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                <title> Hindi newspaper - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>अविमुक्तेश्वरानंद स्नान विवाद में भाजपा के भीतर असहज संवाद </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उठे विवाद में योगी और केशव मौर्या के अलग अलग सुर वाले बयानों ने सनसनी फैला दी है। विरोधी इसके अलग अर्थ निकाल रहे हैं लेकिन लगता है कि पहली बार दोनों नेता किसी मुद्दे पर खुलकर एक-दूसरे के सामने आ गए हैं। गुरुवार को दिए गए इन बयानों के बाद यूपी भाजपा फिर से दो गुटों में बंटती नजर आ रही है। इस विवाद की वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं में भी असमंजस है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आजमगढ़ पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167268/uncomfortable-dialogue-within-bjp-over-avimukteshwarananda-bath-controversy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/hindi-divas39.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उठे विवाद में योगी और केशव मौर्या के अलग अलग सुर वाले बयानों ने सनसनी फैला दी है। विरोधी इसके अलग अर्थ निकाल रहे हैं लेकिन लगता है कि पहली बार दोनों नेता किसी मुद्दे पर खुलकर एक-दूसरे के सामने आ गए हैं। गुरुवार को दिए गए इन बयानों के बाद यूपी भाजपा फिर से दो गुटों में बंटती नजर आ रही है। इस विवाद की वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं में भी असमंजस है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आजमगढ़ पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं। उनसे प्रार्थना है कि वह स्नान कर इस विषय का समापन करें। केशव मौर्या के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में देखा जा रहा है। इससे लगता है कि वे शंकराचार्य की स्थिति को मान्यता दे रहे हैं और विवाद को शांत करने की अपील कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें यूपी के प्रयागराज में मौनी अमावस्या को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शाही सवारी के साथ स्नान करने निकले थे। प्रशासन ने उनके काफिले को रोक लिया था और अन्य अखाड़ों की तरह स्नान करने की सलाह दी थी। इसके बाद से विवाद भड़क गया। बात इतनी बढ़ी कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती धरने पर बैठ गए और प्रशासन ने भी नोटिस थमा दिया। सरकारी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के हवाले से उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया गया। इस विवाद ने तूल पकड़ा तो यूपी में समाजवादी पार्टी भी एक्टिव हो गई और उसे सनातन का अपमान बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कड़े शब्द कहते सुनाई दे रहे हैं।सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि यही योगी, जिसे आप लोग साधु-संत कहते हो, लेकिन हम उसे हुमायूं का बेटा अकबर कहते हैं और औरंगजेब कहते हैं। वे आगे कहते हैं कि योगी हिंदू कहलाने के लायक नहीं हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनका आरोप है कि योगी सरकार में कई मंदिर तोड़े गए हैं, लेकिन योगी ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी का डर है। अविमुक्तेश्वरानंद के इन बेहद आपत्तिजनक बयान पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने बहुत सधे शब्दों में पलटवार किया उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि एक योगी, संत और संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता है। यही उसके जीवन का ध्येय होना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं हो सकती है। धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान है। अगर अगर राष्ट्र की स्वाभिमान को चुनौती देता है तो हमें खुलकर उसके सामने खड़ा होना चाहिए। कोई धर्म के खिलाफ आचरण करता है, क्योंकि ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे। हमें उनसे सावधान रहना होगा, हमें सतर्क होना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि योगी ने किसी का नाम लिए बिना कालनेमियो का जिक्र किया लेकिन इस से अविमुक्तेश्वरानंद विवाद और भड़क उठा।शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और यूपी सरकार के बीच विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। मौनी अमावस्या के दौरान स्नान को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती यागराज माघ मेले में ही धरने पर बैठे हैं और प्रशासन से उनकी लड़ाई जारी है।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर पर प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया, 48 घंटे में जवाब मांगा, और कहा कि उनके कृत्यों से व्यवस्था छिन्न-भिन्न हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योगी सरकार ने उन्हें ‘शंकराचार्य’ मानने से इनकार किया और सुविधाएं रद्द करने की धमकी दी। अविमुक्तेश्वरानंद समर्थक कुछ संतों ने योगी पर ‘संत अपमान’ का आरोप लगाया। केशव का प्रणाम इसी विवाद में आया, जो सत्ता के गलियारों में भीतरी द्वन्द्व का हवाला देता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ को सनातन के लिए औरंगजेब से बुरा बताते हुए आलोचना की थी। इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संत के लिए धर्म से बढ़कर कुछ नहीं हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र सर्वोपरि होते हैं। उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी भी कुछ नहीं होती। धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी होती है। राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। कई कालनेमि धर्म की आड़ लेकर सनातन को कमजोर कर रहे हैं। धर्म के खिलाफ आचरण करने वाला सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं हो सकता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हरियाणा के सोनीपत में योगी आदित्यनाथ के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद पर जवाबी हमला माना जा रहा है। सीएम योगी ने कहा कि धर्म केवल वेश या शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सनातन को कमजोर करने वालों कालनेमि बता दिया। बता दें कि रामायण में कालनेमि नाम का एक मायावी राक्षस का जिक्र है, जिसने संजीवनी बूटी लाने गए हनुमान जी को संत बनकर भरमाने की कोशिश की थी। बाद में हनुमान जी उसके छल को पहचान लिया और फिर उसे मार डाला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उधर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और आदित्यनाथ योगी के बीच वाक युद्ध चल रहा था इसी बीच यूपी सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या के बयानों ने असमंजस की स्थिति पैदा करने मे कोई कसर नहीं छोड़ी है  आजमगढ़ पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अपरोक्ष समर्थन कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं। उनसे प्रार्थना है कि वह स्नान कर इस विषय का समापन करें। केशव मौर्या के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में देखा जा रहा है। इससे लगता है कि वे शंकराचार्य की स्थिति को मान्यता दे रहे हैं और विवाद को शांत करने की अपील कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी  और केशव मौर्य  के बयानों से पार्टी में भी भ्रम की स्थिति बन गई है कि इस मुद्दे से कैसे निपटा जाए. यह बात सभी जानते हैं कि दोनों अलग-अलग खेमों से आते हैं, लेकिन यह पहली बार है जब किसी मुद्दे पर उनका खुला टकराव सामने आया है. राज्य में भाजपा सरकार की भीतरी गुटबाजी सतह पर आ गयी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उधर विवाद को तूल देने में लगे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दल इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। धुर विरोधी योगी सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि संतों का अपमान हो रहा है। वहीं, भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ लोग शंकराचार्य को फर्जी कह रहे हैं, तो कुछ उनका समर्थन कर रहे हैं।मौर्य से समर्थन मिलने के बावजूद कई संतों और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने योगी आदित्यनाथ का समर्थन किया है. उनका कहना है कि माघ मेले में शाही स्नान नहीं होता, इसलिए अविमुक्तेश्वरानंद को इस पर ज़ोर नहीं देना चाहिए था. संत समाज में भी बंटवारा दिख रहा है। योगी के समर्थक जैसे बाबा रामदेव ने उनकी भाषा की आलोचना की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अविमुक्तेश्वरानंद ने कई मौकों पर बीजेपी के फैसलों की आलोचना की थी, जिसमें अयोध्या में “अधूरे” राम मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह, कुंभ मेले का कुप्रबंधन और कोविड-19 महामारी के दौरान गंगा में तैरती लाशों का मुद्दा शामिल है। देखना है कि इस विवाद का पटाक्षेप किस तरह होता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 17:24:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सीडीओ ने कृषकों की फार्मर रजिस्ट्री कराने हेतु प्रचार प्रसार वाहन को हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> एग्री स्टैक योजना के अंतर्गत जनपद के किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के प्रति जागरूक करने एवं इसके लाभ व अनिवार्यता से अवगत कराने के उद्देश्य से प्रचार-प्रसार वाहन को मुख्य विकास अधिकारी डा० दिव्या मिश्रा द्वारा विकास भवन परिसर से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। जनपद की पाँचों तहसीलों के लिए कुल पाँच प्रचार वाहन भेजे गए। इस अवसर पर परियोजना निदेशक डीआरडीए दयाराम यादव, डीसी मनरेगा संतोष कुमार सिंह एवं उप कृषि निदेशक विनोद कुमार यादव सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य विकास अधिकारी ने प्रचार वाहन हेतु नामित कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167040/cdo-flagged-off-the-publicity-vehicle-for-farmer-registration-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260123-wa00561.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> एग्री स्टैक योजना के अंतर्गत जनपद के किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के प्रति जागरूक करने एवं इसके लाभ व अनिवार्यता से अवगत कराने के उद्देश्य से प्रचार-प्रसार वाहन को मुख्य विकास अधिकारी डा० दिव्या मिश्रा द्वारा विकास भवन परिसर से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। जनपद की पाँचों तहसीलों के लिए कुल पाँच प्रचार वाहन भेजे गए। इस अवसर पर परियोजना निदेशक डीआरडीए दयाराम यादव, डीसी मनरेगा संतोष कुमार सिंह एवं उप कृषि निदेशक विनोद कुमार यादव सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य विकास अधिकारी ने प्रचार वाहन हेतु नामित कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे जनपद के समस्त ग्रामों में जाकर किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के प्रति जागरूक करें तथा अवशेष किसानों की रजिस्ट्री तैयार कराना सुनिश्चित करें। यह अभियान 23 जनवरी से लगातार पांच दिनों तक चलाया जाएगा। सीडीओ ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के ऐसे लाभार्थियों, जिनकी फार्मर रजिस्ट्री