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                <title>ममता बनर्जी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>ममता बनर्जी RSS Feed</description>
                
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                <title>बंगाल चुनाव: 'यहां से दफा हो जाओ', टीएमसी नेताओं से चुनाव आयोग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग (ईसी) के साथ हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक के महज 7 मिनट के भीतर उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वे अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ पूरी तैयारी के साथ चुनाव आयोग के पास गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग को 9 चिट्ठियां भेजी गई थीं, लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175582/bengal-elections-get-lost-from-here-tmc-leaders-make-serious"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/vkfbk1c5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग (ईसी) के साथ हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक के महज 7 मिनट के भीतर उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वे अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ पूरी तैयारी के साथ चुनाव आयोग के पास गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग को 9 चिट्ठियां भेजी गई थीं, लेकिन उनमें से किसी का भी न तो जवाब दिया गया और न ही कोई संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में गंभीर मामला है, क्योंकि एक संवैधानिक संस्था को इस तरह की चिट्ठियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">ओ’ब्रायन के मुताबिक, बैठक सुबह करीब 10 बजकर 2 मिनट पर शुरू हुई और 7-8 मिनट में ही खत्म हो गई। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में शामिल हैं, जिनका संबंध भारतीय जनता पार्टी से है। उन्होंने ऐसे 6 उदाहरण चुनाव आयोग के सामने रखे और कहा कि इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अधिकारियों के ट्रांसफर और नियुक्तियों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अगर इस तरह के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव हो पाएंगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने ये मुद्दे उठाए, मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें बीच में रोक दिया और कथित तौर पर "यहां से निकल जाओ" कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने इस पूरे घटनाक्रम को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि अपने 22 साल के राजनीतिक करियर और 16 साल के संसदीय अनुभव में उन्होंने कभी भी किसी संवैधानिक संस्था के साथ ऐसी स्थिति नहीं देखी। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग के पास बैठक का वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए ताकि सच सामने आ सके।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि जब उनका प्रतिनिधिमंडल बाहर निकल रहा था, तब उनके एक सहयोगी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बधाई दी कि वे भारत के इतिहास में पहले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जिनके खिलाफ लोकसभा और राज्यसभा में हटाने के नोटिस दिए गए हैं।ओ’ब्रायन ने आगे बताया कि इस मुद्दे को लेकर सभी विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब वे बैठक में पहुंचे, तो शुरुआत में ही यह कहा गया कि उनका प्रतिनिधिमंडल अधिकृत नहीं है, जबकि वे पूरी तरह अधिकृत होकर गए थे। इसके बाद जब उन्होंने अपने मुद्दे रखने शुरू किए, तो उन्हें बोलने का मौका ही नहीं दिया गया।ओ’ब्रायन ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता बेहद जरूरी है और अगर इस पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चिंता की बात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 22:17:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>ईडी बनाम ममता बनर्जी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर  पर रोक लगाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज<span lang="hi" xml:lang="hi">।</span> </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कुछ राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उन पर कथित तौर पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक सलाहकार </span>I-PAC <span lang="hi" xml:lang="hi">के कार्यालय की ईडी की तलाशी में बाधा डालने का आरोप है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि यह एक "बहुत गंभीर मामला" है जिसकी कोर्ट को जांच करने की ज़रूरत है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बेंच ने कहा "हमारी पहली नज़र में राय है कि इस याचिका में ईडी या</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166204/supreme-court-stays-fir-against-ed-officials-in-ed-vs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/mamata-banerjee-.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज<span lang="hi" xml:lang="hi">।</span> </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कुछ राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उन पर कथित तौर पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक सलाहकार </span>I-PAC <span lang="hi" xml:lang="hi">के कार्यालय की ईडी की तलाशी में बाधा डालने का आरोप है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि यह एक "बहुत गंभीर मामला" है जिसकी कोर्ट को जांच करने की ज़रूरत है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बेंच ने कहा "हमारी पहली नज़र में राय है कि इस याचिका में ईडी या अन्य केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच और राज्य एजेंसियों द्वारा इसमें दखल से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा उठाया गया है। हमारे अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश में कानून के शासन को आगे बढ़ाने और हर अंग को स्वतंत्र रूप से काम करने देने के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मुद्दे की जांच करना ज़रूरी है ताकि अपराधियों को किसी खास राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ढाल के नीचे सुरक्षित न रहने दिया जाए। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले में बड़े सवाल शामिल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें अगर बिना फैसला किए छोड़ दिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो स्थिति और खराब हो जाएगी और एक या दूसरे राज्य में अराजकता की स्थिति पैदा हो जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखते हुए कि अलग-अलग संगठन अलग-अलग जगहों पर शासन कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सच है कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी को किसी भी पार्टी के चुनाव कार्य में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन अगर केंद्रीय एजेंसी किसी गंभीर अपराध की ईमानदारी से जांच कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सवाल यह उठता है कि क्या पार्टी की गतिविधियों की आड़ में एजेंसियों को अपना काम करने से रोका जा सकता है</span>", <span lang="hi" xml:lang="hi">। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संविधान के आर्टिकल 32 के तहत ईडी द्वारा दायर रिट याचिका पर पश्चिम बंगाल राज्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ममता बनर्जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल डीजीपी  राजीव कुमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा और दक्षिण कोलकाता के डिप्टी कमिश्नर प्रियब्रत रॉय को नोटिस जारी किया गया है। ईडी  अपने काम में कथित रुकावट की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन से जांच करवाना चाहती है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को दो हफ़्ते के अंदर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि प्रतिवादी 8 जनवरी को तलाशी ली गई जगह और आस-पास के इलाकों की फुटेज वाले </span>CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को सुरक्षित रखें। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा पश्चिम बंगाल अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई तीन एफआईआर में आगे की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे ही मामला उठाया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला एक "चौंकाने वाला पैटर्न" दिखाता है। उन्होंने कहा कि पहले भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसियों के काम में रुकावट डालने के लिए ऐसे काम किए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">"यह कैसे सही है</span>?", <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस मिश्रा ने पूछा। एसजी ने कहा कि एक याचिका ईडी ने एक ऐसे अधिकारी के साथ मिलकर दायर की है जो व्यक्तिगत रूप से पीड़ित है। उन्होंने कहा कि एक और याचिका ईडी अधिकारियों ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता में दायर की है। "यहां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक सबूत था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह नतीजा निकला कि एक कंपनी के ऑफिस और एक व्यक्ति के ऑफिस में कुछ आपत्तिजनक सामग्री है। ईडी के अधिकारी सेक्शन 17</span> PMLA <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए वहां जाते हैं। हमने स्थानीय पुलिस को भी सूचित किया। माननीय मुख्यमंत्री</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजीपी और पुलिस के बड़े दल के साथ वहां पहुंचते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑफिस में घुस जाते हैं और फाइलें और डिवाइस ले जाते हैं। मेरे हिसाब से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह चोरी के अलावा कुछ नहीं है। अगर ऐसे व्यवहार को माफ किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह अधिकारियों को हतोत्साहित और निराश करेगा</span>," <span lang="hi" xml:lang="hi">एसजी ने कहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एसजी  ने बताया कि ईडी ने उन पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड करने का निर्देश देने के लिए भी एक आवेदन दिया है जो बनर्जी के साथ थे। </span>PMLA <span lang="hi" xml:lang="hi">के सेक्शन 54 का जिक्र करते हुएएसजी  ने कहा कि पुलिस अधिकारी ईडी की मदद करने के लिए कर्तव्यबद्ध हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस ने ईडी को रोका।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 21:38:11 +0530</pubDate>
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