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                <title>santosh tiwari - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>santosh tiwari RSS Feed</description>
                
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                <title>रक्षा लेखा विभाग के अधिकारियों ने UPSIFS का परिभ्रमण किया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में 7 जुलाई 2026 उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ में आज रक्षा लेखा विभाग, क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (RTC कैंट लखनऊ) में प्रशिक्षणरत रक्षा लेखा विभाग के 40 अधिकारियों ने परिभ्रमण किया। जिन्हें संस्थान के विषय विशेषज्ञों द्वारा साइबर एवं फोरेंसिक विषयों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी। इस अवसर पर  संस्थापक निदेशक डॉ0 जी.के. गोस्वामी ने सभागार में उपस्थित समस्त  अधिकारियो को संबोधित करते हुए कहा कि साइबर युग में अपराध के तरीके बदल रहे हैं इसलिए हमें सावधान रहना होगा|</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पहले फिजीकल दुनियां में अपराध होते थे लेकिन अब डिजीटल दुनियां में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182862/defense-accounts-department-officials-circle-upsifs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/588808.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में 7 जुलाई 2026 उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ में आज रक्षा लेखा विभाग, क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (RTC कैंट लखनऊ) में प्रशिक्षणरत रक्षा लेखा विभाग के 40 अधिकारियों ने परिभ्रमण किया। जिन्हें संस्थान के विषय विशेषज्ञों द्वारा साइबर एवं फोरेंसिक विषयों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी। इस अवसर पर  संस्थापक निदेशक डॉ0 जी.के. गोस्वामी ने सभागार में उपस्थित समस्त  अधिकारियो को संबोधित करते हुए कहा कि साइबर युग में अपराध के तरीके बदल रहे हैं इसलिए हमें सावधान रहना होगा|</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पहले फिजीकल दुनियां में अपराध होते थे लेकिन अब डिजीटल दुनियां में अपराध हो रहे है ऐसे में तकनीक के बारे मे हम सभी को अधिक से अधिक जानकारी रखनी होगी और उसी के अनुसार कार्य करना होगा अन्यथा साइबर ठगी के शिकार हो सकते हैं। उन्होंने डेटा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिसके पास जितना डेटा होगा वह उतना ही मजबूत होगा, कुछ देश इसलिए शक्तिशाली हैं क्योंकि वह अपनी तकनीक और डाटा अन्य देशो से शेयर नहीं करते उन्होंने कहा कि अभी आप लोगों का प्रशिक्षण का काल है जितना जिज्ञासु होगें उतना ही नई-नई चीजों को सीख पायेगें।यह संस्थान वर्तमान में साइबर सुरक्षा तथा फोरेंसिक विषय में विभिन्न संस्थानों को तकनीकी दक्षता आज निपुण कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर पुलिस उप महानिरीक्षक हेमराज मीना ने प्रशिक्षु अधिकारियो को संस्थान के बारे में ब्रीफ किया तथा आज के युग में साइबर फोरेंसिक क्यों महत्वपूर्ण है? इस विषय पर प्रकाश डाला कार्यक्रम के अंत में उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने सभागार में उपस्थित समस्त अधिकारियों का अभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने तथा  डॉ इंद्रजीत ने साइबर विषय पर व्याख्यान दिया। प्रशिक्षु अधिकारियो ने डीएनए तथा एआई लैब का भी विजिट किया। इस अवसर पर, उप निदेशक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ0 आनंद प्रकाश, अमित मिश्र, राहुल दिवेदी, डॉ0 पलक, आरआई शैलेन्द्र सिंह एवं कार्तिकेय सहित अन्य उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 21:38:19 +0530</pubDate>
