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                <title>वर्षा जल संचयन - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>वर्षा जल संचयन RSS Feed</description>
                
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                <title>गर्मी में प्यास, बारिश में सैलाब: विकास के मॉडल पर बड़ा सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>  </strong>21<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं सदी का भारत एक कड़वी विडंबना के दौर से गुजर रहा है। एक ओर देश अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां छू रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर करोड़ों लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं। वर्ष </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की भीषण गर्मी ने विकास की चमक के पीछे छिपी हकीकत उजागर कर दी है। कई क्षेत्रों में तापमान </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। बाड़मेर जैसे इलाकों में गांव एक हैंडपंप के सहारे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाएं मीलों दूर से पानी ला रही हैं और शहरों में दूषित जलापूर्ति को लेकर आक्रोश है। लेकिन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180368/thirst-in-summer-flood-in-rain-big-question-on-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-31-at-6.28.39-pm-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> </strong>21<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं सदी का भारत एक कड़वी विडंबना के दौर से गुजर रहा है। एक ओर देश अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां छू रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर करोड़ों लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं। वर्ष </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की भीषण गर्मी ने विकास की चमक के पीछे छिपी हकीकत उजागर कर दी है। कई क्षेत्रों में तापमान </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। बाड़मेर जैसे इलाकों में गांव एक हैंडपंप के सहारे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाएं मीलों दूर से पानी ला रही हैं और शहरों में दूषित जलापूर्ति को लेकर आक्रोश है। लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद मानसून आते ही यही देश जल संकट से निकलकर जल प्रलय में घिर जाता है। सड़कें नदियां बन जाती हैं और जनजीवन थम जाता है। आखिर यह कैसा विकास है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां गर्मी में प्यास और बारिश में सैलाब नियति बन चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट प्रकृति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास और जल प्रबंधन की उपेक्षा का परिणाम है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश के </span>166 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण क्षमता का लगभग </span>39 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत ही बचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मई में और घट गया। कई बड़े जलाशय आधी क्षमता से नीचे पहुंच गए। पिछले वर्षों में वर्षा के असमान वितरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बढ़ती गर्मी और कमजोर जल प्रबंधन ने संकट को गहरा किया है। वहीं </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में एल-नीनो के प्रभाव से सामान्य से कम मानसून की आशंका है। दूसरी ओर भूजल का बेलगाम दोहन हालात और बिगाड़ रहा है। दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहर जल संकट के साथ भूमि धंसाव जैसे खतरों का भी सामना कर रहे हैं। स्पष्ट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह केवल आज की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य की भी गंभीर चुनौती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संकट की जड़ अंधाधुंध शहरीकरण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने प्रकृति और पानी का संतुलन तोड़ दिया है। कभी तालाब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झीलें और आर्द्रभूमियां वर्षा जल संजोती थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आज उनकी जगह कंक्रीट के जंगल उग आए हैं। नतीजा यह है कि बारिश का पानी जमीन में उतरने के बजाय सड़कों और नालों में बह जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि गर्मियों में भूजल खाली पड़ जाता है। मानो हम बरसात में पानी को ठुकराते हैं और फिर गर्मी में उसकी तलाश में भटकते हैं। दुर्भाग्य से विकास की परिभाषा ऊंची इमारतों और चौड़ी सड़कों तक सिमट गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि जल संरक्षण हाशिये पर है। यही सोच आज जल संकट और जलभराव—दोनों की सबसे बड़ी वजह है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में जल संकट का कारण केवल पानी की कमी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके उपयोग और प्रबंधन की खामियां भी हैं। कृषि और शहर मिलकर देश के </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक भूजल का दोहन कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी जल व्यवस्था चरमराई हुई