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                <title>Social Media - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Social Media RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भाजपा कार्यकर्ता राष्ट्र के निर्माता होते है-विधायक राजमणि कोल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>कोराव (प्रयागराज)</strong></div>
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<div>भारतीय जनता पार्टी बड़ोखर मंडल शारदा कान्वेंट स्कूल बड़ोखर में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 की दो दिवसीय कार्यशाला रविवार को समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में पार्टी के वक्ताओं ने संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन, सोशल मीडिया तथा सरकार की उपलब्धियों पर कार्यकर्ताओं को विस्तृत प्रशिक्षण दिया।</div>
<div>  </div>
<div>द्वितीय दिवस के चौथे सत्र में जिला उपाध्यक्ष राजेश्वरी तिवारी ने संगठन विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण विषय पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन का विस्तार केवल सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि समाज में राष्ट्रचेतना जागृत करने के लिए किया जाता है।</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172933/bjp-workers-are-the-builders-of-the-nation-mla"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/rajneeti2.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div> </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>कोराव (प्रयागराज)</strong></div>
<div> </div>
<div>भारतीय जनता पार्टी बड़ोखर मंडल शारदा कान्वेंट स्कूल बड़ोखर में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 की दो दिवसीय कार्यशाला रविवार को समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में पार्टी के वक्ताओं ने संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन, सोशल मीडिया तथा सरकार की उपलब्धियों पर कार्यकर्ताओं को विस्तृत प्रशिक्षण दिया।</div>
<div> </div>
<div>द्वितीय दिवस के चौथे सत्र में जिला उपाध्यक्ष राजेश्वरी तिवारी ने संगठन विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण विषय पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन का विस्तार केवल सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि समाज में राष्ट्रचेतना जागृत करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच बनाकर संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।</div>
<div> </div>
<div>पांचवें सत्र में भाजपा जिला मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार चतुर्वेदी ने बूथ प्रबंधन एवं ‘मन की बात’ कार्यक्रम पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि बूथ समितियों में सभी वर्गों का समावेश, निरंतर संवाद, सम्पर्क प्रवास और नियमित बैठकें ही “मेरा बूथ सबसे मजबूत” अभियान की आधारशिला हैं।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने बताया कि यदि बूथ स्तर पर नियमित अवलोकन और विश्लेषण के साथ कार्य किया जाए तो संगठन की मजबूती सुनिश्चित होती है। उन्होंने बूथ पर आयोजित होने वाले छह प्रमुख कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सामूहिक रूप से सुनने की संगठनात्मक रूपरेखा भी प्रस्तुत की।</div>
<div> </div>
<div>छठे सत्र में पूर्व जिला मंत्री अनिल मिश्र ने सोशल मीडिया, नमो ऐप, सरल ऐप तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग के बारे में कार्यकर्ताओं को बिंदुवार जानकारी दी और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर बल दिया।</div>
<div> </div>
<div>समापन सत्र को संबोधित करते हुए कोरांव विधायक राजमणि कोल ने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें उद्योगों के नाम पर केवल ऋण देकर संस्थाओं को बंद होने की स्थिति में छोड़ देती थीं, जबकि वर्ष 2017 के बाद भाजपा सरकार ने देश-विदेश से उद्योगों को लाकर युवाओं को रोजगार देने का कार्य किया है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना के साथ बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा किसानों-नौजवानों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। साथ ही सरकारी नौकरियों के साथ व्यापार और उद्योग के लिए नि:शुल्क ऋण योजनाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>कार्यशाला के समापन सत्र की अध्यक्षता प्रांतीय परिषद सदस्य रामअवध कुशवाहा ने की, जबकि स्वागत एवं आभार मंडल अध्यक्ष रामराज सिंह पटेल ने व्यक्त किया।</div>
<div> </div>
<div>जमुना प्रसाद मिश्र,पवन कुमार पटेल,सूर्यवली पांडेय,अमरेन्द्र कुशवाहा आदि ने अलग-अलग सत्रो की अध्यक्षता की 24 घंटे के प्रशिक्षण कार्यशाला में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 00:57:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छात्रों को बौद्धिक विकास के लिए अखबार पढ़ना होगा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी सरकारी बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में छात्रों के लिए अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है. शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा में 10 मिनट का समय अखबार पठन के लिए तय किया गया है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों अखबारों को शामिल किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करना, स्क्रीन टाइम कम करना, सामान्य ज्ञान बढ़ाना और आलोचनात्मक सोच को मजबूत करना है. आपको बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में अखबार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164705/students-have-to-read-newspaper-for-intellectual-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/....jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी सरकारी बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में छात्रों के लिए अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है. शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा में 10 मिनट का समय अखबार पठन के लिए तय किया गया है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों अखबारों को शामिल किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करना, स्क्रीन टाइम कम करना, सामान्य ज्ञान बढ़ाना और आलोचनात्मक सोच को मजबूत करना है. आपको बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य करने संबंधी फैसला लेकर सराहनीय कदम उठाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मोबाइल और सोशल मीडिया की लत ने यंगिस्तान को पढ़ाई से दूर कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे वर्चुअल दुनिया में ऐसे खो गए हैं कि उन्हें अपने आस पड़ोस में क्या हो रहा, इसकी कोई खबर तक नहीं रहती। सुबह आंख खुलते ही मोबाइल देखना शुरू कर देते हैं और शाम तक यही प्रक्रिया चली रहती है। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई ने बच्चों के हाथों में मोबाइल थमा दिया। अब यह कहीं न कहीं बच्चों के भविष्य में रुकावट बन रहा है। बच्चे अब पढ़ाई और खेल मैदान से दूर होते जा रहे हैं। समय समय पर प्रबुद्ध लोगों ने मोबाइल फोन के बढ़ते प्रचलन पर चिंता जताई है।सोशल मीडिया और इंटरनेट की लत युवाओं को न केवल पढ़ाई से दूर कर रही है, बल्कि युवा वर्ग खेल के मैदान से भी दूर होता जा रहा है। अभिभावकों को इस विषय पर ध्यान देने की खासी जरूरत है। लाड प्यार में बच्चों और युवाओं का भविष्य बर्बाद होने से बचाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की सरकार ने इस हालात से निबटने के लिए प्राथमिक कदम उठाया है। इससे विद्यार्थियों को कई फायदे होंगे। देश के हर स्कूल में प्रार्थना सभा के दौरान कुछ समय अखबार पढ़ने के लिए निर्धारित होना चाहिए। आज जब डिजिटल माध्यमों पर हद से ज्यादा निर्भरता बढ़ गई है और फेक न्यूज का तेजी से प्रचार-प्रसार हो रहा है, तब अखबार ही जागरूकता का सबसे बड़ा जरिया है। जो बच्चे रोजाना अखबार पढ़ते हैं, उनका शब्दज्ञान बेहतर हो जाता है। उनमें पढ़ने की आदत तो विकसित होती ही है, वे अपने विचारों को अधिक कुशलतापूर्वक अभिव्यक्त कर पाते हैं। ऐसे विद्यार्थी एकाग्रचित्त होकर अध्ययन कर पाते हैं। परीक्षा में उत्तर लिखते समय इसका फायदा होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रायः ऐसे प्रयासों को यह कहकर खारिज किया जाता है कि 'स्कूली बच्चों का खबरों की दुनिया से कोई लेना-देना नहीं होता, लिहाजा उन्हें सिर्फ पाठ्यपुस्तकें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।' वास्तव में यह धारणा सही नहीं है। भले ही अखबारों में छपने वाली खबरों का स्कूली पढ़ाई और परीक्षाओं से ज्यादा संबंध न हो, लेकिन उन्हें पढ़ने-सुनने से विद्यार्थियों के सोचने-समझने का नजरिया बदलता है। चाहे उन्हें शुरुआत में कई खबरें समझ में न आएं। एक समय ऐसा आएगा, जब वे खबरों में रुचि लेने लगेंगे। उनकी समझ बढ़ेगी। आज स्कूलों में कई बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें फिल्मी सितारों के बारे में तो बहुत कुछ मालूम है। वे देश के प्रमुख पदों पर सेवारत लोगों के नाम नहीं जानते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ये बच्चे जब भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं तो बहुत मुश्किलों का सामना करते हैं। इन्हें सामान्य ज्ञान और समसामयिक घटनाओं के बारे में कई किताबें पढ़नी पड़ती हैं। इसमें काफी समय लगता है। स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य कर देने से इन बच्चों का भला हो जाएगा। कई लोग कहते हैं- 'बच्चे स्कूलों में अखबार पढ़ेंगे तो बाकी पढ़ाई कब करेंगे? क्या इससे कक्षाओं के कालांश बाधित नहीं होंगे?' ऐसी आशंकाएं निराधार हैं। प्रार्थना सभा में अखबार की बड़ी खबरें पढ़ने में 10 