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                <title>Budget 2026 - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Budget 2026 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Punjab Budget: इस राज्य सरकार का बड़ा ऐलान, महिलाओं को हर महीने मिलेंगे 1000 रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Punjab Budget: पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए बड़ी योजना का ऐलान किया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत राज्य की हर बालिग महिला को हर महीने ₹1000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की महिलाओं को ₹1500 प्रति माह मिलेंगे।</p><p>इस योजना को लागू करने के लिए पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 के बजट में ₹9,300 करोड़ का प्रावधान किया है।</p><h3>18 साल से अधिक उम्र</h3>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172829/punjab-budget-big-announcement-of-this-state-government-women-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/haryana-news---2026-03-08t133902.598.jpg" alt=""></a><br /><p>Punjab Budget: पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए बड़ी योजना का ऐलान किया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत राज्य की हर बालिग महिला को हर महीने ₹1000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की महिलाओं को ₹1500 प्रति माह मिलेंगे।</p><p>इस योजना को लागू करने के लिए पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 के बजट में ₹9,300 करोड़ का प्रावधान किया है।</p><h3>18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को मिलेगा लाभ</h3><p>पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने विधानसभा में बताया कि इस योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को सीधे उनके बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह महिलाओं के लिए शुरू की जा रही दुनिया की पहली सार्वभौमिक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना होगी।</p><p>हालांकि, कुछ श्रेणियों को योजना से बाहर रखा गया है। इनमें मौजूदा या पूर्व स्थायी सरकारी कर्मचारी, मौजूदा या पूर्व सांसद और विधायक तथा आयकर देने वाली महिलाएं शामिल हैं।</p><h3>पेंशन लेने वाली महिलाएं भी होंगी पात्र</h3><p>सरकार के मुताबिक, जो महिलाएं पहले से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे बुजुर्ग पेंशन, विधवा या निराश्रित महिला पेंशन और दिव्यांग पेंशन ले रही हैं, वे भी इस योजना का लाभ ले सकेंगी।</p><p>वित्तमंत्री ने कहा कि इस योजना के दायरे में पंजाब की करीब 97% बालिग महिलाएं आएंगी, जो किसी भी राज्य में महिलाओं के लिए सबसे अधिक कवरेज होगा।</p><h3>हरियाणा सरकार पर साधा निशाना</h3><p>विधानसभा में बोलते हुए वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने पड़ोसी राज्य हरियाणा की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वहां ऐसी योजनाओं में आय सीमा तय कर दी जाती है, जिससे केवल लगभग 20% महिलाएं ही लाभ उठा पाती हैं।</p><p>उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार जुमलेबाजी नहीं करती और मुख्यमंत्री भगवंत मान सिर्फ 20% महिलाओं के नहीं बल्कि राज्य की हर महिला के मुख्यमंत्री हैं।</p><h3>महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का उद्देश्य</h3><p>सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, घर के फैसलों में उनकी भागीदारी बढ़ाना और शिक्षा, स्वास्थ्य व पोषण के स्तर में सुधार करना है।</p><p>सरकार का मानना है कि इससे कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं को किताबें खरीदने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही युवतियों को कोचिंग लेने और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।</p><h3>महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा भी जारी</h3><p>पंजाब सरकार ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा जारी रखने की भी घोषणा की है। वित्तमंत्री ने बताया कि पिछले एक साल में इस योजना के तहत महिलाओं ने करीब 12 करोड़ मुफ्त बस यात्राएं की हैं।</p><p>इस सुविधा को जारी रखने के लिए वित्त वर्ष 2026–27 के बजट में ₹600 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 13:39:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana Budget 2026: हरियाणा में 1000 आंगनवाड़ी केंद्र होंगे अपग्रेड, गुरुग्राम में बनेगा ‘नारी मंडपम’</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Haryana Budget 2026: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज बतौर वित्तमंत्री वित्त वर्ष 2026 -27 के लिए विकास केंद्रित बजट प्रस्तुत करते हुए प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए वर्ष 2025 - 26 के संशोधित अनुमान 1,969. 