<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/45187/union-budget-2026" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>union budget 2026 - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/45187/rss</link>
                <description>union budget 2026 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सीतापुर के युवाओं ने माय भारत बजट क्वेस्ट लखनऊ में चमक बिखेरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लखनऊ, उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के ग्यारह युवा प्रतिभागियों माय भारत बजट क्वेस्ट 2026 के राज्य-स्तरीय कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मेरा युवा भारत (MY Bharat) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय पहल के प्रथम चरण (ऑनलाइन क्विज) और द्वितीय चरण (निबंध प्रतियोगिता) में सफलता हासिल करने के बाद ये युवा आज लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए।</p>
<p>जिला युवा अधिकारी संकल्प शुक्ला के मार्गदर्शन में सीतापुर के निम्नलिखित युवाओं ने केंद्रीय बजट 2026 की योजनाओं, प्रावधानों और विकसित भारत @2047 के विजन पर अपनी गहरी समझ तथा नवाचारी विचार प्रस्तुत किए तथा बजट क्वेस्ट में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175943/youth-of-sitapur-shine-in-my-bharat-budget-quest-lucknow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260412-wa0477.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ, उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के ग्यारह युवा प्रतिभागियों माय भारत बजट क्वेस्ट 2026 के राज्य-स्तरीय कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मेरा युवा भारत (MY Bharat) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय पहल के प्रथम चरण (ऑनलाइन क्विज) और द्वितीय चरण (निबंध प्रतियोगिता) में सफलता हासिल करने के बाद ये युवा आज लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए।</p>
<p>जिला युवा अधिकारी संकल्प शुक्ला के मार्गदर्शन में सीतापुर के निम्नलिखित युवाओं ने केंद्रीय बजट 2026 की योजनाओं, प्रावधानों और विकसित भारत @2047 के विजन पर अपनी गहरी समझ तथा नवाचारी विचार प्रस्तुत किए तथा बजट क्वेस्ट में प्रतिभाग किया - गौरव शर्मा नमन त्रिवेदी - इलियाश अंकुश कंबोज अर्चित कुमार गुप्ता - निर्भय सिंह - श्याम जी आस्था तिवारी सचिन बाजपेयी - साक्षी मिश्रा - जुनैद अली नितिन वर्माइस कार्यक्रम में पूरे देश से 12 लाख से अधिक युवाओं ने प्रारंभिक क्विज चरण में भाग लिया, जबकि निबंध चरण में लगभग 47,000 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। इन बड़ी संख्या में से चयनित होकर सीतापुर के युवाओं का लखनऊ पहुंचना जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण है।</p>
<blockquote class="format1">जिला युवा अधिकारी संकल्प शुक्ला ने युवाओं को प्रेरित किया और MY Bharat प्लेटफॉर्म की जानकारी दी उनके कुशल नेतृत्व में सीतापुर के इन युवाओं ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर की इस पहल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।</blockquote>
<p>माय भारत बजट क्वेस्ट 2026 युवाओं को केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझने, आर्थिक नीतियों का विश्लेषण करने और देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। शीर्ष प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रीय नेताओं से संवाद करने का अवसर प्राप्त हुआ ऐसे मंच सूचित, जागरूक और सक्रिय युवा नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सीतापुर जिले की यह उपलब्धि प्रशंसनीय है और यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और युवा उत्साह के साथ राष्ट्रीय पहलों में सार्थक योगदान संभव है। “यह उपलब्धि पूरे जिले के युवाओं के लिए प्रोत्साहन का विषय है। यह सफलता न केवल सीतापुर के लिए बल्कि विकसित भारत के निर्माण में युवा शक्ति की भूमिका को और मजबूत करती है।”