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                <title>manipur - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>मणिपुर से हटा राष्ट्रपति शासन, युमनाम खेमचंद ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ</title>
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                        <![CDATA[<h2>  </h2>
<p><strong>इंफाल।</strong> मणिपुर में लंबे समय से लागू राष्ट्रपति शासन को समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल गया है। युमनाम खेमचंद ने मणिपुर के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। राज्यपाल अजय भल्ला ने उन्हें लोकभवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।</p>
<p>गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इसके बाद राज्य में लोकतांत्रिक सरकार की बहाली हुई और नई सरकार ने कार्यभार संभाल लिया।</p>
<h3><strong>मेतई समुदाय से हैं नए मुख्यमंत्री</strong></h3>
<p>62 वर्षीय युमनाम खेमचंद मेतई समुदाय से ताल्लुक</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168234/presidents-rule-removed-from-manipur-yumnam-khemchand-takes-oath-as"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/मणिपुर-से-हटा-राष्ट्रपति-शासन,-युमनाम-खेमचंद-ने-ली-मुख्यमंत्री-पद-की-शपथ.jpg" alt=""></a><br /><h2> </h2>
<p><strong>इंफाल।</strong> मणिपुर में लंबे समय से लागू राष्ट्रपति शासन को समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल गया है। युमनाम खेमचंद ने मणिपुर के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। राज्यपाल अजय भल्ला ने उन्हें लोकभवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।</p>
<p>गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इसके बाद राज्य में लोकतांत्रिक सरकार की बहाली हुई और नई सरकार ने कार्यभार संभाल लिया।</p>
<h3><strong>मेतई समुदाय से हैं नए मुख्यमंत्री</strong></h3>
<p>62 वर्षीय युमनाम खेमचंद मेतई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। वे सिंगजामेई विधानसभा सीट से विधायक हैं और पेशे से इंजीनियर रह चुके हैं। इससे पहले वे बीरेन सिंह सरकार में नगर प्रशासन एवं आवास विभाग के मंत्री भी रह चुके हैं।</p>
<p>खेमचंद वर्ष 2022 में भी मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। उन्हें आरएसएस का करीबी माना जाता है, जिससे पार्टी में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।</p>
<h3><strong>विधायक दल की बैठक में चुने गए नेता</strong></h3>
<p>बीजेपी मुख्यालय में मंगलवार को विधायक दल की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें युमनाम खेमचंद को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इस प्रक्रिया की निगरानी राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने की।</p>
<p>मुख्यमंत्री पद की दौड़ में गोविंद दास और टी. विश्वजीत सिंह भी प्रमुख दावेदार थे। गोविंद दास सात बार के विधायक हैं और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह का समर्थन प्राप्त था।</p>
<h3><strong>जातीय हिंसा के बाद लगा था राष्ट्रपति शासन</strong></h3>
<p>मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हुए थे।</p>
<p>बिगड़ते हालात को देखते हुए 13 फरवरी 2025 को बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।</p>
<h3><strong>विधानसभा में बीजेपी की स्थिति</strong></h3>
<p>60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में बीजेपी के पास 37 विधायक हैं। एनडीए के सहयोगी दलों में एनपीपी के 6 और एनपीएफ के 5 विधायक शामिल हैं। बहुमत होने के कारण सरकार गठन संभव हो सका।</p>
<h3><strong>नई सरकार से जनता को उम्मीद</strong></h3>
<p>मुख्यमंत्री बनने के बाद युमनाम खेमचंद के सामने राज्य में शांति बहाल करना, विस्थापितों का पुनर्वास और विकास कार्यों को तेज करना बड़ी चुनौती होगी।</p>
<p>राज्य की जनता को नई सरकार से स्थायी शांति और बेहतर प्रशासन की उम्मीद है।</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 18:41:35 +0530</pubDate>
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                <title>मणिपुर के विकास को भारत सरकार ने निरंतर प्राथमिकता दी : पीएम मोदी</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मणिपुर के इंफाल में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें मंत्रीपुखरी स्थित सिविल सचिवालय, मंत्रीपुखरी में IT SEZ भवन और नया पुलिस मुख्यालय, दिल्ली और कोलकाता में मणिपुर भवन और चार जिलों में महिलाओं के लिए अनूठा इमा मार्केट शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>21वीं सदी का ये समय ‘नॉर्थ ईस्ट’ का है</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान पीएम मोदी ने कहा,”आजादी के बाद देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्से के बड़े शहरों में विकास हुआ, वहां सपने पले, नौजवानों को नए मौके मिले। अब 21वीं सदी का ये समय ‘ईस्ट’ का है,</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154975/the-government-of-india-gives-continuous-priority-to-the-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मणिपुर के इंफाल में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें मंत्रीपुखरी स्थित सिविल सचिवालय, मंत्रीपुखरी में IT SEZ भवन और नया पुलिस मुख्यालय, दिल्ली और कोलकाता में मणिपुर भवन और चार जिलों में महिलाओं के लिए अनूठा इमा मार्केट शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>21वीं सदी का ये समय ‘नॉर्थ ईस्ट’ का है</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान पीएम मोदी ने कहा,”आजादी के बाद देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्से के बड़े शहरों में विकास हुआ, वहां सपने पले, नौजवानों को नए मौके मिले। अब 21वीं सदी का ये समय ‘ईस्ट’ का है, ‘नॉर्थ ईस्ट’ का है। इसलिए मणिपुर के विकास को भारत सरकार ने निरंतर प्राथमिकता दी है। इसी का परिणाम है कि मणिपुर की विकास दर लगातार बढ़ रही है। 