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                <title>India Weather News - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>India Weather News RSS Feed</description>
                
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                <title>पर्याप्त संसाधनों के बाद भी बाढ़ (अतिवृष्टि) और सूखे(अनावृष्टि) स्थिति हर वर्ष क्यों</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत भौगोलिक तौर पर बड़ा विशाल का देश है। जहां एक ओर हमारे पास विश्वस्तरीय वैज्ञानिक संस्थान, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, उपग्रह तकनीक, विशाल प्रशासनिक तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए अलग मंत्रालय है, तो दूसरी ओर हर वर्ष भीषण गर्मी, सूखा, अतिवृष्टि और बाढ़ लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर देते हैं। जब संसाधनों की कमी नहीं है, तब तैयारी में कमी और इतनी जानमाल का नुकसान क्यों क्यों दिखाई देता है?</p>
<p style="text-align:justify;">यह समस्या किसी एक शहर, राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के अनेक हिस्से भीषण लू और सूखे से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182832/floods-excessive-rainfall-and-droughts-despite-adequate-resources"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/drought_and_flood_750_1563354640_749x421.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत भौगोलिक तौर पर बड़ा विशाल का देश है। जहां एक ओर हमारे पास विश्वस्तरीय वैज्ञानिक संस्थान, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, उपग्रह तकनीक, विशाल प्रशासनिक तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए अलग मंत्रालय है, तो दूसरी ओर हर वर्ष भीषण गर्मी, सूखा, अतिवृष्टि और बाढ़ लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर देते हैं। जब संसाधनों की कमी नहीं है, तब तैयारी में कमी और इतनी जानमाल का नुकसान क्यों क्यों दिखाई देता है?</p>
<p style="text-align:justify;">यह समस्या किसी एक शहर, राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के अनेक हिस्से भीषण लू और सूखे से जूझते हैं, वहीं असम, बिहार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल तथा महानगरों में कुछ घंटों की बारिश भी बाढ़ का रूप ले लेती है। हाल के दिनों में हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने सड़कें, पुल और गांवों को भारी नुकसान पहुँचाया। इसी समय देश के कई भागों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप भी देखने को मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हमारी विकास नीति, प्रशासनिक तैयारी और दीर्घकालिक योजना की परीक्षा भी है जब मौसम विभाग कई दिन पहले भारी वर्षा, लू और चक्रवात की चेतावनी जारी करता रहता है, तब स्थानीय प्रशासन समय रहते पर्याप्त तैयारी में क्यों नहीं जुट पाता है? अक्सर राहत कार्य आपदा आने के बाद शुरू होते हैं। यदि पहले से जल निकासी की व्यवस्था, सुरक्षित आश्रय, पेयजल, चिकित्सा दल और आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा दी जाए, तो जन-धन की हानि काफी कम की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी बड़ी समस्या हमारी अनियोजित शहरीकरण की है। शहरों के तालाब, नाले और जलग्रहण क्षेत्र पाटकर भवन खड़े कर दिए गए। नदियों के प्राकृतिक मार्ग पर अतिक्रमण हुआ परिणामस्वरूप कुछ घंटों की तेज बारिश भी शहरों को जलमग्न कर देती है। दूसरी ओर वर्षा का वही पानी भूजल में नहीं समा पाता और कुछ ही महीनों बाद वही क्षेत्र जल संकट से जूझने लगता है। विडंबना यह है कि जिस पानी को बाढ़ के समय हम अभिशाप मानते हैं, उसी पानी की एक-एक बूंद के लिए गर्मियों में तरसते हैं। यदि बड़े पैमाने पर वर्षा जल संचयन, छोटे बाँध, तालाबों का पुनर्जीवन, चेक डैम और जल संरक्षण के कार्य निरंतर किए जाएँ तो बाढ़ का पानी भी भविष्य का अमृत बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब वर्षा कम दिनों में अधिक तीव्रता से होती है और गर्मी की अवधि अधिक लंबी तथा अधिक प्रचंड होती जा रही है। यही कारण है कि कभी तापमान 48 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है तो कहीं कुछ ही घंटों में महीनों जितनी वर्षा हो जाती है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि चरम मौसम की घटनाएँ अब नई सामान्य स्थिति बनती जा रही हैं।इसके बावजूद हमारी अधिकांश योजनाएँ अभी भी पुराने मौसम चक्र को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। शहरों की जल निकासी व्यवस्था दशकों पुरानी है, ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के कार्य पर्याप्त नहीं हैं और नदी तटों पर निर्माण आज भी जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपदा प्रबंधन का अर्थ केवल राहत सामग्री बाँटना नहीं है। वास्तविक आपदा प्रबंधन वह है जिसमें आपदा आने से पहले जोखिम कम कर दिया जाए। विकसित देशों में पूर्व चेतावनी, सामुदायिक प्रशिक्षण, नियमित मॉक ड्रिल, आधुनिक संचार व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय प्रणाली पर विशेष बल दिया जाता है। भारत में भी इन व्यवस्थाओं को गाँव-गाँव और वार्ड स्तर तक पहुँचाने की आवश्यकता है। सरकारों की जवाबदेही जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही समाज की भी। जल स्रोतों को बचाना, वृक्षारोपण करना, प्लास्टिक और कचरे से नालियाँ न भरना, वर्षा जल संचयन अपनाना तथा स्थानीय जलाशयों का संरक्षण करना नागरिकों का भी कर्तव्य है। यदि समाज और शासन मिलकर कार्य करें, तभी स्थायी समाधान संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञ बार-बार यह भी कहते हैं कि हर जिले का अलग जलवायु अनुकूलन योजना तैयार होना चाहिए। जिन क्षेत्रों में सूखा अधिक पड़ता है वहाँ जल संरक्षण और सूखा-रोधी खेती को बढ़ावा मिले, जबकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नदी प्रबंधन, तटबंधों का वैज्ञानिक रखरखाव, जल निकासी और सुरक्षित पुनर्वास की स्थायी व्यवस्था हो।