रम संवत), इजरायल (हिब्रू कैलेंडर) आदि।</div>
<div> </div>
<div>हिन्दूओं द्वारा नव संवत्सर के प्रथम दिवस को नव वर्ष की शुरुआत के रूप में मान्यता देने के पीछे कई  ठोस सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक तथा अध्यात्मिक कारण है।ऐसी मान्यता है कि इस तिथि पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी(ब्रह्मपुराण) तथा कालगणना (समय-गणना) प्रारंभ की थी। इसी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम तथा धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था ,इसी तिथि से सतयुग आरंभ हुआ था, इसी तिथि से चैत्र नवरात्र(देवी अराधना का पर्व) आरंभ होती है तथा इसी दिन 1875 को जागरूकता और पुनर्जागरण के प्रतीक आर्य समाज की स्थापना हुई।</div>
<div> </div>
<div>भारतीयों के लिए नवसंवत्सर इस लिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इसकी शुरुआत न्याय के प्रतीक महाराजा विक्रमादित्य ने की थी जो  वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है तथा प्राकृतिक चक्रों के अनुरूप है।वैज्ञानिक और खगोलीय दृष्टिकोण से नव संवत्सर के प्रथम दिवस पर  सूर्य  संक्रांति काल में होता है, चंद्रमा शुक्ल पक्ष में होता है तथा वसंत विषुव के निकट होती है अथार्त सूर्य और चंद्रमा दोनों उच्च ऊर्जा में होते हैं। प्रकृति  नया चक्र शुरू कर रही होती है मसलन पेड़-पौधे नई कोंपलों को जन्म दे रहे होते हैं, फसलें पक चुकी होती हैं या पकने की स्थिति में होती हैं, और मौसम का मिजाज बदल रहा होता है।</div>
<div> </div>
<div>यह तिथि इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह लगभग संपूर्ण भारत  में भारतीय नववर्ष के प्रथम दिवस के रूप में स्वीकार है, और अधिकांश भारतीय भी उसी रूप में इसका पूरे हर्ष और उल्लास से स्वागत करते हैं जैसे महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश आदि  गुड़ी पड़वा के रूप में,आंध्र प्रदेश और कर्नाटक  उगादि के रूप में तथा राजस्थान  थापना के रूप में। वहीं सिंधी समाज इस तिथि को चेती चाँद  के  रूप में तथा कश्मीरी पंडितों द्वारा इस तिथि को नवरेह के रूप में मनाया जाता है।</div>
<div> </div>
<div>एक विचार आता  है कि अंग्रेजी कैलेंडर तथा इसकी 1 जनवरी को नववर्ष के प्रथम दिवस के रूप में वैश्विक मान्यता प्राप्त है। भारत में भी अंग्रजों के शासनकाल से ही इस कलैंडर को सरकारी व निजी संस्थानों द्वारा व्यवहार में लाया जा रहा है, तथा इसकी एक जनवरी को नए साल की शुरुआती दिन के रूप में स्वीकारा जाता है। यह धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्रीय भेदभाव से परे भी दिखाई देता है।जनता के मन में भी इसी कैलेंडर की तिथियां और माह रच-बस गए हैं, तथा अधिकांश जनता मन से या बेमन से या फिर मजबूरी बस जन्म,मरण, शादी की तिथि, नोकरी में आने की तिथि, नोकरी से सेवा निवृत्त होने की तिथि,पदोन्नति की तिथि, न्यायालय में केस दर्ज करने तथा केस मुक्त होने की तिथि,गृह प्रवेश तिथि, बेटा-बेटी के जन्म तथा विवाह की तिथि, स्कूल आदि में प्रवेश की तिथि आदि सभी महत्वपूर्ण कार्यों की तिथियों को याद रखने के लिए अंग्रेजी कैलेंडर पर निर्भर है तो फिर हिन्दू कैलेंडर (विक्रम संवत्सर) की चर्चा करना, उसके माह और तिथियों को स्मरण करना तथा उसके प्रथम दिवस को अंग्रेजी कलैंडर के नववर्ष के प्रथम दिन की तुलना में अधिक महत्व देने का क्या औचित्य है? </div>
<div> </div>
