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                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>महाराष्ट्र को तमिलनाडु मत बनाओ राज !</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भाषाई विवाद से दक्षिण अभी तक मुक्त नहीं हुआ है और एक बार फिर महाराष्ट्र भाषाई विवाद में उलझता दिखाई दे रहा है।  महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में पढ़ाये जाने का फैसला किया तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे इसके विरोध में आ गए।  अब एकनाथ शिंदे गुट ने उन पर निशाना साधा है।  जाहिर है  कि महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार है सो उसका हिंदी के खिलाफ जाना नामुमकिन है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में भाषा को लेकर विवाद नया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151152/do-not-make-maharashtra-tamil-nadu"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/hindi-marathi-row.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भाषाई विवाद से दक्षिण अभी तक मुक्त नहीं हुआ है और एक बार फिर महाराष्ट्र भाषाई विवाद में उलझता दिखाई दे रहा है।  महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में पढ़ाये जाने का फैसला किया तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे इसके विरोध में आ गए।  अब एकनाथ शिंदे गुट ने उन पर निशाना साधा है।  जाहिर है  कि महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार है सो उसका हिंदी के खिलाफ जाना नामुमकिन है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में भाषा को लेकर विवाद नया नहीं है। आजादी के 77  साल बाद भी ये विवाद न सिर्फ ज़िंदा है बल्कि लगातार जारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति  में तीन भाषाओं को पढ़ाने का प्रावधान आने के बाद, दक्षिण में केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार के बीच हिंदी-तमिल विवाद ने और जोर पकड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने हिंदी को मातृभाषाओं का ‘हत्यारा’ तक कह डाला। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार हिंदी थोपकर भाषाई अस्मिता को कमजोर कर रही है। डीएमके नेता कनिमोझी ने भी इस मुद्दे पर कहा कि उनकी आपत्ति हिंदी को थोपे जाने से है, न कि भाषा को लेकर।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल ये है कि  क्या किसी एक देश की एक भाषा होना चाहिए या नहीं ? सवाल ये भी है की क्या अहिन्दी भाषी राज्य एक स्वतंत्र राष्ट्र हैं जो वे अपनी मातृभाषा को ही अपनी राजभाषा बनाये रखना चाहते हैं। सवाल ये भी है कि  क्या नई शिक्षा नीति में सचमुच हिंदी अहिन्दी भाषियों पर थोपी जा रही है ? हर भाषा- भाषी को अपनी मातृभाषा पर गर्व होता है ,होना भी चाहिए किन्तु क्या केवल क्षेत्रीय भाषाओँ के बूते कोई एक राष्ट्रआगे बढ़ सकता है ? इन सवालों का जबाब खोजने के बजाय दक्षिण के राज्य हिंदी के अंध विरोध में संघर्षरत हैं।  हिंदी के विरोध से किसी को क्या नफ़ा-नुक्सान होता है इसके बारे में कोई कुछ नहीं बोलता।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र  सरकार के इस फैसले का महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने विरोध किया है। ठाकरे ने एक बयान में कहा है कि मैं स्पष्ट शब्दों में कहता हूं कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इस अनिवार्यता को बर्दाश्त नहीं करेगी। राज ठाकरे ने इसमें लिखा है 'हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं! अगर आप महाराष्ट्र को हिंदी के रंग में रंगने की कोशिश करेंगे, तो महाराष्ट्र में संघर्ष होना तय है।'</p>
<p style="text-align:justify;">ठाकरे ने  लिखा है अगर आप यह सब देखेंगे, तो आपको लगेगा कि सरकार जानबूझकर यह संघर्ष पैदा कर रही है। क्या यह सब आने वाले चुनावों में मराठी और गैर-मराठी के बीच संघर्ष पैदा करने और उसका फायदा उठाने की कोशिश है?</p>
