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                <title>lok sabha - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>किरेन रीजीजू ने राहुल गांधी के बयान पर कहा-  देश का अपमान नहीं सहेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्लीः </strong>संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सोमवार को आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चीन के प्रवक्ता से भी ज्यादा पड़ोसी देश की तारीफ की। </p>
<p>रीजीजू ने दावा किया, "भारत की संसद के अंदर उन्हें जिस तरह से चीन का गुणगान किया ऐसा मैंने कभी नहीं सुना था।" उन्होंने कहा कि 1959 और 1962 में चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा किया उसके लिए राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उनके ही परिवार के पंडित नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। </p>
<p>उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148180/kiren-rijiju-said-on-rahul-gandhis-statement-will-not-bear"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(7).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्लीः </strong>संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सोमवार को आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चीन के प्रवक्ता से भी ज्यादा पड़ोसी देश की तारीफ की। </p>
<p>रीजीजू ने दावा किया, "भारत की संसद के अंदर उन्हें जिस तरह से चीन का गुणगान किया ऐसा मैंने कभी नहीं सुना था।" उन्होंने कहा कि 1959 और 1962 में चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा किया उसके लिए राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उनके ही परिवार के पंडित नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। </p>
<p>उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने सदन के अंदर जो बातें की हैं उन्हें सत्यापित करना चाहिए, अन्यथा आसान को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने सदन के भीतर चीन के प्रवक्ता से भी ज्यादा चीन की तारीफ की है। </p>
<p>रीजीजू ने कहा, “यह भारत की संसद है और इस संसद में हम देश का अपमान नहीं सह सकते।” चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस संसद शशिकांत सेंथिल ने कहा कि राहुल गांधी ने देश के भविष्य के दृष्टिकोण सामने रखा है और देश का युवा यही चाहता है। निर्दलीय सांसद विशाल पाटिल ने कहा कि यह सपनों का नहीं, संघर्ष का भारत बनता जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 18:00:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लोकसभा में 'एक देश, एक चुनाव' विधेयक पेश, विपक्ष ने बिल का किया विरोध, बताया असंवैधानिक,  जेपीसी को भेजा गया ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div>'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। विपक्ष के विरोध के बाद सरकार ने बिल को जेपीसी में भेजने का ऐलान किया है। 32 पार्टियों ने बिल के पक्ष में अपना रुख दिखाया था, जबकि कांग्रेस समेत 15 दलों ने इसके विरोध का ऐलान किया था। कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने मंगलवार को लोकसभा में एक साथ चुनाव कराने से संबंधित विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह संविधान के मूल ढांचे पर हमला है तथा देश को ‘तानाशाही’ की तरफ ले जाने वाला कदम है। उन्होंने यह भी</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147066/one-nation-one-election-bill-introduced-in-lok-sabha-opposition"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-12/download2.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div>'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। विपक्ष के विरोध के बाद सरकार ने बिल को जेपीसी में भेजने का ऐलान किया है। 32 पार्टियों ने बिल के पक्ष में अपना रुख दिखाया था, जबकि कांग्रेस समेत 15 दलों ने इसके विरोध का ऐलान किया था। कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने मंगलवार को लोकसभा में एक साथ चुनाव कराने से संबंधित विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह संविधान के मूल ढांचे पर हमला है तथा देश को ‘तानाशाही’ की तरफ ले जाने वाला कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाना चाहिए।</div>
