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                            <item>
                <title>बांग्लादेश डिपोर्ट किए गए कुछ लोगों को वापस भारत लाया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260523-wa0013-960x640.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की सदस्यता वाली पीठ से कहा कि सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। परिणाम के आधार पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम तदनुसार कदम उठाएंगे। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि इन व्यक्तियों को भारत वापस लाने में 8-10 दिन लग सकते हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख जुलाई में तय की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के 26 सितंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उच्च न्यायालय ने सुनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश निर्वासित करने के केंद्र सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था और इसे ‘अवैध’ करार दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले साल तीन दिसंबर को शीर्ष अदालत ने ‘मानवीय आधार’ पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को बांग्लादेश भेजे जाने के महीनों बाद भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी।अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल करने का निर्देश दिया था और बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती खातून को मुफ्त प्रसव की सुविधा सहित हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायालय ने 24 अप्रैल को केंद्र सरकार को अंतिम अवसर दिया और उसके अधिवक्ता को इस मामले में निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा। खातून के पिता भोदु शेख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कहा कि केंद्र सरकार का यह रवैया ‘कुछ हद तक अनुचित’ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने इस मामले में न्यायालय को अपने विचार नहीं बताए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">क्षेत्र के सेक्टर 26 में दो दशकों से अधिक समय से दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे इन परिवारों को पिछले साल 18 जून को बांग्लादेशी होने के संदेह में पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में 27 जून को सीमा पार धकेल दिया। कि निर्वासित किए गए छह नागरिकों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाया जाए और आदेश पर अस्थायी रोक लगाने की सरकार की अपील को खारिज कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:31:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक ओर यूएपीए में जमानत,दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद का मामला बड़ी पीठ को भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ओर यूएपीए में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत के मामले पर अब बड़ी बेंच फैसला करेगी। इस मामले में शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ज़ोर देकर कहा था कि इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। दूसरी ओर एक दूसरे मामले में अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी। यह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179982/on-one-hand-bail-in-uapa-on-the-other-hand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images10.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ओर यूएपीए में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत के मामले पर अब बड़ी बेंच फैसला करेगी। इस मामले में शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ज़ोर देकर कहा था कि इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। दूसरी ओर एक दूसरे मामले में अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद सामने आया था। सीजेआई सूर्यकांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश पारित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आतंकवाद और यूएपीए यानी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामलों में जमानत देने के नियमों पर अहम फ़ैसला सुना दिया। कोर्ट ने दिल्ली दंगे मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न देने वाले अपने पुराने फैसले पर सवाल उठाते हुए मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने यह आदेश दिया। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों- तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने की अंतरिम जमानत भी दे दी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में फरवरी 2020 में </span>CAA <span lang="hi" xml:lang="hi">विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इन दंगों में 50 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने कई लोगों पर आरोप लगाया कि उन्होंने दंगों की साज़िश रची थी। उमर खालिद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरजील इमाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तसलीम अहमद और खालिद सैफी समेत कई लोग यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए गए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट से कहा कि यूएपीए मामलों में जमानत के नियमों पर दोबारा विचार होना चाहिए। उन्होंने हाल के एक फ़ैसले पर सवाल उठाया। इससे पहले