हाल के वर्षों में यह भी स्पष्ट हुआ है कि केवल राहत कोष बढ़ाने से समस्या समाप्त नहीं होगी। आवश्यकता ऐसी विकास नीति की है जिसमें सड़क, पुल, भवन, कॉलोनियाँ और औद्योगिक क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को ध्यान में रखकर बनाए जाएँ। अस्पताल, विद्यालय, बिजली व्यवस्था और संचार तंत्र भी आपदा सहनशील होने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अंततः प्रश्न संसाधनों का नहीं, बल्कि दूरदृष्टि, इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन का है। यदि हम हर वर्ष बाढ़ और सूखे के बाद केवल नुकसान का आकलन करते रहेंगे, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और विकराल होगा। लेकिन यदि हम आज से जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक योजना, स्थानीय भागीदारी और पूर्व तैयारी को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना लें, तो आपदाओं की विभीषिका को काफी हद तक कम किया जा सकता है।प्रकृति हमें हर वर्ष चेतावनी दे रही है। अब निर्णय हमें करना है कि हम केवल राहत बाँटने वाला राष्ट्र बनना चाहते हैं या आपदाओं से पहले तैयारी करने वाला दूरदर्शी राष्ट्र। समय की यही सबसे बड़ी पुकार है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 21:56:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तपता मार्च, सूखता पानी: क्या हम असली समस्या से भाग रहे हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह की हवा में अब वसंत की ठंडक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की तीखी आहट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही हाल कई शहरों में फैल चुका है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दिल्ली में पारा</span>  35.7°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंचा – पहले सप्ताह का </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का सबसे गर्म मार्च – जबकि गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदर्भ और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान</span>  38-42°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच गया। लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल, इंदौर जैसे शहर भी इस असामान्य गर्मी की चपेट में हैं। यह क्षणिक बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती जलवायु की स्पष्ट तस्वीर है जो पूरे देश की दिनचर्या</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173411/hot-march-drying-water-are-we-running-away-from-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/drought_cape_town_932983790.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह की हवा में अब वसंत की ठंडक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की तीखी आहट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही हाल कई शहरों में फैल चुका है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दिल्ली में पारा</span> 35.7°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंचा – पहले सप्ताह का </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का सबसे गर्म मार्च – जबकि गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदर्भ और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान</span> 38-42°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच गया। लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल, इंदौर जैसे शहर भी इस असामान्य गर्मी की चपेट में हैं। यह क्षणिक बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती जलवायु की स्पष्ट तस्वीर है जो पूरे देश की दिनचर्या में समा रही है। जो मार्च कभी हल्की धूप और सुकून का महीना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब तपिश और सूखेपन का अनुभव बन गया है। यह बदलाव अचानक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि लंबे समय की अनदेखी का नतीजा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हम ‘नया सामान्य’ मानने लगे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च के शुरुआती दिनों में ही बढ़ती गर्मी ने मौसम की पुरानी धारणाएं तोड़ दी हैं। जो तपिश कभी अप्रैल–मई तक सीमित थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब पहले ही सप्ताह में रिकॉर्ड बना रही है। यह सिर्फ समय का बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन का संकेत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया गया। चिंताजनक यह है कि पहाड़ी क्षेत्र भी अब इससे अछूते नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साफ है कि जलवायु परिवर्तन सीमाएं पार कर चुका है। यह फैलता संकट हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है और हमें सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या हमने प्रकृति से अपना संतुलन खो दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट भी तेजी से गहराता जा रहा है। बड़े