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                <title>rbi - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>जल्दी शुरू हो सकते हैं प्लास्टिक के नोट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>संवाददाता सचिन बाजपेई </strong></p>
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<div><strong>नई दिल्ली,</strong> रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) जल्द ही प्लास्टिक (पॉलीमर) के नोट जारी करने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है। कागजी नोटों की बढ़ती मांग, मुद्रण लागत में तेज वृद्धि और जल्द खराब होने वाली करेंसी को ध्यान में रखते हुए आरबीआई एक दशक पुरानी योजना को पुनर्जीवित कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही 10 और 20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है।</div>
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<div><strong>आरबीआई की योजना और पृष्ठभूमि</strong></div>
<div>आरबीआई के पिछले दो बोर्ड मीटिंग्स (पटना और मुंबई) में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180346/plastic-notes-may-be-introduced-soon"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/plastic-notes.webp" alt=""></a><br /><p><strong>संवाददाता सचिन बाजपेई </strong></p>
<div>
<div><strong>नई दिल्ली,</strong> रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) जल्द ही प्लास्टिक (पॉलीमर) के नोट जारी करने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है। कागजी नोटों की बढ़ती मांग, मुद्रण लागत में तेज वृद्धि और जल्द खराब होने वाली करेंसी को ध्यान में रखते हुए आरबीआई एक दशक पुरानी योजना को पुनर्जीवित कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही 10 और 20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>आरबीआई की योजना और पृष्ठभूमि</strong></div>
<div>आरबीआई के पिछले दो बोर्ड मीटिंग्स (पटना और मुंबई) में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई है। प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई एक पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा करने वाला है, जिसमें पॉलीमर नोटों को आम जनता के बीच परीक्षण के लिए जारी किया जाएगा। यह योजना 2012 में शुरू की गई थी, जब पांच शहरों में 10 के पॉलीमर नोटों का पायलट चलाया गया था। लेकिन उस समय एटीएम मशीनें इन मोटे नोटों को हैंडल नहीं कर पाती थीं, जिसके कारण योजना रोक दी गई। अब तकनीकी प्रगति के साथ यह समस्या हल हो चुकी है।</div>
<div> </div>
<div><strong>क्यों ला रहा है आरबीआई प्लास्टिक नोट?</strong></div>
<div>-बढ़ती करेंसी डिमांड: डिजिटल पेमेंट्स के बावजूद भौतिक करेंसी की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में करेंसी इन सर्कुलेशन 42.86 ट्रिलियन के करीब पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में 11.5% अधिक है।</div>
<div>-मुद्रण लागत का बोझ:वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने पर 6,373 करोड़ खर्च हुए। कागजी नोट जल्दी गंदे और फट जाते हैं, जिससे हर साल अरबों नोट वापस लिए जाते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>टिकाऊपन: </strong>पॉलीमर नोट कागजी नोटों की तुलना में 3-4 गुना अधिक टिकाऊ होते हैं। ये पानी, गंदगी और फटने से ज्यादा सुरक्षित रहते हैं।</div>
<div><strong>जालसाजी रोकथाम:</strong> पॉलीमर नोटों में बेहतर सिक्योरिटी फीचर्स लगाए जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों को बनाना और मुश्किल हो जाएगा।</div>
<div>पॉलीमर नोट क्या हैं?</div>
<div>पॉलीमर नोट प्लास्टिक जैव-आधारित पॉलीप्रोपाइलीन या समान सामग्री से बने होते हैं। दुनिया भर में 60 से ज्यादा देश (ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन आदि) पहले से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। ये नोट लंबे समय तक चलते हैं, जिससे लंबे समय में सरकार और आरबीआई को लागत बचत होती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>चरणबद्ध रणनीति</strong></div>
<div>आरबीआई तुरंत सभी नोटों को प्लास्टिक में बदलने की योजना नहीं बना रहा है। पहले चरण में छोटे मूल्यवर्ग (₹10 और ₹20) के नोटों का पायलट लॉन्च होगा। पायलट की सफलता के बाद ही बड़े नोटों पर विचार किया जाएगा। एटीएम और मुद्रण प्रक्रिया को भी अपडेट किया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div><strong>विशेषज्ञों की राय</strong></div>
<div>विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, शुरुआती चरण में जनता को नई नोटों की आदत डालने और सप्लाई चेन में बदलाव की चुनौतियां भी होंगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में यह पहल करेंसी मैनेजमेंट को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।अभी देखना बाकी है कि पायलट प्रोजेक्ट कब शुरू होता है और आम लोगों की प्रतिक्रिया क्या होती है। अगर सब ठीक रहा तो आने वाले समय में आपके बटुए में प्लास्टिक के नोट भी दिख सकते हैं।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:38:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bank Holiday: कल 18 दिसंबर को बैंक रहेंगे बंद, जानें क्या है वजह </title>
                                    <description><![CDATA[<p>Bank Holiday: कल यानी 18 दिसंबर 2025 को मेघालय में बैंक बंद रहने वाले हैं। खासी भाषा के महान कवि और समाज सुधारक यू सोसो थाम की पुण्यतिथि के कारण राज्य में सभी सरकारी और प्राइवेट सेक्टर बैंकों में अवकाश घोषित किया गया है। इस दिन मेघालय में श्रद्धा और सम्मान के साथ उनकी स्मृति में साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।</p>
<p>अगर आप दिसंबर महीने में बैंक से जुड़े जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले छुट्टियों की सूची देख लेना जरूरी है। 18 दिसंबर (गुरुवार) को मेघालय में बैंक बंद रहेंगे, जबकि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163549/bank-holiday-banks-will-remain-closed-tomorrow-on-18th-december"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/bank-holiday-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>Bank Holiday: कल यानी 18 दिसंबर 2025 को मेघालय में बैंक बंद रहने वाले हैं। खासी भाषा के महान कवि और समाज सुधारक यू सोसो थाम की पुण्यतिथि के कारण राज्य में सभी सरकारी और प्राइवेट सेक्टर बैंकों में अवकाश घोषित किया गया है। इस दिन मेघालय में श्रद्धा और सम्मान के साथ उनकी स्मृति में साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।</p>
<p>अगर आप दिसंबर महीने में बैंक से जुड़े जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले छुट्टियों की सूची देख लेना जरूरी है। 18 दिसंबर (गुरुवार) को मेघालय में बैंक बंद रहेंगे, जबकि इसके अगले दिन 19 दिसंबर (शुक्रवार) को गोवा लिबरेशन डे के अवसर पर गोवा में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी।</p>
<p>इसके बाद 20 दिसंबर (शनिवार) को सिक्किम में लोसूंग/नामसूंग त्योहार के चलते बैंक बंद रहेंगे। 21 दिसंबर (रविवार) को साप्ताहिक अवकाश रहेगा और 22 दिसंबर (सोमवार) को फिर से सिक्किम में लोसूंग/नामसूंग त्योहार की वजह से बैंक बंद रहेंगे।</p>