65 करोड़ से 14.91 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2026-27 में 2,263.29 करोड़ करने की घोषणा की।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि 'नारी सम्मान, नारी सुरक्षा और नारी स्वावलम्बन को अपनी नीतियों का मूल आधार मानते हुए महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। वर्ष 2015 में शुरू किए गए बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के अंतर्गत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172210/haryana-budget-2026-1000-anganwadi-centers-will-be-upgraded-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/haryana-anganbadi.jpg" alt=""></a><br /><p>Haryana Budget 2026: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज बतौर वित्तमंत्री वित्त वर्ष 2026 -27 के लिए विकास केंद्रित बजट प्रस्तुत करते हुए प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए वर्ष 2025 - 26 के संशोधित अनुमान 1,969. 65 करोड़ से 14.91 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2026-27 में 2,263.29 करोड़ करने की घोषणा की।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि 'नारी सम्मान, नारी सुरक्षा और नारी स्वावलम्बन को अपनी नीतियों का मूल आधार मानते हुए महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। वर्ष 2015 में शुरू किए गए बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के अंतर्गत हुए सतत प्रयासों से आज जन्म के समय लिंग अनुपात 868 से बढ़कर 923 हो गया है।</p>
<p>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण, कौशल विकास, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण और उसकी उपलब्धियों को सम्मान प्रदान करने के लिए गुरुग्राम में एक नारी मंडपम स्थापित किया जायेगा। महिलाओं और बच्चों से संबंधित सेवाओं के वितरण के लिए इंटीग्रेटेड सिंगल विंडो प्लेटफार्म के रूप में अम्बाला, यमुनानगर, रोहतक और गुरुग्राम में वात्सल्य भवन बनाये जायेंगे। राज्य में महिलाओं की कार्यबल सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए 5 करोड़ की लागत से एक वर्कप्लेस सेफ्टी फंड बनाया जायेगा।</p>
<p>इसके साथ ही एक POSH सेल और एक विशाखा पोर्टल बनाया जायेगा। महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त कार्य स्थलों के निर्माण हेतु 'महिला - समर्थ संस्थान पुरस्कार' योजना शुरू की जाएगी, जिससे सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों का महिला - अनुकूल रेटिंग फ्रेमवर्क के आधार पर मूल्यांकन किया जायेगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि 1,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में अपग्रेड किया जायेगा। उन्होंने कहा कि लगभग 38,00 ग्रामीण क्षेत्रों में तथा लगभग 2,000 शहरी क्षत्रों में किराए के भवनों में चल रहे हैं। इन सभी को सरकारी भवनों में शिफ्ट किया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 19:13:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Kisan Yojana: कब आएगी पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त? जान लें ये बड़ा अपडेट </title>
                                    <description><![CDATA[<p>PM Kisan Yojana: देशभर के करोड़ों किसान PM Kisan Samman Nidhi की अगली 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल कुल 6,000 रुपये दिए जाते हैं, जो तीन बराबर किस्तों (2,000-2,000-2,000) में हर 4 महीने पर सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं।</p>
<p><strong>22वीं किस्त कब आएगी?</strong></p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 22वीं किस्त की आधिकारिक तारीख अभी घोषणा नहीं की है, लेकिन विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह फरवरी के अंत में या मार्च 2026 की शुरुआत में जारी की जा सकती है। इससे पहले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170325/pm-kisan-yojana-when-will-the-22nd-installment-of-pm"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/pm-kisan-yojana-(16).jpg" alt=""></a><br /><p>PM Kisan Yojana: देशभर के करोड़ों किसान PM Kisan Samman Nidhi की अगली 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल कुल 6,000 रुपये दिए जाते हैं, जो तीन बराबर किस्तों (2,000-2,000-2,000) में हर 4 महीने पर सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं।</p>