अभी तक नहीं बनी है, से अपील की कि वे 30 जनवरी 2026 तक अपने नजदीकी कैम्प अथवा सहज जनसेवा केन्द्र पर आधार कार्ड, खतौनी एवं आधार से लिंक मोबाइल नंबर के साथ फार्मर रजिस्ट्री अवश्य करा लें ताकि पीएम किसान योजना की आगामी किस्त का लाभ प्राप्त हो सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उप कृषि निदेशक ने बताया है कि प्रचार वाहन तहसील सदर, रानीगंज, पट्टी, लालगंज एवं कुण्डा के तहसील मुख्यालयों पर संबंधित उप जिलाधिकारी से हरी झण्डी दिखवाकर अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण करेंगे। अभियान के दौरान लाउडस्पीकर, नुक्कड़ गोष्ठी, ग्राम पंचायतों में कैम्प, लोकगीत एवं संबोधन के माध्यम से किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के लाभों की जानकारी दी जाएगी। इस कार्य हेतु तहसीलवार कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। कार्यक्रम में वीर विक्रम सिंह अपर जिला कृषि रक्षा अधिकारी, भोलानाथ सिंह वरि०प्रावि०सहा०ग्रुप-ए, अजय सिंह, विजय सिंह, राजेन्द्र उपाध्याय, सुरेश कुमार सिंह तथा समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 19:38:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>टैरिफ विवाद: सीनेटरों ने दालों पर 30% टैक्स हटाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>नई दिल्ली। </strong>भारत-अमेरिका के बीच जारी व्यापारिक तनाव के बीच एक नया कूटनीतिक संकेत सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के जवाब में भारत ने अमेरिका से आयात होने वाली दालों और फलियों पर 30 प्रतिशत शुल्क लगाया था। अब इसी मुद्दे पर अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति ट्रंप को चिट्ठी लिखकर भारत से दालों पर लगाया गया 30 प्रतिशत टैक्स हटवाने की मांग की है।</div>
<div>  </div>
<div>सीनेटरों ने अपने पत्र में कहा है कि भारत द्वारा दालों और फलियों पर लगाए गए ऊंचे शुल्क से अमेरिकी किसानों और निर्यातकों को नुकसान हो</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166521/tariff-dispute-senators-demand-removal-of-30-taxes-on-pulses"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img_20260118_133329.png" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली। </strong>भारत-अमेरिका के बीच जारी व्यापारिक तनाव के बीच एक नया कूटनीतिक संकेत सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के जवाब में भारत ने अमेरिका से आयात होने वाली दालों और फलियों पर 30 प्रतिशत शुल्क लगाया था। अब इसी मुद्दे पर अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति ट्रंप को चिट्ठी लिखकर भारत से दालों पर लगाया गया 30 प्रतिशत टैक्स हटवाने की मांग की है।</div>
<div> </div>
<div>सीनेटरों ने अपने पत्र में कहा है कि भारत द्वारा दालों और फलियों पर लगाए गए ऊंचे शुल्क से अमेरिकी किसानों और निर्यातकों को नुकसान हो रहा है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है और ऐसे समय में टैरिफ विवाद को कम करना जरूरी है, ताकि द्विपक्षीय व्यापार संबंध मजबूत हो सकें।</div>
<div> </div>
<div><strong>ट्रेड डील की राह में टैरिफ सबसे बड़ी बाधा</strong></div>
<div>भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से सीमित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। अमेरिकी सीनेटरों का मानना है कि यदि भारत दालों पर 30 प्रतिशत टैक्स हटाता है, तो इससे वार्ता को सकारात्मक गति मिलेगी और अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में बेहतर अवसर मिल सकेंगे।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत का सख्त लेकिन संतुलित रुख</strong></div>
<div>भारतीय वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि भारत मुक्त और निष्पक्ष व्यापार का पक्षधर है, लेकिन एकतरफा टैरिफ के जरिए दबाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद ही भारत को जवाबी कदम उठाना पड़ा।</div>
<div> </div>
<div><strong>अमेरिकी किसानों की चिंता</strong></div>
<div>अमेरिका से भारत में चना, मटर और अन्य दालों का बड़ा आयात होता है। 30 प्रतिशत शुल्क लगने के बाद इन उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे अमेरिकी किसान संगठनों में चिंता बढ़ी है। इसी दबाव के चलते अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है।</div>
<div> </div>
<div><strong>आगे की राह</strong></div>
<div>व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि सीनेटरों की यह चिट्ठी दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को प्रभावित कर सकती है। यदि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर टैरिफ में नरमी दिखाता है, तो भारत भी दालों पर लगाए गए शुल्क पर पुनर्विचार कर सकता है। फिलहाल नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह पहल टैरिफ टकराव को कम करने में सफल होगी या फिर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव और गहराएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 18:10:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मलिहाबाद में गोवंश कटान का गोरख धंधा: पांच दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ, दबाव में जांच?</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div class="m_-864729501492928165WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मलिहाबाद।