<p>क्रिसमस से पहले और बाद में भी कई राज्यों में बैंक अवकाश रहेगा। 24 दिसंबर (बुधवार) को नागालैंड, मेघालय और मिजोरम में क्रिसमस ईव की छुट्टी होगी। इसके बाद 25 दिसंबर (गुरुवार) को क्रिसमस के मौके पर पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे। वहीं 26 दिसंबर (शुक्रवार) को भी नागालैंड, मेघालय और मिजोरम में बैंकिंग सेवाएं नहीं मिलेंगी, जिससे इन राज्यों में लगातार तीन दिन बैंक बंद रहेंगे।</p>
<p>महीने के आखिरी सप्ताह में 27 दिसंबर को चौथा शनिवार और 28 दिसंबर को रविवार होने के कारण देशभर में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा 30 दिसंबर (मंगलवार) को मेघालय में स्वतंत्रता सेनानी यू कियांग नांगबह की पुण्यतिथि के कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं 31 दिसंबर (बुधवार) को मिजोरम और मणिपुर में न्यू ईयर ईव और इमोइनु इराटपा त्योहार के चलते बैंकों में अवकाश रहेगा।</p>
<p>हालांकि, इन सभी छुट्टियों के दौरान ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। बैंक शाखाओं से जुड़े कामों के लिए पहले से योजना बनाना बेहतर रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 20:51:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RBI Update: 2000 रुपये के नोट को लेकर आई बड़ी अपडेट, आरबीआई ने दी ये जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>RBI Update: </strong>2000 रुपये के नोट को लेकर बड़ी अपडेट सामने आ रही है। साल 2023 में सर्कुलेशन से बाहर किए गए 2000 रुपये के गुलाबी नोटों की पूरी वापसी अब तक नहीं हो सकी है। </p>
<p>जानकारी के मुताबिक, तीन साल से ज्यादा समय बीतने के बाद हालांकि, ज्यादातर नोट केंद्रीय बैंक के पास वापस आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी भी 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यू के ये बड़े नोट लोगों के पास मौजूद हैं। RBI On 2000 Rupee Note</p>
<p><strong>नोटों की वापसी</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, 19 मई 2023 को RBI ने 2000 रुपये के करेंसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158718/rbi-update-big-update-regarding-rs-2000-note-rbi-gave"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/latest-news---2025-11-02t105022.383.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>RBI Update: </strong>2000 रुपये के नोट को लेकर बड़ी अपडेट सामने आ रही है। साल 2023 में सर्कुलेशन से बाहर किए गए 2000 रुपये के गुलाबी नोटों की पूरी वापसी अब तक नहीं हो सकी है। </p>
<p>जानकारी के मुताबिक, तीन साल से ज्यादा समय बीतने के बाद हालांकि, ज्यादातर नोट केंद्रीय बैंक के पास वापस आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी भी 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यू के ये बड़े नोट लोगों के पास मौजूद हैं। RBI On 2000 Rupee Note</p>
<p><strong>नोटों की वापसी</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, 19 मई 2023 को RBI ने 2000 रुपये के करेंसी नोट को सर्कुलेशन से बाहर करने का ऐलान किया था। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घोषणा के 3.5 साल के बाद लोग अभी भी 5,817 करोड़ रुपये मूल्य के 2,000 रुपये के नोट दबाए बैठे हैं यानी ये अी भी बाजार में बने हुए हैं, जिनकी वापसी का केंद्रीय बैंक को इंतजार है। RBI On 2000 Rupee Note</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, ये आंकड़ा इन्हें बंद किए जाने से पहले मौजूद कुल नोटों का 98.37% है, जबकि 1.63% अभी भी बचे हैं। ये आंकड़ा 31 अक्टूबर 2025 तक का है। यहां बता दें कि  RBI ने साथ किया था कि सर्कुलेशन से बाहर किए जा रहे ये बड़े गुलाबी नोट पूरी वापसी से पहले तक लीगल टेंडर बने रहेंगे। RBI On 2000 Rupee Note</p>
<p><strong>पॉलिसी के तहत बंद</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने जब 2000 रुपये के गुलाबी नोटों को बंद किया था, तो उस समय सर्कुलेशन में कुल 3.56 लाख करोड़ रुपये मू्य के नोट मौजूद थे, जो अब घटकर सिर्फ 5,817 करोड़ रुपये रह गए हैं। RBI द्वारा साल 2016 के नवंबर महीने में इन बड़े करेंसी नोट को पेश किया गया था, जब देश में नोटबंदी का ऐलान हुआ था। RBI On 2000 Rupee Note</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, इसके तहत 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद कर दिया गया था। नोटबंदी का असर कम होने और अन्य अन्य मूल्यवर्ग के नोटों के मार्केट में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने के बाद केंद्रीय बैंक ने 19 मई 2023 को क्लीन नोट पॉलिसी के तहत इन्हें सर्कुलेशन से बाहर करने का ऐलान किया था। RBI On 2000 Rupee Note</p>
<p><strong>करा सकते हैं नोट</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, मई 2023 में Rs 2000 Notes सर्कुलेशन के बाहर किए जाने के ऐलान के साथ ही RBI ने 7 अक्टूबर 2023 तक लोगों को सभी बैंकों की ब्रांच में इन्हें बदलवाने की सुविधा उपलब्ध कराई थीं, लेकिन जैसे-जैसे सर्कुलेशन में इन लोटों की संख्या में कमी आई, केंद्रीय बैंक ने बैंकों के बजाय RBI के 19 कार्यालयों तक वापसी प्रक्रिया को सीमित कर दिया। जहां अभी भी इन नोटों को चेंज कराया जा सकता है। RBI On 2000 Rupee Note</p>
<p><strong>वापसी की सुविधा</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, इनमें रिजर्व बैंक अहमदाबाद, बेंगलुरु, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना और तिरुवनंतपुरम कार्यालय शामिल हैं। RBI On 2000 Rupee Note</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, इसके अलावा लोग अपने नजदीकी किसी भी डाकघर के जरिए इंडिया पोस्ट के माध्यम से भी ये नोट अपने बैंक खातों में जमा कराने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के किसी भी जारीकर्ता कार्यालय को भेज सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/158718/rbi-update-big-update-regarding-rs-2000-note-rbi-gave</link>
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                <pubDate>Sun, 02 Nov 2025 10:50:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rule Change: बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी आई खुशखबरी, 1 नवंबर से बदल जाएगा बैंकों का ये नियम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Rule Change: </strong>बैंक ग्राहकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। अगर आपने अपने बैंक अकाउंट में सिर्फ एक ही नॉमिनी जोड़ा है, तो अब आपके पास 4 लोगों को नामित करने का मौका होगा। जानकारी के मुताबिक, बैंक खातों में नॉमिनी को लेकर सरकार 1 नवंबर 2025 से नया नियम लागू करने जा रही है। </p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, इस बदलाव से न सिर्फ ग्राहकों को ज्यादा लचीलापन मिलेगा, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में क्लेम सेटलमेंट भी पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो जाएगा। Bank Rule Change</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158277/rule-change-big-good-news-for-bank-customers-this-rule"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/latest-news---2025-10-25t214005.257.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Rule Change: </strong>बैंक ग्राहकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। अगर आपने अपने बैंक अकाउंट में सिर्फ एक ही नॉमिनी जोड़ा है, तो अब आपके पास 4 लोगों को नामित करने का मौका होगा। जानकारी के मुताबिक, बैंक खातों में नॉमिनी को लेकर सरकार 1 नवंबर 2025 से नया नियम लागू करने जा रही है। </p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, इस बदलाव से न सिर्फ ग्राहकों को ज्यादा लचीलापन मिलेगा, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में क्लेम सेटलमेंट भी पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो जाएगा। Bank Rule Change</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी कि बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 की प्रमुख धाराएं 1 नवंबर से लागू होंगी। Bank Rule Change</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, इस अधिनियम में नॉमिनी से जुड़े नए प्रावधान शामिल हैं। अब कोई भी बैंक ग्राहक अपने खाते, लॉकर या सुरक्षित रखे गए आर्टिकल्स के लिए अधिकतम चार नॉमिनी चुन सकता है। Bank Rule Change</p>
