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                <title>private companies - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>private companies RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रोजगार एवं अप्रेंटिसशिप मेले में 47 अभ्यर्थियों का चयन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) गौरीगंज के प्रधानाचार्य शिवाकांत द्विवेदी ने बताया कि दिनांक 31 अगस्त 2026 को संस्थान परिसर में रोजगार एवं अप्रेंटिसशिप मेले का आयोजन किया गया। मेले में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 62 अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग कर रोजगार एवं प्रशिक्षण के अवसरों का लाभ उठाया। उन्होंने बताया कि मेले में हीरो/वर्लपूल, उड़ान मैनपावर कंपनी, मेगा माइंड सॉल्यूशन, निर्माण ऑर्गेनाइजेशन तथा महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों ने प्रतिभाग किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया गया, जिसमें अप्रेंटिसशिप हेतु 12 तथा रोजगार के लिए 35 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। इस प्रकार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186911/selection-of-47-candidates-in-employment-and-apprenticeship-fair"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/3-5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) गौरीगंज के प्रधानाचार्य शिवाकांत द्विवेदी ने बताया कि दिनांक 31 अगस्त 2026 को संस्थान परिसर में रोजगार एवं अप्रेंटिसशिप मेले का आयोजन किया गया। मेले में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 62 अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग कर रोजगार एवं प्रशिक्षण के अवसरों का लाभ उठाया। उन्होंने बताया कि मेले में हीरो/वर्लपूल, उड़ान मैनपावर कंपनी, मेगा माइंड सॉल्यूशन, निर्माण ऑर्गेनाइजेशन तथा महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों ने प्रतिभाग किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया गया, जिसमें अप्रेंटिसशिप हेतु 12 तथा रोजगार के लिए 35 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। इस प्रकार कुल 47 अभ्यर्थियों को रोजगार एवं प्रशिक्षण के अवसर प्राप्त हुए। प्रधानाचार्य शिवाकांत द्विवेदी ने कहा कि ऐसे रोजगार एवं अप्रेंटिसशिप मेले युवाओं को उद्योगों से सीधे जोड़ने तथा उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्थान भविष्य में भी युवाओं के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। मेले में जिला सेवायोजन अधिकारी अनुभव त्रिपाठी, राजकीय आईटीआई अमेठी के प्रधानाचार्य एमपी सिंह, राजकीय आईटीआई जगदीशपुर के प्रधानाचार्य अजय कुमार सिंह, कार्यदेशक अनिल कुमार मिश्रा, प्लेसमेंट प्रभारी भारत भूषण मिश्रा, दिवाकर मिश्रा सहित जनपद के अन्य आईटीआई संस्थानों के प्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 21:12:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में सरकारी कार्यालयों की बदली टाइमिंग, निजी संस्थानों को वर्क फ्राम होम की एडवाइजरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Haryana News: वायु गुणवत्ता में गंभीर गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (AQMA) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के चौथे चरण को दिल्ली-एनसीआर में लागू किया है। इस आदेश के अनुपालन में गुरुग्राम जिले में राज्य सरकार और नगर निकायों के अधीन संचालित सभी सार्वजनिक कार्यालयों के समय में अस्थायी बदलाव किया गया है।</p>
<p>डीसी अजय कुमार ने रविवार को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए बताया कि राज्य सरकार के अधीन कार्यालय अब सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक कार्य करेंगे। वहीं, नगर निगम गुरुग्राम व मानेसर, नगर परिषद सोहना, पटौदी मंडी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164007/haryana-changed-timing-of-government-offices-in-haryana-work-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/haryana-office-timing.jpg" alt=""></a><br /><p>Haryana News: वायु गुणवत्ता में गंभीर गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (AQMA) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के चौथे चरण को दिल्ली-एनसीआर में लागू किया है। इस आदेश के अनुपालन में गुरुग्राम जिले में राज्य सरकार और नगर निकायों के अधीन संचालित सभी सार्वजनिक कार्यालयों के समय में अस्थायी बदलाव किया गया है।</p>