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<div>कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंगलवार को देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024’ और उससे जुड़े ‘संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024’ को पुर:स्थापित करने के लिए संसद के निचले सदन में रखा। विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि संविधान के बुनियादी पहलू हैं जिसमें संशोधन इस सदन के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक बुनियादी ढांचे पर हमला है और इस सदन के विधायी अधिकार क्षेत्र से परे है।</div>
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<div>उन्होंने कहा कि भारत राज्यों का संघ है और ऐसे में केंद्रीकरण का यह प्रयास पूरी तरह संविधान विरोधी है। उन्होंने आग्रह किया कि इस विधेयक को वापस लिया जाना चाहिए। विधेयक का विरोध करते हुए समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने कहा कि दो दिन पहले सत्तापक्ष ने संविधान पर चर्चा के दौरान बड़ी-बड़ी कसमें खाईं और अब दो ही दिन के अंदर संविधान के मूल ढांचे और संघीय ढांचे को खत्म करने के लिए यह विधेयक लाए हैं। उन्होंने दावा किया, ‘‘यह संविधान की मूल भावना को खत्म करने का प्रयास है और तानाशाही की तरफ ले जाने वाला कदम है।’’</div>
<div> </div>
<div> समाजवादी पार्टी सदस्य ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग दो राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ नहीं करा पाते हैं, वे पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की बात कर रहे हैं। यादव ने कहा कि इस विधेयक को वापस लिया जाना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह प्रस्तावित विधेयक संविधान के मूल ढांचे पर हमला है और यह ‘अल्टा वायरस’ है। उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक को स्वीकार नहीं किया जा सकता। बनर्जी ने कहा कि राज्य विधानसभाएं केंद्र और संसद के अधीनस्थ नहीं होती हैं, यह बात समझने की जरूरत है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि जिस तरह से संसद को कानून बनाने का अधिकार है, उसी तरह विधानसभाओं को भी कानून बनाने का अधिकार है। तृणमूल कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह राज्य विधानसभाओं की स्वायत्ता छीनने का प्रयास है। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि कोई भी दल हमेशा सत्ता में नहीं रहेगा, एक दिन सत्ता बदल जाएगी।बनर्जी ने कहा, ‘‘यह चुनावी सुधार नहीं है, एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षाओं और सपनों को पूरा करने के लिए लाया गया है।’</div>
<div> </div>
<div>द्रमुक नेता टीआर बालू ने सवाल किया कि जब सरकार के पास दो- तिहाई बहुमत नहीं है तो फिर इस विधेयक को लाने की अनुमति आपने कैसे दी? इस पर बिरला ने कहा, ‘‘मैं अनुमति नहीं देता, सदन अनुमति देता है।’’ बालू ने कहा, ‘‘मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि इस विधेयक को जेपीसी के पास भेजा जाए और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इसे सदन में लाया जाए।’’ आईयूएमएल के नेता ईटी मोहम्मद बशीर ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र, संविधान और संघवाद पर हमले का प्रयास है।</div>
<div> </div>
<div>शिवसेना (उबाठा) के सांसद अनिल देसाई ने भी विधेयक का विरोध किया और कहा कि यह विधेयक संघवाद पर सीधा हमला है और राज्यों के अस्तित्व को कमतर करने की कोशिश है।उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के कामकाज की भी जांच-परख होनी चाहिए और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में जो हुआ, उसे देखते हुए यह जरूरी हो गया है। लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने कहा कि ये दोनों विधेयक संविधान और नागरिकों के वोट देने के अधिकार पर आक्रमण हैं। उनका कहना था कि निर्वाचन आयोग की सीमाएं अनुच्छेद 324 में निर्धारित हैं और अब उसे बेतहाशा ताकत दी जा रही है। गोगोई ने कहा कि इस विधेयक से निर्वाचन आयोग को असंवैधानिक ताकत मिलेगी।</div>
<div> </div>
<div>'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया। इसके मद्देनजर सरकार ने बिल को जॉइंट पार्लियामेंटरी कमिटी यानी संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का फैसला किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने 12 दिसंबर को इस बिल को मंजूरी थी। घमासान की वजह से वक्फ संशोधन बिल की तरह 'एक देश एक चुनाव' बिल भी जेपीसी के पास जा रहा है। आइए एक नजर डालते हैं कि संसद में किन पार्टियों ने इस बिल के समर्थन और किन्होंने विरोध का ऐलान किया।</div>
<div> </div>