<p><strong>क्या है नया नियम?</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, नए प्रावधान के अनुसार, ग्राहक अपने बैंक अकाउंट में या तो एक साथ या क्रमिक रूप से चार लोगों को नॉमिनी बना सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक ने चार नॉमिनी चुने हैं और पहला नॉमिनी अब जीवित नहीं है, तो स्वचालित रूप से दूसरा नॉमिनी हकदार बन जाएगा। Bank Rule Change</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, ग्राहक चाहें तो चारों नॉमिनियों के बीच हिस्सेदारी का प्रतिशत भी तय कर सकते हैं, जैसे- 40 प्रतिशत, 30 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत ताकि कुल योग 100 प्रतिशत हो और भविष्य में किसी विवाद की संभावना न रहे। Bank Rule Change</p>
<p><strong>लागू</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, मंत्रालय ने बताया कि सेफ कस्टडी और लॉकर में रखे सामान के लिए केवल क्रमिक नॉमिनेशन की अनुमति होगी। इसका मतलब है कि एक नॉमिनी के निधन के बाद ही अगले को अधिकार मिलेगा। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में एकरूपता, पारदर्शिता और क्लेम निपटान में तेजी लाना है। Bank Rule Change</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, इससे ग्राहकों को यह सुविधा भी मिलेगी कि वे अपनी जमा राशि का उत्तराधिकारी अपनी पसंद से तय कर सकें। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इन प्रावधानों के लागू होने से बैंकों में नामांकन प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी होगी। Bank Rule Change</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, इससे जमाकर्ताओं को अपनी संपत्ति के बंटवारे में स्पष्टता और सुरक्षा दोनों मिलेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 21:40:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>10 Rupee Coin: 10 रुपये के सिक्के को लेकर आई बड़ी खबर, RBI ने दी ये जानकारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">10 Rupee Coin: आजकल अगर आप किसी दुकान पर 10 रुपये का सिक्का लेकर जाएं, तो अक्सर दुकानदार यह कहता नजर आता है </span><span class="cf1">–</span><span class="cf2"> "</span><span class="cf0">साहब, यह सिक्का नहीं चलता, दूसरा दीजिए।" यह समस्या अब आम होती जा रही है। दरअसल, अलग-अलग डिज़ाइन वाले 10 रुपये के सिक्कों को देखकर आम लोग ही नहीं, कई व्यापारी भी कंफ्यूज हो जाते हैं कि कौन सा असली है और कौन सा नकली।</span></p>
<p><span class="cf0">इसी भ्रम की वजह से लोग इन सिक्कों को लेने से झिझकने लगे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई में 10 रुपये के सिक्के को आरबीआई या सरकार</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156792/10-rupee-coin-brought-big-news-about-10-rupee-coins"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/10-rupee-coin.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">10 Rupee Coin: आजकल अगर आप किसी दुकान पर 10 रुपये का सिक्का लेकर जाएं, तो अक्सर दुकानदार यह कहता नजर आता है </span><span class="cf1">–</span><span class="cf2"> "</span><span class="cf0">साहब, यह सिक्का नहीं चलता, दूसरा दीजिए।" यह समस्या अब आम होती जा रही है। दरअसल, अलग-अलग डिज़ाइन वाले 10 रुपये के सिक्कों को देखकर आम लोग ही नहीं, कई व्यापारी भी कंफ्यूज हो जाते हैं कि कौन सा असली है और कौन सा नकली।</span></p>
<p><span class="cf0">इसी भ्रम की वजह से लोग इन सिक्कों को लेने से झिझकने लगे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई में 10 रुपये के सिक्के को आरबीआई या सरकार ने बंद कर दिया है? </span></p>
<p><span class="cf0">भारतीय रिज़र्व बैंक (</span><span class="cf2">RBI) </span><span class="cf0">ने पहली बार 10 रुपये का सिक्का 2005 में तैयार किया और इसे 2006 में आम जनता के लिए जारी किया गया था। यह भारत का पहला "द्विधात्विक" सिक्का है, यानी दो धातुओं से बना हुआ। इस सिक्के का केंद्रीय हिस्सा तांबा-निकल (</span><span class="cf2">Copper-Nickel) </span><span class="cf0">का होता है, जबकि बाहरी रिंग एल्युमीनियम-कांसे (</span><span class="cf2">Aluminium-Bronze) </span><span class="cf0">की बनी होती है।</span></p>
<p><span class="cf0">इस सिक्के के शुरुआत से लेकर अब तक </span><span class="cf2">RBI </span><span class="cf0">ने 14 से अधिक डिज़ाइन जारी किए हैं। ये बदलाव अक्सर विशेष अवसरों, महापुरुषों की स्मृति या फिर जनहित से जुड़ी वजहों से किए जाते हैं। हालांकि डिज़ाइन में अंतर होता है, लेकिन ये सभी सिक्के कानूनी रूप से मान्य और वैध मुद्रा हैं</span></p>
<p><span class="cf2">2011 </span><span class="cf0">में जब भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर रुपये का प्रतीक चिह्न (</span><span class="cf3">₹</span><span class="cf2">) </span><span class="cf0">जारी किया, तो उसके बाद ढाले गए सभी सिक्कों में यह चिह्न शामिल किया गया। लेकिन इससे पहले के सिक्कों में यह चिह्न नहीं होता। इसी के चलते एक अफवाह फैल गई कि रुपये के प्रतीक के बिना वाले सिक्के नकली हैं, और नोटबंदी के समय यह भ्रम और भी अधिक बढ़ गया।</span></p>
<p><span class="cf2">RBI </span><span class="cf0">को इस झूठ को खत्म करने के लिए कई बार सार्वजनिक तौर पर बयान देना पड़ा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 10 रुपये के सभी सिक्के, चाहे उनका डिज़ाइन कैसा भी हो, और चाहे उनमें </span><span class="cf3">₹</span> <span class="cf0">का चिह्न हो या न हो </span><span class="cf1">—</span> <span class="cf0">सभी असली और पूरी तरह वैध हैं। आम जनता और व्यापारी दोनों को यह सिक्के बिना किसी झिझक के स्वीकार करने चाहिए।</span></p>
<p><span class="cf0">दुर्भाग्यवश कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर झूठी अफवाहें फैलाकर जनता में भ्रम फैला रहे हैं। पुराने और नए डिज़ाइनों का एक साथ बाजार में चलन में होना बिल्कुल सामान्य बात है, लेकिन लोग इसी बात को आधार बनाकर शक करने लगते हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">आरबीआई ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि 10 रुपये का सिक्का वैध मुद्रा है, और इसे लेने से इनकार करना न सिर्फ गलत, बल्कि कानूनी रूप से भी अनुचित है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति इन सिक्कों को लेने से इनकार करे, तो उन्हें सही जानकारी दें और जागरूक बनाएं।</span></p>
