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                <title>पर्यटन विभाग - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पर्यटन विभाग RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>निरीक्षण:निर्माण की धीमी रफ्तार पर डीएम ने जताई नाराजगी, काम जल्द पूरा कराने के दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी0एन0 द्वारा पर्यटन विभाग के निर्माणाधीन परियोजना कपिलवस्तु का समेकित विकास कार्य का निरीक्षण किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जानकारी दिया गया कि कार्यदायी संस्था उ0प्र0 राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है। समयान्तर्गत कार्य पूर्ण न होने तथा कार्य की धीमी प्रगति पाये जाने पर जिलाधिकारी द्वारा कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबधित के विरूद्ध कार्यवाही करने का निर्देश दिया। इसके पश्चात निर्माणाधीन विपश्यना केन्द्र का जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी0एन0 द्वारा निरीक्षण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान टूरिस्ट इनफॉरमेशन सेंटर, एडमिन ब्लॉक निर्माण कार्य, मेस ब्लॉक, एकोमेंडेशन पुरुष/महिला का</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180895/dm-expressed-displeasure-over-the-slow-pace-of-inspection-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781017885835.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी0एन0 द्वारा पर्यटन विभाग के निर्माणाधीन परियोजना कपिलवस्तु का समेकित विकास कार्य का निरीक्षण किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जानकारी दिया गया कि कार्यदायी संस्था उ0प्र0 राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है। समयान्तर्गत कार्य पूर्ण न होने तथा कार्य की धीमी प्रगति पाये जाने पर जिलाधिकारी द्वारा कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबधित के विरूद्ध कार्यवाही करने का निर्देश दिया। इसके पश्चात निर्माणाधीन विपश्यना केन्द्र का जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी0एन0 द्वारा निरीक्षण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान टूरिस्ट इनफॉरमेशन सेंटर, एडमिन ब्लॉक निर्माण कार्य, मेस ब्लॉक, एकोमेंडेशन पुरुष/महिला का निर्माण कार्य, गार्ड रूम, सब स्टेशन रूम, मेडिटेशन ब्लॉक आदि को देखा गया। जिलाधिकारी ने निर्धारित समयान्तर्गत कार्य पूर्ण कराने का निर्देश दिया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परियोजना प्रबन्धक यूपीपीसीएल आशुतोष उपाध्याय व अन्य संबधित उपस्थित थे। इसके पश्चात विपश्यना पार्क का जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी0एन0 द्वारा निरीक्षण किया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि विपश्यना पार्क को क्रियाशील कराये।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 21:16:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> जीवन की कीमत पर मौत की अठखेलियाँ </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
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<div style="text-align:justify;">सिर्फ पंद्रह दिन के अन्तराल पर जल पर्यटन के दौरान खुशिया मना रहे बेगुनाह पर्यटकों के मौत के आगोश में समाने की दूसरी वारदात सामने आई है इससे पहले 10 अप्रैल को यूपी के वृंदावन में एक नाव पलटने से सोलह धार्मिक पर्यटको की नदी में डूबकर मौत हुई। पंजाब के लुधियाना और मुक्तेश्वर से श्रद्धालुओं का दल मथुरा वृंदावन के दर्शन करने के लिए पहुंचा था. 10 अप्रैल को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर निधिवन घूमने के बाद श्रद्धालु यमुना नदी में सैर करने की इच्छा जताई. 37 श्रद्धालु दो नाव में केसी घाट से घूमने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178077/hj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div style="text-align:justify;">सिर्फ पंद्रह दिन के अन्तराल पर जल पर्यटन के दौरान खुशिया मना रहे बेगुनाह पर्यटकों के मौत के आगोश में समाने की दूसरी वारदात सामने आई है इससे पहले 10 अप्रैल को यूपी के वृंदावन में एक नाव पलटने से सोलह धार्मिक पर्यटको की नदी में डूबकर मौत हुई। पंजाब के लुधियाना और मुक्तेश्वर से श्रद्धालुओं का दल मथुरा वृंदावन के दर्शन करने के लिए पहुंचा था. 10 अप्रैल को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर निधिवन घूमने के बाद श्रद्धालु यमुना नदी में सैर करने की इच्छा जताई. 37 श्रद्धालु दो नाव में केसी घाट से घूमने के लिए निकले थे.