<p style="text-align:justify;">राज ठाकरे महाराष्ट्र के स्टालिन नहीं हैं हालाँकि उनका अपना रूतबा है ,अपनी ताकत है। वे स्टालिन की तर्ज पर हिंदी का विरोध कर महाराष्ट्र का और मराठी भाषा का भला शायद नहीं कर पाएंगे। क्योंकि महाराष्ट्र देश की आर्थिक राजधानी है और वहां पूरा देश ही नहीं बल्कि दुनिया एकाकार   होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में रहने वालों को जितनी मराठी की जरूरत है उतनी ही हिंदी की भी।  मैं राज ठाकरे का निजी तौर पर प्रशसंक हूँ किन्तु उन्हें मश्विरा देना चाहूंगा कि  वे हिंदी का विरोध छोड़ दें। हिंदी न तो मुगलों की भाषा है और न अंग्रेजों की ।  हिंदी न तमिल के खिलाफ है और न मराठी के खिलाफ।  भाषाओं का वजूद उनके इस्तेमाल से बनता-बिगड़ता है।  कोई भाषा किसी भाषा का नुक्सान तब तक नहीं कर सकती जब तक की उसके बोलने वाले ऐसा न चाहें।</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया में भारत की तरह बहुत से देश बहु भाषा भाषी हैं। दुनिया  के बहु भाषाभाषी देश ऐसे हैं जो बहुभाषाभाषी होते हुए भी एक राष्ट्रीय भाषा के पक्षधर हैं ।  हमारे पड़ौस चीन में 306 भाषाएँ हैं और हमारे यहां 453  भाषाएँ लेकिन क्या हम भाषाओं की वजह से दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थ व्यवस्था बन पाए ? बहरहाल भाषा किसी कोहिंदू,मुसलमान,सिख या ईसाई नहीं बनाती। आप हिंदी बोलकर मराठी होने का गौरव नहीं खो देते।</p>
<p style="text-align:justify;">तमिल वाले ऐसा सोचते हैं लेकिन दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा होने के बाद तमिल को कुल 120  मिलियन लोग बोलते हैं जबकि अंग्रेजी को । 268  बिलियन और चीनीदुसरे और  हिंदी इस मामले में तीसरे नंबर पर है ।  हिंदी बोलने वालों की संख्या 637  मिलियन ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज भाई साहब को समझना चाहिए कि  हिंदी सीखकर कोई मुसलमान या  ईसाई नहीं हो सकता वो जो है वो ही रहेगा । मराठी है तो मराठी रहेगा ,इसलिए उन्हें अपना हिंदी विरोध छोड़ देना चाहिए।  मुझे पता है कि  राज ठाकरे की शिवसेना में एक से बढ़कर एक हिंदी भाषी दिग्गज हैं। उन्होंने मराठी भी सीख ली है ,लेकिन किसी के कहने  पर नहीं बल्कि अपनी जरूरत के हिसाब से।  इसी तरह हिंदी सीखकर किसी की मराठी अस्मिता समाप्त हो जाएगी ,ये धारणा बनाना ही गलत है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीति के लिए भाषा के अलावा और दूसरे तमाम मुद्दे है।  भाषायी आधार पर राजनीति करने से न तमिलनाडु की कोई राजनितिक पार्टी आजतक राष्ट्रीय पार्टी बन पायी हौर न महाराष्ट्र की किसी राजनितिक पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल पाया।</p>
<p style="text-align:justify;">राज ठाकरे का तर्क है कि  देश के तमाम राष्ट्रों का गठन भाषायी आधार पार किया गया था,सही है लेकिन भाषायी आधार पर राज्य  के गठन का ये अर्थ ये तो नहींहै कि  वे किसी एक भाषा के जरिये सम्पर्क सूत्र में नहीं बन सकते। अतीत में जब मनसे नहीं थी तब भी भाषायी आधार पर गैर मराठियों के साथ आंदोलन भी हुए और गैर मराठियों कोमहारष्ट्र से खदेड़ने की कोशिशें भी।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन क्या महाराष्ट्र गैर मराठियों  से रिक्त या मुक्त हो गया ? राज भाई साहब को समझना चाहिए कि  वे जिस दौर की दुनिया में है वहां  न रंग के आधार  पर , न जाति के आधार पार और न भाषा के आधार पर किसी से भेद नहीं किया जा सकता।  भाषायी अस्पृश्यता भी उतनी ही खराब है जितनी कि  जातीय अस्पृश्यता। इसलिए हिंदी का विरोध करने से फायदा कम नुकसान जयदा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मुमकिन है कि  कल को हिंदी के मुद्दे को लेकर राज ठाकरे की नमस्ते एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ हाथ मिला ले लेकिन इससे न राज्य की सरकार अस्थिर होगी और न उसे ब्लैकमेल किया जा सकेगा। हिंदी के विरोध के किसी भी आंदोलन से महाराष्ट्र का महाराष्ट्र की  अर्थव्यवस्था और संस्कृति का नुक्सान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दक्षिण वाले हिंदी का विरोध कर अपने सूबे की सियासत में तो टिके हैं लेकिन वे राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा नहीं बन पाए   हैं। हम चाहते हैं कि  राज ठाकरे जैसे प्रतिभाशाली युवा राष्ट्रिय राजनीति का हिस्सा बनें ,किन्तु इसके लिए राज ठाकरे को अपनी भाषायी प्रतिबद्धता का त्याग करना पड़ेगा। क्योंकि हिंदी के साथ खड़े होने का अर्थ मराठी या मराठियों का विरोध या उनके हितों का अतिक्रमण नहीं है।  </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:12:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नवम्बर में भारत बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा हीरा व्यापार केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 0.0001pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">लोग</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">यूँही</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">गुजरातियों</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">को</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">पूर्ण</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">खानदानी</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">व्यापारी</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">का</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">तमगा</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">नहीं</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">देते। वे अपने अनुभवों के आधार पर जानते हैं कि अवसर का तुरंत लाभ और आपदा में अवसर खोजने में गुजराती का कोई जबाव नहीं है। वह जहां भी होता है, जिस जगह भी होता है अपने लिए जगह बना ही लेता है। और अगर गुजराती गुजरात में ही हो तो फिर सोने में सुहागा की कहावत को चरितार्थ कर देता है। आज दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति से लेकर दुनिया का सबसे बड़ा सोलर इनर्जी पार्क के साथ अनेक विश्व रिकार्ड गुजरात के नाम हो चुके हैं और अब</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133497/india-will-become-the-worlds-largest-diamond-trading-center-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/hindi-divas5.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 0.0001pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">लोग</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">यूँही</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">गुजरातियों</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">को</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">पूर्ण</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">खानदानी</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">व्यापारी</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">का</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">तमगा</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">नहीं</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">देते। वे अपने अनुभवों के आधार पर जानते हैं कि अवसर का तुरंत लाभ और आपदा में अवसर खोजने में गुजराती का कोई जबाव नहीं है। वह जहां भी होता है, जिस जगह भी होता है अपने लिए जगह बना ही लेता है। और अगर गुजराती गुजरात में ही हो तो फिर सोने में सुहागा की कहावत को चरितार्थ कर देता है। आज दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति से लेकर दुनिया का सबसे बड़ा सोलर इनर्जी पार्क के साथ अनेक विश्व रिकार्ड गुजरात के नाम हो चुके हैं और अब नवम्बर में प्रधान मंत्री द्वारा सूरत के ‘डायमंड एक्सचेंज’ के औपचारिक उद्घाटन के बाद दुनिया के सबसे बड़े व्यापार केंद्र और विश्व के सबसे बड़े कार्यालय भवन का रिकार्ड भी गुजरात बनाने जा रहा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 0.0001pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 8pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">संसार के सबसे बड़े एक परिसरीय कार्यालय भवन का खिताब भी अब सूरत को मिल चुका है। सूरत में चार वर्ष  की अथक मेहनत के बाद दुनिया का सबसे बड़ा ‘डायमंड एक्सचेंज’ बनकर तैयार हो चुका है। इसने अमेरिका के पेंटागन परिसर को पीछे छोड़ दिया है। यह अब दुनिया का सबसे बडा भवन परिसर बन गया है। अभी तक दुनिया की सबसे बड़ी ‘ऑफिस बिल्डिंग’ का खिताब अमेरिका के रक्षा विभाग के मुख्यालय भवन पेंटागन के नाम रहा है। गुजरात के सूरत में विश्व की सबसे बड़ी ऑफिस बिल्डिंग का निर्माण हुआ है। इस इमारत को ‘हीरा व्यापार केंद्र’ के रूप में विकसित किया गया है। यह बिल्डिंग बाहर से जितनी आकर्षक और सुंदर है अंदर से उतनी ही शानदार भी है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 8pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">इस ‘अभी और अधिक विनिर्मिति क्षेत्र परिसर’ को तैयार करने में चार साल का समय लगा है। अभी तक विनिर्मित इस बिल्डिंग का फ्लोर स्पेस 70.1 लाख वर्ग फिट का है। इस परिक्षेत्र का औपचारिक उद्घाटन नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से किया जाएगा। यह भवन बाहर से जितना आकर्षक और मनोहर है अंदर से भी उतना ही सुख सुविधाओं से परिपूर्ण भवन क्षेत्र भी है। इसे विश्व के डायमंड कैपिटल की ओर तेजी से बढ़ते सूरत में </span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">'</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">वन