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                <title>प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पीएचसी कचनरवा में डॉक्टर नदारद, लोगों ने किया जोरदार प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कोन/ सोनभद्र -</strong> नव सृजित विकास खण्ड कोन/ सीएचसी चोपन अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कचनारवा चिकित्सक विहीन है। बतातें चलें कि उक्त स्वास्थ्य केन्द्र पर एक फर्मासिस्ट, एक संविदा एएनम, एक चतुर्थ </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  श्रेणी कर्मचारी और एक चिकित्सक की नियुक्ति है पर विडंबना है कि उक्त स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक वर्षों से लगभग समय गायब रहते हैं। मिली जानकारी के अनुसार चिकित्साधिकारी महीनें में कभी एक दिन के लिए आकर महीने भर की कागजी कोरम पूरा कर लेते हैं। जिसके क्रम में सोमवार को स्थानीय लोगों द्वारा जोरदार प्रदर्शन कर चिकित्सक की नियमित ड्यूटी लगाने व ऐसे लापरवाह चिकित्साधिकारी के</div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179466/people-missing-doctors-in-phc-kachnarwa-staged-a-strong-demonstration"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001619695.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कोन/ सोनभद्र -</strong> नव सृजित विकास खण्ड कोन/ सीएचसी चोपन अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कचनारवा चिकित्सक विहीन है। बतातें चलें कि उक्त स्वास्थ्य केन्द्र पर एक फर्मासिस्ट, एक संविदा एएनम, एक चतुर्थ </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> श्रेणी कर्मचारी और एक चिकित्सक की नियुक्ति है पर विडंबना है कि उक्त स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक वर्षों से लगभग समय गायब रहते हैं। मिली जानकारी के अनुसार चिकित्साधिकारी महीनें में कभी एक दिन के लिए आकर महीने भर की कागजी कोरम पूरा कर लेते हैं। जिसके क्रम में सोमवार को स्थानीय लोगों द्वारा जोरदार प्रदर्शन कर चिकित्सक की नियमित ड्यूटी लगाने व ऐसे लापरवाह चिकित्साधिकारी के उपर नकेल कसने की मांग किया है। वहीं वरिष्ट समाज सेवी जोखन प्रसाद व गंगा प्रसाद सहित कैलास राम ने प्रभारी चिकित्साधिकारी के उपर आरोप लगाया है कि पीएचसी कचनारवा पर जब चिकित्सक की ड्यूटी है तो आखिर किन कारणों से हॉस्पिटल में नहीं दिखते हैं जबकि स्थानीय लोग ईलाज के लिए दर दर की ठोकर खा रहे हैं और झोला छाप डॉक्टरों की शरण में जाकर जान तक गंवाने को मजबूर हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था पर सवालिया निशान लगना लाजिमी हैं। गौरतलब है कि पीएचसी कचनारवा लगभग 12 किलोमीटर चारों तरफ से घिरा है यहाँ भोली भाली जनता ईलाज के लिए परेशान है पर विभाग के कान तक इसकी आवाज सुनाई नहीं दे रही है और वहीं इन दिनों हॉस्पिटल अपनी दुर्दशा पर आँसू बहा रहा है यहाँ न तो शौचालय का व्यवस्था सही और न ही कैंपस में बिजली की व्यवस्था। विषम परिस्थितियों में रात में आने वाले मरीजों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। बतादें कि यहाँ चारों तरफ झाड़ी व गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जहाँ एक तरफ प्रदेश के यश्ववी मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री गरीबों के स्वास्थ्य सेवा के लिए कटिवद्ध हैं वहीं ऐसे गैर जिम्मेदार चिकित्सक के द्वारा लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है जो जनहित में नहीं है। प्रदर्शन में मुख्य रूप से जोखन प्रसाद, बिहारी प्रसाद यादव, गंगा प्रसाद,अमरकेश, कैलास, रघुवर प्रसाद आदि शामिल रहे। वहीं पीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी कचनारवा से सेल फोन पर पक्ष जानने का प्रयास किया गया किन्तु कॉल रीसीव नहीं हुआ बल्कि उन्होंने अपने फर्मासिस्ट को कॉल करके जानकारी जरूर ली किन्तु पत्रकारों से बात करना उचित नहीं समझा । इस बावत सी एच सी अधीक्षक चोपन ने कहा कि पता करते हैं आखिर वास्तविकता क्या है। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर पी के राय ने सेल फोन पर बताया कि पता करते हैं। आखिर सबसे बड़ा सवाल कि शीर्ष पद पर बैठे अधिकारियों को इसकी जानकारी कैसे नहीं है। लोगों के जेहन में सवाल है कि क्या लोगों को चिकित्सा सुविधा मिल पायेगी या लोग झोला छाप डॉक्टरों की शरण में जाकर अपनी जान गंवाते रहेंगे। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी से मांग किया है कि ऐसे लापरवाह डॉक्टर को तत्काल बर्खास्त कर अन्य डॉक्टर की नियुक्ति की जाय।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 18:26:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नर्सों का योगदान और विश्व स्वास्थ्य का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मानवता की सेवा और उपचार की प्रक्रिया में नर्सों का योगदान अतुलनीय है। प्रत्येक वर्ष 12 मई को संपूर्ण विश्व अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाता है। यह दिवस केवल एक तिथि नहीं है बल्कि उस समर्पण और करुणा का सम्मान है जो नर्सें बिना किसी स्वार्थ के समाज को प्रदान करती हैं। इस विशेष दिवस का आयोजन आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती के उपलक्ष्य में किया जाता है। 1820 में जन्मी फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने नर्सिंग को एक पेशेवर और सम्मानित स्वरूप प्रदान किया। क्रीमिया युद्ध के दौरान उन्होंने रात के अंधेरे में हाथ में लालटेन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178919/contribution-of-nurses-and-the-future-of-world-health"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/12_05_2023-new_project_10_23410139.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मानवता की सेवा और उपचार की प्रक्रिया में नर्सों का योगदान अतुलनीय है। प्रत्येक वर्ष 12 मई को संपूर्ण विश्व अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाता है। यह दिवस केवल एक तिथि नहीं है बल्कि उस समर्पण और करुणा का सम्मान है जो नर्सें बिना किसी स्वार्थ के समाज को प्रदान करती हैं। इस विशेष दिवस का आयोजन आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती के उपलक्ष्य में किया जाता है। 1820 में जन्मी फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने नर्सिंग को एक पेशेवर और सम्मानित स्वरूप प्रदान किया। क्रीमिया युद्ध के दौरान उन्होंने रात के अंधेरे में हाथ में लालटेन लेकर घायल सैनिकों की जिस प्रकार सेवा की उसने उन्हें लेडी विद द लैंप की उपाधि दी। उन्होंने यह सिद्ध किया कि चिकित्सा केवल औषधियों का खेल नहीं है बल्कि इसमें स्वच्छता, सहानुभूति और निरंतर देखभाल का भी उतना ही महत्व है। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की विषयवस्तु हमारी नर्सें, हमारा भविष्य, सशक्त नर्सें जीवन बचाती हैं निर्धारित की गई है। यह विषयवस्तु इस बात की ओर संकेत करती है कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए नर्सों का सशक्तिकरण अनिवार्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नर्सिंग सेवा का विस्तार केवल चिकित्सालयों की दीवारों तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जो व्यक्ति के जन्म से लेकर जीवन के अंतिम क्षणों तक उसके साथ बनी रहती है। स्वास्थ्य प्रणाली में नर्सों की भूमिका एक सेतु के समान है जो चिकित्सक और रोगी के मध्य संवाद और उपचार को सुगम बनाती है। किसी भी आपदा या आपातकाल की स्थिति में नर्सें ही सबसे अग्रिम पंक्ति में खड़ी नजर आती हैं। यदि हम वैश्विक आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि स्वास्थ्य क्षेत्र के कुल कार्यबल का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा नर्सों और दाइयों का है। इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर नर्सों की भारी कमी देखी जा रही है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 60 लाख अतिरिक्त नर्सों की आवश्यकता होगी। यह आंकड़ा हमें सचेत करता है कि यदि समय रहते इस क्षेत्र में निवेश नहीं किया गया तो भविष्य में स्वास्थ्य प्रणालियाँ लड़खड़ा सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे सघन जनसंख्या वाले देश में नर्सों का उत्तरदायित्व और भी अधिक बढ़ जाता है। भारतीय नर्सिंग परिषद के आंकड़ों के अनुसार देश में पंजीकृत नर्सों की संख्या लाखों में है परंतु प्रति 1000 जनसंख्या पर नर्सों की उपलब्धता अभी भी