<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/42456/crude-oil-prices" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>crude oil prices - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/42456/rss</link>
                <description>crude oil prices RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>होर्मुज : सुरक्षा पहले, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार ने हाल ही में जहाज मालिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिप मैनेजरों और भर्ती एजेंसियों को सलाह दी है कि अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती न की जाए। यह कदम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारिक जहाजों पर हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की उस नीति का संकेत है जिसमें विदेशों में काम कर रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि इस निर्णय</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183610/hormuz-security-first-but-challenges-are-no-less"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas10.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार ने हाल ही में जहाज मालिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिप मैनेजरों और भर्ती एजेंसियों को सलाह दी है कि अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती न की जाए। यह कदम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारिक जहाजों पर हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की उस नीति का संकेत है जिसमें विदेशों में काम कर रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि इस निर्णय के दूरगामी आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव भी हो सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। भारत भी अपनी तेल आवश्यकताओं का बड़ा भाग खाड़ी देशों से आयात करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इस मार्ग की सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण होर्मुज क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाज हमलों का शिकार हुए हैं। कुछ घटनाओं में भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए और एक भारतीय सीफेरर की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके बाद समुद्री प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से भारतीय नाविकों की नई तैनाती रोकने की सलाह जारी की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रतिबंध स्थायी नहीं बल्कि परिस्थितियों के सामान्य होने तक एहतियाती कदम माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत दुनिया में सबसे अधिक समुद्री कर्मी उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है। लाखों भारतीय विभिन्न विदेशी जहाजों पर कार्यरत हैं। ऐसे में होर्मुज मार्ग पर तैनाती रुकने से अनेक नाविकों की नई नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं। जहाजरानी कंपनियों को वैकल्पिक क्रू की व्यवस्था करनी पड़ेगी। कुछ भारतीय नाविकों की आय प्रभावित हो सकती है। समुद्री रोजगार बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या प्रभाव</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल यह आदेश केवल भारतीय नाविकों की तैनाती से जुड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यदि होर्मुज मार्ग पूरी तरह बाधित होता है तो भारत सहित पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है। इससे महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। भारत पिछले कुछ वर्षों से तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे कदम भविष्य के संकटों से निपटने में मदद कर सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या यह फैसला उचित है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवीय दृष्टि से देखें तो यह निर्णय उचित प्रतीत होता है। किसी भी आर्थिक लाभ से अधिक महत्वपूर्ण नागरिकों का जीवन है। जब किसी क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति हो और व्यापारिक जहाज लगातार निशाने पर हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब सरकार का पहला दायित्व अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। हालांकि दूसरी ओर यह भी सच है कि लंबे समय तक प्रतिबंध रहने पर भारतीय समुद्री उद्योग और नाविकों के रोजगार पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सरकार को सुरक्षा के साथ-साथ प्रभावित नाविकों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आगे की राह- भारत को केवल अस्थायी प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भविष्य के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं— समुद्री सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना। संकटग्रस्त क्षेत्रों में भारतीय नाविकों के लिए बेहतर सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करना। प्रभावित नाविकों को वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने में सहायता देना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा आयात के स्रोतों में और विविधता लाना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री जोखिमों की निगरानी के लिए आधुनिक तंत्र विकसित करना। होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने का निर्णय सुरक्षा की दृष्टि से एक सतर्क और जिम्मेदार कदम है। यह बताता है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। हालांकि इसके आर्थिक और रोजगार संबंधी प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि क्षेत्रीय तनाव जल्द कम होता है तो यह प्रतिबंध अस्थायी साबित होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यदि स्थिति लंबी खिंचती है तो भारत को समुद्री व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा सुरक्षा और नाविकों के रोजगार के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183610/hormuz-security-first-but-challenges-are-no-less</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/183610/hormuz-security-first-but-challenges-are-no-less</guid>