2014 से पहले मणिपुर की विकास दर 1% से भी कम थी। अब मणिपुर पहले से कई गुना तेजी से आगे बढ़ रहा है।”</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मणिपुर की हजारों वर्ष पुरानी समृद्ध विरासत</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मणिपुर की हजारों वर्ष पुरानी समृद्ध विरासत है। यहां संस्कृति की जड़ें मजबूत हैं, गहरी हैं। मणिपुर मां भारती के मुकुट पर सजा मुकुट रत्न है। इसलिए हमें मणिपुर की विकासवादी छवि को निरंतर मजबूत करना है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मणिपुर में किसी भी तरह की हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने आगे कहा कि मणिपुर में किसी भी तरह की हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण है। यह हिंसा हमारे पूर्वजों और हमारी भावी पीढ़ी के साथ भी बहुत बड़ा अन्याय है। इसलिए हमें मणिपुर को लगातार शांति और विकास के रास्ते पर आगे लेकर जाना है और मिलकर जाना है। भारत की आजादी की लड़ाई में, भारत की रक्षा में मणिपुर के योगदान से हमें प्रेरणा लेनी है। यह मणिपुर की ही धरती थी जहां भारतीय राष्ट्रीय सेना ने पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। हमारी सरकार मणिपुर के ऐसे हर महान व्यक्तित्व से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ रही है। हमारी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। अंडमान और निकोबार महाद्वीप में माउंट हैरियट का नाम बदलकर माउंट मणिपुर रखा गया है। ये मणिपुरी स्वतंत्रता सेनानियों को भारत के 140 करोड़ देशवासियों की श्रद्धांजलि है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>विकास प्रोजेक्ट्स के लिए मणिपुर के लोगों को दी बधाई</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने कहा, “आज मणिपुर के विकास के लिए हजारों-करोड़ों रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। यह परियोजनाएं आप सभी लोगों का जीवन आसान बनाएंगे, यहां इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेंगे और मणिपुर के युवाओं के लिए, यहां के बेटे-बेटियों के लिए रोजगार के नए मौके भी बनाएंगे। मैं मणिपुर के लोगों को सभी विकास योजनाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।”</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पीएम मोदी ने नेपाल के लोगों से कहा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, नेपाल के बारे में प्रधांनमंत्री मोदी ने कहा, “आज मणिपुर की इस धरती से मैं नेपाल के मेरे साथियों से भी बात करूंगा। हिमालय की गोद में बसा नेपाल, भारत का एक मित्र है, करीबी दोस्त है। हम साझा इतिहास से जुड़े हैं। आस्था से जुड़े हैं। साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। मैं आज नेपाल में अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री के रूप में पदवार संभालने पर 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से श्रीमती सुशीला जी को हार्दिक बधाई देता हूं। मुझे विश्वास है कि वे नेपाल में शांति, स्थिरता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेंगी। नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में सुशीला जी का आना, महिला सशक्तिकरण का बहुत उत्तम उदाहरण है।”</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज नेपाल में ऐसे हर एक व्यक्ति की सराहना करूंगा जिसने ऐसे अस्थिरता भरे माहौल में भी लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ऑपरेशन सिंदूर में दुनिया ने भारत की सेना के सामर्थ्य को देखा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया, उन्होंने कहा, “आज भी मणिपुर की अनेक संतानें देश के अलग-अलग हिस्सों में मां भारती की रक्षा में जुटी हैं अभी ऑपरेशन सिंदूर में दुनिया ने भारत की सेना के सामर्थ्य को देखा है। हमारे सैनिकों ने ऐसा कहर बरपाया कि पाकिस्तान की सेना त्राहि-त्राहि करने लगी। भारत की सफलता में मणिपुर के भी अनेक वीर बेटे-बेटियों का शौर्य शामिल है। ऐसे ही हमारे जांबाज, शहीद दीपक चिंगाखम के शौर्य को मैं आज नमन करता हूं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनका बलिदान देश हमेशा याद रखेगा।”  </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 22:30:58 +0530</pubDate>
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                <title>मणिपुर की और इंडिया का कूच</title>