</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img-20260412-wa0477.jpg" alt="MY Bharat Budget Quest 2026: सीतापुर के युवाओं ने लखनऊ में बिखेरी चमक |" width="1599" height="1200"></img>यह कार्यक्रम युवा पीढ़ी को नीति निर्माण से जोड़ने और राष्ट्रीय विकास में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। सीतापुर के इन युवाओं की उपलब्धि उत्तर प्रदेश में युवा जागरूकता की बढ़ती लहर को भी रेखांकित करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175943/youth-of-sitapur-shine-in-my-bharat-budget-quest-lucknow</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/175943/youth-of-sitapur-shine-in-my-bharat-budget-quest-lucknow</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 13:42:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img-20260412-wa0477.jpg"                         length="252568"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sachin Bajpai]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट से बेदखल किसान: दिल में तो कभी था ही नहीं, अब ज़ुबान से भी हुआ गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि असली भारत गांवों में बसता है।  उसी भारत के लोग—किसान—हर साल बजट के दिन इस उम्मीद में रहते हैं कि शायद इस बार सरकार उनकी सुध लेगी। लेकिन इस बार का बजट देखकर यह कहने में कोई हिचक नहीं कि सरकार को किसान फूटी आंख नहीं सुहाता।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पहले कम से कम किसान के नाम पर बजट में दिखावा तो किया जाता था—बड़ी-बड़ी बातें, भारी-भरकम योजनाएं होती थीं। लेकिन इस बार तो वह दिखावा भी छोड़ दिया गया। अगर कोई किसान नारियल, काजू, सैंडलवुड या कोको नहीं उगाता, तो इस बजट में उसके लिए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168286/the-farmer-evicted-from-the-budget-was-never-present-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/budget-2026.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि असली भारत गांवों में बसता है।  उसी भारत के लोग—किसान—हर साल बजट के दिन इस उम्मीद में रहते हैं कि शायद इस बार सरकार उनकी सुध लेगी। लेकिन इस बार का बजट देखकर यह कहने में कोई हिचक नहीं कि सरकार को किसान फूटी आंख नहीं सुहाता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पहले कम से कम किसान के नाम पर बजट में दिखावा तो किया जाता था—बड़ी-बड़ी बातें, भारी-भरकम योजनाएं होती थीं। लेकिन इस बार तो वह दिखावा भी छोड़ दिया गया। अगर कोई किसान नारियल, काजू, सैंडलवुड या कोको नहीं उगाता, तो इस बजट में उसके लिए सिवाय सपने बेचने के कुछ नहीं है। हालत यह रही कि वित्त मंत्री के कृषि बजट भाषण में ‘किसान’ शब्द तक का ज़िक्र नहीं हुआ। अगर हुआ भी तो वो भी दिव्यांग जनों, फिजिकली और मेंटली चैलेंज और नार्थ ईस्ट के साथ।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश की आधी से ज़्यादा आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है, लेकिन बजट में किसान का हिस्सा लगातार सिमटता जा रहा है। साल 2019–20 में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र का हिस्सा कुल बजट का 5.44 प्रतिशत था, जो घटते-घटते 2026–27 में सिर्फ़ 3.04 प्रतिशत रह गया है। मतलब साफ़ है सरकार का कुल बजट बढ़ रहा है, लेकिन किसान के हिस्से का पैसा काटा जा रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"><br /><span><img class="CToWUd a6T" src="https://mail.google.com/mail/u/1?ui=2&amp;ik=cd56e4879f&amp;attid=0.2&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;th=19c2d1a9336822b4&amp;view=fimg&amp;fur=ip&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;sz=s0-l75-ft&amp;attbid=ANGjdJ9GRXcJ5ICmsVrqCoihmpX5jZT0orcKdHJ6lmbUz3f0jzxKlXBY3hdZeLFE7YiE4Ibsy2d8Df6-zSxkSLIIofI1kJe0k2I1-thr3BNlEmws_bTO8skTZQSvAK8&amp;disp=emb&amp;realattid=ii_ml7kxnfu0&amp;zw" alt="image.png" width="799" height="481"></img></span></div>