</span></strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">लखनऊ जिले के मलिहाबाद इलाके में गोवंश कटान की एक सनसनीखेज घटना ने स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है। बिराहिमपुर गांव में हुई इस वारदात को पांच दिन बीत चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पुलिस अब तक अपराधियों का पता लगाने में नाकाम साबित हुई है। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां जांच को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि गोमांस तस्करी अपने चरम पर पहुंच चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घटना के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिराहिमपुर गांव में कुछ दिन पहले दो गोवंशों पर हमला किया गया। एक</span></p></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166484/cow-slaughtering-scam-in-malihabad-police-investigating-under-pressure-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/whatsapp-image-2026-01-17-at-15.31.03.jpeg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div class="m_-864729501492928165WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मलिहाबाद।</span></strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">लखनऊ जिले के मलिहाबाद इलाके में गोवंश कटान की एक सनसनीखेज घटना ने स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है। बिराहिमपुर गांव में हुई इस वारदात को पांच दिन बीत चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पुलिस अब तक अपराधियों का पता लगाने में नाकाम साबित हुई है। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां जांच को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि गोमांस तस्करी अपने चरम पर पहुंच चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घटना के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिराहिमपुर गांव में कुछ दिन पहले दो गोवंशों पर हमला किया गया। एक गोवंश की निर्मम हत्या कर दी गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि दूसरे को गांववालों ने समय रहते बचा लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तस्कर आम के घने बागों का फायदा उठाकर रातों-रात गोवंशों को काटकर उनके अवशेषों को बोरे में भरकर फरार हो जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस इलाके में गोमांस तस्करी का धंधा बहुत जोरो से बड़ा चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पुलिस की निष्क्रियता ने इसे और बढ़ावा दिया है।मामले की जांच में पुलिस की खानापूर्ति साफ नजर आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस अधिकारी घटना की जानकारी साझा करने से कतरा रहे हैं और उच्चाधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस घटना के मात्र दो दिन बाद काकोरी के दुर्गागंज चौराहे पर एक तीन पहिया लोडर से संदिग्ध मांस बरामद किया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इस तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। लेकिन पुलिस ने इस कड़ी को जोड़ने की बजाय मामले को रफा-दफा करने में लगी हुई है।सबसे गंभीर आरोप पुलिस की मिलीभगत का है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी तस्करों को संरक्षण दे रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी वजह से वे इतनी आसानी से अपना धंधा चला पा रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> उच्च पदों पर बैठे अधिकारी कथित तौर पर पत्रकारों से समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं और खबरों को दबाने का दबाव डाल रहे हैं। कुछ पत्रकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अधिकारियों की चाटुकारिता में लगे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मुद्दे को उठाने वाले साथी पत्रकारों को फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकियां दे रहे हैं।इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच में पक्षपात का आरोप भी लग रहा है। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है और केवल हिंदू व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> यह घटना हिंदू आस्था के खिलाफ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो गौमाता को पवित्र मानती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पुलिस की कार्रवाई में हिंदू समुदाय को ही टारगेट किया जा रहा है। इससे इलाके में तनाव बढ़ रहा है और स्थानीय निवासियों में असंतोष फैल रहा है।पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) कार्यालय से संपर्क करने पर कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जांच चल रही है और जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी कोई प्रगति न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।यह घटना उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण कानून की सख्ती के बावजूद तस्करी के बढ़ते मामलों को उजागर करती है। स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाए और यदि पुलिस की मिलीभगत साबित होती है तो दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांववासी सतर्क हैं और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास कर रहे हैं।</span></p>
</div>
</div>
</div>