वैश्विक मानकों से कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है वहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की पूरी जिम्मेदारी नर्सों के कंधों पर होती है। वे न केवल प्रसव संबंधी सेवाएं प्रदान करती हैं बल्कि टीकाकरण अभियानों, संक्रामक रोगों के नियंत्रण और पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करने के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में नर्सों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा है। वे समाज के सबसे निचले स्तर तक पहुँचकर स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल के वर्षों में वैश्विक महामारी कोविड 19 ने संपूर्ण विश्व को नर्सों की वास्तविक शक्ति से परिचित कराया। जब पूरा विश्व भयभीत होकर घरों में बंद था तब नर्सें बिना अपनी जान की परवाह किए संक्रमित मरीजों की सेवा कर रही थीं। पीपीई किट पहनकर घंटों बिना भोजन और जल के काम करना उनके अदम्य साहस का परिचायक था। उस कठिन समय में नर्सों ने न केवल शारीरिक उपचार किया बल्कि एकांतवास में रह रहे मरीजों को मानसिक संबल भी प्रदान किया। कई नर्सों ने इस सेवा के दौरान अपने प्राणों की आहुति दे दी जो उनके व्यवसाय के प्रति सर्वोच्च बलिदान को दर्शाता है। इस महामारी ने यह पाठ पढ़ाया कि किसी भी देश की सुरक्षा केवल उसकी सीमाओं पर नहीं बल्कि उसके स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और उसके समर्पित स्वास्थ्य कर्मियों के हाथों में भी सुरक्षित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान परिदृश्य में नर्सिंग के क्षेत्र में कई चुनौतियां भी विद्यमान हैं जिन्हें संबोधित करना अत्यंत आवश्यक है। नर्सों को अक्सर लंबे समय तक कार्य करना पड़ता है जिससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कई स्थानों पर उन्हें उचित वेतन और सुविधाएं प्राप्त नहीं होती हैं। कार्यस्थल पर सुरक्षा का अभाव और तनावपूर्ण वातावरण उनके प्रदर्शन को प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त नर्सिंग को आज भी समाज के कुछ वर्गों में केवल एक सहायक कार्य के रूप में देखा जाता है जबकि वास्तव में यह एक उच्च कौशल वाला पेशेवर कार्य है। नर्सों को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और नीति निर्माण में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है। वर्ष 2026 की विषयवस्तु इसी अंतर को पाटने का आह्वान करती है। सशक्त नर्सों का अर्थ है उन्हें उन्नत प्रशिक्षण देना, उन्हें नेतृत्व के अवसर प्रदान करना और उनके कार्य की गरिमा को पहचानना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा और तकनीक के विकास ने नर्सिंग के स्वरूप को भी बदला है। आज की नर्सें केवल सहायता प्रदान नहीं करतीं बल्कि वे आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के संचालन, जटिल उपचार प्रक्रियाओं और शोध कार्यों में भी निपुण हैं। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और टेलीमेडिसिन के युग में नर्सों की भूमिका और भी तकनीकी हो गई है। वे डेटा प्रबंधन और रोगियों की निरंतर निगरानी के लिए उन्नत प्रणालियों का उपयोग कर रही हैं। नर्सिंग शिक्षा के पाठ्यक्रम को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है ताकि नर्सें किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य चुनौती का सामना करने में सक्षम हो सकें। शोध कार्यों में नर्सों की भागीदारी चिकित्सा के क्षेत्र में नए दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज के रूप में हमारा यह कर्तव्य है कि हम नर्सों के प्रति अपने दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। उनके प्रति कृतज्ञता केवल एक दिन के उत्सव तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके लिए अनुकूल कार्य वातावरण सुनिश्चित करना, उनकी समस्याओं को सुनना और उन्हें सम्मानजनक जीवन स्तर प्रदान करना सरकार और समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हम नर्सों के प्रशिक्षण और भर्ती में निवेश करते हैं तो इसके परिणाम स्वरूप स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी क्योंकि एक स्वस्थ समाज ही प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने एक बार कहा था कि नर्सिंग एक कला है और यदि इसे कला बनाना है तो इसके लिए वैसी ही अनन्य भक्ति और कठोर तैयारी की आवश्यकता होती है जैसा कि किसी चित्रकार या मूर्तिकार के कार्य के लिए होती है। उनकी यह बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। आज की नर्सें न केवल उपचार करती हैं बल्कि वे मानवता की रक्षक भी हैं। 