है। शहरों में लाखों लीटर पानी पाइपलाइन लीकेज में बह जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कई बस्तियां बूंद-बूंद को तरसती हैं। दूसरी ओर सीमित जल वाले क्षेत्रों में भी अत्यधिक पानी मांगने वाली फसलें उगाई जा रही हैं। नतीजा यह है कि गर्मियों में जलाशय सूख जाते हैं और बरसात में वही पानी अनियंत्रित होकर तबाही मचाता है। स्पष्ट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट संसाधनों के अभाव से अधिक गलत प्रबंधन और विकृत प्राथमिकताओं का परिणाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की प्यास और बारिश की तबाही का सबसे भारी बोझ समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है। गांवों में पेयजल संकट स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेती और पशुधन—तीनों पर चोट कर रहा है। सूखती फसलें किसानों की आय घटा रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर बना रही हैं। वहीं शहरों में जलभराव और बाढ़ यातायात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कारोबार और जनजीवन को ठप कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। गरीब परिवारों के घर डूबते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोज़गार प्रभावित होता है और जीवन स्तर गिरता है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जल संकट और जल प्रलय की सबसे बड़ी कीमत वही लोग चुका रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी इन समस्याओं को पैदा करने में सबसे कम भूमिका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट अब केवल पर्यावरण या समाज तक सीमित नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता की चुनौती बन चुका है। पानी सीधे खाद्य सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनस्वास्थ्य और सामाजिक संतुलन से जुड़ा है। यदि जल स्रोत लगातार कमजोर होते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य में जल विवाद बढ़ेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि उत्पादन घटेगा और शहरों की जीवन क्षमता पर भी संकट गहराएगा। जो राष्ट्र अपने नागरिकों के लिए पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता सुनिश्चित नहीं कर सकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका विकास भी लंबे समय तक टिक नहीं सकता। इसलिए पानी को महज़ एक संसाधन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्र निर्माण और विकास की आधारशिला मानने का समय आ गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राह मुश्किल जरूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन समाधान सामने हैं। जरूरत केवल दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी की है। हर शहर और गांव में वर्षा जल संचयन अनिवार्य बनाना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि तालाबों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झीलों और पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करना होगा। शहरी विकास ऐसा हो कि वर्षा जल जमीन में समा सके और स्मार्ट ड्रेनेज व्यवस्था भूजल का आधार बने। कृषि में ड्रिप सिंचाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूक्ष्म सिंचाई और क्षेत्रानुकूल फसल चक्र को बढ़ावा देना होगा। साथ ही जल वितरण व्यवस्था दुरुस्त कर पाइपलाइन लीकेज पर अंकुश लगाना होगा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और लोगों को जल संरक्षण का भागीदार बनाना होगा। बदलाव घोषणाओं से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ईमानदार और सख्त क्रियान्वयन से आएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि भारत कितना विकसित हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि क्या वह अपने लोगों के लिए पानी सुरक्षित रख पाया। गर्मी में प्यास और बारिश में सैलाब की यह विडंबना हमारी विकास यात्रा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। यदि जल संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल साक्षरता और जल के न्यायपूर्ण वितरण को राष्ट्रीय संकल्प नहीं बनाया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाली पीढ़ियां हमारी दूरदर्शिता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी लापरवाही को याद रखेंगी। विकास का वास्तविक पैमाना कंक्रीट के जंगल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हर नागरिक तक स्वच्छ और पर्याप्त पानी की पहुंच है। भारत को अब जल-केंद्रित विकास की दिशा में बढ़ना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि भविष्य की समृद्धि का रास्ता पानी से होकर गुजरता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:30:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जलवायु परिवर्तन का गहराता संकट: युद्ध, समुद्री तापमान और ‘वेस्टर्न वेव्स’ का भारत पर प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ | </strong>अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177842/deepening-crisis-of-climate-change-war-sea-temperature-and-impact"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/4416221.