जलाशयों का घटता स्तर किसी सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि गंभीर असंतुलन का संकेत है। मार्च में ही जब पानी आधा रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले महीनों का संकट साफ दिखाई देता है। इसका असर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांवों में किसान फसलों को बचाने के लिए जूझ रहे हैं। नदियां कमजोर पड़ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूजल नीचे जा रहा है और पानी की हर बूंद की अहमियत बढ़ती जा रही है। यह हालात स्पष्ट करते हैं कि जलवायु परिवर्तन केवल गर्मी नहीं बढ़ा रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारे जल संसाधनों को भी तेजी से खत्म कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तापमान और प्रदूषण का साथ इस संकट को और खतरनाक बना रहा है—एक ऐसा दोहरा प्रहार जो शरीर और पर्यावरण दोनों को प्रभावित कर रहा है। गर्मी बढ़ते ही हवा में मौजूद जहरीले कण और सक्रिय हो जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। दिल्ली और आसपास की खराब होती हवा यह दिखा रही है कि समस्या सिर्फ गर्मी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसी हवा की है जिस पर जीवन निर्भर है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्गों और बीमारों पर पड़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अस्पतालों में बढ़ती भीड़ संकेत है कि यह अब पर्यावरण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे हालात में वर्ल्ड बैंक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा क्लीन एयर प्रोजेक्ट (</span>300 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मिलियन)</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राहत की उम्मीद जगाता है। साफ हवा के लिए मॉनिटरिंग नेटवर्क का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि और उद्योग सुधार सकारात्मक कदम हैं। लेकिन असली सवाल यही है कि क्या ये पर्याप्त हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या हम सिर्फ ऊपर-ऊपर से समस्या को संभाल रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉनिटरिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और कृषि सुधार जरूरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर जब तक ये व्यापक और दीर्घकालिक नीति से नहीं जुड़ते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक इनका असर सीमित ही रहेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक चुनौती उन जड़ों पर प्रहार करने की है जहां से यह संकट पैदा हो रहा है। तेज औद्योगिकीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवाश्म ईंधनों पर बढ़ती निर्भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों की कटाई और अव्यवस्थित शहरी विस्तार ने प्राकृतिक संतुलन को गहराई से बिगाड़ दिया है। फिर भी हम प्रदूषण को मौसमी मानकर टाल देते हैं और गर्मी को अस्थायी असुविधा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ने साफ कर दिया है कि यह सोच अब खतरे से खाली नहीं। जब असामान्यता ही सामान्य लगने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसका मतलब है कि हमने समस्या को स्वीकार तो कर लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उससे लड़ने की तैयारी अब भी अधूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बदलते दौर का सबसे भारी असर आम लोगों की जिंदगी पर दिख रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां रोजमर्रा अब सहज नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष बन गई है। एक साधारण परिवार के लिए पानी बचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली संभालना और स्वास्थ्य सुरक्षित रखना लगातार चुनौती है। बच्चों का बाहर खेलना घट गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना जोखिम भरा है और कामकाजी लोगों के लिए काम की गति बनाए रखना कठिन हो रहा है। यह सिर्फ पर्यावरणीय संकट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता को भी गहरा कर रहा है—जहां साधन वाले खुद को बचा लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कमजोर वर्ग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे अहम सवाल यही है कि क्या हम सब कुछ देखते हुए भी अनदेखा कर रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार चेतावनियां सामने हैं—बढ़ता तापमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक रिपोर्टें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौसम के संकेत—सब एक ही खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके बावजूद हमारी प्रतिक्रिया अक्सर सतही ही रहती है। हम तात्कालिक राहत के उपाय अपनाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे ठंडक के लिए एसी या पानी का अस्थायी इंतजाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने से बचते हैं। यह सोच हमें कुछ समय जरूर दे सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर समस्या का हल नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब जरूरत है कि इस संकट को पूरी गंभीरता से स्वीकार कर ठोस बदलाव की दिशा में आगे बढ़ा जाए। स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल संरक्षण को प्राथमिकता देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित क्षेत्र बढ़ाना और नीतियों में सख्ती लाना अब विकल्प नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनिवार्यता बन चुके हैं। साथ ही हर व्यक्ति की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि छोटे प्रयास मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर अब भी हम नहीं चेते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा जाएगा। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की यह तपिश केवल एक मौसम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य का संकेत है—अब तय हमें करना है कि हम इसे चेतावनी समझते हैं या अपनी नियति।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:39:18 +0530</pubDate>
