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                <title>jantar mantar - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>वांगचुक को जबरन इलाज, जिम्मेदारी या स्वतंत्रता पर हस्तक्षेप</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बीच पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाना और उसके बाद शुरू हुआ विवाद केवल एक व्यक्ति के इलाज का मामला नहीं है। इसने भारतीय लोकतंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपालिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिक अधिकारों और राज्य की जिम्मेदारियों से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक के स्वास्थ्य की प्रतिदिन सरकारी डॉक्टरों से निगरानी कराई जाए और यदि डॉक्टर आवश्यक समझें तो चिकित्सा हस्तक्षेप किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि</span></p></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183663/forced-treatment-of-wangchuk-as-interference-with-responsibility-or-freedom"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बीच पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाना और उसके बाद शुरू हुआ विवाद केवल एक व्यक्ति के इलाज का मामला नहीं है। इसने भारतीय लोकतंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपालिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिक अधिकारों और राज्य की जिम्मेदारियों से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक के स्वास्थ्य की प्रतिदिन सरकारी डॉक्टरों से निगरानी कराई जाए और यदि डॉक्टर आवश्यक समझें तो चिकित्सा हस्तक्षेप किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि "हर नागरिक का जीवन बहुमूल्य है और उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास होना चाहिए। इसके बाद जब वांगचुक की हालत और बिगड़ी तो दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> पुलिस ने इसे अदालत के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह के अनुरूप उठाया गया कदम बताया। वहीं वांगचुक के समर्थकों और परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल ले जाया गया और बिना सहमति इलाज की कोशिश की गई। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि अदालत ने "जबरन अस्पताल ले जाने" का स्पष्ट आदेश नहीं दिया था। अदालत ने सरकार से कहा था कि स्वास्थ्य की नियमित निगरानी हो और डॉक्टरों की राय के अनुसार आवश्यक चिकित्सा हस्तक्षेप किया जाए। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाद में प्रशासन ने इसी आधार पर अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। क्या चिकित्सा हस्तक्षेप का अर्थ व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में भर्ती करना भी हो सकता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर इसके लिए अलग कानूनी प्रक्रिया और स्पष्ट सहमति आवश्यक है</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय संविधान का अनुच्छेद </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दोनों की रक्षा करता है। यदि कोई व्यक्ति पूरी मानसिक क्षमता में है और स्वयं कोई निर्णय ले रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सामान्य परिस्थितियों में उसकी इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। दूसरी ओर यदि लंबे अनशन के कारण जीवन पर तत्काल खतरा उत्पन्न हो जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो राज्य पर भी नागरिक का जीवन बचाने की जिम्मेदारी होती है। यही वह बिंदु है जहां नैतिक और कानूनी दोनों प्रकार का टकराव उत्पन्न होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या जबरन इलाज उचित है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रश्न का कोई सीधा उत्तर नहीं है। जबरन इलाज के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि सरकार किसी नागरिक को मरते हुए नहीं देख सकती। यदि जीवन बचाया जा सकता है तो प्रशासन को हस्तक्षेप करना चाहिए। अदालत ने भी जीवन की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। वहीं विरोध करने वालों का कहना है कि</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शांतिपूर्ण अनशन लोकतांत्रिक विरोध का संवैधानिक माध्यम है। यदि व्यक्ति मानसिक रूप से सक्षम है तो उसकी इच्छा सर्वोपरि होनी चाहिए। बिना सहमति चिकित्सा हस्तक्षेप व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन माना जा सकता है। परिवार की आपत्ति ने बढ़ाया विवाद वांगचुक की पत्नी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी अनुमति के बिना कोई उपचार न किया जाए। इससे विवाद और गहरा गया क्योंकि अब मामला केवल प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि परिवार की सहमति का प्रश्न भी सामने आ गया। इस घटनाक्रम के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ ने इसे जीवन बचाने की आवश्यक कार्रवाई बताया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि अन्य ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कहा। अस्पताल ले जाने के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए गए। लोकतंत्र केवल विरोध का अधिकार नहीं देता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राज्य पर नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी डालता है। इसलिए ऐसे मामलों में संतुलन बनाना सबसे कठिन कार्य होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकार हस्तक्षेप नहीं करती और कोई अप्रिय घटना हो जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसी सरकार पर लापरवाही का आरोप लगता। वहीं हस्तक्षेप करने पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर सवाल उठते हैं। सोनम वांगचुक का मामला केवल एक अनशन या एक अदालत के आदेश तक सीमित नहीं है। इसने यह बहस फिर से जीवित कर दी है कि किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्यक्ति की स्वायत्तता और राज्य की संरक्षणकारी भूमिका के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने नियमित चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा हस्तक्षेप का निर्देश दिया था</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पताल ले जाने और उसके तरीके को लेकर अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी व्याख्या कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
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<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 21:04:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहलवानों की चेतावनी, कल किसान नेता ले सकते हैं बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[पहलवान विनेश फोगट का कहना है कि खाप नेताओं के फैसले से देश को किसानों के आंदोलन की तरह ही नुकसान हो सकता है. ये किसान आंदोलन लगभग 13 महीने तक चला था.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129450/wrestlers-warning-farmer-leaders-may-take-a-big-decision-tomorrow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/पहलवानों-की-चेतावनी,-कल-किसान-नेता-ले-सकते-हैं-बड़ा-फैसल.jpg" alt=""></a><br /><p><br /><br /></p>
<p>देश के प्रमुख पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं. इस बीच उन्होंने बड़ी चेतावनी दी है. वे भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई न किए जाने से खासे नाराज हैं. उन्होंने इसका विरोध करने के लिए रविवार को ‘बड़ा फैसला’ लेने की बात कही है, जो ‘देश के हित में नहीं’ हो सकता है. बृजभूषण शरण सिंह महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे हैं.</p>
<p>पहलवानों के विरोध प्रदर्शन को और तेज करने के लिए खाप महापंचायत को 21 मई डेडलाइन दी थी, जिसके बाद इस प्रदर्शन को खाप पंचायत आगे बढ़ाएंगे. दरअसल, पहलवान बृजभूषण की गिरफ्तारी की मांग को लेकर 23 अप्रैल से जंतर-मंतर पर बैठे हुए हैं. BJP सांसद पर 1 नाबालिग सहित 7 महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं.</p>
<p><br />पहलवान विनेश फोगट का कहना है कि खाप नेताओं के फैसले से देश को किसानों के आंदोलन की तरह ही नुकसान हो सकता है. ये किसान आंदोलन लगभग 13 महीने तक चला था. रविवार को अगर बड़े लोग जो भी फैसला लेंगे वो काफी बड़ा हो सकता है. ऐसे में कहा जा सकता है कि ये फैसला देश में न हो. ये एक आसान लड़ाई नहीं रही है और पहलवानों को भी ट्रेनिंग और कॉम्पटीशन से चूकने के मामले में बहुत कुछ सहना पड़ा</p>
<p><br />विनेश फोगाट ने कहा, ‘उन्होंने भी बहुत कुछ झेला है. जो मुद्दा एक मिनट में हल हो सकता था उसमें एक महीना लग गया… किसान आंदोलन 13 महीने तक चला और निश्चित रूप से देश को नुकसान पहुंचा, इसलिए अगर कोई और आंदोलन होता है तो निश्चित रूप से देश भुगतेगा.’ वहीं, बजरंग पुनिया का कहना है कि 23 मई को इंडिया गेट पर कैंडल-लाइट मार्च किया जाएगा, जोकि शाम 4 बजे से शुरू होगा. पहलवानों ने बताया है कि वे मस्जिद, मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च हर जगह न्याय के लिए अपना मैसेज लेकर जाएंगे.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/129450/wrestlers-warning-farmer-leaders-may-take-a-big-decision-tomorrow</link>
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                <pubDate>Sat, 20 May 2023 22:36:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक्शन मोड में दिल्ली पुलिस, 6 महिला पहलवानों के दर्ज किए बयान</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली पुलिस बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कर चुकी है. इस हफ्ते की शुरुआत में उसने यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में डब्ल्यूएफआई प्रमुख का बयान दर्ज किया था.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129321/in-action-mode-delhi-police-recorded-statements-of-6-women"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/v.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे पहलवान अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं हैं. वह यौन उत्पीड़न के आरोपों का हवाला देते हुए बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. इस बीच दिल्ली पुलिस एक्शन मोड में दिखाई दे रही है. उसने अबतक नाबालिग समेत कुल 6 महिला पहलवानों के बयान धारा 164 के तहत दर्ज किए हैं. बताया गया है कि इनमें से दो के बयान मंगलवार को दर्ज किए गए हैं.</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की SIT को कुछ दस्तावेज और फोटो ब्रिज भूषण शरण सिंह ने दिए हैं. SIT की जो टीम बाहर गई थी, वो सब वापस दिल्ली लौट आई है. पुलिस को जो भी जानकारी और दस्तावेज मिले हैं अब उनकी जांच में जुट गई है. टीम जल्द ही सातवीं महिला पहलवान के भी बयान दर्ज करेगी. बीते दिन बीजेपी के वरिष्ठ नेता बीरेंद्र सिंह ने पहलवानों से मुलाकात की थी. उनका कहना था कि जांच के बाद दोषियों को सजा दी जानी चाहिए.</p>
