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                <title>भारतीय कृषि - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भारतीय कृषि RSS Feed</description>
                
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                <title>बदलती जलवायु का संकट और उसका प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जलवायु संकट आज मानव सभ्यता के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। यह संकट धीरे धीरे नहीं बल्कि तेजी से गहराता जा रहा है और इसके प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। वैश्विक स्तर पर तापमान में वृद्धि, वर्षा के पैटर्न में बदलाव, सूखा और बाढ़ जैसी चरम घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है। इस पूरे परिदृश्य में एल नीनो जैसी प्राकृतिक घटना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो समुद्री तापमान में बदलाव के कारण वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है और कई देशों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177996/the-crisis-of-changing-climate-and-its-effects"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/cover.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जलवायु संकट आज मानव सभ्यता के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। यह संकट धीरे धीरे नहीं बल्कि तेजी से गहराता जा रहा है और इसके प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। वैश्विक स्तर पर तापमान में वृद्धि, वर्षा के पैटर्न में बदलाव, सूखा और बाढ़ जैसी चरम घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है। इस पूरे परिदृश्य में एल नीनो जैसी प्राकृतिक घटना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो समुद्री तापमान में बदलाव के कारण वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है और कई देशों के लिए गंभीर परिणाम लेकर आती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एल नीनो एक ऐसी जलवायु प्रक्रिया है जो सामान्यतः 2 से 7 वर्षों के अंतराल पर उत्पन्न होती है और प्रशांत महासागर के मध्य तथा पूर्वी हिस्से के जल को सामान्य से अधिक गर्म कर देती है। इस गर्माहट का प्रभाव केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह वायुमंडलीय परिसंचरण को भी प्रभावित करता है, जिससे पूरी दुनिया के मौसम में असामान्य परिवर्तन देखने को मिलते हैं। भारत जैसे देशों में इसका सबसे बड़ा प्रभाव मानसून पर पड़ता है, जो कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आंकड़ों के अनुसार 1980 के बाद से लगभग 70 प्रतिशत एल नीनो वर्षों में भारत में कमजोर मानसून दर्ज किया गया है, जिससे वर्षा में कमी देखी गई है । यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि एल नीनो और मानसून के बीच गहरा संबंध है। जब मानसून कमजोर होता है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ता है। भारत की लगभग 50 प्रतिशत कृषि भूमि वर्षा पर निर्भर है, इसलिए थोड़ी सी भी कमी खाद्यान्न उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2026 में भी इसी तरह की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, जिससे खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है । यदि वर्षा में कमी आती है तो धान, दाल और तिलहन जैसी फसलों का उत्पादन घट सकता है, जिससे खाद्य कीमतों में वृद्धि होगी और महंगाई बढ़ेगी। यह प्रभाव केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे समाज पर पड़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तापमान के संदर्भ में भी स्थिति चिंताजनक है। 2026 में भारत के कई हिस्सों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो सामान्य से काफी अधिक है । यह न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। अत्यधिक गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि हो रही है। शहरी क्षेत्रों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि वहां कंक्रीट संरचनाएं गर्मी को अधिक समय तक बनाए रखती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जल संकट भी इस पूरे परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जब वर्षा कम होती है तो जलाशयों में पानी का स्तर घट जाता है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों प्रभावित होते हैं। कई शहरों में पहले से ही पानी की कमी की समस्या है और एल नीनो जैसी घटनाएं इसे और बढ़ा सकती हैं। उदाहरण के लिए कुछ क्षेत्रों में जलाशयों की क्षमता का केवल लगभग 28 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैश्विक स्तर पर भी इसके प्रभाव कम नहीं हैं। एशिया में तापमान बढ़ने से बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है क्योंकि लोग ठंडक के लिए अधिक ऊर्जा का उपयोग करते हैं। इससे ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार एशिया में वैश्विक बिजली मांग का आधे से अधिक हिस्सा है और तापमान में वृद्धि से इस मांग में और वृद्धि होगी । दूसरी ओर, कुछ क्षेत्रों में अधिक वर्षा और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे वहां के बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एल नीनो के