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                <title>dharmik news hindi - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>बड़े ही धूमधाम से मनाया गया भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात जिला संवाददाता - रवि द्विवेदी रिंकू </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमेठी। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">अमेठी के रामनगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचिका साध्वी सृष्टि लता रामायणी ने भगवान जन्म की कथा बहुत ही सुन्दर ढंग से वर्णन किया भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से पहले समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए बताया कि भारत वर्ष में समुद्र मंथन के बाद निकला अमृत के चार स्थानों पर छलकता प्रयागराज पहुंचा कथा वाचिका ने बताया कि नाशिक,</p>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन सहित चार स्थानों पर अमृत छलकता हुआ अपने गन्तव्य स्थान पर पहुंचा और अब अमृत का बंटवारे के लिए भगवान श्री हरि ने मोहनी रूप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148966/lord-krishnas-birth-anniversary-celebrated-with-great-pomp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img-20250223-wa0279.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात जिला संवाददाता - रवि द्विवेदी रिंकू </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमेठी। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">अमेठी के रामनगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचिका साध्वी सृष्टि लता रामायणी ने भगवान जन्म की कथा बहुत ही सुन्दर ढंग से वर्णन किया भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से पहले समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए बताया कि भारत वर्ष में समुद्र मंथन के बाद निकला अमृत के चार स्थानों पर छलकता प्रयागराज पहुंचा कथा वाचिका ने बताया कि नाशिक,</p>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन सहित चार स्थानों पर अमृत छलकता हुआ अपने गन्तव्य स्थान पर पहुंचा और अब अमृत का बंटवारे के लिए भगवान श्री हरि ने मोहनी रूप धारण करके अमृत बांटना शुरू किया लेकिन राहू केतु दैत्य छल से अमृत पान कर लिया और आज भी राहू केतु के कारण समस्या होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया की लक्ष्मी जी की उत्पत्ति समुद्र मंथन के कारण हुआ। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि 14 रत्नों का अवतार माना जाता है।कथा के माध्यम से पयोव्रत के बारे में बताया कि मिटृटी का लेपकर नदी में स्नान करके भगवान विष्णु की स्तुति करने से मनोवांछित फल प्राप्त होता है।इन कथाओं के बाद भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए कथा वाचिक रामायणी ने बताया कि कहा गया है कि जब-जब धरती पर अत्यधिक अत्याचार होता है  l</p>
<p style="text-align:justify;">उस अत्याचारी को समाप्त करने के लिए भगवान किसी न किसी रूप में धरती पर जन्म लेकर अत्याचारी का संघार कर विश्व का कल्याण करते हैं ।कंस के अत्याचार से परेशान होकर लोगों ने भगवान से रक्षा की स्तुति की और भगवान कंस की सगी बहन। देवकी के कोख से आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया। भगवान के जन्मोत्सव कथा पर महिलाओं ने सोहर गीत गाये । बीच-बीच में श्रोताओं द्वारा नृत्य किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">भगवान के जन्म पर सुन्दर झांकी प्रस्तुत की गई।बधाई गीत गाये गाये । भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे से हजारों की संख्या में भरे श्रोताओं से पंडाल गूंज उठा ।</p>
<p style="text-align:justify;">जन्मोत्सव को लेकर पंडाल को रंगीन गुब्बारे से सजाया गया। भगवान के जन्म पर माखन मिश्री का प्रसाद बांटा गया।इस कथा के मुख्य अतिथि के रूप में अमेठी भूपति महराज डॉ संजय सिंह,व महारानी डॉ अमिता सिंह मुख्य यजमान राजेश कुमार गुप्ता, बाबूलाल गुप्ता, धर्मेंद्र गुप्ता, जितेंद्र गुप्ता, उमाशंकर मनोज, रमेश गुप्ता,विशाल गुप्ता आदर्श,अभय अर्जित सहित हजारों की संख्या में श्रोता पंडाल में मौजूद रहें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2025 18:20:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृष्णजन्मोत्सव कथा श्रवण कर ..गाए गए मंगलगीत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">स्वतंत्र प्रभात </div>
<div style="text-align:justify;">कोराव,प्रयागराज। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व जन कल्याण सेवा मिशन के तत्वाधान में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन व्यासपीठ पर आसीन सुप्रसिद्ध भागवत प्रवक्ता  श्रद्धेय सुमित कृष्ण जी महाराज द्वारा राजा परीक्षित स्वरूप अजय पांडे,हृदय शंकर पांडे एवं पंडाल में उपस्थित भक्तजनों को भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की कथा का रसपान कराया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कथा का रसपान कर समूचा पंडाल भगवान कृष्ण के रस में डूब कर मत्रमुग्ध हो गया‌। आगे की कथा में भगवान कृष्ण की बाल लीला,माखन चोरी,गोवर्धन कथा,राजा बलि की कथा,हिरण्यकश्यप वध और नरसिंह अवतार की कथा का श्रवण कराया। कथा प्रारंभ सन्मार्गदर्शक यज्ञिकरत्न आचार्य अमितकृष्ण जी महाराज के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148419/mangalgit-sung-by-listening-to-krishna-janmotsava-story"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img-20250209-wa0122.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">स्वतंत्र प्रभात </div>