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                        <![CDATA[<p>लगभग तीन महीने से जल  रहे मणिपुर की  खैर-खबर लेने नवगठित इंडिया के सांसदों के दल का मणिपुर के लिए कूच करना एक सुखद खबर है ।  कम से कम लोग अब ये तो नहीं कहेंगे कि मणिपुर इंडिया का अंग है या नहीं। मणिपुर को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है। लेकिन तीन महीने गुजर जाने के बाद भी हमारी सरकार वहां हिंसा का नंगा  नाच रोकने में कामयाब नहीं हो पायी है। केंद्र सरकार पर देशी और विदेशी दबाब भी बेअसर रहा। दुनिया की कोई भी ताकत भारत के प्रधानमंत्री जी को   मणिपुर जाने के लिए विवश   नहीं कर</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/132961/journey-to-manipur-and-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/manipur-news.jpg" alt=""></a><br /><p>लगभग तीन महीने से जल  रहे मणिपुर की  खैर-खबर लेने नवगठित इंडिया के सांसदों के दल का मणिपुर के लिए कूच करना एक सुखद खबर है ।  कम से कम लोग अब ये तो नहीं कहेंगे कि मणिपुर इंडिया का अंग है या नहीं। मणिपुर को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है। लेकिन तीन महीने गुजर जाने के बाद भी हमारी सरकार वहां हिंसा का नंगा  नाच रोकने में कामयाब नहीं हो पायी है। केंद्र सरकार पर देशी और विदेशी दबाब भी बेअसर रहा। दुनिया की कोई भी ताकत भारत के प्रधानमंत्री जी को   मणिपुर जाने के लिए विवश   नहीं कर सकी। हमारी सरकार बदस्तूर चुनाव प्रचार में उलझी हुई है।</p>
<p>जलते और निवस्त्र मणिपुर को फौरी राहत के लिए केंद्र सरकार की और से जो किया जा रहा है ,उससे  न देश वाकिफ है और न दुनिया,लेकिन तय है कि  केंद्र सरकार वहां कुछ न कुछ तो कर रही है ।  कम से कम उसने मणिपुर की हिंसा के शिकार मैतेयी समुदाय के लोगों को मिजोरम पलायन के लिए विमान तो मुहैया कराया ही है। केंद्र सरकार ने दावा किया था  कि  2014  से पहले किसी भी सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर ध्यान नहीं दिया। शायद सच ही होगा क्योंकि जैसे ही मौजूदा सरकार ने पूर्वोत्तर के विकास पर ध्यान दिया वहां मणिपुर में डबल इंजन की सरकार बन गयी और पूरा मणिपुर जल उठा।</p>
<p>जब आप ये खबर पढ़ रहे होंगे तब मुमकिन है कि इ  इंडिया गठबंधन में शामिल  16 दलों  के 20 सांसद मणिपुर पहुँच चुके होंगे।  ये नेता पहले पहाड़ी इलाके का दौरा करेंगे और फिर घाटी की वर्तमान स्थिति का जायजा लेंग।   इसके बाद वे राहत शिविर जाएंगे, जहां दोनों समुदाय के लोगों से बातचीत करेंगे। साथ ही उनकी मुलाकात राज्यपाल से होगी।  सांसदों का प्रतिनिधिमंडल दो दिन  मणिपुर में रहेंगे।  अर्द्धनग्न और अधजले मणिपुर में विपक्षी दलों से पहले कांग्रेस केनेता राहुल गांधी भी राहत शिविरों में जाकर पीड़ितों के आंसू पौंछ चुके है।  वे इससे ज्यादा वहां कुछ और कर भी नहीं सकते थे ।  विपक्ष के सांसद भी पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना जताने के अलावा कुछ कर नहीं पाएंगे,क्योंकि जो करना है वो केंद्र और राज्य की सरकार को करना है और दुर्भाग्य से दोनों ही सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं।</p>
<p>आपको याद होगा की मणिपुर 3  मई से जल रहा है और वहां की स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमितशाह एक पांव पर खड़े होकर मणिपुर में एहतयाती इंतजाम कर रहे हैं ,ये बात और है कि  उनके द्वारा किये गए तमाम इंतजामों के बावजूद मणिपुर अब तक सामान्य नहीं हुआ है। जनता प्रताड़ना का शिकार है ।  सुरक्षा बलों के हथियार और गोला-बारूद लूटा जा रहा है। हारकर शाह साहब भी मणिपुर को उसके हाल पर छोड़कर मध्यप्रदेश ,छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधान सभा चुनावों की तैयारी में जुट गए हैं। शाह को हफ्ते में दो बार मध्यप्रदेश दौड़ लगाना पड़ रही है। वे यदि मणिपुर को सम्हालते हैं, तो मध्य्प्रदेश भाजपा के हाथ से जाता है ।  32  लाख की आबादी वाले मणिपुर को सम्हालने से बेहतर 7  करोड़ की आबादी वाले मध्य्प्रदेश को सम्हालना केंद्र सरकार और भाजपा के लिए ज्यादा जरूरी है।</p>
<p>पिछले दिनों कांग्रेस के नेता राहुल गांधी जब  मणिपुर दौरे पर गए थे,तब  उनके काफिले को बिष्णुपुर से आगे नहीं जाने दिया गया था।।  पुलिस ने राहुल गांधी की सुरक्षा को देखते हुए उनके काफिले को रोकने का फैसला किया था।  इसके बाद वे राजधानी इंफाल लौट आए थे, जहां उन्होंने राहत शिविरों में मौजूद लोगों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।स्मृति बहन से लेकर भाजपा के तमाम प्रवक्ता उस समय राहुल गांधी पर पिल पड़े थे। लेकिन विपक्षी सांसदों के दल के साथ राज्य की सरकार शायद वैसा सलूक न कर पाए जैसा उसने राहुल गांधी के साथ किया था।</p>
<p>संसद में मौजूदा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के बाद विपक्षी सांसदों का मणिपुर जाना महत्र्वपूर्ण है ।  मुमकिन है कि  विपक्ष इस दौर के बाद सदन में इस मसले पर ज्यादा प्रमाणिकता से अपनी बात रख सके। मणिपुर केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल के गले की फांस तो बन चुकी है ,लेकिन इस फांस को समय रहते निकालना भी आवश्यक है ,अन्यथा आगामी महीनों में देश के 05  राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा का भट्टा बैठ जाएगा। इन विधानसभा चुनावों के फौरन बाद आम चुनाव भी हैं। मुमकिन है कि  मणिपुर की आग इन आम चुनावों पर भी अपना असर डाले। मणिपुर ने सबको परेशान कर रखा है ।  ईसाइयों को भी ,हिन्दुओं को भी ।  इंग्लैंड को भी ।  योरोप को भी और हमारे प्रधानमंत्री जी को भी। प्रधानमंत्री जी चूंकि कर्मयोगी हैं इसलिए वे मणिपुर को लेकर अपनी और अपनी सरकार की उलझन को झलकने नहीं देना चाहते,किन्तु सींकर में उन्होंने जिस तरह से अपनी देह की भाषा का मुजाहिरा किया गई उसे देखकर लगता है की मामला गंभीर है।</p>
