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                <title>वैज्ञानिक तकनीक - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>वैज्ञानिक तकनीक RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है : जिलाधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div>  </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राणी विज्ञान विभाग तथा जिला प्रशासन सिद्धार्थनगर के संयुक्त तत्वावधान में किसानों में  पैंगेसियस मछली पालन की आधुनिक तकनीकों, व्यवसायिक संभावनाओं तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्नत करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध सभागार में “पैंगेसियस मछली पालन किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे   जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी. एन. ने कहा कि मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन  का यह  संयुक्त प्रयास  अत्यंत  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है।</div>
<div>  </div>
<div>उन्होंने विशेष रूप से पैंगेसियस मछली पालन को कम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173243/fisheries-can-become-an-important-and-profitable-medium-to-increase"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773406513101-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div> </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राणी विज्ञान विभाग तथा जिला प्रशासन सिद्धार्थनगर के संयुक्त तत्वावधान में किसानों में  पैंगेसियस मछली पालन की आधुनिक तकनीकों, व्यवसायिक संभावनाओं तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्नत करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध सभागार में “पैंगेसियस मछली पालन किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे   जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी. एन. ने कहा कि मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन  का यह  संयुक्त प्रयास  अत्यंत  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने विशेष रूप से पैंगेसियस मछली पालन को कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीक बताया। जिलाधिकारी ने किसानों को सरकार की विभिन्न मत्स्य योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों को अपना कर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं। साथ ही उन्होंने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो कविता शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के लिए आयोजित यह  प्रशिक्षण कार्यक्रम  कृषि और मत्स्य क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम में प्राणी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार वर्मा ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों और यहां अध्ययन के लाभों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में स्वागत संबोधन विज्ञान  संकाय की अधिष्ठाता प्रो प्रकृति राय ने किया ।  </div>
<div> </div>
<div> आचार्य डॉ. विनीता रावत, मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक नन्द किशोर प्रसाद,  एक्वा डॉक्टर सॉल्यूशंस कोलकाता के डॉ देब तनु  बर्मन, गौरव एक्वा यूनिवर्स, महाराजगंज के संस्थापक वीर गौरव, जंतु  विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने हैचरी प्रबंधन तथा सहायक आचार्य एवं सह-संयोजक डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने रोग निदान के विषय में प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो नीता यादव , अधिष्ठाता वाणिज्य संकाय प्रो सौरभ , डॉ लक्ष्मण सिंह, डॉ विशाल गुप्ता, डॉ अविनाश प्रताप सिंह सहित लगभग एक सौ पचास  किसानों  ने  प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 19:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ए आई के दुरुपयोग का शिकार होते दुनियाभर के मासूम बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए विकसित की गई वैज्ञानिक तकनीक जहाँ एक ओर वरदान सिद्ध हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं इसके दुरुपयोग ने अनेक नई चुनौतियां भी पैदा कर दी हैं। संचार क्षेत्र में आई मोबाइल क्रांति इसका ताजा उदाहरण है। स्मार्टफोन ने दुनिया की दूरियाँ समाप्त कर लोगों को एक-दूसरे से जोड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यही तकनीक अब पारिवारिक और सामाजिक दूरियाँ बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी के लिए गंभीर खतरे भी पैदा कर रही है । इसी खतरे का एक नया रूप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का दुरुपयोग है। यूनिसेफ और इंटरपोल द्वारा तैयार एक हालिया</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168680/innocent-children-around-the-world-becoming-victims-of-misuse-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/images-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए विकसित की गई वैज्ञानिक तकनीक जहाँ एक ओर वरदान सिद्ध हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं इसके दुरुपयोग ने अनेक नई चुनौतियां भी पैदा कर दी हैं। संचार क्षेत्र में आई मोबाइल क्रांति इसका ताजा उदाहरण है। स्मार्टफोन ने दुनिया की दूरियाँ समाप्त कर लोगों को एक-दूसरे से जोड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यही तकनीक अब पारिवारिक और सामाजिक दूरियाँ बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी के लिए गंभीर खतरे भी पैदा कर रही है । इसी खतरे का एक नया रूप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का दुरुपयोग है। यूनिसेफ और इंटरपोल द्वारा तैयार एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल एक वर्ष में दुनियाभर के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बारह लाख से अधिक बच्चे डीपफेक तकनीक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के शिकार हुए हैं। एशिया और अफ्रीका के ग्यारह देशों पर किए गए अध्ययन में सामने आया कि ए आई के गलत इस्तेमाल से विशेष रूप से लड़कियों की तस्वीरों को अश्लील रूप में परिवर्तित किया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एआई की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फेस स्वैपिंग तकनीक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के माध्यम से किसी भी व्यक्ति के चेहरे को दूसरे फोटो या वीडियो पर आसानी से लगाया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यूडिफिकेशन तकनीक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तस्वीरों को अश्लील रूप देने में इस्तेमाल हो रही है। इसके अतिरिक्त</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वॉयस क्लोनिंग तकनीक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी व्यक्ति की आवाज की हूबहू नकल कर नकली ऑडियो संदेश तैयार करने में सक्षम है। इन तकनीकों का उपयोग कर बनाए गए नकली ऑडियो-वीडियो और तस्वीरों को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी पहचान करना जांच एजेंसियों के लिए भी अत्यंत कठिन होता जा रहा है । रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक के मामलों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>65 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक पीड़ित लड़कियां</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं। चिंता की बात यह भी है कि दुनिया के अधिकांश देशों में ए आई के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त कानून अभी तक नहीं बने हैं। बहुत कम देशों जैसे भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका और ब्रिटेन में बाल शोषण से संबंधित सामग्री को देखना या रखना अपराध की श्रेणी में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। कानूनों की कमी के कारण इंटरनेट पर बड़ी मात्रा में डीपफेक आधारित अश्लील सामग्री तेजी से फैल रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एआई तकनीक निस्संदेह कंप्यूटर विज्ञान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मशीनों को सीखने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्णय लेने और जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता प्रदान करती है तथा शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और शोध के क्षेत्र में अनेक सकारात्मक संभावनाएँ खोलती है। किंतु इसका अनियंत्रित और अनैतिक उपयोग दुनिया के मासूम बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है । अतः संयुक्त राष्ट्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक संगठनों तथा सभी देशों की सरकारों को मिलकर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ए आई के दुरुपयोग को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठोर कानून</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बनाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। अन्यथा विज्ञान की यही तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मानवता के लिए वरदान बन सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मासूम बच्चों की खुशियों और सुरक्षित भविष्य को निगलने वाली अभिशाप सिद्ध हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 18:51:16 +0530</pubDate>
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