तभी स्टीमर पलट गया और सोलह लोगों की मौत हो गई। इस हादसे से कोई सबक नहीं लिया गया और ठीक बीस दिन के अंतराल के बाद </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में बरगी डैम के पास हुआ क्रूज नाब हादसा केवल एक दुःखद दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी पर्यटन व्यवस्था, सुरक्षा संस्कृति और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली त्रासदी है। एक सुखद सैर के लिए निकले लोग कुछ ही मिनटों में मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष करने लगे। नौ लोगों की मौत, कई लोगों का लापता होना और रेस्क्यू के दौरान सामने आई मां-बेटे की वह हृदयविदारक तस्वीर, जिसमें मौत के बाद भी मां अपने मासूम बच्चे को सीने से लगाए रही, किसी भी संवेदनशील समाज को भीतर तक झकझोर देने के लिए पर्याप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह दृश्य केबल मातृत्व की अमर करुणा का प्रतीक नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता का मौन अभियोग भी है। बरगी डैम लंबे समय से पर्यटन का आकर्षण रहा है। वर्ष 2006 से यहां क्रूज सेवा संचालित हो रही थी और इसे सुरक्षित माना जाता था। लेकिन किसी सेवा का लंबे समय तक चलना उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं हो सकता। सुरक्षा कोई दिखावटी व्यवस्था नहीं, बल्कि लगातार सतर्कता, प्रशिक्षण, उपकरणों की तैयारी और मौसम संबंधी चेतावनियों के पालन से जुड़ी जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस हादसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब मौसम विभाग ने एक दिन पहले 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाओं की चेतावनी दी थी, तब क्रूज संचालन की अनुमति क्यों दी गई? क्या पर्यटन से होने वाली  आय यात्रियों की जान से अधिक महत्वपूर्ण हो गई थी? घटना के समय क्रूज में लगभग 40 यात्री सवार थे, जबकि उसकी क्षमता करीब 90 लोगों की बताई गई। पहली नजर में यह लग सकता है कि क्षमता से कम यात्री होने के कारण जोखिम कम होना चाहिए था, लेकिन नाव या क्रूज की सुरक्षा केवल यात्रियों की संख्या से तय नहीं होती। मौसम, हवा की गति, पानी की स्थिति, यात्रियों की आवाजाही, संतुलन और आपातकालीन तैयारी, ये सभी कारक समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। जब तेज तूफान आया और यात्री ऊपर वाले डेक पर चले गए, तब वजन का संतुलन बिगड़ना स्वाभाविक था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घबराहट में लोगों का एक तरफ से दूसरी तरफ भागना स्थिति को और खतरनाक बना गया। लेकिन यही तो वह स्थिति थी जिसके लिए क्रूज प्रबंधन को पहले से तैयार होना चाहिए था। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि हादसे के समय लाइफ जैकेट यात्रियों के शरीर पर नहीं, बल्कि सीलबंद पन्नियों में बंद थीं। यह दृश्य सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविकता को उजागर करता है। लाइफ जैकेट कोई सजावटी वस्तु नहीं है जिसे आपातकाल आने पर पैकेट से निकाला जाए। ऐसे जल परिवहन में यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले ही लाइफ जैकेट पहनाना अनिवार्य होना चाहिए। यदि क्रूज के कर्मचारी हादसे के समय सीलबंद पैकेट फाड़कर जैकेट निकाल रहे थे, तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की खुली अवहेलना है। जब तक उपकरण उपयोग योग्य स्थिति में यात्रियों तक नहीं पहुंचते, तब तक उनका होना भी न होने के बराबर है। चश्मदीदों के अनुसार, करीब आधे घंटे तक लोग पानी और मौत से लड़ते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह आधा घंटा उन परिवारों के लिए जीवन का सबसे भयावह समय रहा होगा। किसी ने सीट पकड़ी होगी, किसी ने अपने बच्चे को बचाने की कोशिश की होगी, कोई मदद के लिए चीखा होगा, कोई प्रार्थना कर रहा होगा। लेकिन ऐसी स्थिति में सामान्य यात्री क्या कर सकता है? उसका जीवन पूरी तरह उन लोगों पर निर्भर होता है जिन पर संचालन, सुरक्षा और बचाव की जिम्मेदारी होती है। यदि वे प्रशिक्षित न हों, यदि सुरक्षा अभ्यास नियमित न हो, यदि आपातकालीन योजना केवल कागज पर हो, तो दुर्घटना के समय पूरी व्यवस्था बिखर जाती है। हादसे के बाद प्रशासन ने कुछ कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कीं, कुछ अधिकारियों को निलंचित किया और उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की। यह कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इतनी कार्रवाई पर्यास है? हर बड़े हादसे के बाद जांच समितियां बनती हैं, निलंबन होते हैं, बयान जारी होते हैं और भविष्य में सख्त नियम बनाने की घोषणा की जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन कुछ समय बाद वही डिलाई, वही लापरवाही और वहीं भूल फिर किसी दूसरी जगह नए