<p>डीसी अजय कुमार ने रविवार को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए बताया कि राज्य सरकार के अधीन कार्यालय अब सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक कार्य करेंगे। वहीं, नगर निगम गुरुग्राम व मानेसर, नगर परिषद सोहना, पटौदी मंडी और नगर पालिका फरुखनगर के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक खुलेंगे। यह व्यवस्था ग्रेप के चौथे चरण की अवधि तक प्रभावी रहेगी।</p>
<p>साथ ही, डीसी ने सभी निजी संस्थानों को अगले आदेश तक वर्क फ्राम होम अपनाने की एडवाइजरी जारी की है। आदेश के अनुसार, सार्वजनिक, नगर निकाय और निजी कार्यालयों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ऑनसाइट काम करने की अनुमति होगी, जबकि शेष कर्मचारियों को घर से कार्य करने की सुविधा दी जाएगी।</p>
<p>डीसी अजय कुमार ने कहा कि यह कदम वाहनों की आवाजाही और भीड़भाड़ को कम कर वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने नागरिकों से प्रशासन का पूर्ण सहयोग करने और प्रदूषण कम करने के लिए जारी सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 12:12:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों के प्रवेश का फैसला क्यों ? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार (15 दिसंबर) को लोकसभा में एक नया विधेयक पेश किया, जो परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं के लिए भारत के सख्त कानून को खत्म करने के साथ ही निजी कंपनियों को उस क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति देता है जो अब तक विशेष सार्वजनिक उद्यमों के लिए आरक्षित था.इस विधेयक के एक बार पारित होने के बाद निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर के निर्माण, स्वामित्व, संचालन या बंद करने, परमाणु ईंधन के निर्माण (जिसमें यूरेनियम-235 का रूपांतरण, शोधन और संवर्धन शामिल है) या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163619/why-the-decision-to-enter-private-companies-in-nuclear-energy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/download5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार (15 दिसंबर) को लोकसभा में एक नया विधेयक पेश किया, जो परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं के लिए भारत के सख्त कानून को खत्म करने के साथ ही निजी कंपनियों को उस क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति देता है जो अब तक विशेष सार्वजनिक उद्यमों के लिए आरक्षित था.इस विधेयक के एक बार पारित होने के बाद निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर के निर्माण, स्वामित्व, संचालन या बंद करने, परमाणु ईंधन के निर्माण (जिसमें यूरेनियम-235 का रूपांतरण, शोधन और संवर्धन शामिल है) या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य निर्धारित पदार्थ के उत्पादन, उपयोग, प्रसंस्करण या निपटान के लिए लाइसेंस प्रदान किए जाएंगे.परमाणु उर्जा का क्षेत्र देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है इस लिए इस पर बहुत सोच विचार कर निर्णय लेने की जरूरत है। अभी यह भी समीक्षा का विषय है कि सरकार यह फैसला बिना किसी दबाव के जरूरत में ले रही है या इसके पीछे कोई मजबूरी छिपी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि लोकसभा में सिविल न्यूक्लियर कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके जरिए सरकार अब परमाणु ऊर्जा पर सरकार का एकाधिकार खत्म करने की तैयारी कर रही है। अगर मौजूदा कानून को बदलने के लिए लाया गया विधेयक स्वीकार होता है तो आने वाले दिनों में भारत में निजी कंपनियां और यहां तक कि आम आदमी भी परमाणु संयंत्र के निर्माण और इसके संचालन जैसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। केंद्रीय विज्ञान-तकनीक मामलों के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में इससे जुडा विधेयक पेश किया। बुधवार को इस पर चर्चा शुरू हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बताया गया है कि इस विधेयक को कानून बनवाकर सरकार 2047 तक कुल 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा पैदा करने के लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास कर रही है। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर इस विधेयक में क्या प्रस्ताव हैं, जिन्हें लेकर देशभर में चर्चाएं जारी हैं? इससे परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल के नियम किस तरह बदल जाएंगे? अगर निजी और आम लोगों को परमाणु उपकरण के इस्तेमाल की इजाजत होगी तो इसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? अगर ऐसे में कोई हादसा हो जाता है तो इससे कैसे निपटा जाएगा? इसके अलावा सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण क्यों है? सिविल न्यूक्लियर कानून में बदलाव के लिए जो विधेयक लाया गया है, उसे सस्टेनेबल हानेंसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (एसएचएएनटीआई यानि शांति), 2025 नाम दिया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके जरिए सरकार परमाणु ऊर्जा कानून (एटॉमिक एनर्जी एक्ट), 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को वापस ले लेगी। मौजूदा समय में भारत में परमाणु पदार्थों, ऊर्जा और उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर यही दोनों कानून दिशा-निर्देश तय करते हैं। शांति, 2025 विधेयक में परमाणु ऊर्जा के उत्पादन, इस्तेमाल और नियमन के लिए एक नया वैध ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा रेडिएशन के मानकों को लेकर भी इस विधेयक में कई नियम शामिल किए गए हैं। विधेयक में कहा गया है कि परमाणु ऊर्जा भारत की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी अहम है। खासकर जैसे-जैसे ऊर्जा की मांग वाली तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डाटा सेंटर्स और उत्पादन की मांग बढ़ती जा रही है। विधेयक में कहा गया है कि सभी परमाणु और इससे होने वाले उत्सर्जन से जुड़ी गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार और परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) से सुरक्षा मंजूरियां लेनी होंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस विधेयक के जरिए परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड की शक्तियां बदल दी गई हैं। अब एईआरबी सुरक्षा, रेडिएशन, परमाणु कचरे के प्रबंधन, जांच और आपात स्थिति को लेकर ज्यादा शक्तिशाली होगा। सरकार के पास रेडियोएक्टिव पदार्थों या रेडिएशन से जुड़े उपकरणों के नियंत्रण का भी अधिकार होगा, ताकि किसी सुरक्षा खतरे की स्थिति में सरकार खुद व्यवस्था को अपने हाथ में ले सके। परमाणु ऊर्जा अगर भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक है तो इसका गलत प्रबंधन हादसों को भी बुलावा दे सकता है। ऐसे में सरकार ने विधेयक में परमाणु हादसों को ध्यान में रखते हुए कुछ नियम बनाए हैं। इसके तहत किसी भी दुर्घटना की स्थिति में परमाणु ऊर्जा से जुड़े केंद्र के संचालक को सबसे पहले घटना के लिए जिम्मेदार माना जाएगा और उसे नुकसान की भरपाई करनी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसमें कहा गया है कि परमाणु केंद्र का संचालक हर तरह के नुकसान और तबाही के लिए जिम्मेदार होगा, सिवाय किसी खतरनाक प्राकृक्तिक आपदा से हुई तबाही के। यानी अगर कोई प्राकृतिक आपदा ऐसी है, जिसमें तमाम सुरक्षा मानकों का पालन करने के बावजूद नुकसान को नहीं रोका जा सकता, उस स्थिति में संचालक की जिम्मेदारी सीमित या नहीं होगी। इसके अलावा सशस्त्र संघर्ष, गृह युद्ध, आतंकवाद की घटना या विद्रोह की स्थिति में भी परमाणु इंस्टॉलेशन के संचालक की जिम्मेदारी सीमित या तय होगी। विधेयक में यह भी कहा गया है कि अगर नुकसान का मुआवजा संचालक की तय जिम्मेदारी से ज्यादा है तो अतिरिक्त मुआवजे के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार ने साफ किया किया है है कि परमाणु ऊर्जा के लिए इससे जुड़े पदार्थ और उपकरणों का इस्तेमाल करने वाली निजी कंपनियों लोगों को बीमा और वित्तीय सुरक्षा का प्रबंधन करना जरूरी होगा, ताकि किसी संभावित नुकसान की स्थिति में