<div style="text-align:justify;">      <em><strong>कृषि+ सेक्टर के लिए वर्षवार घटता आवंटन।</strong></em></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बजट का बारीकी से विश्लेषण करने पर साफ़ होता है कि ऐसी कई योजनाएं हैं, जिन्हें पिछले साल बड़े शोर-शराबे के साथ शुरू किया गया, लेकिन ज़मीन पर उनका कोई अता-पता नहीं है। यहां हम केवल कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र के बजट पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार ने आर्थिक विकास के लिए जिन छह बड़े क्षेत्रों में हस्तक्षेप तय किए हैं, उनमें खेती का नाम तक शामिल नहीं है। यह तब है, जब सरकारी आंकड़े (PLFS) खुद बताते हैं कि शहरों से मज़दूर फिर से गांव और खेती की ओर लौट रहे हैं। यानी जिस सेक्टर पर रोजगार का दबाव बढ़ रहा है, वह नीति बजट की प्राथमिकताओं से बाहर है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>फसल बीमा योजना: किसानों की सुरक्षा पर चली सरकारी कैंची</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसान की सुरक्षा की बात करें तो तस्वीर और भी चिंताजनक है। फसल बीमा योजना सूखा, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं में किसान का आख़िरी सहारा मानी जाती है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2024–25 में इस योजना पर सरकार ने ₹14,473 करोड़ खर्च किए, लेकिन 2025–26 के बजट में इसका प्रावधान घटाकर ₹12,242 करोड़ किया गया। हैरानी की बात यह है कि वास्तविक खर्च इस अनुमान से लगभग ₹25 करोड़ ज़्यादा रहा, फिर भी इस साल योजना का बजट बढ़ाने के बजाय सरकार ने पिछले साल के वास्तविक खर्च के मुक़ाबले इस बार ₹2,273 करोड़ की सीधी कटौती कर दी, जो लगभग 16 प्रतिशत है। साल 2026-27 के लिए फसल बीमा योजना का बजट ₹12,200 करोड़ रखा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब मौसम का मिज़ाज लगातार बिगड़ रहा है, तब किसान की सुरक्षा में की गई यह कटौती साफ़ बताती है कि सरकार की प्राथमिकता सूची में किसान की सुरक्षा सबसे नीचले पायदान पर है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>पीएम-किसान सम्मान निधि</strong> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीएम-किसान सम्मान निधि योजना में भी सरकार का रवैया साफ़ दिखता है। 2026-27 के लिए सरकार ने ₹63,500 करोड़ रखे हैं, जबकि 2024-25 में असल खर्च ₹66,121 करोड़ था। यानी असल खर्च से सीधे-सीधे ₹2,621 करोड़ कम। प्रतिशत में देखें तो यह लगभग 4% की कमी है। हैरानी की बात यह है कि पिछले 5 साल से किसान को मिलने वाली सालाना राशि ₹6,000 पर ही अटकी हुई है, जबकि इसी दौरान खाद, बीज, डीजल और मज़दूरी की लागत 30–40% तक बढ़ चुकी है। इस बार किसानों को उम्मीद थी कि यह राशि बढ़कर 10-12 हजार हो जानी चाहिए थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><a href="https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/policy/rbi-likely-to-keep-interest-rates-steady-as-inflation-edges-up-crisil-says/articleshow/126674889.cms?from=mdr">क्रिसिल के अनुमान</a> के मुताबिक 2026–27 में महंगाई दर करीब 5% तक पहुंच सकती है। अगर महंगाई दर को ध्यान में रखकर देखें तो पीएम-किसान की राशि की असली कीमत में लगभग ₹3,175 करोड़ की और कमी बैठती है। अगर योजना के लाभार्थियों की संख्या पहले जैसी (लगभग 11 करोड़) बनी रहती, तो यह फंड कम पड़ जाता। लेकिन सरकार ने बजट पर कैंची चलाने के साथ-साथ लाभार्थियों की संख्या पर भी खूब कटौती की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>खाद सब्सिडी: ज़रूरत बढ़ी, पैसा घटा </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्र सरकार किसानों को उर्वरक (खाद) पर दो तरह से सब्सिडी देती है। पहली, न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS), जिसके तहत फॉस्फेटिक और पोटाशिक खादों— जैसे DAP, MOP, NPKS आदि पर सहायता दी जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी, यूरिया पर दी जाने वाली सब्सिडी, जो डायरेक्ट तरीके से किसानों को मिलती है, लेकिन बजट 2026–27 का विश्लेषण बताता है कि सरकार ने दोनों ही तरह की खाद सब्सिडी में कटौती का रास्ता अपनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2024–25 में एनबीएस सब्सिडी का वास्तविक खर्च 52,239 करोड़ रुपये रहा। वहीं अगले वर्ष इस सब्सिडी का आवंटन घटाकर 49,000 करोड़ कर दिया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि बाद में संशोधित अनुमान में यह रकम 11,000 करोड़ बढ़ाकर 60,000 करोड़ करनी पड़ी, करीब 22% बजट बढ़ाना पड़ा। लेकिन इस बार 2026–27 के बजट में फिर से यह आवंटन घटाकर 54,000 करोड़ कर दिया गया है, जो इस बार के संशोधित अनुमान से 6,000 करोड़ कम (लगभग 10% कटौती की गई ) है।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><br /><span><img class="CToWUd a6T" src="https://mail.google.com/mail/u/1?ui=2&amp;ik=cd56e4879f&amp;attid=0.1&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;th=19c2d1a9336822b4&amp;view=fimg&amp;fur=ip&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;sz=s0-l75-ft&amp;attbid=ANGjdJ-ejR4WFHEduMPbgOz5kTJFIyhcxMzVl_bhNqAQB3KoW0oQKQhsXTQJ7sB48w1_X87_NEsB-eLuDjjsKWM7_7IztrNBaf_6cPJk3KTssGgeNfS0-udkkTzuUWo&amp;disp=emb&amp;realattid=ii_ml7kykr41&amp;zw" alt="image.png" width="626" height="399"></img></span></div>