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ | </strong>अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में अप्रैल माह के अधिकतम तापमान में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है - यह आकड़ा वर्ष के सापेक्ष अधिकतम तापमान (°C) का 2015-40.7, 2016-43.1, 2017-41.8, 2018-40.7, 2019-44.6, 2020-38.8, 2021-41.9, 2022~43.0, 2023-39.0, 2024-41.0, 2025-42.0, और 2026-43.0 से ऊपर (27 अप्रैल तक)।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">[Chitra-Gragh] इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि तापमान में गिरावट केवल अस्थायी रही है (जैसे 2020 में), जबकि दीर्घकालिक प्रवृत्ति लगातार वृद्धि की [Chitra-Gragh] महामारी और तापमान: एक अस्थायी राहत 2020 में COVID-19 लॉकडाउन के दौरान तापमान 38.8°C तक गिर गया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इसका मुख्य कारण था—वाहनों की आवाजाही में कमी, औद्योगिक गतिविधियों का ठहराव और वायु प्रदूषण में गिरावट हालाँकि, यह गिरावट स्थायी नहीं रही। जैसे ही गतिविधियाँ पुनः शुरू हुईं, तापमान फिर से तेजी से बढ़ने लगा। युद्ध और जलवायु परिवर्तन का संबंध वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और युद्ध के बीच एक खतरनाक संबंध उभरकर सामने आया है, जिनका मुख्य प्रभाव: सैन्य उपकरणों में भारी ईंधन खपत, बमबारी और आग से कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे का विनाश ही कहा जा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध और 2026 में मध्य-पूर्व के संघर्षों के दौरान तापमान का 43°C के आसपास पहुँचना इस संबंध को मजबूत करता है। युद्ध केवल मानव जीवन ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। ‘वेस्टर्न वेव्स’ (पश्चिमी विक्षोभ) का बदलता स्वरूप भारत में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ अब अनियमित और अधिक तीव्र होते जा रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जिससे प्रमुख परिवर्तन जो महसूस किये गए, वह है -अचानक वर्षा और ओलावृष्टि, उसके तुरंत बाद भीषण हीटवेव और तापमान में तीव्र उतार-चढ़ाव (25°C से 43°C तक) होता रहा । इससे दुष्प्रभाव न ही रबी फसलों (विशेषकर गेहूं) पर संकट छाया बल्कि किसानों की आय पर असर हुआ और तरह–तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में अप्रत्यासित वृद्धि हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> शहरी भारत और ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव लखनऊ, दिल्ली और पटियाला जैसे शहरों में कंक्रीट संरचनाओं और हरियाली की कमी के कारण “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। जिसके परिणाम स्वरुप शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म, रात का भी तापमान 30°C से ऊपर रहता है जिससे शरीर को भी आराम नहीं मिल पा रहा है और आम जनता बेहाल है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भविष्य का संकट (2026–2030) यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पिछले 15 दिनों से अधिक लंबी हीटवेव, सभी शहरों/देहातों में भी भरी जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट पायी जा रही है। इसके साथ ही ऊर्जा  मांग में भी तीव्र वृद्धि हो रही है। उक्त कारणों से GDP में 4–6% तक संभावित कमी से भी नकारा नहीं जा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि 2030 के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है, जब तापमान 48–50°C तक पहुँचने की संभावना बनी हुई है। समाधान: क्या किया जा सकता है? इस संकट से निपटने के लिए बहुआयामी प्रयास आवश्यक हैं:</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1. पर्यावरणीय उपाय-अब हमें वृक्षारोपण और वन संरक्षण में अभियान स्वरुप सरकार के साथ कन्धा से कंधा मिलाकर काम करना होगा तथा जैव विविधता का संरक्षण के लिए प्रभावी कार्य की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2. ऊर्जा परिवर्तन- यद्यपि भारतवर्ष में वर्तमान सरकार ने आम जनता से लेकर व्यवसायिक संस्थाओं तक तेजी से सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है , परन्तु इसे वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर भारत के साथ ही ऊर्जा हेतु आत्म निर्भर होना होगा | इसी के साथ – साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना पड़ेगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">3.जल प्रबंधन- अभी तक भारतवर्ष में सरकार प्रयासों के बावजूद भी आम जनता में वर्षा जल संचयन के बारें में नगण्य जानकारी हो पाई है और नहीं जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग का उपयोग किया जा रहा है, केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित रह गया है । इस क्षेत्र में अभियान चलाकार जागरूक करने और प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">4. शहरी योजना- भारत सरकार ने स्मार्टसिटी व ग्रीन सिटी मॉडल की योजनायें चलाई, इसका कोई प्रभावी असर अभी तक दिखाई न पड़ रहा है और नहीं कम कंक्रीट और अधिक हरियाली ही किसी शहरी अथवा कस्बो पर्याप्त असर छोड़ रहा है। इस पर अधिक प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">5. सामाजिक भागीदारी- उपरोक्त से स्पष्ट है कि जो योजनाये प्रभावीरूप से संचालित  नहीं हो पा रही हैं, उनमें जन-जागरूकता अभियान चलाना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए  जन