<div>भाजपा और उसके सहयोगी दल इस विधेयक के समर्थन में हैं। बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस जैसे कुछ गैर-एनडीए दलों का भी इस बिल को समर्थन है। दूसरी तरफ कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे कई विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। कुल 32 राजनीतिक दल इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, जबकि 15 दल इसका विरोध कर रहे हैं। बिल को पेश करने को लेकर विपक्ष ने मत विभाजन की मांग की, जिसके बाद वोटिंग हुई। बिल को सदन पटल पर रखे जाने के पक्ष में 269 वोट पड़े जबकि विरोध में 198 वोट पड़े। अब सदन में बिल को जेपीसी में भेजने की औपचारिकता पूरी की जाएगी।</div>
<div> </div>
<div>इसके पहले कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा कि सबसे पहले, एक राष्ट्र, एक चुनाव एक सतही रूप से आकर्षक अवधारणा है, खासकर ड्राइंग रूम और बातूनी वर्गों के लिए। यह हमारी व्यवस्था, एकरूपता, अनुशासन और घड़ी की कल की टाइमिंग की भावना को आकर्षित करती है। लेकिन आप ऐसी अवधारणाओं को लोगों की इच्छा, लोकतांत्रिक जनादेश आदि जैसे अंतर्निहित बुनियादी सिद्धांतों पर कृत्रिम रूप से नहीं थोप सकते।</div>
<div> </div>
<div>विधेयक के मूल में यह प्रावधान है कि यदि किसी राज्य या संसदीय विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्ष से पहले समाप्त हो जाता है, तो मध्यावधि चुनाव के बाद नव निर्वाचित इकाई अगले पांच वर्षों तक बनी नहीं रहेगी, बल्कि पिछली विधानसभा के शेष कार्यकाल की समाप्ति पर उसे समाप्त माना जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>यह कृत्रिम समन्वय क्षेत्रीय दलों की स्वायत्तता और अस्तित्व के लिए एक स्पष्ट खतरा और उल्लंघन है और सीधे संघवाद को कमजोर करता है, जिसे 1990 के दशक में बोम्मई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना था।</div>
<div>इस बात का कोई सबूत नहीं है कि संसद या राज्य स्तर पर अपेक्षित दो-तिहाई बहुमत है। यह संचयी रूप से आवश्यक है क्योंकि यह राज्यों के अधिकारों और विधानसभाओं को प्रभावित करता है। इस पहल को विभिन्न राजनीतिक हलकों से भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा, जिसमें कई तथाकथित भाजपा सहयोगी और नागरिक समाज के कई वर्ग भी शामिल हैं।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट में एक नया प्रावधान, अनुच्छेद 82 ए (1) शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति आम चुनाव के बाद लोकसभा की पहली बैठक में “नियत तिथि” अधिसूचित करेंगे। इसमें अनुच्छेद 82 ए (2) शामिल करने का भी प्रस्ताव किया गया है, जिसमें कहा गया है कि “नियत तिथि” के बाद निर्वाचित राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल को लोकसभा के पूर्ण कार्यकाल की समाप्ति के साथ संरेखित करने के लिए कम किया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>इसका मतलब यह होगा कि अगर विधेयक बिना संशोधन के पारित हो जाते हैं, तो “नियत तिथि” 2029 में निर्वाचित होने वाली लोकसभा की पहली बैठक के दौरान ही अधिसूचित की जाएगी, क्योंकि इस साल निर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक पहले ही बीत चुकी है। अगली लोकसभा का पूरा कार्यकाल 2034 तक होगा।</div>
<div> </div>
<div>कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर में इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। समिति ने दो चरणों में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की गई थी। स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगर पालिका) आम चुनाव के 100 दिनों के भीतर कराने की बात कही गई थी। समिति ने सभी चुनावों के लिए एक समान मतदाता सूची बनाने की भी सिफारिश की थी।</div>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 16:49:09 +0530</pubDate>
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                <title>कतार में खड़े मतदाता को YSRCP विधायक ने शरेआम मारा चाटा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तेनाली। आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के एक विधायक ने सोमवार को यहां एक मतदान केंद्र पर मतदान के लिए कतार में खड़े एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया। हालांकि उक्त व्यक्ति ने भी इसके जवाब में विधायक को थप्पड़ जड़ दिया।</p>
<p>विधायक ने थप्पड़ उस व्यक्ति को मारा जिसने उनके कतार तोड़ने पर सवाल किया था। यह घटना गुंटूर जिले के तेनाली में तब हुई जब वाईएसआरसीपी के स्थानीय विधायक ए. शिव कुमार ने कतार तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया और मतदाताओं में से एक ने इसे लेकर उनसे सवाल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141232/ysrcp-mla-openly-licked-voter-standing-in-queue"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/ysrcp-mla-slaps-voter_large_1720_154.webp" alt=""></a><br /><p>तेनाली। आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के एक विधायक ने सोमवार को यहां एक मतदान केंद्र पर मतदान के लिए कतार में खड़े एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया। हालांकि उक्त व्यक्ति ने भी इसके जवाब में विधायक को थप्पड़ जड़ दिया।</p>