हादसे का कारण बन जाती है। देश में अनेक दुर्घटनाओं का इतिहास बताता है कि हमारी समस्या नियमों की कमी से अधिक, नियमों के पालन की कमी है। पर्यटन विभाग द्वारा क्रूज संचालन के लिए नए और सख्त नियम तैयार करने की घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन यह घोषणा तभी सार्थक होगी जब इसे जमीन पर ईमानदारी से लागू किया जाए। हर जल पर्यटन सेवा में मौसम संबंधी चेतावनी के आधार पर संचालन रोकने का स्पष्ट नियम होना चाहिए। क्रूज या नाव में सवार होने से पहले प्रत्येक यात्री के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य होनी चाहिए। यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले दो मिनट का सुरक्षा निर्देश दिया जाना चाहिए। क्रूज स्टाफ को नियमित प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल से गुजरना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हर यात्रा से पहले सुरक्षा उपकरणों की जांच होनी चाहिए और उसका रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए। केवल टिकट बेचकर यात्रियों को पानी में भेज देना पर्यटन नहीं, गैरजिम्मेदारी है। इस हादसे ने यह भी दिखाया कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा को अक्सर औपचारिकता समझ लिया जाता है। चमकदार रिसॉर्ट, सुंदर टिकट काउंटर, आकर्षक प्रचार और मनोरंजन सुविधाएं तो बना दी जाती हैं, लेकिन सबसे जरूरी व्यवस्था मानव जीवन की सुरक्षा पीछे छूट जाती है। जब तक सुरक्षा को खर्च नहीं, निवेश माना जाएगा, तब तक ऐसे हादसों को रोका नहीं जा सकेगा। पर्यटन की सफलता केवल पर्यटकों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षित वापसी से मापी जानी चाहिए। बरगी हादसा हमें यह याद दिलाता है कि लापरवाही कभी छोटी नहीं होती। बह धीरे-धीरे जमा होती है और एक दिन त्रासदी बनकर सामने आती है। मौसम चेतावनी को नजरअंदाज करना, यात्रियों को बिना लाइफ जैकेट यात्रा कराना, आपातकालीन तैयारी की कमी, प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव और निगरानी की ढिलाई, ये सब मिलकर मौत का कारण बने। इसलिए जिम्मेदारी केवल एक पायलट, हेल्पर या टिकट प्रभारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए। अब जरूरी है कि इस हादसे को केवल शोक और मुआवजे तक सीमित न किया जाए। मृतकों के परिवारों को न्याय, घायलों को सहायता और लापता लोगों के परिजनों को हर संभव सहयोग मिलना चाहिए। साथ ही, ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिसमें किसी भी पर्यटन सेवा को मौसम चेतावनी, सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ के बिना संचालन की अनुमति न मिले। बरगी डैम की त्रासदी से यदि व्यवस्था ने सचमुच सबक नहीं लिया, तो यह उन नौ मृतकों की स्मृति के साथ भी अन्याय होगा। यह हादसा एक चेतावनी है, पर्यटन आनंद दे सकता है, लेकिन सुरक्षा के बिना वही आनंद मृत्यु का सफर बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बरगी की डूबी हुई नाव केवल पानी में नहीं डूबी; उसके साथ व्यवस्था की लापरवाही, सुरक्षा की खोखली तैयारी और जवाबदेही को कमी भी उजागर हो गई। अब जरूरत है कि यह हादसा केवल खबर बनकर न रह जाए, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव की शुरुआत बने।यदि इन हादसों से सरकारों ने कोई सबक नही लिया तो यह सिलसिला खत्म नही होगा क्या पर्यटक जान की कीमत पर मौत के साए में पर्यटन की अठखेलियाँ कर जान गंवाते रहेंगे? (लेखक राष्ट्रवादी चिंतक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) सम्पर्क 9219179431</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:32:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्री भद्रेश्वरनाथ मंदिर कारिडोर निर्माणका रास्ता साफ, 2 करोड़़ रूपये स्वीकृत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के विश्व हिन्दू महासंघ युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष सौरभ त्रिपाठी की पहल पर श्री भद्रेश्वरनाथ मंदिर कारिडोर निर्माण और सौन्दर्यीकरण का मार्ग प्रशस्त हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">धर्मार्थ कार्य निदेशालय वाराणसी के सचिव के पत्र के आधार पर बस्ती के तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा भेजे गये पांच विन्दुओं की आख्या के आधार पर पर्यटन विभाग द्वारा कार्य हेतु 2 करोड़ रूपये की स्वीकृति मिल गयी है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह जानकारी देते हुये विश्व हिन्दू महासंघ युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष सौरभ त्रिपाठी ने बताया कि उन्होने वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र देकर श्री भद्रेश्वरनाथ मंदिर कारिडोर के निर्माण और सौन्दर्यीकरण कराने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177703/clear-the-way-for-construction-of-shri-bhadreshwarnath-temple-corridor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260430-wa0056.