कारण मौसम में असंतुलन केवल वर्षा की कमी तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह वर्षा के वितरण को भी प्रभावित करता है। कहीं अत्यधिक बारिश होती है तो कहीं बिल्कुल नहीं होती। इस प्रकार की असमानता कृषि और जल प्रबंधन दोनों के लिए चुनौती पैदा करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार हाल के दशकों में चरम वर्षा की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है, जो जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर और अधिक गंभीर हो रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन और एल नीनो का संयुक्त प्रभाव इस संकट को और जटिल बना देता है। जहां एल नीनो एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, वहीं जलवायु परिवर्तन मानव गतिविधियों का परिणाम है। औद्योगीकरण, वनों की कटाई और जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग ने वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ा दी है, जिससे पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। जब यह बढ़ता तापमान एल नीनो जैसी घटनाओं के साथ मिल जाता है तो इसके प्रभाव और भी तीव्र हो जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक दृष्टि से भी यह संकट गहरा असर डालता है। कमजोर मानसून के कारण कृषि उत्पादन घटता है, जिससे ग्रामीण आय में कमी आती है और मांग घटती है। इसके साथ ही खाद्य कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून और जलवायु परिवर्तन का संयुक्त प्रभाव आर्थिक विकास को भी प्रभावित कर सकता है और सामाजिक असमानताओं को बढ़ा सकता है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे परिदृश्य में सबसे अधिक प्रभावित वे लोग होते हैं जो पहले से ही कमजोर स्थिति में हैं, जैसे छोटे किसान, मजदूर और गरीब वर्ग। उनके पास संसाधनों की कमी होती है और वे प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने में सक्षम नहीं होते। इसलिए जलवायु संकट केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं है बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक असमानता का भी मुद्दा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाधान के संदर्भ में यह आवश्यक है कि वैश्विक और स्थानीय स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं। नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, जल संरक्षण के उपाय अपनाना, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना और वनों की रक्षा करना ऐसे कदम हैं जो इस संकट को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करना और आपदा प्रबंधन की तैयारी को बेहतर बनाना भी जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह स्पष्ट है कि जलवायु संकट एक बहुआयामी समस्या है, जिसमें प्राकृतिक और मानव दोनों कारक शामिल हैं। एल नीनो जैसी घटनाएं इस संकट को और अधिक जटिल बना देती हैं, लेकिन यह भी सच है कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाएं तो इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम इस समस्या को गंभीरता से समझें और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से एक संतुलित और सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 17:35:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की</strong></div></blockquote></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175827/nationwide-nano-fertilizer-awareness-campaign-launched-by-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001707588.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की सबसे बड़ी उर्वरक </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहकारी संस्था, ने आधिकारिक रूप से इफको नैनो उर्वरक जागरूकता</div>
<div style="text-align:justify;">महा अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर इफको के अध्यक्ष श्री</div>
<div style="text-align:justify;">दिलीप संघाणी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक व्यापक</div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और एकीकृत राष्ट्रीय जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।  यह अभियान  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अ मित शाह की प्रेरणा से शुरू किया गया है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘सहकार से समृद्धि’ जैसे राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप</div>