<p><strong>22वीं किस्त कब आएगी?</strong></p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 22वीं किस्त की आधिकारिक तारीख अभी घोषणा नहीं की है, लेकिन विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह फरवरी के अंत में या मार्च 2026 की शुरुआत में जारी की जा सकती है। इससे पहले 21वीं किस्त 19 नवंबर 2025 को किसानों के बैंक खातों में डाली गई थी।</p>
<p><strong>किस किसान को मिलेगा लाभ?</strong></p>
<p>इस योजना का लाभ छोटे और सीमांत किसान परिवारों को मिलता है जिनके नाम पर वैध खेती योग्य जमीन दर्ज है। लाभ पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं:</p>
<p>किसान के नाम पर खेती योग्य जमीन का वैध रिकॉर्ड होना जरूरी है।</p>
<p>आधार कार्ड अनिवार्य है।</p>
<p>e-KYC (ई-केवाईसी) पूरा होना भी जरूरी है — इसे पूरा न करने पर अगली किस्त अटक सकती है।</p>
<p><strong>e-KYC क्यों जरूरी है?</strong></p>
<p>सरकार ने योजना में पारदर्शिता और फर्जी लाभार्थियों को हटाने के उद्देश्य से e-KYC को अनिवार्य किया है। जिन किसानों की e-KYC पूरी नहीं है, उनके भुगतान रोके जा सकते हैं।</p>
<p><strong>e-KYC कैसे पूरा करें?</strong></p>
<p>आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ।</p>
<p>अपना आधार नंबर दर्ज करें।</p>
<p>रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए OTP से वेरीफाई करें।</p>
<p>अगर OTP से पूरा नहीं होता, तो नज़दीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाएँ।</p>
<p>CSC पर बायोमेट्रिक के जरिए भी e-KYC पूरा किया जा सकता है।</p>
<p><strong>पेडमेंट स्टेटस कैसे चेक करें?</strong></p>
<p>किसान घर बैठे अपने भुगतान स्टेटस को भी चेक कर सकते हैं:</p>
<p>PM Kisan की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल एप खोलें।</p>
<p>‘Beneficiary Status’ या ‘Know Your Status’ ऑप्शन चुनें।</p>
<p>अपना रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें।</p>
<p>अगर नंबर याद नहीं तो ‘Know Your Registration Number’ से जानकारी लें।</p>
<p>कैप्चा भरें और Get Data पर क्लिक करें।</p>
<p>स्क्रीन पर आपके खाते में भेजी गई किस्तों की पूरी जानकारी दिख जाएगी — पता चल जाएगा कि 22वीं किस्त आपके खाते में आई है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 13:53:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>1 अप्रैल 2026 से बदल जाएगा पैसे लेने-देने का तरीका, PAN से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव गाड़ी खरीदना होगा आसान</title>
                                    <description><![CDATA[<h3>  </h3>
<h3><strong>नई दिल्ली:</strong></h3>
<p>भारत सरकार के प्रस्तावित <strong>नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025</strong> के तहत 1 अप्रैल 2026 से पैन कार्ड (PAN) से जुड़े कई अहम नियम बदलने जा रहे हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने इसके लिए ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए हैं। इनका मकसद छोटे लेन-देन में सहूलियत देना और बड़े ट्रांजेक्शन पर सख्त निगरानी रखना है।</p>
<p>इन बदलावों से आम लोगों, कारोबारियों और टैक्सपेयर्स पर सीधा असर पड़ेगा। आइए जानते हैं 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले 5 बड़े नियम—</p>
<hr />
<h2>✅ बैंक में कैश जमा और निकासी</h2>
<p><strong>अभी का नियम:</strong><br />एक दिन में 50,000 रुपये से ज्यादा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169182/the-way-of-giving-and-taking-money-will-change-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/money-lending.jpg" alt=""></a><br /><h3> </h3>
<h3><strong>नई दिल्ली:</strong></h3>
<p>भारत सरकार के प्रस्तावित <strong>नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025</strong> के तहत 1 अप्रैल 2026 से पैन कार्ड (PAN) से जुड़े कई अहम नियम बदलने जा रहे हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने इसके लिए ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए हैं। इनका मकसद छोटे लेन-देन में सहूलियत देना और बड़े ट्रांजेक्शन पर सख्त निगरानी रखना है।</p>
<p>इन बदलावों से आम लोगों, कारोबारियों और टैक्सपेयर्स पर सीधा असर पड़ेगा। आइए जानते हैं 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले 5 बड़े नियम—</p>
<hr />
<h2>✅ बैंक में कैश जमा और निकासी</h2>
<p><strong>अभी का नियम:</strong><br />एक दिन में 50,000 रुपये से ज्यादा कैश जमा/निकासी पर PAN जरूरी।</p>