<p>देश के अब तक के प्रधानमंत्रियों में माननीय मोदी जी पहले प्रधानमंत्री जी हैं जो शब्दों के साथ ही इशारों से भी अपनी बात कहने में दक्ष हैं। उनके इशारे श्लील हैं या अश्लील मै इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता ,लेकिन मुझे याद है कि  उनके जैसे इशारे तो अपने जमाने की नौटंकी क्वीन गुलाबो भी नहीं कर पाती थीं। बहरहाल विपक्ष के  मणिपुर दौरे   के बाद संसद में इस मसले पर देश को एक प्रामाणिक बहस देखने-सुनने को मिलेगी ,बशर्ते की सत्ता पक्ष भी बहस के मूड में हो।  यदि अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के बजाय सत्ता पक्ष भी हंगामे पार आमादा हो जाता है तो बहस का कोई मतलब नहीं रह जाता।</p>
<p>मोदी सरकार में अनुभवी नेताओं की कमी नहीं है ।  वे इस अविश्वास प्रस्ताव का मुकाबला आसानी से कर सकते है।  वैसे भी इस अविश्वास प्रस्ताव से केंद्र सरकार की सेहत पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो पड़ने वाला है नहीं ,लेकिन यदि जनता ने सदन के भीतर होने वाली बहस को सजीव देख लिया तो मुश्किल हो सकती है।मैंने इस तरह क अविश्वास प्रस्तावों पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी भाई ,वीपी सिंह को बोलते सुना है ।  अटल बिहारी बाजपेयी को बोलते देखा और सुना है। ये तीनों अपनी सरकार के जाने की तमाम स्थितियों के बावजूद उतने भयभीत नजर नहीं आये थे जितने की भयभीत अटल जी के उत्तराधिकारी माननीय मोदी जी दिखाई दे रहे हैं।</p>
<p>माननीय मोदी जी न तो अटल जी की तरह अंतर्राष्ट्रीय छवि वाले नेता हैं और न उनके पास अटल जी जैसा शब्दकोश और देह की भाषा है ।  फिर भी वे अटल जी से आगे निकल चुके हैं। मोदी जी तीसरी बार सरकार बनाने के लिए आश्वस्त हैं। उनका आत्मविश्वास काबिले तारीफ़ है। उनके स्थान पर यदि कोई दूसरा प्रधानमंत्री होता तो मणिपुर काण्ड के बाद होशोहवाश खो चुका होता। सारा चुनाव प्रचार भूल जाता। मोदी जी मणिपुर को ही भूल बैठे हैं ,इसलिए उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रह। न अविश्वास प्रस्ताव से और न मणिपुर की हिंसा और उसकी वजह से हुई अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई बदनामी से। आखिर बदनामी से भी तो नाम होता ही ह।  दुनिया में डंका  बजता ही है।</p>
<p>आने वाली पीढ़ी के लिए मोदी और मणिपुर एक कॉमिक्स की तरह रोमांचक विषय बन सकता है। मोदी जी ने चूंकि जम्मू-कश्मीर से धारा 370  हटाने में कामयाबी पा ली थी इसीलिए मुझे उम्मीद है कि  वे मणिपुर पर भी काबू पा लेंगे। इस बार भी कामयाबी उनके चरण चूमेगी। वे एक कामयाब प्रधानमंत्री है।  मणिपुर और मनीपुर [नोटबंदी] में ज्यादा फर्क नहीं है ।  मनीपुर के समय भी देश में 150  लोग कतारों में लगकर मारे गए थे और मणिपुर में भी जातीय  हिंसा में तीन महीने में 150  से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। नोटबंदी  के बाद भी किसी ने मोदी जी को चौराहे  पर लटकने के लिए नहीं कहा और मणिपुर के बाद भी कोई मोदी जी से इस तरह की अपेक्षा नहीं करेगा। मोदी जी संसद में जरूर आएंगे ।  वे संसद का दिल से सम्मान करते है।  उसकी देहलीज पर अपना माथा टेक चुके हैं। विपक्ष मोदी जी को घुटने टेकने पर विवश नहीं कर सकता। माथा टेकने और घुटने टेकने में जमीन -आसमान का अंतर है।</p>
<p>कुल मिलकर लोकतंत्र के लिए विपक्ष का मणिपुर दौरा एक शुभ संकेत है ।  ये काम बहुत  पहले हो जाना चाहिए था ।  यदि मणिपुर में हिंसा   शुरू होने के तत्काल बाद ही विपक्ष या सर्वदलीय संसदीय दल मणिपुर का दौरा कर लेता तो मुमकिन है कि  हिंसा की आग इतनी ज्यादा न फ़ैल पाती। खैर देर आयद,दुरुस्त आयद। जो काम सरकार को करना था वही  काम अब विपक्ष कर रहा है। बात एक ही है ।  विपक्ष कोई योरोप या इंग्लैंड का तो है नहीं। पूर्ण  स्वदेशी है ।  अब तो नाम से भी देशी हो चुका है। मणिपुर के दौरे से लौटकर विपक्ष क्या करता है इसका पता अब सोमवार को संसद बैठने पर ही चलेगा। तब कहीं सत्ता पक्ष विपक्ष की भूमिका में आ गया तो मुश्किल होगी।</p>
<p> राकेश अचल </p>]]>
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                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 16:20:53 +0530</pubDate>
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                <title>देश की फ़िक्र कीजिये, दलों की नहीं</title>
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                        <![CDATA[<p>इस समय देश की सत्ता देश से ज्यादा दलों की चिंता में दुबली हो रही है ।  सत्तारूढ़ दल के सामने देश से पहले चुनाव है। देश का पूर्वी हिस्सा जल रहा है लेकिन हमारी सरकार महाराष्ट्र के रण में उलझी है। सत्तारूढ़ दल की ये कामयाबी है कि नाकामी ये जब तय होगा ,तब तय होगा लेकिन तब तक देश का बहुत बड़ा नुक्सान हो चुका होगा।</p>