<p><span class="cf0">अब अगर कोई आपसे कहे कि "ये सिक्का नहीं चल रहा", तो बेझिझक कहिए, "चल रहा है </span><span class="cf1">—</span><span class="cf2"> 100% </span><span class="cf4">—</span> <span class="cf0">और </span><span class="cf2">RBI </span><span class="cf0">ने खुद कहा है।" साथ ही, </span><span class="cf2">WhatsApp </span><span class="cf0">या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आने वाली किसी भी अफवाह पर भरोसा करने से पहले, सरकारी और आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि जरूर करें।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 20:17:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IMF में भारत की भूमिका अब निर्णायक और सशक्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था की पहचान अब केवल घरेलू सीमाओं तक ही सीमित नहीं रही। जब डॉ. उर्जित पटेल, जिन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के रूप में अपनी दूरदर्शिता और वित्तीय स्थिरता के लिए ख्याति अर्जित की, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत का कार्यकारी निदेशक बनने के लिए नियुक्त हुए, तब यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक पहचान को एक नई दिशा देने वाला क्षण था। उनके कार्यकाल के दौरान मुद्रास्फीति-लक्ष्यीकरण और वित्तीय नीतियों की स्पष्ट दिशा ने उन्हें उस योग्य स्थान तक पहुँचाया, जहाँ वे न केवल भारत की आर्थिक नीतियों का प्रतिनिधित्व करेंगे, बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154191/indias-role-in-imf-is-now-decisive-and-empowered"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/news-1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था की पहचान अब केवल घरेलू सीमाओं तक ही सीमित नहीं रही। जब डॉ. उर्जित पटेल, जिन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के रूप में अपनी दूरदर्शिता और वित्तीय स्थिरता के लिए ख्याति अर्जित की, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत का कार्यकारी निदेशक बनने के लिए नियुक्त हुए, तब यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक पहचान को एक नई दिशा देने वाला क्षण था। उनके कार्यकाल के दौरान मुद्रास्फीति-लक्ष्यीकरण और वित्तीय नीतियों की स्पष्ट दिशा ने उन्हें उस योग्य स्थान तक पहुँचाया, जहाँ वे न केवल भारत की आर्थिक नीतियों का प्रतिनिधित्व करेंगे, बल्कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता और विकासशील देशों के हितों को भी सुनिश्चित करने में योगदान देंगे। डॉ. पटेल का जन्म 28 अक्टूबर 1963 को नैरोबी, केन्या में हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके प्रारंभिक वर्ष और शिक्षा ने उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण और स्थानीय जरूरतों की समझ प्रदान की। उन्होंने लंदन आर्थिक विद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और येल विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की। इन अनुभवों ने उन्हें न केवल अंतरराष्ट्रीय वित्त की समझ दी, बल्कि भारत के आर्थिक ढांचे और नीतिगत आवश्यकताओं के लिए आवश्यक दृष्टि भी प्रदान की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनकी यात्रा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में एक अर्थशास्त्री के रूप में शुरू हुई, जहाँ उन्होंने वैश्विक आर्थिक प्रणालियों को गहराई से समझा। इस अनुभव ने उन्हें बाद में भारतीय रिज़र्व बैंक में उप-गवर्नर और फिर गवर्नर के रूप में कार्य करने के लिए तैयार किया। उनके कार्यकाल में भारतीय मौद्रिक नीति ने स्थिरता के साथ विकसित होना सीखा। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि आर्थिक नीतियाँ केवल सांख्यिकीय आंकड़ों या अल्पकालिक लक्ष्यों पर आधारित न हों, बल्कि वे दीर्घकालिक विकास और वित्तीय स्थिरता के लिए उपयुक्त हों।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. पटेल ने भारतीय रिज़र्व बैंक में रहते हुए कई महत्वपूर्ण सुधारों को लागू किया। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में नवाचार और वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कदम उठाए। उनका दृष्टिकोण यह था कि आर्थिक नीतियाँ केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि देश के वास्तविक सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए बनाई जानी चाहिए। उनके प्रयासों से भारतीय अर्थव्यवस्था ने स्थिरता और विश्वसनीयता दोनों प्राप्त की।अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में डॉ. पटेल का कार्यभार केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है। यह भूमिका उन्हें वैश्विक आर्थिक नीतियों पर चर्चा करने, विकासशील देशों की आवश्यकताओं को समझने और वित्तीय स्थिरता के लिए रणनीतियाँ विकसित करने का अवसर प्रदान करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके माध्यम से भारत का दृष्टिकोण वैश्विक मंच पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत होगा, और इसके परिणामस्वरूप भारत की आर्थिक नीतियाँ अंतरराष्ट्रीय निर्णयों में अपनी छाप छोड़ सकेंगी। डॉ. पटेल की नियुक्ति का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह भारत के लिए वैश्विक आर्थिक मंच पर सक्रिय भागीदारी की दिशा में एक निर्णायक कदम है। अब केवल आर्थिक वृद्धि या घरेलू नीतियों के संतुलन तक ही सीमित नहीं रहा। भारत के दृष्टिकोण, उसकी विकास योजनाएँ और उसकी आर्थिक स्थिरता का संदेश अब वैश्विक वित्तीय मंच पर पहुँचाया जाएगा। यह नियुक्ति विकासशील देशों के हितों और वैश्विक वित्तीय स्थिरता के संतुलन को बनाए रखने में भारत की भागीदारी को स्पष्ट करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. पटेल की विशेषज्ञता और अनुभव वैश्विक वित्तीय स्थिरता में योगदान देने के साथ-साथ भारत की भूमिका को भी सशक्त करेंगे। उनके नेतृत्व में, भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में अपनी नीतियों को न केवल प्रस्तुत करेगा, बल्कि वैश्विक आर्थिक निर्णयों में सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाएगा। यह भूमिका भारत की अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से मजबूती प्रदान करेगी और विकासशील देशों की आवश्यकताओं को वैश्विक मंच पर उचित मान्यता दिलाने में मदद करेगी। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह समय नए अवसरों और चुनौतियों का है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जहाँ तकनीकी नवाचार, वैश्विक व्यापार नीति, और वित्तीय प्रवाह के नए मानदंड तय हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं और वित्तीय असंतुलन के दौर से गुजर रही है, डॉ. पटेल की भूमिका भारत के लिए न केवल गौरव की बात है, बल्कि यह नीति निर्माण और आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल भी है। उनके अनुभव और दूरदर्शिता से भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में अपनी भूमिका को और सशक्त बना सकता है, जिससे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। डॉ. पटेल की नियुक्ति यह संकेत भी देती है कि भारतीय विशेषज्ञता और रणनीतिक सोच अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता प्राप्त कर रही है। यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का विषय नहीं है, बल्कि भारत के आर्थिक और वित्तीय ढांचे की क्षमता और उसकी वैश्विक समझ को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण क्षण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके नेतृत्व में, भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के निर्णयों में केवल एक सदस्य नहीं रहेगा, बल्कि वह वैश्विक आर्थिक नीति निर्माण में सक्रिय और प्रभावशाली योगदानकर्ता के रूप में अपनी जगह बनाएगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत के कार्यकारी निदेशक के रूप में डॉ. पटेल की जिम्मेदारी केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहेगी। यह जिम्मेदारी भारत की नीतियों को वैश्विक मंच पर स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने, विकासशील देशों के दृष्टिकोण को समझने और वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए रणनीतियों का निर्माण करने की भी होगी। उनके अनुभव से यह सुनिश्चित होगा कि भारत की आवाज़ केवल सुनी जाए, बल्कि वैश्विक आर्थिक निर्णयों में उसे उचित महत्व मिले।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. पटेल की नियुक्ति का एक और महत्वपूर्ण आयाम यह है कि यह वैश्विक मंच पर भारत की छवि को और सशक्त करती है। यह दिखाता है कि भारत अब न केवल आर्थिक दृष्टि से मजबूत है, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उनके नेतृत्व में भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में अपनी नीति, दृष्टिकोण और आर्थिक योजना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा, जिससे वैश्विक वित्तीय निर्णयों में भारत की भागीदारी और प्रभाव बढ़ेगा। इस नियुक्ति से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक आर्थिक स्थिरता और विकासशील देशों के हितों के प्रति गंभीर है। डॉ. पटेल के नेतृत्व में, भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में न केवल अपनी आर्थिक नीति का प्रतिनिधित्व करेगा, बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन और स्थिरता में योगदान देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह भारत की वैश्विक आर्थिक नीति में एक नई दिशा को दर्शाता है, जो विकासशील देशों की आवश्यकताओं और वैश्विक वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. पटेल की यह यात्रा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति और उसकी नीति निर्माण क्षमता की भी मिसाल है। उनके अनुभव, विशेषज्ञता और दूरदर्शिता से यह सुनिश्चित होगा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाए और वैश्विक आर्थिक निर्णयों में अपना स्थान सशक्त बनाए। यह नियुक्ति भारत की आर्थिक स्थिरता, वैश्विक पहचान और विकासशील देशों की आवश्यकताओं को वैश्विक मंच पर उचित महत्व देने का प्रतीक है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह समय नई चुनौतियों और अवसरों का है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैश्विक आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, और ऐसे समय में डॉ. पटेल की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में नियुक्ति भारत के लिए नई उम्मीदों और संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करती है। उनके नेतृत्व में भारत अपनी नीति और दृष्टिकोण को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करेगा, जिससे वैश्विक आर्थिक निर्णयों में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण और प्रभावशाली होगी। इस प्रकार, डॉ. उर्जित पटेल की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में नियुक्ति न केवल उनके व्यक्तिगत करियर का शिखर है, बल्कि यह भारत की वैश्विक आर्थिक पहचान, उसकी नीति निर्माण क्षमता और विकासशील देशों के हितों की वैश्विक मंच पर सुरक्षा का प्रतीक भी है। उनके अनुभव और दूरदर्शिता से भारत अपनी भूमिका को और सशक्त बनाएगा, और वैश्विक आर्थिक स्थिरता में सक्रिय योगदान देगा। यह नियुक्ति भारत की वैश्विक आर्थिक नीति में एक नया अध्याय खोलती है, जो भविष्य में विकासशील देशों की आवश्यकताओं और वैश्विक वित्तीय स्थिरता को संतुलित करने में मार्गदर्शन करेगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/154191/indias-role-in-imf-is-now-decisive-and-empowered</link>
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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 18:14:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंह में राम, बगल में छुरियां आखिर क्यों ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मेरे तमाम पाठक मश्विरा देते हैं कि मुझे अब भाजपा और मोदी जी को बख्श देना चाहिए ,क्योंकि ये दोनों मुझे बीमार कर सकते है।  ऐसे मित्रों को मैं अक्सर कहता हूँ कि  भाजपा और मोदी जी ने मेरी भैंस नहीं खोली,इसलिए उनसे मेरी कोई अदावत नहीं है ।  मैं इन दोनों के खिलाफ नहीं बल्कि सत्ता प्रतिष्ठान को केंद्र में रखकर लिखता हूँ ।</p>
<p style="text-align:justify;">  कल यहां कोई और होगा ,आज यहां भाजपा और मोदी जी हैं। आज भी मैं भाजपा और मोदी जी को मश्विरा देने जा रहा हूँ कि  -देश सेवा करना है तो अब ' मुंह</p>
<p style="text-align:justify;">मैं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150473/why-did-the-knives-be-next-to-ram-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/namaz_in_open_1635915412_1743123503502.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मेरे तमाम पाठक मश्विरा देते हैं कि मुझे अब भाजपा और मोदी जी को बख्श देना चाहिए ,क्योंकि ये दोनों मुझे बीमार कर सकते है।  ऐसे मित्रों को मैं अक्सर कहता हूँ कि  भाजपा और मोदी जी ने मेरी भैंस नहीं खोली,इसलिए उनसे मेरी कोई अदावत नहीं है ।  मैं इन दोनों के खिलाफ नहीं बल्कि सत्ता प्रतिष्ठान को केंद्र में रखकर लिखता हूँ ।</p>
<p style="text-align:justify;"> कल यहां कोई और होगा ,आज यहां भाजपा और मोदी जी हैं। आज भी मैं भाजपा और मोदी जी को मश्विरा देने जा रहा हूँ कि  -देश सेवा करना है तो अब ' मुंह में राम और बगल में छुरियां रखना बंद कर देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं न मुसलमान हूँ और न रोजा रखता हूँ ,लेकिन मैं भाजपा के इस ऐलान से खुश हुआ था कि  आने वाली ईद को मुल्क के 32  लाख मुसलमानों को ,गरीब मुसलमानों को सौगात-ऐ- मोदी बांटी जाएगी ,लेकिन मेरी ख़ुशी केवल एक दिन टिकी और उस समय काफूर हो गयी जब भाजपा शासित अनेक  राज्य सरकारों ने मुसलमानों की खुशियां  छीनने वाले फैसले कर डाले। अब या तो राज्य सरकारें माननीय मोदीजी को नीचा दिखाना चाहतीं हैं या फिर मोदी जी के इशारे पर ही मुसलमानों को दुखी करने वाले फैसले कर रहीं हैं।  </p>
<p style="text-align:justify;">खबर हरियाणा से आयी है कि  हरियाणा सरकार ने मुसलमानों को ईद पर मिलने वाली सरकारी छुट्टी रद्द कर दी है। तर्क ये है कि   ईद की छुट्टी को गजेटेड हॉलीडे के बजाय रेस्ट्रिक्टेड हॉलीडे  किया गया है।  सरकारी अधिसूचना के मुताबिक  सप्ताहांत  होने के चलते शनिवार और रविवार (29 और 30 मार्च) को छुट्टी होगी. इसी बीच 31 मार्च (सोमवार) को फाइनेंशियल ईयर का कलोजिंग डे है. इसलिए सरकारी की ओर से यह फैसला लिया गया है ।</p>