12 मई का यह दिन हमें उनके उन हजारों घंटों की याद दिलाता है जो उन्होंने दूसरों के दुखों को कम करने में बिताए हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक नर्स की मुस्कान और धैर्य कई बार सबसे महंगी औषधि से भी अधिक प्रभावी सिद्ध होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि नर्सिंग सेवा किसी भी राष्ट्र की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ है। वर्ष 2026 में जब हम इस दिवस को मनाते हैं तो हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम नर्सों के सशक्तिकरण के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। हमें ऐसी नीतियों की आवश्यकता है जो नर्सिंग क्षेत्र में आने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करें और वर्तमान नर्सों को उनकी योग्यता के अनुरूप सम्मान और स्थान दिलाएं। जब हम कहते हैं कि सशक्त नर्सें जीवन बचाती हैं तो इसका अर्थ केवल एक नारा नहीं है बल्कि यह एक वैज्ञानिक तथ्य है। एक सशक्त और संतुष्ट नर्स ही सर्वोत्तम उपचार प्रदान कर सकती है। आइए इस अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर हम उन सभी नर्सों को नमन करें जो अंधकार में प्रकाश की किरण बनकर मरीजों के जीवन को रोशन कर रही हैं और एक स्वस्थ सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही हैं। उनकी सेवा और त्याग ही वह ऊर्जा है जो चिकित्सा जगत को निरंतर गति प्रदान करती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 17:18:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिस्कोहर में जन आरोग्य मेले में 80 मरीजों का हुआ उपचार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>  सिद्धार्थनगर ।</strong> न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिस्कोहर पर रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे। सुबह से दोपहर तीन बजे तक कुल 80 मरीजों का  स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें  निःशुल्क  दवाएं दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मेले में आए मरीजों में अधिकांश पेट दर्द, दस्त, बुखार और त्वचा पर फोड़े-फुंसी , गांठों में दर्द की समस्या से परेशान थे। डॉ. एससी शर्मा ने मरीजों की जांच की और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य रहने के लिए बचाव के उपाय बताए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  इस दौरान फार्मासिस्ट राकेश चौधरी ,धीरज राय समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।</div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178041/80-patients-were-treated-at-the-jan-arogya-mela-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1777817770120.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> सिद्धार्थनगर ।</strong> न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिस्कोहर पर रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे। सुबह से दोपहर तीन बजे तक कुल 80 मरीजों का  स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें  निःशुल्क  दवाएं दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मेले में आए मरीजों में अधिकांश पेट दर्द, दस्त, बुखार और त्वचा पर फोड़े-फुंसी , गांठों में दर्द की समस्या से परेशान थे। डॉ. एससी शर्मा ने मरीजों की जांच की और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य रहने के लिए बचाव के उपाय बताए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस दौरान फार्मासिस्ट राकेश चौधरी ,धीरज राय समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:51:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जन आरोग्य मेले में 227 मरीजों का हुआ उपचार</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong> भनवापुर ब्लाक क्षेत्र के पीएचसी तरहर,बिजौरा , सोहना , कोहडौरा व बिस्कोहर  में रविवार को जन आरोग्य स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मेले में खांसी व गले में खराश, एसिडिटी , फंगल इन्फेक्शन,जोड़ों में दर्द , त्वचा रोग आदि के कुल 227 मरीजों का इलाज कर निःशुल्क दवाओं का वितरण किया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">      पीएचसी तरहर में डॉ आशीष सत्यार्थी ने 37 मरीजों, पीएचसी बिजौरा में डॉ.