<p>महाराष्ट्र और मणिपुर की राशि एक ही है ।  महाराष्ट्र भाजपा की लगाईं आग में जल रहा है और मणिपुर भी।  मणिपुर को जलते हुए दो महीना दो दिन हो चुके हैं</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131873/worry-about-the-country-not-the-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/देश-की-फ़िक्र-कीजिये,-दलों-की-नहीं.jpg" alt=""></a><br /><p>इस समय देश की सत्ता देश से ज्यादा दलों की चिंता में दुबली हो रही है ।  सत्तारूढ़ दल के सामने देश से पहले चुनाव है। देश का पूर्वी हिस्सा जल रहा है लेकिन हमारी सरकार महाराष्ट्र के रण में उलझी है। सत्तारूढ़ दल की ये कामयाबी है कि नाकामी ये जब तय होगा ,तब तय होगा लेकिन तब तक देश का बहुत बड़ा नुक्सान हो चुका होगा।</p>
<p>महाराष्ट्र और मणिपुर की राशि एक ही है ।  महाराष्ट्र भाजपा की लगाईं आग में जल रहा है और मणिपुर भी।  मणिपुर को जलते हुए दो महीना दो दिन हो चुके हैं लेकिन वहां क़ानून का शासन स्थापित नहीं हो पा रहा है ।  केंद्र सरकार की और से राज्य में शांति स्थापना के अब तक किये गए सारे जतन नाकाम हो चुके है।  यहां तक की सेना और अर्द्ध सैनिक बल भी मणिपुर की आग नहीं बुझा पा रहे हैं ,और सूबे की डबल इंजिन की सरकार बेशरमी के साथ तमाशबीन बनी  बैठी है। मणिपुर की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कांग्रेस नहीं है ,बल्कि सत्तारूढ़ दल है। अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए ही लगता है कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में चिंगारी सुलगायी है।</p>
<p>सच कहें तो महाराष्ट्र देश के लिए उतनी बड़ी चिंता नहीं है जितनी बड़ी चिंता मणिपुर है ।  मणिपुर में जातीय हिंसा के साथ अलगाव की आग फिर भड़क उठी है ।  मणिपुर में कुछ लोग फिर से अलग राष्ट्र का मुद्दा उठा चुके हैं ,लेकिन केंद्र सरकार गुड़ खाकर बैठी ह।  चार साल पहले जम्मू-कश्मीर में  एक विधान,दो निशान का मुद्दा उछालकर सूबे की अस्मिता से खलवाड़ करते हुए जम्मू-कश्मीर को तीन हिस्सों में विभाजित करने वाली केंद्र सरकार के लिए मणिपुर गले की हड्डी बनकर रह गया है। मणिपुर पर न हमारे देश के प्रधानमंत्री    किसी मंच से बोल रहे हैं और न किसी को बोलने दे रहे हैं। पोल खुलने का डर है ,लेकिन संसद के वर्षाकालीन सत्र में तो उन्हें अपना मुंह खोलना ही पडेगा। मुमकिन है कि वे संसद को भी ठेंगे पर रखें और कुछ न बोले। और देश का ध्यान महाराष्ट्र पर ही अटकाए रखने की कोशिश करें।</p>
<p>ऊपर से महाबली दिखाई देने वाली भाजपा भीतर से बहुत भयभीत हो चुकी है ।  देश के तमाम राज्य  विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के चेहरे का जादू नहीं चल पाया ,ऐसे में भाजपा अब क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को अपने फंदे में फंसाने में लगी है।  उत्तर प्रदेश में भाजपा ने ईडी और सीबीआई के बल पर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी को पहले ही बधिया बना दिया है। आप पहले से भाजपा की बी  टीम बनी हुई है।  बिहार में भाजपा रामविलास पासवान और जीतनराम माझी की  पार्टियों का सलाद पहले ही बना चुकी है ।  जेडी यूं और राजद पर भाजपा का विभाजनकारी विष काम नहीं कर पाया ,किन्तु महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी इस जहर से दो फाड़ हो गयी। राजस्थान और मध्य्प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ ने भी भाजपा को ठेंगा दिखा दिया।</p>
<p>भाजपा को कायदे से महाराष्ट्र जीतने के बजाय मणिपुर जीतने की कोशिश करना चाहिए ,क्योंकि मणिपुर देश की सुरक्षा सम्प्रभुता से जुड़ा राज्य है। मणिपुर की अशांति बहुत भारी पड़ सकती है। देश का ध्यान बंटाने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  पिछले दिनों मध्यप्रदेश में चुनावी शंखनाद करते हुए समान नागरिक संहिता का मुद्दा उछाल चुके हैं। देश के सामने अभी समान नागरिक संहिता प्रमुख मुद्दा नहीं है ।  मुद्दा मणिपुर है ।  मणिपुर पर केंद्र कुछ भी बोलने को राजी नहीं है ।  विपक्ष भी केंद्र का मुंह खुलवाने में नाकाम रहा है ।  विपक्ष को देश की एकता के बजाय विपक्ष की एकता की पड़ी है। सत्तारूढ़ दल भी मणिपुर की जगह विपक्ष की एकता तोड़ने में लगा है। महाराष्ट्र में उसे आंशिक कामयाबी भी मिल गयी है ,लेकिन इससे देश का कोई फायदा नहीं है। देश को विपक्ष की एकता से ज्यादा मणिपुर में शांति की बहाली चाहिए।<br />जम्मू-कश्मीर में विखंडन   कर वहां धारा 370  हटाने में कामयाब हुई भाजपा सरकार मणिपुर में नाकाम साबित क्यों हो रही है ? इस विषय पर राष्ट्रव्यापी बहस की जरूरत है। ये बहस जब भाजपा रोक रही है तो विपक्ष को इसकी शुरूवात करना चाहिये ।  कांग्रेस के राहुल गांधी ने अग्निदग्ध मणिपुर का दौरा कर इसकी शुरुवात की किन्तु इसे आगे नहीं बढ़ाया। आज समान नागरिक संहिता के मुद्दे के जबाब में मणिपुर पर केंद्र की चुप्पी सबसे बड़ा मुद्दा हो सकता है। किन्तु कांग्रेस और समूचे विपक्ष को मणिपुर की आग को राष्ट्रीय नड्डा बनाने में या तो कामयाबी नहीं मिली या फिर उसने इसकी कोशिश ही नहीं की।  </p>
<p>मणिपुर के 60  साल के इतिहास में भाजपा को पहली   बार शासन करने का मौक़ा मिला और पहली   बार में ही मणिपुर की डबल इंजिन की सरकार ने मणिपुर को आग में झौंक दिया । मनीपुर में सबसे ज्यादा 09  बार शासन करने वाली कांग्रेस से केंद्र सरकार को मणिपुर की आग बुझाने में सहयोग लेने में शर्म आ रही है। कांग्रेस के राहुल गांधी की मणिपुर यात्रा को लेकर भी भाजपा ने संविद पात्रा और स्मृति ईरानी जैसे अपने विद्वान प्रवक्ताओं की सारी ऊर्जा खर्च करा दी फिर भी कुछ हासिल नहीं हुआ। मणिपुर में नागरिक अधिकार एक तरह से अराजक हाथों में है।  प्रतिद्वंदी जातीय समूह एक-दूसरे का खून बहाने में लगे हुए हैं लेकिन केंद्र  और राज्य की भाजपा सरकार तमाशबीनों की तरह निरीह खड़ी नजर आ रही है।</p>
