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                <title>Court Relief - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Court Relief RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चार दीवारों के भीतर, सार्वजनिक शांति में कोई खलल नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1980 (एनएसए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-</span>II <span lang="hi" xml:lang="hi">की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें केवल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180333/no-disturbance-of-public-peace-within-the-four-walls"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/allahabad-high-court1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1980 (एनएसए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-</span>II <span lang="hi" xml:lang="hi">की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें केवल एक गाय की हत्या शामिल थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके कारण न तो कोई हिंसा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में कोई खलल पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">उपर्युक्त चर्चा के आलोक में यह अकाट्य निष्कर्ष निकलता है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एनएसए</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश न तो कानून की दृष्टि से और न ही तथ्यों के आधार पर कायम रखा जा सकता है। अतः</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह आदेश इस न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने योग्य है।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत जारी करने वाले प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शामली) ने मूल रूप से एनएसए की धारा 3(2) के तहत विवादित हिरासत आदेश जारी किया। यह आदेश याचिकाकर्ताओं के खिलाफ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">यूपी गोहत्या निवारण अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1955</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 3</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">5</span>A <span lang="hi" xml:lang="hi">और 8 के तहत दर्ज </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एफआईआर </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के आधार पर जारी किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत के कारणों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस को 23 अप्रैल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 को शिकायतकर्ता से सूचना मिली थी कि कुछ लोग गोहत्या कर रहे हैं। घर के भीतर तलाशी लेने पर पुलिस को एक कटा हुआ सिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खाल और मांस बरामद हुआ। पशु चिकित्सक द्वारा किए गए वैज्ञानिक परीक्षण के बाद बरामद मांस की पहचान </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बीफ</span>' (<span lang="hi" xml:lang="hi">गोमांस) के रूप में हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शेष सामग्री की पहचान गाय की संतान (बछड़े/बछिया) के अवशेषों के रूप में की गई। जहां आरोपी हासिम को अगले ही दिन (24 अप्रैल) गिरफ्तार कर लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं आरोपी समीर को 27 जून को ही गिरफ्तार किया जा सका।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आगे भेजी गई रिपोर्ट मिलने पर ज़िला मजिस्ट्रेट ने 7 जुलाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 को हिरासत के आदेश जारी किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं को 12 महीने की अवधि के लिए हिरासत में रखा जाए। राज्य सरकार ने आखिरकार 19 अगस्त को इस आदेश की पुष्टि की। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">   </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील गौतम बघेल ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं का कथित कृत्य उनके घर की सीमाओं के बाहर नहीं हुआ। इसलिए यह निजी तौर पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों की नज़र से दूर किया गया। यह भी कहा गया कि प्रतिवादियों द्वारा दायर जवाबी हलफनामे में ऐसा कोई दावा नहीं था कि याचिकाकर्ता के कृत्य के कारण कोई सांप्रदायिक हिंसा हुई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक शांति भंग हुई हो या किसी व्यक्ति को चोट लगी हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपरोक्त के परिणामस्वरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न तो कोई हिंसा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में कोई बाधा आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही सांप्रदायिक सौहार्द में कोई खलल पड़ा।" इसलिए इस निष्कर्ष पर पहुंचते हुए कि हिरासत का आदेश न तो कानून की नज़र में और न ही तथ्यों के आधार पर सही ठहराया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंच ने हिरासत के आदेश को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए पुष्टि आदेश को भी रद्द कर दिया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:21:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>Haryana: डेरा प्रमुख राम रहीम को लगा बड़ा झटका, CBI कोर्ट ने सुनाया ये फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Haryana News: हरियाणा में सिरसा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ चल रहे बहुचर्चित बधियाकरण (नपुंसक बनाने) मामले में हरियाणा की विशेष सीबीआई कोर्ट ने एक अहम आदेश सुनाया है। कोर्ट ने न्यूयॉर्क में रह रहे मुख्य गवाह की याचिका पर फैसला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के दौरान वकील से परामर्श की अनुमति तो दी है, लेकिन साक्ष्य रिकॉर्डिंग के समय वकील की उसी कक्ष में मौजूदगी की इजाजत नहीं दी। इस फैसले को राम रहीम के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।</p>
<p>अब यह गवाह अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165975/haryana-dera-chief-ram-rahim-got-a-big-blow-cbi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ram-rahim-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>Haryana News: हरियाणा में सिरसा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ चल रहे बहुचर्चित बधियाकरण (नपुंसक बनाने) मामले में हरियाणा की विशेष सीबीआई कोर्ट ने एक अहम आदेश सुनाया है। कोर्ट ने न्यूयॉर्क में रह रहे मुख्य गवाह की याचिका पर फैसला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के दौरान वकील से परामर्श की अनुमति तो दी है, लेकिन साक्ष्य रिकॉर्डिंग के समय वकील की उसी कक्ष में मौजूदगी की इजाजत नहीं दी। इस फैसले को राम रहीम के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।</p>
<p>अब यह गवाह अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराएगा। इससे पहले गवाह ने कोर्ट को बताया था कि राम रहीम एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उनके कई बड़े राजनेताओं से संबंध रहे हैं। ऐसे में गवाही के दौरान किसी दूरस्थ स्थान पर अपने वकील की मौजूदगी से उसे मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास मिलेगा।</p>
<h5><strong>बचाव पक्ष ने जताई थी आपत्ति</strong></h5>
<p>राम रहीम की ओर से पेश वकीलों ने गवाह की इस मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि साक्ष्य रिकॉर्डिंग के दौरान रिमोट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग स्थल पर वकील की मौजूदगी का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का हवाला देते हुए कहा कि VC के रिमोट पॉइंट पर केवल अधिकृत समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) ही मौजूद रह सकता है।</p>
<h5><strong>कोर्ट ने सुनवाई के बाद दिया आदेश</strong></h5>
<p>सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीबीआई के विशेष मजिस्ट्रेट अनिल कुमार यादव ने कहा कि जब अभियोजन और बचाव पक्ष के वकील कोर्ट में शारीरिक रूप से मौजूद रहेंगे, तो गवाह के वकील की VC कक्ष में उपस्थिति आवश्यक नहीं है। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि साक्ष्य रिकॉर्डिंग शुरू होने से पहले गवाह अपने वकील से दूरस्थ स्थान के बाहर परामर्श कर सकता है।</p>
<h5><strong>दबाव की आशंका पर अदालत की टिप्पणी</strong></h5>
<p>गवाह द्वारा यह आशंका जताए जाने पर कि दूतावास अधिकारियों या किसी अन्य माध्यम से उस पर दबाव डाला जा सकता है, कोर्ट ने कहा कि वह स्वयं गवाह से बातचीत कर यह सुनिश्चित करेगी कि उस पर किसी भी तरह का दबाव या भय न हो। यदि ऐसी कोई स्थिति सामने आती है, तो अदालत साक्ष्य को निष्पक्ष तरीके से दर्ज कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।</p>
<h5><strong>2014 में दर्ज हुआ था मामला</strong></h5>
<p>इस मामले में गवाह ने दावा किया है कि वह कथित बधियाकरण का शिकार हुआ था। उसकी याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2014 को आदेश देते हुए राम रहीम के इशारे पर अनुयायियों के कथित सामूहिक बधियाकरण के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने को कहा था।</p>
<p>जांच के बाद 1 फरवरी 2018 को सीबीआई ने राम रहीम और दो डॉक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस केस में उन पर गंभीर चोट पहुंचाने, धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 13:45:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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