<p><strong>नया नियम (1 अप्रैल 2026 से):</strong><br />अब दैनिक नहीं, बल्कि <strong>सालाना सीमा</strong> देखी जाएगी।<br />पूरे वित्तीय वर्ष में <strong>10 लाख रुपये तक</strong> के कैश ट्रांजेक्शन पर PAN की जरूरत नहीं होगी।</p>
<p>👉 इससे छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को राहत मिलेगी।</p>
<hr />
<h2>✅ गाड़ी खरीदना होगा आसान</h2>
<p><strong>अभी का नियम:</strong><br />कार खरीदने पर PAN अनिवार्य।</p>
<p><strong>नया नियम:</strong><br />अब <strong>5 लाख रुपये से कम कीमत</strong> की कार या बाइक खरीदने पर PAN जरूरी नहीं होगा।<br />पहली बार दोपहिया वाहन भी इस सीमा में शामिल किए गए हैं।</p>
<p>👉 मध्यम वर्ग और नए वाहन खरीदारों को फायदा मिलेगा।</p>
<hr />
<h2>✅ होटल और रेस्टोरेंट बिल की सीमा बढ़ी</h2>
<p><strong>अभी का नियम:</strong><br />50,000 रुपये से ज्यादा के होटल बिल पर PAN जरूरी।</p>
<p><strong>नया नियम:</strong><br />अब यह सीमा बढ़कर <strong>1 लाख रुपये</strong> हो जाएगी।</p>
<p>👉 शादी, पार्टी और बड़े आयोजनों की बुकिंग आसान होगी।</p>
<hr />
<h2>✅ प्रॉपर्टी डील में राहत</h2>
<p><strong>अभी का नियम:</strong><br />10 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी डील पर PAN जरूरी।</p>
<p><strong>नया नियम:</strong><br />अब सीमा बढ़ाकर <strong>20 लाख रुपये</strong> कर दी गई है।</p>
<p>👉 छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में संपत्ति खरीदने वालों को राहत मिलेगी।</p>
<hr />
<h2>✅ बीमा, क्रिप्टो और PAN 2.0 से जुड़े बदलाव</h2>
<h3>🔹 बीमा (Insurance)</h3>
<p>अब किसी भी बीमा कंपनी से जुड़ने या पॉलिसी लेने के लिए PAN अनिवार्य होगा।</p>
<h3>🔹 क्रिप्टो और डिजिटल एसेट</h3>
<p>क्रिप्टो एक्सचेंजों को अब इनकम टैक्स विभाग के साथ ट्रांजेक्शन डेटा साझा करना होगा।</p>
<p>👉 डिजिटल निवेश पर सरकार की नजर और सख्त होगी।</p>
<h3>🔹 PAN 2.0 सिस्टम</h3>
<p>सरकार नया <strong>स्मार्ट PAN कार्ड</strong> लॉन्च करेगी, जिसमें QR कोड होगा।<br />इससे डिजिटल वेरिफिकेशन तुरंत हो सकेगा।</p>
<hr />
<h2>⚠️ आधार से PAN लिंक कराना जरूरी</h2>
<p>अगर आपने अब तक PAN को आधार से लिंक नहीं किया है, तो जल्द करा लें।<br />वरना 2026 से आपका PAN <strong>निष्क्रिय (Inactive)</strong> हो सकता है और नए नियमों का फायदा नहीं मिलेगा।</p>
<hr />
<h2>📌 क्या है इन बदलावों का मकसद?</h2>
<p>सरकार का उद्देश्य है—</p>
<ul>
<li>
<p>छोटे लेन-देन को आसान बनाना</p>
</li>
<li>
<p>ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत देना</p>
</li>
<li>
<p>काले धन और बड़े फाइनेंशियल फ्रॉड पर रोक लगाना</p>
</li>
<li>
<p>डिजिटल और पारदर्शी सिस्टम को बढ़ावा देना</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3>👉 निष्कर्ष</h3>
<p>1 अप्रैल 2026 से PAN से जुड़े ये नए नियम आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन को काफी हद तक प्रभावित करेंगे। बेहतर होगा कि समय रहते आधार-पैन लिंक कराएं और नए नियमों की जानकारी रखें, ताकि भविष्य में किसी परेशानी से बचा जा सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/169182/the-way-of-giving-and-taking-money-will-change-from</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 16:24:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट से बेदखल किसान: दिल में तो कभी था ही नहीं, अब ज़ुबान से भी हुआ गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि असली भारत गांवों में बसता है।  उसी भारत के लोग—किसान—हर साल बजट के दिन इस उम्मीद में रहते हैं कि शायद इस बार सरकार उनकी सुध लेगी। लेकिन इस बार का बजट देखकर यह कहने में कोई हिचक नहीं कि सरकार को किसान फूटी आंख नहीं सुहाता।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पहले कम से कम किसान के नाम पर बजट में दिखावा तो किया जाता था—बड़ी-बड़ी बातें, भारी-भरकम योजनाएं होती थीं। लेकिन इस बार तो वह दिखावा भी छोड़ दिया गया। अगर कोई किसान नारियल, काजू, सैंडलवुड या कोको नहीं उगाता, तो इस बजट में उसके लिए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168286/the-farmer-evicted-from-the-budget-was-never-present-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/budget-2026.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि असली भारत गांवों में बसता है।  