<p>महाराष्ट्र से मणिपुर तक सत्ता का  भाजपाई लालच देश को बहुत मंहगा पड़ रहा है। इसकी कीमत हर भारतीय को अदा करना पड़ rhi  है। देश की जनता जागरुक है ,सब देख रही है लेकिन दुर्भाग्य ये है की जनांदोलन सिरे से गायब है।  केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सही कहते हैं की दुनिया झुक सकती  है लेकिन कोई उसे झुकाने वाला तो हो ! देश का विपक्ष पिछले 9  साल में भाजपा की सरकार और जिद्दी प्रधानमंत्री को झुकाने में उसी तरह नाकाम रहा है जैसे केंद्र सरकार मणिपुर के मामले में नाकाम साबित हो रही है।</p>
<p> देश के बाहर महाराष्ट्र की राजनितिक उठापटक से ज्यादा मणिपुर को लेकर उत्सुकता है। मणिपुर की आग के लिए केंद्र सरकार न पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा पा रही है और न चीन   को ।  चीन   के बारे में तो सरकार एक शब्द भी नहीं बोल पाती। कांग्रेस को मणिपुर के लिए जिम्मेदार ठहराना आसान नहीं ,क्योंकि जनादेश तो भाजपा के नाम है।  ऐसे में मणिपुर की दुर्दशा का ठीकरा तो ले-देकर भाजपा के सर पर ही फूटेगा। मणिपुर में भाजपा की नाकामी का पता पूरे देश को होना चाहिये ।  विपक्ष ही  ये काम कर सकता है ,किन्तु कर नहीं पा रहा है । देश में आने वाले दिनों में होने वाले तमाम चुनाव मणिपुर के ही मुद्दे पर लड़ लिए जाएँ तो देश के मूड का पता चल सकता है। समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर देश एक बार फिर भीतर ही भीतर विभाजित  होगा ,इसकी शुरुवात हो चुकी ह।  यूसीसी   के समर्थन और विरोध में लोग खड़े होने लगे हैं और आम चुनावों तक पूरा देश दो हिस्सों में बनता दिखाई देगा।</p>
<p>मै तो कहता हूँ कि केंद्र सरकार खुशी से धारा 370  हटाने की तरह देश में समान नागरिक संहिता लागू करा दे। लेकिन पहले मणिपुर को बचा ले।  मणिपुर को जम्मु-कश्मीर की तरह तीन हिस्सों में विभाजित नहीं किया जा सकता। यदि मणिपुर कोई आग न बुझी तो पूरब के दूसरे राज्य भी इस आग की चपेट में आ सकते है।  यदि ऐसा हुआ तो महाराष्ट्र या राष्ट्र में परचम फहराने से क्या लाभ होने वाला है ?</p>
<p> राकेश अचल</p>]]>
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                                                            <category>संपादकीय</category>
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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2023 11:50:43 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर क्यों जल रहा है मणिपुर ?</title>
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                        <![CDATA[<p class="MsoNormal">  <br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कर्नाटक में बजरंगबली को दांव पर लगाकर आपको शायद पता नहीं होगा की देश का सीमांत प्रदेश मणिपुर बुरी तरह से जल रहा है .मणिपुर में भाजपा और नेशनल पीपुल्स पार्टी</span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोक जनशक्ति पार्टी और ंगा पीपुल्स फ्रंट की मिलीजुली सरकार है .डबल इंजिन की इस सरकार के इस समय हाथ-पांव फूले हुए हैं .दोनों सरकारें मिलकर भी मणिपुर की आग बुझाने में नाकाम साबित हो रहीं हैं .यहां बजरंगबली की जय बोलने वाला कोई नहीं है .</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मै भी आपकी तरह मणिपुर से बहुत दूर बैठा हूँ लेकिन मेरे पास तमाम सूत्र हैं जो मणिपुर के खौफनाक हालात</span></p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129082/why-is-manipur-burning"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/आखिर-क्यों-जल-रहा-है-मणिपुर.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"> <br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कर्नाटक में बजरंगबली को दांव पर लगाकर आपको शायद पता नहीं होगा की देश का सीमांत प्रदेश मणिपुर बुरी तरह से जल रहा है .मणिपुर में भाजपा और नेशनल पीपुल्स पार्टी</span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोक जनशक्ति पार्टी और ंगा पीपुल्स फ्रंट की मिलीजुली सरकार है .डबल इंजिन की इस सरकार के इस समय हाथ-पांव फूले हुए हैं .दोनों सरकारें मिलकर भी मणिपुर की आग बुझाने में नाकाम साबित हो रहीं हैं .यहां बजरंगबली की जय बोलने वाला कोई नहीं है .</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मै भी आपकी तरह मणिपुर से बहुत दूर बैठा हूँ लेकिन मेरे पास तमाम सूत्र हैं जो मणिपुर के खौफनाक हालात को लगातार देश के लिए रिपोर्ट कर रहे हैं. इन्हीं रिपोर्ट्स के मुताबिक़ राज्य में मैतेई समाज को अनसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने की मांग के बाद हुई इस हिंसा शुरू हुई और अब इसे रोकने के लिए फ़ौज की मदद ली जा रही है. मणिपुर में दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं .खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमितशाह को इस मामले में सीधा हस्तक्षेप करना पड़ा है क्योंकि राज्य में डबल इंजिन की सरकार हालात से निबटने में नाकाम रही . केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने  मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से बात कर  राज्य की स्थिति का जायजा लिया. इसके अलावा केंद्रीय गृह सचिव</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आईबी के निदेशक और संबंधित अधिकारियों के साथ दो वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग बैठकें कीं. उन्होंने मणिपुर के पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बात की.