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                <title>madhya pradesh - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>मुख्यमंत्री ने कटनी  दौरा: में दिया 243 करोड़ के कार्यों की सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:justify;"><strong>कांग्रेश ने प्रदेश के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं किया।</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बरही /कटनी: । मप्र। प्रदेश के मुख्य मंत्री  डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बरही प्रवास के दौरान क्षेत्र को 243 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात देते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना और आवास योजनाओं के लिए पुनः सर्वे कराने का ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने प्रदेश के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं किया,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173312/chief-minister-gave-the-gift-of-works-worth-rs-243"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001653929.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><strong>कांग्रेश ने प्रदेश के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं किया।</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बरही /कटनी: । मप्र। प्रदेश के मुख्य मंत्री  डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बरही प्रवास के दौरान क्षेत्र को 243 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात देते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना और आवास योजनाओं के लिए पुनः सर्वे कराने का ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने प्रदेश के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं किया, जिसकी भरपाई अब वर्तमान सरकार तेजी से कर रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने लाखों किसानों की जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भी पात्र परिवार आवास की सुविधा से वंचित नहीं रहेगा, इसके लिए नए सिरे से सर्वे के निर्देश दिए गए हैं। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उन्होंने मेडिकल कॉलेज की स्थापना को अपनी प्राथमिकता बताया। साथ ही, करीब 1000 करोड़ रुपये की कुल विकास योजनाओं का खाका खींचते हुए उन्होंने किसानों के लिए 'कृषि महोत्सव' आयोजित करने की बात कही।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>सिंचाई परियोजना से बदलेगी 11 हजार किसानों की किस्मत।</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित बरही सूक्ष्म उद्ववहन सिंचाई परियोजना (लागत ₹566.92 करोड़) को कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर किसानों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सीएम ने संजय पाठक की तारीफ़ करते हुए , कहा आज जो विशाल भीड़ यहां  जुटी है और इस क्षेत्र के लिए जितने काम की घोषणाएं हुई है वह सिर्फ पाठक जी के मेहनत और प्रयास  से ही संभव हो रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1001653927.jpg" alt="कटनी  जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना और आवास योजनाओं के लिए पुनः सर्वे कराने का ऐलान किया।" width="1200" height="800"></img></div><div style="text-align:justify;">मुख्य मंत्री ने इस परियोजना से बरही और विजयराघवगढ़ तहसील के 27 गांवों की 20,000 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। जिससे: करीब 11,000 किसानों को सीधे तौर पर खेती के लिए पानी उपलब्ध होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>जनसैलाब के बीच भव्य आभार रैली।</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बड़ा तालाब से विजयनाथ धाम मंदिर तक निकली एक किलोमीटर लंबी आभार रैली में मुख्यमंत्री का अभूतपूर्व स्वागत हुआ। रथ पर मुख्यमंत्री के साथ खजुराहो सांसद और विजय गढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक  सवार थे। : चौक बाजार और कमानिया गेट जैसे मार्गों पर व्यापारियों, अधिवक्ता संघ, खिलाड़ियों और सामाजिक संगठनों ने 14 स्थानों पर स्टॉल लगाकर पुष्प वर्षा की गई। यह स्वागत विधायक संजय पाठक के नेतृत्व में किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>आधुनिक खेती को प्रोत्साहन</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य किसानों को पारंपरिक खेती से निकालकर आधुनिक और लाभकारी कृषि की ओर ले जाना है। प्रस्तावित 243 करोड़ रुपये के लोकार्पण और भूमिपूजन कार्य स्थानीय बुनियादी ढांचे को नई मजबूती प्रदान करेंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 21:26:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऐतिहासिक रहा बरही का 'कृषि महोत्सव।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कटनी/बरही: ।</strong> विजयराघवगढ़ विधानसभा के बरही में आयोजित विशाल 'कृषि महोत्सव' को क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर बताते हुए विधायक संजय पाठक ने इसे अभूतपूर्व सफलता करार दिया है। विधायक पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस दौरे से क्षेत्र को ₹1000 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिली है, जिससे आने वाले समय में समूचे अंचल की तस्वीर बदल जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>जनसैलाब और विकास की सौगात।</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दो लाख से अधिक की उपस्थिति: </div><div style="text-align:justify;">  कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुमान के मुताबिक,</div><div style="text-align:justify;">सिंचाई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173300/barhis-agricultural-festival-was-historic"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260314-wa0227.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कटनी/बरही: ।</strong> विजयराघवगढ़ विधानसभा के बरही में आयोजित विशाल 'कृषि महोत्सव' को क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर बताते हुए विधायक संजय पाठक ने इसे अभूतपूर्व सफलता करार दिया है। विधायक पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस दौरे से क्षेत्र को ₹1000 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिली है, जिससे आने वाले समय में समूचे अंचल की तस्वीर बदल जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>जनसैलाब और विकास की सौगात।</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दो लाख से अधिक की उपस्थिति: </div><div style="text-align:justify;"> कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुमान के मुताबिक, लगभग 2 लाख लोगों ने इस महोत्सव में शिरकत की, जो क्षेत्र के प्रति जनता के भरोसे और उत्साह को दर्शाता है।</div><div style="text-align:justify;">सिंचाई योजना का उपहार: मुख्यमंत्री ने बरही-विजयपुर उद्वहन सिंचाई योजना सहित कई बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा और शिलान्यास किया। विधायक पाठक ने बताया कि इन योजनाओं से किसानों की हजारों एकड़ भूमि सिंचित होगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong> ऐतिहासिक स्वागत:।