उसी भारत के लोग—किसान—हर साल बजट के दिन इस उम्मीद में रहते हैं कि शायद इस बार सरकार उनकी सुध लेगी। लेकिन इस बार का बजट देखकर यह कहने में कोई हिचक नहीं कि सरकार को किसान फूटी आंख नहीं सुहाता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पहले कम से कम किसान के नाम पर बजट में दिखावा तो किया जाता था—बड़ी-बड़ी बातें, भारी-भरकम योजनाएं होती थीं। लेकिन इस बार तो वह दिखावा भी छोड़ दिया गया। अगर कोई किसान नारियल, काजू, सैंडलवुड या कोको नहीं उगाता, तो इस बजट में उसके लिए सिवाय सपने बेचने के कुछ नहीं है। हालत यह रही कि वित्त मंत्री के कृषि बजट भाषण में ‘किसान’ शब्द तक का ज़िक्र नहीं हुआ। अगर हुआ भी तो वो भी दिव्यांग जनों, फिजिकली और मेंटली चैलेंज और नार्थ ईस्ट के साथ।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश की आधी से ज़्यादा आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है, लेकिन बजट में किसान का हिस्सा लगातार सिमटता जा रहा है। साल 2019–20 में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र का हिस्सा कुल बजट का 5.44 प्रतिशत था, जो घटते-घटते 2026–27 में सिर्फ़ 3.04 प्रतिशत रह गया है। मतलब साफ़ है सरकार का कुल बजट बढ़ रहा है, लेकिन किसान के हिस्से का पैसा काटा जा रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"><br /><span><img class="CToWUd a6T" src="https://mail.google.com/mail/u/1?ui=2&amp;ik=cd56e4879f&amp;attid=0.2&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;th=19c2d1a9336822b4&amp;view=fimg&amp;fur=ip&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;sz=s0-l75-ft&amp;attbid=ANGjdJ9GRXcJ5ICmsVrqCoihmpX5jZT0orcKdHJ6lmbUz3f0jzxKlXBY3hdZeLFE7YiE4Ibsy2d8Df6-zSxkSLIIofI1kJe0k2I1-thr3BNlEmws_bTO8skTZQSvAK8&amp;disp=emb&amp;realattid=ii_ml7kxnfu0&amp;zw" alt="image.png" width="799" height="481"></img></span></div>
<div style="text-align:justify;">      <em><strong>कृषि+ सेक्टर के लिए वर्षवार घटता आवंटन।</strong></em></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बजट का बारीकी से विश्लेषण करने पर साफ़ होता है कि ऐसी कई योजनाएं हैं, जिन्हें पिछले साल बड़े शोर-शराबे के साथ शुरू किया गया, लेकिन ज़मीन पर उनका कोई अता-पता नहीं है। यहां हम केवल कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र के बजट पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार ने आर्थिक विकास के लिए जिन छह बड़े क्षेत्रों में हस्तक्षेप तय किए हैं, उनमें खेती का नाम तक शामिल नहीं है। यह तब है, जब सरकारी आंकड़े (PLFS) खुद बताते हैं कि शहरों से मज़दूर फिर से गांव और खेती की ओर लौट रहे हैं। यानी जिस सेक्टर पर रोजगार का दबाव बढ़ रहा है, वह नीति बजट की प्राथमिकताओं से बाहर है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>फसल बीमा योजना: किसानों की सुरक्षा पर चली सरकारी कैंची</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसान की सुरक्षा की बात करें तो तस्वीर और भी चिंताजनक है। फसल बीमा योजना सूखा, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं में किसान का आख़िरी सहारा मानी जाती है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2024–25 में इस योजना पर सरकार ने ₹14,473 करोड़ खर्च किए, लेकिन 2025–26 के बजट में इसका प्रावधान घटाकर ₹12,242 करोड़ किया गया। हैरानी की बात यह है कि वास्तविक खर्च इस अनुमान से लगभग ₹25 करोड़ ज़्यादा रहा, फिर भी इस साल योजना का बजट बढ़ाने के बजाय सरकार ने पिछले साल के वास्तविक खर्च के मुक़ाबले इस बार ₹2,273 करोड़ की सीधी कटौती कर दी, जो लगभग 16 प्रतिशत है। साल 2026-27 के लिए फसल बीमा योजना का बजट ₹12,200 करोड़ रखा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब मौसम का मिज़ाज लगातार बिगड़ रहा है, तब किसान की सुरक्षा में की गई यह कटौती साफ़ बताती है कि सरकार की प्राथमिकता सूची में किसान की सुरक्षा सबसे नीचले पायदान पर है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>पीएम-किसान सम्मान निधि</strong> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीएम-किसान सम्मान निधि योजना में भी सरकार का रवैया साफ़ दिखता है। 