<p>बीरेंद्र सिंह ने पहलवानों से मुलाकात की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे देश के पहलवान बेटे और बेटियों से मुलाकात की. दरअसल, प्रमुख महिला और पुरुष पहलवान 23 अप्रैल से जंतर-मंतर पर बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं. इस धरने को किसान संगठनों ने भी समर्थन दिया है. साथ ही साथ सरकार को चेतावनी भी दे चुके हैं.</p>
<p>दिल्ली पुलिस बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कर चुकी है. इस हफ्ते की शुरुआत में उसने यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में डब्ल्यूएफआई प्रमुख का बयान दर्ज किया था. पहली एफआईआर एक नाबालिग पहलवान की ओर से लगाए गए आरोपों से संबंधित है, जिसे (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज किया गया है, जबकि दूसरी वयस्कों की ओर से दर्ज करवाई गई है. बृजभूषण के खिलाफ पहलवानों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/129321/in-action-mode-delhi-police-recorded-statements-of-6-women</link>
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                <pubDate>Tue, 16 May 2023 21:12:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहलवानों के समर्थन में किसान संगठन ने भरी हुंकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal">  </p>
<p class="MsoNormal">  </p>
<h4 class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिल्ली के जंतर-मंतर में महिला पहलवानों से दुर्व्यवहार का मामला</span></strong></h4>
<p class="MsoNormal">  </p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अभोली</span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भदोही:</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> दुर्गागंज थानाक्षेत्र के सदलूबीर बाजार में स्थित किसान संगठन के जिला कार्यालय पर भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सालिकराम यादव ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दुर्गागंज पुलिस को सौंप है और दिल्ली में पहलवानों के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में कई सवाल खड़े किए हैं . </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राष्ट्रपति को संबोधित पत्रक में कहा कि दिल्ली के जंतर मंतर पर भारत में खेलो में नाम रोशन करने वाली पहलवान बेटियां न्याय</span>    <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पाने के लिए कई दिनों से संघर्ष कर रही हैं उन्होंने कुश्ती संघ के अध्यक्ष एवं</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129071/farmers-organization-roared-in-support-of-wrestlers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/पहलवानों-के-समर्थन-में-किसान-संगठन-ने-भरी-हुंकार.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"> </p>
<p class="MsoNormal"> </p>
<h4 class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिल्ली के जंतर-मंतर में महिला पहलवानों से दुर्व्यवहार का मामला</span></strong></h4>
<p class="MsoNormal"> </p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अभोली</span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भदोही:</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> दुर्गागंज थानाक्षेत्र के सदलूबीर बाजार में स्थित किसान संगठन के जिला कार्यालय पर भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सालिकराम यादव ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दुर्गागंज पुलिस को सौंप है और दिल्ली में पहलवानों के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में कई सवाल खड़े किए हैं . </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राष्ट्रपति को संबोधित पत्रक में कहा कि दिल्ली के जंतर मंतर पर भारत में खेलो में नाम रोशन करने वाली पहलवान बेटियां न्याय</span>  <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पाने के लिए कई दिनों से संघर्ष कर रही हैं उन्होंने कुश्ती संघ के अध्यक्ष एवं भाजपा के सांसद बृजभूषण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं यौन शोषण संबंधी ऐसे आरोपों में सामान्यतया आरोपी की गिरफ्तारी तुरंत की जानी चाहिए लेकिन दुर्भाग्य है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दखल के बाद एफ आई आर दर्ज होने के बावजूद भी गिरफ्तारी नहीं हुई उल्टे पहलवान बेटियों के साथ दिल्ली पुलिस जालिमाना व्यवहार कर रही है . </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस ने घेराबंदी कर रखी है </span>3 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मई की रात उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया इन परिस्थितियों में हम आप पर विश्वास करते हैं कि बेटियों के दर्द का एहसास करते हुए केंद्र और दिल्ली पुलिस को यथोचित निर्देश देने की कृपा करें तथा आरोपी की गिरफ्तारी के सभी पदों से हटाया जाए </span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पहलवान बेटियों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के साथ उचित कार्यवाही की जाए .</span>  <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस मौके पर मंडल अध्यक्ष अशोक कुमार यादव</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिला मंत्री राजेन्द्र प्रसाद पाल</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेमराज मिश्रा</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मीरा देवी</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उर्मिला देवी आदि लोग उपस्थित रहे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 May 2023 13:08:49 +0530</pubDate>
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