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगेगा। अगर कोई ऐसी खबर है, जिससे सामान्य ज्ञान आदि का प्रश्न बनाया जा सकता है तो उसे स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लिखा जा सकता है। बाद में, बच्चे वहां से अपनी नोटबुक में लिख सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे उनके पास कुछ ही दिनों में महत्त्वपूर्ण जानकारी का भंडार हो जाएगा। शनिवार को छुट्टी से पहले और विशेष अवसरों पर इन प्रश्नों पर आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा सकता है। उनमें विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत करने से उनका उत्साह बढ़ेगा। ये बच्चे फेक न्यूज और साइबर ठगी से लड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। असली खबर क्या है, अफवाह क्या है, साइबर ठग कैसे लोगों को शिकार बना रहे हैं - इन सवालों के जवाब इन्हें अखबारों से मिल जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल के वर्षों में आईएएस, आईपीएस, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और वैज्ञानिक तक साइबर ठगों के शिकार बन गए, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि बदलते दौर के साथ अपराधों के तौर-तरीके बदल रहे हैं। अगर वे रोजाना अखबार पढ़ते तो उन्हें इस बात की जानकारी होती। पांच रुपए का अखबार और उसे पढ़ने के लिए दिया गया समय, ऐसा निवेश है जो भविष्य में आपके करोड़ों रुपए बचा सकता है। किशोर हों या बुजुर्ग, अखबार पढ़ने को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संभव है कि देश के दूसरे प्रदेशों में भी राज्य सरकारों द्वारा यूपी सरकार के तर्ज पर तमाम स्कूलों में बच्चों को नवीनतम ज्ञान से अपडेट रखने के लिए अखबारों के पठन पाठन के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे यह कोविड के बाद से सर्कुलेशन से जूझ रहे अखबारों के लिए संजीवनी का काम करेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 20:10:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस के नाकामी की हो रही है चर्चा, सीसीटीवी कैमरे मे कैद हैं चोरी की वारदातें, फिर भी परिणाम नदारद</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती-</strong> बस्ती जिले के कई मामले सीसीटीवी कैमरों में कैद होने के बावजूद पुलिस चोर या चोरी के माल तक पहुंच पाई। पीड़ित के साथ साथ स्थानीय लोग इसे पुलिस की घोर नाकामी मान रहे हैं। कुछ महीने पहले वी मार्ट के सामने से 14 नवम्बर 2025 को अधिवक्ता की बाइक होण्डा सी.बी. साइन नम्बर यू.पी. 51 ए.एन. 9013 चुराते हुये युवक सीसीटीवी कैमरे मे कैद हुआ। बड़े आराम से युवक टहलते हुये आता है और बाइक लेकर चला जाता है। इस घटना के खुलासे की बात तो दूर है कोतवाली पुलिस ने एफआईआर तक नही दर्ज किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसी तरह</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163131/polices-failure-is-being-discussed-incidents-of-theft-are-captured"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/1701905770_police-(1).gif" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती-</strong> बस्ती जिले के कई मामले सीसीटीवी कैमरों में कैद होने के बावजूद पुलिस चोर या चोरी के माल तक पहुंच पाई। पीड़ित के साथ साथ स्थानीय लोग इसे पुलिस की घोर नाकामी मान रहे हैं। कुछ महीने पहले वी मार्ट के सामने से 14 नवम्बर 2025 को अधिवक्ता की बाइक होण्डा सी.बी. साइन नम्बर यू.पी. 51 ए.एन. 9013 चुराते हुये युवक सीसीटीवी कैमरे मे कैद हुआ। बड़े आराम से युवक टहलते हुये आता है और बाइक लेकर चला जाता है। इस घटना के खुलासे की बात तो दूर है कोतवाली पुलिस ने एफआईआर तक नही दर्ज किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी तरह कोतवाली थाना अंतर्गत सोनूपार चैकी क्षेत्र के कैली अस्पताल कैम्पस में कुछ दिन पहले दो युवक साइकिल चोरी करते हुए सीसीटीवी में कैद हुये थे। वीडियो फुटेज साफ दिखाता है कि दोनों आरोपी आराम से कैम्पस में घुसे और साइकिल लेकर फरार हो गए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुका है। पीड़ितों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध कराया, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो चोरी हुई साइकिल बरामद हुई और न ही चोरों का कोई सुराग लगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी तरह कोतवाली थाना रौता चैकी क्षेत्र में रेनू राय के अस्पताल के ठीक सामने खड़ी मोटरसाइकिल की डिग्गी से सामान और हेलमेट चोरी कर लिया गया। पूरी वारदात अस्पताल के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई जिसमे चोर का चेहरा और हरकतें साफ दिखाई दे रही हैं। इस मामले मे भी पुलिस अब तक कोई ठोस परिणाम नही दे पाई। न चोर पकड़े गए, न सामान वापस मिला। कई ऐसे मामले और हैं जिनमे चोरी की वारदात सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है लेकिन पुलिस इन मामलों को ठंडे बस्ते मे डाल दिया। अब यह दावे के साथ नही कहा जा सकता है कि जो मामले सीसीटीवी मे कैद हो रहे हैं उसका अनावरण अनिवार्य रूप से हो ही जायेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन दोनों मामलों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब चोर सीसीटीवी में कैद हैं, वीडियो सबूत मौजूद हैं, फिर भी पुलिस किसी नतीजे पर क्यों नही पहुंची। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी चोरियों पर भी अगर पुलिस इतनी निष्क्रिय रहेगी तो बड़े अपराधों के खुलासो पर क्या भरोसा किया जाए ? लोग पूछ रहे हैं क्या बस्ती पुलिस के पास सीसीटीवी फुटेज देखने और उसका एनालिसिस करने की तकनीकी क्षमता नहीं है? क्या गश्त और खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है? या फिर पुलिस महकमे में इतनी सुस्ती है कि सबूत होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही? बस्ती पुलिस की इस नाकामी से आम जनता में भय और असुरक्षा का माहौल बढ़ रहा है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 16:53:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में आतंकी खतरे की नई परतें और ज़ीरो-टॉलरेंस की राह, आतंक का नया साया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत आज दुनिया के उन चंद देशों में है जहाँ बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार के खतरे एक साथ मौजूद हैं। पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद के तौर-तरीकों, तकनीकी क्षमता, फंडिंग और नेटवर्क की संरचना में बदलाव आया है। इसी परिवर्तित माहौल ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।ड्रोन से हथियारों की तस्करी,आतंकी मॉड्यूल का पुनर्जीवन,सरहदी क्षेत्रों में पाकिस्तान प्रायोजित आतंक, और देश के अंदर गैंगस्टरआतंकी गठजोड़ आदि ये सभी खतरे भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">दिल्ली में हाल का आतंकी हमला और उसके पीछे छिपे मॉड्यूल को बेनकाब करने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161271/new-layers-of-terrorist-threat-in-india-and-the-path"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(4)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत आज दुनिया के उन चंद देशों में है जहाँ बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार के खतरे एक साथ मौजूद हैं। पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद के तौर-तरीकों, तकनीकी क्षमता, फंडिंग और नेटवर्क की संरचना में बदलाव आया है। इसी परिवर्तित माहौल ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।ड्रोन से हथियारों की तस्करी,आतंकी मॉड्यूल का पुनर्जीवन,सरहदी क्षेत्रों में पाकिस्तान प्रायोजित आतंक, और देश के अंदर गैंगस्टरआतंकी गठजोड़ आदि ये सभी खतरे भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">दिल्ली में हाल का आतंकी हमला और उसके पीछे छिपे मॉड्यूल को बेनकाब करने में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत को चुनौती सिर्फ सीमा पर नहीं, बल्कि देश के भीतर भी गहरी है।</div>
<div style="text-align:justify;">आतंकवाद का बदलता चेहरा तकनीक और नेटवर्क का संगम पर गहरी पैठ होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दशकों तक आतंकवाद सीमा-पार प्रशिक्षित आतंकियों, घुसपैठ और हथियारों की पारंपरिक मार्गों से आपूर्ति पर निर्भर रहा। लेकिन आज यह स्थिति बदल चुकी है। ड्रोन तस्करी  खतरनाक तकनीक का दुरुपयोग  हो रहा है।पिछले चार–पाँच वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता जताई है कि पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन रोज़मर्रा की घटनाओं में शामिल हो चुके हैं।इनसे भेजे जा रहे हैं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>AK सीरीज की राइफलें, पिस्तौल ग्रेनेड RDस नकली मुद्रा</strong></div>
<div style="text-align:justify;">हेरोइन और ड्रग्स ।यह ड्रोन रात के अंधेरे में 5–7 किलो सामान लेकर 20–30 किमी भारत की सीमा तक आ जाते हैं।यह नया तरीका दो खतरों को जन्म देता है आतंकियों को बिना मानव जोखिम के हथियार मिल जाते हैं। इन हथियारों का नेटवर्क गैंगस्टरों, तस्करों और आतंकी संगठनों के गठबंधन को मजबूत करता है।. देश के भीतर का खतरा  गैंगस्टरआतंकी गठजोड़ भारत के लिए आज सबसे खतरनाक पहलू यह है कि आतंक फैलाने वाले कई मॉड्यूल अब अकेले नहीं चलते। वे देश के कुख्यात गैंगस्टरों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> क्यों बढ़ रहा है गैंगस्टरों का प्रभाव?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">जेलों से रिमोट-कंट्रोल की तरह अपराध संचालित करना सोशल मीडिया से भर्ती और धन उगाही विदेशों में बैठे गिरोह सरगनाओं की शरण हथियारों और ड्रग तस्करी से भारी फंडिंग से आंतरिक समस्या बढ़ रही है। इसी कारण कई आतंकी संगठन स्थानीय नेटवर्क को अपने काम में इस्तेमाल करने लगे हैं।  गैंगस्टरआतंकी गठजोड़ के परिणाम खतरनाक आते है। छोटे शहरों और गांवों तक हथियार पहुंचना स्थानीय अपराधियों का आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल धार्मिक और साम्प्रदायिक तनाव पैदा करना मुख्य कारण है। टारगेट किलिंग और फिरौती जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इनका उद्देश्य देश को अस्थिर करना, युवा पीढ़ी को भ्रमित करना और समाज में भय का माहौल बनाना है।</div>