आंदोलन चलाना अत्यंत आवश्यक है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 19:44:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दीर्घकालिक लापरवाही से बढ़ रही शहरों की प्यास</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">राजीव शुक्ला</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भीषण गर्मी की लहरें अभी से रिकॉर्ड तोड़ रही हैं और देश के बड़े-बड़े शहरों में बिजली की मांग चरम पर पहुंच गई है। इसी के साथ जल संकट एक बार फिर सिर उठा रहा है। दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेन्नई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हैदराबाद और मुंबई जैसे महानगरों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। कई इलाकों में टैंकरों की लंबी कतारें लग रही हैं तथा पानी की आपूर्ति अनियमित हो गई है। दक्षिण भारत के अनेक जलाशयों में अप्रैल महीने में ही कुल भंडारण क्षमता का लगभग </span>47<span lang="hi" xml:lang="hi">  से </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi">  प्रतिशत से भी कम पानी बचा</span>2026</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177587/the-thirst-of-cities-is-increasing-due-to-long-term"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-28-at-11.16.04.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">राजीव शुक्ला</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भीषण गर्मी की लहरें अभी से रिकॉर्ड तोड़ रही हैं और देश के बड़े-बड़े शहरों में बिजली की मांग चरम पर पहुंच गई है। इसी के साथ जल संकट एक बार फिर सिर उठा रहा है। दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेन्नई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हैदराबाद और मुंबई जैसे महानगरों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। कई इलाकों में टैंकरों की लंबी कतारें लग रही हैं तथा पानी की आपूर्ति अनियमित हो गई है। दक्षिण भारत के अनेक जलाशयों में अप्रैल महीने में ही कुल भंडारण क्षमता का लगभग </span>47<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत से भी कम पानी बचा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि तत्काल प्रभावी और दीर्घकालिक कदम नहीं उठाए गए तो वर्ष </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का ग्रीष्म कई शहरों के लिए ‘डे जीरो’ जैसी भयावह स्थिति पैदा कर सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत विश्व के सबसे जल-तनावग्रस्त देशों में शामिल है। नीति आयोग और विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार देश की प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगातार घट रही है। शहरीकरण की तेज रफ्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनसंख्या वृद्धि तथा कृषि क्षेत्र में भूजल का अत्यधिक दोहन मुख्य कारण हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड के हालिया आकलन के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर भूजल निकासी लगभग </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कई राज्यों में यह </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत से भी अधिक पहुंच चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस वर्ष की प्रारंभिक गर्मी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। दिल्ली जैसे शहरों में भूजल अत्यधिक दोहन वाले क्षेत्रों में बोरवेल अब </span>300<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट से भी अधिक गहराई तक जाने को मजबूर हैं। बेंगलुरु में हजारों बोरवेल सूख चुके हैं तथा कई क्षेत्र उच्च जल-तनाव वाले चिह्नित किए गए हैं। चेन्नई और हैदराबाद भी निरंतर संकट से जूझ रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कारण और प्रभाव </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संकट के पीछे कई गंभीर कारण हैं। अनियोजित शहरी विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षा जल संचयन की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तालाबों और झीलों का अतिक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपशिष्ट जल का नाकाफी उपचार तथा भूजल का अंधाधुंध दोहन प्रमुख हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून की अनिश्चितता भी समस्या को बढ़ा रही है। शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल का मात्र </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत ही उपचारित हो पाता है। शेष अनुपचारित जल नदियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झीलों और भूजल को प्रदूषित कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पेय पदार्थ कंपनियों का जल दोहन:</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संकट को और गंभीर बनाने में कोका कोला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेप्सी तथा अन्य शीतल पेय और बोतलबंद पानी बनाने वाली बड़ी कंपनियों की भूमिका भी उल्लेखनीय है। इन कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट भूजल का भारी मात्रा में उपयोग करते हैं। एक सामान्य शीतल पेय की बोतल बनाने में उत्पादन प्रक्रिया सहित सैकड़ों लीटर पानी खर्च होता है। कई क्षेत्रों में इन प्लांटों को भूजल के अत्यधिक दोहन के लिए दोषी ठहराया जाता रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केरल के प्लाचीमाडा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान के काला डेरा और उत्तर प्रदेश के मेहदीगंज जैसे स्थानों पर स्थानीय किसानों और निवासियों ने आरोप लगाए हैं कि इन कंपनियों के प्लांटों के कारण भूजल स्तर तेजी से गिरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कृषि प्रभावित हुई और गांवों में पीने के पानी की कमी बढ़ी। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने भी उत्तर प्रदेश में इन कंपनियों के कुछ प्लांटों पर भूजल दोहन के लिए करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये कंपनियां लाखों लीटर भूजल प्रतिदिन निकालती हैं जबकि आसपास के गांव टैंकर पानी पर निर्भर रहते हैं। यद्यपि कंपनियां जल संरक्षण और रिचार्ज परियोजनाओं का दावा करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कई स्वतंत्र अध्ययनों और स्थानीय शिकायतों में इन प्रयासों को अपर्याप्त बताया जाता है। जब आम नागरिक पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब बड़े पैमाने पर शीतल पेय और बोतलबंद पानी का उत्पादन जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य नागरिकों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है। निम्न आय वर्ग के परिवार और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोग महंगे तथा अक्सर दूषित टैंकर पानी पर निर्भर हो गए हैं। जलजनित बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ पड़ रहा है। उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छोटे कारोबार और कृषि कार्य सभी प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली संकट और जल संकट अब एक-दूसरे से जुड़कर एक विकट चक्र बना रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतिगत चुनौतियां</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारें हर वर्ष ग्रीष्म ऋतु से पहले कार्य योजना जारी करती हैं – टैंकरों की व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास और जागरूकता अभियान। ये कदम सराहनीय हैं किंतु ये केवल लक्षणों का उपचार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूल समस्या का समाधान नहीं। अपशिष्ट जल उपचार की क्षमता अभी भी बहुत कम है। वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाने और पुराने जलाशयों के पुनरुद्धार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता सीमित है। भूजल दोहन पर सख्त नियंत्रण लागू करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पेय पदार्थ उद्योग पर भी सख्त नियमन की जरूरत है। उच्च जल-तनाव वाले क्षेत्रों में नए प्लांट स्थापित करने पर रोक तथा मौजूदा प्लांटों के जल उपयोग की स्वतंत्र निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। कृषि क्षेत्र में कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की नीति भी अभी अपर्याप्त है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या किया जाना चाहिए</span>?</strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट हमें याद दिलाता है कि सतत विकास जल सुरक्षा के बिना संभव नहीं है। तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर कार्रवाई की आवश्यकता है:</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">हर इमारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलोनी और औद्योगिक इकाई में वर्षा जल संचयन प्रणाली को अनिवार्य बनाना तथा इसके पालन के लिए पुरस्कार और दंड की स्पष्ट व्यवस्था करना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">अपशिष्ट जल के उपचार और पुनः उपयोग को बढ़ावा देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषकर उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्माण और बागवानी जैसे गैर-पीने वाले कार्यों के लिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">भूजल दोहन पर सख्त निगरानी तथा रिचार्ज प्रणाली लागू करना। उच्च जल-तनाव वाले क्षेत्रों में पेय पदार्थ कंपनियों के भूजल उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाना और उनके जल उपयोग की वार्षिक स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य करना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">शहरी नियोजन में झीलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तालाबों और हरित क्षेत्रों का संरक्षण सुनिश्चित करना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">जल बचत को जन-जागरूकता के माध्यम से संस्कृति का हिस्सा बनाना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर एक मजबूत राष्ट्रीय जल सुरक्षा मिशन तैयार करना चाहिए जिसमें बुनियादी ढांचे का विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय स्तर के समाधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा आधारित निगरानी और जलवायु अनुकूलन सभी शामिल हों। पेय उद्योग को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जल-न्यूट्रल उत्पादन की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्कर्ष: </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भीषण गर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली संकट और जल संकट अब एक साथ आ रहे हैं। ये अलग-अलग मुद्दे नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास की एक ही कहानी के विभिन्न पहलू हैं। जब बड़े उद्योग लाखों लीटर पानी का उपयोग कर रहे हों तो आम जनता की प्यास बुझाना और भी कठिन हो जाता है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हम आज दूरदर्शी कदम नहीं उठाए तो कल का शहरी भारत विकास की राह पर ठिठक सकता है। हर बूंद कीमती है। पानी की बर्बादी रोकना हर नागरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और सरकार की जिम्मेदारी है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समय अभी है। सतत और दूरदर्शी नीतियों के साथ-साथ सामूहिक प्रयास से ही हम इस बढ़ते संकट को नियंत्रित कर सकते हैं और एक जल-समृद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सतत तथा मजबूत भारत का निर्माण कर सकते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177587/the-thirst-of-cities-is-increasing-due-to-long-term</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:39:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बभनकुइया में जल अर्पण दिवस व विश्व जल दिवस पर भव्य समारोह,।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173905/grand-celebration-on-water-offering-day-and-world-water-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260322-wa0133.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिला समन्वयक अश्विनी श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह के दौरान जल संरक्षण और उसके महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने ग्रामीणों से अपील की कि वे जल का विवेकपूर्ण उपयोग करें और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय अपनाएं, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। आयोजन के अंत में जल संरक्षण का संकल्प दिलाया गया और योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी को जागरूक किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173905/grand-celebration-on-water-offering-day-and-world-water-day</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 22:02:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ड्राप मोर क्राप अदर इंटरवेशन अन्तर्गत पहले आओ पहले पाओ के तर्ज पर करे ऑनलाइन,</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">भूमि सरंक्षण अधिकारी के0के0 सिंह ने अवगत कराया है कि में रा०कु०वि०यो० के घटक पर ड्राप मोर क्राप अदर इन्टरवेंशन अन्तर्गत वर्षा जल संचयन हेतु खेत तालाब योजना के लाभार्थियों को अनुदान पर पम्पसेट हेतु ऑनलाइन प्रारम्भ, अनुदान पर पम्पसेट की बुकिंग हेतु विभागीय वेबसाईट "https://agriculture.up.gov.in" पर विभागीय पोर्टल में पंजीकृत कृषक द्वारा ऑनलाइन बुकिंग की जा रही है। पोर्टल पर कन्फर्म टोकन की सूचना कृषक के पंजीकृत मोबाईल पर एस०एम०एस० के माध्यम से प्रेषित की जायेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पोर्टल पर पम्पसेट क्रय रसीद, पम्पसेट की फोटो एवं सम्बन्धित अभिलेख अपलोड करने की अन्तिम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164897/under-drop-more-crop-other-intervention-do-it-online-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/img_20251230_200131.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">भूमि सरंक्षण अधिकारी के0के0 सिंह ने अवगत कराया है कि में रा०कु०वि०यो० के घटक पर ड्राप मोर क्राप अदर इन्टरवेंशन अन्तर्गत वर्षा जल संचयन हेतु खेत तालाब योजना के लाभार्थियों को अनुदान पर पम्पसेट हेतु ऑनलाइन प्रारम्भ, अनुदान पर पम्पसेट की बुकिंग हेतु विभागीय वेबसाईट "https://agriculture.up.gov.in" पर विभागीय पोर्टल में पंजीकृत कृषक द्वारा ऑनलाइन बुकिंग की जा रही है। पोर्टल पर कन्फर्म टोकन की सूचना कृषक के पंजीकृत मोबाईल पर एस०एम०एस० के माध्यम से प्रेषित की जायेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पोर्टल पर पम्पसेट क्रय रसीद, पम्पसेट की फोटो एवं सम्बन्धित अभिलेख अपलोड करने की अन्तिम तिथि प्रदर्शित होगी। किसी कारणवश मोबाईल पर एस०एम०एस० न पहुँचने पर पोर्टल पर प्रदर्शित अन्तिम तिथि ही मान्य होगी।अनुदान का भुगतान डी०बी०टी० के माध्यम से 01 किस्त में किया जायेगा। पम्पसेट अनुदान हेतु वही लाभार्थी कृषक पात्र होंगे</p>
<p style="text-align:justify;">जिन्होने पंजीकरण की तिथि तक उद्यान विभाग के माध्यम से सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली स्थापित कर ली है एवं खेत तालाब योजनान्तर्गत तालाब निर्माण का भी कार्य पूर्ण कर लिया है। योजना का लाभ पहले आओ पहले पाओ के सिद्धान्त पर दिया जायेगा।. योजना के लाभ लक्ष्य के समाप्ति तक प्रदान किया जायेगा। मॉग के आधार पर जनपद का लक्ष्य बढ़ाया एवं घटाया जा सकता है। अधिक जानकारी हेतु अपने जनपद के कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक/भूमि संरक्षण अधिकारी एवं कर्मचारियों से सम्पर्क करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/164897/under-drop-more-crop-other-intervention-do-it-online-on</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 20:21:11 +0530</pubDate>
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