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                <title>ias association - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>ias association RSS Feed</description>
                
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                <title>उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के भ्रष्ट आईएएस अधिकारी, कलंक कथा 1 </title>
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                        <![CDATA[<p>  </p>
<h6><strong>विशेष संवाददाता, स्वतंत्र प्रभात, लखनऊ </strong></h6>
<p>भारतीय प्रशासनिक सेवा का पद सम्मान का पद होता है, लाखों का वेतन, भत्ते, गाड़ी, बँगला, नौकर चाकर, सुरक्षाकर्मी, अनेको सुख सुविधाओं के बाद भी आईएएस अधिकारी भ्रष्ट हो जाता है, बात करते है उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत त्रिवेदी की, जिनकी आयुष घोटाले में सीबीआई जांच शुरू हो चुकी है, पूरा मामला कुछ इस प्रकार से है वर्ष 2021-22 में आयुष कॉलेजों (राजकीय आयुर्वेद कॉलेजों) में यूजी-पीजी में दाखिले के लिए घोटाले में फसें तत्कालीन मंत्री धर्म सिंह सैनी, तत्कालीन अपर मुख्य सचिव प्रशांत त्रिवेदी सहित अन्य आला अफसरों</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131103/corrupt-ias-officers-of-the-useful-government-of-uttar-pradesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/dharm-singh-saini.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<h6><strong>विशेष संवाददाता, स्वतंत्र प्रभात, लखनऊ </strong></h6>
<p>भारतीय प्रशासनिक सेवा का पद सम्मान का पद होता है, लाखों का वेतन, भत्ते, गाड़ी, बँगला, नौकर चाकर, सुरक्षाकर्मी, अनेको सुख सुविधाओं के बाद भी आईएएस अधिकारी भ्रष्ट हो जाता है, बात करते है उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत त्रिवेदी की, जिनकी आयुष घोटाले में सीबीआई जांच शुरू हो चुकी है, पूरा मामला कुछ इस प्रकार से है वर्ष 2021-22 में आयुष कॉलेजों (राजकीय आयुर्वेद कॉलेजों) में यूजी-पीजी में दाखिले के लिए घोटाले में फसें तत्कालीन मंत्री धर्म सिंह सैनी, तत्कालीन अपर मुख्य सचिव प्रशांत त्रिवेदी सहित अन्य आला अफसरों पर घूस लेने का आरोप है। </p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/dharm-singh-saini.jpg" alt="dharm singh saini" width="391" height="473"></img></p>
<p>मामले की जांच कर रही यूपी एसटीएफ ने 8 गवाहों से पूछताछ की थी। इसमें ये बातें सामने आईं थी कि आरोप है कि मंत्री ने अपने बंगले पर एक करोड़ पांच लाख रुपए लिए। जबकि प्रशांत त्रिवेदी ने भी 25 लाख लिए। एसटीएफ ने इन बयानों को कोर्ट में भी सब्मिट किया। ये भी आरोप भी लगे थे कि घूस के पैसों की बंदरबांट निदेशक से लेकर सचिव व सेक्शन अफसर तक हुई।</p>
<p>छात्रों को सीट आवंटन के नाम पर कॉलेजों से बड़ी राशि लिए जाने के भी आरोप हैं। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आयुष विभाग में फर्जी दाखिले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। जांच के घेरे में पूर्व मंत्री धर्म सिंह सैनी और तत्कालीन अपर मुख्य सचिव आयुष प्रशांत त्रिवेदी हैं। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट की फटकार के बाद आईएएस प्रशांत त्रिवेदी को साइड में तैनाती दी गई है।</p>
<h2 class="tag_h1 node_title"><span style="background-color:rgb(0,0,0);"><a style="background-color:rgb(0,0,0);" href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131055/corrupt-ias-officers-of-the-useful-government-of-uttar-pradesh"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के भ्रष्ट आईएएस अधिकारी, कलंक कथा-2</strong></span></a></span></h2>
