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                <title>pollution control - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>pollution control RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कबाड़ कारोबारियों पर पुलिस का शिकंजा, सख्त दिशा-निर्देश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना, स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  पुलिस कमिश्नरेट लुधियाना ने शहर में चल रही और नई खुलने वाली कबाड़ की दुकानों पर शिकंजा कसते हुए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चोरी का सामान और वाहन कबाड़ियों को बेचे जाने, कबाड़ जलाकर प्रदूषण फैलाने तथा सड़कों पर सामान रखकर यातायात बाधित करने की शिकायतों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। आदेशों की अवहेलना या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कबाड़ कारोबारी के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>एडीशनल सी.पी. रुपिंदर सिंह का बयान</strong></div>
<div style="text-align:justify;">शहर के विभिन्न इलाकों में कुछ कबाड़ियों द्वारा बिना किसी खरीद-फरोख्त रिकॉर्ड के तार, ट्रांसफार्मर, दोपहिया, तिपहिया</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185542/police-clamp-down-on-scrap-dealers-issue-strict-guidelines"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001012072-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना, स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> पुलिस कमिश्नरेट लुधियाना ने शहर में चल रही और नई खुलने वाली कबाड़ की दुकानों पर शिकंजा कसते हुए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चोरी का सामान और वाहन कबाड़ियों को बेचे जाने, कबाड़ जलाकर प्रदूषण फैलाने तथा सड़कों पर सामान रखकर यातायात बाधित करने की शिकायतों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। आदेशों की अवहेलना या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कबाड़ कारोबारी के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>एडीशनल सी.पी. रुपिंदर सिंह का बयान</strong></div>
<div style="text-align:justify;">शहर के विभिन्न इलाकों में कुछ कबाड़ियों द्वारा बिना किसी खरीद-फरोख्त रिकॉर्ड के तार, ट्रांसफार्मर, दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहन खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। आशंका है कि कुछ असामाजिक तत्व चोरी का सामान और वाहन कबाड़ में बेच देते हैं। इसके अलावा प्लास्टिक और तारों को खुले में जलाने से वायु प्रदूषण फैलने, बिजली चोरी तथा सड़कों पर कबाड़ रखने से ट्रैफिक बाधित होने की शिकायतें भी मिली हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कबाड़ कारोबारियों के लिए प्रमुख निर्देश</strong></div>
<div style="text-align:justify;">• हर कबाड़ी को एक विशेष रजिस्टर रखना होगा, जिसमें सामान बेचने और खरीदने वाले व्यक्ति का पूरा नाम, पता, संपर्क नंबर तथा खरीदे-बेचे गए सामान का पूरा विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">• यह रजिस्टर प्रत्येक महीने के पहले सप्ताह में संबंधित जोन के ए.डी.सी.पी. के समक्ष जांच और सत्यापन के लिए प्रस्तुत करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">• पुरानी या कबाड़ गाड़ियों खरीदने वाले कबाड़ियों को संबंधित आरटीओ कार्यालय में जाकर वाहनों की आरसी रद्द करवाना अनिवार्य होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">• सभी मौजूद और नई कबाड़ की दुकानों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजली बोर्ड, फायर ब्रिगेड तथा नगर निगम लुधियाना से आवश्यक अनुमति और एनओसी हासिल करनी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;">• किसी भी प्रकार का अनधिकृत या चोरी का सामान खरीदने-बेचने पर रोक रहेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">• कबाड़, प्लास्टिक या तारों को खुले में आग लगाने पर भी पूर्ण पाबंदी लगाई गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियम अनुसार होगी कार्रवाई : पुलिस कमिश्नरेट पुलिस ने स्पष्ट किया इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले कबाड़ कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों को स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाना पुलिस की प्राथमिकता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 20:54:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तमसा की अंतिम सांसें: जलकुंभी का कहर, गंदगी का तांडव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong> जिला मुख्यालय अकबरपुर से गुजरने वाली तमसा नदी का बड़ा हिस्सा इन दिनों जलकुंभी और गंदगी के साथ-साथ झाडियों में तब्दील हो चुका है।सबसे बड़ी बात तो यह है कि नगर पालिका अकबरपुर के द्वारा वार्ड क्षेत्र से निकलने वाला कचरा नदी के किनारे ही डंप किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">तमसा नदी सफाई के नाम पर पालिका द्वारा इस तरह स्वच्छता अभियान की एक ऐसी मुहीम चलाई जाती है कि जिम्मेदार अधिकारी भी तमसा नदी में सफाई करते नजर आते हैं ।नगर पालिका अकबरपुर के द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान की मुहीम नदी के कुछ मीटर के हिस्से तक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183210/last-breaths-of-tamsa-havoc-of-water-hyacinth-orgy-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1006297978-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong> जिला मुख्यालय अकबरपुर से गुजरने वाली तमसा नदी का बड़ा हिस्सा इन दिनों जलकुंभी और गंदगी के साथ-साथ झाडियों में तब्दील हो चुका है।