ईशदेव आर्य ने 39 मरीजों , पीएचसी सोहना में डॉ.प्रिंस विश्वास ने 43 मरीजों , पीएचसी कोहडौरा में डॉ राहुल कुमार ने 30 मरीजों व पीएचसी बिस्कोहर में डॉ एससी शर्मा</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधीक्षक</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177353/227-patients-were-treated-in-jan-arogya-mela"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1777213233839.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong> भनवापुर ब्लाक क्षेत्र के पीएचसी तरहर,बिजौरा , सोहना , कोहडौरा व बिस्कोहर  में रविवार को जन आरोग्य स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मेले में खांसी व गले में खराश, एसिडिटी , फंगल इन्फेक्शन,जोड़ों में दर्द , त्वचा रोग आदि के कुल 227 मरीजों का इलाज कर निःशुल्क दवाओं का वितरण किया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   पीएचसी तरहर में डॉ आशीष सत्यार्थी ने 37 मरीजों, पीएचसी बिजौरा में डॉ.ईशदेव आर्य ने 39 मरीजों , पीएचसी सोहना में डॉ.प्रिंस विश्वास ने 43 मरीजों , पीएचसी कोहडौरा में डॉ राहुल कुमार ने 30 मरीजों व पीएचसी बिस्कोहर में डॉ एससी शर्मा ने कुल 78 मरीजों का इलाज व निःशुल्क दवाई दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधीक्षक डॉक्टर शैलेंद्र मणि ओझा ने पीएचसी सोहना , कोहडौरा व बिस्कोहर पहुंचकर स्वास्थ्य मेले का औचक निरीक्षण किया , इस दौरान चिकित्साधिकारी व अन्य सहयोगी कर्मचारी उपस्थित मिले तथा उनके द्वारा किया जा रहे कार्य संतोषजनक पाया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधीक्षक ने चिकित्साधिकारी व फार्मासिस्ट को निर्देशित किया कि आवश्यक दवा सूची के अनुसार सभी दवाओं की उपलब्धता अस्पतालों पर सुनिश्चित किया जाए ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि मौसम के तापमान को देखते हुए सभी आम जनमानस दोपहर के समय बाहर निकले से बचें , फूल आस्तीन के कपड़े पहने , अधिक से अधिक नींबू युक्त शुद्ध पेयजल व ओआरएस युक्त पेयजल का इस्तेमाल करें तथा तरबूज , खरबूज, खीरा , ककड़ी को भोजन में शामिल करें ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान पीएन तिवारी , अंबुज श्रीवास्तव, त्रिशूल चतुर्वेदी , धीरज राय , अखिलेश तिवारी , विनय किशोर , मनोज मिश्रा आदि मौजूद रहे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 20:51:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ताले में बंद इलाज, रखवाली के नाम पर खानापूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> विकासखंड जसरा अंतर्गत बारा खास स्थित नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी सच्चाई सामने आ गई है। मीडिया टीम जब जीरो ग्राउंड कवरेज के लिए मौके पर पहुंची तो स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटकता मिला। न डॉक्टर मौजूद थे, न वार्ड बॉय और न ही कोई पैरामेडिकल स्टाफ। मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं और मायूस होकर लौट जाते हैं। स्वास्थ्य केंद्र में रखवाली के नाम पर बुधराम गौतम, निवासी करछना को तैनात किया गया है। मीडिया द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि पूर्व में यहां लगातार चोरियां होती थीं, एक गेट तक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167639/%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%9C--%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260129-wa0268.