</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> बरही के इतिहास में यह पहला मौका था जब इतनी बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण एक साथ जुटे। मुख्यमंत्री ने भी क्षेत्र की जनता के स्नेह को देखते हुए विकास की गति को और तेज करने का भरोसा दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>श्री पाठक विधायक ने कहा कि</strong></div><div style="text-align:justify;">"बरही की पावन धरा पर आज जो जनसमूह उमड़ा, उसने यह साबित कर दिया कि जनता को प्रदेश सरकार की नीतियों और विकास कार्यों पर पूरा विश्वास है। मुख्यमंत्री जी ने ₹1000 करोड़ की जो सौगातें दी हैं, वे केवल आंकड़े नहीं बल्कि लाखों परिवारों की खुशहाली का आधार हैं। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 21:06:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेल एवं युवक कल्याण विभाग मध्यप्रदेश द्वारा 29 वां युवा उत्सव, की प्रतियोगिता ज़िला स्तर पर 7 नवंबर 2025 को । </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>दिनेश चौधरी शहडोल</strong>  <br /><br />13 नवंबर 2020 को  होगा संभाग स्तर प्रतियोगिता,शुभम पैलेस होटल में प्रातः 10:00 बजे कार्यक्रम आयोजित होगा । जिसमें उमरिया, अनूपपुर, डिंडोरी एवं शहडोल जिले के युवा कलाकार सम्मिलित होंगे। युवा उत्सव में इस वर्ष सात विधाए रखी गई है ।</div>
<div>  </div>
<div>जिनमें विज्ञान मेला ,कहानी लेखन, कविता लेखन ,पेंटिंग, सामूहिक लोकगीत ,सामूहिक लोक नृत्य एवं भाषण की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।</div>
<div>जिसमें 15 वर्ष से 29 वर्ष के युवा कार्यक्रम में सम्मिलित हो सकते हैं।</div>
<div>  </div>
<div>  युवा कलाकारों को अपना पंजीयन साक्षमता प्रमाण पत्र खेल और युवा कल्याण विभाग के कार्यालय, महात्मा गांधी स्टेडियम शहडोल में प्रतियोगिता</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158859/29th-youth-festival-competition-by-sports-and-youth-welfare-department"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/खेल-एवं-युवक-कल्याण-विभाग-मध्यप्रदेश-द्वारा-29-वां-युवा-उत्सव.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>दिनेश चौधरी शहडोल</strong> <br /><br />13 नवंबर 2020 को  होगा संभाग स्तर प्रतियोगिता,शुभम पैलेस होटल में प्रातः 10:00 बजे कार्यक्रम आयोजित होगा । जिसमें उमरिया, अनूपपुर, डिंडोरी एवं शहडोल जिले के युवा कलाकार सम्मिलित होंगे। युवा उत्सव में इस वर्ष सात विधाए रखी गई है ।</div>
<div> </div>
<div>जिनमें विज्ञान मेला ,कहानी लेखन, कविता लेखन ,पेंटिंग, सामूहिक लोकगीत ,सामूहिक लोक नृत्य एवं भाषण की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।</div>
<div>जिसमें 15 वर्ष से 29 वर्ष के युवा कार्यक्रम में सम्मिलित हो सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div> युवा कलाकारों को अपना पंजीयन साक्षमता प्रमाण पत्र खेल और युवा कल्याण विभाग के कार्यालय, महात्मा गांधी स्टेडियम शहडोल में प्रतियोगिता दिनांक के दो दिवस पहले जमा करना अनिवार्य होगा।</div>
<div> </div>
<div> किसी कारणवश अगर वह अपना पंजीयन समय पर नहीं कर पाए तो प्रतियोगिता स्थान पर अपना पंजीयन कर सकते हैं।</div>
<div> युवा उत्सव संबंधी अधिक जानकारी के लिए कार्यालय खेल और युवा कल्याण विभाग महात्मा गांधी स्टेडियम शहडोल में संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div> एवं ब्लॉक कोऑर्डिनेटर सोहागपुर अजय कुमार सोंधिया खेल और युवा कल्याण विभाग शहडोल से  9981861582 पर संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 18:41:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Madhya Pradesh Breaking किसानों के हित में बड़ा फैसला : 16 जिलों में बचे हुए किसानों का धान पंजीयन अब 6 नवंबर तक होगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रीवा। मध्य प्रदेश।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  किसानों के हित में मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु बचे हुए किसानों का पंजीयन अब 6 नवंबर तक हो सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  यह निर्णय प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की विशेष पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिया है। मप्र के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि इस संबंध में सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को आदेश जारी किए गए हैं। आदेश के अनुसार डिण्डौरी, मण्डला, बालाघाट,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खाद्य</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158694/uttar-pradesh-breaking-big-decision-in-the-interest-of-farmers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251101-wa0211.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रीवा। मध्य प्रदेश।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> किसानों के हित में मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु बचे हुए किसानों का पंजीयन अब 6 नवंबर तक हो सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> यह निर्णय प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की विशेष पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिया है। मप्र के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि इस संबंध में सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को आदेश जारी किए गए हैं। आदेश के अनुसार डिण्डौरी, मण्डला, बालाघाट, सतना, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, दमोह, सिवनी, मैहर, उमरिया, जबलपुर, सीधी, अलीराजपुर, बैतूल और पन्ना जिलों में अब शेष किसानों का पंजीयन निर्धारित नोडल अधिकारियों की उपस्थिति में किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों से यह सुझाव प्राप्त हुए थे कि तकनीकी कारणों, समयाभाव या मौसम की बाधाओं के चलते कुछ किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए पंजीयन नहीं करा पाए हैं। कलेक्टरों द्वारा भेजे गए इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करते हुए सरकार ने कृषक पंजीयन की अवधि में विस्तार का निर्णय लिया है ताकि कोई भी पात्र किसान सरकारी खरीदी से वंचित न रह जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पंजीयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी :</strong></h3>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खाद्य संचालनालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि, प्रत्येक पंजीयन केन्द्र पर खाद्य, सहकारिता, राजस्व एवं कृषि विभाग के नोडल अधिकारी की उपस्थिति में ही बचे हुए किसानों का पंजीयन किया जाएगा। केन्द्रवार केवल उन शेष कृषकों का ही पंजीयन होगा, जिनके नाम जिला प्रस्ताव में उल्लेखित हैं। किसान पंजीयन हेतु आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद ही पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि 6 नवंबर तक शेष रहे किसानों का पंजीयन हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार किसानों के हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोई भी किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने से वंचित न रह जाए, यह हमारा दायित्व है। इसीलिए पंजीयन अवधि बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। खरीफ उपार्जन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाया जा रहा है ताकि किसान को मंडियों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हमेशा किसानों को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा है। धान उपार्जन पंजीयन अवधि बढ़ाए जाने का यह निर्णय इसी दृष्टि का विस्तार है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि राज्य का कोई भी किसान समर्थन मूल्य का लाभ पाने से वंचित न रहे। सरकार के इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी, जो अभी तक पंजीयन नहीं करा पाए थे। अब वे 6 नवंबर तक अपने नजदीकी पंजीयन केन्द्रों पर जाकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीयन करा सकते है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 21:11:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जांच रिपोर्ट में खुलासा, 'कफ सिरप' से हुई मासूमों की मौत, राजस्थान,मध्य प्रदेश में बिक्री पर बैन</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> प्रयागराज। </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 12 बच्चों की मौत ने देश भर में चिंता बढ़ा दी है. इस घटना के बाद राजस्थान सरकार ने जयपुर की केसन्स फार्मा की 19 दवाओं पर रोक लगा दी है. सरकार ने बच्चों के लिए डेक्स्ट्रोमेथोर्फन वाले कफ सिरप के इस्तेमाल को लेकर एडवाइजरी जारी की है.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान सरकार ने केसन्स फार्मा जयपुर की सभी 19 दवाओं के वितरण पर रोक लगा दी है. कफ सिरप से बच्चों की संदिग्ध मौतों और घटिया दवाओं के सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है. राज्य के ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156564/investigation-report-revealed-in-the-investigation-report-banned-innocent-innocent"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/download-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> प्रयागराज। </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 12 बच्चों की मौत ने देश भर में चिंता बढ़ा दी है. इस घटना के बाद राजस्थान सरकार ने जयपुर की केसन्स फार्मा की 19 दवाओं पर रोक लगा दी है. सरकार ने बच्चों के लिए डेक्स्ट्रोमेथोर्फन वाले कफ सिरप के इस्तेमाल को लेकर एडवाइजरी जारी की है.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान सरकार ने केसन्स फार्मा जयपुर की सभी 19 दवाओं के वितरण पर रोक लगा दी है. कफ सिरप से बच्चों की संदिग्ध मौतों और घटिया दवाओं के सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है. राज्य के ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को भी सस्पेंड कर दिया गया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">छिंदवाड़ा जिले में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कोल्ड्रिफ सिरप</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के सेवन से हुई बच्चों की मौत की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। घटना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने इस सिरप की बिक्री पर पूरे मध्यप्रदेश में तत्काल प्रतिबंध लगा दिया है। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिरप बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट्स पर भी बैन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सिरप तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित एक फैक्ट्री में तैयार किया जाता है। घटना सामने आने के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने तमिलनाडु सरकार से जांच रिपोर्ट मांगी थी। आज सुबह आई रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही की पुष्टि हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके आधार पर प्रदेश सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए प्रतिबंध लागू किया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि छिंदवाड़ा में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कोल्ड्रिफ सिरप</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्यप्रदेश में बैन कर दिया है। सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है।  सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था। आज सुबह जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया गया है। बच्चों की दुखद मृत्यु के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई चल रही थी। राज्य स्तर पर भी इस मामले में जांच के लिए टीम बनाई गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">छिंदवाड़ा के परासिया ब्लॉक के 9 बच्चों की मौत कोल्ड्रिफ कफ सरिप की वजह से हो गई। इसके अलावा कई बच्चों का इलाज चल रहा है। यह कफ सिरप तिमलनाडु की श्रीसन फार्मास्यूटिकल की यूनिट से सैंपल लिए गए थे।  जिसके सैंपल की जांच  में खुलासा हुआ है कि सिरप में नॉन-फार्माकॉपिया ग्रेड प्रोपीलीन ग्लाइकॉन का इस्तेमाल हुआ है। इसमें आशंका व्यक्त की गई कि वह डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकॉल से दूषित था। यह दोनों ही किडनी को नुकसान पहुचाने वाले जहरीले पदार्थ हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस रिपोर्ट के बाद तमिलनाडु सरकार ने भी पूरे राज्य में कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री और उपयोग पर तुरंत लोग लगा दी। इसके थोक और रिटेल दुकानों से स्टॉक फ्रीज करने के आदेश दिए गए। कंपनी को स्टॉप प्रोडक्शन ऑर्डर जारी किया गया औरमैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस कैंसिल करने केल ए शो-कॉज नोटिस भेजा गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/156564/investigation-report-revealed-in-the-investigation-report-banned-innocent-innocent</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 19:41:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईजीएनटीयू में पीएचडी प्रवेश घोटाले पर हाईकोर्ट गंभीर, अगली सुनवाई में मंगाई गई संदिग्ध प्रवेशार्थियों की सूची</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>दिनेश चौधरी की रिपोर्ट शहडोल </strong></div>
<div>  </div>
<div>
<div>अनूपपुर । इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक (म.प्र.) में पीएच.डी. शोध प्रवेश परीक्षा (आरईटी) 2024-25 को लेकर गंभीर गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोपों पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में रिट पिटीशन लगाई गई है, याचिकाकर्ता रवि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर 1 अगस्त को सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने अदालत से समय की मांग करते हुए बताया कि उन चयनित संदिग्ध अभ्यर्थियों के नाम और पते मांगे हैं जिन्हें प्रतिवादी बनाया जाना जरूरी है, यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन छात्रों के मौलिक अधिकारों का हनन करने पर आमादा है।</div>