<p>विधायक ने थप्पड़ उस व्यक्ति को मारा जिसने उनके कतार तोड़ने पर सवाल किया था। यह घटना गुंटूर जिले के तेनाली में तब हुई जब वाईएसआरसीपी के स्थानीय विधायक ए. शिव कुमार ने कतार तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया और मतदाताओं में से एक ने इसे लेकर उनसे सवाल कर दिया। </p>
<p>पुलिस ने बताया कि इसको लेकर गुस्साये विधायक ने व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया, हालांकि उक्त व्यक्ति ने भी इसके जवाब में विधायक को थप्पड़ जड़ दिया। विधायक को थप्पड़ मारे जाने से नाराज उनके समर्थकों ने उक्त व्यक्ति पर अपना गुस्सा निकाला। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया जिसके परिणाम स्वरूप यह झड़प हुई। उन्होंने कहा, ‘‘वह (वाईएसआरसीपी विधायक) मतदान करने जा रहे थे और वह कतार तोड़कर आगे बढ़े लेकिन किसी (मतदाता) ने इस पर आपत्ति जतायी।’’ </p>
<p>पुलिस ने बताया कि विधायक और मतदाता के बीच पहले कहा-सुनी हुई और उसके बाद विधायक ने उसे थप्पड़ मार दिया। पुलिस ने बताया कि मतदाता के पलटवार करने के बाद विधायक के समर्थकों ने उसकी पिटायी कर दी और उस पर घूंसे बरसाये। हालांकि बाद में पुलिस और अन्य मतदाताओं ने बाद में उन्हें रोका।</p>
<p>तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) ने इस घटना को लेकर निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया में है। राज्य में लोकसभा की 25 सीट और विधानसभा की 175 सीट के लिए सोमवार को एकसाथ चुनाव हुआ।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 May 2024 17:27:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के चुनाव में दखल देने पर रूस ने अमेरिका को लगाई फटकार </title>
                                    <description><![CDATA[<p>रूस ने दावा किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के संसदीय चुनावों में हस्तक्षेप करने और देश में आंतरिक राजनीतिक स्थिति को असंतुलित करने की कोशिश कर रहा है। एक मीडिया ब्रीफिंग में रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने यह भी कहा कि अमेरिका को खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नून के खिलाफ नाकाम हत्या की साजिश में भारतीय नागरिकों की संलिप्तता का विश्वसनीय सबूत देना बाकी है। भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिका की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए जखारोवा ने कहा कि अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय मानसिकता और इतिहास की समझ का अभाव है। </p>
<p>आरटी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141002/russia-reprimands-america-for-interfering-in-indian-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/2481675_0_0_2747_1546_600x0_80_0_0_e3c3156883a16c2e058b4b80af7300c1.jpg" alt=""></a><br /><p>रूस ने दावा किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के संसदीय चुनावों में हस्तक्षेप करने और देश में आंतरिक राजनीतिक स्थिति को असंतुलित करने की कोशिश कर रहा है। एक मीडिया ब्रीफिंग में रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने यह भी कहा कि अमेरिका को खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नून के खिलाफ नाकाम हत्या की साजिश में भारतीय नागरिकों की संलिप्तता का विश्वसनीय सबूत देना बाकी है। भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिका की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए जखारोवा ने कहा कि अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय मानसिकता और इतिहास की समझ का अभाव है। </p>
<p>आरटी न्यूज़ ने ज़खारोवा के हवाले से कहा कि अमेरिका धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में 'निराधार आरोप' लगाना जारी रखता है। ज़खारोवा ने इसे भारत के लिए अपमानजनक बताया। उन्होंने आगे कहा कि (अमेरिकी आरोपों के पीछे) कारण भारत में आंतरिक राजनीतिक स्थिति को असंतुलित करना और आम चुनावों को जटिल बनाना है।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन और कई अन्य मुद्दों पर भारत की आलोचना की है। इसने भारत और 16 अन्य देशों को धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता के अधिकार के विशेष रूप से गंभीर उल्लंघन में शामिल होने या सहन करने के लिए विशेष चिंता वाले देशों के रूप में नामित करने का आह्वान किया।</p>
