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                <title>digital arrest - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>digital arrest RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>साइबर अपराध पर सख्त हुई सरकार, प्रदेश को साइबर सुरक्षा में नंबर-1 बनाने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184035/government-becomes-strict-on-cyber-crime-instructions-to-make-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-24-at-20.58.26.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई करें तथा साइबर अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी की जाए और पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">साइबर जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए, जो साइबर अपराध मुख्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर जागरूकता सामग्री को विभाग के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करेगा। उन्होंने सभी विभागों को इस संबंध में आवश्यक पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की अधिसूचना शीघ्र जारी करने, ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को जल्द क्रियाशील बनाने तथा राज्यव्यापी 'ऑपरेशन साइबर वज्र (CyVajra)' को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति लोगों को लगातार जागरूक किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह ने बताया कि राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की स्थापना का प्रस्ताव अंतिम चरण में है और इसकी अधिसूचना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि एस4सी (S4C) के आठ में से छह घटक पहले ही संचालित हो चुके हैं, जबकि शेष दो पर कार्य तेजी से चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी जानकारी दी कि साइबर अपराध की त्वरित और स्थान-निरपेक्ष एफआईआर दर्ज करने के लिए विकसित किया जा रहा ई-जीरो एफआईआर तंत्र अंतिम चरण में है। शिकायत निवारण, धनराशि वापसी और समन्वय पोर्टलों के संचालन में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश में अग्रणी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि राज्यव्यापी आसूचना आधारित अभियान 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत प्रारंभिक स्तर पर उल्लेखनीय सफलता मिली है। वहीं, साइबर अपराध की जांच के लिए पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में साइट्रेन (CyTrain) प्लेटफॉर्म के उपयोग के मामले में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने प्रदेश में साइबर अपराध के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार की गई जागरूकता सामग्री की भी सराहना की और निर्देश दिया कि इसे विभिन्न लक्षित समूहों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में सचिव गृह मोहित गुप्ता, पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह, साइबर अपराध मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 21:14:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>डिजिटल अरेस्ट से लाखों परिवारों के जीवन में अंधेरा पसरा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">लाखों लोगों व परिवारों के जीवन भर की कमाई को डिजिटल अरेस्ट के जरिए लूट कर उनके जीवन में अंधेरा कर दिया गया। यह कैसी विडंबना है कि जब तक देश में कथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अनुमानित तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक ठगी की जा चुकी है, कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं, की साल से यह सिलसिला जारी है तब सरकार और जिम्मेदार सिस्टम की नींद खुली है और अपराधियों पर शिकंजा कसने की बड़ी मुहिम शुरू हो पा रही है। वह भी सरकार के बजाय शीर्ष अदालत की पहल पर। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों देश में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163204/digital-arrest-brought-darkness-to-the-lives-of-millions-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/download-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">लाखों लोगों व परिवारों के जीवन भर की कमाई को डिजिटल अरेस्ट के जरिए लूट कर उनके जीवन में अंधेरा कर दिया गया। यह कैसी विडंबना है कि जब तक देश में कथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अनुमानित तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक ठगी की जा चुकी है, कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं, की साल से यह सिलसिला जारी है तब सरकार और जिम्मेदार सिस्टम की नींद खुली है और अपराधियों पर शिकंजा कसने की बड़ी मुहिम शुरू हो पा रही है। वह भी सरकार के बजाय शीर्ष अदालत की पहल पर। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों देश में डिजिटल अरेस्ट के कई मामले लगातार सामने आ रहे हैं. सरकार के तमाम प्रयास के बावजूद डिजिटल अरेस्ट के कारण बुजुर्गों बड़ी संख्या में ठगी का शिकार हो रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डिजिटल अरेस्ट मामलों पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख दिखाते हुए कहा कि इस मामले में अदालत जरूरी निर्देश जारी करेगी. न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जयमाला बागची की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि हर हैरानी की बात है कि देश में पीड़ितों से लगभग 3000 करोड़ रुपये डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगे जा चुके हैं. यह सब हमारे देश में ही हो रहा है. अगर हम इस मामले में ठोस और सख्त आदेश नहीं देंगे तो समस्या और गंभीर हो जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट पर गंभीर चिंता जताते हुए सीबीआई को निर्देश दिए हैं कि वह अन्य साइबर अपराधों की जांच बाद में करें, डिजिटल अरेस्ट की जांच को अपनी प्राथमिकता बनाए। कोर्ट ने केंद्रीय बैंक से पूछा है कि क्या एआई की मदद से साइबर ठगों के खाते फ्रीज हो सकते हैं? कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि यदि किसी गंभीर डिजिटल अपराध का दायरा भारत से बाहर को सीमा में हो तो वह इंटरपोल की मदद ले सकती है। दुखद है कि साइबर अरेस्ट के मामलों में सबसे अधिक निशाना बुजुर्गों को ही बनाया जाता है, जिन्हें डिजिटल लेन-देन को गंभीर जानकारी नहीं होती। बुजुर्गों को निशाना बनाने का यह प्रतिशत 78 से 82 फीसदी बताया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई जगह यह प्रतिशत 99 फीसदी तक है। वहीं जनवरी से अप्रैल 2024 में साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट के 46 फीसदी मामलों के तार म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे दक्षिण पूर्व एशिया के देशों से जुड़े रहे हैं। निस्संदेह, हाल के वर्षों में डिजिटल गिरफ्तारी साइबर अपराध के सबसे कुटिल रूप में बनकर उभरी है। यह अपराध न केवल देश की वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता के लिये, बल्कि कानून प्रवर्तन तंत्र में जनता के विश्वास के लिये भी बड़ा खतरा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि इन घोटालों की देशव्यापी जांच सीबीआई को सौंपने का सर्वोच्य न्यायालय का निर्णय समय के अनुरूप सार्थक हस्तक्षेप है। इसी क्रम में कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में अपराधों की जांच के लिये सीबीआई को सहमति दें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल, न्यायालय ने इस हकीकत को स्वीकार किया है कि साइबर अपराधी राज्यों की सीमाओं का लाभ</div>
<div style="text-align:justify;">उठाते हैं। वहीं दूसरी ओर टुकड़ों-टुकड़ों में जांच सीमा पार के साइबर अपराधियों के नेटवर्क को बढ़ावा देती है दरअसल, साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट के जरिये भोले-भाले लोगों व बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं। वे कानून प्रवर्तन अधिकारी पुलिस और जज बनकर मोटी रकम देने के लिये उन्हें ब्लेकमेल और आतंकित करते हैं।हालांकि अदालत ने कहा कि इस मामले से निपटने के लिए कठोर कदम उठाना जरूरी हो गया है. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गृह मंत्रालय ने एक अलग यूनिट की स्थापना की है और इस मामले से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए कई अन्य कदम उठाए गए हैं. डिजिटल अरेस्ट को लेकर हुई सुनवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीबीआई ने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सौंपी. केंद्र सरकार की ओर से पेश दलील के सुनने के बाद अदालत ने कहा कि मामला काफी गंभीर है और इस मामले में अदालत उचित आदेश पारित करेगी. मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी. गौरतलब है कि एक वरिष्ठ नागरिक दंपति ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के पत्र लिखकर बताया था कि 1 से 16 सितंबर के बीच उनसे 1.5 करोड़ रुपए की ठगी सीबीआई, इंटेलिजेंस ब्यूरो तो कभी न्यायपालिका के अधिकारी बनकर की गयी. धोखेबाजों ने फोन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपर्क किया और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे वसूलने का काम किया. इतना ही नहीं उन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश दिखाए.  मामला सामने आने के बाद अंबाला में दो एफआईआर दर्ज की गयी. जांच में पाया गया कि वरिष्ठ नागरिकों को ठगी का शिकार बनाने के लिए संगठित गिरोह काम कर रहा है. अदालत ने 17 अक्टूबर को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की और केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब देने को कहा. अदालत ने इस मामले में अटार्नी जनरल से भी सुझाव लेने का आदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति से एक करोड़ रुपये कीठगी के बाद अदालत ने इस व्यापक समस्या का स्वतः संज्ञान लिया। उन्हें  धमकाने के लिये सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों का इस्तेमाल किया गया। यह बेहद परेशान करने वाली स्थिति है कि साइबर अपराधी सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को खतरे में डाल रहे हैं।