सबसे बड़ी बात तो यह है कि नगर पालिका अकबरपुर के द्वारा वार्ड क्षेत्र से निकलने वाला कचरा नदी के किनारे ही डंप किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमसा नदी सफाई के नाम पर पालिका द्वारा इस तरह स्वच्छता अभियान की एक ऐसी मुहीम चलाई जाती है कि जिम्मेदार अधिकारी भी तमसा नदी में सफाई करते नजर आते हैं ।नगर पालिका अकबरपुर के द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान की मुहीम नदी के कुछ मीटर के हिस्से तक ही सीमित रह जाती है और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया में सुर्खियां बटोरती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उस दौरान की वो तस्वीर जिसमें जिम्मेदार सफाई करते नजर आते हैं।जबकि लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि बरसात के पहले नगर पालिका  द्वारा तमसा नदी की अगर सही तरीके से साफ सफाई कराई  जाए तो नदी के किनारे बने मकान और शहजादपुर नई सड़क के किनारे बने दुकानों में जल भराव जैसी समस्या कभी उत्पन्न ही न हो।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:25:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दासिया में बन रहे इथेनॉल प्लांट सभी मानकों का हो रहा पालन,अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य- निदेशक रोहन जायसवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती  जिले में रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दासिया गांव में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को लेकर सोमवार को रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कंपनी के निदेशक रोहन जायसवाल और अन्य अधिकारियों ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे पर्यावरण अनुकूल एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित बताया।रोहन जायसवाल ने कहा कि प्लांट में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार का अशोधित या हानिकारक अपशिष्ट जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182879/ethanol-plants-being-built-in-dacia-are-following-all-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260706-wa0065.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती  जिले में रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दासिया गांव में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को लेकर सोमवार को रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कंपनी के निदेशक रोहन जायसवाल और अन्य अधिकारियों ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे पर्यावरण अनुकूल एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित बताया।रोहन जायसवाल ने कहा कि प्लांट में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार का अशोधित या हानिकारक अपशिष्ट जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा तथा अपशिष्ट का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाएगा।एनओसी संबंधी सवालों के जवाब में कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय, प्रादेशिक और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सभी विभागीय अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किए जा चुके हैं। साथ ही जिला पंचायत एवं ग्राम पंचायत से भी अनुमति मिल चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार शिलान्यास से पूर्व मुख्य राजस्व अधिकारी की मौजूदगी में किसानों के साथ बैठक की गई थी, जिसके बाद नियमानुसार निर्माण कार्य शुरू कराया गया।कंपनी का दावा है कि परियोजना का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्लांट में किसानों से टूटे चावल, मक्का, भूसी सहित अन्य कृषि उत्पाद खरीदकर इथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब दो हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। प्रेसवार्ता के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव, भूजल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय लोगों की आशंकाओं से जुड़े सवाल भी उठाए गए, जिनका कंपनी प्रतिनिधियों ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि परियोजना का संचालन सभी वैधानिक और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा तथा संबंधित विभागों की नियमित निगरानी भी होती रहेगी। इस अवसर पर कंपनी के प्रोपराइटर सुधीर जायसवाल, यूनिट हेड आर.के. दुबे, चीफ कंसल्टेंट पी.एन. पांडेय, तकनीकी विशेषज्ञ तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि मौजूद रहे।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 21:58:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मानसून में फलदार वृक्षों की गुठलियाँ लगाएँ, पर्यावरण की सुरक्षा करें योगेंद्र कुमार सह अधीक्षक तिहाड़ जेल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हम सभी जानते हैं कि फल खाने वाले पक्षियों की संख्या दिल्ली में लगातार घटती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण फलदार वृक्षों की लगातार कम होती संख्या है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्रों के साथ वर्ष 2012 में फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की।हम अपने स्वयं के पैसों से फलदार पौधे खरीदकर लगाते थे। उस समय 3–4 फीट ऊँचे एक स्वस्थ पौधे की कीमत लगभग ₹100 से ₹150 होती थी, जिससे यह अभियान काफी खर्चीला था।