<div style="text-align:justify;">है। भारत के राजपत्र के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में नैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को शामिल किया जाना भारतीय कृषि नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/1001707589.jpg" alt="इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया।" width="1200" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जो भारतीय सहकारिता के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आगे बताया कि कोयंबटूर स्थित इफको-नैनोवेंशन्स में इफको का इनोवेशन हब तथा ब्राज़ील में स्थापित होने वाला नैनो उर्वरक उत्पादन संयंत्र — जो जून 2026 तक शुरू होने की संभावना है — कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का प्रतीक है। श्री संघाणी ने कहा कि भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां परंपरा और तकनीक का संगम हो रहा है, और यही संयोजन भारतीय कृषि को नई दिशा दे रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय का संचालन देश के प्रथम सहकारिता मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र इस अभियान की भावना को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि’ के लक्ष्य को साकार करता है। श्री संघाणी ने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिएपरिवर्तनकारी क्षण बताया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>इस नैनो महा अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता और परिवर्तन</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियान के रूप में तैयार किया गया है, जिसके चार मुख्य उद्देश्य हैं—</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK, नैनो जिंक और नैनो कॉपर</div>
<div style="text-align:justify;">का व्यापक प्रचार</div>
<div style="text-align:justify;"> किसानों को मुख्य रूप से फोलियर स्प्रे के माध्यम से सही उपयोग का</div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण देना</div>
<div style="text-align:justify;"> पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करनासहकारी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान, प्रत्येक PACS को मजबूत बनाकर और क्षेत्रीय प्रदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा। जब किसान स्वयं परिणाम देखेंगे, तब विश्वास स्वतः बढ़ेगा।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन के अंत में श्री दिलीप संघाणी ने इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा तथा किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा, “आइए हम सब मिलकर संकल्प लें — कम लागत, अधिक उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण — हर खेत में नैनो उर्वरक, यही नया  भारत है, यही आत्मनिर्भर भारत है।”   इफको ने 218 लाख से अधिक बोतल नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतल नैनो DAP लिक्विड की बिक्री हासिल की है। नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों को भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और 2 लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री प्राप्त हुई है। यह उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जबकि नैनो DAP की 57.89 लाख बोतलें DAP के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जिससे देश को लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और आयात लागत मेंs भारी बचत हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको की नैनो उर्वरक श्रृंखला में नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK (लिक्विड और ग्रेन्युलर), नैनो जिंक, नैनो कॉपर और जैव-उत्तेजक ‘धरा अमृत’ शामिल हैं। ‘धरा अमृत’ — जो अमीनो एसिड, एल्जिनिक एसिड, ह्यूमिक एसिड, आवश्यक खनिज और केले के रस से समृद्ध है — लॉन्च के बाद से किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इफको का कर-पूर्व लाभ ₹4,200 करोड़ के  ऐतिहासिक स्तर से अधिक रहने का अनुमान है। नैनो तकनीक, ड्रोन  तकनीक, AI और डेटा विश्लेषण में निरंतर नवाचार के माध्यम से इफको भारत के कृषि-खाद्य क्षेत्र को रूपांतरित कर रहा है और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">
<div>
<div> </div>
</div>
<div>श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा । उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया </div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर इफको के प्रबंध निदेशक श्री के. जे. पटेल सहित निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175827/nationwide-nano-fertilizer-awareness-campaign-launched-by-iffco</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 15:05:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नई वैज्ञानिक तकनीक से खेती करने से होगा लाभ : डॉ.डी. के. सिंह </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इफको के नैनो उर्वरक भारतीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके प्रयोग से सस्ती एवं टिकाऊ खेती करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उक्त बातें डॉ. डी.के.सिंह, प्रधानाचार्य मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने बतौर मुख्य अतिथि  ग्राम हंसराजपुर के कृषकों  हेतु आयोजित  एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं । उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि  इफको के नैनो उर्वरक जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक क्रांतिकारी  परिवर्तन ला रहे हैं को जरूर प्रयोग करें। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में मधुमक्खी पालन इकाई के प्रभारी बिरेंद्र सिंह ने मौन पालन एवं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169526/doddy-k-singh-will-benefit-from-farming-using-new-scientific"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260213-wa0167.