<div>  </div>
</div>
<div>उच्च न्यायालय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153742/list-of-suspected-entry-of-suspected-entry-on-phd-admission"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/img-20250806-wa0555.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>दिनेश चौधरी की रिपोर्ट शहडोल </strong></div>
<div> </div>
<div>
<div>अनूपपुर । इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक (म.प्र.) में पीएच.डी. शोध प्रवेश परीक्षा (आरईटी) 2024-25 को लेकर गंभीर गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोपों पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में रिट पिटीशन लगाई गई है, याचिकाकर्ता रवि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर 1 अगस्त को सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने अदालत से समय की मांग करते हुए बताया कि उन चयनित संदिग्ध अभ्यर्थियों के नाम और पते मांगे हैं जिन्हें प्रतिवादी बनाया जाना जरूरी है, यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन छात्रों के मौलिक अधिकारों का हनन करने पर आमादा है।</div>
<div> </div>
</div>
<div>उच्च न्यायालय ने मामले की आगामी सुनवाई अगस्त के अंतिम सप्ताह में रखी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि न्यायालय भी इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।</div>
<div> </div>
<div><strong>सीबीआई जांच की मांग, छात्रों ने लगाए दर्जनों ठोस आरोप</strong></div>
<div>याचिकाकर्ता रवि त्रिपाठी, जो कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं आरईटी 2024-25 के परीक्षार्थी हैं, ने केंद्र सरकार को भेजे प्रार्थना पत्र में प्रवेश प्रक्रिया में सुनियोजित गड़बड़ियों और संगठित शैक्षणिक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है और इसके समर्थन में आरटीआई के जवाब, विश्वविद्यालय की वेबसाइट के स्क्रीनशॉट्स, अधिसूचनाएं एवं अन्य कई दस्तावेज संलग्न किए हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>दागियों को ही जरुरी प्रभारों का प्रसाद क्यों?</strong></div>
<div>पूर्व में पीएचडी प्रवेश परीक्षा के मामले में वर्तमान आरईटी समन्वयक प्रो. भूमि नाथ त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लग चुके थें, प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत भी की गई थी, इसके बाद इस वर्ष भी इन्हें ही आरईटी की जिम्मेदारी कैसे दे दी गई? यह भी जांच का विषय है, हालांकि जांच के विषय तो इन्हें आईजीएनटीयू मे दिए गए नियुक्ति (पुलिस वेरिफिकेशन आदि) एवं पदोन्नति, या प्रभार वितरण संबंधी दस्तावेज भी हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>प्रो. गौरी शंकर और तरुण ठाकुर भी जांच के राडार मे</strong></div>
<div>उक्त आरईटी परीक्षा से संबंधित  200 से अधिक शिकायतें ईमेल आदि से आई हैं, जिसमे से दो दर्जन से अधिक शिकायतें प्रधानमंत्री कार्यालय में भी दी गई हैं, </div>
<div>इसके बाद प्रो. गौरी शंकर महापात्रा और प्रो. तरुण ठाकुर जैसे संदिग्धों को पीएमओ में की गई शिकायत का नोडल अधिकारी नियुक्त कर के मनगढ़ंत रिपोर्ट लिखी जा रही है। इन दोनों के संबंध में चर्चा है कि इन दोनों प्रोफेसर ने अपने कई खासमखासों को पीएचडी में बैक डोर से इंट्री दिलाए हैं! ऐसे में कैसे होगी निष्पक्ष जांच?</div>
<div> </div>
<div><strong>यह आरोप लगे हैं</strong></div>
<div>1. प्रश्न पत्र लीक करने और निजी ईमेल का दुरुपयोग:</div>
<div>आरईटी समन्वयक ने प्रश्नपत्र निजी ईमेल से मंगवाए, जिससे प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका बढ़ती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>2. परिणामों में अपारदर्शिता:</strong></div>
<div>मुख्य परिसर में जारी परिणामों में नाम नहीं दिए गए जबकि मणिपुर परिसर के लिए जारी परिणाम में छात्रों के नाम स्पष्ट हैं। विश्वविद्यालय मुख्य परिसर के परिणाम में नाम इसलिए नहीं दिए गए कि उसमे दर्जनों नॉन टीचिंग स्टाफ, कई प्रोफेसर्स की पत्नियां, परिजन, रिस्तेदार आदि हैं। कुछ उम्मीदवारों को कम अंक होने के बावजूद इंटरव्यू में बुलाकर बैकडोर से इंट्री दी गई!</div>
<div> </div>
<div><strong>3. चयन प्रक्रिया में भिन्न मानक:</strong></div>
<div>कंप्यूटर साइंस जैसे विभागों में परिणाम वेबसाइट पर प्रकाशित न कर गुप्त रूप से निजी ईमेल से प्रवेश की सूचना दी गई। जिसमें एक गेट क्वालिफाई डीआरडीओ के डिप्टी डायरेक्टर रैंक के अधिकारी जो कि इंटरव्यू में भी टाॅप किया था उसका नाम फाइनल लिस्ट से हटा कर उसकी जगह विश्वविद्यालय परिसर में किराना दुकान संचालक का नाम लिखा गया।</div>
<div> </div>
<div><strong>4. फर्जी डिग्रियां और ओएमआर छेड़छाड़:</strong></div>
<div>50 से अधिक नॉन-टीचिंग स्टाफ एवं फैकल्टी परिजनों को संदिग्ध डिग्रियों के आधार पर प्रवेश दि1या गया। कई तो ऐसे हैं जो ओपन बोर्ड से जैसे-तैसे पीजी किएं या डिग्री काॅलेमे भी लटकते हुए पोस्ट ग्रेजुएशन किएं और आईजीएनटीयू की आरईटी में बाकायदा टाॅप हो गएं आखिर कैसे? ओएमआर शीट घरों में भरने जैसी शिकायतें भी सामने आईं।</div>
<div> </div>
<div><strong>5. रिचेकिंग के नाम पर धोखाधड़ी:</strong></div>
<div>छात्रों से शुल्क तो लिया गया लेकिन न रिचेकिंग की गई, न ही रिपोर्ट दी गई। आरटीआई आवेदन के बाद गोपनीयता का हवाला देकर उत्तर देने से मना कर दिया गया।</div>
<div> </div>
<div><strong>6. योग्य उम्मीदवारों का बहिष्कार</strong></div>
<div>कई यूजीसी-नेट और गेट क्वालिफाई योग्य छात्रों को बाहर कर अपात्रों को चयनित किया गया। स्कोर वैधता का बहाना बनाकर अयोग्य घोषित किया गया।</div>
<div> </div>
<div><strong>7. चयन सूची में हेराफेरी:</strong></div>
<div>डीआरडीओ जैसे संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी को बाहर कर अयोग्य व्यक्तियों को प्रवेश दिया गया।</div>
<div> </div>
<div><strong>8. फर्जी अधिसूचनाएं और वेबसाइट पर लापरवाही:</strong></div>
<div>बिना हस्ताक्षर की अधिसूचनाएं और नियमों में मनमाना बदलाव वेबसाइट पर अपलोड किए गए।</div>
<div> </div>
<div><strong>9. प्रशासनिक गुटबाजी:</strong></div>
<div>प्रो. तरुण ठाकुर, प्रो.भूमिनाथ त्रिपाठी द्वारा लॉबी द्वारा प्रवेश प्रक्रिया पर एकाधिकार चलाया गया; छात्रसंघ की अनुपस्थिति में यह और भी बढ़ गया।</div>
<div> </div>
<div><strong>10. फंड में घोटाले की आशंका:</strong></div>
<div>अम्बेडकर चेयर और पर्चेज कमेटी द्वारा करोड़ों के फंड में गड़बड़ी, फर्जी उपस्थिति और ऑडिट में अनियमितताएं दर्ज की गईं।</div>
<div> </div>
<div><strong>11. छात्रों का उत्पीड़न:</strong></div>