स्‍टॉप डेस्टिनेशन</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">' </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">के रूप में बनाया गया है। बता दें कि सूरत में दुनिया के 90 फीसदी से अधिक हीरे तराशे जाते हैं। इसमें नौ आयताकार बिल्डिंग्स है जो सभी एक सेंट्रल स्‍पाइन से जुड़ी हुई हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 8pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">अपनी मेहनत और अपार व्यापार बुद्धि के चलते गुजरातियों ने पहले बम्बई जो अब मुंबई कहलाता है को और फिर उसके बाद सूरत को हीरा व्यापार का हीरा कैसे बनाया, विभिन्न श्रोतो से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रंखला इस प्रकार बनती है   </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 8pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">विश्व में कुल उत्पादन के 99% प्राकृतिक हीरे अफ्रीका की खदानों से निकलते हैं और डीबियर्स जैसी तमाम बड़ी कंपनियां उन अनगढ़ हीरों को एंटवर्प में बैठे बड़े बड़े यहूदी दलालों के माध्यम से गुजरात में तराशने और पॉलिश करने के लिए भेजती थी</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">परिष्कृत</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">होकर</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">फिर गुजरात के सूरत से वह हीरा यानी कच्चा हीरा पॉलिश होकर वापस एंटवर्प के यहूदी दलालों के पास जाता था</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">और फिर वहां से वे जगमगाते हीरे सम्पूर्ण विश्व के बाजारों में बिकने के लिए पंहुच जाते थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 8pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">सूरत के विश्वपटल पर आने से पहले पूरे विश्व में दो शहर डायमंड के सबसे बड़े केंद्र थे। एक बेल्जियम का एंटवर्प और दूसरा रूस का ब्लोड़ीबोस्टक।</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">इन दोनों जगहों पर पूरी तरह से यहूदी व्यापारियों का सम्पूर्ण हीरा व्यापार पर एकछत्र कब्जा था। स्मरणीय है कि यहूदी व्यापार के मामले में सबसे बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं। इन्होंने अपना एक व्यापारिक संबंधों का ऐसा अभेद्य किला बना दिया था कि दूसरे किसी को भी हीरा उद्योग में टिकने ही नहीं देते थे।</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">इनका नेटवर्क जर्मनी, इजराइल, रूस से लेकर अमेरिका के न्यूयॉर्क तक फैला हुआ था। एक समय हालात ऐसे थे एंटवर्प में बैठा यहूदी अपरिष्कृत हीरे लेकर गुजरात के सूरत में पॉलिश करवाता था और वापस उन हीरों को ऊंचे दामों पर उन्ही कंपनियों को बेच देता था।</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 8pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">इस पूरी प्रक्रिया में एंटवर्प में बैठा यहूदी दलाल बगैर किसी मेहनत मजदूरी के 20 से 25 प्रतिशत तक का लाभ कमा लेता था और सूरत में हीरा पालिश करने वाली कंपनियों को मात्र 4 से 5 प्रतिशत तक ही लाभ मिल पाता था।</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">सूरत के एक हीरा पॉलिश की यूनिट चलाने वाले सेवंतीभाई शाह</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">जो गुजरात के बनासकांठा जिले के थरा गांव के रहने वाले थे</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">उन्हें भी यह देखकर बड़ा दुख होता था हम इतनी मेहनत और मजदूरी करते हैं</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">हमें सिर्फ चार से 5 प्रतिशत मुनाफा मिलता है</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">लेकिन एंटवर्प में बैठा यहूदी बिना किसी मेहनत के 20 से 25 प्रतिशत कमा लेता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 8pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">बहुत सोचविचार के बाद उन्होंने एंटवर्प जाकर वहां पर हीरे की दलाली करने की सोची, मगर उन्हें उनके शुभ चिंतकों ने कहा कि यहूदी बिजनेस में इतने माहिर होते हैं कि उन्हें टक्कर देना आसान काम नहीं है और ऊपर से अफ्रीका से लेकर अमेरिका, रशिया, बेल्जियम, ब्रिटेन पूरी दुनिया में उनका अपना एक नेटवर्क है। उसको छेद पाना आपके अकेले बस की बात नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 8pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">मगर सेवंतीभाई शाह नहीं माने. उन्होंने कहा कि मेरे पास मेरी मेहनत</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">मेरा पुरुषार्थ</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">मेरी ईमानदारी और मेरी विश्वसनीयता रहेगी। उसके बाद सेवंती भाई शाह ने एंटवर्प में अपना एक ब्रांच ऑफिस शुरू किया और वह डीबियर्स के मालिकों को यह समझाने में सफल रहे कि आप हीरे किसी कंपनी को देते हैं वह हमसे पॉलिश करवाती है। 