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इफको के नैनो उर्वरक भारतीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके प्रयोग से सस्ती एवं टिकाऊ खेती करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उक्त बातें डॉ. डी.के.सिंह, प्रधानाचार्य मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने बतौर मुख्य अतिथि  ग्राम हंसराजपुर के कृषकों  हेतु आयोजित  एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं । उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि  इफको के नैनो उर्वरक जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक क्रांतिकारी  परिवर्तन ला रहे हैं को जरूर प्रयोग करें। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में मधुमक्खी पालन इकाई के प्रभारी बिरेंद्र सिंह ने मौन पालन एवं फल संरक्षण व खाद्य प्रसंस्करण की तकनीक के बारे में विस्तार से चर्चा की। प्रभारी प्रशिक्षण मुकेश तिवारी ने फसलों में नैनो यूरिया प्लस, नैनो कॉपर, नैनो जिंक, एवं नैनो डीएपी के प्रयोग की विस्तार से जानकारी दी एवं स्वस्थ व टिकाऊ खेती के लिए मृदा परीक्षण के महत्व को  बताया एवं कृषि में जैव उर्वरकों एवं जैव अपघटकों के प्रयोग की जानकारी दी।</div>
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<div style="text-align:justify;">  सभी प्रतिभागियों को नैनो उर्वरकों एवं जैव उर्वरकों के गेहूं फसल पर लगे ट्रायल्स का तथा कारडेट की विभिन्न इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया।  कार्यक्रम में ग्राम प्रधान  जय सिंह यादव , राधेश्याम सरोज, भारत लाल यादव, राम शिरोमणि बिन्द रमाशंकर गौतम , शोभा सरोज अमरावती बिन्द सहित कॉर्डेट फूलपुर की वरिष्ठ अधिकारी  श्रीमती सविता शुक्ला सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>विज्ञान खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 19:33:21 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय कृषि के विकास में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण : डा.डी.के.सिंह</title>
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<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारतीय कृषि में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। चाहे फसलों की रोपाई या बुवाई ,चाहे कटाई माडाई हो क्या चाहे पशुपालन हो सभी क्षेत्रों में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । उक्त बातें डॉ. डी.के.सिंह, प्रधानाचार्य मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने बतौर मुख्य अतिथि  ग्राम पुरेफौज़शाह , वि.ख. बहरिया, प्रयागराज में आयोजित किसान चौपाल  के दौरान कहीं ।</div>
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<div style="text-align:justify;">उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि  इफको के नैनो उर्वरक जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक क्रांतिकारी  परिवर्तन ला रहे हैं को जरूर प्रयोग करें।  प्रधानाचार्य ने उपस्थित कृषक प्रतिभागियों को कार्डेट एवं इफको</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166189/contribution-of-women-is-important-in-the-development-of-indian"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260115-wa0154.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारतीय कृषि में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। चाहे फसलों की रोपाई या बुवाई ,चाहे कटाई माडाई हो क्या चाहे पशुपालन हो सभी क्षेत्रों में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । उक्त बातें डॉ. डी.के.सिंह, प्रधानाचार्य मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने बतौर मुख्य अतिथि  ग्राम पुरेफौज़शाह , वि.ख. बहरिया, प्रयागराज में आयोजित किसान चौपाल  के दौरान कहीं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि  इफको के नैनो उर्वरक जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक क्रांतिकारी  परिवर्तन ला रहे हैं को जरूर प्रयोग करें।  प्रधानाचार्य ने उपस्थित कृषक प्रतिभागियों को कार्डेट एवं इफको के क्रियाकलाप से परिचित कराया तथा धान की फसल में नैनो यूरिया प्लस, नैनो कॉपर, नैनो जिंक, एवं नैनो डीएपी के प्रयोग की विस्तार से जानकारी दी। इसी क्रम  प्रभारी प्रशिक्षण मुकेश तिवारी ने खेतों की मिट्टी जांच से होने वाले लाभ एवं मिट्टी नमूना लेने की विधि की जानकारी दी एवं कृषि में जैव उर्वरकों एवं जैव अपघटकों के प्रयोग की जानकारी दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंत में उपस्थित  जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाव के लिए कंबल भी वितरण किया गया। पुरेफौजशाह  फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन  की श्रीमती कामिनी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में दूधनाथ , विवेक कुमार सिंह, राजेश कुमार, सुरेश , कामिनी सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।</div>
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<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 21:01:42 +0530</pubDate>
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