                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 20:56:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/hindi-divas10.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्रूड के दाम गिरने पर भी सस्ता क्यों नहीं हो रहा तेल?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया में ब्रेंट क्रूड </span>70-75 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में होर्मुज बंद होने के बाद ये </span>115 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर तक पहुंचा था। लेकिन दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर के पेट्रोल पंप पर कीमत वही खड़ी है। तेल अभी भी </span>105 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर तक मिल रहा है जबकि सरकार </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">फीसदी एथेनॉल की मिलावट भी कर रही है। आम आदमी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब  क्रूड के दाम गिर रहे तब तेल सस्ता क्यों नहीं हो रहा है </span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब एक लाइन का नहीं है। इसके पीछे </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">कारण हैं। टैक्स ही</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182106/why-is-oil-not-becoming-cheaper-even-when-crude-prices"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas23.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया में ब्रेंट क्रूड </span>70-75 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में होर्मुज बंद होने के बाद ये </span>115 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर तक पहुंचा था। लेकिन दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर के पेट्रोल पंप पर कीमत वही खड़ी है। तेल अभी भी </span>105 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर तक मिल रहा है जबकि सरकार </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">फीसदी एथेनॉल की मिलावट भी कर रही है। आम आदमी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब  क्रूड के दाम गिर रहे तब तेल सस्ता क्यों नहीं हो रहा है </span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब एक लाइन का नहीं है। इसके पीछे </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">कारण हैं। टैक्स ही असली खेलता है- भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत का </span>50-55% <span lang="hi" xml:lang="hi">हिस्सा टैक्स होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इसमें केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और राज्य का वैट शामिल है। </span>2020 <span lang="hi" xml:lang="hi">में जब कोरोना में क्रूड </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर पर गिर गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी थी। नतीजा ये हुआ कि क्रूड सस्ता होने का फायदा पंप तक नहीं पहुंचा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भी वही पैटर्न है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सरकार अगर चाहे तो एक्साइज घटाकर तुरंत </span>5-7 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर राहत दे सकती है। लेकिन सरकार ऐसा नहीं करती क्योंकि तेल से मिलने वाला टैक्स राजकोष की सबसे बड़ी आमदनी है। बजट बैलेंस रखना है तो टैक्स घटाना मुश्किल है। कई बार होता ये है कि क्रूड गिरता है तो सरकार टैक्स बढ़ा देती है। क्रूड बढ़ता है तो कंपनियां कीमत नहीं बढ़ा पातीं। बीच में जनता फंस जाती है। तेल कंपनियों का घाटा और अंडर-रिकवरी- फरवरी </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में जब होर्मुज बंद हुआ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रूड </span>72 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर से बढ़कर </span>115 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर पर चला गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> लेकिन चुनाव और होर्मुज संकट के कारण सरकारी तेल कंपनियों ने कीमत नहीं बढ़ाई। नतीजा ये हुआ कि कंपनियों को प्रति लीटर </span>25 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए से ज्यादा का नुकसान होने लगा। </span>IMF <span lang="hi" xml:lang="hi">ने भी कहा था कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर नहीं रखी जा सकतीं। अब जब क्रूड गिरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंपनियां पहले अपने घाटे की भरपाई कर रही हैं। इसलिए क्रूड </span>70 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर पर आने के बाद भी कंपनियां </span>2-3 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर की कटौती कर रही हैं</span>, 10-15 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए की नहीं। डॉलर-रुपया का खेल- भारत </span>85% <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रूड आयात करता है। भुगतान डॉलर में होता है। अगर रुपया कमजोर है तो क्रूड भले सस्ता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के लिए महंगा पड़ता है। अभी </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर </span>72 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए के आसपास है। इसलिए क्रूड में </span>10% <span lang="hi" xml:lang="hi">गिरावट का असर सिर्फ </span>3-4% <span lang="hi" xml:lang="hi">ही दिखता है। जब रुपया मजबूत होता है और क्रूड गिरता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब ही असली राहत मिलती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर ये दोनों फैक्टर साथ आएं तो पेट्रोल </span>6-7 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर सस्ता हो सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">टाइम लैग और इन्वेंट्री का गणित- तेल कंपनियां क्रूड </span>30-45 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन पहले खरीदती हैं। यानी आज जो क्रूड </span>70 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर पर मिल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो शायद मई के रेट पर खरीदा गया है जब क्रूड </span>90 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर पर था। दूसरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंपनियां फेजवाइज कीमतें बढ़ाती-घटाती हैं। </span>11 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन में </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">बार बढ़ोतरी का पैटर्न </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में देखा गया। अब गिरावट भी धीरे-धीरे पास ऑन हो रही है। दिल्ली में </span>9 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन में पेट्रोल </span>78 <span lang="hi" xml:lang="hi">पैसे सस्ता हुआ है। तो कब सस्ता होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर ब्रेंट क्रूड कई हफ्तों तक </span>80-85 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर के दायरे में रहा तो पेट्रोल-डीजल </span>2-5 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर सस्ता हो सकता है। लेकिन शर्त ये है कि सरकार एक्साइज न बढ़ाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपया स्थिर रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और होर्मुज जैसे नए संकट न आएं। क्रूड का दाम गिरना जरूरी है</span>, </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन काफी नहीं। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत </span>3 <span lang="hi" xml:lang="hi">चीजें तय करती हैं:  क्रूड का इंटरनेशनल रेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपया-डॉलर का रेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का टैक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक तीनों साथ में फेवर में नहीं आते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंप पर बोर्ड वही रहेगा। इसलिए अगली बार जब न्यूज में "क्रूड </span>10% <span lang="hi" xml:lang="hi">गिरा" दिखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो समझ लेना कि पंप पर असर सिर्फ </span>1-2 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए का आएगा। बाकी </span>8 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए टैक्स और घाटे की भरपाई में चले जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182106/why-is-oil-not-becoming-cheaper-even-when-crude-prices</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182106/why-is-oil-not-becoming-cheaper-even-when-crude-prices</guid>
                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 16:56:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/hindi-divas23.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज पर ईरान की हुकूमत: दुनिया की नब्ज पर हाथ</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL msg7345850882644653164">
<div>
<div lang="en-us" xml:lang="en-us">
<div class="m_7345850882644653164WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज को खोल दिया गया है। युद्ध के बाद पहली बार यहां से </span>35<span lang="hi" xml:lang="hi">  पोत पास हुए जिसमें </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">  पोत भारत आ रहे हैं। इनमें कच्चा तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलपीजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उर्वरक व अन्य सामान है। लेकिन ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज पर उसकी हुकूमत चलती रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे छोटा लेकिन सबसे खतरनाक गलियारा है। चौड़ाई सिर्फ </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi">  किलोमीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी से होकर हर दिन दुनिया के </span>20%<span lang="hi" xml:lang="hi">  तेल और </span>30% LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरती है। मार्च </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  में ईरान ने इस गलियारे को</span>700</p></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182049/irans-rule-on-hormuz-has-its-hand-on-the-pulse"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas21.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL msg7345850882644653164">
<div>
<div lang="en-us" xml:lang="en-us">
