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                <title>Swantantra prabhat Patna/New Delhi news - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Swantantra prabhat Patna/New Delhi news RSS Feed</description>
                
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                <title>ताड़ी निकालने के दौरान पेड़ से गिरकर व्यक्ति की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात | पटना के धनरुआ से संवाददाता की रिपोर्ट</strong></div>
<div><strong>प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश</strong></div>
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<div>धनरूआ थाना क्षेत्र के बुलाकी बिगहा डुमरा गांव में बुधवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान बिहारी चौधरी उर्फ बुढ़ाई चौधरी, पिता गिरधारी चौधरी, निवासी बुलाकी बिगहा के रूप में हुई है।</div>
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<div>बताया जाता है कि बिहारी चौधरी रोज की तरह ताड़ के पेड़ पर चढ़कर ताड़ी निकालने गए थे। इसी दौरान अचानक उनका हाथ फिसल गया और वे ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। पेड़ के नीचे कड़ी सतह (ढलाई) होने के कारण</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177607/man-dies-after-falling-from-tree-while-extracting-toddy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20250331-wa0163.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात | पटना के धनरुआ से संवाददाता की रिपोर्ट</strong></div>
<div><strong>प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश</strong></div>
<div> </div>
</div>
<div>धनरूआ थाना क्षेत्र के बुलाकी बिगहा डुमरा गांव में बुधवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान बिहारी चौधरी उर्फ बुढ़ाई चौधरी, पिता गिरधारी चौधरी, निवासी बुलाकी बिगहा के रूप में हुई है।</div>
<div> </div>
<div>बताया जाता है कि बिहारी चौधरी रोज की तरह ताड़ के पेड़ पर चढ़कर ताड़ी निकालने गए थे। इसी दौरान अचानक उनका हाथ फिसल गया और वे ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। पेड़ के नीचे कड़ी सतह (ढलाई) होने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट लगी, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।</div>
<div> </div>
<div>घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी। हादसे के बाद गांव में मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।</div>
<div>मृतक अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उन्हीं के सहारे पूरे परिवार का पालन-पोषण होता था। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 22:08:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[BIHAR SWATANTRA PRABHAT]]></dc:creator>
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                <title>प्राच्य-साहित्य के महान अध्येता और साहित्य-ऋषि थे राम नारायण शास्त्री : प्रेम कुमार </title>
                                    <description><![CDATA[मेधावी छात्रा साक्षी कुमारी को दिया गया 'ईश्वरी देवी मेधा सम्मान'।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167224/ram-narayan-shastri-prem-kumar-was-a-great-scholar-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260124-wa0227.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जितेंद्र कुमार "राजेश" ( बिहार)</strong></p>
<p><br />पटना, २४ जनवरी। संस्कृत और प्राच्य-साहित्य के महान अध्येता और ऋषि-तुल्य साहित्य-साधक थे पं राम नारायण शास्त्री। वे एक महान हिन्दी सेवी ही नहीं एक महान चिंतक भी थे। उनके तपस्वी जीवन से हमें प्रेरणा मिलती है। उनकी पत्नी ईश्वरी देवी भी वेदों का ज्ञान रखने वाली विदुषी और गणितज्ञ थी। साहित्य, समाज और राजनीति की सेवा भी उन्होंने देश-सेवा के रूप में की। उनकी सरलता और विनम्रता अनुकरणीय थी। </p>