<div style="text-align:justify;">दिल्ली हमला और NIA की जांच में अनेक रहष्य उजागर हुए है।हर पहलू उजागर करता है कि देश के लिए आतंकवाद की चुनौती भरपूर है।इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।दिल्ली में हाल में हुए आतंकी हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया। जांच में सामने आए कई पहलू चौंकाने वाले थे। हथियार ड्रोन से आए</div>
<div style="text-align:justify;">मॉड्यूल में विदेशी फंडिंग के निशान,. स्थानीय गैंगस्टर की भूमिका सोशल मीडिया पर एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन  रेकी करने में युवाओं का इस्तेमाल आदि सभी पुलिस प्रशासन के लिये खतरनाक है। NIA ने पूरे मॉड्यूल को तोड़कर यह साफ किया कि यदि जांच एजेंसियाँ सक्रिय न हों तो आतंकी देश की राजधानी तक को निशाना बना सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बाहरी खतरों से बड़ी चुनौती आंतरिक आतंकवाद</strong></div>
<div style="text-align:justify;">हालाँकि पाकिस्तान, चीन और तालिबान समर्थित तत्वों से बाहरी खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन आज सबसे बड़ी चिंता यह है किभारत के लिए सबसे बड़ा खतरा अब देश के अंदर का आतंकवाद है।यह आतंकवाद दिखने में स्थानीय अपराध लगता है, लेकिन जड़ें अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ी होती हैं। आज यह आंतरिक आतंकवाद तीन स्तरों पर काम कर रहा है। गैंगस्टर  क्रिमिनल नेटवर्क,कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसारऔर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के प्रयास इन तीनों को मिलकर रोकना सबसे कठिन काम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत ने वर्षों तक आतंकवाद से जंग लड़ी है। लेकिन आज की परिस्थितियों में नई रणनीतियों की आवश्यकता है।  ड्रोन-रोधी तकनीक का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार,सीमा क्षेत्रों में एंटी-ड्रोन गन और जैमिंग सिस्टम और आधुनिक रडार से 2–3 किमी दूर डिटेक्शन आदि समय की मांग है।BSF और सेना के लिए ड्रोन-वारफेयर प्रशिक्षण जरूरी है। गैंगस्टरों पर  जीरो टॉलरेन्स नीति व्यापक और मजबूत दृढ़ शक्ति की जरूरत है।</div>
<div style="text-align:justify;">जेलों से होने वाले संचालन पर डिजिटल नकेल बहुत आवश्यक है। हाई-प्रोफाइल अपराधियों के लिए विशेष निगरानी की आवश्यकता है।विदेशों से चल रहे गैंगस्टर सिंडिकेट पर इंटरपोल की मदद से संपत्ति ज़ब्ती, आर्थिक कार्रवाई, और मनी ट्रेल पर रोक आदि निगरानी आतंकवाद को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाएगा। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग औरकट्टरपंथ फैला रहे खातों की तुरंत ब्लॉकिंग होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं की ब्रेनवाशिंग रोकने के लिए साइबर सेंटर्स और ऑनलाइन फंडिंग पर निगरानी करनी होगी। स्थानीय पुलिस का आधुनिकीकरण और थानों में तकनीकी प्रशिक्षण की पूर्व तैयारी आतंकवाद को जड़ से खत्म किया जा सकता है। ATS-SOG और NIA जैसी एजेंसियों से समन्वय औऱ शहरी और ग्रामीण इलाकों में विशेष खुफिया नेटवर्क बढ़ाया जाना चाहिए। शिक्षा, जागरूकता और समाज की भूमिका अहम है क्योकि आतंकवाद सिर्फ पुलिस से नहीं रुकता, बल्कि समाज की जागरूकता भी जरूरी है। युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने के लिए काउंसलिंग जरूरी है। सामाजिक सद्भाव के कार्यक्रम शिक्षा और रोजगार के अवसर और धार्मिक संगठनों की सकारात्मक भूमिका आज के परिपेक्ष्य में खास स्थान रखती है। जीरो टॉलरेन्स क्या है और कैसे लागू हो सकती है? जीरो टॉलरेन्सका अर्थ है आतंकी गतिविधि का न तो समर्थन, न सहानुभूति, न अवसर।सिर्फ और सिर्फ कार्रवाई। जीरो टॉलरेन्स के मुख्य तत्व है उस पर अमल जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानून का कठोरतम उपयोग UAPA, NSA, PMLA जैसे कानूनों का सख्त उपयोग औऱ आतंक से जुड़े हर व्यक्ति की गिरफ्तारी आवश्यक होनी चाहिए।आर्थिक जाल को तोड़ना हवाला नेटवर्क,फर्जी कंपनियाँ ड्रग तस्करी पर लगाम और. फास्ट ट्रैक कोर्ट के परिणाम आदि प्रणाली बहुत मददगार हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और  आतंकी विचारधारा का दमन  के साथ हर समय जांच जरूरी है।सतर्कता ही सुरक्षा बहुत आवश्यक है।भारत जैसे विशाल, विविध और जनसंख्या वाले देश में आतंकवाद को रोकने की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।हर स्तर पर सतर्कता और निरंतर जांच होनी चाहिए। सीमा पर सुरक्षा,हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग और बड़े शहरों में निगरानी भी उतनी ही आवश्यक है।साइबर अपराध की मॉनिटरिंग एवं स्कूल कॉलेजों में जागरूकता होनी ही चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब पूरा तंत्र हर समय सतर्क रहता है, तब आतंकवादियों के लिए कोई रास्ता नहीं बचता। भारत आतंकवाद से लड़ने की लंबी यात्रा तय कर चुका है। लेकिन आज जिस तकनीकी और नेटवर्क आधारित आतंकवाद का उदय हुआ है, वह पारंपरिक आतंकवाद से कहीं अधिक खतरनाक है।ड्रोन का इस्तेमाल,गैंगस्टर–आतंकी गठजोड़,सोशल मीडिया से कट्टरपंथ औ राजधानी तक हमलों की कोशिश करना यह सभी संकेत हैं कि लड़ाई अभी बाकी है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत का सुरक्षा तंत्र, NIA, RAW, IB, BSF और राज्य पुलिस पहले से कहीं अधिक सक्षम, आधुनिक और सतर्क हैं। जीरो टॉलरेन्स ही वह रास्ता है जो भारत को सुरक्षित बना सकता है। इसके लिए सरकार, प्रशासन, समाज और नागरिक सभी को एक साथ खड़ा होना होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 16:53:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संवाद संस्कृति:बच्चों को गलत निर्णय लेने से रोक सकती है</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div style="text-align:justify;">हाल ही में दिल्ली के एक 16 वर्षीय किशोर द्वारा आत्महत्या की दुखद घटना समाज में संवादहीनता की बढ़ती समस्या की ओर गंभीर संकेत देती है। यदि शिक्षक, माता-पिता या परिवार के सदस्य बच्चों की बातों को धैर्यपूर्वक सुनें और संवाद का खुला वातावरण बनाएं, तो ऐसी अनेक घटनाओं को रोकना संभव है। बाल मनोविज्ञान स्पष्ट रूप से बताता है कि बच्चों की भावनाओं, दुविधाओं और आंतरिक संघर्षों को समझने के लिए संवाद संस्कृति अत्यंत आवश्यक है।</div>
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<div style="text-align:justify;">बच्चे अत्यंत संवेदनशील होते हैं। वे अनेक अच्छे-बुरे अनुभव चाहकर भी अक्सर अभिव्यक्त नहीं कर पाते। भय, संकोच या डांट की आशंका के</div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161265/communication-culture-can-prevent-children-from-taking-wrong-decisions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/hindi-divas31.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div style="text-align:justify;">हाल ही में दिल्ली के एक 16 वर्षीय किशोर द्वारा आत्महत्या की दुखद घटना समाज में संवादहीनता की बढ़ती समस्या की ओर गंभीर संकेत देती है। यदि शिक्षक, माता-पिता या परिवार के सदस्य बच्चों की बातों को धैर्यपूर्वक सुनें और संवाद का खुला वातावरण बनाएं, तो ऐसी अनेक घटनाओं को रोकना संभव है। बाल मनोविज्ञान स्पष्ट रूप से बताता है कि बच्चों की भावनाओं, दुविधाओं और आंतरिक संघर्षों को समझने के लिए संवाद संस्कृति अत्यंत आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बच्चे अत्यंत संवेदनशील होते हैं। वे अनेक अच्छे-बुरे अनुभव चाहकर भी अक्सर अभिव्यक्त नहीं कर पाते। भय, संकोच या डांट की आशंका के कारण वे अपने मन की बात छुपा लेते हैं। ऐसे में परिवार और शिक्षक की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करें, जहाँ वे बिना डर, झिझक या मूल्यांकन की चिंता के अपनी समस्या, गलती, पीड़ा या अनुभव स्वतंत्र रूप से साझा कर सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ध्यान रखने योग्य बात है कि बच्चे ‘उपदेश’ से कम और ‘पर्यावरण’ से अधिक सीखते हैं। यदि घर में संवाद को एक नियमित आदत के रूप में अपनाया जाए, परिवार के सदस्य एक-दूसरे की बात ध्यानपूर्वक सुनें, तो बच्चे स्वाभाविक रूप से अपना सुख-दुख आगे बढ़कर साझा करने लगते हैं। घर में प्रतिदिन 10–15 मिनट का “फैमिली-टाइम” बच्चों में विश्वास, सुरक्षा और आत्मीयता की भावना विकसित करने में अत्यंत प्रभावी हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब बच्चा कुछ बताता है, तो तुरंत प्रतिक्रियाएँ देना,जैसे “तुमने ही किया होगा”, “यह तो गलत है”, “ऐसा क्यों किया?”