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> विकासखंड जसरा अंतर्गत बारा खास स्थित नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी सच्चाई सामने आ गई है। मीडिया टीम जब जीरो ग्राउंड कवरेज के लिए मौके पर पहुंची तो स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटकता मिला। न डॉक्टर मौजूद थे, न वार्ड बॉय और न ही कोई पैरामेडिकल स्टाफ। मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं और मायूस होकर लौट जाते हैं। स्वास्थ्य केंद्र में रखवाली के नाम पर बुधराम गौतम, निवासी करछना को तैनात किया गया है। मीडिया द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि पूर्व में यहां लगातार चोरियां होती थीं, एक गेट तक चोरी हो गया था, परिसर में बड़े-बड़े झाड़-झंखाड़ फैले थे, इसी कारण उन्हें यहां रखा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन सवाल यह उठता है कि जब मौके पर पूरा स्वास्थ्य केंद्र बंद है और ताला लटक रहा है तो स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर और कर्मचारी आखिर कैसे आते हैं। देखरेख के लिए व्यक्ति तैनात होने के बावजूद अस्पताल का बंद रहना कई सवाल खड़े करता है। मीडिया की पड़ताल में सामने आया कि अस्पताल की हालत बेहद बदहाल है—कई जगह दीवारें टूटी हुई हैं, एक गेट पूरी तरह नदारद है, एक गेट लगा हुआ है, कहीं दरवाजे नहीं हैं तो कहीं शौचालयों में गंदगी भरी पड़ी है। परिसर की स्थिति इतनी खराब है कि देखने से यह स्वास्थ्य केंद्र कम और खंडहर अधिक प्रतीत होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद मरीजों को न समय पर दवा मिल रही है और न ही प्राथमिक उपचार। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब जसरा सीएचसी अधीक्षक की घोर लापरवाही का नतीजा है। न नियमित निरीक्षण हो रहा है और न ही व्यवस्थाओं को सुधारने की कोई ठोस पहल। बड़ा सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य केंद्र बंद है और सुविधाएं शून्य हैं तो सरकारी कागजों में यह अस्पताल आखिर संचालित कैसे दिखाया जा रहा है। यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ का है। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 21:03:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला में 65 मरीजों का हुआ उपचार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>डलमऊ रायबरेली-</strong> कटघर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ मेला लगा। इसमें बुखार,सर्दी जुकाम, शुगर, उच्च रक्तचाप,मलेरिया, पैथालॉजी में जांच की गई।निःशुल्क दवा का भी वितरण किया गया।चिकित्साधिकारी डा.रूपाली शुक्ला ने बताया कि मेले में कुल 65 मरीजों का पंजीकरण किया गया जिसमें 22पुरुष , 32महिलाओं एवं 11बच्चों का पंजीकरण हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मेले का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग से संबंधित सेवाएं जैसे मातृ- शिशु कल्याण, जननी सुरक्षा योजना, टीकाकरण, परिवार नियोजन, संचारी व गैर संचारी रोगों से संबंधित सेवाएं प्रदान करना व उनका प्रचार-प्रसार करना है। हर रविवार को स्वास्थ्य मेले का आयोजन होता</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166630/65-patients-were-treated-in-chief-minister-jan-arogya-mela"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260118-wa0239.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>डलमऊ रायबरेली-</strong> कटघर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ मेला लगा। इसमें बुखार,सर्दी जुकाम, शुगर, उच्च रक्तचाप,मलेरिया, पैथालॉजी में जांच की गई।निःशुल्क दवा का भी वितरण किया गया।चिकित्साधिकारी डा.रूपाली शुक्ला ने बताया कि मेले में कुल 65 मरीजों का पंजीकरण किया गया जिसमें 22पुरुष , 32महिलाओं एवं 11बच्चों का पंजीकरण हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मेले का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग से संबंधित सेवाएं जैसे मातृ- शिशु कल्याण, जननी सुरक्षा योजना, टीकाकरण, परिवार नियोजन, संचारी व गैर संचारी रोगों से संबंधित सेवाएं प्रदान करना व उनका प्रचार-प्रसार करना है। हर रविवार को स्वास्थ्य मेले का आयोजन होता है। इसका लाभ ग्रामीणों को लेना चाहिए। इस दौरान फार्मासिस्ट रविन्द्र, लैब टेक्नीशियन अनुपम यादव,एएनएम बीनू चौधरी,स्टाफ नर्स प्रियंका वर्मा, एसएलए संजीव कुमार आदि मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 21:56:27 +0530</pubDate>
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