<div class="m_7345850882644653164WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज को खोल दिया गया है। युद्ध के बाद पहली बार यहां से </span>35<span lang="hi" xml:lang="hi"> पोत पास हुए जिसमें </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> पोत भारत आ रहे हैं। इनमें कच्चा तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलपीजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उर्वरक व अन्य सामान है। लेकिन ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज पर उसकी हुकूमत चलती रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे छोटा लेकिन सबसे खतरनाक गलियारा है। चौड़ाई सिर्फ </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोमीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी से होकर हर दिन दुनिया के </span>20%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तेल और </span>30% LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरती है। मार्च </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में ईरान ने इस गलियारे को बंद कर दिया। </span>700<span lang="hi" xml:lang="hi"> टैंकर फंस गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर पार कर गया। ये सिर्फ युद्ध की घोषणा नहीं थी। ये ईरान का ये कहना था कि "दुनिया की ऊर्जा की नब्ज मेरे हाथ में है"। होर्मुज क्या है और ईरान इसे क्यों चाहता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब</span>, UAE, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुवैत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कतर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इराक का पूरा तेल इसी रास्ते से जाता है। ईरान का दक्षिणी तट इस जलडमरूमध्य के उत्तर में है। भूगोल ने ईरान को स्ट्रेटेजिक लीवरेज दिया है। फरवरी </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के जरिए - पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी बना दी। अब नियम ये है: होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज को </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> सवालों का घोषणा पत्र जमा करना होगा। माल क्या है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मालिक कौन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रू की नेशनलिटी क्या है। जो नहीं मानेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस पर मिसाइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रोन हमला या कब्जे का खतरा है। मार्च </span>2026: <span lang="hi" xml:lang="hi">जब ईरान ने नल बंद कर दिया- </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को ईरान ने आधिकारिक रूप से होर्मुज बंद करने का ऐलान कर दिया। बंद होते ही</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य तेल यातायात में </span>86%<span lang="hi" xml:lang="hi"> गिरावट आई</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक मार्च को </span>19.8<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलियन बैरल/दिन की जगह सिर्फ </span>2.8<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलियन बैरल गुजरे। </span>706<span lang="hi" xml:lang="hi"> गैर-ईरानी टैंकर कतार में फंस गए। ब्रेंट क्रूड </span>10%<span lang="hi" xml:lang="hi"> उछलकर </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर पर पहुंच गया। ईरान ने कहा कि ये बंद सिर्फ अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इजरायल और यूरोपीय जहाजों के लिए है। चीन के झंडे वाले जहाजों को छूट दी गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या ईरान कानूनी तौर पर ऐसा कर सकता है</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसका छोटा सा जवाब है नहीं। </span>UNCLOS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि की धारा </span>37-44<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में सभी देशों को "ट्रांजिट पैसेज" का अधिकार है। न ईरान और न ओमान एकतरफा तरीके से इसे बंद कर सकते हैं। समुद्री कानून विशेषज्ञ रेड्जा जकारिया कहते हैं कि ईरान आत्मरक्षा का हवाला दे सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगर वो नेविगेशन रोकता है तो ये </span>UNCLOS <span lang="hi" xml:lang="hi">का उल्लंघन होगा। लेकिन असलियत में ईरान सैन्य शक्ति और भौगोलिक स्थिति से यातायात को प्रभावित कर रहा है। ये कानूनी संप्रभुता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन "डिफैक्टो कंट्रोल" है। ईरान ने अब "टोल-पास" सिस्टम शुरू कर दिया है। जहाजों को </span>PGSA <span lang="hi" xml:lang="hi">से पास लेना होगा। रिपोर्ट्स कहती हैं कि सुरक्षित गुजरने के लिए जहाजों से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख डॉलर तक मांगे जा रहे हैं। ईरान ने इनकार किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अमेरिका ने जहाजों को चेतावनी दी है कि टोल न दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे </span>IRGC <span lang="hi" xml:lang="hi">को फंड मिलेगा। दुनिया पर असर-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तेल और गैस: भारत अपनी जरूरत का </span>90%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तेल आयात करता है। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>160<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर का तेल आयात हुआ था। होर्मुज बंद होने से भारत सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। यूरोप: कतर ने </span>LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्पादन रोका तो यूरोपीय गैस कीमतें </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> बढ़ गईं। </span>LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर का किराया </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख डॉलर/दिन से ऊपर चला गया। अफ्रीका- </span>UN <span lang="hi" xml:lang="hi">महासचिव गुटेरेश ने चेताया कि अफ्रीका के तेल और उर्वरक आयात का </span>13%<span lang="hi" xml:lang="hi"> होर्मुज से आता है। बंद रहा तो महंगाई और खाद्य संकट बढ़ेगा। लेबनान में सीजफायर के बाद ईरान ने </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन के लिए होर्मुज खोल दिया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ये सिर्फ सीजफायर की अवधि के लिए है। भारत के लिए क्या मायने हैं- भारत के लिए होर्मुज "लाइफलाइन" है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">विकल्प सीमित हैं: केप ऑफ गुड होप से रास्ता </span>15 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन लंबा और </span>20% <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगा पड़ता है। रणनीति: चाबहार पोर्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के साथ डिप्लोमेसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाना। लेकिन ये सब शॉर्ट टर्म सॉल्यूशन हैं। अगर होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल स्थायी हो गया तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा हर </span>6 <span lang="hi" xml:lang="hi">महीने में दांव पर लगेगी। होर्मुज पर ईरान की हुकूमत कानून से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूगोल और मिसाइल से चलती है। वो जानता है कि दुनिया तेल के बिना </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन नहीं चल सकती। इसलिए वो कभी पूरी तरह बंद नहीं करेगा। वो सिर्फ "नल" को धीमा-तेज करेगा ताकि अमेरिका झुके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल महंगा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसकी बात मानी जाए। ये </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं सदी की नाकेबंदी है। बंदूक की जगह टोल-पास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध की जगह </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">सवालों का फॉर्म। और दांव पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था।</span></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182049/irans-rule-on-hormuz-has-its-hand-on-the-pulse</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182049/irans-rule-on-hormuz-has-its-hand-on-the-pulse</guid>
                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 16:08:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/hindi-divas21.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बढ़ती कीमतों से बिगड़ी मध्यवर्गीय सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मानवी अहंकार के परिणाम स्वरूप अमेरिका ईरान इजरायल और यूक्रेन रूस युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगभग विश्व के हर देश में बढ़ गए हैं। इसी परिपेक्ष में भारत में भी बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों के करण भारतीय मध्यम वर्गीय अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संरचना बृहद रूप में प्रभावित हुई है । विश्व स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और शक्ति-संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा मध्य-पूर्व में इजरायल से जुड़े संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180351/middle-class-socio-economic-system-deteriorated-due-to-rising-prices"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(1)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मानवी अहंकार के परिणाम स्वरूप अमेरिका ईरान इजरायल और यूक्रेन रूस युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगभग विश्व के हर देश में बढ़ गए हैं। इसी परिपेक्ष में भारत में भी बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों के करण भारतीय मध्यम वर्गीय अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संरचना बृहद रूप में प्रभावित हुई है । विश्व स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और शक्ति-संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा मध्य-पूर्व में इजरायल से जुड़े संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने लगभग प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने विशेष रूप से भारतीय मध्यम वर्ग की आर्थिक और सामाजिक संरचना को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल केवल वाहन चलाने के साधन नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ हैं। परिवहन, कृषि, उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र लगभग सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन पर निर्भर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डीजल की कीमतों में वृद्धि का सबसे अधिक प्रभाव परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। देश में अधिकांश माल ढुलाई ट्रकों के माध्यम से होती है। जब डीजल महंगा होता है, तो परिवहन लागत बढ़ जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि खाद्यान्न, फल-सब्जियां, दूध, दालें, निर्माण सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें स्वतः बढ़ने लगती हैं। व्यापारी अतिरिक्त लागत का भार अंततः उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं। इस प्रकार महंगाई का एक ऐसा चक्र प्रारंभ हो जाता है, जिससे सामान्य नागरिक बच नहीं पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय मध्यम वर्ग पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने उसकी मासिक आय और व्यय के संतुलन को और बिगाड़ दिया है। जिन परिवारों के पास निजी वाहन हैं, उनके लिए कार्यालय, विद्यालय और अन्य आवश्यक यात्राओं का खर्च बढ़ गया है। वहीं रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ने घरेलू बजट को प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप परिवारों को अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच समझौता करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">महंगाई का सामाजिक प्रभाव भी कम गंभीर नहीं है। जब आय स्थिर हो और खर्च लगातार बढ़ता जाए, तो परिवारों में तनाव बढ़ने लगता है। आर्थिक दबाव पारिवारिक संबंधों, सामाजिक सहभागिता और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। मध्यम वर्ग, जो समाज की स्थिरता और विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, स्वयं असुरक्षा और भविष्य की चिंताओं से घिर जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि क्षेत्र भी इससे प्रभावित हुआ है। डीजल से चलने वाले पंप, ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की लागत बढ़ने से खेती महंगी हो गई है। उत्पादन लागत बढ़ने पर किसान अपनी उपज का उचित मूल्य चाहते हैं, जिससे बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस प्रकार महंगाई का प्रभाव खेत से लेकर थाली तक दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्थशास्त्री लंबे समय से कहते रहे हैं कि ऊर्जा की कीमतें किसी भी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने अनेक अवसरों पर ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया था। वहीं अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने भी विकास को केवल आय वृद्धि नहीं बल्कि जीवन-स्तर की गुणवत्ता से जोड़कर देखा है। यदि बढ़ती महंगाई लोगों की बुनियादी आवश्यकताओं को प्रभावित करती है, तो विकास का वास्तविक लाभ समाज तक नहीं पहुंच पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्ष की राजनीति के स्थान पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में और अधिक प्रयास करने होंगे। सौर ऊर्जा, जैव ईंधन और विद्युत वाहनों को बढ़ावा देकर पेट्रोलियम पर निर्भरता कम की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती पेट्रोलियम कीमतें केवल आर्थिक समस्या नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक स्थिरता और जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ी हुई हैं। युद्धों और वैश्विक तनावों की कीमत अंततः आम नागरिक चुकाता है। इसलिए विश्व शांति, ऊर्जा सुरक्षा और संतुलित आर्थिक नीतियां ही मध्यम वर्ग को राहत प्रदान कर सकती हैं। जब तक पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक महंगाई का दबाव भारतीय मध्यम वर्ग की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करता रहेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180351/middle-class-socio-economic-system-deteriorated-due-to-rising-prices</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180351/middle-class-socio-economic-system-deteriorated-due-to-rising-prices</guid>
                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:43:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/images-%281%292.jpg"                         length="78036"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में, भारत क्यों बना हुआ है मजबूत?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया इस समय आर्थिक अनिश्चितता के ऐसे दौर से गुजर रही है जिसमें युद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा संकट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारिक अस्थिरता और राजनीतिक तनाव एक साथ वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चिंता में डाल दिया है। तेल और गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। समुद्री व्यापार मार्गों पर संकट गहराता जा रहा है। उत्पादन लागत बढ़ रही है और इसका प्रभाव गरीब तथा विकासशील देशों पर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में विश्व बैंक ने चेतावनी दी है</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180129/why-india-remains-strong-in-times-of-global-economic-instability"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/economy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया इस समय आर्थिक अनिश्चितता के ऐसे दौर से गुजर रही है जिसमें युद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा संकट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारिक अस्थिरता और राजनीतिक तनाव एक साथ वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चिंता में डाल दिया है। तेल और गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। समुद्री व्यापार मार्गों पर संकट गहराता जा रहा है। उत्पादन लागत बढ़ रही है और इसका प्रभाव गरीब तथा विकासशील देशों पर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि यदि यह संकट लंबा चला तो वैश्विक विकास दर में भारी गिरावट आ सकती है। इसके बावजूद भारत को दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 2026 में ऊर्जा कीमतों में लगभग 24 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। यह वृद्धि केवल सामान्य बाजार कारणों से नहीं बल्कि युद्ध और आपूर्ति संकट से जुड़ी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के समुद्री कच्चे तेल व्यापार का लगभग 35 प्रतिशत गुजरता है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि संघर्ष और लंबा खिंचता है तो ब्रेंट तेल की औसत कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा संकट का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवहन महंगा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योगों की लागत बढ़ती है और खाद्य पदार्थों की कीमतें भी ऊपर चली जाती हैं। विश्व बैंक के अनुसार उर्वरकों की कीमतों में 31 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। यूरिया की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत उछाल का अनुमान व्यक्त किया गया है। इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होगा और दुनिया में खाद्य संकट गहरा सकता है। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो लगभग 45 मिलियन अतिरिक्त लोग खाद्य असुरक्षा की स्थिति में पहुंच सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यूरोप की स्थिति भी चिंता पैदा कर रही है। यूरोपीय आयोग ने अनुमान लगाया है कि 2026 में यूरो क्षेत्र की विकास दर घटकर लगभग 0.9 प्रतिशत रह सकती है। बढ़ती महंगाई के कारण ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना है। इससे उद्योगों में निवेश कम होगा और उपभोक्ता खर्च भी प्रभावित होगा। यूरोप पहले ही ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर रहा है और पश्चिम एशिया संकट ने उसकी कठिनाइयों को और बढ़ा दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अफ्रीका के कई देशों में भी हालात चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। अफ्रीकी विकास बैंक ने कहा है कि ईंधन और खाद्य कीमतों में वृद्धि के कारण 2026 में अफ्रीका की आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है। कई गरीब देशों पर पहले से भारी कर्ज है और अब बढ़ती महंगाई ने उनकी वित्तीय स्थिति को और कमजोर कर दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है। विश्व बैंक ने भारत की विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह दर दुनिया की अधिकांश बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से कहीं अधिक है। भारत की मजबूती का सबसे बड़ा कारण उसकी घरेलू मांग है। देश की बड़ी आबादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बढ़ता मध्यम वर्ग और सेवा क्षेत्र की तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधारभूत संरचना और विनिर्माण क्षेत्र में तेज निवेश हुआ है। सरकार ने सड़क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बंदरगाह और हवाई अड्डों के विकास पर बड़े स्तर पर खर्च किया है। इससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है। दूसरी ओर सेवा क्षेत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशी मुद्रा कमाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि भारत पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। यदि तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो इसका सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ेगा। इससे व्यापार घाटा बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है। महंगाई बढ़ने पर आम जनता की क्रय शक्ति प्रभावित होगी। परिवहन महंगा होने से खाद्य पदार्थों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय रिजर्व बैंक के सामने भी कठिन चुनौती होगी। यदि महंगाई बढ़ती है तो ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं। इससे उद्योगों को महंगा कर्ज मिलेगा और निवेश की गति धीमी हो सकती है। दूसरी ओर यदि ब्याज दरें कम रखी जाती हैं तो महंगाई नियंत्रण से बाहर जा सकती है। इसलिए संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व बैंक ने यह भी कहा है कि दक्षिण एशिया की विकास दर 2026 में घटकर लगभग 6.3 प्रतिशत रह सकती है। इसका कारण यह है कि दक्षिण एशियाई देश ऊर्जा आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं। तेल की कीमतें बढ़ने से इन देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत ने इस चुनौती से निपटने के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता बढ़ाने की दिशा में काम तेज किया है। सौर ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पवन ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं पर तेजी से निवेश हो रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में आयातित तेल पर निर्भरता कम की जाए। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की नीति भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक व्यापार पर भी इस संकट का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण माल ढुलाई महंगी हो गई है। बीमा लागत बढ़ गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रफ्तार धीमी पड़ रही है। कई कंपनियां अब अपने उत्पादन केंद्रों को एक ही क्षेत्र में रखने के बजाय अलग अलग देशों में बांटने की रणनीति अपना रही हैं। भारत इस स्थिति का लाभ उठा सकता है क्योंकि अनेक विदेशी कंपनियां चीन के विकल्प के रूप में भारत की ओर देख रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के कई देशों में शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। सोने की कीमतों में वृद्धि इसका संकेत है। अनिश्चितता के दौर में पूंजी बाजारों में उतार चढ़ाव बढ़ना सामान्य माना जाता है। लेकिन लगातार अस्थिरता निवेश और रोजगार दोनों को प्रभावित करती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष दोनों ने चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा चला तो वैश्विक विकास दर में भारी गिरावट आ सकती है। इसका असर केवल तेल आयातक देशों पर ही नहीं बल्कि निर्यातक देशों पर भी पड़ेगा। उत्पादन कम होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपभोग घटेगा और वैश्विक मांग कमजोर पड़ जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन परिस्थितियों में भारत के सामने अवसर और चुनौती दोनों मौजूद हैं। एक ओर दुनिया भारत को स्थिर और भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में देख रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर ऊर्जा आयात पर निर्भरता और महंगाई का दबाव चिंता का विषय है। यदि भारत घरेलू उत्पादन बढ़ाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा आत्मनिर्भरता मजबूत करने और निर्यात क्षमता सुधारने में सफल होता है तो वह इस संकट के बीच भी मजबूत स्थिति बनाए रख सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह समय केवल आर्थिक आंकड़ों का नहीं बल्कि नीतिगत दूरदर्शिता का भी है। दुनिया जिस अस्थिरता से गुजर रही है उसमें वे देश आगे निकलेंगे जो ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्पादन और मानव संसाधन के क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीति अपनाएंगे। भारत के पास जनसंख्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार और तकनीकी क्षमता जैसी बड़ी ताकतें हैं। यदि इनका सही उपयोग किया गया तो वैश्विक संकट के बीच भी भारत आर्थिक स्थिरता और विकास का नया उदाहरण बन सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180129/why-india-remains-strong-in-times-of-global-economic-instability</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180129/why-india-remains-strong-in-times-of-global-economic-instability</guid>
                <pubDate>Wed, 27 May 2026 18:09:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/economy.jpg"                         length="84409"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Reliance Shares Fall: रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर धड़ाम से गिरे, कंपनी ने रूसी तेल रिपोर्ट को बताया गलत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Reliance Shares Fall: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयरों में मंगलवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। कंपनी का शेयर 4.39% लुढ़ककर 1,508.90 रुपये पर बंद हुआ। बाजार में शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि यह गिरावट ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि रूसी कच्चे तेल से लदे तीन जहाज जामनगर स्थित रिलायंस की रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं।</p>
<p>हालांकि, कंपनी ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है और साफ किया है कि शेयर में आई गिरावट का कारण यह रिपोर्ट नहीं है।</p>
<h2><strong>रूसी तेल</strong></h2>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165390/reliance-shares-fall-reliance-industries-shares-fell-439-the-company"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/reliance-shares-fall.jpg" alt=""></a><br /><p>Reliance Shares Fall: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयरों में मंगलवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। कंपनी का शेयर 4.39% लुढ़ककर 1,508.90 रुपये पर बंद हुआ। बाजार में शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि यह गिरावट ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि रूसी कच्चे तेल से लदे तीन जहाज जामनगर स्थित रिलायंस की रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं।</p>
<p>हालांकि, कंपनी ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है और साफ किया है कि शेयर में आई गिरावट का कारण यह रिपोर्ट नहीं है।</p>
<h2><strong>रूसी तेल इंपोर्ट को लेकर क्या थी अटकलें?</strong></h2>
<p>ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद बाजार में यह चर्चा तेज हो गई थी कि रूसी तेल आयात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव का असर रिलायंस के शेयर पर पड़ा है। हालांकि रिलायंस ने इन अटकलों को खारिज कर दिया।</p>
<p>कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में कहा कि जामनगर रिफाइनरी को पिछले तीन हफ्तों में रूस से तेल की कोई खेप नहीं मिली है और न ही जनवरी महीने में रूस से कच्चे तेल की किसी डिलीवरी की उम्मीद है। कंपनी ने रिपोर्ट को “पूरी तरह से झूठा” करार दिया।</p>
<h2><strong>वैश्विक घटनाओं से बढ़ा शेयर पर दबाव</strong></h2>
<p>विशेषज्ञों के मुताबिक रिलायंस के शेयरों पर दबाव की एक बड़ी वजह वैश्विक भू-राजनीतिक हालात भी हो सकते हैं। शनिवार को अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी को बंदी बनाए जाने की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल देखने को मिली।</p>
<p>वेनेजुएला दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात तेल भंडार है। ऐसे में अमेरिका-वेनेजुएला तनाव बढ़ने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता की आशंका जताई जा रही है।</p>
<h2><strong>तेल कीमतों की अस्थिरता से रिफाइनर्स पर असर की चिंता</strong></h2>
<p>बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका-वेनेजुएला संघर्ष और गहराता है तो कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसका सीधा असर तेल रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है, जिससे रिलायंस जैसे बड़े रिफाइनर्स के शेयरों पर दबाव बन सकता है।</p>
<h2><strong>कंपनी ने किया स्पष्ट</strong></h2>
<p>रिलायंस इंडस्ट्रीज ने दोहराया है कि शेयरों में आई गिरावट का संबंध रूसी तेल इंपोर्ट से जुड़ी खबरों से नहीं है। कंपनी का कहना है कि निवेशकों को भ्रामक रिपोर्टों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/165390/reliance-shares-fall-reliance-industries-shares-fell-439-the-company</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/165390/reliance-shares-fall-reliance-industries-shares-fell-439-the-company</guid>
                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 10:26:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/reliance-shares-fall.jpg"                         length="100671"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        