<div>कथित आरईटी फर्जीवाड़े की केन्द्रीय समिति से निष्पक्ष जांच की मांग करने‌ वाले, छात्रों के खिलाफ फर्जी आंतरिक जांच और पुलिसिया  एफआईआर द्वारा प्रताड़ित किए जाने की कूट रचना करते हुए, कुत्सित प्रयास किया गया। हालांकि छात्रों से उक्त फर्जी शिकायतों की आशंका जताते हुए पहले ही पुलिस महानिदेशक मप्र. को एक विस्तृत पत्र भेज दिया था, जिससे आरईटी फर्जीवाड़ा के बचाव में विश्वविद्यालय से फर्जी शिकायत करवाने वालों पर उनका यह दाव भी उल्टा पड़ गया।</div>
<div> </div>
<div><strong>बिना टेंडर किए ही करा ली परीक्षा</strong></div>
<div>आरोप है कि न तो जी.एफ.आर. 2017 के अंतर्गत किसी प्रकार का टेंडर जारी किया गया और न ही ई.ओ.आई. आमंत्रित की गई, जिससे परीक्षा आयोजन में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रश्नपत्र निजी ईमेल से एकत्र किए गए और बिना सील या यूनिक कोड वाले प्रश्नपत्र वितरित किए गए, जिससे गोपनीयता भंग हुई। ओएमआर शीट में हेराफेरी की आशंका भी जताई गई है। परिणामों में अपारदर्शिता स्पष्ट है—मुख्य परिसर में नाम छिपाए गए जबकि मणिपुर परिसर में नाम सार्वजनिक हैं। कुछ विषयों के परिणाम निजी तौर पर भेजे गए और चयन की प्रक्रिया संदिग्ध रही। एक ही परीक्षा के परिणाम तीन अलग-अलग तरीकों से कैसे जारी की जा सकती है?</div>
<div> </div>
<div><strong>देशव्यापी शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल</strong></div>
<div>पीड़ित छात्रों ने अपने पत्रों में यह भी उल्लेख किया है कि यह मामला केवल आईजीएनटीयू तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केंद्रीय विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता और शैक्षणिक ईमानदारी पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष सीबीआई जांच शीघ्र शुरू नहीं होती है, तो अन्य पीड़ित छात्र आंदोलन को मजबूर होंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/153742/list-of-suspected-entry-of-suspected-entry-on-phd-admission</link>
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                <pubDate>Wed, 06 Aug 2025 21:46:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहडोल जिले के देवलौंद थाना क्षेत्र के चंदोला गांव में मंगलवार को एक हृदयविदारक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">शहडोल जिले के देवलौंद थाना क्षेत्र के चंदोला गांव में मंगलवार को एक हृदयविदारक</p>
<p style="text-align:justify;">हादसे में दो साल की मासूम बच्ची की नहर में डूबने से मौत हो गई। बच्ची का नाम प्रियांशी था और वह पप्पू कोल की बेटी थी। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है, वहीं परिजन गहरे सदमे में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना के समय बच्ची के माता-पिता पास के खेत में धान रोपाई का काम कर रहे थे। घर पर प्रियांशी अपने बुजुर्ग दादा-दादी के साथ थी। इसी दौरान वह खेलते-खेलते घर के पास स्थित नहर की ओर चली गई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153563/a-heartbreaking-on-tuesday-in-chandola-village-of-devalund-police"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/thavaltha-thana-kashhatara-ka-ghatana_2af914ffb006a0e2bf2475574052d8f8.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">शहडोल जिले के देवलौंद थाना क्षेत्र के चंदोला गांव में मंगलवार को एक हृदयविदारक</p>
<p style="text-align:justify;">हादसे में दो साल की मासूम बच्ची की नहर में डूबने से मौत हो गई। बच्ची का नाम प्रियांशी था और वह पप्पू कोल की बेटी थी। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है, वहीं परिजन गहरे सदमे में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना के समय बच्ची के माता-पिता पास के खेत में धान रोपाई का काम कर रहे थे। घर पर प्रियांशी अपने बुजुर्ग दादा-दादी के साथ थी। इसी दौरान वह खेलते-खेलते घर के पास स्थित नहर की ओर चली गई और नहर में गिरकर बह गई।</p>
<p style="text-align:justify;">करीब एक किलोमीटर दूर नहर में नहा रहे कुछ लोगों की नजर जब बहती हुई बच्ची पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत उसे बाहर निकाला। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और उसकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद लोगों ने बच्ची की पहचान करने की कोशिश की और जानकारी गांव में फैलाई, जिसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Jul 2025 20:32:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Madhya Pradesh Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहडोल में जलपरी शो और भव्य झूलों के साथ ऐतिहासिक मेले का आगाज: पहली बार हो रहा है ऐसा आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शहडोल</p>
<p>शहडोल के इतिहास में पहली बार एक ऐसे भव्य और अनोखे मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसने पूरे शहर में उत्साह का माहौल बना दिया है. यह मेला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि शहडोल के लोगों के लिए एक नया अनुभव लेकर आया है, जिसे वे पहले कभी नहीं देख पाए थे.</p>
<p>यह ऐतिहासिक और भव्य कार्यक्रम **बाणगंगा मेला मैदान** में किया जा रहा है, जो इसकी भव्यता में चार चांद लगा रहा है.</p>
<p>इस मेले की सबसे बड़ी और खास बात है **'जलपरी' शो**. देश के विभिन्न हिस्सों से आई एक प्रशिक्षित जलपरी यहां अपने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153298/the-historic-fair-with-mermaid-show-and-grand-swings-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/20250720_141453.jpg" alt=""></a><br /><p>शहडोल</p>
<p>शहडोल के इतिहास में पहली बार एक ऐसे भव्य और अनोखे मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसने पूरे शहर में उत्साह का माहौल बना दिया है. यह मेला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि शहडोल के लोगों के लिए एक नया अनुभव लेकर आया है, जिसे वे पहले कभी नहीं देख पाए थे.</p>
<p>यह ऐतिहासिक और भव्य कार्यक्रम **बाणगंगा मेला मैदान** में किया जा रहा है, जो इसकी भव्यता में चार चांद लगा रहा है.</p>
<p>इस मेले की सबसे बड़ी और खास बात है **'जलपरी' शो**. देश के विभिन्न हिस्सों से आई एक प्रशिक्षित जलपरी यहां अपने हैरतअंगेज और मनमोहक करतब दिखाएगी, जो दर्शकों को पानी के भीतर की दुनिया का एक अद्भुत अनुभव कराएगी. यह शो निश्चित रूप से बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए एक अविस्मरणीय पल होगा.</p>
<p>मनोरंजन की श्रृंखला यहीं खत्म नहीं होती. मेले में पहली बार **टाइम टावर** और **नाव** जैसे विशाल और रोमांचक झूले भी लगाए गए हैं. ये झूले न सिर्फ ऊँचाई और गति का रोमांच देंगे, बल्कि शहडोल के आसमान में एक नई चमक बिखेरेंगे. इन झूलों का अनुभव लेने के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं और मेले की रौनक बढ़ा रहे हैं. इसके अलावा, कई अन्य झूले और मनोरंजक स्टॉल भी हैं जो सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए कुछ न कुछ खास पेश कर रहे हैं.</p>
<p>यह ऐतिहासिक और भव्य आयोजन **'शहडोल से गंगा'** नामक संस्था द्वारा किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शहडोल में सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. आयोजकों ने सुरक्षा और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा है ताकि आगंतुक बिना किसी चिंता के मेले का पूरा आनंद ले सकें.</p>