<p style="text-align:justify;"> भारतीय रिजर्ब बैंक ये कदम उठती है तो समझ आता है ,उसने ये कदम उठाया भी है। भारतीय रिजर्व बैंक  ने अपने सभी बैंक को 31 मार्च को काम करने और सभी सरकारी लेन-देन पूरा करने के निर्देश दिए हैं. यानी ईद की छुट्टी सस्पेंड कर दी गई है और सभी बैंकिंग सुविधाएं जारी रहेंगी लेकिन हरियाणा को छोड़ किसी और सूबे ने ये अक्लमंदी नहीं दिखाई।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी जी कितने उदार हैं लेकिन उनकी पार्टी की सरकारें उतनी ही कठोर हो रही है।  मोदी जी के चिर प्रतिद्वंदी माने जाने वाले उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार और नौकरशाही हरियाणा से भी आगे निकल गयी। मेरठ में पुलिस प्रशासन ने ईद की नमाज को लेकर सख्त आदेश जारी करते हुए सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस आदेश पर अब प्रदेश में सियासत हो रही है। एनडीए की सहयोगी और केंद्र सरकार में मंत्री जयंत चौधरी ने मेरठ पुलिस के इस फैसले का विरोध किया है और उसकी तुलना ऑरवेलियन 1984 की पुलिसिंग से की है। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर ये पोस्ट किया है। संभल में पीस कमेटी की बैठक बुलाकर सबको नसीहत दी गई है कि कोई मस्जिद के अलावा कहीं नमाज़ पढ़ता हुआ दिखाई दिया, तो सख्त एक्शन होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी एक कदम आगे 27  साल बाद दिल्ली में आयी भाजपा की सरकार नवरात्रि पर दिल्ली  में मांस की दुकानें बंद करने पर आमादा है। दिल्ली में मीट और मछली की बिक्री को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला किया है। दिल्ली में गैरकानूनी रूप से मीट, मछली बेचने पर रोक लगाई गई है। दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। इस संबंध में प्रवेश वर्मा ने कहा कि राजधानी में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">कि वह गैरकानूनी मीट, मछली बेचने वाली यूनिट को खत्म करें। मंत्री प्रवेश वर्मा ने साफ कहा कि कोई भी व्यक्ति गैर-कानूनी रूप से मीट और मछली नहीं बेचना चाहिए।अब इस फैसले से कौन खुश होगा और कौन नहीं ये सब बताने की जरूरत नहीं है। यानि इस बार भले ही मोदी जी की तरफ से गरीब मुसलमानों को सौगात बांटने का ऐलान किया गया हो किन्तु भाजपा शासित सरकारों ने तमाम तरह की पाबंदियां लगाकर ईद का मजा तो पहले से ही किरकिरा कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुल्क में सड़क पर कांवड़ यात्राएं वर्षों से निकल रहीं है।  धार्मिक जुलूस निकाले  जाते है ।  हर धर्म के लोग जुलूस निकलते हैं लेकिन परेशानी अलविदा की नमाज से है। अलविदा की नमाज से क़ानून और व्यवस्था की स्थिति खराब होती है। अरे मिया !  सड़क पर नमाज कोई पूरे दिन  तो नहीं होती ! कुछ देर के लिए उसी तरह ट्रेफिक को मोड़ा जा सकता है जिस तरह मंत्रियों की सभाओं के लिए मोड़ा जाता है ,लेकिन ये कसरत कौन करे? क्यों करे ? मुसलमान इस मुल्क के नागरिक थोड़े ही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> सारी पाबंदियां उन्हीं के लिए हैं। बहुसंख्यक महाराष्ट्र के अहिल्यनगर में ख्वाजा चिश्ती की दरगाह पर बवाल काट सकते हैं,वहां भगवा फहरा सकते हैं।  शायद यही  गजबा -ऐ-हिन्द का जबाब भगवा -ऐ- हिन्द है और वो भी सरकार की तरफ से। गनीमत है कि  ईद के चाँद पर हमारी भाजपा सरकार का नियंत्रण नहीं है अन्यथा ये भी मुमकिन था की चाँद को या तो निकलने ही नहीं दिया जाता या फिर उन मोहल्लों में चादरें तान दी जातीं हैं जहाँ चाँद देखना एक रिवायत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Mar 2025 11:57:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दी खुशखबरी, अब घट जाएगी आपकी एमी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नए आरबीआई गवर्नर-</strong> देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ब्याज दरों में कटौती का ऐलान किया है। नए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह बैठक 5-7 फरवरी 2025 के दौरान हुई थी। RBI ने आज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती का ऐलान किया है।</p>
<p>संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से दरों में कटौती का फैसला किया है। इसके साथ ही अब रेपो रेट 6.5% से घटकर 6.25% हो गया है। MSF रेट 6.75% से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148289/sanjay-malhotra-the-new-governor-of-reserve-bank-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(21).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नए आरबीआई गवर्नर-</strong> देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ब्याज दरों में कटौती का ऐलान किया है। नए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह बैठक 5-7 फरवरी 2025 के दौरान हुई थी। RBI ने आज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती का ऐलान किया है।</p>
<p>संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से दरों में कटौती का फैसला किया है। इसके साथ ही अब रेपो रेट 6.5% से घटकर 6.25% हो गया है। MSF रेट 6.75% से घटकर 6.5% हो गया है। मई 2020 के बाद पहली बार ब्याज दरों में कटौती देखने को मिली है।</p>
<p><strong>ग्लोबल और घरेलू फैक्टर्स का असर</strong><br />पिछली मौद्रिक नीति बैठक से अब तक वैश्विक और घरेलू फैक्टर्स में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं जियोपॉलिटिकल तनाव, टैरिफ को लेकर ट्रेड वॉर की स्थिति और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच मतभेद के कारण बाजार में अस्थिरता रही।</p>
<p>अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर भारतीय रुपये और अन्य वैश्विक मुद्राओं पर पड़ा।<br />घरेलू मोर्चे पर बैंकिंग सेक्टर पर लिक्विडिटी का दबाव बना हुआ है। हालांकि, क्रेडिट ग्रोथ स्थिर हो रही है।</p>
<p><strong>GDP ग्रोथ अनुमानों में बदलाव</strong><br />RBI ने कारोबारी साल 2024-2025 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को 7.2% से घटाकर 6.6% कर दिया था। साथ ही तिमाही अनुमानों में भी संशोधन किया गया था।दिसंबर तिमाही के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 7.4% से घटाकर 6.8% किया गया।<br />चौथी तिमाही के लिए यह अनुमान 7.4% से घटाकर 7.2% कर दिया गया।</p>
<p><strong>महंगाई के अनुमान में बदलाव</strong><br />FY25 के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) अनुमान 4.5% से बढ़ाकर 4.8% कर दिया गया।<br />तीसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.8% से बढ़ाकर 5.7% किया गया।<br />चौथी तिमाही के लिए यह अनुमान 4.2% से बढ़ाकर 4.5% कर दिया गया।</p>
<p><strong>वैश्विक आर्थिक अनुमानों की स्थिति</strong><br />आर्थिक सर्वे 2025 में सरकार ने कारोबारी साल 2026 के लिए GDP ग्रोथ 6.3% - 6.8% रहने का अनुमान लगाया है।<br />IMF का अनुमान 6.5% रहने का है।<br />RBI की इस घोषणा के बाद कर्जदारों को राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि होम लोन और अन्य लोन की EMI कम हो सकती है। वहीं, निवेश और बाजार की स्थिति पर भी इस फैसले का असर देखने को मिलेगा।</p>