<p>साल 2021-22 में काउंसिलिंग के लिए आयुर्वेद निदेशालय ने बोर्ड का गठन किया था। IT सेल न होने के कारण बोर्ड की निगरानी में निजी एजेंसी सॉफ्ट सॉल्यूशन को काउंसिलिंग का ठेका दिया गया। इस एजेंसी को अपट्रान पावरट्रानिक्स लि. ने नामित किया था। एक फरवरी 2022 से शुरू हुई काउंसिलिंग प्रक्रिया 19 मई तक 4 चरणों में पूरी की गई।</p>
<p>प्रदेश के राजकीय और निजी कॉलेजों में 7338 सीटों पर एडमिशन हुए। काउंसिलिंग से लेकर ‌वेरीफिकेशन तक की जिम्मेदारी निजी एजेंसी की थी। दाखिलों के बाद सीट एलॉटमेंट भी कर दिया गया। 1181 छात्रों के रिकॉर्ड नीट काउंसिलिंग की मेरिट सूची से नहीं मिले। इनमें से 22 छात्र ऐसे थे जो नीट में शामिल ही नहीं हुए थे। 1181 में से 927 को सीट आवंटन किया गया था। इनमें से 891 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश ले लिया। आरोप है कि पांच-पांच लाख रुपए में बिना नीट काउंसिलिंग कराए ही सीटें बेची गई थी।</p>
<p>वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत त्रिवेदी प्रमुख  सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं भी रह चुके है, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं रहने के दौरान यह गंभीर रूप से बीमार पड़े थे और उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार ने नियम विरुद्ध जाकर विदेश में इनका इलाज कराने में उत्तर प्रदेश की गरीब जनता के करोड़ों रूपये खर्च कर दिए थे, इनके इलाज पर खर्च किये गए करोड़ों रूपये पर कई संगठनों ने विरोध दर्ज़ किया है और जांच की मांग भी कई बार की है,</p>
<p>, इन सब प्रकरणों को देखते हुए उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस पालिसी सिर्फ एक जुमला ही प्रतीत होती है I अगले शुक्रवार के अंक में उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के एक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के भ्र्ष्टाचार का खुलासा पढियेगा I</p>]]>
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                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2023 22:44:01 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                <title>भ्रस्टाचार का पर्यायवाची बने भृष्ट आईएएस अधिकारी ?</title>
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                        <![CDATA[सूत्रों की माने तो  इन भर्ष्टाचारी अधिकारी द्वारा, अपने भ्र्ष्टाचार से लगातार उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार की किरकिरी कराने वाले भृष्ट अधिकारी अमित मोहन प्रसाद की ताकत की बात करें तो पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सिद्दार्थ नाथ सिंह, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह एवं वर्तमान उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री  ब्रजेश पाठक भी इससे त्रस्त थे]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129411/corrupt-ias-officer-amit-mohan-prasad-became-synonymous-with-corruption"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/amit-mohan-rakash-ias-lucknow.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>विशेष संवाददाता,</strong><br /><strong>स्वतंत्र प्रभात, लखनऊ, </strong></p>
<p style="text-align:justify;">अपने भ्र्ष्टाचार से उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार की किरकिरी करने वाले अधिकारी अमित मोहन प्रसाद पर किसका वरद हस्त है जो यह भ्र्ष्टाचार पर भ्रष्टाचार किये जा रहा है, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं चिकिता सेवाएं तथा उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन के चेयरमैन पद पर रहते हुए अमित मोहन प्रसाद ने जम कर भ्र्ष्टाचार किया, स्वास्थ्य विभाग एवं मेडिकल कारपोरेशन में अमित मोहन प्रसाद ने अपने साथ अधिकारीयों एवं कार्यरत कर्मचारियों का एक संगठित गिरोह बना कर जबरदस्त घोटाले किये l</p>