<div style="text-align:justify;">कोराव,प्रयागराज। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व जन कल्याण सेवा मिशन के तत्वाधान में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन व्यासपीठ पर आसीन सुप्रसिद्ध भागवत प्रवक्ता  श्रद्धेय सुमित कृष्ण जी महाराज द्वारा राजा परीक्षित स्वरूप अजय पांडे,हृदय शंकर पांडे एवं पंडाल में उपस्थित भक्तजनों को भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की कथा का रसपान कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कथा का रसपान कर समूचा पंडाल भगवान कृष्ण के रस में डूब कर मत्रमुग्ध हो गया‌। आगे की कथा में भगवान कृष्ण की बाल लीला,माखन चोरी,गोवर्धन कथा,राजा बलि की कथा,हिरण्यकश्यप वध और नरसिंह अवतार की कथा का श्रवण कराया। कथा प्रारंभ सन्मार्गदर्शक यज्ञिकरत्न आचार्य अमितकृष्ण जी महाराज के मुखारबिंद से हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कथा आयोजन मंडल द्वारा समूचे कथा पंडाल को फूल,माला,एवं गुब्बारे से सजाया गया जिसकी शोभा देखते ही बन रही थी ।संपूर्ण जन्मोत्सव कथा के दौरान सुप्रसिद्ध संगीतकार रिझारिया जी द्वारा बड़े ही सुमधुर स्वर में आरती,मंगलगीत,और सोहर गा कर सभी उपस्थित श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कथा पंडाल में मुख्य रूप से दुर्गा प्रसाद शुक्ला,द्वारिका प्रसाद,श्री भगवान,त्रिलोकीनाथ,संतोष कुमार,हीरा लाल,विनोद प्रसाद,गुलाब केसरी,राकेश गुप्ता,चौधरी गुप्ता,शिवम केसरी,छोटे लाल केसरी,राजू केसरी,जयबाबू,मनोज,केशव प्रसाद सहित हजारों की संख्या में महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Feb 2025 22:55:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाच वर्षों बाद एक बार फिर पाश्च्यात वेशभूषा दिखी कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></p>
<p><br /><strong>मिल्कीपुर अयोध्या।</strong></p>
<p>आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज के 24 वें दीक्षांत समारोह में दीक्षा परिधान के रूप में बंद गले का सूट पूर्व राज्यपाल राम नाईक द्वारा दीक्षांत समारोह से अंग्रेजियत हटाने के निर्णय को चिढ़ाता नजर आ रहा था। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में गाउन पहनने की परंपरा को समाप्त कर दिया था।<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-01/33333333333333333.jpg" alt="" /></p>
<p>  </p>
<p>  जिसका पालन विश्वविद्यालय द्वारा भी 23 वें दीक्षांत समारोह तक बखूबी किया गया। 23 वें दीक्षांत समारोह में विद्वात परिषद के सदस्यों तथा अतिथियों</p>
<h6><strong><span style="color:rgb(22,145,121);background-color:rgb(45,194,107);"><sub>इस</sub></span></strong></h6>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126936/after-five-years-once-again-western-costumes-were-seen-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-01/v22222222222222221.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></p>
<p><br /><strong>मिल्कीपुर अयोध्या।</strong></p>
<p>आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज के 24 वें दीक्षांत समारोह में दीक्षा परिधान के रूप में बंद गले का सूट पूर्व राज्यपाल राम नाईक द्वारा दीक्षांत समारोह से अंग्रेजियत हटाने के निर्णय को चिढ़ाता नजर आ रहा था। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में गाउन पहनने की परंपरा को समाप्त कर दिया था।<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-01/33333333333333333.jpg" alt=""></img></p>
<p> </p>
<p> जिसका पालन विश्वविद्यालय द्वारा भी 23 वें दीक्षांत समारोह तक बखूबी किया गया। 23 वें दीक्षांत समारोह में विद्वात परिषद के सदस्यों तथा अतिथियों ने कुर्ता, धोती, सदरी तथा सिर पर साफे में नजर आए थे। लेकिन इस बार पूर्व राज्यपाल निर्णय को अनदेखा करते हुए विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं प्रबंधक परिषद के सदस्यों के साथ-साथ प्रदेश के कैबिनेट कृषि एवं शिक्षा मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी कोट पैंट में नजर आए , वही विश्वविद्यालय के उपाधि एवं स्वर्ण पदक पाने वाले छात्र-छात्राएं गत वर्ष हुए दीक्षांत समारोह के वेशभूषा में नजर आए। </p>
<h6><strong><span style="color:rgb(22,145,121);background-color:rgb(45,194,107);"><sub>इस संबंध में जब विश्वविद्यालय के रजिस्टर पी एस प्रमानिक से जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम को देखते हुए ऐसा निर्णय लिया गया, धोती, कुर्ता, सदरी की जरूरत गर्मी के मौसम में पडती है, जब उनसे पुनः पूछा गया कि गत वर्ष दिसंबर माह में ही दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया था तो क्या उस वक्त गर्मी थी तो उन्होंने इस पर जवाब ना देते हुए ठंड का ही हवाला देते रहे।</sub></span></strong></h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 May 2023 19:52:08 +0530</pubDate>
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