-उसके आत्मविश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। बेहतर है कि बच्चों को धैर्यपूर्वक अपनी बात पूरी करने दें। इससे उनमें निष्पक्ष संवाद, भरोसा और खुलापन बढ़ता है। जो बड़े हैं, मार्गदर्शक की भूमिका में हैं, उन्हें ‘पहले सहानुभूति, फिर सलाह’ के सिद्धांत पर चलना चाहिए। सामान्यतः भावनात्मक समर्थन के बाद दिया गया मार्गदर्शन अधिक प्रभावी और स्वीकार्य होता है। इससे बच्चा सच बोलने में सहजता महसूस करता है और परिवार पर उसका भरोसा मजबूत होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बच्चों की निजता का सम्मान अत्यंत महत्वपूर्ण है। बच्चा जो भी व्यक्तिगत बात साझा करता है, उसे परिवारजनों, रिश्तेदारों या दोस्तों के बीच चर्चा या मज़ाक का विषय न बनाएं। बच्चे की बातों की गोपनीयता बनाए रखना ही विश्वास की वास्तविक नींव है। जब बच्चा देखता है कि उसकी निजी भावनाएँ सुरक्षित हैं, तो वह आगे भी परिवार के साथ खुलकर संवाद करना सीखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिर्फ गलतियों पर ध्यान देने से संवाद कमजोर होता है; इसलिए आवश्यक है कि ईमानदारी, साहस, प्रयास, मित्रता, सत्य बोलने जैसी सकारात्मक बातों पर तुरंत प्रशंसा दी जाए। सराहना बच्चे की आत्मछवि को मजबूत बनाती है और भविष्य में भी संवाद के लिए प्रेरित करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के डिजिटल युग में संवाद की आवश्यकता और बढ़ गई है, क्योंकि मोबाइल, इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल गैजेट्स बच्चों के जीवन में गहराई से प्रवेश कर चुके हैं। माता-पिता को सहज शैली में समय-समय पर पूछना चाहिए-“क्या ऑनलाइन कुछ उलझन भरा देखा?”, “किसी का बुरा बोलना या मैसेज परेशान करता है क्या?”, “स्कूल में किसी दोस्त या शिक्षक ने कुछ ऐसा कहा जो तुम्हें अच्छा या बुरा लगा हो?” ऐसे सौम्य प्रश्न बच्चों को बाहरी दुनिया के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को साझा करने के लिए प्रेरित करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वस्तुतः संवाद एक ऐसा पुल (ब्रिज) है जो माता-पिता और बच्चों के बीच प्रेम, सुरक्षा, भरोसा और पारदर्शिता को मजबूत करता है। जब हर बच्चा यह विश्वास पूर्वक कह सके-“मम्मी-पापा, मुझे आपसे एक जरूरी बात करनी है…”-तब समझिए कि संवाद संस्कृति ने अपनी भूमिका सफलतापूर्वक निभा दी है। अतः आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं की रोकथाम में परिवार, शिक्षक और मित्रों के बीच विकसित संवाद-संस्कृति सबसे बड़ा, सबसे प्रभावी और सबसे मानवीय अस्त्र है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161265/communication-culture-can-prevent-children-from-taking-wrong-decisions</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 16:34:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>घनी आबादी के बीच स्मार्ट सिटी की कल्पना केवल परिकल्पना ना हो</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">आज के युग में हमारे देश-देश के मध्यम कद के शहरों का पुनरूत्थान, उन्हें स्मार्ट सिटी की मनोनीत परिकल्पना के अनुरूप विकसित करने का विचार न सिर्फ दूरदर्शिता की निशानी है बल्कि तत्काल आवश्यकता भी बन चुका है। माना गया है कि ऐसे शहर जहाँ निवासियों की सभी सामान्य जरूरतें शुद्ध पानी-बिजली-धूल-प्रदूषण-मुक्त सड़कें-घर-संचार-इंटरनेट-सोशल मीडिया-प्रशासनिक सुविधाएँ-सुरक्षा-शिक्षा-मनोरंजन-यातायात-स्वास्थ्य तेज और सहज रूप में उपलब्ध हों, वहां के नागरिक जीवनशैली में सहजता, शांति और संतुलन महसूस कर सकें।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">ऐसी अवस्था जहाँ हर आम-व्यक्ति को गुणवत्ता-पूर्ण सुविधा कम सेवा मूल्य पर आसानी से मिल सके, वहाँ के जीवन-यापन के तरीके इतने सुलभ व संतुलित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161095/balance-of-justice-between-legislature-and-executive"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(1)6.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">आज के युग में हमारे देश-देश के मध्यम कद के शहरों का पुनरूत्थान, उन्हें स्मार्ट सिटी की मनोनीत परिकल्पना के अनुरूप विकसित करने का विचार न सिर्फ दूरदर्शिता की निशानी है बल्कि तत्काल आवश्यकता भी बन चुका है। माना गया है कि ऐसे शहर जहाँ निवासियों की सभी सामान्य जरूरतें शुद्ध पानी-बिजली-धूल-प्रदूषण-मुक्त सड़कें-घर-संचार-इंटरनेट-सोशल मीडिया-प्रशासनिक सुविधाएँ-सुरक्षा-शिक्षा-मनोरंजन-यातायात-स्वास्थ्य तेज और सहज रूप में उपलब्ध हों, वहां के नागरिक जीवनशैली में सहजता, शांति और संतुलन महसूस कर सकें।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">ऐसी अवस्था जहाँ हर आम-व्यक्ति को गुणवत्ता-पूर्ण सुविधा कम सेवा मूल्य पर आसानी से मिल सके, वहाँ के जीवन-यापन के तरीके इतने सुलभ व संतुलित हों कि धूल-प्रदूषण-मुक्त सड़कें हों, पानी-बिजली सहज रूप से उपलब्ध हो, घर पहुँच घर-बैठे इंटरनेट-सोशल मीडिया-प्रशासनिक कार्य संपन्न हों। आम नागरिक, जो स्वतंत्रता-उपरांत जन-सुविधाओं के अभाव में अब तक जूझ रहे थे, उनके लिए इसका त्वरित निराकरण संचार-माध्यमों से संभव हो सके। इस प्रकार एक स्मार्ट-शहर की स्थापना केंद्र सरकार का लक्ष्य बन गया है।परंतु यह प्रश्न उठता है कि क्या हमारा भारत, अपनी विशाल जनसंख्या और मेट्रोपॉलिटन शहरों की घनी-संघन संरचना को देखते हुए, व मध्यम-कद-शहरों की संख्या को भी ध्यान में रखते हुए, वास्तव में इस स्मार्ट-सिटी की परिकल्पना को यथार्थ रूप दे सकता है? यदि सरकार व आम नागरिकों का संकल्प दृढ़ हो जाए, आपसी सहयोग व सामंजस्य बेहतर रूप से काम कर जाए, तो निःसंदेह भारत में स्मार्ट-सिटी की परिकल्पना यथार्थ रूप ले सकती है।<br /><br />स्मार्ट-शहर के मानदंड स्पष्ट हो सकते हैं पर्याप्त बिजली-पानी-भोजन-घर आदि उपलब्ध हों; स्वास्थ्य-सुरक्षा-शिक्षा-मनोरंजन-यातायात की सुविधाएं सरलता से मिले; जीवन-आराम के संदर्भ में सभी आर्थिक गतिविधियाँ सुचारू रूप से चलें। ऐसी स्मार्ट-शहर यदि भारत में बन पाती है, तो निसंदेह वह देश के समग्र विकास को गति दे सकती है। लेकिन इसे मात्र दृढ़ संकल्प या नारेबाजी के आधार पर नहीं देखा जा सकता  यहाँ सार्थक मेहनत, रणनीति-निर्माण, निष्पादन-प्रक्रिया और जनता-सहयोग की समान जरूरत है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center"> वास्तव में देश के प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता-दिवस पर घोषणा की कि भारत में एक सैकड़ा से अधिक-शहरों को स्मार्ट-सिटी बनाने की पहल होगी, तथा इसके लिए लगभग नौ-हजार करोड़ रुपये बजट का प्रावधान भी किया गया। इसके अंतर्गत केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा एक मैनुअल जारी भी किया गया है। इस परियोजना को आने वाले वर्षों में मूर्त रूप देना है। योजना के अनुसार- 40 लाख से अधिक आबादी वाले 9 शहर, 10 लाख-40 लाख आबादी वाले 44 शहर, 5 लाख-10 लाख आबादी वाले 20 शहर, प्रत्येक राज्य एवं केंद्र-शासित प्रदेश की राजधानी-शहरों के अंतर्गत लगभग 37 शहर तथा पर्यटन/धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लगभग 15 शहर सम्पूर्ण रूप से स्मार्ट-सिटी के प्रावधान में लाये जाने का प्रस्ताव है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">प्रारंभ में केंद्र सरकार द्वारा इस दिशा में चयनित शहरों में शामिल हैं-इलाहाबाद (अब प्रयागराज), कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, देहरादून, हरिद्वार, बोधगया, भोपाल, इंदौर, कोच्चि, जयपुर, अजमेर आदि। विदेशी राष्ट्रों ने भी इस पहल में रुचि दिखाई है-- जापान ने वाराणसी को स्मार्ट-सिटी के रूप में विकसित करने में शामिल होने का प्रस्ताव रखा है, दिल्ली को स्मार्ट-सिटी बनाने के लिए कतर देश के प्रिंस ने बड़ी निवेश-राशि का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, तथा चेन्नई-बैंगलोर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के निकट “लिटिल सिंगापुर” विकसित करने की चर्चा भी है। सरकार ने इस दिशा में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को प्राथमिकता देने का निर्णय भी लिया है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">परंतु स्मार्ट-सिटी बनने के मार्ग में अनेक चुनौतियाँ भी हैं। उदाहरणस्वरूप- भारत में इस प्रकार की परियोजनाओं के कार्यान्वयन में कई फंसे हैं: आधुनिकीकरण-पूर्व आधारभूत संरचनाओं , पुरानी सड़क-नाली को स्मार्ट रूप देना कठिन है; वित्तीय संसाधनों की कमी और वित्तीय सततता की समस्या है। इसके अतिरिक्त, नगरीय स्थानीय निकायों की प्राविधिक एवं नियोजन-क्षमता सीमित है; भूमि अधिग्रहण-स्वीकृति-अनुमति प्रक्रियाओं में विलम्ब और ओवरलैपिंग संस्थागत जिम्मेदारियों की समस्या भी सामने आई है। और सबसे बड़ी चुनौती बड़े विदेशी-शहरों के अनुरूप मॉडल को भारत की विविध जनसंख्या-स्थितियों, आर्थिक-सामाजिक-मानदण्डों, कमजोर-शहरी-इन्फ्रास्ट्रक्चर व घनी जनसंख्या वाले नगरों में प्रत्यक्ष ले जाना आसान नहीं है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">  इसलिए यदि स्मार्ट-सिटी की परिकल्पना मात्र आकार-आधारित, तकनीकी-उपकरणों-प्रचुरता पर आधारित हो जाए, तो संभावना है कि यह केवल हवा की बातें बनकर रह जाएँ। लेकिन यदि इसके पीछे ठोस योजना, समावेशी दृष्टिकोण, नागरिक भागीदारी, पारदर्शिता, स्थानीय क्षमता-निर्माण हो जाए, तो यह यथार्थ स्वरूप ले सकती है। उदाहरणत भारत के कई स्मार्ट-सिटी परियोजनाओं में यह देखा गया है कि अधिकांश फंड “एरिया-बेस्ड डेवलपमेंट” के अंतर्गत कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रह जाते हैं, जिससे पूरे नगरवासियों तक लाभ नहीं पहुंच पाता। इसके साथ ही डिजिटल विभाजन यानी इंटरनेट-कनेक्टिविटी-तकनीकी पहुँच का असमान वितरण भी बड़ी बाधा है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">अतः निष्कर्षतः कह सकते हैं कि यदि देश का प्रत्येक नागरिक, इस सोच से प्रेरित होकर, सरकार की इस परियोजना में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपना योगदान देने का संकल्प ले जाए, यदि नीति-निर्माण से लेकर कार्यान्वयन-प्रक्रिया तक नागरिक-भागीदारी व पारदर्शिता सुनिश्चित हो जाए, और स्थानीय निकाय-प्रशासन-निजी-क्षेत्र-सहयोग यथोचित रूप से हो जाए, तो निश्चित ही अगले दो दशकों में भारत में सैकड़ों स्मार्ट-शहर निर्मित हो सकते हैं। और तब आम नागरिकों को जन-सुविधाओं का सामान्य-स्वीकरण मिलेगा तथा भारत एक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में तेज़ी से आ जाएगा। सिर्फ लक्ष्य-घोषणा-ही पर्याप्त नहीं लक्ष्य के पीछे मेहनत-संकल्प-लोक-भागीदारी-निरंतरता-अभ्यास ज़रूरी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 17:03:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>एग्जिट पोल ने दिए बिहार में एनडीए की वापसी के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिहार विधानसभा चुनाव </span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">2025 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">का माहौल एक बार फिर राजनीतिक तापमान को चरम पर ले आया है। मतगणना से पहले आए एग्जिट पोल नतीजों ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि राज्य में सत्ता की बागडोर एक बार फिर से एनडीए गठबंधन के हाथों में जा सकती है। लगभग सभी प्रमुख सर्वे एजेंसियों ने एनडीए को बहुमत से कहीं अधिक सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया है</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि महागठबंधन पिछड़ता हुआ दिख रहा है। यह स्थिति बिहार की राजनीति में एक बार फिर उस निरंतरता को दर्शाती है</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जो नीतीश कुमार के नेतृत्व में विकास</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुशासन और</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159854/people-kept-watching-humanity-keep-dying"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/एग्जिट-पोल-ने-दिए-बिहार-में-एनडीए-की-वापसी-के-संकेत.