उसकी भरपाई की जा सके। विधेयक में कहा गया है कि किसी हादसे की स्थिति में परमाणु नुकसान के दावों से जुड़े आयोग का गठन किया जाएगा, जो कि मुआवजे को लेकर फैसला करेगा। मौजूदा समय में भारत का परमाणु बीमा पूल (आईएनआईपी) किसी परमाणु संचालक और सप्लायर को परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 के तहत 1500 करोड़ का कवरेज मुहैया कराता है। इस विधेयक की एक खास बात यह है कि इसमें कंपनियों को लाइसेंस पाने के लिए अनुसंधान और नवाचार से जुड़ी गतिविधियां दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संस्थानों को लाइसेंस के लिए इन दोनों ही मानकों को दिखाना होगा। भारत के परमाणु ऊर्जा से सशक बनने के बाद से ही इस पर सरकार का एकाधिकार रहा है। सरकार के नियंत्रण में भारत का परमाणु ऊर्जा बेस काफी संतुलित रहा है। देश में 23 परमाणु रिएक्टर हैं, जिन्हें सरकार ही प्रबंधित करती है और इनकी पूरी जिम्मेदारी न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के पास है। इन सभी के जरिए भारत हर वर्ष करीब 8.8 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा पैदा करता है। हालांकि, सरकार ने 2032 तक 22 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा पैदा करने का लक्ष्य रखा है, जिसे 2047 तक बढ़ाकर 100 गीगवॉट पहुंचाने की मंशा जताई गई है। ऐसे में सरकार निजी कंपनियों के लिए भी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को खोलने के लिए तैयार है, ताकि इन लक्ष्यों को जल्द हासिल किया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विधेयक में सरकार ने निजी कंपनियों के लिए न सिर्फ रास्ते खोले हैं, बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भी नियमों को आसान बनाया है। खासकर किसी हादसे की स्थिति में उनकी जिम्मेदारी का नियम हटाकर। रिपोर्ट्स की मानें तो पूरे विधेयक में कहीं भी परमाणु पदार्थों या इससे जुड़े उपकरणों को भेजने वाली कंपनियों को हादसे के लिए उत्तरदायी ठहराने का जिक्र नहीं है। ऐसे में उनके पदार्थों या उपकरण की गड़‌बड़ी से हुए हादसे के लिए सप्लायर जिम्मेदार नहीं होंगे। बीते कई वर्षों से परमाणु पदार्थ और उपकरण भेजने वाली विदेशी कंपनियां भारत से इसी तरह की छूट की मांग भी कर रही थीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौरतलब है कि इससे पहले परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 में सप्लायर्स को उत्तरदायी बनाने का भी जिक्र था। इसे तब भाजपा के दबाव में कांग्रेस ने ही कानून में शामिल किया था। इसके तहत कुछ मामलों में भारत की सिविल कोर्ट में सप्लायर्स के खिलाफ भी वाद दाखिल किया जा सकता है। हालांकि, तब फ्रांस की अरेवा कंपनी और अमेरिका की वेस्टिंग हाउस ने इसका विरोध किया था और भारत के साथ परमाणु संयंत्र बनाने का ज्ञापन समझौता होने के बावजूद दोनों ही कंपनियां इससे पीछे हट गई थीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्षी सदस्यों ने प्रस्तावन चरण के दौरान ही आपत्तियां उठाईं.कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘अत्यधिक खतरनाक परमाणु गतिविधियों में लाभ कमाने वाली निजी भागीदारी की अनुमति देना, साथ ही दायित्व को सीमित करना, वैधानिक छूट प्रदान करना और न्यायिक उपायों को प्रतिबंधित करना, जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति राज्य के अप्रतिनिधित्व योग्य सार्वजनिक विश्वास दायित्वों को कमजोर करता है.’प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले विधेयक कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में सदन में लाए गए थे. यह विधेयक उसी नियामक संरचना को बनाए रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड जो सुरक्षा प्राधिकरण प्रदान करेगा। लेकिन विवादों के निवारण के लिए एक परमाणु ऊर्जा निवारण सलाहकार परिषद को भी शामिल करता है बहरहाल यह राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है इस के परिणाम कोई अमंगलकारी हालात भी पैदा कर सकते हैं इस लिए विशेष सतर्कता और परिणामों  पर बिना राजनीतिक दुराग्रह पूर्वाग्रह के विचार करना चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 17:08:07 +0530</pubDate>
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