2026-27 के लिए सरकार ने ₹63,500 करोड़ रखे हैं, जबकि 2024-25 में असल खर्च ₹66,121 करोड़ था। यानी असल खर्च से सीधे-सीधे ₹2,621 करोड़ कम। प्रतिशत में देखें तो यह लगभग 4% की कमी है। हैरानी की बात यह है कि पिछले 5 साल से किसान को मिलने वाली सालाना राशि ₹6,000 पर ही अटकी हुई है, जबकि इसी दौरान खाद, बीज, डीजल और मज़दूरी की लागत 30–40% तक बढ़ चुकी है। इस बार किसानों को उम्मीद थी कि यह राशि बढ़कर 10-12 हजार हो जानी चाहिए थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><a href="https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/policy/rbi-likely-to-keep-interest-rates-steady-as-inflation-edges-up-crisil-says/articleshow/126674889.cms?from=mdr">क्रिसिल के अनुमान</a> के मुताबिक 2026–27 में महंगाई दर करीब 5% तक पहुंच सकती है। अगर महंगाई दर को ध्यान में रखकर देखें तो पीएम-किसान की राशि की असली कीमत में लगभग ₹3,175 करोड़ की और कमी बैठती है। अगर योजना के लाभार्थियों की संख्या पहले जैसी (लगभग 11 करोड़) बनी रहती, तो यह फंड कम पड़ जाता। लेकिन सरकार ने बजट पर कैंची चलाने के साथ-साथ लाभार्थियों की संख्या पर भी खूब कटौती की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>खाद सब्सिडी: ज़रूरत बढ़ी, पैसा घटा </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्र सरकार किसानों को उर्वरक (खाद) पर दो तरह से सब्सिडी देती है। पहली, न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS), जिसके तहत फॉस्फेटिक और पोटाशिक खादों— जैसे DAP, MOP, NPKS आदि पर सहायता दी जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी, यूरिया पर दी जाने वाली सब्सिडी, जो डायरेक्ट तरीके से किसानों को मिलती है, लेकिन बजट 2026–27 का विश्लेषण बताता है कि सरकार ने दोनों ही तरह की खाद सब्सिडी में कटौती का रास्ता अपनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2024–25 में एनबीएस सब्सिडी का वास्तविक खर्च 52,239 करोड़ रुपये रहा। वहीं अगले वर्ष इस सब्सिडी का आवंटन घटाकर 49,000 करोड़ कर दिया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि बाद में संशोधित अनुमान में यह रकम 11,000 करोड़ बढ़ाकर 60,000 करोड़ करनी पड़ी, करीब 22% बजट बढ़ाना पड़ा। लेकिन इस बार 2026–27 के बजट में फिर से यह आवंटन घटाकर 54,000 करोड़ कर दिया गया है, जो इस बार के संशोधित अनुमान से 6,000 करोड़ कम (लगभग 10% कटौती की गई ) है।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><br /><span><img class="CToWUd a6T" src="https://mail.google.com/mail/u/1?ui=2&amp;ik=cd56e4879f&amp;attid=0.1&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;th=19c2d1a9336822b4&amp;view=fimg&amp;fur=ip&amp;permmsgid=msg-f:1856276521072206516&amp;sz=s0-l75-ft&amp;attbid=ANGjdJ-ejR4WFHEduMPbgOz5kTJFIyhcxMzVl_bhNqAQB3KoW0oQKQhsXTQJ7sB48w1_X87_NEsB-eLuDjjsKWM7_7IztrNBaf_6cPJk3KTssGgeNfS0-udkkTzuUWo&amp;disp=emb&amp;realattid=ii_ml7kykr41&amp;zw" alt="image.png" width="626" height="399"></img></span></div>
<div style="text-align:justify;">  <em><strong>जैसा कि बजट सर्वे 2025-26 भी सब्सिडी के घटते ट्रेंड को दर्शाता है। </strong></em></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी तरह यूरिया सब्सिडी में भी पिछले साल के संशोधित अनुमान से करीब 9,670 करोड़ रुपये कम रखे गए हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्ष 2025–26 में सरकार ने यूरिया सब्सिडी के लिए शुरुआत में ₹1,18,900 करोड़ का प्रावधान किया था, लेकिन खाद की बढ़ती लागत और किसानों की ज़रूरत को देखते हुए यही राशि संशोधित अनुमान में बढ़ाकर ₹1,26,475 करोड़ करनी पड़ी। यानी 7,575 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़नी पड़ी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> लेकिन इस बार के 2026-27 के बजट में सरकार ने उलटा रुख अपनाया है। पिछले साल के संशोधित अनुमान को आधार बनाने के बजाय आवंटन घटाकर 1,16,805 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे 9,670 करोड़ रुपये की सीधी कटौती हुई है, जो लगभग 7.65 प्रतिशत की कमी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह कटौती ऐसे समय में की गई है जब खुद सरकारी अनुमान के मुताबिक यूरिया की खपत 8% तक बढ़ सकती है, जैसा कि 2025–26 में देखा गया। ऐसे में आने वाले समय में फिर से संशोधित अनुमान में राशि बढ़ाने की नौबत आ सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर दोनों सब्सिडी को जोड़कर देखें, तो 2024–25 में कुल खाद सब्सिडी 1.91 लाख करोड़ थी, जो 2026–27 में घटकर करीब 1.71 लाख करोड़ रह गई। यानी लगभग 20,200 करोड़ रुपये—करीब 10.6 प्रतिशत की सीधी कटौती की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे साफ है कि खाद सब्सिडी में भी सरकार पहले कम आकलन करती है और बाद में मजबूरी में बढ़ाती है—लेकिन स्थायी राहत देने से बचती है। यह यकायक ही नहीं हुआ इसके पीछे आप सरकार की मंशा देखेंगे तो इरादे स्पष्ट हो जाएंगे। उर्वरकों पर दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। जिसे सरकार इस सब्सिडी के बोझ को आपने माथे से कम करना चाहती है इसलिए वह एक पायलेट योजना के तहत इसकी परिपाटी तैयार करने में लगी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कई योजनाओं के लिए खर्च नहीं हो पाया बजट </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कटौती की कहानी सिर्फ़ रकम घटाने तक सीमित नहीं है। बजट का एक और चेहरा वह है, जहां पैसा रखा तो गया, लेकिन ज़मीन पर खर्च ही नहीं हुआ। कृषि योजनाओं के लिए रखे गए कुल बजट में से ₹6,985 करोड़ रुपये, जो किसानों के नाम पर बजट में दिखाए गए, लेकिन साल भर में यह राशि खर्च नहीं हो पाई। यानी कागज़ों में योजना चली, खेतों तक नहीं पहुंची। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसकी सबसे बड़ी मिसाल है “ड्रोन दीदी” योजना, जिसे सरकार ने महिला रोज़गार और खेती के आधुनिकीकरण का बड़ा कदम बताया था। नाम इतना बड़ा रखा गया कि लगा अब खेतों में तकनीक पहुंचेगी और महिलाओं को रोज़गार मिलेगा। लेकिन हकीकत बिल्कुल उलटी निकली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2025–26 में इस योजना के लिए ₹676 करोड़ रुपये रखे गए, जबकि पूरे साल में सिर्फ़ ₹100 करोड़ ही खर्च हो पाए। मतलब करीब ₹576 करोड़ रुपये—यानी लगभग 85 प्रतिशत—राशि यूं ही पड़ी रह गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न ड्रोन खेतों तक पहुंचे, न महिलाओं को काम मिला, और न ही किसानों को कोई ठोस लाभ हुआ। इससे साफ़ दिखता है कि योजना का मक़सद ज़्यादा हेडलाइन बनाना था, ज़मीन पर बदलाव लाना नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह पैटर्न दिखाता है कि योजना का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण कम और हेडलाइन मैनेजमेंट ज़्यादा है। इसके बाद तस्वीर और साफ़ हो जाती है। सवाल सिर्फ़ एक योजना या एक मद का नहीं है, बल्कि पूरे किसान बजट के रवैये का है। जहां पैसा चाहिए, वहां कटौती; और जहां पैसा रखा गया, वहां खर्च करने की इच्छाशक्ति नहीं। <em>“ड्रोन दीदी”</em> जैसी योजनाओं में यह दिखता है कि पहले बड़े नाम और बड़े दावे किए जाते हैं, फिर ज़मीन पर काम ठप पड़ जाता है और अगला बजट बिना किसी जवाबदेही के फिर वही रकम दोहरा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही तरीका आगे <em>प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना</em> जैसी योजनाओं में भी दिखता है, जहां किसान की बुढ़ापे की सुरक्षा की बात तो की जाती है, लेकिन बजट और अमल दोनों के क्रियान्वयन में फर्क साफ दिखाई देता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2025–26 में इस योजना के लिए ₹120 करोड़ का बजट रखा गया था, लेकिन संशोधित अनुमान में इसे घटाकर सिर्फ़ ₹50 करोड़ कर दिया गया। यानी सरकार खुद मान रही है कि ₹70 करोड़, लगभग 58 प्रतिशत पैसा खर्च ही नहीं हो पाया। साफ़ है कि योजना या तो किसानों तक पहुंची ही नहीं, या फिर इतनी उलझी रही कि किसान जुड़ ही नहीं पाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर किसान बड़ी संख्या में इस योजना से जुड़ते, अगर पंजीकरण कराना किसानों के लिए आसान होता और प्रशासन सक्रिय होता, तो पैसा कम नहीं बल्कि पूरा खर्च होता। इसलिए इस बार भी पिछली बार की तरह उतना ही आवंटन(₹120 करोड़) किया गया है। सरकार यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि योजना स्वैच्छिक है, लेकिन पिछले पांच-छह सालों के आंकड़े बताते हैं कि किसानों की भागीदारी बेहद धीमी रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> <strong>पिछले बजट के 6 बड़े ऐलान, बजट फाइल से गुम</strong>  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही कहानी कई दूसरी कृषि योजनाओं की भी है। पिछले किसान बजट में खेती के नाम पर 6 बड़े ऐलान किए गए थे—<em>दलहन मिशन के लिए ₹1,000 करोड़, सब्ज़ी मिशन के लिए ₹500 करोड़, मखाना बोर्ड के लिए ₹100 करोड़ और कॉटन टेक्नोलॉजी मिशन के लिए ₹500 करोड़</em>। इसके अलावा <em>प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना और नेशनल मिशन ऑन हाइब्रिड सीड्स</em> जैसी योजनाओं को किसानों के भविष्य का रास्ता बताया गया। खासकर प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के लिए तो यह कहा गया था कि छह साल तक हर साल ₹24,000 करोड़ दिए जाएंगे। लेकिन नए बजट में इन योजनाओं का नाम तक नहीं मिलता। यानी जिन योजनाओं को पिछले साल गाजे-बाजे के साथ पेश किया गया था, वे कागज़ों से बाहर ही नहीं निकल पाईं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही है आज के किसान बजट की असली तस्वीर—हर साल नई योजनाओं के नाम गिनाए जाते हैं, बड़े आंकड़े उछाले जाते हैं, उम्मीदें बोई जाती हैं, बजट के दिन योजनाएं सुर्खियां बनकर रह जाती हैं और अगले साल बजट की नई मोटी फाइल में कहीं दफ़न हो जाती हैं। न कोई हिसाब, न कोई जवाब।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खेती-किसानी आज भी उसी असुरक्षा, कर्ज़ और अनिश्चितता में खड़ी है जहां वह सालों पहले थी। न आय बढ़ी, न लागत घटी, न भविष्य को लेकर भरोसा पैदा हुआ। इस बजट की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि किसान अब सरकार की प्राथमिकता तो दूर, उसकी औपचारिक चिंता का विषय भी नहीं रह गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रत्यक्ष मिश्रा </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><em><strong>(लेखक पब्लिक पॉलिसी रिसर्चर हैं )</strong></em></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/168286/the-farmer-evicted-from-the-budget-was-never-present-in</link>