<p>यह बातें शनिवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, पं राम नारायण शास्त्री स्मारक न्यास के तत्त्वावधान में आयोजित स्मृति-सह-सम्मान समारोह का उद्घाटन करते हुए, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कही। इस अवसर पर उन्होंने सुप्रसिद्ध समाजसेवी एवं विचारक राम कुमार एवं वरिष्ठ पत्रकार राकेश प्रवीर को 'अक्षर-पुरुष पं राम नारायण शास्त्री स्मृति सम्मान' से अलंकृत किया । उन्होंने माध्यमिक बोर्ड की परीक्षा-२०२५ में उच्चतम अंक प्राप्त करने वाली, जे पी एन एस उच्च विद्यालय, नरहन, समस्तीपुर की छात्रा साक्षी कुमारी को, 'ईश्वरी देवी सर्वश्रेष्ठ गणितज्ञ छात्रा पुरस्कार' से पुरस्कृत किया। पुरस्कार स्वरूप उसे २५५१ रु की राशि भी प्रदान की गयी।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260124-wa0228.jpg" alt="IMG-20260124-WA0228" width="898" height="598"></img></p>
<p>पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि शास्त्री जी की विद्वता और विनम्रता सबको अपनी ओर खींचती थी। मानव शरीर में वे देवता थे। उनके ज्ञान से समाज सदा लाभान्वित होता रहा है।</p>
<p>समारोह के मुख्य अतिथि और बिहार विधान परिषद के उप सभापति डा राम वचन राय ने पं शास्त्री को नमन करते हुए कहा कि शास्त्री जी को १९६१ से जानता रहा हूँ, जब वे राष्ट्रभाषा परिषद में सेवा दे रहे थे।। वे पक्के आर्यसमाजी और ओजस्वी वक्ता थे। वे सनातन और अधुनातन के संयोग थे। उनके विचारों में दर्शन भी है और नूतन चिंतन भी। </p>
<p>झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि रंजन ने कहा कि शास्त्री जी ने शास्त्रों का गहन अध्ययन किया और उसका सदुपयोग समाज की सेवा के लिए किया। वे ज्ञान के दीप-स्तम्भ थे, जिनसे आने वाली पीढ़ियाँ प्रकाश पाती रहेंगी।</p>
<p>सभा की अध्यता करते हुए, सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि शास्त्री जी एक प्रणम्य साहित्यिक साधु-पुरुष थे। प्राच्य साहित्य के लिए किए गए उनके कार्य साहित्य-जगत में उन्हें अमरत्व प्रदान करते हैं। प्राच्य-साहित्य की दुर्लभ पोथियों और पांडुलिपियों का अन्वेषण, अनुशीलन और सूचीकरण कर उन्होंने हिन्दी साहित्य को एक बड़ा धरोहर दिया। इसके लिए शास्त्री जी सदैव श्रद्धा-पूर्वक स्मरण किए जाते रहेंगे। साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने सम्मेलन की भी मूल्यवान सेवा की। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी एक ऐसे विरल महात्मा पुरुष हुए, जिनका अवतरण और लोकांतरण एक ही दिन, २४ जनवरी को हुआ। ऐसा सुयोग ईश्वरीय कृपा-प्राप्त विभूतियों के जीवन में ही घटित होता है। यह भी कितना सुंदर योग है कि उनकी पत्नी का नाम भी ईश्वरी देवी था और उनका भी तिरोधान २४ जनवरी को ही हुआ।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260124-wa0226.jpg" alt="IMG-20260124-WA0226" width="916" height="610"></img></p>
<p>पं शास्त्री के पुत्र और न्यास के प्रमुख न्यासी अभिजीत कश्यप ने न्यास की गतिविधियों के संबंध में अपना प्रतिवेदन पढ़ा तथा सबके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। अतिथियों का स्वागत न्यास के अध्यक्ष प्रो रमेश चंद्र सिंहा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन पंकज कुमार ने किया। मंच का संचालन वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कांत ओझा तथा गौरव सुंदरम ने संयुक्त रूप से किया।</p>
<p>इस अवसर पर,पटना विश्व विद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो के सी सिन्हा, सम्मेलन की उपाध्यक्ष डा मधु वर्मा, डा रत्नेश्वर सिंह, कुमार अनुपम, पारिजात सौरभ, डा मेहता नगेंद्र सिंह, प्रो आर आर सहाय, डा नागेश्वर शर्मा, विभारानी श्रीवास्तव, इंदु भूषण सहाय, डा मनोज कुमार समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 21:32:01 +0530</pubDate>
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