<p>यह मेला प्रतिदिन **रात्रि 10 बजे तक** खुला रहेगा, जिससे शाम को भी परिवार और दोस्त मिलकर मेले का लुत्फ उठा सकें. शहडोल के निवासी इस अनूठे अवसर का भरपूर लाभ उठा रहे हैं और यह मेला निश्चित रूप से आने वाले समय में एक यादगार आयोजन के रूप में याद किया जाएगा. इस ऐतिहासिक मेले को देखने और इसका हिस्सा बनने का मौका न छोड़ें!</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/153298/the-historic-fair-with-mermaid-show-and-grand-swings-in</link>
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                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 19:42:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Madhya Pradesh Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Maharajganj: भाभा परमाणु रिसर्च सेंटर में चयनित होने पर ग्राम प्रधान व स्थानीय लोगों ने किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत जमुहानी निवासी करन पाण्डेय का चयन मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित भाभा परमाणु रिसर्च सेंटर में प्लांट ऑपरेटर के पद पर चयन होने पर सोमवार को ग्राम प्रधान कांग्रेस यादव ने उनके आवास पर पहुंचकर फूल माला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया।</p>
<p>ग्राम प्रधान कांग्रेस यादव ने कहा कि मेरे गांव के लिए बहुत ही गौरव की बात है। करन पाण्डेय ने इस उपलब्धि का श्रेय बाबा सूर्य नारायण पाण्डेय और पिता रामानुज पाण्डेय गुरू जनों को दी है। इसी तरह गांव के पढ़ने वाले बच्चों को उन से सीख लेनी चाहिए। इस उपलब्धि के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152787/village-head-welcomed-karan-pandey-by-garlanding"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-06/img-20250623-wa0036.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत जमुहानी निवासी करन पाण्डेय का चयन मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित भाभा परमाणु रिसर्च सेंटर में प्लांट ऑपरेटर के पद पर चयन होने पर सोमवार को ग्राम प्रधान कांग्रेस यादव ने उनके आवास पर पहुंचकर फूल माला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया।</p>
<p>ग्राम प्रधान कांग्रेस यादव ने कहा कि मेरे गांव के लिए बहुत ही गौरव की बात है। करन पाण्डेय ने इस उपलब्धि का श्रेय बाबा सूर्य नारायण पाण्डेय और पिता रामानुज पाण्डेय गुरू जनों को दी है। इसी तरह गांव के पढ़ने वाले बच्चों को उन से सीख लेनी चाहिए। इस उपलब्धि के लिए पूरा गांव खुशी जाहिर किया है।</p>
<p>इस मौके पर प्रवीण कुमार पाण्डेय,रामप्रवेश दीक्षित, धनेश यादव, रंजय वरूण, वंश बहादुर यादव सहित आदि लोग मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jun 2025 21:18:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बुढ़ार में 'कबाड़ माफिया' का राज: कोयला और लोहा चोरी का सिंडिकेट बेखौफ!</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>शाहडोल :</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिले का बुढ़ार क्षेत्र इन दिनों अवैध कोयला और कबाड़ के बड़े सिंडिकेट का अड्डा बन गया है, जहां बेखौफ होकर यह काला कारोबार फल-फूल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बद्री पांडे और बडडे जैन जैसे नाम इस अवैध धंधे के सरगना के तौर पर उभरे हैं, जिन पर 'कबाड़ माफिया' होने का गंभीर आरोप लग रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, कोल खदानों और रेलवे से बड़े पैमाने पर लोहे की चोरी की जा रही है, जिसे बाद में बुढ़ार स बहार  खुलेआम बेचा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब दिन-दहाड़े और रात</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152206/draft-add-your-title-the-ruler-of-the-junk-mafia"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/1000000212.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>शाहडोल :</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले का बुढ़ार क्षेत्र इन दिनों अवैध कोयला और कबाड़ के बड़े सिंडिकेट का अड्डा बन गया है, जहां बेखौफ होकर यह काला कारोबार फल-फूल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बद्री पांडे और बडडे जैन जैसे नाम इस अवैध धंधे के सरगना के तौर पर उभरे हैं, जिन पर 'कबाड़ माफिया' होने का गंभीर आरोप लग रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, कोल खदानों और रेलवे से बड़े पैमाने पर लोहे की चोरी की जा रही है, जिसे बाद में बुढ़ार स बहार  खुलेआम बेचा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब दिन-दहाड़े और रात के अंधेरे में बिना किसी रोक-टोक के चल रहा है। अवैध कोयले और कबाड़ से लदी गाड़ियां लगातार बुढ़ार की सड़कों से गुजर रही हैं, जो इस बात का सीधा प्रमाण है कि यहां बड़े माफिया का राज स्थापित हो चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में पुलिस और जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बुढ़ार थाने से लेकर जिला प्रशासन के 'ऊपर तक' इन तस्करों की मजबूत पकड़ है, जिसके चलते इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यह स्थिति अपने आप में हैरान करने वाली है कि इतना बड़ा अवैध कोल और कबाड़ का सिंडिकेट जिला प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सवाल यह उठता है कि क्या यह मान लिया जाए कि इस अवैध कारोबार में जिला प्रशासन की भी भूमिका शामिल है? या फिर माफियाओं के सामने प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं? जनता अब इस अवैध धंधे पर लगाम लगाने और इसमें शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है। बुढ़ार की कानून-व्यवस्था और जिले की छवि को देखते हुए, इस मामले में तत्काल और प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/152206/draft-add-your-title-the-ruler-of-the-junk-mafia</link>
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                <pubDate>Thu, 29 May 2025 18:05:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मप्र में शराबबंदी की सुगबुगाहट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मप्र में शराबबंदी को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गयी है ,हालांकि ये शराबबंदी अभी केवल प्रदेश के धार्मिक महत्व के गिने-चुने शहरों में ही करने की बात की जा रही है। मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार नीति में सुधार कर, धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में साधु-संतों द्वारा दिए गए सुझावों पर राज्य सरकार गंभीर है। धार्मिक नगरों का वातावरण प्रभावित होने संबंधी शिकायतें प्राप्त होती रहती हैं। हमारा प्रयास है कि इन नगरों की पवित्रता अक्षुण्ण रहे। अत: राज्य सरकार जल्द ही निर्णय लेकर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147364/buzz-of-liquor-ban-in-madhya-pradesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/mohn-yadw.png" alt=""></a><br /><p>मप्र में शराबबंदी को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गयी है ,हालांकि ये शराबबंदी अभी केवल प्रदेश के धार्मिक महत्व के गिने-चुने शहरों में ही करने की बात की जा रही है। मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार नीति में सुधार कर, धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में साधु-संतों द्वारा दिए गए सुझावों पर राज्य सरकार गंभीर है। धार्मिक नगरों का वातावरण प्रभावित होने संबंधी शिकायतें प्राप्त होती रहती हैं। हमारा प्रयास है कि इन नगरों की पवित्रता अक्षुण्ण रहे। अत: राज्य सरकार जल्द ही निर्णय लेकर इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी।</p>