<div style="text-align:justify;">  <em><strong>जैसा कि बजट सर्वे 2025-26 भी सब्सिडी के घटते ट्रेंड को दर्शाता है। </strong></em></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी तरह यूरिया सब्सिडी में भी पिछले साल के संशोधित अनुमान से करीब 9,670 करोड़ रुपये कम रखे गए हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्ष 2025–26 में सरकार ने यूरिया सब्सिडी के लिए शुरुआत में ₹1,18,900 करोड़ का प्रावधान किया था, लेकिन खाद की बढ़ती लागत और किसानों की ज़रूरत को देखते हुए यही राशि संशोधित अनुमान में बढ़ाकर ₹1,26,475 करोड़ करनी पड़ी। यानी 7,575 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़नी पड़ी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> लेकिन इस बार के 2026-27 के बजट में सरकार ने उलटा रुख अपनाया है। पिछले साल के संशोधित अनुमान को आधार बनाने के बजाय आवंटन घटाकर 1,16,805 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे 9,670 करोड़ रुपये की सीधी कटौती हुई है, जो लगभग 7.65 प्रतिशत की कमी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह कटौती ऐसे समय में की गई है जब खुद सरकारी अनुमान के मुताबिक यूरिया की खपत 8% तक बढ़ सकती है, जैसा कि 2025–26 में देखा गया। ऐसे में आने वाले समय में फिर से संशोधित अनुमान में राशि बढ़ाने की नौबत आ सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर दोनों सब्सिडी को जोड़कर देखें, तो 2024–25 में कुल खाद सब्सिडी 1.91 लाख करोड़ थी, जो 2026–27 में घटकर करीब 1.71 लाख करोड़ रह गई। यानी लगभग 20,200 करोड़ रुपये—करीब 10.6 प्रतिशत की सीधी कटौती की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे साफ है कि खाद सब्सिडी में भी सरकार पहले कम आकलन करती है और बाद में मजबूरी में बढ़ाती है—लेकिन स्थायी राहत देने से बचती है। यह यकायक ही नहीं हुआ इसके पीछे आप सरकार की मंशा देखेंगे तो इरादे स्पष्ट हो जाएंगे। उर्वरकों पर दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। जिसे सरकार इस सब्सिडी के बोझ को आपने माथे से कम करना चाहती है इसलिए वह एक पायलेट योजना के तहत इसकी परिपाटी तैयार करने में लगी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कई योजनाओं के लिए खर्च नहीं हो पाया बजट </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कटौती की कहानी सिर्फ़ रकम घटाने तक सीमित नहीं है। बजट का एक और चेहरा वह है, जहां पैसा रखा तो गया, लेकिन ज़मीन पर खर्च ही नहीं हुआ। कृषि योजनाओं के लिए रखे गए कुल बजट में से ₹6,985 करोड़ रुपये, जो किसानों के नाम पर बजट में दिखाए गए, लेकिन साल भर में यह राशि खर्च नहीं हो पाई। यानी कागज़ों में योजना चली, खेतों तक नहीं पहुंची। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसकी सबसे बड़ी मिसाल है “ड्रोन दीदी” योजना, जिसे सरकार ने महिला रोज़गार और खेती के आधुनिकीकरण का बड़ा कदम बताया था। नाम इतना बड़ा रखा गया कि लगा अब खेतों में तकनीक पहुंचेगी और महिलाओं को रोज़गार मिलेगा। लेकिन हकीकत बिल्कुल उलटी निकली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2025–26 में इस योजना के लिए ₹676 करोड़ रुपये रखे गए, जबकि पूरे साल में सिर्फ़ ₹100 करोड़ ही खर्च हो पाए। मतलब करीब ₹576 करोड़ रुपये—यानी लगभग 85 प्रतिशत—राशि यूं ही पड़ी रह गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न ड्रोन खेतों तक पहुंचे, न महिलाओं को काम मिला, और न ही किसानों को कोई ठोस लाभ हुआ। इससे साफ़ दिखता है कि योजना का मक़सद ज़्यादा हेडलाइन बनाना था, ज़मीन पर बदलाव लाना नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह पैटर्न दिखाता है कि योजना