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                <title>अनुसूचित जाति - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>अनुसूचित जाति RSS Feed</description>
                
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                <title>फर्जी मुकदमों की बढ़ती चुनौती: एससी-एसटी और पॉक्सो कानूनों के कथित दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184359/growing-challenge-of-fake-cases-serious-questions-raised-on-alleged"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के कानून का दुरुपयोग वर्षों से हो रहा है लेकिन आज तक कितनी ही सरकारें आईं हों इनमें संसोधन नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान न्याय का अधिकार देता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे विशेष कानून बनाए गए जो समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों को सुरक्षा प्रदान कर सकें। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और पॉक्सो कानून भी इसी सोच का परिणाम हैं। इन कानूनों ने अनेक पीड़ितों को न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है और समाज में अपराधियों के विरुद्ध कठोर संदेश दिया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक दूसरा पक्ष भी लगातार चर्चा में रहा है। कई लोग आरोप लगाते हैं कि व्यक्तिगत दुश्मनी, संपत्ति विवाद, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या पारिवारिक संघर्ष में इन कानूनों का दुरुपयोग कर झूठे मुक़दमे दर्ज कराए जाते हैं। यह मुद्दा अदालतों, विधि विशेषज्ञों और समाज के बीच लगातार बहस का विषय बना हुआ है। क्या सचमुच फर्जी मुकदमों की बाढ़ है?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह कहना कि अधिकांश एससी-एसटी या पॉक्सो के मामले फर्जी हैं, उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों के आधार पर उचित नहीं होगा। कई मामलों में जांच के बाद आरोप सिद्ध नहीं हो पाते, लेकिन इसका कारण हमेशा झूठा मुकदमा नहीं होता। कमजोर जांच, पर्याप्त साक्ष्यों का अभाव, गवाहों का मुकर जाना, समझौते का दबाव या लंबी न्यायिक प्रक्रिया भी इसके कारण हो सकते हैं। हालाँकि, विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने अलग-अलग मामलों में यह भी स्वीकार किया है कि कुछ मामलों में कानूनों का दुरुपयोग होने की शिकायतें सामने आई हैं। इसलिए यह विषय संतुलित दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। निर्दोष व्यक्ति पर मुकदमे का प्रभाव- यदि कोई व्यक्ति वास्तव में झूठे मुकदमे में फँस जाता है, तो उसका प्रभाव केवल अदालत तक सीमित नहीं रहता। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, नौकरी पर संकट आ सकता है, आर्थिक बोझ बढ़ जाता है और पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजरता है। वर्षों तक मुकदमा चलने के बाद यदि वह निर्दोष साबित भी हो जाए, तब भी खोया हुआ समय और सम्मान आसानी से वापस नहीं आता। दूसरी ओर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एससी-एसटी कानून और पॉक्सो अधिनियम लाखों वास्तविक पीड़ितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। भारत में जातीय उत्पीड़न और बच्चों के साथ यौन अपराध आज भी गंभीर समस्या हैं। यदि इन कानूनों को कमजोर किया जाए या हर शिकायत को संदेह की दृष्टि से देखा जाए, तो वास्तविक पीड़ित न्याय पाने से वंचित हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसलिए चुनौती यह नहीं है कि कानून समाप्त कर दिए जाएँ, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका सही और निष्पक्ष उपयोग हो। देश की अदालतों में करोड़ों मुकदमे लंबित हैं। विशेष कानूनों के अंतर्गत दर्ज मामलों की संख्या बढ़ने से न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सुनवाई में देरी के कारण न तो पीड़ित को समय पर न्याय मिल पाता है और न ही निर्दोष व्यक्ति को शीघ्र राहत। तेज और वैज्ञानिक जांच, पर्याप्त न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा समयबद्ध सुनवाई इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सरकार की जिम्मेदारी केवल कठोर कानून बनाना नहीं है, बल्कि उनकी निष्पक्ष क्रियान्वयन व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है। यदि कहीं झूठे मुकदमे दर्ज होते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं यदि वास्तविक पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं तो उन्हें भी समय पर न्याय मिलना चाहिए। इस विषय पर कई विधि विशेषज्ञ निम्न सुधारों की आवश्यकता बताते हैं— निष्पक्ष और वैज्ञानिक पुलिस जांच। फॉरेंसिक साक्ष्यों का अधिक उपयोग। विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाना।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण। यदि अदालत यह पाए कि शिकायत जानबूझकर झूठी और दुर्भावनापूर्ण थी, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई। पुलिस और अभियोजन अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण। "सरकार और अदालतें धृतराष्ट्र बनी हुई हैं" जैसी अभिव्यक्ति एक राजनीतिक और भावनात्मक टिप्पणी हो सकती है, लेकिन वास्तविक समाधान तथ्यों और संस्थागत सुधारों में निहित है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में दो सिद्धांत समान रूप से महत्वपूर्ण हैं—दोषी को दंड मिले और निर्दोष को अनावश्यक दंड या उत्पीड़न न झेलना पड़े। इसलिए आवश्यकता न तो कानूनों को कमजोर करने की है और न ही हर शिकायत को झूठा मानने की। आवश्यकता ऐसी न्याय व्यवस्था की है जो वास्तविक पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाए, निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा करे और न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास मजबूत बनाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 22:55:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नैनी सब्जी मंडी में दलित व्यापारी से मारपीट, दुकान खाली कराने और जान से मारने की धमकी का आरोप।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी ,प्रयागराज ।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">दबंगों पर दुकान में घुसकर सामान फेंकने, नकदी गायब करने और कब्जा करने की कोशिश का आरोप, पीड़ित ने पुलिस से सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की।14 जून </div>
<div style="text-align:justify;">नैनी सब्जी मंडी में एक दलित व्यापारी ने स्थानीय दबंगों पर दुकान पर कब्जा करने की नीयत से मारपीट, अभद्रता और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने मामले की शिकायत कोतवाली नैनी में देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।जानकारी के अनुसार, पश्चिम कृषि संस्थान, नैनी निवासी राजूलाल पुत्र स्वर्गीय हरीलाल, जो अनुसूचित जाति समुदाय से</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181281/accused-of-assaulting-a-dalit-businessman-in-naini-vegetable-market"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260615-wa0161.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी ,प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दबंगों पर दुकान में घुसकर सामान फेंकने, नकदी गायब करने और कब्जा करने की कोशिश का आरोप, पीड़ित ने पुलिस से सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की।14 जून </div>
<div style="text-align:justify;">नैनी सब्जी मंडी में एक दलित व्यापारी ने स्थानीय दबंगों पर दुकान पर कब्जा करने की नीयत से मारपीट, अभद्रता और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने मामले की शिकायत कोतवाली नैनी में देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।जानकारी के अनुसार, पश्चिम कृषि संस्थान, नैनी निवासी राजूलाल पुत्र स्वर्गीय हरीलाल, जो अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, वर्ष 2010 से नैनी सब्जी मंडी स्थित एक चबूतरे पर स्वर्गीय गुलाब चंद्र के साथ साझेदारी में सब्जी का व्यवसाय कर रहे थे। वर्ष 2012 में गुलाब चंद्र की मृत्यु के बाद भी वह उनकी पत्नी माधुरी देवी के साथ दुकान का संचालन करते रहे और नियमित रूप से दुकान का किराया तथा अन्य बिल जमा करते रहे।पीड़ित का आरोप है कि उनकी दुकान के सामने दुकान आवंटी ओमकार पटेल पुत्र बंशीलाल पटेल, जो क्षेत्र में प्रभावशाली व्यक्ति हैं, लंबे समय से अपने परिजनों अमित कुमार पटेल और टिंकू पटेल के माध्यम से उनकी दुकान पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं और लगातार विवाद उत्पन्न करते रहते हैं।राजूलाल के अनुसार, शनिवार 14 जून 2026 को लगभग दोपहर 2:30 बजे ओमकार पटेल अपने 10 से 12 अज्ञात साथियों के साथ उनकी दुकान में घुस आया। आरोप है कि उन्होंने जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग करते हुए दुकान खाली कराने का प्रयास किया और पीड़ित को धक्का देकर बाहर निकाल दिया। इस दौरान दुकान में रखी सब्जियां भी फेंक दी गईं।पीड़ित ने बताया कि विरोध करने पर आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद वह तत्काल सब्जी मंडी पुलिस चौकी पहुंचे और पुलिसकर्मियों को साथ लेकर वापस आए। पुलिस को देखकर आरोपी मौके से जाते समय दोबारा धमकी देकर फरार हो गए।राजूलाल का यह भी आरोप है कि दुकान में रखी बिक्री की लगभग 7 से 8 हजार रुपये की नकदी गायब मिली। उन्होंने बताया कि दुकान में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है, जिसकी फुटेज जांच के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है।