<p>विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कड़ी प्रतिक्रिया में रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताया और कहा कि यूएससीआईआरएफ ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट के हिस्से के रूप में भारत विरोधी प्रचार प्रकाशित करना जारी रखा है। रूसी अधिकारी ने अमेरिका के इन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि एक भारतीय खुफिया अधिकारी ने कथित तौर पर गुरपतवंत सिंह पन्नून को मारने की योजना बनाई थी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 May 2024 14:34:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विपक्षी दलों को चुनावी कार्यक्रम लम्बा होने से होता है नुकसान: सीताराम येचुरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>National: </strong>नयी दिल्ली। इस बार का आम चुनाव भारत में अब तक का दूसरा सबसे लंबा चुनाव कार्यक्रम होने पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि इससे विपक्षी दलों को नुकसान होता है।</p>
<p>येचुरी ने  लंबी अवधि के चुनाव कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग को चुनाव की तारीखों पर फैसला लेने का अधिकार है। चुनाव कार्यक्रम की 82 दिन की अवधि के बारे में पूछे जाने पर माकपा नेता ने कहा कि यह ‘‘चिंता का विषय’’ है। चुनाव की प्रक्रिया 16 मार्च को चुनावों की घोषणा के साथ शुरू</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139725/opposition-parties-suffer-losses-due-to-prolonged-election-schedule-sitaram"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/sitaram-yechury_large_1848_154.webp" alt=""></a><br /><p><strong>National: </strong>नयी दिल्ली। इस बार का आम चुनाव भारत में अब तक का दूसरा सबसे लंबा चुनाव कार्यक्रम होने पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि इससे विपक्षी दलों को नुकसान होता है।</p>
<p>येचुरी ने  लंबी अवधि के चुनाव कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग को चुनाव की तारीखों पर फैसला लेने का अधिकार है। चुनाव कार्यक्रम की 82 दिन की अवधि के बारे में पूछे जाने पर माकपा नेता ने कहा कि यह ‘‘चिंता का विषय’’ है। चुनाव की प्रक्रिया 16 मार्च को चुनावों की घोषणा के साथ शुरू हुई और 4 जून को परिणाम घोषित होने पर समाप्त होगी। </p>
<p>येचुरी ने कहा, ‘‘यह चिंता का विषय है। हम जानते हैं कि संविधान इन मामलों में निर्वाचन आयोग को संपूर्ण अधिकार, एकमात्र अधिकार देता है। संविधान द्वारा सिर्फ उसे ही यह अधिकार मिला है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम इसके विवेक पर सवाल उठाते हैं।</p>
<p>’’ माकपा नेता ने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ चुनाव कराने में लगने वाला समय घटना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके बजाय, यह समय बढ़ गया है। उन्होंने कहा, ‘‘1952 को छोड़कर पहली बार आप इतना लंबा चुनाव देख रहे हैं। आजादी के बाद पहले चुनाव में बहुत सी चीजों को समायोजित करना था...अब यह सबसे लंबा चुनाव है। तकनीक के साथ यह अवधि कम होनी चाहिए लेकिन यह बढ़ गई है।’’ </p>
<p>विपक्षी दलों के पास धन या पहुंच के मामले में आगामी चुनावों में समान अवसर नहीं होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब प्रत्यक्ष रूप से प्रचार की बात आती है तो लंबी अवधि के चुनाव कार्यक्रम से नुकसान होता है। माकपा विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ का हिस्सा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘एक चरण में मतदान चलता है और दूसरे चरण में चुनाव प्रचार चल रहा होता है। प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ दल के नेता रैली, सभाओं में जो कहते हैं, उसका सीधा प्रसारण उन स्थानों पर होता है जहां मतदान हो रहा होता है।’’ </p>
<p>येचुरी ने कहा कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कमजोर है और जहां उसके पास पर्याप्त कैडर नहीं है, सात चरण उन्हें कैडर को दूसरी जगह भेजने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा इन सबसे सत्तारूढ़ दल को लाभ होता है। माकपा नेता ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>