का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण कम और हेडलाइन मैनेजमेंट ज़्यादा है। इसके बाद तस्वीर और साफ़ हो जाती है। सवाल सिर्फ़ एक योजना या एक मद का नहीं है, बल्कि पूरे किसान बजट के रवैये का है। जहां पैसा चाहिए, वहां कटौती; और जहां पैसा रखा गया, वहां खर्च करने की इच्छाशक्ति नहीं। <em>“ड्रोन दीदी”</em> जैसी योजनाओं में यह दिखता है कि पहले बड़े नाम और बड़े दावे किए जाते हैं, फिर ज़मीन पर काम ठप पड़ जाता है और अगला बजट बिना किसी जवाबदेही के फिर वही रकम दोहरा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही तरीका आगे <em>प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना</em> जैसी योजनाओं में भी दिखता है, जहां किसान की बुढ़ापे की सुरक्षा की बात तो की जाती है, लेकिन बजट और अमल दोनों के क्रियान्वयन में फर्क साफ दिखाई देता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2025–26 में इस योजना के लिए ₹120 करोड़ का बजट रखा गया था, लेकिन संशोधित अनुमान में इसे घटाकर सिर्फ़ ₹50 करोड़ कर दिया गया। यानी सरकार खुद मान रही है कि ₹70 करोड़, लगभग 58 प्रतिशत पैसा खर्च ही नहीं हो पाया। साफ़ है कि योजना या तो किसानों तक पहुंची ही नहीं, या फिर इतनी उलझी रही कि किसान जुड़ ही नहीं पाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर किसान बड़ी संख्या में इस योजना से जुड़ते, अगर पंजीकरण कराना किसानों के लिए आसान होता और प्रशासन सक्रिय होता, तो पैसा कम नहीं बल्कि पूरा खर्च होता। इसलिए इस बार भी पिछली बार की तरह उतना ही आवंटन(₹120 करोड़) किया गया है। सरकार यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि योजना स्वैच्छिक है, लेकिन पिछले पांच-छह सालों के आंकड़े बताते हैं कि किसानों की भागीदारी बेहद धीमी रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> <strong>पिछले बजट के 6 बड़े ऐलान, बजट फाइल से गुम</strong>  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही कहानी कई दूसरी कृषि योजनाओं की भी है। पिछले किसान बजट में खेती के नाम पर 6 बड़े ऐलान किए गए थे—<em>दलहन मिशन के लिए ₹1,000 करोड़, सब्ज़ी मिशन के लिए ₹500 करोड़, मखाना बोर्ड के लिए ₹100 करोड़ और कॉटन टेक्नोलॉजी मिशन के लिए ₹500 करोड़</em>। इसके अलावा <em>प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना और नेशनल मिशन ऑन हाइब्रिड सीड्स</em> जैसी योजनाओं को किसानों के भविष्य का रास्ता बताया गया। खासकर प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के लिए तो यह कहा गया था कि छह साल तक हर साल ₹24,000 करोड़ दिए जाएंगे। लेकिन नए बजट में इन योजनाओं का नाम तक नहीं मिलता। यानी जिन योजनाओं को पिछले साल गाजे-बाजे के साथ पेश किया गया था, वे कागज़ों से बाहर ही नहीं निकल पाईं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही है आज के किसान बजट की असली तस्वीर—हर साल नई योजनाओं के नाम गिनाए जाते हैं, बड़े आंकड़े उछाले जाते हैं, उम्मीदें बोई जाती हैं, बजट के दिन योजनाएं सुर्खियां बनकर रह जाती हैं और अगले साल बजट की नई मोटी फाइल में कहीं दफ़न हो जाती हैं। न कोई हिसाब, न कोई जवाब।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खेती-किसानी आज भी उसी असुरक्षा, कर्ज़ और अनिश्चितता में खड़ी है जहां वह सालों पहले थी। न आय बढ़ी, न लागत घटी, न भविष्य को लेकर भरोसा पैदा हुआ। इस बजट की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि किसान अब सरकार की प्राथमिकता तो दूर, उसकी औपचारिक चिंता का विषय भी नहीं रह गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रत्यक्ष मिश्रा </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><em><strong>(लेखक पब्लिक पॉलिसी रिसर्चर हैं )</strong></em></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/168286/the-farmer-evicted-from-the-budget-was-never-present-in</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/168286/the-farmer-evicted-from-the-budget-was-never-present-in</guid>
                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 16:54:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/budget-2026.jpg"                         length="147553"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        