तभी शीर्ष अदालत ने महसूस किया कि अब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा है, देश की केंद्रीय एजेंसी को इस मामले की तह तक तुरंत पहुंचना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट के मामलों में एफआईआर दर्ज करने और धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज करने की पूरी छूट दी गई है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत की जांच का अधिकार भी दिया गया। इसके अलावा दूरसंचार विभाग को भी सिम कार्ड के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिये कहा गया है। निश्चित रूप से कोर्ट की सार्थक पहल के बाद यदि ये सभी उपाय सिरे चढ़ते हैं तो इस गंभीर अपराध के खिलाफ एक राष्ट्रीय प्रतिक्रिया दे पाना संभव होगा। कोर्ट ने विश्वास जताया है कि केंद्रीय एजेंसी बिना किसी भय या पक्षपात के जिम्मेदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करेगी। इसमें राज्य सरकारों की सक्रियता व सजगता भी सीबीआई को अपराध की तह तक पहुंचने में मददगार साबित हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी जरूरी है कि एजेंसी की कार्रवाई में लालफीताशाही और राजनीतिक हस्तक्षेप न हो। इसके साथ ही नागरिकों को भी ऐसे अपराधों के प्रति सजग रहना होगा। जागरूकता सतर्कता उन्हें अपराधियों के चंगुल में फंसने से बचा सकती है। ऐसी किसी कॉल के आने पर उन्हें रुककर विचार करना चाहिए और हड़‌बड़ी में बैंक से जुड़ी कोई जानकारी देने से बचना चाहिए। ठग खुद को केंद्रीय एजेंसियों या पुलिस विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों को फर्जी आरोपों में फंसाने की धमकी देते थे। इसके बाद 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर उनसे बैंक खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 35 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ये आरोपी गुजरात, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से पकड़े गए हैं। राजनांदगांव की 79 वर्षीय शीला सुवाल को आरोपितों ने सीबीआई अधिकारी और जज बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से डराया। मनी लॉडिंग केस में फांसाने की धमकी दी। निर्दोष साबित करने रकम जज के खाते में ट्रांसफर करने को कहा। महिला ने उगों के बताए गए विभिन्न खातों में 79,69,047 रुपये ट्रांसफर कर दिए। एक अन्य मामले में ठगों ने फारेक्स व ट्रेडिंग विशेषज्ञ बताकर व्यापारी को फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग साइट का लिंक भेजा। पहले 15 हजार का छोटा मुनाफा देकर व्यापारी का विश्वास हासिल किया, फिर बड़े मुनाफे का लालच देकर 1,21,53,590 रुपये निवेश के नाम पर जमा कराए। दोनों मामलों में तीन आरापितों को पकड़ा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामलों में उप विदेशी कॉल सेंटरों की तरह काम करते हुए इंटरनेट कालिंग और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते थे। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध काल या डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकियों पर विश्वास न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन को देशभर से सामने आए डिजिटल अरेस्ट के मामलों की पैन इंडिया जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। सोमवार को सुनवाई के दौरान सीजेआई ने सभी राज्यों को डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच में सीबीआई की मदद करने के भी निर्देश दिए। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा- डिजिटल अरेस्ट तेजी से बढ़ता साइबर क्राइम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसमें ठग खुद को पुलिस, कोर्ट या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो ऑडियो कॉल के जरिए पीड़ितों, खासकर सीनियर सिटिजन को धमकाते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर पूछा कि साइबर ठगी में उपयोग हो रहे बैंक खातों को तुरंत ट्रैक और फ्रीज करने के लिए एआई और मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा। इससे पहले 3 नवंबर की सुनवाई में एससी ने कहा था कि डिजिटल अरेस्ट मामलों में लगभग 3  का पता चला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभी तक डिजिटल अरेस्ट कर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है आज भी लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रहीं हैं जिनमे लोगों को मोबाइल काल पर तरह तरह से धमका कर पैसा ठगी किया जा रहा है लोग जीवन भर की खून पसीने की कमाई चंद मिनटों में गंवा कर सुसाइड करने के लिए विवश हो रहे हैं। सरकार को ऐसे अपरोक्ष हत्यारों ठगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 17:32:22 +0530</pubDate>
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