<p>सभी को समान अवसर मिलना चाहिए...।’’ इस साल लोकसभा चुनावों के लिए मतदान कार्यक्रम की अवधि 44 दिनों की है। 1951-52 के पहले संसदीय चुनावों के बाद यह दूसरा सबसे लंबा चुनाव कार्यक्रम होगा। पहले आम चुनाव का कार्यक्रम चार महीने से अधिक समय में संपन्न हुआ था। लोकसभा चुनाव 19 अप्रैल से सात चरणों में होंगे। मतगणना चार जून को होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Mar 2024 18:59:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>“ मैं आज जगतियाल और शिवमोगा में रैलियों को संबोधित करूंगा: PM Modi </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Nation:</strong> दक्षिण भारत में अपने कई कार्यक्रमों से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दक्षिण भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पक्ष में असाधारण उत्साह है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी लोकसभा चुनावों में अहम लाभ हासिल करने के लिए सभी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री सोमवार को कर्नाटक के शिवमोगा और तेलंगाना के जगतियाल में रैलियों को संबोधित करेंगे जबकि तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक रोड शो करेंगे। </p>
<p>मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “ मैं आज जगतियाल और शिवमोगा में रैलियों को संबोधित करूंगा। बाद में शाम को कोयंबटूर में रोड शो में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139518/65f7ed4a80a36"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/pm-modi_large_1251_154.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Nation:</strong> दक्षिण भारत में अपने कई कार्यक्रमों से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दक्षिण भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पक्ष में असाधारण उत्साह है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी लोकसभा चुनावों में अहम लाभ हासिल करने के लिए सभी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री सोमवार को कर्नाटक के शिवमोगा और तेलंगाना के जगतियाल में रैलियों को संबोधित करेंगे जबकि तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक रोड शो करेंगे। </p>
<p>मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “ मैं आज जगतियाल और शिवमोगा में रैलियों को संबोधित करूंगा। बाद में शाम को कोयंबटूर में रोड शो में शामिल होऊंगा। चाहे तेलंगाना हो, कर्नाटक हो या तमिलनाडु, राजग के पक्ष में असाधारण उत्साह है।” कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य बीएस येदियुरप्पा के गृह क्षेत्र शिवमोगा में प्रधानमंत्री की रैली ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी के असंतुष्ट नेता केएस ईश्वरप्पा ने शिमोगा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की योजना की घोषणा की है, क्योंकि उनके बेटे को हावेरी सीट से पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। </p>
<p>भाजपा ने येदियुरप्पा के बड़े बेटे बी.वाई राघवेंद्र को शिमोगा से मैदान में उतारा है। मोदी की तेलंगाना में निजामाबाद लोकसभा क्षेत्र के जगतियाल में होने वाली रैली का असर पड़ोसी करीमनगर लोकसभा सीट पर भी पड़ सकता है। निवर्तमान लोकसभा में निजामाबाद और करीमनगर दोनों सीटों पर भाजपा का ही कब्जा है। भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में तेलंगाना की 17 लोकसभा सीट में से चार पर जीत हासिल की थी। </p>
<p>कोयंबटूर में मोदी का रोड शो मद्रास उच्च न्यायालय से मंजूरी मिलने के बाद हो रहा है। पुलिस ने ‘सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील’ इलाका होने और परीक्षाओं होने का कारण बताकर रोड शो की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। जिले ने अतीत में भाजपा का समर्थन किया है। यहां से 1990 के दशक में सीपी राधाकृष्णन भाजपा के टिकट पर दो बार लोकसभा पहुंचे थे जो फिलहाल झारखंड के राज्यपाल हैं। वहीं, 2021 के तमिलनाडु विधानसभा पार्टी की महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वी.श्रीनिवासन ने जीत दर्ज की थी। </p>
<p>प्रधानमंत्री के तीन कार्यक्रम संकेत करते हैं कि भाजपा लोकसभा चुनाव में 400 सीटें जीतने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक तौर पर पैठ बनाने की कोशिश में है। पार्टी का लक्ष्य पांच दक्षिणी राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के अलावा केंद्र शासित पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी अच्छी बढ़त हासिल करना है। निवर्तमान सदन में, भाजपा का केरल और तमिलनाडु से कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जहां क्रमशः 20 और 39 लोकसभा सीट हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Mar 2024 13:04:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनाव आयुक्त को लेकर कौन सा बिल मोदी सरकार ने राज्यसभा से करा लिया पास, भड़क गया पूर विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[चर्चा में भाग लेते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के राघव चड्ढा ने कहा कि यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि संविधान का मूल ढांचा है- स्वतंत्र चुनाव एवं लोकतंत्र। लेकिन जब आयोग ही पूर्वाग्रह ग्रस्त होगा तो चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकेंगे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/137304/which-bill-regarding-election-commissioner-was-passed-by-modi-government"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-12/election-commissioner_large_1840_19.webp" alt=""></a><br /><p>राज्यसभा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं पदावधि) विधेयक 2023 को चर्चा के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दी। बीजू जनता दल (बीजद) के अमर पटनायक ने विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में अब तक निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति कार्यपालिका द्वारा ही की जाती रही और आयोग ने सराहनीय काम किया है। चर्चा में भाग लेते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के राघव चड्ढा ने कहा कि यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि संविधान का मूल ढांचा है- स्वतंत्र चुनाव एवं लोकतंत्र। लेकिन जब आयोग ही पूर्वाग्रह ग्रस्त होगा तो चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकेंगे।</p>
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<p><strong>यह विधेयक क्या है और इसमें क्या प्रस्तावित किया गया है?</strong></p>
<p>इस साल 2 मार्च को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुनाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई), लोकसभा में विपक्ष के नेता की सदस्यता वाली एक समिति द्वारा की जानी चाहिए। संविधान सीईसी और ईसी की नियुक्ति के लिए कोई विशिष्ट विधायी प्रक्रिया नहीं बताता है। परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार को इन अधिकारियों की नियुक्ति में खुली छूट है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर नियुक्तियाँ करता है।</p>
<p>हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि उसका आदेश संसद द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी कानून के अधीन होगा"। नतीजतन, सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक, 2023 लेकर आई, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सीजेआई के बजाय एक कैबिनेट मंत्री को शामिल करने वाली एक समिति का प्रस्ताव रखा गया। इस विधेयक में सीईसी और ईसी को कैबिनेट सचिव के समान वेतन, भत्ते और भत्ते देने का भी प्रस्ताव है। यह विधेयक चुनाव आयोग (चुनाव आयुक्तों की सेवा की शर्तें और व्यवसाय का संचालन) अधिनियम, 1991 की जगह लेगा, जिसके तहत सीईसी और ईसी का वेतन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान है। </p>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Dec 2023 21:40:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>लोकसभा के नियमों के साथ हो रहा है खिलवाड़: महुआ मोइत्रा </title>
                                    <description><![CDATA[<p>तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि लोकसभा की सभी उचित प्रक्रिया और नियम पूरी तरह से विफल हो गए हैं। कैश-फॉर-क्वेरी घोटाले में लोकसभा की आचार समिति की मसौदा रिपोर्ट तक मीडिया की पहुंच होने का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पीकर पर निष्क्रियता और मेरी पिछली शिकायतों पर प्रतिक्रिया की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने बिड़ला को लिखे पत्र में कहा कि स्पष्ट रूप से लोकसभा की सभी उचित प्रक्रिया और नियम पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं। आपकी निष्क्रियता और मेरी पिछली शिकायतों पर प्रतिक्रिया की कमी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136960/mahua-moitra-is-playing-with-the-rules-of-lok-sabha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/mahua-moitra_large_1351_19.webp" alt=""></a><br /><p>तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि लोकसभा की सभी उचित प्रक्रिया और नियम पूरी तरह से विफल हो गए हैं। कैश-फॉर-क्वेरी घोटाले में लोकसभा की आचार समिति की मसौदा रिपोर्ट तक मीडिया की पहुंच होने का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पीकर पर निष्क्रियता और मेरी पिछली शिकायतों पर प्रतिक्रिया की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने बिड़ला को लिखे पत्र में कहा कि स्पष्ट रूप से लोकसभा की सभी उचित प्रक्रिया और नियम पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं। आपकी निष्क्रियता और मेरी पिछली शिकायतों पर प्रतिक्रिया की कमी भी दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>