<p style="text-align:justify;">नियम विरुद्ध तरीके से टेंडर बाँटें, चाहे वह अस्पतालों के निर्माण के टेंडर हो, जीवन रक्षक उपकरण की सप्लाई के टेंडर हो, या फिर जीवन रक्षक दवाओं के टेंडर हों, सबमे जबरदस्त घोटाला किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार की भर्ष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति है, यह अपने आप में उदहारण है की किस प्रकार से भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को ही जीरो कर दिया गया है l</p>
<p style="text-align:justify;">इन अधिकारी द्वारा, अपने भ्र्ष्टाचार से लगातार उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार की किरकिरी कराने वाले अमित मोहन प्रसाद की ताकत की बात करें तो पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सिद्दार्थ नाथ सिंह, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह एवं वर्तमान उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री  ब्रजेश पाठक भी इससे त्रस्त थे, मगर कुछ कर नहीं पाए, 31 अगस्त 2022 को एक अधिकारी विशेष के अवकाश प्राप्त करने के बाद अमित मोहन प्रसाद को स्वास्थ्य से हटाकर नवनीत सहगल के विभाग MSME विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया l</p>
<p style="text-align:justify;">अभी हाल में फ़रवरी 2023 में हुए इन्वेस्टर्स समिट में विभागीय मंत्री राकेश सचान कुर्सी की तलाश में खड़े रहे और यह महाशय उनके सामने ही कुर्सी पर बैठे रहे , यह स्तिथि है कैबिनेट मंत्रियों की उनके अधिकारीयों के सामने मामला अमित मोहन प्रसाद के पुराने विभाग स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है,  वर्ष 2021 में सरकारी अस्पतालों के निर्माण में हो रही अनिमियतता पर महेश चंद्र श्रीवास्तव द्वारा मान्य लोकायुक्त  के समक्ष परिवाद  दर्ज़ कराया गया था l</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-05/amit-mohan-prakash-ias.png" alt="amit mohan prakash ias"></img></p>
<p style="text-align:justify;"> जिस पर महेश चंद्र श्रीवास्तव को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से अमित मोहन प्रसाद द्वारा महेश चंद्र श्रीवास्तव की आठ कंपनियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और महेश चंद्र श्रीवास्तव पर 5 करोड़ रंगदारी मांगने का भी मुकदमा दर्ज़ करा दिया गया , जिसपर महेशचंद्र श्रीवास्तव द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज़ कराई गयी और प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा उतर प्रदेश के मुख्य सचिव को जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है, इसी प्रकार से उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन में तत्कालीन चेयरमैन अमित मोहन  प्रसाद, तत्कालीन प्रबंध निदेशिका कंचन वर्मा,</p>
<p style="text-align:justify;">महाप्रबंधक उपकरण क्रय उज्जवल कुमार, प्रबंधक उपकरण क्रय सिद्धार्थ बहादुर सिंह और स्वास्थ्य विभाग एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के सौरभ गर्ग, उसके साले अभय अग्रवाल के साथ मिलकर फ़र्ज़ी दस्तावेजों के द्वारा जमकर टेंडर बांटे गए और घटिया गुणवत्ता विहीन चीनी जीवन रक्षक उपकरण खरीदे गए जो मानकों के अनुरूप नहीं है, सौरभ गर्ग और अभय अग्रवाल की कंपनी  POCT SERVICES  को महाराष्ट्र सरकार द्वारा सितम्बर 2021 में तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था और इनके घटिया चीनी उपकरणों को राजस्थान सरकार द्वारा रिजेक्ट किया गया था परन्तु उत्तर प्रदेश सरकार के भरष्ट अधिकारीयों द्वारा वही घटिया चीनी जीवन रक्षक उपकरण खरीदे गए I</p>