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिहार विधानसभा चुनाव </span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">2025 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">का माहौल एक बार फिर राजनीतिक तापमान को चरम पर ले आया है। मतगणना से पहले आए एग्जिट पोल नतीजों ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि राज्य में सत्ता की बागडोर एक बार फिर से एनडीए गठबंधन के हाथों में जा सकती है। लगभग सभी प्रमुख सर्वे एजेंसियों ने एनडीए को बहुमत से कहीं अधिक सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया है</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि महागठबंधन पिछड़ता हुआ दिख रहा है। यह स्थिति बिहार की राजनीति में एक बार फिर उस निरंतरता को दर्शाती है</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जो नीतीश कुमार के नेतृत्व में विकास</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुशासन और स्थिरता के नाम पर वर्षों से कायम है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">243 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीटों वाली बिहार विधानसभा के लिए इस बार का चुनाव दो चरणों में संपन्न हुआ। दूसरे और अंतिम चरण में मतदान का प्रतिशत </span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">67.14 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तक पहुँचा</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जो अब तक के इतिहास में सबसे अधिक है। इतनी बड़ी संख्या में जनता का मतदान करना इस बात का प्रमाण है कि बिहार का मतदाता अब राजनीति को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विचारशील और निर्णायक बन चुका है। मतदान के तुरंत बाद जारी हुए सात प्रमुख एग्जिट पोल्स में से लगभग सभी ने एनडीए को </span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">147 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से </span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">167 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीटों के बीच पहुँचने का अनुमान दिया है</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि महागठबंधन को </span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">70 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से </span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">102 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीटों तक सीमित बताया गया है। प्रशांत किशोर की नई पार्टी ‘जन सुराज’ को उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन न करते हुए नगण्य सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बार का चुनाव कई मायनों में खास रहा। एक ओर जहाँ एनडीए ने अपने विकास कार्यों</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कल्याण योजनाओं और जातिगत समीकरणों को मजबूती से साधे रखा</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर विपक्ष बेरोजगारी</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पलायन और महंगाई जैसे पुराने मुद्दों के सहारे जनसमर्थन जुटाने की कोशिश में लगा रहा। नीतीश कुमार ने अपनी छवि को </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विकास</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुरुष</span><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुशासन</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बाबू</span><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रूप</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बार</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिर</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थापित</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">करने</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूरी</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रणनीति</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अपनाई।</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बीजेपी</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोक जनशक्ति पार्टी और हिंदुस्तान अवामी मोर्चा जैसे सहयोगी दलों ने मिलकर पूरे राज्य में एक संगठित अभियान चलाया</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसका असर मतदान प्रतिशत और जनमत दोनों में दिखाई दिया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">महागठबंधन</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसके केंद्र में इस बार भी तेजस्वी यादव थे</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ने युवाओं को रोजगार देने और पलायन रोकने जैसे वादों पर जोर दिया</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">परंतु उसका प्रभाव सीमित क्षेत्रों तक ही सिमटा रहा। ग्रामीण इलाकों और युवा मतदाताओं में एनडीए की अपील इस बार कहीं अधिक दिखी। खासकर प्रवासी मतदाता</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिन्होंने कोरोना काल और उसके बाद के आर्थिक संकट का सामना किया था</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वे स्थिर शासन और निरंतर विकास की आशा में फिर उसी दिशा में झुकते नजर आए। दूसरी तरफ</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जो शुरुआत में राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनी थी</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अंततः आम वोटर के बीच कोई ठोस पहचान नहीं बना सकी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस चुनाव का एक उल्लेखनीय पहलू यह भी रहा कि प्रशासनिक स्तर पर चुनाव आयोग ने बेहद सख्त और पारदर्शी प्रबंधन किया। नेपाल सीमा को </span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">72 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घंटे तक सील कर देना और सीमावर्ती जिलों में अतिरिक्त बलों की तैनाती ने न केवल मतदान को शांतिपूर्ण बनाया</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि इससे मतदाताओं में सुरक्षा की भावना भी बढ़ी। इसका नतीजा यह हुआ कि लोगों ने उत्साहपूर्वक मतदान किया और लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एग्जिट पोल्स के रुझानों को देखकर राजनीतिक विश्लेषक यह मानने लगे हैं कि बिहार की जनता ने इस बार भी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थिर</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार</span><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विकास</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">निरंतरता</span><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">को</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्राथमिकता</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दी</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नीतीश</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुमार</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नेतृत्व</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पिछले</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">द</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ो दशकों में बिहार ने बुनियादी ढाँचे</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सड़क</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिजली</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो सुधार देखे हैं</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वे अब राज्य की राजनीति की मूल पहचान बन चुके हैं। यही वजह है कि कई मतदाता जातीय समीकरणों से ऊपर उठकर विकास के मुद्दे पर मतदान करते दिखाई दिए।