<div>मेरा ऐसा मानना है कि हम भारतीयों को  खुले मन से यह विचार करना होगा कि क्या अंग्रेजी नव वर्ष (1 जनवरी) पूरी तरह से पश्चिमी अवधारणा का प्रतीक नहीं है?, क्या यह हम भारतीयों को अपनी संस्कृति से दूर नहीं करता? क्या ऐसा करने से भारतीय परंपराएं और संस्कृति धीरे-धीरे कमज़ोर नहीं होती? क्या इसका कोई धार्मिक, प्राकृतिक, आध्यात्मिक आधार है? क्या इसके मनाने के तौर-तरीकों  समाज में कृत्रिमता,अनैतिक गतिविधियाँ, उपभोक्तावाद को बढ़ावा नहीं देते?वहीं हमें इन प्रश्नों के उत्तर भी निष्पक्ष रूप से अपने आप से पूछना होगा कि क्या हमें  प्रकृति, धर्म, संस्कृति, और परंपराओं से जुड़े तथा हिन्दू (हिन्दुस्तान) कैलेंडर को महत्व देते हुए नववर्ष के प्रथम दिवस ‘गुड़ी पड़वा’को हर्ष और उल्लास से नहीं मनाना चाहिए?, क्या भारतीयों को अपनी संस्कृति की रक्षा और पहचान को बनाए रखने के लिए जाति, धर्म, राज्य से ऊपर  उठकर नव संवत्सर को अधिक महत्व नहीं देना नहीं चाहिए?</div>
<div> </div>
<div>मेरा ऐसा मानना है कि हमें अंग्रेजी कैलेंडर तथा हिन्दू कैलेंडर के नववर्ष शुरुआत की तुलनात्मक विवेचना कर के भी देखना चाहिए। यदि हम ऐसा करते हैं तो पाते हैं कि नव संवत्सर का प्रथम दिवस हमारी अपनी परंपराओं, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर की 1 जनवरी पश्चिमी परंपरा का हिस्सा है, औपनिवेशिक मानसिकता तथा सांस्कृतिक गुलामी का प्रतीक है।1 जनवरी सिर्फ एक औपचारिक तिथि परिवर्तन है, जबकि नव संवत्सर की गुड़ी पड़वा वास्तव में एक नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।</div>
<div> </div>
<div>नव संवत्सर की गुड़ी पड़वा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आती है, इसके विपरीत 1 जनवरी का कोई विशेष खगोलीय या प्राकृतिक महत्व नहीं होता; यह सिर्फ ग्रेगोरियन कैलेंडर का पहला दिन है, जिसे यूरोप में ईसाई धर्म के विस्तार के साथ अपनाया गया।नव संवत्सर धर्म, सत्कर्म, शक्ति और ज्ञान की उपासना का समय है, तथा इसे एक पर्व के रूप में उपवास, हवन और पूजा-पाठ के साथ मनाया जाता है, जो मानसिक शुद्धता और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।जबकि 1 जनवरी आतिशबाजी, पश्चिम रंग में ढली पार्टी, मौज मस्ती और दिखावे का माध्यम बन चुका है।</div>
<div> </div>
<div>हिंदू नव वर्ष (नव संवत्सर) से नवऋतु (वसंत) का आगमन होता है, जिससे पर्यावरण में भी नयापन आता है। जबकि अंग्रेजी नववर्ष की शुरुआत ऐसी किसी नयेपन की ओर संकेत नहीं करती।हिन्दू नव वर्ष के प्रथम दिवस को सैलिब्रेट करने में हमें संस्कृति, परंपरा,धर्म, अध्यात्म, इतिहास, प्रकृति, विज्ञान, राष्ट्रीय एकता, स्वास्थ्य और सकारात्मकता का संकेत और दृष्टि स्पष्ट दिखाई देती है जबकि अंग्रेजी नववर्ष का इन सबसे कोई लेना देना नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>मुझे लगता है कि यह संवत्सर यह भी प्रश्न करता है कि क्या तुम्हारी आधुनिकता में संस्कृति का प्राण बसता है? क्या विकास की अट्टालिकाओं में संस्कारों के दीप जलते हैं?या तुम उस पश्चिमी हवा में अपने मूल को ही तज बैठे हो? अतः मेरा सभी भारतवासियों से आग्रह है कि - यह नवसंवत्सर केवल तिथि नहीं,</div>
<div>यह युगधर्म का उद्घोष है। यह तुम्हें पुकारता है— अपने अभ्युदय की ओर, अपने आत्मबोध की ओर,</div>
<div>अपने स्वर को पहचानने की ओर। चेतना के इस प्रभात में अपने पूर्वजों के स्वप्नों को स्वर दो, संस्कृति को अभ्युदय दो, परंपरा को गति दो, और इस नवसंवत्सर को सच्चे अर्थों में नव बनाओ!</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/150506/indian-navasvatsar-became-the-announcement-of-yugadharma</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Mar 2025 15:40:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस ने एक अज्ञात जहाज़ से जब्त की ईरानी असॉल्ट राइफल, मिसाइल और टैंक </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>फ्रांस के नौसैनिकों ने ओमान की खाड़ी में एक अज्ञात जहाज से पिछले महीने हजारों की संख्या में असॉल्ट राइफलें, मशीनगन एवं टैंक निरोधक मिसाइलें जब्त की हैं। इन हथियारों को कथित तौर पर ईरान से यमन के हूथी विद्रोहियों के लिये भेजा जा रहा था। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी। हथियार जब्ती की यह कार्रवाई ओमान की खाड़ी में 15 जनवरी को हुयी, जो होरमुज जलडमरूमध्य से संबद्ध एक जल निकाय है। यह फारस की खाड़ी का संकरा मुहाना है, जो अरब सागर से होते हुए हिंद महासागर तक जाता है।</p>