<p>मीडिया ने कल खबर दी कि पैनल व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी के साथ संसद के आधिकारिक पोर्टल की लॉगिन क्रेडेंशियल कथित तौर पर साझा करने के लिए मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने की सिफारिश करेगा, क्योंकि यह अनैतिक आचरण है। पत्र में उन्होंने कहा कि अडानी समूह के स्वामित्व वाले एक चैनल के पास मसौदा रिपोर्ट तक पहुंच थी, जो लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों में निहित नियम 275(2) का बहुत गंभीर उल्लंघन था। उन्होंने कहा कि यह और भी चौंकाने वाला है क्योंकि इस मीडिया चैनल का बहुमत अडानी समूह के स्वामित्व में है, जिसके खिलाफ मैंने लोकसभा में कॉर्पोरेट धोखाधड़ी और वित्तीय और प्रतिभूति नियमों के उल्लंघन के बहुत गंभीर मुद्दे उठाए हैं।</p>
<p>मोइत्रा ने कहा कि उन्हें समूह के खिलाफ बोलने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। यह बिल्कुल चौंकाने वाला है कि इस समूह के स्वामित्व वाले चैनल की गोपनीय समिति की रिपोर्ट तक पहुंच कैसे है, जो मेरे कथित अनैतिक आचरण का विषय है। उन्होंने इसे नियमों का घोर उल्लंघन बताया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 14:00:08 +0530</pubDate>
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                <title>हम इस पर विचार करने के इच्छुक नहीं, संसद भवन के उद्घाटन को लेकर दायर याचिका SC ने की खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><strong>सुप्रीम </strong>कोर्ट ने शुक्रवार को भारत के प्रथम नागरिक और संस्था के प्रमुख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए लोकसभा सचिवालय को निर्देश देने की याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि हम जानते हैं कि आप ऐसी याचिकाएं क्यों दायर करते हैं, हम इस पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं।</p>
<p>देश के नए संसद भवन के उद्घाटन की तराखी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है। इसको लेकर रोज नए नए ट्वस्टि देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस समेत 21 विपक्षी दलों ने कार्यक्रम के बहिष्कार का ऐलान कर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129592/we-are-not-willing-to-consider-this-sc-dismisses-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/suream-court.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><strong>सुप्रीम </strong>कोर्ट ने शुक्रवार को भारत के प्रथम नागरिक और संस्था के प्रमुख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए लोकसभा सचिवालय को निर्देश देने की याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि हम जानते हैं कि आप ऐसी याचिकाएं क्यों दायर करते हैं, हम इस पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं।</p>
<p>देश के नए संसद भवन के उद्घाटन की तराखी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है। इसको लेकर रोज नए नए ट्वस्टि देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस समेत 21 विपक्षी दलों ने कार्यक्रम के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। वहीं मामाल देश की सर्वोच्च अदालत में भी दस्तक देता दिखा। अब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से संसद भवन के उद्घाटन को लेकर दायर की गई याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भारत की प्रथम नागरिक और संस्था के प्रमुख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए लोकसभा सचिवालय को निर्देश देने की याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि हम जानते हैं कि आप ऐसी याचिकाएं क्यों दायर करते हैं, हम इस पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं।</p>
<p>बता दें कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें यह निर्देश देने की मांग की गई है कि नए संसद भवन का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा था कि लोकसभा सचिवालय ने राष्ट्रपति को उद्घाटन के लिए आमंत्रित नहीं करके संविधान का उल्लंघन किया गया। याचिका में कहा गया है कि राष्ट्र के मुखिया राष्ट्रपति को न बुलाना गलत है।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 May 2023 15:03:39 +0530</pubDate>
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