पीड़ित ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने, दुकान की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने की मांग की है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 20:17:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चकबंदी अधिकारियों की मनमानी, दलित परिवार के आशियाने को ही वृक्षारोपण के लिए किया चयनित </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के कलवारी मुस्तहकम क्षेत्र में चकबंदी विभाग के एक आदेश को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि वर्षों से पट्टे की जमीन पर मकान बनाकर रह रहे और उसी भूमि पर खेती-बाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले एक दलित परिवार की आजीविका पर प्रशासनिक निर्णय के कारण गंभीर संकट खड़ा हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार दलित जुग्गीलाल और रामलाल पुत्रगण विश्राम का परिवार लगभग 50 वर्षों से गाटा संख्या 33 की भूमि पर निवास कर रहा है। बताया जाता है कि यह भूमि विश्राम को सरकार की ओर से</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181232/due-to-the-arbitrariness-of-consolidation-officers-only-the-house"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260615-wa0119.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के कलवारी मुस्तहकम क्षेत्र में चकबंदी विभाग के एक आदेश को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि वर्षों से पट्टे की जमीन पर मकान बनाकर रह रहे और उसी भूमि पर खेती-बाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले एक दलित परिवार की आजीविका पर प्रशासनिक निर्णय के कारण गंभीर संकट खड़ा हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार दलित जुग्गीलाल और रामलाल पुत्रगण विश्राम का परिवार लगभग 50 वर्षों से गाटा संख्या 33 की भूमि पर निवास कर रहा है। बताया जाता है कि यह भूमि विश्राम को सरकार की ओर से 99 सालों के लिये पट्टे पर मिली थी, जिस पर उन्होंने स्थायी आवास बनाया और खेती-बाड़ी के माध्यम से अपने परिवार का जीवनयापन करते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">आरोप है कि समय के साथ कुछ लोगों की नजर इस जमीन पर पड़ गई और चकबंदी प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से प्रभाव का इस्तेमाल कर इस भूमि पर अपना चक बैठवाने का प्रयास किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">जब जुग्गीलाल और रामलाल को इस मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने विभिन्न स्तरों पर आपत्ति दर्ज कराई और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाए, और उनके पक्ष में निर्णय भी आया |</div>
<div style="text-align:justify;">आरोप है कि विवादित स्थिति बनने के बाद भी मामले का निष्पक्ष समाधान नहीं निकाला गया। इसके बजाय उपचकबंदी अधिकारी की संस्तुति पर चकबंदी अधिकारी हर्रैया द्वारा गाटा संख्या 33, रकबा 0.524 हेक्टेयर को वृक्षारोपण के लिए रिजर्व करने का आदेश पारित कर दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">इस निर्णय के बाद प्रभावित परिवार के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। परिवार का दावा है कि जिस जमीन पर उनका मकान और आजीविका दोनों निर्भर हैं, उसी को वृक्षारोपण हेतु आरक्षित कर दिए जाने से उनके सामने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि आदेश पर अमल हुआ तो परिवार के पास जीवनयापन का कोई साधन नहीं बचेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि गांव में अन्य ग्राम सभा भूमि उपलब्ध होने के बावजूद इसी पट्टे की भूमि को वृक्षारोपण के लिए क्यों चुना गया।</div>
<div style="text-align:justify;">वहीं आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव और व्यक्तिगत रंजिश के चलते चकबंदी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दबाव में लेकर इस भूमि को वृक्षारोपण के लिये चयनित करवाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">एक तरफ सरकार लोगों को छत मुहैया करवा रही है वहीं एक दलित परिवार के आशियाने को उजाड़ने की तैयारी चकबंदी विभाग ने कर की है।</div>
<div style="text-align:justify;">लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में भूमि पर दशकों से परिवार निवास कर रहा है और उसका जीवनयापन उसी पर निर्भर है, तो ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि विवादित आदेश की समीक्षा कर प्रभावित परिवार को राहत प्रदान की जाए तथा पूरे प्रकरण में चकबंदी प्रक्रिया की जांच कराई जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">अब यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनने लगा है। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह सवाल खड़ा होगा कि आखिर सरकारी पट्टे पर वर्षों से जीवन गुजार रहे परिवार के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा और चकबंदी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