<p>अमेरिकी केंद्रीय कमान ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127157/france-seized-iranian-assault-rifle-missiles-and-tanks-from-an"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>फ्रांस के नौसैनिकों ने ओमान की खाड़ी में एक अज्ञात जहाज से पिछले महीने हजारों की संख्या में असॉल्ट राइफलें, मशीनगन एवं टैंक निरोधक मिसाइलें जब्त की हैं। इन हथियारों को कथित तौर पर ईरान से यमन के हूथी विद्रोहियों के लिये भेजा जा रहा था। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी। हथियार जब्ती की यह कार्रवाई ओमान की खाड़ी में 15 जनवरी को हुयी, जो होरमुज जलडमरूमध्य से संबद्ध एक जल निकाय है। यह फारस की खाड़ी का संकरा मुहाना है, जो अरब सागर से होते हुए हिंद महासागर तक जाता है।</p>
<p>अमेरिकी केंद्रीय कमान ने इस जब्ती को ईरान से यमन तक हथियारों की तस्करी करार दिया है । एक अज्ञात जहाज पर लदे इन हथियारों की तस्वीर अमेरिकी केंद्रीय कमान ने बुधवार को जारी की। तस्वीरों से पता चलता है कि इन हथियारों में चीन निर्मित टाइप 56 राइफलें, रूस निर्मित मोलोट एकेएस20यू और पीकेएम-पैटर्न मशीन गन शामिल हैं। केंद्रीय कमान ने कहा है कि जब्त किये गये हथियारों में तीन हजार से अधिक राइफल और 578,000 कारतूस शामिल हैं। हथियारों की जारी की गयी तस्वीरों से पता चलता है कि इसमें 23 टैंक निरोधक मिसाइल भी हैं जो कंटेनर से संचालित होती हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों को हथियारों की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।</p>
<p>हूथी विद्रोहियों ने 2014 के आखिर में देश की राजधानी पर कब्जा कर लिया था, और मार्च 2015 से देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ संघर्षरत हैं । ईरान ने हालांकि, फ्रांस द्वारा जब्त किये गये हथियारों के बारे में तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने पकड़े गये हथियारों की तस्वीरें जारी कीं। तस्वीरों में ये हथियार अमेरिकी सेना द्वारा पकड़े गए ईरान के अन्य हथियारों के समान ही नजर आ रहे हैं।</p>
<p>फ्रांस की ओर से हथियार पकड़े जाने की यह घोषणा ऐसे समय में की गयी है जब ईरान यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस के लिए ड्रोन की अपनी खेप तथा वहां जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर पश्चिमी दबाव का सामना कर रहा है। ईरान के शहर इस्फ़हान में एक सैन्य कार्यशाला पर एक संदिग्ध इजराइली ड्रोन के हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Feb 2023 09:18:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करने वाले कैदी को गिरफ्तार कर दी फांसी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>ईरान</strong> ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने देश में जारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कथित रूप से किए गए एक अपराध के सिलसिले में एक कैदी को फांसी दे दी है। तेहरान द्वारा यह इस तरह के मामलों में दी गई मौत की पहली सजा है। ईरान की मिजान समाचार एजेंसी ने गिरफ्तार आरोपी को फांसी दिए जाने की जानकारी दी।</p>