न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने नार्को-टेरर मामले में स्येद इफ्तिखार अंदरबी को जमानत देते हुए कहा था कि यूएपीए मामलों में भी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जमानत नियम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जेल अपवाद</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">। उन्होंने उमर खालिद वाले पुराने फ़ैसले पर संदेह जताया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एसजी राजू ने कहा कि यूएपीए जैसे गंभीर मामलों में सभी आरोपियों को एक जैसी छूट नहीं दी जा सकती है। हर मामले को अलग-अलग देखना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बहरहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि के ए नजीब वाले पुराने फैसले में दिए गए सिद्धांतों को लेकर अब भ्रम है। खासकर यूएपीए की धारा 43</span>D(<span lang="hi" xml:lang="hi">5) यानी जमानत के सख्त नियम और अनुच्छेद 21 यानी जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह तय करना जरूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि एक बेंच दूसरे बराबर की बेंच के फ़ैसले को आसानी से नहीं बदल सकती। क़ानून में स्पष्टता होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह मुद्दा मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा जा रहा है ताकि बड़ी बेंच बने और अंतिम फैसला दे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने के लिए अंतरिम जमानत मिल गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले इनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बता दें कि उमर खालिद और शरजील इमाम को अभी जमानत नहीं मिली है। उनका मामला अब बड़ी बेंच तय करेगी।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच 2020 दिल्ली दंगे के दो आरोपियों- तसलीम अहमद और खालिद सैफी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान आतंकवाद और </span>UAPA <span lang="hi" xml:lang="hi">मामलों में जमानत को लेकर मतभेद के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेज दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि अलग-अलग दो-जज की बेंचों के फैसले एक-दूसरे से उलट हैं। केंद्र सरकार ने सवाल उठाया कि क्या </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बेल नियम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जेल अपवाद है</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">वाला सिद्धांत आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में भी लागू होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर ट्रायल में देरी हो रही हो</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने 26/11 मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का उदाहरण दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू और वकील रजत नायर ने कोर्ट में कहा</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">अगर अजमल कसाब 7-8 साल जेल में रहने के बाद बेल मांगता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या उसे बेल दे देते</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सैकड़ों गवाह हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबूत इकट्ठा करने में समय लगता है। इसी तरह अगर हाफिज सईद पाकिस्तान से आकर ट्रायल में 5 साल जेल में रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या सिर्फ देरी के आधार पर उसे बेल दे देंगे</span>?' <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का कहना है कि हर केस के तथ्यों को देखकर बेल देनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि सिर्फ जेल में कितना समय बीता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस आधार पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फ़ैसला आने वाले समय में आतंकवाद और यूएपीए से जुड़े सभी जमानत मामलों पर असर डालेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए जमानत क़ानून को और साफ़ करने के लिए बड़े फ़ैसले की तैयारी कर ली है। दो आरोपियों को राहत मिल गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उमर खालिद समेत बड़े सवाल अब बड़ी बेंच के सामने हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक अन्य मामले में  सीजेआई सूर्यकांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने  अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने आज जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी।पीठ ने यह भी कहा कि अगर अपीलकर्ता चल रहे मुक़दमे में सहयोग करने में नाकाम रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे दी गई राहत का दुरुपयोग माना जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खास बात यह है कि कोर्ट ने पहले समय-समय पर आदेश जारी किए थे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि याचिकाकर्ता के खिलाफ गवाही देने वाले अहम/सुरक्षित गवाह बिना किसी डर के अपने बयान दर्ज करा सकें (याचिकाकर्ता की रिहाई से पहले)। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज की सुनवाई के दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने बताया कि हालांकि कुछ अहम/सुरक्षित गवाहों की जांच अभी बाकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनके बयान सह-आरोपी की भूमिका से जुड़े हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि याचिकाकर्ता से।