फिर एक दिन मेरे मन में विचार आया कि क्यों न मानसून के दौरान फलों की</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182461/plant-kernels-of-fruit-trees-in-monsoon-and-protect-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260627-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हम सभी जानते हैं कि फल खाने वाले पक्षियों की संख्या दिल्ली में लगातार घटती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण फलदार वृक्षों की लगातार कम होती संख्या है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्रों के साथ वर्ष 2012 में फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की।हम अपने स्वयं के पैसों से फलदार पौधे खरीदकर लगाते थे। उस समय 3–4 फीट ऊँचे एक स्वस्थ पौधे की कीमत लगभग ₹100 से ₹150 होती थी, जिससे यह अभियान काफी खर्चीला था।फिर एक दिन मेरे मन में विचार आया कि क्यों न मानसून के दौरान फलों की गुठलियाँ और बीज ही लगाए जाएँ। हमने इस विचार को व्यवहार में उतारा और वर्षा ऋतु में बड़ी संख्या में जामुन, आम, इमली, बेर तथा अन्य फलदार वृक्षों की गुठलियाँ बोईं। अगले मानसून तक उनसे लगभग ढाई से तीन फीट ऊँचे स्वस्थ पौधे तैयार हो गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद हमने इन पौधों का निःशुल्क वितरण शुरू किया और स्वयं भी उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित किया। आज हमारा पौधारोपण अभियान पूरी तरह निःशुल्क है।मैं आप सभी से भी विनम्र आग्रह करता हूँ कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार इस मानसून में फलों की गुठलियाँ और बीज अवश्य लगाएँ। अगले वर्ष मानसून में तैयार पौधों को किसी उपयुक्त स्थान पर रोपित करें। बिना किसी बड़े खर्च के हम सभी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।पिछले वर्ष तिहाड़ जेल के बंदियों एवं स्टाफ के सहयोग से हमने बड़ी संख्या में जामुन की गुठलियाँ लगाई थीं, जो आज 2–3 फीट ऊँचे पौधों में विकसित हो चुकी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष मानसून के दौरान दिल्ली सरकार के 'वन महोत्सव' अभियान में हम इन पौधों का निःशुल्क वितरण करेंगे तथा उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित भी करेंगे।फलदार वृक्ष लगाने के अनेक लाभ हैं। ये न केवल पर्यावरण को हरा-भरा बनाते हैं, बल्कि फल खाने वाले सुंदर पक्षियों को भी पुनः उनके प्राकृतिक आवास में लौटने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही हमें भी बिना किसी रासायनिक प्रक्रिया के ताज़े और पौष्टिक फल प्राप्त होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त ये वृक्ष प्रदूषण कम करने, वातावरण को शुद्ध रखने तथा भरपूर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।आइए, इस मानसून एक संकल्प लें—हर घर, हर परिवार और हर नागरिक कम से कम एक फलदार वृक्ष की गुठली अवश्य लगाए। यही छोटा-सा प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वच्छ और समृद्ध पर्यावरण की नींव बनेगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:54:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति की बैठक सम्पन्न।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार को संगम सभागार में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी के द्वारा वर्ष 2026 में आयोजित होने वाले वृक्षारोपण अभियान की तैयारियों एवं विभागों को आवंटित लक्ष्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने सभी सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से उनके द्वारा वृक्षारोपण हेतु चिन्हित स्थलों, चिन्हित स्थल का क्षेत्रफल, वृक्षारोपण हेतु लक्ष्य के सापेक्ष खोदे गये गड्ढ़ो की संख्या तथा चिन्हित स्थल पर किस विधि से व कितने पौधों का रोपण किया</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182455/meeting-of-district-tree-plantation-committee-district-ganga-committee-district"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260625-wa0153.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार को संगम सभागार में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी के द्वारा वर्ष 2026 में आयोजित होने वाले वृक्षारोपण अभियान की तैयारियों एवं विभागों को आवंटित लक्ष्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने सभी सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से उनके द्वारा वृक्षारोपण हेतु चिन्हित स्थलों, चिन्हित स्थल का क्षेत्रफल, वृक्षारोपण हेतु लक्ष्य के सापेक्ष खोदे गये गड्ढ़ो की संख्या तथा चिन्हित स्थल पर किस विधि से व कितने पौधों का रोपण किया जायेगा, की जानकारी लेते हुए उन्होंने सभी अधिकारियों को वृक्षारोपण कराये जाने हेतु लक्ष्य के अनुसार स्थल चयन, गड्ढ़ें की खुदाई एवं अन्य आवश्यक तैयारियां कराये जाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के बाद पुनः तैयारियों की समीक्षा की जायेगी। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण करने के साथ-साथ उनके संरक्षण व संवर्धन की व्यवस्था भी की जाये, जिससे उनको सूखने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस कार्य को सिर्फ विभागीय जिम्मेदारी के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति के संरक्षण हेतु अपनी नैतिक जिम्मेदारी के रूप में लें तथा ज्यादा से ज्यादा लोगो को भी वृक्षारोपण कराये जाने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> सभी सम्बंधित विभागों को निर्देशित किया गया कि जिन विभागों के द्वारा ज्यादा पौधरोपण किया जाना है, वे पहले से ही उसकी मांग वन विभाग को प्रेषित कर दें। उन्होंने रोपित किए जाने वाले  पौधों की सिंचाई की व्यवस्था । अधिकारियों को स्थानीय नर्सरी से समन्वय कर अच्छे गुणवत्ता के बड़े पौधों की उठान कराये जाने के लिए कहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     गंगा नदी एवं उनकी सहायक नदियों पर कोई भी स्थायी या अस्थायी कार्य किए जाने के पूर्व ही राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से अनुमति लिया जाना आवश्यक है, इसलिए कोई भी विभाग जैसे-पीडब्लूडी, सेतु निगम, एनएचआई व अन्य विभाग यदि कोई भी निर्माण कार्य गंगा नदी या उनकी सहायक नदियों पर या बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में करवाते है, तो कार्य के निर्माण से पूर्व ही इस सम्बंध में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से अनुमति प्राप्त करने हेतु जिला गंगा समिति के माध्यम से अनिवार्य रूप से प्रस्ताव प्रेषित करायें।  बैठक में जिलाधिकारी ने प्रभागीय वनाधिकारी को इको सेंसिटव जोन बनाये जाने हेतु स्थल का चयन सुनिश्चित कराते हुए इस सम्बंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी श्री अरविंद कुमार यादव सहित अन्य सम्बंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> जिला पर्यावरण समिति की बैठक में सिंगल यूज प्लास्टिक के विरूद्ध 05 जून से 21 जून,  2026 तक चलाये गये विशेष अभियान में नगर निगम व अन्य सम्बंधित विभागों के द्वारा की गयी कार्यवाही की जानकारी लेते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक के विरूद्ध लगातार कार्यवाही करने के निर्देश दिए है।  चाइनिज मांझे के भण्डारण, परिवहन व बिक्री पर रोक लगाये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के लिए कहा है। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी  अरविंद कुमार यादव सहित अन्य सम्बंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:46:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती में बनेगा एथेनालः 350 करोड की लागत से फैक्ट्री का निर्माण दसिया में शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केवाल्टरगंज सुगर मिल के बंद हो जाने के बाद जनपद में एथनाल उत्पादन के लिये बड़ी फैक्ट्री का निर्माण सल्टौआ गोपालपुर विकास खण्ड क्षेत्र के दसिया में हो रहा है। कारखाने के शीघ्र शुरू हो जाने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से लगभग 700 लोगों को सीधे और 2 हजार लोगों को अपरोक्ष रोजगार मिलेगा। अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल अधिकारी पी.एन. पाण्डेय ने बताया कि लगभग 350 करोड़ की लागत से बनने वाले कारखाने में एथनाल का निर्माण किया जायेगा</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि कारखाने में प्रदूषण नियंत्रण की पूरी व्यवस्था की गई है। बताया</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182274/ethanol-will-be-made-in-basti-construction-of-factory-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260628-wa0061.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केवाल्टरगंज सुगर मिल के बंद हो जाने के बाद जनपद में एथनाल उत्पादन के लिये बड़ी फैक्ट्री का निर्माण सल्टौआ गोपालपुर विकास खण्ड क्षेत्र के दसिया में हो रहा है। कारखाने के शीघ्र शुरू हो जाने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से लगभग 700 लोगों को सीधे और 2 हजार लोगों को अपरोक्ष रोजगार मिलेगा। अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल अधिकारी पी.एन. पाण्डेय ने बताया कि लगभग 350 करोड़ की लागत से बनने वाले कारखाने में एथनाल का निर्माण किया जायेगा</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि कारखाने में प्रदूषण नियंत्रण की पूरी व्यवस्था की गई है। बताया कि मक्का और चावल से एथनाल पैदा किया जायेगा। इससे जहां ऊर्जा संकट दूर होगा वहीं विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत सरकार की संस्तुति पर बन रहे कारखाने में भूजल यानी पानी से नहीं धान, मक्का और भूसी से इथेनाल बनेगा। कम्पनी का खुद का 7 मेगावट का पावर प्लांट, वायु प्रदूषण मुक्त 72 मीटर ऊँची चिमनी, लगभग 350 करोड़ की लागत से बनने वाली फैक्ट्री , 6 से 8 सौ कर्मचारी, जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानक पर खरा उतरने वाला प्लांट, सैकड़ों लोगों को होटल, चाय, पानी, बिस्कुट, सुर्ती बीड़ी, गुटखा जैसे दुकान खोलने वालों को अप्रत्यक्ष रोजगार देगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह पूंछे जाने पर कि कुछ लोग किस आधार पर फैक्ट्री निर्माण का विरोध कर रहे हैं निदेशक सुधीर जायसवाल ने बताया कि यह उनका अपना निजी दृष्टिकोण है। यहां फैक्ट्री पूरे मानक और नियमों के अनुसार हो रहा है। इससे क्षेत्र के किसानों और बेरोजगारों को सर्वाधिक लाभ होगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:33:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनजीटी सदस्य ने की पर्यावरणीय कार्यों की समीक्षा, समधा ताल पुनर्जीवन की सराहना</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य माननीय न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन एवं हरित विकास से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। बैठक में जिलाधिकारी शैलेष कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">समीक्षा के दौरान न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने एसटीपी से उपचारित जल का उपयोग पार्कों, उद्यानों एवं कृषि कार्यों में करने तथा भूजल की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181004/ngt-member-reviews-environmental-works-and-praises-samadha-tal-revitalization"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0047.