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि यह भी ध्यान देने योग्य है कि एग्जिट पोल्स हमेशा अंतिम सच्चाई नहीं होते। </span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">2020 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के विधानसभा चुनावों में भी अधिकतर सर्वे एजेंसियों ने महागठबंधन को बढ़त दी थी</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन अंतिम नतीजों में एनडीए ने सरकार बनाई। इसलिए </span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">14 </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नवंबर को जब मतगणना होगी</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तब ही असली तस्वीर साफ़ होगी। फिर भी</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वर्तमान परिदृश्य यह संकेत दे रहा है कि नीतीश कुमार और एनडीए गठबंधन ने अपनी पकड़ अभी भी मजबूत बनाए रखी है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक रूप से यह चुनाव कई शिक्षाएँ भी छोड़ जाएगा। पहली—बिहार में अब सिर्फ जातीय समीकरणों से सत्ता नहीं मिल सकती</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">; </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जनहित की योजनाएँ और ठोस कामकाज ही निर्णायक साबित हो रहे हैं। दूसरी—युवा और महिला मतदाता अब चुनावी गणित को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। और तीसरी—नई राजनीतिक पार्टियों के लिए राज्य में जगह बनाना अब पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्योंकि मतदाता अब </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पर्याप्त</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अनुभव</span><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थिर नेतृत्व</span><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अपेक्षा</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रखता</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर एग्जिट पोल्स की भविष्यवाणी वास्तविक परिणामों में बदलती है</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो यह न केवल बिहार की राजनीति में एनडीए के एक और दशक के प्रभुत्व की पुष्टि करेगा</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके राजनीतिक निहितार्थ होंगे। बिहार के इस जनादेश को एक व्यापक संदेश के रूप में देखा जा सकता है—जनता विकास</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थिरता और सुशासन को नारेबाज़ी से अधिक महत्व देती है। लोकतंत्र की असली ताकत यही है कि जनता हर बार अपने अनुभव</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अपेक्षाओं और विश्वास के आधार पर निर्णय लेती है। बिहार ने इस बार फिर वही किया है—वह राजनीति को नहीं</span><span lang="en-in" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अपने भविष्य को वोट दे रहा है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span lang="en-in" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';font-weight:normal;" xml:lang="en-in">- </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';font-weight:normal;" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 16:08:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>Success Story: बिना कोचिंग 22 साल की उम्र में क्रैक किया UPSC, 51वीं रैंक लाकर बनी IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Success Story: </strong>कहते है की मेहनत करने वालों की कभी भी हार नहीं होती है, जैसे प्रयागराज की IAS अनन्या सिंह ने 22 साल की उम्र में एक साल की तैयारी में UPSC पास कर ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल की। मिली जानकारी के अनुसार, अभी वह बिहार कैडर में सेवाएं दे रही हैं और सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, वैसे तो UPSC सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में गिना जाता है। इसमें सफल होने में लोगों को सालों लग जाते हैं। लेकिन अनन्या सिंह की कहानी कुछ और ही है। उन्होंने सिर्फ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158036/success-story-cracked-upsc-at-the-age-of-22-without"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/latest-news---2025-10-22t214921.225.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Success Story: </strong>कहते है की मेहनत करने वालों की कभी भी हार नहीं होती है, जैसे प्रयागराज की IAS अनन्या सिंह ने 22 साल की उम्र में एक साल की तैयारी में UPSC पास कर ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल की। मिली जानकारी के अनुसार, अभी वह बिहार कैडर में सेवाएं दे रही हैं और सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, वैसे तो UPSC सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में गिना जाता है। इसमें सफल होने में लोगों को सालों लग जाते हैं। लेकिन अनन्या सिंह की कहानी कुछ और ही है। उन्होंने सिर्फ एक साल की तैयारी में यह परीक्षा पास की और पहली बार में ही IAS बन गईं। Success Story IAS Ananya Singh</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/ias-ananya-singh_1650280627.jpg" alt="ias-ananya-singh_1650280627" width="1200" height="675"></img></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, अनन्या उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की रहने वाली हैं। उन्होंने 10वीं में 96% और 12वीं में 98.5% अंक हासिल किए थे। इसके बाद अनन्या CISCE बोर्ड में जिला टॉपर भी रहीं हैं। Success Story IAS Ananya Singh</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, बता दें कि उनकी स्कूली पढ़ाई सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल, प्रयागराज से हुई है। अनन्या ने अपनी आगे की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से की, जहां उन्होंने इकनॉमिक्स ऑनर्स किया। Success Story IAS Ananya Singh</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/ias-ananya-singh-6-2025-10-d7cfb2ef83e61228c89b196435ed3fc4.jpg" alt="IAS-Ananya-Singh-6-2025-10-d7cfb2ef83e61228c89b196435ed3fc4" width="800" height="600"></img></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, बचपन से ही उनका सपना IAS बनने का था। कॉलेज के आखिरी साल में उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के और सिर्फ सेल्फ-स्टडी के भरोसे यह मुकाम हासिल किया है। Success Story IAS Ananya Singh</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/2493109-untitled-design-2023-11-29t215849.537.jpg" alt="2493109-untitled-design-2023-11-29t215849.537" width="800" height="600"></img></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, अनन्या के मुताबिक वह शुरुआत में रोज 7–8 घंटे पढ़ाई करती थीं। इसके बाद उन्होंने इस समय को धीरे-धीरे इसे घटाकर 6 घंटे कर दिया था। उन्होंने प्रीलिम्स और मेन्स दोनों की तैयारी साथ-साथ की। Success Story IAS Ananya Singh</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने सिलेबस के हिसाब से अपने नोट्स बनाए और इन्हीं नोट्स से रिवीजन करना आसान हुआ। इसके अलावा उन्होंने पिछले सालों के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण भी किया। अनन्या ने देखा कि कुछ टॉपिक हर साल दोहराए जाते हैं और इसी आधार पर अपनी रणनीति बनाई। Success Story IAS Ananya Singh</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/3040516-ias-ananya-singh-upsc-success-story.jpg" alt="3040516-ias-ananya-singh-upsc-success-story" width="1200" height="900"></img></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, 2019 में पहली ही कोशिश में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल की और 22 साल की उम्र में IAS अधिकारी बन गईं। मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में वह बिहार कैडर में सेवा दे रही हैं और सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं, जहां उनके 66.8 हजार से अधिक इंस्टाग्राम फॉलोअर्स हैं। अनन्या ने अप्रैल 2024 में IAS कुमार अनुराग (UPSC 2018, रैंक 48) से  शादी की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Oct 2025 21:54:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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                <title>कुमारगंज में दुर्गा माता पर अभद्र गाने को लेकर लोगों में आक्रोश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> कुमारगंज [अयोध्या] - </strong>नवरात्र के पावन पर्व की शुरुआत होते ही सोशल मीडिया पर धार्मिक भावना को आहत करने वाला मामला प्रकाश में आया है। जहां एक लोग गायिका द्वारा आपत्तिजनक व अमर्यादित भाषाओं का प्रयोग करके हिन्दुओं की देवी मां दुर्गा पर अश्लील गाना गाया गया है। इस गाने से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। जिसको लेकर थाना कुमारगंज में शिकायत दर्ज कराई गई है। सोशल मीडिया के यू ट्यूब चैनल सरोज सरगम पर आपत्तिजनक व मर्यादित भाषाओं का प्रयोग कर देवी दुर्गा मां पर गाना अपलोड किया गया है। इस अमर्यादित गाने को जिसने भी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155680/outrage-among-people-over-durga-mata-in-kumarganj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/screenshot_20250922_154842_whatsapp.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> कुमारगंज [अयोध्या] - </strong>नवरात्र के पावन पर्व की शुरुआत होते ही सोशल मीडिया पर धार्मिक भावना को आहत करने वाला मामला प्रकाश में आया है। जहां एक लोग गायिका द्वारा आपत्तिजनक व अमर्यादित भाषाओं का प्रयोग करके हिन्दुओं की देवी मां दुर्गा पर अश्लील गाना गाया गया है। इस गाने से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। जिसको लेकर थाना कुमारगंज में शिकायत दर्ज कराई गई है। सोशल मीडिया के यू ट्यूब चैनल सरोज सरगम पर आपत्तिजनक व मर्यादित भाषाओं का प्रयोग कर देवी दुर्गा मां पर गाना अपलोड किया गया है। इस अमर्यादित गाने को जिसने भी सुना उसका खून खौल उठा। गाने के थंबनेल पर भी आमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया गया है। डेढ़ घंटे के गाने को हजारों लोगों ने देखा और सुना जिससे हिंदुओं की भावना को काफी ठेस पहुंची है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी बात को लेकर सोमवार दोपहर करीब 12:00 बजे नगर पंचायत कुमारगंज निवासी सभासद सूरज कौशल तथा अपना दल एस के जिला उपाध्यक्ष शत्रुघ्न कौशल समेत तमाम लोगों ने बढ़ते हुए जन आक्रोश को देखकर थाना कुमारगंज में गायिका सरोज सरगम के विरुद्ध शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। साथ ही जिला उपाध्यक्ष शत्रुघ्न कौशल द्वारा एसपी मिर्जापुर से वार्ता कर मामले को अवगत कराया तब उन्होंने तत्काल थाना मड़ियांन में मुकदमा पंजीकृत कराया तथा गिरफ्तारी के लिए टीमों को गठित कर दिया। और आश्वासन दिलाया कि जल्द ही गिरफ्तार कर वीडियो को डिलीट करा दिया जाएगा। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 18:17:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धार्मिक गतिविधि करने वाले फार्म हाउस पर लटका ताला, पुलिस ग्रामीणों से पूछताछ कर लौटी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div style="text-align:justify;"><strong>निगोहा, लखनऊ- </strong>निगोहा थाना क्षेत्र के एक फॉर्म हाउस में एक समुदाय द्वारा धार्मिक गतिविधि के लिए रविवार को भीड़ एकत्रित करने की सूचना पर हिन्दू संगठन के लोगो ने पहुंचकर हंगामा किया था।जिसके सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके पर पहुंचकर थाने ले आई थी।इसके बाद पूछताछ कर थाने से छोड़कर जांच करने के बाद कार्यवाही की बात कही थी। सोमवार को एक बार फिर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो फार्म हाउस पर ताला लटक मिला वही पुलिस ने गांव में इसके बारे में जानकारी जुटाई तो जिसमें पता चला कि फार्म हाउस का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन</div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155188/the-lock-police-hanged-at-the-farm-house-of-religious"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/hindi-divas19.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
<div class="gs">
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<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div style="text-align:justify;"><strong>निगोहा, लखनऊ- </strong>निगोहा थाना क्षेत्र के एक फॉर्म हाउस में एक समुदाय द्वारा धार्मिक गतिविधि के लिए रविवार को भीड़ एकत्रित करने की सूचना पर हिन्दू संगठन के लोगो ने पहुंचकर हंगामा किया था।जिसके सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके पर पहुंचकर थाने ले आई थी।इसके बाद पूछताछ कर थाने से छोड़कर जांच करने के बाद कार्यवाही की बात कही थी। सोमवार को एक बार फिर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो फार्म हाउस पर ताला लटक मिला वही पुलिस ने गांव में इसके बारे में जानकारी जुटाई तो जिसमें पता चला कि फार्म हाउस का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन पर है।साथ विशेष धर्म गतिविधि होने की भी पुष्टि होने की बात समाने आई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिसको लेकर पुलिस ने मंगलवार को राजस्व टीम बुलाकर जमीन नापकर कराकर अवैध कब्जे को हटवाने की बात कही है।वही धार्मिक गतिविधि का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इलाके विरोध के सुर बढ़ गए है।रविवार को मौके पर पहुंचे हिंदू संगठन के लोगों का आरोप था कि इस फार्म हाउस में हर रविवार को बाहरी लोग आते हैं और वहां धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियाँ होती हैं। लोगों का कहना है कि यह सिलसिला काफी समय से चल रहा है और इससे गाँव के वातावरण में अशांति फैल रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वही सोमवार जांच करने पहुंची पुलिस को फार्म हाउस पर ताला लटका मिला तो पुलिस गांव पहुंचकर लोगों से इसके बारे में बातचीत की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने निकलकर आए जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और इसकी जानकारी अधिकारियों को दी।वही निगोहा थाना प्रभारी ने कहा कि ग्रामीणों से जानकारी मिली है कि फार्म हाउस का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन पर बना हुआ इसके लिए तहसील अधिकारियों से संपर्क कर मंगलवार को राजस्व टीम को बुलाकर जमीन की नाप कराई जाएगी अवैध कब्जा मिलने पर अधिकारियों की अनुमति के बाद ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जाएगी ।साथ ही फार्म हाउस पर रहने वाले और धार्मिक गतिविधि चलाने वालों को तलाश की जा रही है।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
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<div class="mVCoBd" style="text-align:justify;"> </div>
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</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:14:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PHILPHOS' Ties to Amit Gupta of Agrifields DMCC Spark Global Legal Storm</title>
                                    <description><![CDATA[The 2024 Sydney Morning Herald exposé describes Gupta as an "alleged corporate crime kingpin and fugitive from justice has built a global business worth an estimated $800 million."]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154143/draft-add-your-titlephilphos-ties-to-amit-gupta-of-agarifields"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/img-20250902-wa0009.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>What began as a bold post-disaster investment to rebuild a typhoon-wrecked fertilizer plant in Leyte has now spiraled into an international scandal. The Philippine Phosphate Fertilizer Corporation (PHILPHOS), under the leadership of businessman Salvador Zamora II, is entangled in a widening web of criminal allegations linked to Amit Gupta, head of Dubai-based Agrifields DMCC.</p>
<p>Back in June 2018, the Philippine News Agency reported that Agrifields DMCC pledged "USD150-million to kick-off the rehab plan" for PHILPHOS' Isabel, Leyte plant-"which was totally damaged by super typhoon Haiyan locally known as Typhoon Yolanda in 2013." The investment was celebrated, with publicized images featuring Amit Gupta alongside his father, Chairman G.S. Gupta.</p>
<p>But the public narrative surrounding Amit Gupta has drastically shifted.</p>
<p>According to Nick McKenzie of the Sydney Morning Herald, a respected investigative journalist, "The US documents name Getax director Amit Gupta as the 'target of a criminal investigation who is alleged to have conspired with others to bribe foreign public officials and to have engaged in money laundering and other offences."</p>
<p>The 2024 Sydney Morning Herald exposé describes Gupta as an "alleged corporate crime kingpin and fugitive from justice has built a global business worth an estimated $800 million."</p>
<p>The article further reveals that: "Documents show the federal police's Getax investigation spent years tracking this global movement of funds. In 2020, the AFP moved to seize multiple properties and bank accounts connected to Gupta in Australia, Singapore and New York worth an estimated $200 million."</p>
<p>Meanwhile, MSN confirms that Gupta "is currently facing an Interpol Red Alert Notice" and "numerous criminal charges in multiple countries".</p>
<p>That brings PHILPHOS $150 million cash infusion under harsh light. The funds are now allegedly sourced from "proceeds of crime", raising serious questions about the corporation's exposure to legal risk and its due diligence processes.</p>
<p>Sources close to the matter say Salvador Zamora II has taken steps to distance PHILPHOS from Agrifields DMCC in light of mounting legal troubles, international travel bans on Gupta, and global asset seizures.</p>
<p>Trade records from Trademo further underscore the unraveling relationship. In 2022, PHILPHOS reported a $63 million trade volume with Agrifields DMCC. By 2023, this figure collapsed to just $930,000-a 98% plunge.</p>
<p>Adding to the international pressure, Gupta is simultaneously facing a barrage of legal actions: an Australian Federal Police criminal investigation, scrutiny from India's Income Tax Department over $240 million in funds, and criminal forgery charges in Kolkata tied to an $84 million case.</p>
<p>Under international law, experts confirm that PHILPHOS is not required to return the $150 million investment. The reasoning: if the funds are unlawfully sourced as alleged by multiple G12 countries including Australia-Gupta holds no rightful claim to them.</p>
<p>Australia, in particular, has officially alleged that the money transferred through Gupta's network is a "proceed of crime".</p>
<p>As such, PHILPHOS is legally protected in withholding repayment of this debt.</p>
<p>It is also authorized to deny any further financial dealings with Agrifields DMCC or any other Gupta-affiliated entities, all of which are now blacklisted across multiple jurisdictions.</p>
<p>Moreover, PHILPHOS may have legal standing to seek compensation or recovery for past trade losses with Agrifields. Trademo reports show that the business relationship totaled approximately $130 million between 2021 and 2023.</p>