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखते हुए कि कुछ सह-आरोपियों को ज़मानत मिल चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कि मुक़दमे के पूरा होने में समय लग सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हिरासत में पहले ही बिताई जा चुकी अवधि को ध्यान में रखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने याचिकाकर्ता को ज़मानत दे दी। ज़मानत बांड संबंधित </span>NIA <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमा करने का निर्देश दिया गया। उक्त अदालत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">याचिकाकर्ता की संबंधित पुलिस थाने में उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी मर्ज़ी के अनुसार शर्तें लगाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके वकील के अनुरोध पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने याचिकाकर्ता को </span>NIA <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत से वर्चुअली (सह-आरोपियों की तरह) पेश होने की अनुमति मांगने की भी छूट दी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">इस अनुरोध पर अदालत द्वारा कानून के अनुसार विचार किया जाएगा। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> बड़ी साज़िश का मास्टरमाइंड विभिन्न आतंकवादी संगठनों के बड़े नेता थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें लश्कर-ए-तैयबा (</span>LeT), <span lang="hi" xml:lang="hi">हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन (</span>HM), <span lang="hi" xml:lang="hi">अल-बद्र और पाकिस्तान में मौजूद अन्य संगठन शामिल थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चार्जशीट में आगे आरोप लगाया गया है कि यह साज़िश अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद रची गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका मकसद जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ भारत के अन्य हिस्सों में भी आतंकवाद की घटनाओं को फिर से भड़काना था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य एजेंसी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवादी समूह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान में मौजूद अपने मददगारों और नेताओं के साथ-साथ भारत के भीतर मौजूद अपने ओवर-ग्राउंड वर्करों (</span>OGWs) <span lang="hi" xml:lang="hi">के सहयोग से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसानी से प्रभावित होने वाले स्थानीय युवाओं को अपने प्रभाव में लेने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने में शामिल थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि उन्हें आतंकवाद की घटनाओं में शामिल होने के लिए भर्ती और प्रशिक्षित किया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">STF <span lang="hi" xml:lang="hi">ने बताया कि यह गैंग केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सचिवालय सुरक्षा बल और  ब राइफल्स की भर्ती परीक्षाओं में धांधली कर रहा था. आरोपियों ने ऑनलाइन परीक्षा सिस्टम को तकनीकी तरीके से प्रभावित कर उम्मीदवारों तक सही जवाब पहुंचाने की व्यवस्था बना रखी थी. बताया गया कि प्रत्येक उम्मीदवार से परीक्षा पास कराने के लिए करीब 4 लाख रुपये वसूले जाते थे.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सीधे </span>SSC <span lang="hi" xml:lang="hi">के सर्वर को हैक नहीं किया था. इसके बजाय परीक्षा केंद्र पर प्रॉक्सी सर्वर इंस्टॉल किया गया था. स्क्रीन शेयरिंग एप्लिकेशन के जरिए प्रश्नपत्र बाहर बैठे सॉल्वरों तक पहुंचाया जाता था. वहां से सवाल हल कर उम्मीदवारों को सही जवाब भेजे जाते थे.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस ने बताया कि अरुण कुमार तकनीकी काम संभालता था और वही प्रॉक्सी सर्वर सिस्टम को ऑपरेट करता था. </span>STF <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है. एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इसी तरीके का इस्तेमाल अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी किया गया था.</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:29:21 +0530</pubDate>
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                <title>गैंगस्टर से सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की संपत्ति केवल इस आधार पर जब्त नहीं की जा सकती कि वह किसी गैंगस्टर का रिश्तेदार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति जब्ती के लिए अपराध और संपत्ति के बीच सीधा संबंध (नेक्सस) साबित होना जरूरी है। जस्टिस राज बीर सिंह की पीठ ने मंसूर अंसारी की अपील स्वीकार करते हुए उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश रद्द कर दिया। मंसूर अंसारी, कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा मंसूर अंसारी की दुकानों और भवन को 'बेनेमी संपत्ति' बताते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173551/allahabad-high-court-will-not-confiscate-property-from-gangster-merely"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/allahabad-high-court2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की संपत्ति केवल इस आधार पर जब्त नहीं की जा सकती कि वह किसी गैंगस्टर का रिश्तेदार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति जब्ती के लिए अपराध और संपत्ति के बीच सीधा संबंध (नेक्सस) साबित होना जरूरी है। जस्टिस राज बीर सिंह की पीठ ने मंसूर अंसारी की अपील स्वीकार करते हुए उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश रद्द कर दिया। मंसूर अंसारी, कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा मंसूर अंसारी की दुकानों और भवन को 'बेनेमी संपत्ति' बताते हुए जब्त किया गया, जिसे गाजीपुर के विशेष न्यायालय (गैंगस्टर एक्ट) ने भी सही ठहराया।</p>