<p><strong>आर्थिक रिकवरी की संभावनाएं</strong><br />आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कारोबारी साल 2026 की दूसरी तिमाही से GDP ग्रोथ में रिकवरी देखने को मिलेगी। आने वाले महीनों में महंगाई सामान्य होने की उम्मीद है। संजय मल्होत्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिमांड में बढ़ोतरी देखी जा रही है।</p>
<p>FY25 के लिए GDP ग्रोथ 6.4% रहने का अनुमान है।<br />FY26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.7% रहने का अनुमान है।<br />तीसरी तिमाही में रियल GDP ग्रोथ अनुमान 6.5% रहने का अनुमान है।<br />कारोबारी साल 2026 की चौथी तिमाही में रियल GDP ग्रोथ अनुमान 6.5% रहने का अनुमान है।</p>
<p><strong>महंगाई दर के अनुमान</strong><br />FY25 के लिए रिटेल महंगाई दर 4.8% रहने का अनुमान है।<br />FY26 के लिए रिटेल महंगाई दर 4.2% रहने का अनुमान है।</p>
<p>आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहतर बनी हुई है। औसत महंगाई दर लक्ष्य के आसपास ही रही है। उन्होंने कहा कि RBI हमेशा अर्थव्यवस्था के हित में निर्णय लेगा और रेगुलेशन व कार्यक्षमता के बीच संतुलन बनाए रखने पर फोकस रहेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>बिज़नेस रिलीज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2025 17:11:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय रिज़र्व बैंक,ले सकता है बड़ा फैसला, EMI  पर दे सकता है लोगो को राहत की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>  रुपए की गिरावट और विदेशी मुद्रा- </strong>आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को इस साल रिजर्व बैंक और सरकारी बैंकों से 2.56 लाख करोड़ रुपए तक का डिविडेंड मिलने की उम्मीद है, जो पिछले साल के 2.30 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। रुपए की गिरावट और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों से कमाई में वृद्धि इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।</p>
<p><strong>मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी- </strong>वित्त वर्ष 2025-26 के बजट के बाद अब सभी की निगाहें रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक पर टिकी हैं, जो 5-7 फरवरी के बीच होगी। इस बैठक में रिजर्व बैंक रेपो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148135/the-reserve-bank-of-india-can-give-a-big-decision"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> रुपए की गिरावट और विदेशी मुद्रा- </strong>आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को इस साल रिजर्व बैंक और सरकारी बैंकों से 2.56 लाख करोड़ रुपए तक का डिविडेंड मिलने की उम्मीद है, जो पिछले साल के 2.30 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। रुपए की गिरावट और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों से कमाई में वृद्धि इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।</p>
<p><strong>मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी- </strong>वित्त वर्ष 2025-26 के बजट के बाद अब सभी की निगाहें रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक पर टिकी हैं, जो 5-7 फरवरी के बीच होगी। इस बैठक में रिजर्व बैंक रेपो रेट में बदलाव का फैसला ले सकता है, जिससे आपकी लोन की EMI पर सीधा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई दर में गिरावट और खपत बढ़ाने के लिए RBI ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो होम, ऑटो और पर्सनल लोन पर EMI कम हो सकती है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।</p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/images-(3).jpg" alt="images (3)" width="300" height="168"></img>ब्याज दरों में कटौती की संभावना </strong>-विशेषज्ञों का अनुमान है कि खुदरा महंगाई दर इस साल घटकर 4% के आसपास रह सकती है। नए गवर्नर संजय मल्होत्रा का रुख आर्थिक विकास को समर्थन देने वाला माना जा रहा है, जिससे रेपो रेट में कटौती की संभावना और प्रबल हो गई है।</p>
<p><strong>खपत को मिलेगी रफ्तार- </strong>बजट में इनकम टैक्स में बड़ी राहत दी गई है, जहां सालाना 12 लाख रुपए तक की आय को टैक्स-फ्री कर दिया गया है, जो पहले नई टैक्स रिजीम में 7 लाख रुपए तक थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मध्यम और उच्च-मध्यम वर्ग के लोगों के विवेकाधीन खर्च में इजाफा होगा, जिससे घरेलू मांग को मजबूती मिलेगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>बिज़नेस रिलीज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 17:30:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> RBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, UPI, IMPS और BBPS ने बढ़ाया डिजिटल पेमेंट का दायरा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="Headlines mb-3">
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<div class="Headlines mb-3">RBI द्वारा प्रकाशित डिजिटल पेमेंट इंडेक्स (Digital Payment Index) भी इस वृद्धि को दर्शाता है। मार्च 2024 के लिए यह इंडेक्स 445.50 पर पहुंच गया, जबकि मार्च 2018 में इसका आधार 100 था। पिछले छह वर्षों में इसमें चार गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।</div>
</div>
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<div class="descriptionC">
<p>  डिजिटल लेनदेन-  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश में खुदरा डिजिटल भुगतान (Retail Digital Payments) में जबरदस्त वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2012-13 में जहां डिजिटल लेनदेन 162 करोड़ थे, वहीं वित्त वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 16,416 करोड़ तक पहुंच गया है यानी पिछले 12</p>
<p><strong>डिजिटल</strong></p></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147977/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/2025_1image_12_43_369736577payment-ll.jpg" alt=""></a><br /><div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">RBI द्वारा प्रकाशित डिजिटल पेमेंट इंडेक्स (Digital Payment Index) भी इस वृद्धि को दर्शाता है। मार्च 2024 के लिए यह इंडेक्स 445.50 पर पहुंच गया, जबकि मार्च 2018 में इसका आधार 100 था। पिछले छह वर्षों में इसमें चार गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।</div>
</div>
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<div class="descriptionC">
<p> डिजिटल लेनदेन-  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश में खुदरा डिजिटल भुगतान (Retail Digital Payments) में जबरदस्त वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2012-13 में जहां डिजिटल लेनदेन 162 करोड़ थे, वहीं वित्त वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 16,416 करोड़ तक पहुंच गया है यानी पिछले 12 वर्षों में डिजिटल लेनदेन में 100 गुना इजाफा हुआ है।</p>
<p><strong>डिजिटल भुगतान में बड़ा बदलाव -</strong>पिछले पांच वर्षों में भी डिजिटल भुगतान में जबरदस्त उछाल आया है। इस अवधि में डिजिटल भुगतान का वॉल्यूम 6.7 गुना और मूल्य 1.6 गुना बढ़ा है। इस दौरान डिजिटल भुगतान की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) वॉल्यूम के लिए 45.9% और मूल्य के लिए 10.2% रही है।</p>