<p>As global law enforcement closes in on Gupta, PHILPHOS' next steps-legally and reputationally-could prove critical not only for its future, but for how corporations worldwide manage risk in cross-border partnerships.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 13:06:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vipin Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनियोजित विकास का नतीजा वैष्णो देवी मार्ग पर मौत का तांडव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">जय माता दी नारों से चोबीस घंटे गुंजायमान रहने वाला माता वैष्णो देवी मंदिर का मार्ग अब बेइंतहा शोक और सन्नाटे में डूबा हुआ है. मंगलवार 26 अगस्त को आए विनाशकारी भूस्खलन ने न केवल 35 जिंदगियां लील लीं, बल्कि हजारों परिवारों को अनिश्चितता और भय के अंधेरे में धकेल दिया.मृतको मे 18 महिलाएं हैं. कुछ तीर्थयात्री राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र के रहने वाले थे। अर्धकुंवारी मार्ग, जो तीर्थयात्रा का प्रमुख विश्राम स्थल है, अब मलबे और चट्टानों के ढेर में तब्दील हो चुका है.  श्रद्धालुओं की भीड़ जहां कभी भक्ति और उमंग से भरी होती थी,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154144/as-a-result-of-unplanned-development-death-orgy-on-vaishno"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/download5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">जय माता दी नारों से चोबीस घंटे गुंजायमान रहने वाला माता वैष्णो देवी मंदिर का मार्ग अब बेइंतहा शोक और सन्नाटे में डूबा हुआ है. मंगलवार 26 अगस्त को आए विनाशकारी भूस्खलन ने न केवल 35 जिंदगियां लील लीं, बल्कि हजारों परिवारों को अनिश्चितता और भय के अंधेरे में धकेल दिया.मृतको मे 18 महिलाएं हैं. कुछ तीर्थयात्री राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र के रहने वाले थे। अर्धकुंवारी मार्ग, जो तीर्थयात्रा का प्रमुख विश्राम स्थल है, अब मलबे और चट्टानों के ढेर में तब्दील हो चुका है.  श्रद्धालुओं की भीड़ जहां कभी भक्ति और उमंग से भरी होती थी, वहां अब रोते-बिलखते लोग अपने प्रियजनों की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर के रियासी जिले के कटरा में स्थित वैष्णो देवी मंदिर के रास्ते में अर्धकुंवारी मां के पास मंगलवार दोपहर बाद करीब 3 बजे भूस्खलन हुआ था. इसमें अब तक 35 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.बीस घायल अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती है। मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि अभी मलवे में कुछ और लोग दबे होने की आशंका है बचाव कार्य जारी है। गंभीर हालात को देखते हुए उत्तर रेलवे ने जम्मू और कटरा स्टेशनों से आने-जाने वाली 58 ट्रेनों को रद्द कर दिया और 64 ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर बीच में ही रोकना पड़ा।  माता वैष्णो देवी के त्रिकुटा पर्वत पर धराली, धराली, मनाली, किश्तवाड़ में कुदरत के कहर के बाद इन मौतों ने देश को झकझोर दिया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ताजा हादसे ने माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या उसकी नीतियां सही है? क्या लगातार निर्माण कार्य और बढ़ती दुकानें त्रिकुटा पर्वत पर उचित हैं? क्या भक्तों की संख्या बढ़ाने के लिए पहाड़ और पेड़ों का दोहन उचित है? क्या त्रिकुटा पर्वत पर भोजनालय चलाने और अन्य कामों के लिए डीजल वाहनों के आने-देने की परमिशन देनी उचित है? क्या बाणगंगा से लेकर ऊपर दरबार तक बढ़ती जा रही गंदगी पर किसी का ध्यान है? शायद नहीं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नियंत्रण वाले वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के उस फैसले पर सवाल उठाया, जिसमें भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद तीर्थयात्रा जारी रखने की अनुमति दी गई थी. अब्दुल्ला ने कहा कि जब हमें मौसम के बारे में पता था तो लोगों को यात्रा मार्ग पर क्यों नहीं रोका गया? उन्हें सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं ले जाया गया? </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय वायुसेना ने बुधवार को जम्मू और उत्तरी पंजाब के बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत और बचाव कार्यों के लिए छह हेलीकॉप्टर को सेवा में लगाया तथा गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक कस्बे से सेना के 38 और बीएसएफ के 10 जवानों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. इससे पहले राहत और बचाव सामग्री लेकर भारतीय वायुसेना का सी-130 परिवहन विमान, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम के साथ जम्मू में उतरा. रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि बचाव कार्य में शामिल होने के लिए और अधिक परिवहन विमान तैयार रखे गए हैं।  सोशल मीडिया पर अब इस हादसे को लेकर स्थानीय और बाहरी श्रद्धालुओं का गुस्सा फूट रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> जिस रास्ते से चौबीस घंटे सातों दिन रात श्रद्धालु ' जय माता की' बोलते हुए आगे बढ़ते थे, वहां कुदरत के कहर ने गहरा घाव दिया है जिसे हजारों परिवार जीवन भर नहीं भुला पाएंगे।  श्रद्धालु टिप्पणी कर रहे हैं- यह क्यों मां? मां के घर में यह कैसी आपदा है? क्या दोषी हम हैं? दुर्गा सप्तशती के आखिर में मां से क्षमा मांगने के लिए क्षमा प्रार्थना मंत्र का पाठ किया जाता है. भूल में हुई अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी जाती है. क्या यह भूल हमसे हुई है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है. कटरा का रहने वाला शख्स रोते हुए बता रहा है कि कैसे मां के घर त्रिकुटा पर्वत को विकास के नाम पर बर्बाद कर दिया गया है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोशल मीडिया पर एक कटरावासी ने साफ-साफ कहा कि श्राइन बोर्ड की किताबों से लेकर रामायण तक में साफ-साफ लिखा है कि मां वैष्णो देवी प्रभु श्रीराम के लिए तपस्या कर रही हैं. श्रीराम ने उन्हें वादा किया था कि कलयुग में जब वो लौटेंगे तो माता को स्वीकार करेंगे. ऐसे में माता की तपस्या को प्रदूषण, गाड़ियों के हॉर्न, पेड़ों की कटाई और लगातार हो रहे निर्माण से क्यों बाधा पहुंचाई जा रही है? मां गु्स्से में हैं. कारण उनकी हजारों सालों की तपस्या में बाधा आ रही है. श्राइन बोर्ड भीड़ बढ़ाने के लिए त्रिकुटी पर्वत को व्यवसाय के रूप में चलाने लगा है. गरीब भक्तों के लिए इंतजाम के नाम पर कुछ नहीं किया जा रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाणगंगा से लेकर भैरवनाथ तक हर जगह पहाड़ पर कूड़े के ढेर दिख रहे हैं. शख्स ने बताया कि त्रिकुटा पर्वत पर हर जगह पानी है. हर जगह से पानी गिरता रहता है. पेड़ों के कारण वातावरण एकदम साफ-सुथरा था. मगर व्यवसायिकता सब कुछ बर्बाद कर रही है. अगर अब भी श्राइन बोर्ड और सरकार न जागी तो और बड़ा अनर्थ हो जाएगा. माता ही चली जाएंगी तो इन रौशनियों को देखने कौन आएगा? कौन त्रिकुटा पर्वत पर आएगा? सबसे जरूरी है कि मां की तपस्या में बाधा न पड़े. इसके लिए सभी को आगे आना होगा। </div>
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<div style="text-align:justify;">एक अन्य पोस्ट मे लिखा हुआ है इस पर्वत को बख्श दो. पेड़ लगाओ इधर. तबाही हो गई है लोगों की. नहीं देखा जाता अब. दो महीने पहले भी तबाही की और अब फिर से तबाही कर दी आपने. माता रानी के पहाड़ों की जड़ें लेकर रख दीं आपने. कितना डिवलेपमेंट करना है. कहीं और जाकर डिवेलपमेंट करो. इधर न करो. जो जहाजों की टिकट लेते है ना उसको श्राइन बोर्ड के खिलाफ कुछ नहीं बोलना है. जिसको अच्छे दर्शन चाहिए वह बोर्ड के खिलाफ बोलता ही नहीं है. यार बोलना पड़ेगा. जब त्रिकुटा पर्वत नहीं रहेगा ना तो कटरा भी नहीं रहेगा. मातारानी भी नहीं रहेगी. पहाड़ नहीं रहेगा. न यात्रा रहेगी. यह जगमग लाइटें नहीं रहेंगी. आपने पहाड़ की तबाही कर दी है. त्रिकुटा पर्वत को बख्श दो. आपको मातारानी का वास्ता. इस पहाड़ में सिर्फ पानी है. मैं बचपन से यहां रहता हूं. मेरी जन्मभूमि है कटरा. आप यहां जेसीबी चला रहे हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि माता के दरबार तक लगातार पहाड़ी का कटान कर चार रास्ते बना लिए गए। पहाड़ी पर आवागमन करते हैलीकॉप्टर सेवा और भारी तादाद में लोगों के आवागमन से भोगौलिक पर्यावरण पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है।</div>
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<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार कटरा और जम्मू के होटलों और गेस्ट हॉउस में करीबन 20 हजार यात्री रुके हुए थे, मंगलवार दोपहर के बाद अर्धकुंवारी के पास भूस्खलन से पहाड़ से अधिक मात्रा में मलबा गिर था और इससे 200 फीट हिस्सा बुरी तरह खराब हो गया, यात्रा ट्रेक को ठीक करने में अभी समय लग सकता है। जम्मू के मौसम में सुधार तो आया है, लेकिन कश्मीर में लगातार बारिश से झेलम के साथ-साथ कई नदी-नालों का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया है। इससे श्रीनगर में पानी भर गया है, अनंतनाग के अच्छाबल में भी कई जगह नदी का पानी लोगों के घरों में घुस गया है।  मां वैष्णो देवी की यात्रा स्थगित होने की वजह से कटरा में सभी रजिस्ट्रेशन को बंद कर दिया गया है। श्राइन बोर्ड प्रशासन का कहना है मौसम में सुधार होने के बाद ही यात्रा को सुचारु रूप से चलाया जाएगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">हम सब जानते हैं कि बारिश और उसके बाद भूस्खलन को पूरी तरह रोकना निःसंदेह कठिन है, परंतु रडार प्रणाली, सूचना-संचार प्रौद्योगिकी, उपग्रह, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेंसर, सेटेलाइट इमेजिंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों से इन स्थितियों का आंशिक पूर्वानुमान लगाकर लोगों को सचेत किया जा सकता हैं और इसके अनुरूप व्यवस्था को भी चुस्त-दुरुस्त बनाया जा सकता है। सरकारों को चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ करना, राहत तंत्र को प्रभावी बनाना और पहाड़ों पर अनियंत्रित निर्माण और पर्यावरण विनाश पर रोक लगाने की नीति अपनाना अनिवार्य है। फिलहाल माता के दर्शन करने गए श्रद्धालु यात्रा स्थगित होने के कारण बिना दर्शन वापिस लौटने के लिए विवश हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 17:21:17 +0530</pubDate>
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