<p>उसने बताया कि आरोपी के खिलाफ तेहरान में एक सड़क को अवरुद्ध करने और सुरक्षा बल के एक जवान पर हमला करने का आरोप सिद्ध हुआ था। ईरान 16 सितंबर को हिजाब नियमों के उल्लंघन के आरोप में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126181/iran-arrests-and-executes-prisoner-who-supported-protests"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/22.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>ईरान</strong> ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने देश में जारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कथित रूप से किए गए एक अपराध के सिलसिले में एक कैदी को फांसी दे दी है। तेहरान द्वारा यह इस तरह के मामलों में दी गई मौत की पहली सजा है। ईरान की मिजान समाचार एजेंसी ने गिरफ्तार आरोपी को फांसी दिए जाने की जानकारी दी।</p>
<p>उसने बताया कि आरोपी के खिलाफ तेहरान में एक सड़क को अवरुद्ध करने और सुरक्षा बल के एक जवान पर हमला करने का आरोप सिद्ध हुआ था। ईरान 16 सितंबर को हिजाब नियमों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार की गई 22 वर्षीय युवती महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत होने के बाद से ही विरोध-प्रदर्शनों का सामना कर रहा है।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 12:26:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ड्रोन व मिसाइल आपूर्ति के लिए ईरान से मदद ले सकता है रूस, अमेरिका ने किया दवा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>यूक्रेन में युद्ध के लिए हथियारों की आपूर्ति बनाए रखने में संघर्ष कर रहा मॉस्को अब रूसी सेना को ड्रोन विमानों और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों की आपूर्ति के लिए एक बार फिर ईरान का रुख कर सकता है। घटनाक्रम से वाकिफ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारियों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि अमेरिका इस बात को लेकर चिंतित है कि रूस आने वाले दिनों में ईरान से उन्नत पारंपरिक हथियार हासिल कर सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अमेरिका विशेष रूप से चिंतित है कि रूसी सेना ईरान से सतह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126114/russia-may-take-help-from-iran-for-drone-and-missile"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/32.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>यूक्रेन में युद्ध के लिए हथियारों की आपूर्ति बनाए रखने में संघर्ष कर रहा मॉस्को अब रूसी सेना को ड्रोन विमानों और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों की आपूर्ति के लिए एक बार फिर ईरान का रुख कर सकता है। घटनाक्रम से वाकिफ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारियों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि अमेरिका इस बात को लेकर चिंतित है कि रूस आने वाले दिनों में ईरान से उन्नत पारंपरिक हथियार हासिल कर सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अमेरिका विशेष रूप से चिंतित है कि रूसी सेना ईरान से सतह पर सतह पर मार करने वाली मिसाइलें खरीद कर सकता है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के एक राजनयिक ने कहा कि ईरान ने सुरक्षा परिषद के वर्ष 2015 के प्रस्ताव का उल्लंघन करते हुए रूस को सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन विमान बेचने की योजना बनाई है।</p>
<p>इस प्रस्ताव ने तेहरान और छह प्रमुख विश्व शक्तियों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हुए समझौते का समर्थन किया था। राजनयिक के मुताबिक, 2015 के समझौते के हस्ताक्षरकर्ताओं में रूस भी शामिल है। उन्होंने कहा कि रूस द्वारा समझौते के उल्लंघन से कहीं ज्यादा अहम यह सवाल है कि ईरान से ड्रोन और मिसाइल के बदले मॉस्को उसे क्या देगा। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/126114/russia-may-take-help-from-iran-for-drone-and-missile</link>
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                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 11:25:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिज़ाब के उग्र प्रदर्शन का रूप देखने के बाद बैकफुट पर ईरान सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>ईरान में पिछले अढ़ाई माह से हिजाब के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं । इन प्रदर्शनों की आग अब कई देशों तक पहुंच गई है। ऐसे में ईरान सरकार ने बैकफुट आते थोड़ी नरमी दिखाते हुए तय किया है कि वो अनिवार्य हिजाब कानून की एक बार फिर से समीक्षा करेगी । ईरान का हिजाब कानून कई दशक पुराना है और इसके तहत महिलाओं को सख्‍त ड्रेस कोड को मानना पड़ता है। 16 सितंबर से शुरू  ये प्रदर्शन देश में उस समय और उग्र हो गए जब 22 साल की महाशा अमीन की पुलिस की हिरासत में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126020/iran-government-on-backfoot-after-seeing-the-fierce-form-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/iran.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>ईरान में पिछले अढ़ाई माह से हिजाब के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं । इन प्रदर्शनों की आग अब कई देशों तक पहुंच गई है। ऐसे में ईरान सरकार ने बैकफुट आते थोड़ी नरमी दिखाते हुए तय किया है कि वो अनिवार्य हिजाब कानून की एक बार फिर से समीक्षा करेगी । ईरान का हिजाब कानून कई दशक पुराना है और इसके तहत महिलाओं को सख्‍त ड्रेस कोड को मानना पड़ता है। 16 सितंबर से शुरू  ये प्रदर्शन देश में उस समय और उग्र हो गए जब 22 साल की महाशा अमीन की पुलिस की हिरासत में मौत हो गई थी। महाशा शरिया कानून की जिम्‍मेदारी संभालने वाली मॉरेल पुलिस से भिड़ गई थीं।</p>
<p>प्रदर्शनकारियों ने उस समय से ही हिजाब जलाने शुरू कर दिए और सरकार के खिलाफ आवाज तेज होने लगी थी। अमीनी की मौत के बाद से न सिर्फ ईरान बल्कि दुनिया के हर हिस्‍से में बसी ईरानी महिला ने हिजाब को जलाना शुरू कर दिया था। तेहरान के उत्‍तर में जहां पर फैशन सबसे अहम है वहां पर इस प्रदर्शन को बड़े पैमाने पर देखा गया था। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्‍मद जफर मोताजेरी ने कहा है कि संसद और न्‍यायपालिका दोनों ही इस दिशा में काम कर रहे हैं और यह देख रहे हैं कि क्‍या इन कानूनों में बदलाव की जरूरत है। ईरानी न्‍यूज एजेंसी इस्‍ना के मुताबिक अभी तक यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि कानूनों में कैसा बदलाव होगा।</p>
<p>ईरान के ये कानून ज्‍यादातर रूढ़‍िवादी राजनेताओं के हाथ में हैं। पिछले हफ्ते ही एक टीम ने संसद के सांस्‍कृतिक आयोग से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि अगले एक दो हफ्ते में इस मुलाकात का नतीजा आ जाएगा। राष्‍ट्रपति इब्राहिम रईसी ने भी शनिवार को कहा है कि ईरान के संविधान से जुड़ीं गणतांत्रिक और इस्‍लामिक संस्‍थाओं से भी संपर्क किया गया है। बता दें कि ईरान में हिजाब कानून के तहत महिलाओं को हर कीमत पर अपने बालों को सार्वजनिक स्‍थल पर ढक कर रखना होता है। इब्राहिम रईसी जो एक मौलाना हैं और जिन्‍हें देश के हर रूढ़‍िवादी वर्ग का समर्थन हासिल है, उन्‍हें देश के युवाओं का गुस्‍सा झेलना पड़ रहा है। ईरान केयुवा, हिजाब कानून को 'इस्‍लामिक समाज में नैतिक भ्रष्‍टाचार को सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ाने का जरिया' मानते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/126020/iran-government-on-backfoot-after-seeing-the-fierce-form-of</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Dec 2022 12:04:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन का समर्थन करने पर सेलिब्रिटी शेफ की पीट-पीट कर दी गई हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात <br /></strong></p>