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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 16:54:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Kisan Yojana: कब आएगी पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त? जान लें ये बड़ा अपडेट </title>
                                    <description><![CDATA[<p>PM Kisan Yojana 22nd Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) की 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों को अभी थोड़ा और धैर्य रखना पड़ सकता है। हालांकि, किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 के बाद सरकार इस योजना को लेकर बड़ा अपडेट दे सकती है।</p><p>बजट के दिन जहां किसानों के लिए कई अहम घोषणाएं होने की संभावना है, वहीं पीएम किसान योजना के लिए बड़े बजटीय आवंटन की उम्मीद भी जताई जा रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि बजट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167886/pm-kisan-yojana-when-will-the-22nd-installment-of-pm"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/pm-kisan-yojana-(16).jpg" alt=""></a><br /><p>PM Kisan Yojana 22nd Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) की 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों को अभी थोड़ा और धैर्य रखना पड़ सकता है। हालांकि, किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 के बाद सरकार इस योजना को लेकर बड़ा अपडेट दे सकती है।</p><p>बजट के दिन जहां किसानों के लिए कई अहम घोषणाएं होने की संभावना है, वहीं पीएम किसान योजना के लिए बड़े बजटीय आवंटन की उम्मीद भी जताई जा रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि बजट के तुरंत बाद 22वीं किस्त को लेकर खुशखबरी मिल सकती है।</p><p><strong>नवंबर 2025 में जारी हुई थी 21वीं किस्त</strong></p><p>पीएम किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने फरवरी 2019 में की थी। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल तीन किस्तों में कुल 6,000 रुपये (हर किस्त में 2,000 रुपये) सीधे उनके बैंक खाते में DBT के जरिए भेजे जाते हैं।</p><p>अब तक किसानों को इस योजना के तहत 21 किस्तें मिल चुकी हैं। साल 2025 में किसानों को 19वीं किस्त फरवरी 2025, 20वीं किस्त अगस्त 2025, 21वीं किस्त 19 नवंबर 2025 को मिल चुकी है। अब किसान 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।</p><p><strong>कब आ सकती है 22वीं किस्त?</strong></p><p>काफी समय से यह चर्चा थी कि जनवरी 2026 में 22वीं किस्त जारी की जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब सभी की निगाहें फरवरी 2026 पर टिकी हैं।</p><p>जानकारी के मुताबिक, 1 फरवरी को बजट पेश होने के बाद किसी भी दिन पीएम किसान की 22वीं किस्त जारी की जा सकती है। पिछले वर्षों के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो फरवरी में किस्त जारी होने की संभावना अधिक रहती है।</p><p>हालांकि, फिलहाल सरकार की ओर से 22वीं किस्त की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। अगर किसी कारण से फरवरी में किस्त जारी नहीं होती है, तो मार्च 2026 की शुरुआत में इसके आने की संभावना और मजबूत हो जाती है।</p><p><strong>ऐसे चेक करें 22वीं किस्त के लिए अपना नाम</strong></p><ol><li><p>सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट <a href="https://www.swatantraprabhat.com/admin/post/post/pmkisan.gov.in">pmkisan.gov.in</a> पर जाएं</p></li><li><p>होमपेज पर Beneficiary List पर क्लिक करें</p></li><li><p>राज्य, जिला, सब-डिस्ट्रिक्ट, ब्लॉक और गांव का चयन करें</p></li><li><p>Get Report पर क्लिक करें</p></li><li><p>लिस्ट में अपना नाम चेक करें</p></li></ol>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 11:35:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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