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                <title>Weather Update: देश के इन राज्यों में होगी जोरदार बारिश, IMD ने अलर्ट किया जारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p><p><span class="cf0">Weather Update: देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम इस समय अपने अलग-अलग रंग दिखा रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है तेजी से सक्रिय हो रहा पश्चिमी विक्षोभ। इसके प्रभाव से कहीं बर्फबारी हो रही है, कहीं मानसून के बाद भी बारिश जारी है, तो कहीं तापमान में तेज गिरावट देखने को मिल रही है।</span></p><p><span class="cf0">दिल्ली एनसीआर में आधा दिसंबर बीत जाने के बावजूद अभी तक कड़ाके की ठंड नहीं आई थी, लेकिन सुबह-शाम की ठिठुरन और प्रदूषण की चादर लोगों को परेशान कर रही थी। भारतीय मौसम विभाग (</span><span class="cf1">IMD) </span><span class="cf0">की नई भविष्यवाणी के अनुसार आने वाले दिनों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163705/weather-update-there-will-be-heavy-rain-in-these-states"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/weather-update-(9).jpg" alt=""></a><br /><p></p><p><span class="cf0">Weather Update: देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम इस समय अपने अलग-अलग रंग दिखा रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है तेजी से सक्रिय हो रहा पश्चिमी विक्षोभ। इसके प्रभाव से कहीं बर्फबारी हो रही है, कहीं मानसून के बाद भी बारिश जारी है, तो कहीं तापमान में तेज गिरावट देखने को मिल रही है।</span></p><p><span class="cf0">दिल्ली एनसीआर में आधा दिसंबर बीत जाने के बावजूद अभी तक कड़ाके की ठंड नहीं आई थी, लेकिन सुबह-शाम की ठिठुरन और प्रदूषण की चादर लोगों को परेशान कर रही थी। भारतीय मौसम विभाग (</span><span class="cf1">IMD) </span><span class="cf0">की नई भविष्यवाणी के अनुसार आने वाले दिनों में राहत नहीं मिलने वाली है, बल्कि सर्दी का असर और बढ़ने वाला है। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बारिश होगी, जिससे कई राज्यों में कोहरे और शीतलहर जैसी स्थिति बनेगी।</span></p><p><strong><span class="cf0">कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का अलर्ट</span></strong></p><p><span class="cf0">मौसम विभाग ने दिल्ली एनसीआर और कई अन्य राज्यों में कड़ाके की ठंड का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार 21 और 22 दिसंबर को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में ठंड का असर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा।</span></p><p><span class="cf0">इसके अलावा हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में घने कोहरे की चेतावनी भी जारी की गई है। कोहरे और ठंड के चलते लोगों को यात्रा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने तेज हवाओं की संभावना भी जताई है, जो सर्दी को और बढ़ा सकती हैं।</span></p><p><span class="cf0">हालांकि तेज हवाओं के चलते प्रदूषक तत्वों का बिखराव हो सकता है, जिससे वायु की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। गुरुवार को दिल्ली का </span><span class="cf1">AQI </span><span class="cf0">गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया, शहादरा में सबसे ज्यादा </span><span class="cf1">AQI 442 </span><span class="cf0">और एवरेज </span><span class="cf1">AQI 358 </span><span class="cf0">से 370 के बीच रही। कई इलाकों में विजिबिलिटी भी काफी कम रही।</span></p><p><strong><span class="cf0">मैदानी इलाकों में बारिश की संभावना नहीं</span></strong></p><p><span class="cf0">मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मैदानी इलाकों में बारिश की संभावना नहीं है। इसका मतलब है कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मैदानी इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। हालांकि ठंड और कोहरे का असर लगातार बढ़ता रहेगा।</span></p><p><strong><span class="cf0">कहां-कहां बरसेंगे बादल और बर्फबारी</span></strong></p><p><span class="cf0">पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हिमाचल प्रदेश में 20 और 21 दिसंबर को भारी बारिश और बर्फबारी की संभावना है। वहीं जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में 21 और 22 दिसंबर के आसपास इसी तरह का मौसम रह सकता है। राजस्थान के कुछ जिलों जैसे जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में हल्की बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों, जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भी हल्की बारिश देखने को मिल सकती है।</span></p><p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 12:36:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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