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                <title>सन्यास या साम्राज्य? 50 करोड़ का आश्रम, करोड़ों की कारें और योगी से नजदीकी कौन हैं सतुआ बाबा उर्फ संतोष तिवारी?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><br />  इस बार माघ मेले में आस्था से ज़्यादा चर्चा अगर किसी की है, तो वह हैं सतुआ बाबा। वजह साधारण नहीं है—एक ओर संत का चोला, दूसरी ओर 3 करोड़ और 4.50 करोड़ की लग्जरी कारें, प्राइवेट जेट से यात्रा और सत्ता के शीर्ष से नजदीकियां। सवाल उठना लाज़मी है—यह सन्यास है या संपन्नता का प्रदर्शन? </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">माघ मेले में सतुआ बाबा का काफिला देखते ही श्रद्धालु नहीं, बल्कि प्रशासन और मीडिया तक ठिठक गया। बताया जा रहा है कि बाबा के पास मौजूद दो गाड़ियों की कीमत ही करीब 7 करोड़</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166839/sanyas-or-empire-ashram-worth-rs-50-crores-cars-worth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260120-wa0250.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><br /> इस बार माघ मेले में आस्था से ज़्यादा चर्चा अगर किसी की है, तो वह हैं सतुआ बाबा। वजह साधारण नहीं है—एक ओर संत का चोला, दूसरी ओर 3 करोड़ और 4.50 करोड़ की लग्जरी कारें, प्राइवेट जेट से यात्रा और सत्ता के शीर्ष से नजदीकियां। सवाल उठना लाज़मी है—यह सन्यास है या संपन्नता का प्रदर्शन? </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">माघ मेले में सतुआ बाबा का काफिला देखते ही श्रद्धालु नहीं, बल्कि प्रशासन और मीडिया तक ठिठक गया। बताया जा रहा है कि बाबा के पास मौजूद दो गाड़ियों की कीमत ही करीब 7 करोड़ रुपये है। यहीं से चर्चाओं का सिलसिला शुरू हुआ और बात वाराणसी तक जा पहुंची। जांच में सामने आया कि वाराणसी में सतुआ बाबा का आश्रम करीब 50 करोड़ रुपये का बताया जाता है। इसके अलावा कई लग्जरी गाड़ियां और प्राइवेट जेट से सफर—ये सब ऐसे तथ्य हैं, जो एक संन्यासी जीवन की परिभाषा पर सवाल खड़े करते हैं। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नजदीकियों की चर्चाएं भी माघ मेले में आम रहीं। सत्ता और संत के इस मेल ने बहस को और धार दे दी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मिडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में सतुआ बाबा की जड़ें ललितपुर से जुड़ती हैं। असली नाम संतोष तिवारी। पढ़ाई के लिए बनारस आए और यहीं उन्होंने सन्यास की राह पकड़ ली। कहा जाता है कि उनका व्यवहार, बोलचाल और संगठन क्षमता ऐसी थी कि वे धीरे-धीरे आश्रम के मुख्य और फिर महामंडलेश्वर बन गए। पर कहानी में मोड़ तब आया, जब यह सामने आया कि सन्यास लेने की जानकारी तक माता- पिता को नहीं थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिवार ने इसका विरोध भी किया—सवाल उठाया गया कि बिना सहमति उनका बेटा कैसे सन्यासी बना दिया गया? भावनात्मक पहलू भी कम चौंकाने वाला नहीं है। बाद में मां ने इच्छा जताई कि वे अपने अंतिम दिन छोटे बेटे के साथ बिताना चाहती हैं। उनकी अंतिम सांस वाराणसी के उसी आश्रम में टूटी, जो आज करोड़ों की संपत्ति का केंद्र बताया जा रहा है। चार भाइयों में सबसे छोटे सतुआ बाबा के बड़े भाई पत्रकार थे, जिनकी 2007 में गोली लगने से मौत हो गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कहा जाता है कि इसी घटना के बाद उनके जीवन ने निर्णायक मोड़ लिया।आज स्थिति यह है कि प्रयागराज माघ मेले में सतुआ बाबा सबसे बड़ा चर्चा-बिंदु हैं। सवाल साफ हैं—क्या यह आस्था का नया चेहरा है? या फिर संन्यास की आड़ में खड़ा होता एक भव्य साम्राज्य? आगे की कहानी क्या मोड़ लेती है—इस पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 20:53:55 +0530</pubDate>
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