<p style="text-align:justify;">अमित मोहन प्रसाद द्वारा उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन में नियुक्त किये गए महाप्रबंधक उज्जवल कुमार एवं प्रबंधक सिद्धार्थ बहादुर सिंह बिहार मेडिकल कारपोरेशन के बर्खास्त कर्मचारी है, जो वर्ष 2014 में बिहार मेडिकल कारपोरेशन में हुए उपकरण घोटाले में लिप्त थे और इसी सौरभ गर्ग एवं अभय अग्रवाल के लिए काम कर रहे थे, मानकों के विपरीत महंगी दरों पर घटिया चीनी जीवन रक्षक उपकरण खरीदे गए थे l</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश की जनता के जीवन रक्षा के लिए जीवन रक्षक उपकरण खरीदने के लिए अधिकृत करना आपने आप में बृहद साक्ष्य है की किस नियत से इनको नियुक्त किया गया, इन दोनों कर्मचारियों के लिए कई कंपनियों ने और उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन की टेक्निकल टीम ने उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के मुख्यमंत्री एवं अन्य अधिकारीयों से भी शिकायत की, परन्तु अमित मोहन प्रसाद के प्रभाव में इन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई l<br /> <br />इस पूरे घोटाले की शिकायत मड़िआओँ लखनऊ निवासी राजेश खन्ना ने लोकायुक्त से की तो अमित मोहन प्रसाद ने सौरभ गर्ग और अभय अग्रवाल और वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री के निवास पर तैनात किंग जॉर्ज मेडिकल कालेज के कर्मचारी रविंदर शुक्ल के द्वारा राजेश खन्ना को प्रताड़ित करने के लिए राजेश खन्ना पर 10 करोड़ रंगदारी मांगने और बलात्कार का मुकदमा दर्ज़ करा दिया गया है l</p>
<p style="text-align:justify;">अमित मोहन प्रसाद के अधीन केंद्र सरकार की जितनी भी जनहित की योजनाए थी चाहे प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना या फिर आयुष्मान भारत परियोजना सबकी सब भर्ष्टाचार और घोटालों की भेंट चढ़ गयी है, आयुष्मान भारत परियोजना में तो इतना भर्ष्टाचार की तत्कालीन वित्त नियंत्रक ने इनके भर्ष्टाचार से तंग आकर अपना त्यागपत्र दे दिया था यह है इन भृष्ट अधिकारीयों की कार्यशैली तब, जब उत्तर प्रदेश में उपयोगी सरकार है l</p>
<p style="text-align:justify;">परन्तु दोनों ही वयक्तियों द्वारा दायर किये गए परिवादों में लोकायुक्त द्वारा जांच की जा रही है, इसी प्रकरण पर लोकायुक्त कार्यालय द्वारा प्रेस नोट जारी किया गया है , स्वास्थ्य विभाग में बहुत बड़ा बजट रहता है, परतु इन घोटालेबाज़ अधिकारीयों और सौरभ गर्ग, अभय अग्रवाल जैसे शातिर दलालों की वजह से ही उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार की स्वास्थ्य सेवाएं धवस्त है,  उतर प्रदेश की उपयोगी सरकार के मुख्यमंत्री को संज्ञान लेना होगा की MSME विभाग के मुखिया रहते हुए अमित मोहन प्रसाद कही आने वाले अरबों खरबों रूपये के विदेशी निवेश को ही न चट कर जाए l<br /> <br />सूत्रों की माने तो कुछ वर्षों पूर्व आईएएस असोसिएशन द्वारा तीन भ्र्ष्ट आईएएस अधिकारीयों की पहचान के लिए अभियान चलाया गया था, ऐसे अभियान की अब जरूरत है परन्तु अब तीन नहीं तीस महा भृष्ट चुनने पड़ेंगे क्युकी प्रदेश में उपयोगी सरकार है जहा भ्र्ष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति है, सवाल यह है की इन भर्ष्टाचारियों को संजीवनी कौन दे रहा है ? किसका वरद हस्त प्राप्त है इनको? इस प्रकरण से सम्बंधित समस्त दस्तावेज स्वतंत्र प्रभात के पास मौजूद है l</p>]]>
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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 17:09:03 +0530</pubDate>
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