<p>ईरान में जारी हिजाब विरोधी प्रदर्शन के दौरान  एक सेलिब्रिटी शेफ की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई । सेलिब्रिटी शेफ महर्शाद शाहिदी, जो ईरान के जेमी ओलिवर के नाम से मशहूर थे को रिवोल्यूशनरी गार्ड बलों ने कथित तौर पर पीट-पीट कर मार डाला। महर्शाद शाहिदी की मौत उनके 20वें जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले हुई है।   शनिवार को उनके अंतिम संस्कार के दौरान हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।</p>
<p>द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक 19 साल के शेफ को अराक शहर में विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। यहां, ईरान के रिवोल्यूशनरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/125348/celebrity-chef-lynched-for-supporting-anti-hijab-protests-in-iran"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-11/chef.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात <br /></strong></p>
<p>ईरान में जारी हिजाब विरोधी प्रदर्शन के दौरान  एक सेलिब्रिटी शेफ की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई । सेलिब्रिटी शेफ महर्शाद शाहिदी, जो ईरान के जेमी ओलिवर के नाम से मशहूर थे को रिवोल्यूशनरी गार्ड बलों ने कथित तौर पर पीट-पीट कर मार डाला। महर्शाद शाहिदी की मौत उनके 20वें जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले हुई है।   शनिवार को उनके अंतिम संस्कार के दौरान हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।</p>
<p>द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक 19 साल के शेफ को अराक शहर में विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। यहां, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हिरासत में डंडों से पीट-पीट कर उन्हें मार डाला था। उनके सिर पर डंडों से तब तक मारा गया, जब तक वह मर नहीं गए। वहीं शाहिदी के परिवार ने कहा कि उन पर मौत की वजह हार्ट अटैक बताने का दबाव डाला जा रहा है। दूसरी ओर ईरानी अधिकारियों ने शेफ के मौत की जिम्मेदारी से इनकार कर दिया है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान के मुख्य न्यायाधीश अब्दोलमेहदी मौसवी ने यहां तक कहा कि शेफ के हाथ, पैर या खोपड़ी में फ्रैक्चर या चोट के कोई संकेत नहीं थे। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनकी मौत के लिए ईरानी अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। ईरानी अमेरिकी लेखक डा. नीना अंसारी ने लिखा, 'वह बूटे रेस्टोरेंट के एक प्रभावशाली शेफ थे। ईरान में सुरक्षा बलों द्वारा उन्हें बेरहमी से पीटा गया था। कल उनका 20वां जन्मदिन होता। हम कभी नहीं भूलेंगे। हम कभी माफ नहीं करेंगे'। </p>
<p>बता दें कि ईरान में 22 साल की महसा अमीनी की नैतिकता पुलिस की पिटाई से मौत हो गई थी। उन्हें गलत तरीके से हिजाब पहनने के कारण मारा गया था। इस घटना के बाद से ही ईरान में प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। तब से लेकर अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। इस प्रदर्शन को ईरान अमेरिका की साजिश के रूप में देख रहा है। ईरान के खिलाफ दुनिया भर में प्रदर्शन देखने को मिला है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Nov 2022 00:15:04 +0530</pubDate>
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