<p>RBI की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2013 में भारत में 222 करोड़ डिजिटल लेनदेन हुए थे, जिनका कुल मूल्य ₹772 लाख करोड़ था। 2024 तक यह आंकड़ा 20,787 करोड़ लेनदेन और ₹2,758 लाख करोड़ के मूल्य तक पहुंच गया है यानी लेनदेन की संख्या में 94 गुना और मूल्य में 3.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p><strong>RBI का फोकस क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स पर -</strong>RBI अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज़ भुगतान प्रणालियों (Fast Payment Systems - FPS) को आपस में जोड़ने पर ध्यान दे रहा है, जिससे कम लागत और सुविधाजनक क्रॉस-बॉर्डर भुगतान संभव हो सके।</p>
<p>पिछले साल, भारत के UPI और सिंगापुर के PayNow को जोड़ने के लिए RBI और सिंगापुर की मौद्रिक प्राधिकरण (MAS) के बीच व्यापक सहयोग हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, इस साझेदारी से विदेशों से धन भेजने की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। </p>
<p><strong>डिजिटल भुगतान में परिवर्तन - </strong>पहले भारत में डिजिटल भुगतान मुख्य रूप से कार्ड-आधारित सिस्टम तक सीमित था, लेकिन अब यह कई प्रकार के भुगतान विकल्पों में विस्तारित हो गया है। इनमें इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम (UPI, IMPS), छोटे मूल्य के भुगतान (PPI, UPI Lite), बड़े मूल्य के भुगतान (RTGS), बिल भुगतान (BBPS), बल्क भुगतान (NACH), ऑफलाइन भुगतान (UPI Lite X), सरकारी भुगतान (NACH, APBS), टोल भुगतान (NETC) जैसे विकल्प शामिल हैं।</p>
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                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>बिज़नेस रिलीज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jan 2025 20:15:42 +0530</pubDate>
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                <title>अब इन नंबर से आ सकता है कॉल, स्कैम रोकने के लिए RBI  द्वारा उठाये गए बड़े कदम </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="news-description my-2">
<p>RBI के लेटेस्ट निर्देशों के अनुसार, अब बैंकों को केवल उन फोन नंबरों का उपयोग करने की अनुमति है जो 16,00 से शुरु होते हैं और इसका प्रयोग केवल लेनदेन से संबंधित कॉल्स के लिए किया जाता है। सरल भाषा में कहे तो, अगर आपको कोई कॉल लेनदेन या किसी अन्य वित्तीय मामले कॉल आने वाले नंबर की शुरुआत 1600 नंबर से शुरु होगा।</p>
<p>रोजाना आए दिन स्कैम और धोखाधड़ी को लेकर कई खबरें आती रहती है। इन स्कैम से बचने के लिए सरकार से लेकर बैंक भी कई प्रयास कर रही है। इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने</p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147796/reserve-bank-of-india-has-introduced-a-special-phone-number"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/download-(11).jpg" alt=""></a><br /><div class="news-description my-2">
<p>RBI के लेटेस्ट निर्देशों के अनुसार, अब बैंकों को केवल उन फोन नंबरों का उपयोग करने की अनुमति है जो 16,00 से शुरु होते हैं और इसका प्रयोग केवल लेनदेन से संबंधित कॉल्स के लिए किया जाता है। सरल भाषा में कहे तो, अगर आपको कोई कॉल लेनदेन या किसी अन्य वित्तीय मामले कॉल आने वाले नंबर की शुरुआत 1600 नंबर से शुरु होगा।</p>
<p>रोजाना आए दिन स्कैम और धोखाधड़ी को लेकर कई खबरें आती रहती है। इन स्कैम से बचने के लिए सरकार से लेकर बैंक भी कई प्रयास कर रही है। इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में वित्तीय संस्थानों के लिए दो विशेष फोन नंबर सीरीज पेश की है। जिसके इस्तेमाल से ग्राहकों को लेनदेन और मार्केटिंग कॉल्स के लिए किया जाएगा। दरअसल, सरकार की यह नई पहल बैंक संचार के रुप में प्रस्तुत होने वाले वित्तीय धोखाधड़ी से मोबाइल यूजर्स को बचाने के लिए डिजाइन की गई है। </p>
<p><strong>इस नंबर से आ सकती हैं कॉल </strong></p>
<p>इतना ही नहीं, RBI ने 140 से शुरु होने वाले नंबरों को विशेष रुप से मार्केटिंग कॉल्स और ग्राहकों को SMS सूचनाओं के लिए निर्धारित किया है। वहीं, लोन लोन, क्रेडिट कार्ड या बीमा जैसी सेवाए प्रदान करने वाले, लोग 140 से शुरु होने वाले नंबर से आएगा। यह कदम यूजर्स को को स्कैमर्स से बचने में मदद करता है। </p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 19:33:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन द्वारा Indian currency को लेकर कही यह बात, कई देशों में बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="descriptionC">
<p><strong>करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप नहीं-</strong>    आरबीआई के पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने डावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान भारतीय रुपए की मौजूदा स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपए में और कमजोरी आ सकती है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को इस पर नियंत्रण पाने के लिए करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार केवल रुपया नहीं, बल्कि अन्य देशों की मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही हैं।</p>
<p>उनका यह भी मानना है कि उभरते देशों के लिए इस प्रकार की आर्थिक अस्थिरता एक चिंता</p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147792/former-rbi-governor-raghuram-rajan-said-this-regarding-indian-currency"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/download-(10).jpg" alt=""></a><br /><div class="descriptionC">
<p><strong>करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप नहीं-</strong>  आरबीआई के पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने डावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान भारतीय रुपए की मौजूदा स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपए में और कमजोरी आ सकती है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को इस पर नियंत्रण पाने के लिए करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार केवल रुपया नहीं, बल्कि अन्य देशों की मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही हैं।</p>
<p>उनका यह भी मानना है कि उभरते देशों के लिए इस प्रकार की आर्थिक अस्थिरता एक चिंता का कारण बन सकती है, खासकर जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है, जिसका अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। राजन के मुताबिक, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अमेरिकी डॉलर की ‘हथियार’ के तौर पर इस्तेमाल की प्रवृत्ति को लेकर चिंतित हैं।</p>
<p>राजन ने बताया कि रुपए का मूल्य अभी भी अन्य मुद्राओं के मुकाबले ओवरवैल्यूड है और एक डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू 85.6 के लेवल तक पहुंच चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी डॉलर अब भी एक सशक्त मुद्रा है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी प्रशासन द्वारा डॉलर का इस्तेमाल एक 'हथियार' के रूप में किया गया है, जिससे कई देशों में चिंता बढ़ी है।</p>
<p> </p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>बिज़नेस रिलीज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 19:03:44 +0530</pubDate>
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