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                <title>असम - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>असम RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बराक घाटी के धोयारबंद में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर जागरूकता सभा और हस्ताक्षर अभियान।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><p style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात </strong></p><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">असम के बराक घाटी में गौहाटी हाईकोर्ट की एक स्थायी बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर 21 जून रविवार को धोयारबंद रिसॉर्ट में जागरूकता सभा एवं जन-हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन हाईकोर्ट बेंच डिमांड इम्प्लीमेंटेशन कमेटी, कछार जिला समिति तथा ‘यूथ्स अगेंस्ट सोशल ईविल्स’ (यासी) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।</div><div style="text-align:justify;">सभा में स्थानीय नागरिकों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों, छात्रों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। आयोजन के दौरान बराक घाटी में गौहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच की आवश्यकता और उसके महत्व पर विस्तार से चर्चा</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181912/awareness-meeting-and-signature-campaign-for-the-demand-of-high"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001565281.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><p style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात </strong></p><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">असम के बराक घाटी में गौहाटी हाईकोर्ट की एक स्थायी बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर 21 जून रविवार को धोयारबंद रिसॉर्ट में जागरूकता सभा एवं जन-हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन हाईकोर्ट बेंच डिमांड इम्प्लीमेंटेशन कमेटी, कछार जिला समिति तथा ‘यूथ्स अगेंस्ट सोशल ईविल्स’ (यासी) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।</div><div style="text-align:justify;">सभा में स्थानीय नागरिकों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों, छात्रों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। आयोजन के दौरान बराक घाटी में गौहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच की आवश्यकता और उसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।</div><div style="text-align:justify;">समिति के नेताओं और वक्ताओं ने कहा कि लगभग 40 लाख लोगों की आबादी वाले बराक घाटी क्षेत्र के लोगों को न्यायिक कार्यों के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर गौहाटी जाना पड़ता है, जिससे समय, धन और श्रम की भारी हानि होती है। उन्होंने कहा कि न्याय तक आसान पहुंच नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसी उद्देश्य से बराक घाटी में स्थायी हाईकोर्ट बेंच की स्थापना आवश्यक है।</div><div style="text-align:justify;">वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपने संबोधन में इस मांग की ऐतिहासिक और कानूनी पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 1972 से ही इस क्षेत्र में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग उठती रही है। उन्होंने कहा कि देश के अनेक राज्यों में हाईकोर्ट की खंडपीठें स्थापित हैं, लेकिन बराक घाटी की लंबे समय से चली आ रही न्यायसंगत मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है।</div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के बाद आयोजित हस्ताक्षर अभियान में विद्यार्थियों, शिक्षकों, व्यवसायियों, कर्मचारियों तथा आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजकों के अनुसार, एक ही दिन में 200 से अधिक लोगों ने गौहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच के समर्थन में हस्ताक्षर किए।