<p style="text-align:justify;">हाइकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के तहत संपत्ति जब्त करने की शक्ति असीमित नहीं है। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि संबंधित व्यक्ति ने गैंग के सदस्य या संचालक के रूप में किसी अपराध से अर्जित धन से संपत्ति बनाई।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा, “सिर्फ आरोप या संदेह के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं की जा सकती। अपराध और संपत्ति के बीच स्पष्ट संबंध होना अनिवार्य है।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वास करने का कारण केवल शक या अंदाजे पर आधारित नहीं हो सकता बल्कि ठोस साक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए। इस मामले में अदालत ने पाया कि राज्य ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो कि संपत्ति अपराध से अर्जित धन से बनाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि कानून के तहत यह जरूरी नहीं है कि संपत्ति वापस पाने के लिए व्यक्ति खुद अपनी आय का स्रोत साबित करे। पहले राज्य को यह सिद्ध करना होगा कि संपत्ति अपराध से जुड़ी है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मंसूर अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाइकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल मुख्तार अंसारी का रिश्तेदार होने के आधार पर संपत्ति जब्त करना पूरी तरह गलत है। अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट और स्पेशल कोर्ट के आदेशों को मनमाना और बिना आधार बताते हुए रद्द कर दिया और राज्य सरकार को तत्काल संपत्ति मुक्त करने का निर्देश दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 21:06:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेशनल लोक अदालत दिनांक 21.मई को- हाईकोर्ट इलाहाबाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p>  </p>
<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong><br /><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></p>
<p>सचिव, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, इलाहाबाद ने बताया है कि दिनांक 21.05.2023 (दिन रविवार) को मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद में लम्बित मोटर दुर्घटना प्रतिकर से सम्बंधित अपीलें, पारिवारिक मामले, द्वितीय अपील (सेकेण्ड अपील) एवं ऐसे वाद जो मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष विचाराधीन है तथा सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित किये जा सकते है, को नेशनल लोक अदालत में सूचीबद्ध कर निस्तारित किया जायेगा।</p>
<p>विद्वान अधिवक्तागण व वादकारीगण से अपेक्षा की जाती है कि अपने उक्त प्रकार के मामलों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129179/national-lok-adalat-on-21st-may-%E2%80%93-high-court-allahabad"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/नेशनल-लोक-अदालत-दिनांक-21.मई-को--हाईकोर्ट-इलाहाबाद.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p> </p>
<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong><br /><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></p>
<p>सचिव, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, इलाहाबाद ने बताया है कि दिनांक 21.05.2023 (दिन रविवार) को मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद में लम्बित मोटर दुर्घटना प्रतिकर से सम्बंधित अपीलें, पारिवारिक मामले, द्वितीय अपील (सेकेण्ड अपील) एवं ऐसे वाद जो मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष विचाराधीन है तथा सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित किये जा सकते है, को नेशनल लोक अदालत में सूचीबद्ध कर निस्तारित किया जायेगा।</p>
<p>विद्वान अधिवक्तागण व वादकारीगण से अपेक्षा की जाती है कि अपने उक्त प्रकार के मामलों को नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित करवाने हेतु अपना प्रार्थना पत्र सचिव, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, उच्च न्यायालय इलाहाबाद को सम्बोधित कर, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के मेल आई0डी0  hclsc@allahabadhighcourt.in पर अथवा उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के कार्यालय में प्रेषित/प्रस्तुत करें।</p>
<p>कृपया अपने मुकदमें को समझौते के आधार पर त्वरित निस्तारण हेतु नेशनल लोक अदालत का लाभ उठायें, विस्तृत जानकारी हेतु hclsc@allahabadhighcourt.in अथवा निम्नलिखित हेल्प लाइन फोन नम्बर 8004029620, 9305179051 पर एक सप्ताह के अंदर सम्पर्क करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/129179/national-lok-adalat-on-21st-may-%E2%80%93-high-court-allahabad</link>
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                <pubDate>Tue, 09 May 2023 20:56:02 +0530</pubDate>
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