<p>मप्र में पूर्ण शराबबंदी एक पुराना मुद्दा है।  प्रदेश में दो दशक से ज्यादा से सत्तारूढ़ भाजपा की सरकार इस मामले में कोई ठोस फैसला नहीं कर पायी । इस असमंजस   के पीछे आबकारी से मिलने वाला राजस्व है जो लगातार बढ़ता ही जा रहा है।  प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री  उमा भर्ती जब खुद 9  माह मुख्यमंत्री रहीं तब प्रदेश में शराबबंदी लागू नहीं कर पायीं थीं ,लेकिन पद से हटने के बाद उन्हें शराबबंदी की याद आयी तो वे इस मुद्दे को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ आक्रामक हो गयीं थी।  उन्होंने आंदोलन भी किये और भोपाल में शराब की दूकान पर  पथराव भी किया। लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने न शराबबंदी की और न ही शराब की नीति को कडा बनाया उलटे उन्होंने शराब की बिक्री के नए रास्ते और खोल दिए वो भी शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाये बिना।</p>
<p>आपको बता दूँ कि मध्य प्रदेश में इस साल आबकारी राजस्व में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. राज्य की 3600 कंपोजिट शराब की दुकानों का निष्पादन 931 समूहों में किया गया, जिससे 13,914 करोड़ रुपये का राजस्व मिला जोकि पिछले वित्त साल 2023-24 के मुकाबले 12,353 करोड़ रुपये से 12.63 फीसदी ज्यादा है। यानि आबकारी कारोबार प्रदेश की सरकार के लिए कल्पवृक्ष की तरह है ,जिसे कोई त्यागना नहीं चाहता। मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के लिए भी ये आसान नहीं है ,लेकिन उन्होंने लोकप्रियता हासिल करने के लिए प्रदेश के गिने चुने शहरों में शराबबंदी लागू करने का मन बनाया है ।  वे सिंघस्थ से पहले उज्जैन और ओंमकारेश्वर में शराबबंदी लागू करना चाहते हैं ।  मुमकिन है कि  बाद में इस फेहरिस्त और भी शहरों के नाम जोड़ दिए जाएँ।</p>
<p>मप्र सरकार पिछले दिनों राजस्व के एक बड़े स्रोत परिवहन विभाग से छेड़छाड़ कर पछता रही है ।  केंद्रीय भूतल -परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के दबाब के बाद मप्र सरकार ने प्रदेश से परिवहन  चौकियों को हटा दिया था ,लेकिन कुछ ही महीनों बाद अवैध रूप से अघोषित चौकियां शुरू कर दी गयी ।  ये वो ही परिवहन विभाग है इसके एक पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा के घर से ईडी और सीबीआई ने पिछले दिनों 54  किलो सोना और करोड़ों की नगदी बरामद की थी। इस अवैध वसूली में प्रदेश के अनेक मंत्रियों,विधायकों और नौकरशाहों के नाम लिए जा रहे हैं लेकिन सरकार की बदनामी के कारण जांच की रफ्तार धीमी कर दी गयी है।वैसे प्रदेश में भाजपा कि पूर्व विधायक   के घर से भी 14  किलो सोना मिल चुका है।  </p>
<p>जग -जाहिर है के  परिवहन की तरह ही आबकारी विभाग भी अवैध  और वैध कमाई का एक बड़ा स्रोत है। यहां सब काम खराम-खरामा चलता है ।  नीचे से ऊपर तक पैसा आता-जाता है। प्रदेश की आबकारी नीति हमेशा ठेकेदारों के हिसाब से तय की जाती है ,रुपयों का लेन-देन होता है किन्तु प्रदेश के किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके अरविंद केजरीवाल की तरह कोई मुकदमा दर्ज नहीं होता । कोई गिरफ्तारी नहीं होती ,कोई छापा नहीं डाला जाता।</p>
<p>प्रदेश में हर जिले में वृन्दावन बसाने का सपना   देखने वाले मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सत्ता में आने के बाद शराब से आमदनी कम नहीं हुई बल्कि बढ़ी  है। एमपी में शराब की दुकानों के निष्पादन से साल 2023-24 में केवल 3.7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई थी, यह वृद्धि साल 2022-23 में 11.5 प्रतिशत और साल 2021-22 में 9.06 प्रतिशत थी. इससे जाहिर होता है कि साल 2024-25 की प्राप्त 12.6 प्रतिशत की वृद्धि पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा है।  ऐसे में यदि मप्र सरकार शराबबंदी की और कदम उठाती है तो उसे कोई नुक्सान होने वाला नहीं है क्योंकि देश में जहाँ भी शराबबंदी है वहां शराब का समानांतर कारोबार वैध कारोबार से ज्यादा राजस्व दे रहा है। ये राजस्व सरकारी खजाने में न जाकर नेताओं और नौकरशाही के पास जाता है।</p>
<p>जानकार बताते हैं के  सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए इस वर्ष की आबकारी नीति में आंशिक परिवर्तन किये जा सकते हैं ताकि उज्जैन और ओमकारेश्र को पवित्र नगरी बताकर वहां शराबबंदी की जा सके ,लेकिन इन दोनों ही शहरों में शराब की आवक रोकने के लिए सरकार कुछ कर पाएगी ,ये कहना कठिन है। शराबबंदी भारत जैसे देश की जरूरत हो सकती है किन्तु किसी सरकार की जरूरत नहीं है ।  बिहार और गुजरात जैसे प्रदेशों में शराबबंदी के बावजूद पियक्क्ड़ों के लिए कोई संकट नहीं है। शराब दूसरे रास्तों से आसानी से मिल ही जाती है।</p>
<p>पूर्ण शराबबंदी महात्मा गांधी के पदचिन्हों पर चलने वाली कांग्रेस भी नहीं करा पायी थी ,तब कांग्रेस के पदचिन्हों पर चलने वाली भाजपा शराबबंदी कैसे कर पायेगी ,विचारणीय प्रश्न है। वैसे यदि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव प्रदेश में आंशिक शराबबंदी  करा  पाएं तो ये उनकी एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। इस मुद्दे पर उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती समेत बहुत से संत-महंतों का और लाड़ली बहनों का भी समर्थन मिल सकता है।वैसे मै दुनिया के जितने भी देशों में गया हूँ वहां मुझे भले ही दवा न मिली हो लेकिन शराब जरूर मिली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2025 17:00:46 +0530</pubDate>
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                <title>मप्र के जंगलों में मरते हाथी, बढ़ते बाघ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मप्र के जंगलों में हाथियों की संख्या कम हो रही है लेकिन बाघों की संख्या घट रही है ।  प्रदेश में पिछले एक हफ्ते में ही अलग-अलग ठिकानों पर 10  हाथियों की रहस्य्मय तरीके  से मौत हो गयी।  मप्र के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस सिलसिले में जंगलात के 2 अफसरों का निलंबन भी किया ।  मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दिए ,लेकिन हाथियों की जान पर खतरे बरकरार हैं। ख़ास बात ये है कि मप्र में बाघों की आबादी में इजाफा हो रहा है।</p>