</div><div style="text-align:justify;">हाईकोर्ट बेंच डिमांड इम्प्लीमेंटेशन कमेटी ने बताया कि आने वाले दिनों में श्रीभूमि और हैलाकांडी जिलों में भी जागरूकता अभियान, जनसंपर्क कार्यक्रम और हस्ताक्षर अभियान चलाए जाएंगे। समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि जनसमर्थन और लोकतांत्रिक आंदोलन के बल पर बराक घाटी की यह लंबे समय से लंबित मांग एक दिन अवश्य पूरी होगी।</div><div style="text-align:justify;">यह जानकारी समिति के काछार जिला प्रचार सचिव सायन चक्रवर्ती द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 15:25:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुवाहाटी में कामाख्या के दर्शन कर हाइलाकांडी के विधायक मिलन दास सहित मंडल अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं ने लिया आशीर्वाद।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>असम। </strong>गुवाहाटी स्थित पवित्र नीलाचल पर्वत पर अवस्थित कामाख्या मंदिर में शनिवार, 9 मई को हाइलाकांदी  विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सभी मंडल अध्यक्षों एवं जिले के विभिन्न स्तर के दलीय कार्यकर्ताओं ने मां कामाख्या के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर लोकप्रिय विधायक मिलन दास भी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">इस पुण्य अवसर पर उपस्थित विधायक और सभी कार्यकर्ताओं ने मां कामाख्या के चरणों में समस्त हाइलाकांडी जिले की शांति, सुख, समृद्धि एवं सर्वांगीण विकास की कामना की। साथ ही यह प्रार्थना भी की गई कि मां की कृपा से जिले के प्रत्येक क्षेत्र एवं आमजन के जीवन में सुख-शांति</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178850/hailakandi-mla-milan-das-and-mandal-presidents-and-workers-took"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001478252.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>असम। </strong>गुवाहाटी स्थित पवित्र नीलाचल पर्वत पर अवस्थित कामाख्या मंदिर में शनिवार, 9 मई को हाइलाकांदी  विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सभी मंडल अध्यक्षों एवं जिले के विभिन्न स्तर के दलीय कार्यकर्ताओं ने मां कामाख्या के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर लोकप्रिय विधायक मिलन दास भी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">इस पुण्य अवसर पर उपस्थित विधायक और सभी कार्यकर्ताओं ने मां कामाख्या के चरणों में समस्त हाइलाकांडी जिले की शांति, सुख, समृद्धि एवं सर्वांगीण विकास की कामना की। साथ ही यह प्रार्थना भी की गई कि मां की कृपा से जिले के प्रत्येक क्षेत्र एवं आमजन के जीवन में सुख-शांति एवं उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने कहा कि मां कामाख्या की दिव्य कृपा से समाज में एकता, सौहार्द और विकास की भावना और अधिक मजबूत होगी तथा जनता के जीवन में नई आशा और ऊर्जा का संचार होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह धार्मिक एवं आध्यात्मिक यात्रा कार्यकर्ताओं के बीच विशेष उत्साह और आस्था का केंद्र बनी रही।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:10:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनावी भूचाल 2026: बदला नैरेटिव बदली राजनीति और उभरे नए सत्ता समीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत के हालिया विधानसभा चुनावों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र केवल आंकड़ों का खेल नहीं है बल्कि यह भावनाओं रणनीतियों नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों का जटिल मिश्रण है। इस बार के नतीजों ने कई स्थापित धारणाओं को तोड़ा और नए राजनीतिक ट्रेंड्स को जन्म दिया। अलग अलग राज्यों में अलग अलग वजहों से सत्ता परिवर्तन हुआ लेकिन अगर गहराई से देखा जाए तो कुछ साझा फैक्टर ऐसे रहे जिन्होंने इन नतीजों को आकार दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे बड़ा बदलाव नैरेटिव के स्तर पर देखने को मिला। चुनाव अब केवल विकास या स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178209/election-earthquake-2026-changed-narrative-changed-politics-and-new-power"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/haseen.