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य माननीय न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन एवं हरित विकास से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। बैठक में जिलाधिकारी शैलेष कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">समीक्षा के दौरान न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने एसटीपी से उपचारित जल का उपयोग पार्कों, उद्यानों एवं कृषि कार्यों में करने तथा भूजल की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने जिलाधिकारी शैलेष कुमार के प्रयासों से संचालित समधा ताल पुनर्जीवन एवं संरक्षण योजना की विशेष सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। साथ ही प्लास्टिक मुक्त अभियान, जल संरक्षण एवं हरित विकास से जुड़े कार्यों की भी प्रशंसा की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक में नगर निकायों एवं संबंधित विभागों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ विशेष अभियान चलाने तथा लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविंद शुक्ल, अपर जिलाधिकारी शुभांगी शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक, प्रभागीय वनाधिकारी विवेक यादव समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181004/ngt-member-reviews-environmental-works-and-praises-samadha-tal-revitalization</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:41:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पृथ्वी दिवस: पर्यावरण संरक्षण की चेतना और मानव अस्तित्व का आधार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">हर वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता के लिए चेतावनी और संकल्प का प्रतीक है। यह दिन हमें यह समझाने का प्रयास करता है कि जिस पृथ्वी पर हम अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उसकी सुरक्षा और संतुलन बनाए रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आधुनिक युग में विज्ञान और तकनीक के विकास ने मानव जीवन को सरल और सुविधाजनक बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही हमने प्रकृति का अत्यधिक दोहन भी किया है, जिसके कारण आज पर्यावरण गंभीर संकट का सामना कर रहा है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176807/earth-day-is-the-consciousness-of-environmental-protection-and-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/world-earth-day.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">हर वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता के लिए चेतावनी और संकल्प का प्रतीक है। यह दिन हमें यह समझाने का प्रयास करता है कि जिस पृथ्वी पर हम अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उसकी सुरक्षा और संतुलन बनाए रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आधुनिक युग में विज्ञान और तकनीक के विकास ने मानव जीवन को सरल और सुविधाजनक बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही हमने प्रकृति का अत्यधिक दोहन भी किया है, जिसके कारण आज पर्यावरण गंभीर संकट का सामना कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस की शुरुआत वर्ष 1970 में अमेरिकी सीनेटर गैलॉर्ड नेल्सन द्वारा की गई थी। 1969 में कैलिफ़ोर्निया के सांता बारबरा में हुए भीषण तेल रिसाव ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया और उन्होंने महसूस किया कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने 22 अप्रैल 1970 को एक बड़े स्तर पर "टीच-इन" कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें लाखों लोगों ने भाग लिया। इस आंदोलन को सफल बनाने में डेनिस हेज़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह आयोजन इतना प्रभावशाली सिद्ध हुआ कि यह एक जन आंदोलन में परिवर्तित हो गया और इसके परिणामस्वरूप पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस मनाने का विशेष कारण आज की पर्यावरणीय परिस्थितियों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वर्तमान समय में पृथ्वी अनेक समस्याओं से जूझ रही है, जिनमें जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, वनों की कटाई, जैव विविधता का ह्रास और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन प्रमुख हैं। औद्योगिकीकरण और शहरीकरण ने जहां एक ओर विकास को गति दी है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के संतुलन को भी बिगाड़ दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक आपदाओं की संख्या और तीव्रता में वृद्धि हो रही है। ऐसी स्थिति में पृथ्वी दिवस हमें यह चेतावनी देता है कि यदि हमने समय रहते पर्यावरण की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाला भविष्य अत्यंत कठिन हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस का उद्देश्य केवल समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना नहीं है, बल्कि लोगों को समाधान के लिए प्रेरित करना भी है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों, अभियानों और गतिविधियों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थाओं में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और पर्यावरण से संबंधित संगोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। इसके माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन ला सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समय के साथ पृथ्वी दिवस एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। 