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</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 21:41:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी इंदौर पहुंचे, पानी में गंदगी से हुई मौतों से प्रभावित परिवारों से मिले</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल जाकर पानी में गंदगी से बीमार हुए लोगों और उनके परिवारों से भी मुलाकात की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका इलाज चल रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal">  </p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल गांधी का यह दौरा प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाने और ज़मीनी हालात को समझने के मकसद से था। गांधी ने पानी में गंदगी की घटना से प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए भागीरथपुरा इलाके का भी दौरा किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस ने </span>X <span lang="hi" xml:lang="hi">पर एक पोस्ट शेयर किया और लिखा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष के नेता राहुल गांधी इंदौर पहुंच गए हैं। यहां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह दूषित</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166474/rahul-gandhi-reaches-indore-to-meet-families-affected-by-deaths"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/rahul-gandhi-7.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल जाकर पानी में गंदगी से बीमार हुए लोगों और उनके परिवारों से भी मुलाकात की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका इलाज चल रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल गांधी का यह दौरा प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाने और ज़मीनी हालात को समझने के मकसद से था। गांधी ने पानी में गंदगी की घटना से प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए भागीरथपुरा इलाके का भी दौरा किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस ने </span>X <span lang="hi" xml:lang="hi">पर एक पोस्ट शेयर किया और लिखा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष के नेता राहुल गांधी इंदौर पहुंच गए हैं। यहां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह दूषित पानी से बीमार हुए लोगों और भागीरथपुरा इलाके में प्रभावित परिवारों से मिलेंगे।"</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर "दोषारोपण और जवाबी आरोप" की राजनीति करने के लिए हमला बोला।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल गांधी सुबह </span>9:30 <span lang="hi" xml:lang="hi">बजे दिल्ली से विशेष विमान से रवाना हुए और लगभग </span>11:00 <span lang="hi" xml:lang="hi">बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचे। इसके बाद वह सीधे बॉम्बे अस्पताल गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां उन्होंने गंभीर हालत में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से बात की और उनकी स्थिति का जायजा लिया। राहुल गांधी ने अस्पताल में पीड़ितों से मुलाकात करते हुए कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें सरकार में जिम्मेदारी निभानी चाहिए। यह सरकार की लापरवाही की वजह से हुआ है।"</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके बाद राहुल गांधी ने भागीरथपुरा इलाके का दौरा किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां उन्होंने उन परिवारों से मुलाकात की जिन्होंने इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खो दिया। उन्होंने पीड़ितों को सांत्वना दी और कहा कि यह घटना बहुत दुखद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल गांधी ने कहा कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से जो लोग प्रभावित हुए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं उनसे मिला हूं। कई परिवार के सदस्यों की मौत हुई है और कई बीमार हुए हैं। वादा किया गया था- देश को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट सिटी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">दी जाएंगी। मगर ये स्मार्ट सिटी का नया मॉडल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां पीने का पानी नहीं है और लोगों को डराया जा रहा है। इंदौर में साफ पानी नहीं मिल रहा है। दूषित पानी पीने से लोगों की मौत हुई है और यह सरकार का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अर्बन मॉडल</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">है। यह सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ऐसा अन्य शहरों में भी हो रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को साफ पानी और हवा मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये जिम्मेदारी सरकार की होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर वह इस काम में असफल है। सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीड़ितों को सही मुआवजा भी मिलना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि ऐसे हालात सरकार की लापरवाही से बने हैं। आज भी यहां साफ पानी नहीं मिल रहा है। इसलिए लोग चाहते हैं कि यहां साफ पानी की व्यवस्था की जाए। जनता को साफ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे पूरा किया जाना चाहिए। नेता विपक्ष होने के नाते मैं इनकी आवाज उठाने आया हूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये मेरी जिम्मेदारी है- मैं पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा हूं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 20:58:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार कम क्वालिफिकेशन वाली पोस्ट के लिए ज़्यादा क्वालिफिकेशन वाले उम्मीदवारों को बाहर कर सकती है: सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पटना हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि करते हुए जस्टिस एमएम सुंदरेश और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने बी.