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत के हालिया विधानसभा चुनावों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र केवल आंकड़ों का खेल नहीं है बल्कि यह भावनाओं रणनीतियों नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों का जटिल मिश्रण है। इस बार के नतीजों ने कई स्थापित धारणाओं को तोड़ा और नए राजनीतिक ट्रेंड्स को जन्म दिया। अलग अलग राज्यों में अलग अलग वजहों से सत्ता परिवर्तन हुआ लेकिन अगर गहराई से देखा जाए तो कुछ साझा फैक्टर ऐसे रहे जिन्होंने इन नतीजों को आकार दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे बड़ा बदलाव नैरेटिव के स्तर पर देखने को मिला। चुनाव अब केवल विकास या स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहे बल्कि पहचान संस्कृति और भावनात्मक अपील का प्रभाव बहुत गहरा हो गया। पश्चिम बंगाल में लंबे समय से सत्ता में रही सरकार के खिलाफ माहौल बना लेकिन यह केवल एंटी इनकम्बेंसी का मामला नहीं था। यहां एक ऐसा नैरेटिव तैयार किया गया जिसमें सांस्कृतिक पहचान को राजनीतिक हथियार बना दिया गया। माछ भात और मां काली जैसे प्रतीकों के जरिए यह संदेश दिया गया कि स्थानीय परंपराओं का सम्मान केवल एक खास राजनीतिक विचारधारा ही कर सकती है। इसने मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को प्रभावित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ध्रुवीकरण इस चुनाव का एक और बड़ा फैक्टर रहा। यह केवल धार्मिक आधार पर नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान के स्तर पर भी हुआ। असम में इसका एक अलग रूप देखने को मिला जहां वोटों का बंटवारा निर्णायक साबित हुआ। विपक्षी दलों के बीच तालमेल की कमी और समुदायों के भीतर विभाजन ने सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाया। यह रणनीति नई नहीं थी लेकिन इस बार इसे अधिक व्यवस्थित तरीके से लागू किया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि चुनाव जीतने के लिए केवल अपने वोटबैंक को मजबूत करना ही नहीं बल्कि विरोधी वोटों को विभाजित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरा बड़ा फैक्टर प्रशासनिक और संरचनात्मक बदलाव रहे। मतदाता सूचियों में संशोधन और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं का असर सीधे चुनावी परिणामों पर पड़ा। पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने का मुद्दा चर्चा में रहा। वहीं असम में परिसीमन के बाद सीटों का स्वरूप बदल गया जिससे कई क्षेत्रों का राजनीतिक संतुलन प्रभावित हुआ। यह बदलाव तकनीकी लग सकते हैं लेकिन इनका असर जमीनी स्तर पर बहुत गहरा होता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि चुनाव केवल प्रचार और रैलियों से नहीं जीते जाते बल्कि सिस्टम के भीतर होने वाले बदलाव भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नेतृत्व का प्रभाव इस बार पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट दिखा। असम में मजबूत और आक्रामक नेतृत्व ने सरकार के खिलाफ संभावित नाराजगी को दबा दिया। वहीं केरल में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। भ्रष्टाचार के आरोप और थकान का असर साफ दिखा। यह अंतर बताता है कि केवल सत्ता में बने रहना काफी नहीं होता बल्कि जनता के बीच लगातार भरोसा बनाए रखना भी जरूरी है। जहां यह भरोसा टूटा वहां सत्ता भी हाथ से निकल गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में जो हुआ वह भारतीय राजनीति के लिए एक दिलचस्प मोड़ है। यहां एक फिल्मी सितारे ने अपनी लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदल दिया। यह कोई नई बात नहीं है लेकिन जिस तेजी और पैमाने पर यह बदलाव हुआ उसने सबको चौंका दिया। इसका मतलब यह है कि आज का मतदाता पारंपरिक दलों से हटकर नए विकल्पों को मौका देने के लिए तैयार है। खासकर युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाता ऐसे चेहरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं जो उन्हें नया और अलग लगता है। यह बदलाव आने वाले समय में अन्य राज्यों में भी देखने को मिल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिलाओं की भूमिका इस चुनाव में निर्णायक रही। पहले उन्हें केवल एक सहायक वोटबैंक माना जाता था लेकिन अब वे खुद एक संगठित और प्रभावशाली वर्ग बन चुकी हैं। अलग अलग राज्यों में महिलाओं को लक्षित करके योजनाएं और वादे किए गए। कहीं नकद सहायता का वादा किया गया तो कहीं सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की बात हुई। इसका असर यह हुआ कि महिलाओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया और कई सीटों पर परिणाम को प्रभावित किया। यह ट्रेंड भविष्य की राजनीति को भी दिशा देगा क्योंकि अब कोई भी दल इस वर्ग को नजरअंदाज नहीं कर सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि सत्ताधारी दलों के पारंपरिक गढ़ भी इस बार सुरक्षित नहीं रहे। पश्चिम बंगाल में जिन सीटों पर एक ही पार्टी का लंबे समय से कब्जा था वहां भी बदलाव देखने को मिला। इसका मतलब यह है कि मतदाता अब केवल परंपरा के आधार पर वोट नहीं दे रहा बल्कि वह विकल्प तलाश रहा है। इसी तरह तमिलनाडु में भी पारंपरिक दो दलों के बीच की राजनीति को एक नए खिलाड़ी ने चुनौती दी। यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि सत्ता स्थायी नहीं होती और जनता समय समय पर नए विकल्प तलाशती रहती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी फैक्टर्स को मिलाकर देखा जाए तो यह चुनाव केवल सरकार बदलने का मामला नहीं है बल्कि यह राजनीति के बदलते स्वरूप का संकेत है। अब चुनाव अधिक जटिल हो गए हैं जहां भावनाएं रणनीति नेतृत्व और सामाजिक समीकरण सभी एक साथ काम करते हैं। यह भी स्पष्ट है कि कोई एक फार्मूला सभी राज्यों में काम नहीं करता। हर राज्य की अपनी सामाजिक संरचना और राजनीतिक संस्कृति होती है और उसी के अनुसार रणनीति बनानी पड़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल इन ट्रेंड्स से क्या सीखते हैं। क्या वे केवल ध्रुवीकरण और नैरेटिव पर ध्यान देंगे या फिर विकास और शासन के मुद्दों को भी उतनी ही प्राथमिकता देंगे। मतदाता अब पहले से अधिक जागरूक है और वह केवल वादों से संतुष्ट नहीं होता। उसे परिणाम चाहिए और अगर उसे लगता है कि कोई और विकल्प बेहतर है तो वह बदलाव करने में संकोच नहीं करता।</div>
<div style="text-align:justify;">इस चुनाव ने एक और बात साफ कर दी है कि भारतीय लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। नए खिलाड़ी सामने आ रहे हैं और पुराने दलों को खुद को लगातार अपडेट करना पड़ रहा है। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए अच्छी है क्योंकि इससे जवाबदेही बढ़ती है और जनता को बेहतर विकल्प मिलते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंत में कहा जा सकता है कि 2026 के चुनाव केवल राजनीतिक घटनाएं नहीं हैं बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक बदलाव का संकेत हैं। यहां से जो ट्रेंड्स उभरे हैं वे आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति को नई दिशा देंगे। जो दल इन संकेतों को समझेंगे और समय के अनुसार खुद को ढालेंगे वही भविष्य में सफल होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">      <strong>   *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 16:31:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम के उत्तर करीमगंज में अल्पसंख्यक मतदाताओं के मजबूत जनसमर्थन के साथ महिला उम्मीदवार के रूप में मुन्नी छेत्री आगे बढ़ रही हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि- </strong>उल्लेखनीय है कि 2026 के चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, पूरा राज्य के साथ तालमेल बनाते हुए बराक घाटी में भी राजनीतिक उत्साह बढ़ रहा है। विपक्षी दल के साथ-साथ शासक दल के नेताओं की ओर से भी विभिन्न जगहों पर जनसंपर्क जारी है। राज्य के मुख्यमंत्री के एक के बाद एक कठोर भाषणों में, अल्पसंख्यक मुस्लिम मतदाताओं की अधिकता वाले केंद्रों में शासक दल के नामचीन नेता संकट में हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिसमें उत्तर करिमगंज सीट को लेकर भी शासक और विपक्षी दल के नेताओं में काफी हलचल है। एक ओर विपक्षी दल कांग्रेस/AIUDF में पिछले दिनों वोट देकर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168139/munni-chhetri-is-leading-as-a-woman-candidate-with-strong"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001284847.