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के विश्व हिन्दू महासंघ युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष सौरभ त्रिपाठी की पहल पर श्री भद्रेश्वरनाथ मंदिर कारिडोर निर्माण और सौन्दर्यीकरण का मार्ग प्रशस्त हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धर्मार्थ कार्य निदेशालय वाराणसी के सचिव के पत्र के आधार पर बस्ती के तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा भेजे गये पांच विन्दुओं की आख्या के आधार पर पर्यटन विभाग द्वारा कार्य हेतु 2 करोड़ रूपये की स्वीकृति मिल गयी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह जानकारी देते हुये विश्व हिन्दू महासंघ युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष सौरभ त्रिपाठी ने बताया कि उन्होने वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र देकर श्री भद्रेश्वरनाथ मंदिर कारिडोर के निर्माण और सौन्दर्यीकरण कराने की मांग किया था। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लिया और कारिडोर निर्माण की घोषणा भी कर दिया। धन स्वीकृति के बाद कारीडोर निर्माण आरम्भ हो जायेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सौरभ त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि श्री भद्रेश्वरनाथ मंदिर कारिडोर निर्माण और सौन्दर्यीकरण से श्रद्धालुओं को विशेष सुविधा मिलेगी और क्षेत्र का विकास भी और तेजी से होगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:07:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अरैल क्षेत्र में कमर्शियल टेंट सिटी का निर्माण</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी प्रयागराज।</strong> माघ मेला 2026 के दौरान प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मेला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में मेला प्राधिकरण के तत्वाधान में प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा अरैल क्षेत्र में कमर्शियल टेंट सिटी का निर्माण किया गया है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आरामदायक ठहराव की सुविधा मिल सके।</div>
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<div style="text-align:justify;">यह टेंट सिटी माघ मेला में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है। इस कमर्शियल टेंट सिटी का उद्घाटन आज मंडलायुक्त  सौम्या अग्रवाल एवं पुलिस आयुक्त प्रयागराज  जोगेंद्र कुमार द्वारा किया</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166468/construction-of-commercial-tent-city-in-arail-area"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260116-wa0196.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी प्रयागराज।</strong> माघ मेला 2026 के दौरान प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मेला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में मेला प्राधिकरण के तत्वाधान में प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा अरैल क्षेत्र में कमर्शियल टेंट सिटी का निर्माण किया गया है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आरामदायक ठहराव की सुविधा मिल सके।</div>
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<div style="text-align:justify;">यह टेंट सिटी माघ मेला में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है। इस कमर्शियल टेंट सिटी का उद्घाटन आज मंडलायुक्त  सौम्या अग्रवाल एवं पुलिस आयुक्त प्रयागराज  जोगेंद्र कुमार द्वारा किया गया। अरैल क्षेत्र में इस वर्ष पर्यटन विभाग एवं निजी ऑपरेटर्स के सहयोग से वेलनेस सेंटर एवं अन्य टेंट सिटी भी स्थापित की गई हैं, जो शिवालय पार्क एवं त्रिवेणी पुष्प के बीच स्थित हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">इन सुविधाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को न केवल आवास बल्कि स्वास्थ्य एवं योग से जुड़ी सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँगी। इस अवसर पर अपर पुलिस आयुक्त  अजयपाल शर्मा, मेलाधिकारी ऋषिराज, नगर आयुक्त  साँई तेजा, अपर मेला अधिकारी  दयानंद प्रसाद, सचिव विकास प्राधिकरण अजीत सिंह, उप मेलाधिकारी  विवेक शुक्ला एवं  अभिनव पाठक उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 20:35:47 +0530</pubDate>
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