फार्मा/एम. फार्मा डिग्री धारकों द्वारा दायर याचिका खारिज की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने राज्य में फार्मासिस्ट के </span>2,473<span lang="hi" xml:lang="hi">  पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया से बाहर किए जाने को चुनौती दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ इसलिए कि उनके पास ज़रूरी योग्यता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी फार्मेसी में डिप्लोमा नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के संविधान के अनुच्छेद </span>309<span lang="hi" xml:lang="hi">  के तहत नियम बनाने की शक्ति राज्य को अपने स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर सार्वजनिक पदों के लिए सबसे उपयुक्त योग्यता तय करने का अधिकार देती</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166472/government-can-exclude-candidates-with-higher-qualifications-from-posts-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/supream-court2.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पटना हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि करते हुए जस्टिस एमएम सुंदरेश और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने बी.फार्मा/एम. फार्मा डिग्री धारकों द्वारा दायर याचिका खारिज की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने राज्य में फार्मासिस्ट के </span>2,473<span lang="hi" xml:lang="hi"> पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया से बाहर किए जाने को चुनौती दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ इसलिए कि उनके पास ज़रूरी योग्यता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी फार्मेसी में डिप्लोमा नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के संविधान के अनुच्छेद </span>309<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत नियम बनाने की शक्ति राज्य को अपने स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर सार्वजनिक पदों के लिए सबसे उपयुक्त योग्यता तय करने का अधिकार देती है। इसलिए यह लगातार माना गया है कि क्वालिफिकेशन की प्रासंगिकता और उपयुक्तता तय करना एम्प्लॉयर का काम है। भर्ती के मामलों में न्यायिक समीक्षा की शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर कोई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सिर्फ़ कानूनी क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनमानी या मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की जांच तक सीमित है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट सर्विस नियमों को दोबारा नहीं लिख सकते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्वालिफिकेशन की बराबरी तय नहीं कर सकते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या एम्प्लॉयर के आकलन की जगह अपना आकलन नहीं दे सकते। सरकारी नौकरी के मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा किसी सरकारी पद के लिए न्यूनतम पात्रता की ज़रूरतों को तय करने में राज्य की समझदारी या नीति पर सवाल उठाने तक नहीं फैलता है।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने आगे कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">क्वालिफिकेशन किसी संस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग या प्रतिष्ठान की ज़रूरतों और हितों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसा भी मामला हो। इसी तरह किसी क्वालिफिकेशन की बराबरी एक ऐसा मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे न्यायिक समीक्षा की शक्ति का इस्तेमाल करके तय किया जा सके। कोई खास क्वालिफिकेशन बराबर मानी जानी चाहिए या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह राज्य को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भर्ती करने वाली अथॉरिटी के तौर पर तय करना है। ऐसी क्वालिफिकेशन तय करने की उपयुक्तता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सलाह या उपयोगिता का आकलन कोर्ट के दखल की गारंटी नहीं देता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक कि उन्हें गलत साबित न किया जाए। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एम्प्लॉयर पदों के लिए क्वालिफिकेशन तय करने में मनमानी नहीं कर सकता है।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">एक स्ट्रीम में क्वालिफिकेशन का मतलब दूसरी स्ट्रीम में क्वालिफिकेशन नहीं है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री धारकों की तुलना में डिप्लोमा धारकों के पास रोज़गार के सीमित अवसर होते हैं। इस प्रकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियुक्ति के लिए डिप्लोमा को एक आवश्यक क्वालिफिकेशन बनाने का राज्य का निर्णय मनमाना नहीं कहा जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> राज्य ने बस पंजीकृत फार्मासिस्टों के बड़े समूह में से उन उम्मीदवारों के एक छोटे समूह की पहचान की है जिन्हें वह एक खास उद्देश्य के लिए सबसे उपयुक्त मानता है।" तदनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपील खारिज कर दी गई और निर्देश दिया गया कि भर्ती अभियान सख्ती से फार्मेसी में डिप्लोमा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए आगे बढ़ाया जाए।</span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 20:51:27 +0530</pubDate>
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