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि- </strong>उल्लेखनीय है कि 2026 के चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, पूरा राज्य के साथ तालमेल बनाते हुए बराक घाटी में भी राजनीतिक उत्साह बढ़ रहा है। विपक्षी दल के साथ-साथ शासक दल के नेताओं की ओर से भी विभिन्न जगहों पर जनसंपर्क जारी है। राज्य के मुख्यमंत्री के एक के बाद एक कठोर भाषणों में, अल्पसंख्यक मुस्लिम मतदाताओं की अधिकता वाले केंद्रों में शासक दल के नामचीन नेता संकट में हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">जिसमें उत्तर करिमगंज सीट को लेकर भी शासक और विपक्षी दल के नेताओं में काफी हलचल है। एक ओर विपक्षी दल कांग्रेस/AIUDF में पिछले दिनों वोट देकर पीड़ित जनता नए चेहरे की तलाश कर रही है, ठीक दूसरी ओर शासक दल के स्थानीय नेताओं की उदासीनता से जर्जर अल्पसंख्यक मुस्लिम मतदाता भी चाहते हैं कि शासक दल से ऐसा भरोसेमंद व्यक्तित्व आये जो युवा पीढ़ी से हो और जिसमें दोनों प्रकार की क्षमताएं हों।</div>
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<div style="text-align:justify;">समुदाय के प्रति स्वीकार्यता और जिम्मेदारी हों। इस मामले में स्थानीय नेताओं को काफी गति प्राप्त करनी पड़ रही है। क्योंकि कई ऐसे लोग हैं पुराने व्यक्तित्व जिनकी मानसिकता और काम में युवाओं की सक्रियता का प्रभाव नहीं है, वहीं कई ऐसे हैं जो उम्र में युवा और नए चेहरा हैं लेकिन समुदाय के दोनों पक्षों के मतदाताओं में स्वीकार्यता नहीं रखते। फिर कई ऐसे हैं कि पहले विभिन्न राजनीतिक जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल में कार्य करने पर जनता संतुष्ट नहीं थी, इसलिए उन्हें दूसरा या तीसरा अवसर देने के लिए मतदाता नाराज हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">लेकिन इन सभी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच लंबे समय से समाज सेवा में लगे समाजसेवी मुन्नी चेत्री को एक महिला टिकट प्रत्याशी के रूप में संभावनाशील माना जा रहा है और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों में से यह नाम चुनावी परिदृश्य में उभर रहा है। पूरे बराक घाटी में समाजसेवी मुन्नी चेत्री अब तक राजनीतिक क्षेत्र में आम जनता की पहली पसंद के रूप में हैं, जिन्हें भाजपा पार्टी या निर्दलीय रूप में हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग भारी मत देने के लिए उत्साहित होते देख रहे हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">यहां तक कि मुन्नी चेत्री के जनसमर्थन में पार्टी के नीतिगत निर्देशों की अनदेखी भी कर कई कांग्रेस के मतदाताओं ने भी खुलकर कहा कि अगर मुन्नी छेत्री को बीजेपी का टिकट मिलता है तो हमें बीजेपी को भी वोट देना पड़ेगा ताकि मुन्नी छेत्री के आदर्श और समाज सेवा के प्रति उनकी जिम्मेदारी का सम्मान किया जा सके। दूसरी ओर, विशेष सूत्रों की खबर है कि विपक्षी दल भी नहीं चाहता कि दोनों समुदायों में स्वीकृति रखने वाले समाज कार्यकर्ता मुन्नी छेत्री को बीजेपी से टिकट मिले।</div>
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<div style="text-align:justify;">क्योंकि लंबे समय से की जा रही समाज सेवा के माध्यम से उन्हें अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय में विशेष स्वीकृति और प्रभाव प्राप्त है। अब देखने वाली बात है कि उत्तर करीमगंज से हाईकमान किस पर मेहरबान होता है और टिकट किसे मिलता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 19:31:50 +0530</pubDate>
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