1990 में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने लगा और आज यह 190 से अधिक देशों में व्यापक रूप से मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 2009 में 22 अप्रैल को "अंतर्राष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस" के रूप में मान्यता देकर इसकी वैश्विक पहचान को और सुदृढ़ किया। इसके अतिरिक्त, 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हर वर्ष पृथ्वी दिवस एक नई थीम के साथ मनाया जाता है, जो वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों को ध्यान में रखकर निर्धारित की जाती है। उदाहरण के लिए, 2025 की थीम "हमारी शक्ति, हमारा ग्रह" नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व को रेखांकित करती है। यह हमें यह संदेश देती है कि हमें पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के स्थान पर सौर, पवन और जल ऊर्जा जैसे स्वच्छ और टिकाऊ स्रोतों को अपनाना चाहिए, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस का महत्व इस बात में भी निहित है कि यह हमें व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित करता है। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संगठनों का कार्य नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। हम अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करके भी पर्यावरण की रक्षा में योगदान दे सकते हैं, जैसे प्लास्टिक का कम उपयोग करना, पानी और बिजली की बचत करना, कचरे का उचित निपटान करना और अधिक से अधिक पेड़ लगाना। ये छोटे कदम मिलकर एक बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस हमें यह भी सिखाता है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि हम केवल विकास पर ध्यान देंगे और पर्यावरण की उपेक्षा करेंगे, तो यह विकास स्थायी नहीं रहेगा। सतत विकास की अवधारणा इसी संतुलन पर आधारित है, जिसमें वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के हितों का भी ध्यान रखा जाता है। यह दिन हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का संदेश देता है, क्योंकि यही हमारे अस्तित्व की कुंजी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के समय में पृथ्वी दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह एक सतत आंदोलन बन चुका है, जो पूरे वर्ष लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करता है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने कार्यों के माध्यम से पृथ्वी पर क्या प्रभाव डाल रहे हैं और हम इसे कैसे सुधार सकते हैं। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि पृथ्वी हमारी संपत्ति नहीं है, बल्कि हम इसके संरक्षक हैं और हमें इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, पृथ्वी दिवस हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि यदि हम अपनी धरती को बचाना चाहते हैं, तो हमें अभी से प्रयास शुरू करने होंगे। यह केवल सरकारों या बड़े संगठनों का कार्य नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। जब हम सभी मिलकर इस दिशा में कार्य करेंगे, तभी हम एक स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण का निर्माण कर पाएंगे। यही पृथ्वी दिवस का वास्तविक उद्देश्य और सार है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:13:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सड़कें अब शुद्धिकरण का केंद्र: प्रदूषण को हराने वाला बायो-टावर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब दिल्ली घुटती नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब देती है—और यह जवाब किसी मशीन ने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवित प्रकृति ने दिया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बरसों से जहरीली हवा का बोझ ढोती राजधानी आज एक नई उम्मीद के साथ खड़ी है—माइक्रोएल्गी आधारित प्योरएयर टावर के रूप में। एयरोसिटी के पास एनएच</span>-48 <span lang="hi" xml:lang="hi">के व्यस्त कॉरिडोर पर स्थापित यह संरचना महज तकनीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विज्ञान और प्रकृति के अद्भुत संगम की जीवंत मिसाल है। सड़क के बीचों-बीच खड़ा यह “जीवित एयर प्यूरीफायर” न केवल प्रदूषण को थाम रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे ऑक्सीजन में बदलकर शहर को नई सांस दे रहा</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173468/roads-are-now-the-center-of-purification-bio-tower-that-defeats"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब दिल्ली घुटती नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब देती है—और यह जवाब किसी मशीन ने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवित प्रकृति ने दिया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बरसों से जहरीली हवा का बोझ ढोती राजधानी आज एक नई उम्मीद के साथ खड़ी है—माइक्रोएल्गी आधारित प्योरएयर टावर के रूप में। एयरोसिटी के पास एनएच</span>-48 <span lang="hi" xml:lang="hi">के व्यस्त कॉरिडोर पर स्थापित यह संरचना महज तकनीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विज्ञान और प्रकृति के अद्भुत संगम की जीवंत मिसाल है। सड़क के बीचों-बीच खड़ा यह “जीवित एयर प्यूरीफायर” न केवल प्रदूषण को थाम रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे ऑक्सीजन में बदलकर शहर को नई सांस दे रहा है। यह पहल साफ संकेत देती है कि आने वाला शहरी भविष्य कंक्रीट से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैविक समाधान पर आधारित होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सारे पारंपरिक उपाय बेअसर होकर ठहर गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह टावर एक शांत लेकिन प्रभावशाली क्रांति के रूप में उभरकर सामने आया। दिल्ली में पहले लगाए गए स्मॉग टावर बड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा-खपत वाले और सीमित प्रभाव वाले साबित हुए थे। इसके विपरीत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माइक्रोएल्गी प्योरएयर टावर सीधे उसी सड़क स्तर पर सक्रिय होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां प्रदूषण अपनी चरम सघनता पर होता है। यह न शोर करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न जटिल मशीनों पर निर्भर रहता है। इसके बजाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सूक्ष्म शैवालों की प्राकृतिक प्रक्रिया का उपयोग करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रदूषकों को अपने पोषण के रूप में ग्रहण करते हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रणाली केवल प्रदूषण को रोकती नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे उपयोगी संसाधन में परिवर्तित करती है— यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सूक्ष्मता ही असली ताकत बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब माइक्रोएल्गी का विज्ञान अपने प्रभाव से चौंकाता है—छोटा आकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर व्यापक और ठोस असर। ये सूक्ष्म जीव पानी में रहते हुए पेड़ों की तरह प्रकाश संश्लेषण करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कहीं अधिक तेज़ और दक्षता के साथ। सूर्य प्रकाश और एलईडी की सहायता से ये कार्बन डाइऑक्साइड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नाइट्रोजन ऑक्साइड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सल्फर ऑक्साइड तथा पीएम</span>2.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">व पीएम</span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कणों को अवशोषित करते हैं। शोध बताते हैं कि कुछ प्रजातियां पेड़ों की तुलना में </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">गुना अधिक कार्बन सोखने में सक्षम हैं। इस पूरी प्रक्रिया में न हानिकारक अपशिष्ट बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अतिरिक्त ऊर्जा लगती है—यह एक स्वाभाविक और सतत समाधान है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब एक छोटा-सा ढांचा ही “हरे फेफड़े” की ताकत समेट ले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब इस टावर की असली क्षमता सामने आती है। एक अकेला टावर सालाना लगभग </span>340 <span lang="hi" xml:lang="hi">किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर सकता है और करीब </span>15 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख लीटर ऑक्सीजन उत्पन्न करता है। इसका प्रभाव लगभग </span>15–20 <span lang="hi" xml:lang="hi">परिपक्व पेड़ों के बराबर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि यह केवल कुछ वर्ग मीटर जगह घेरता है। शहरी इलाकों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां जमीन सीमित है और पेड़ों को बढ़ने में वर्षों लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह टावर तुरंत सक्रिय होकर परिणाम देने लगता है। यह केवल हवा को शुद्ध नहीं करता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उत्पन्न बायोमास को खाद या बायोचार में बदलकर सर्कुलर इकोनॉमी का भी सशक्त हिस्सा बनता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब समाधान सिर्फ रोकने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रूपांतरित करने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी असली बदलाव जन्म लेता है—और यही नई सोच इस तकनीक में झलकती है। जहां पारंपरिक एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम प्रदूषण को फिल्टर में कैद कर आगे कचरे की नई समस्या खड़ी करते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं यह टावर उसी प्रदूषण को उपयोगी संसाधन में बदल देता है। यह एक बायोमिमेटिक फोटोबायोरिएक्टर है—यानी प्रकृति की कार्यप्रणाली से प्रेरित प्रणाली। इसकी ऊर्जा खपत न्यूनतम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रखरखाव सरल और कार्यप्रणाली सतत है। इस दृष्टि से यह समाधान केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आर्थिक रूप से भी कहीं अधिक टिकाऊ और व्यावहारिक है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब दूरदृष्टि और शोध की मजबूती मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी ऐसा नवाचार आकार लेता है जो वास्तव में असरदार हो। इस टावर के पीछे केवल तकनीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ठोस वैज्ञानिक सोच है। भारतीय वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स ने इसे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किया है। माइक्रोएल्गी की ऐसी प्रजातियां चुनी गई हैं जो दिल्ली की गर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धूल और उच्च प्रदूषण में भी टिक सकें। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वायु गुणवत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवशोषित कार्बन और उत्पन्न ऑक्सीजन की जानकारी देता है। यह डेटा-आधारित दृष्टिकोण भविष्य के शहरी नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब हवा ही ज़हर बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उसे शुद्ध करने वाला हर समाधान जीवनदाता बन जाता है—यही इस तकनीक की असली ताकत है। इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु प्रदूषण हर साल लाखों समयपूर्व मौतों का कारण बनता है। दिल्ली जैसे शहर में यह संकट और गहरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां सांस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय और न्यूरोलॉजिकल बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में सड़क स्तर पर प्रदूषण घटाने वाला यह टावर बच्चों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्गों और रोजाना सफर करने वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। यह केवल हवा साफ नहीं करता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सड़कें सिर्फ रास्ता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाधान बनने लगें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी भविष्य की असली दिशा स्पष्ट होती है—जहां विकास और पर्यावरण साथ-साथ आगे बढ़ते हैं। यदि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शहरों के हाईवे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्लाईओवर और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र प्रभावी “बायो-डिवाइडर” में बदल सकते हैं। यह न केवल प्रदूषण को नियंत्रित करेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शहरी हरियाली को एक नई पहचान और विस्तार देगा। सरकार और निजी क्षेत्र के मजबूत सहयोग से यह मॉडल देशभर में व्यापक रूप से लागू किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भारत अपने नेट-जीरो लक्ष्यों की ओर और भी तेज़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठोस और सतत कदम बढ़ा सकेगा।।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब बदलाव की शुरुआत छोटे कदमों से होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी बड़े भविष्य की नींव रखी जाती है—और यही इस पहल का सार है। यह संदेश स्पष्ट है कि समाधान कहीं दूर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे आसपास ही मौजूद हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस उन्हें समझने और अपनाने की जरूरत है। माइक्रोएल्गी प्योरएयर टावर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि प्रकृति के साथ तालमेल ही सबसे प्रभावी रास्ता है। दिल्ली की सड़कों पर खड़ा यह छोटा-सा टावर आने वाले समय में एक बड़े परिवर्तन का आधार बन सकता है। यह केवल तकनीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नई सोच का उद्घोष है—जहां विकास और पर्यावरण साथ-साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलन के साथ आगे बढ़ते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 17:01:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में सरकारी कार्यालयों की बदली टाइमिंग, निजी संस्थानों को वर्क फ्राम होम की एडवाइजरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Haryana News: वायु गुणवत्ता में गंभीर गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (AQMA) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के चौथे चरण को दिल्ली-एनसीआर में लागू किया है। इस आदेश के अनुपालन में गुरुग्राम जिले में राज्य सरकार और नगर निकायों के अधीन संचालित सभी सार्वजनिक कार्यालयों के समय में अस्थायी बदलाव किया गया है।</p>
<p>डीसी अजय कुमार ने रविवार को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए बताया कि राज्य सरकार के अधीन कार्यालय अब सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक कार्य करेंगे। वहीं, नगर निगम गुरुग्राम व मानेसर, नगर परिषद सोहना, पटौदी मंडी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164007/haryana-changed-timing-of-government-offices-in-haryana-work-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/haryana-office-timing.jpg" alt=""></a><br /><p>Haryana News: वायु गुणवत्ता में गंभीर गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (AQMA) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के चौथे चरण को दिल्ली-एनसीआर में लागू किया है। इस आदेश के अनुपालन में गुरुग्राम जिले में राज्य सरकार और नगर निकायों के अधीन संचालित सभी सार्वजनिक कार्यालयों के समय में अस्थायी बदलाव किया गया है।</p>
<p>डीसी अजय कुमार ने रविवार को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए बताया कि राज्य सरकार के अधीन कार्यालय अब सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक कार्य करेंगे। वहीं, नगर निगम गुरुग्राम व मानेसर, नगर परिषद सोहना, पटौदी मंडी और नगर पालिका फरुखनगर के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक खुलेंगे। यह व्यवस्था ग्रेप के चौथे चरण की अवधि तक प्रभावी रहेगी।</p>
<p>साथ ही, डीसी ने सभी निजी संस्थानों को अगले आदेश तक वर्क फ्राम होम अपनाने की एडवाइजरी जारी की है। आदेश के अनुसार, सार्वजनिक, नगर निकाय और निजी कार्यालयों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ऑनसाइट काम करने की अनुमति होगी, जबकि शेष कर्मचारियों को घर से कार्य करने की सुविधा दी जाएगी।</p>
<p>डीसी अजय कुमार ने कहा कि यह कदम वाहनों की आवाजाही और भीड़भाड़ को कम कर वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने नागरिकों से प्रशासन का पूर्ण सहयोग करने और प्रदूषण कम करने के लिए जारी सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 12:12:36 +0530</pubDate>
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