<p>मप्र में देश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र है। सम्भवत देश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145940/elephants-dying-and-tigers-increasing-in-the-forests-of-madhya"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/download1.jpg" alt=""></a><br /><p>मप्र के जंगलों में हाथियों की संख्या कम हो रही है लेकिन बाघों की संख्या घट रही है ।  प्रदेश में पिछले एक हफ्ते में ही अलग-अलग ठिकानों पर 10  हाथियों की रहस्य्मय तरीके  से मौत हो गयी।  मप्र के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस सिलसिले में जंगलात के 2 अफसरों का निलंबन भी किया ।  मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दिए ,लेकिन हाथियों की जान पर खतरे बरकरार हैं। ख़ास बात ये है कि मप्र में बाघों की आबादी में इजाफा हो रहा है।</p>
<p>मप्र में देश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र है। सम्भवत देश के वन क्षेत्र का २१ फीसदी भाग मप्र में आता है। स्टेट ऑफ फारेस्ट रिपोर्ट 2001 के मुताबिक  मध्यप्रदेश में वन विभाग के नियंत्रण में 95221 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल आता है जबकि इसमें वास्तव में 77265 वर्ग किलो मीटर की जमीन पर ही जंगल दर्ज किया गया है। इसका मतलब यह है कि 18 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में जंगल नहीं है फिर भी वन विभाग का उस पर नियंत्रण है। इसमें से भी सघन वन का क्षेत्रफल 44384 वर्ग किलोमीटर ही है। वर्तमान स्थिति में मध्यप्रदेश में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे ज्यादा, 76429 वर्ग किलोमीटर जंगल है। इसके बाद आंध्रप्रदेश में 68019 वर्ग किलोमीटर और छत्तीसगढ़ में 55998 वर्ग किलोमीटर जंगल है।</p>
<p>मप्र में हाथियों की  संख्या  का मुझे कोई सही ज्ञान नहीं हैं, लेकिन मप्र में हाथी हैं। मप्र में चूंकि सबसे ज्यादा वन क्षेत्र है इसलिए यहां अभ्यारण्यों की संख्या भी 24 है, किन्तु िनमने हाथियों का अलग से कोई अभ्यारण्य नहीं है। इन  अभ्यारण्यों में अब वन्यप्राणीं भयभीत हैं, क्योंकि जनगलों के सबसे विशालकाय हाथी ही इनमें  सुरक्षित नहीं हैं। यहां खरमोर से लेकर घड़ियालों  तक  के लिए  अभ्यारण्य हैं किन्तु हाथियों के लिए  नहीं ,इसीलिए शायद मप्र में हठी सुरक्षित नहीं है।  बांधवगढ़ के जंगलों में 10 हाथियों  की मौत का कारण  दूषित कोदो [ एक तरह की खरपतवार ] को माना  गया है लेकिन कोई इसके ऊपर भरोसा करने को तैयार नहीं  है ।</p>
<p>मप्र वैसे भी टाइगर स्टेट है,इसीलिए यहां शायद हाथियों पर ज्यादा गौर नहीं किया जाता।  देश के हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश में पहली बार बाघों की संख्या 785 पहुंच गई है। राष्ट्रीय स्तर पर पिछली बार की गणना में मप्र में बाघों की आबादी महज 526 थी लेकिन अखिल भारतीय बाघ गणना जनगणना 2022 के अनुसार इस बार मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या में देश में सर्वाधिक वृद्धि हुई है।</p>
<p>सबसे ज्यादा बाघों के साथ मध्यप्रदेश देश में इस बार बहुत आगे निकल गया है। उपेक्षित हठी यदि अचानक न मरते तो शायद इस मुद्दे को लेकर कोई हलचल भी नहींहोती,क्योंकि मप्र में चाहे हतहि हो चाहे अफ़्रीकी चीते मरने के लिए अभिशप्त है।  हाथियों से पहले मप्र के कुँओं अभ्यारण्य में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा छोड़े गए अफ्रीका के १० चीते मर चुके हैं। मप्र में मृत 10 हाथियों में से एक नर और नौ मादा थी. इसके अलावा, मृत दस हाथियों में से 6 किशोर/उपवयस्क और 4 वयस्क थे।</p>
<p>कहा जाता है  कि 13 हाथियों के झुंड ने जंगल के आसपास कोदो बाजरा का फसल खाया था। 10 हाथियों का पोस्टमार्टम पशु चिकित्सकों की टीम ने किया है।  पोस्टमार्टम के बाद विसरा को जांच के लिए बरेली और सागर  की फोरेंसिक लैब में भेजी गयी है। हाथी कोदो और बाजरा खाने पहली बार नहीं निकले थे। अब सवाल ये भी है कि क्या उन्हें शिकारियों ने मारा है या ग्रामीणों ने। हाथी अपने आप तो कम से कम नहीं मरे। हाथियों को उनके दांतों  के लिए मारा जाता है  हालांकि हाथी दांत  की बिक्री भारत समेत दुनिया के सभी देशों में प्रतिबंधित   है. साल 1986 में भारत ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 को संशोधित कर हाथी दांत की घरेलु बिक्री पर भी बैन लगा दिया था।</p>
<p>भारत में ही नहीं बल्कि समूचे एशिया में हाथी खतरे में है। इनकी आबादी  में आश्चर्यजनक रूप से गिरावट हुई है ।  हाथियों की आबादी 50 प्रतिशत तक कम हुई है। मप्र में हाथियों की एक साथ इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों से ये सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है कि  क्या मप्र सरकार और भारत सरकार को हाथियों की सुरक्षा के लिए अपनी राष्ट्रिय वन्य नीति पर पुनर्विचार  नहीं करना चाहिए ? हमारे यहां  कहने को हाथी पूजनीय है ।  गणेशावतार है ,लेकिन हकीकत ये है कि  भारत में हाथियों और वनवासियों के बीच का टकराव लगातार बढ़ रहा है।  हाथियों के इलाकों में अतिक्रमण हो रहा है ऐसे में जब हाथी आबादी में घुसकर तबाही मचाते हैं तो बदले में उन्हें अपनी जान गंवाना पड़ती है।</p>
<p>मप्र ही नहीं अधिकानाश राज्यों में कमोवेश यही स्थिति है। हाथी मनुष्य का मित्र है। भले ही जंगल में रहता है किन्तु  आंशिक प्रशिक्षण के बाद वो पालतू बन जाता है।  शाकाहारी प्राणी है हाथी।  पहले सर्कसों में अपने करतब दिखाता था । आज भी जंगलों में मालवाहक है हाथी ।हाथी किराये पर मिलते हैं। हाथी एक जमाने में राजा -महाराजाओं की सेना का एक प्रमुख अंग भीहोते थे ,लेकिन आज हाथ खतरे में हैं।  उनका कोई साथी नहीं है। अब हाथी मेरे साथी वाला कोई आदमी आपकी नजर में हो तो हो। राजेश खन्ना तो हाथी मेरा साथै बनाकर हिट हो गए थे। दुनिया के 20  हजार हाथियों की जिंदगी बचने के लिए अभियान मप्र से ही शुरू किया जाये तो बेहतर है ।</p>
<p>  हाथी की असली कीमत तो मुझे नहीं पता लेकिन हमारे यहां कहावत है कि  मरा हुआ हाथी भी सवा लाख का होता है ।  हाथी पालना आसान नहीं होता,क्योंकि इसकी खुराक बहुत है ।  कुम्भकर्ण है हाथी। हाथी पालना सदैव घाटे का सौदा होता होगा शायद इसीलिए कहावत बनी है ' सफेद हाथी पालने की। कुल जमा मप्र में हाथियों की मौत का जो कलंक मप्र के ऊपर लगा है उसे धोने के लिए मप्र में भी एक हाथी अभ्यारण्य बनाया जाना चाहिए, लेकिन इसकी पहल मप्र सरकार करेगी, इसमने मुझे संदेह है।</p>
<p>मप्र में हाथियों की मौत का सच कभी सामने आ पायेगा ये भी कहना कठिन  है । हाथियों की कोई राजनितिक पार्टी नहीं होती इसलिए उनकी मौत को लेकर न कहीं कोई धरना देता है और न प्रदर्शन करता है  ,किन्तु  वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने मामले में सीबीआई जांच की मांग की है और आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने समय पर कदम नहीं उठाए, जिससे हाथियों की मौत को रोका नहीं जा सका। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई की है. इस मामले में टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर गौरव चौधरी और एसडीओ फतेसिंह निनामा को निलंबित कर दिया गया है. मुख्यमंत्री ने वन विभाग को प्रदेश में हाथी टास्क फोर्स बनाने के निर्देश भी दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Nov 2024 16:38:53 +0530</pubDate>
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