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</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:39:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>नहीं हुआ समस्या का समाधान, मोहल्ले के रास्ते पर भरा गंदा बदबूदार पानी,नारकीय जीवन जीने को गाँव वासी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बिसवां(सीतापुर)।</strong> लगभग छः माह से लगातार मुहल्ले में मुख्य रास्ते पर भयंकर बदबूदार बरसात का गंदा पानी भरा होने से महामारी फैलने की आशंका प्रबल हो गयी है। आसपास की नालियों से निकला गंदा पानी इसी रास्ते पर भरा रहता है। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। बरसात में तो यह रास्ता सरोवर बन जाता है। घरों से निकली नालियों के पानी की निकास ‌न होने से यह समस्या हर साल इन मोहल्ले वालों के लिये अभिशाप बनी हुई है। कोई सुनने वाला नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम प्रधान से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार अर्जी लगाने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166573/the-problem-has-not-been-solved-the-streets-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260118-wa0004.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बिसवां(सीतापुर)।</strong> लगभग छः माह से लगातार मुहल्ले में मुख्य रास्ते पर भयंकर बदबूदार बरसात का गंदा पानी भरा होने से महामारी फैलने की आशंका प्रबल हो गयी है। आसपास की नालियों से निकला गंदा पानी इसी रास्ते पर भरा रहता है। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। बरसात में तो यह रास्ता सरोवर बन जाता है। घरों से निकली नालियों के पानी की निकास ‌न होने से यह समस्या हर साल इन मोहल्ले वालों के लिये अभिशाप बनी हुई है। कोई सुनने वाला नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम प्रधान से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार अर्जी लगाने के बाद भी आजतक कोई कार्रवाई नहीं हुई।</div>
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<div style="text-align:justify;">बताते चलें कि बिसवां विकास खण्ड के जहांगीराबाद कस्बे में एक रास्ता सीतापुर - बहराइच मुख्य मार्ग से पोस्ट आफिस व श्याम श्री हास्पिटल के बीच होता हुआ अनुसूचित जाति के लोगों के मुहल्ले तक गया हुआ है जिसकी लम्बाई लगभग 400 मीटर होगी। इस मार्ग पर इन्टरलाकिंग खड़ञ्जा लगा हुआ है।यह मार्ग सड़क लेबल से बहुत नीचा है। इस मार्ग के दोनों किनारों पर दर्जनों लोगों के मकान, दुकान, डिस्पेंसरी व मदरसे, प्लाईवुड तथा दरी उद्योग के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के अलावा मस्जिद भी स्थित हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी रास्ते से मिला हुआ एक बड़ा सा तालाब जो टैम्पो स्टैंड के सामने है कूड़ा करकट से पूरी तरह पट गया है। इसी में आसपास की नालियों का पानी इकट्ठा होता था। पूरी तरह तालाब पट जाने तथा काफी भाग अतिक्रमित हो जाने से अब पानी रास्ते पर भरा हुआ है। बहुत पहले सड़क के किनारे ह्यूमन पाइपों  के माध्यम से जो पानी की निकास थी उसे सड़क किनारे मकान और दुकान बनाने वाले लोगों द्वारा बिना ह्यूमपाइप डाले ही मिट्टी पटाई कर चबूतरे बना दिये गये जिससे इस तालाब के पानी की निकास बंद हो गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह समस्या अब आम हो गई है। थोड़ी ही बारिश में पूरा रास्ता तालाब में बदल जाता है।अगर ज्यादा तेज बारिश होती है तो बरसात का गंदा पानी पोस्ट आफिस सहित घरों, दुकानों, प्रतिष्ठानों और क्लीनिक में भर जाता है। रास्ते पर सालों साल गंदा पानी भरा रहता है।इस मुहल्ले में रहने वालों को इसी गंदे पानी में होकर आना जाना मजबूरी बना हुआ है। इन दिनों  अस्पताल में मरीजों को ले जाने के लिए तीमारदारों को इसी गंदे पानी में होकर निकलना पड़ता है।अगर नमाज पढ़ने जाना होता है तो काफी परेशानी उठानी पड़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग छः महीनों से रास्ते पर गंदा बदबूदार पानी भरा होने से मच्छरों की भरमार हो गई है। नलों का पानी दूषित हो गया है। सांस लेने के लिए हवा भी बहुत गंदी और बदबूदार हो गई है। अगर जल्द ही इस समस्या का कोई ठोस उपाय नहीं किया गया तो किसी भी समय पूरे मोहल्ले में भयंकर महामारी फैल सकती है इसमें कोई संदेह नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाजसेवी एवं वरिष्ठ चिकित्सक व शायर डा० वकील अहमद खान (अजहर खैराबादी) ने बताया कि मैंने ग्राम प्रधान से लेकर,बीडीओ, एसडीएम,डीएम व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से इस सम्बन्ध में गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से तुरन्त जांच कराकर ‌इस समस्या का स्थाई समाधान कराये जाने की मांग की है। इस बारे में जब भी ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी से कहा जाता है तो सही कराने का सिर्फ कोरा आश्वासन देते हैं लेकिन कार्य नहीं कराते।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 20:17:16 +0530</pubDate>
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