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                <title>यूपीएससी रिजल्ट - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>यूपीएससी रिजल्ट RSS Feed</description>
                
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                <title>IAS Success: डॉक्टर बनने का टूटा सपना, 120 दिन की तैयारी से तरुणी पांडे बनीं आईएएस अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: मिडिल क्लास परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला भी ले लिया था और दूसरे साल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। जीवन के कई उतार-चढ़ावों के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल है।</p>
<h4><strong>पश्चिम बंगाल में जन्म, झारखंड में परवरिश</strong></h4>
<p>तरुणी का जन्म पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में हुआ, लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172451/ias-success-broken-dream-of-becoming-a-doctor-taruni-pandey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(31).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: मिडिल क्लास परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला भी ले लिया था और दूसरे साल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। जीवन के कई उतार-चढ़ावों के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल है।</p>
<h4><strong>पश्चिम बंगाल में जन्म, झारखंड में परवरिश</strong></h4>
<p>तरुणी का जन्म पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में हुआ, लेकिन उनका बचपन झारखंड के जामताड़ा में बीता। सीमित संसाधनों वाले मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी ने 10वीं तक की पढ़ाई प्राइवेट स्कूल में की। आर्थिक तंगी के कारण 10वीं के बाद उन्हें सरकारी स्कूल में दाखिला लेना पड़ा। बावजूद इसके, वे पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं।</p>
<h4><strong>एमबीबीएस अधूरा, फिर IGNOU से नई शुरुआत</strong></h4>
<p>12वीं के बाद उनका चयन सिक्किम के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए हो गया। डॉक्टर बनने का सपना सच होता नजर आ रहा था, लेकिन दूसरे वर्ष में अचानक तबीयत खराब होने के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और घर लौटना पड़ा।</p>
<p>इसके बाद उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Indira Gandhi National Open University</span></span> (IGNOU) से ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। हालांकि उस समय तक उन्हें अपने जीवन की नई दिशा का अंदाजा नहीं था।</p>
<h4><strong>2016 का हादसा बना टर्निंग पॉइंट</strong></h4>
<p>साल 2016 में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी बड़ी बहन के पति, जो <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Central Reserve Police Force</span></span> (CRPF) में असिस्टेंट कमांडेंट थे, श्रीनगर में शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।</p>
<p>बहन की नौकरी से जुड़े मामलों में अधिकारियों से मिलने के दौरान तरुणी को प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारी और प्रभाव का एहसास हुआ। तभी उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया।</p>
<h4><strong>बिना कोचिंग, सिर्फ 120 दिन की तैयारी</strong></h4>
<p>तरुणी ने कभी कोचिंग नहीं ली थी और सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। आयु सीमा की वजह से यह उनका पहला और अंतिम प्रयास था। उन्होंने यूट्यूब वीडियो, नोट्स और किताबों की मदद से करीब 120 दिन तैयारी की।</p>
<p>साल 2021 में उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Union Public Service Commission</span></span> (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 14वीं रैंक हासिल कर IAS कैडर प्राप्त किया।</p>
<p>रिजल्ट आने का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार पल बन गया। शाम को परिणाम मिलने के बाद उन्होंने अपनी मां के घर लौटने का इंतजार किया और फिर रात में परिवार को खुशखबरी दी। बहन की आंखों में आंसू थे, भाई को यकीन नहीं हो रहा था, मां खुशी से नाच रही थीं और पिता भावुक होकर रो पड़े।</p>
<p>तरुणी ने उन पलों को डिजिटल मेमोरी में कैद किया और आज भी उन्हें अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानती हैं।</p>
<h4><strong>वर्तमान पद</strong></h4>
<p>वर्तमान में तरुणी पांडे दिल्ली स्थित संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत भारतीय संचार वित्त सेवा (IP&amp;TAFS) में ग्रुप ‘A’ अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 12:22:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 6 साल में मिली 12 सरकारी नौकरी, पढ़ें पटवारी से IPS अफसर बनने तक का सफर </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Success Story: 3 अप्रैल 1988 का दिन राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील के छोटे से गाँव रायसर में एक बच्चे के जन्म के रूप में याद किया जाएगा। उसके पिता ऊंटगाड़ी चलाते थे और घर चलाने के लिए मजदूरी करते थे। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, और बचपन में वह लड़का मवेशियों के गले में बंधी जंजीर पकड़कर उन्हें चराने जाता था।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">गरीबी से निकलने की ठानी और सरकारी नौकरी का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">बचपन से ही उस बच्चे को एहसास हो गया कि अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के लिए उसे कड़ी मेहनत करनी होगी।</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163709/success-story-got-12-government-jobs-in-6-years-read"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/success-story-(16).jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Success Story: 3 अप्रैल 1988 का दिन राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील के छोटे से गाँव रायसर में एक बच्चे के जन्म के रूप में याद किया जाएगा। उसके पिता ऊंटगाड़ी चलाते थे और घर चलाने के लिए मजदूरी करते थे। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, और बचपन में वह लड़का मवेशियों के गले में बंधी जंजीर पकड़कर उन्हें चराने जाता था।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">गरीबी से निकलने की ठानी और सरकारी नौकरी का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">बचपन से ही उस बच्चे को एहसास हो गया कि अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के लिए उसे कड़ी मेहनत करनी होगी। शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने सरकारी नौकरी की तैयारी में खुद को झोंक दिया। उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं था। पहली सफलता तब मिली जब उसने लेखपाल (पटवारी) भर्ती परीक्षा पास की और पटवारी बन गया। लेकिन उसके सपनों की मंजिल सिर्फ इतना ही नहीं थी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">आईपीएस बनने का कठिन सफर</span></strong></p>
<p><span class="cf0">पटवारी बनने के बाद भी प्रेमसुख देलू ने सभी सरकारी नौकरियों के फॉर्म भरे और महज छह साल के भीतर 12 अलग-अलग सरकारी विभागों की प्रवेश परीक्षा क्वालीफाई कर ली। साल 2015 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी और पूरे देश में 170वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के साथ उनका चयन आईपीएस के रूप में हुआ। आज प्रेमसुख देलू गुजरात के जामनगर में एसपी के पद पर तैनात हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">असिस्टेंट जेलर और लेक्चरर के रूप में भी काम किया</span></strong></p>
<p><span class="cf0">अपने संघर्ष के दौरान प्रेमसुख ने राजस्थान में असिस्टेंट जेलर के रूप में नियुक्ति पाई। इसके अलावा तहसीलदार और स्कूल लेक्चरर के रूप में भी काम किया। राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित ग्राम सेवक परीक्षा में उन्हें दूसरा स्थान मिला। सब इंस्पेक्टर के रूप में चयन हुआ, लेकिन उन्होंने अन्य पदों को भी छोड़कर शिक्षा विभाग में योगदान दिया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">हिम्मत और मेहनत से बनी मिसाल</span></strong></p>
<p><span class="cf0">प्रेमसुख देलू का परिवार बहुत पढ़ा-लिखा नहीं था; उनकी बड़ी बहन ने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा। लेकिन प्रेमसुख ने अपने हौसले और मेहनत से वो मुकाम हासिल किया, जिसका आज पूरे देश में सम्मान है। आईपीएस बनने के बाद उन्हें गुजरात कैडर मिला और उनकी पहली पोस्टिंग अमरेली में एसीपी के रूप में हुई।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 13:07:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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