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /> ‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आभूषणों की भूमि</span>’  <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माने और कहे जाने वाला  मणिपुर स्वतंत्रता के पहले भारत की एक  रियासत था । आजादी के बाद यह भारत का एक केंद्रशासित राज्य बना। यहाँ नागा तथा कूकी जाति की लगभग </span>60 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जनजातियाँ निवास करती हैं। यहाँ के लोग संगीत तथा कला में बड़े प्रवीण होते हैं। यहाँ कई बोलियाँ बोली जाती हैं। पहाड़ी ढालों पर चाय तथा घाटियों में धान की खेती होती है। मणिपुर से होकर एक सड़क बर्मा को जाती है।लेकिन अब यही मणिपुर आग उगल रहा है .कारण साफ़ है की राज्य सरकार स्थानीय जनता की आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतरी .</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पांच साल पहले यहां भाजपा ने क्षेत्रीय राजनितिक दलों के साथ मिलकर अपनी पैठ बनाई और आज मणिपुर का मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास है </span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन वे यहां कमल खिलाने के बजाय आग से खेल रहे हैं.ये खेल भाजपा को अब भारीपाद रहा है. राज्य की सत्ता और जनता को बचने के लिए सरकार को मणिपुर में फ़ौज की तैनाती करना पड़ रही है .लेकिन भाजपा के असल बजरंगब</span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ली केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह इस नाकामी को मानने के लिए राजी नहीं हैं .हो भी नहीं सकते .</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोई तीन लाख की आबादी वाले मणिपुर को जलने से बचाने के लिए सुरक्षा बलों को  भेजा गया है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना और असम राइफल्स के </span>55 ‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कॉलम</span>’ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">को तैनात किया गया है. हालात के दोबारा बिगड़ने की सूरत में कार्रवाई के लिए सेना के </span>14 ‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कॉलम</span>’ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">को तैनाती के लिए तैयार रखा गया है. वहीं सेना और असम राइफल्स ने गुरुवार को चुराचांदपुर और इंफाल घाटी के कई इलाकों में फ्लैग मार्च किया और काक्चिंग जिले के सुगनु में भी फ्लैग मार्च किया गया. मणिपुर में स्थिति की निगरानी कर रहे केंद्र ने </span>‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रैपिड एक्शन फोर्स</span>’ (<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आरएएफ) की कई टीम को भी भेजा है.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मणिपुर में हिंसा के कारण हजारों  लोग विस्थापित हो गए हैं.  राज्य की आबादी में </span>53 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रतिशत हिस्से वाले गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे की मांग के खिलाफ चुराचांदपुर जिले के तोरबंग इलाके में </span>‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर</span>’ (<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एटीएसयूएम) के बुलाए गए </span>‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आदिवासी एकजुटता मार्च</span>’ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के दौरान हिंसा भड़क गई थी. नगा और कुकी आदिवासियों के इस मार्च में भड़की हिंसा ने रात में और गंभीर रूप ले लिया.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br />  <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थिति को देखते हुए गैर-आदिवासी बहुल इंफाल पश्चिम</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">काकचिंग</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थौबल</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिरिबाम और बिष्णुपुर जिलों और आदिवासी बहुल चुराचांदपुर</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांगपोकपी और तेंगनौपाल जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है. कर्फ्यू लगाने संबंधी अलग-अलग आदेश आठ जिलों के प्रशासन ने जारी किए गए हैं. गृह विभाग के एक आदेश में कहा गया कि शांति और सार्वजनिक व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए तत्काल प्रभाव से पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है. पूरे राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दरअसल  मैतेई समुदाय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को  जनजातीय वर्ग में शामिल करने की गुहार लगाई थी. इसी याचिका पर बीती </span>19 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अप्रैल को हाईकोर्ट ने अपना फैसले सुनाया. इसमें कहा गया कि सरकार को मैतेई समुदाय को जनजातीय वर्ग में शामिल करने पर विचार करना चाहिए. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इसके लिए चार हफ्ते का समय दिया. अब इसी फैसले के विरोध में मणिपुर में हिंसा हो रही है. हाईकोर्ट के फैसले का राज्य का जनजातीय वर्ग विरोध कर रहा है. जनजातीय संगठनों का कहना है</span>, '<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मैतेई समुदाय को अगर जनजातीय वर्ग में शामिल कर लिया जाता है तो वह उनकी जमीन और संसाधनों पर कब्जा कर लेंगे.</span>' <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विरोध में एक और तर्क दिया जाता है कि जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दोनों में मैतेई का दबदबा है.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली मैरीकॉम के राज्य मणिपुर की हिंसा को लेकर अभी सियासत बयानों तक सीमित है. कांग्रेस के राजीव गांधी और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र से राज्य में सामान्य स्थिति भाल करने का आग्रह किया .सवाल ये है की राज्य में जब बजरंगबली सरकार में बैठे हैं तब यहां हिलना कैसे हुई </span>? <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सवाल ये भी है की क्या राज्य सरकार का सूचना तंत्र इतना  कमजोर है कि उसे इस असंतोष की भनक तक नहीं लगी </span>? <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार नींद से तब जाएगी </span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जब की हालात बेकाबू हो गए .</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मणिपुर को जलने से बचना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि इसे देश की</span> '<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऑर्किड बास्केट</span>' <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भी कहा जाता है। यहाँ ऑर्किड पुष्प की </span>500 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रजातियां पाई जाती हैं। समुद्र तल से लगभग </span>5 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हजार  फीट की ऊँचाई पर स्थित शिरोइ पहाड़ियों में एक विशेष प्रकार का पुष्प शिरोइ लिली पाया जाता है। शिरोइ लिली का यह फूल पूरे विश्व में केवल मणिपुर में ही पैदा होता है। इस अनोखे और दुर्लभ पुष्प की खोज फ्रैंक किंग्डम वॉर्ड नामक एक अंग्रेज ने </span>1946 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में की थी। यह खास लिली केवल मानसून के महीने में पैदा होता है। इसकी विशेषता यह है कि इसे सूक्ष्मदर्शी से देखने पर इसमे सात रंग दिखाई देते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुल </span>16  <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिलों वाले मणिपुर का इतिहास  ईसवी युग के प्रारम्भ होता है . यहां के राजवंशों का लिखित इतिहास सन </span>33 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ई. में पाखंगबा के राज्याभिषेक के साथ शुरू होता है. उसने इस भूमि पर प्रथम शासक के रूप में </span>120 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वर्षों (</span>33-154 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ई ) तक शासन किया. उसके बाद अनेक राजाओं ने मणिपुर पर शासन किया. आगे जाकर मणिपुर के महाराज कियाम्बा ने </span>1467, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">खागेम्बा ने </span>1597, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चराइरोंबा ने </span>1698, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गरीबनिवाज ने </span>1714, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भाग्यचन्द्र (जयसिंह) ने </span>1763, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गम्भीर सिंह ने </span>1825 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">को शासन किया .इन जैसे महावीर महाराजाओं ने शासन कर मणिपुर की सीमाओं की रक्षा की.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मणिपुर की स्वतंत्रता और संप्रभुता </span>19<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वीं सदी के आरम्भ तक बनी रही. उसके बाद सात वर्ष (</span>1819 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से </span>1825 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तक) बर्मी लोगों ने यहां पर कब्जा करके शासन किया. </span>24 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अप्रैल</span>, 1891 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के खोंगजोम युद्ध (अंग्रेज-मणिपुरी युद्ध ) हुआ जिसमें मणिपुर के वीर सेनानी पाउना ब्रजबासी ने अंग्रेजों के हाथों से अपने मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की। इस प्रकार </span>1891 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में मणिपुर ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया और </span>1947 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में शेष देश के साथ स्वतंत्र हुआ। ऐसे मणिपुर को सेना कि हवाले करने कि बजाय बजरंगबली कि हवाले किया जाये तो शायद वहां शांति हो जाए !</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राकेश अचल</span>   </strong></p>]]>
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                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Sat, 06 May 2023 13:21:24 +0530</pubDate>
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