5 प्रतिशत मुनाफा हम कमाते हैं, 20 प्रतिशत मुनाफा वह दलाल कमाता है। इस तरह आपको 25 प्रतिशत का नुकसान होता है। आप अपना अपरिष्कृत हीरा मुझे दीजिए. मैं परिष्कृत करके सिर्फ 15 प्रतिशत में वापस कर दूंगा लेकिन मेरे पास बहुत बड़ी पूंजी नहीं है</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">मेरे पास विश्वसनीयता और वचनबद्धता है</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">मेरी ईमानदारी है। आप मुझ पर विश्वास करके यह काम शुरू कर सकते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 8pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">आपको सीधे सीधे 10 प्रतिशत का लाभ  होगा।</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">हीरा उद्योग में जहां करोड़ों का काम होता है वहां 10 प्रतिशत बहुत मायने रखता है। डीबियर्स के मालिक यह बात समझ गए और उन्होंने सेवंती भाई को शुरू में कम और फिर भरपूर हीरा पालिश के लिए देना शुरू कर दिया।</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">सेवंती भाई शाह ने भी पूरी ईमानदारी से कार्य किया और बहुत अच्छे तरीके से हीरा पॉलिश करके उन्हे देते रहे। इससे गुजरातियों की साख बन गयी। सेवंती भाई ने अन्य बन्धु बांधवों को वहां बुलाया और फिर तो कमाल ही हो गया। धीरे धीरे हालत ऐसे बनते गए कि आज आप एंटवर्प चले जाइए</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">एक भी यहूदी आपको नजर नहीं आएगा। सारा हीरा उद्योग गुजराती व्यापारियों ने कब्जा कर लिया है। अब यहूदी उन्हीं गुजरातियों के यहां नौकरी करते नजर आ रहे हैं।</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">मजे की बात यह है कि एंटवर्प में जाने पर आपको ऐसा लगेगा कि जैसे आप गुजरात आ गए हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 0.0001pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">वहां पर आपको दाबेली की दुकानें दिखेंगी</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">ढोकला और खम्मन बिकता हुआ नजर आएगा। हर गली मुहल्ले और मोड़ पर आपको गुजराती रेस्टोरेंट मिलेंगे और हर तीसरा व्यक्ति आपको गुजराती बोलता मिलेगा।</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;"> </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">यही हाल ब्लोड़ीबोस्टक का भी हो गया है</span><span style="font-size:11pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';color:#000000;">, </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">गुजराती व्यापारियों ने ब्लोड़ीबोस्टक से यहूदियों से पूरा हीरा उद्योग छीन लिया है और वही यहूदी आज गुजराती व्यापारियों के यहां नौकरी कर रहे हैं। अब पूरा गुजराती समाज सूरत को ‘हीरा हब’ के रूप में विकसित कर रहा है जिसमें राज्य और केंद्र सरकार खुले दिल से साथ दे रहे हैं।            </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0in 0in 0.0001pt;font-size:12pt;font-family:'Times New Roman', serif;"><span style="font-size:14pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';">- </span><span style="font-size:14pt;font-family:Mangal, serif;">राज</span><span style="font-size:14pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';"> </span><span style="font-size:14pt;font-family:Mangal, serif;">सक्सेना</span><span style="font-size:14pt;font-family:Calibri, 'sans-serif';"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Aug 2023 15:02:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्नाटक चुनाव परिणाम की कहानी का राजस्थान तक असर होने वाला  हैं </title>
                                    <description><![CDATA[<p><br />  <br />कर्नाटक चुनाव परिणाम की कहानी का राजस्थान तक असर होने वाला  हैं. जनता के जनादेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के लिए संदेश छिपे हैं. यही वजह है कि इस रिजल्ट की रोशनी में दोनों ही दल अपनी नई स्ट्रैटजी बनाने पर जोर दे रहे हैं. नई रणनीति में राज्य स्तर के उन बड़े नेताओं को मौका मिल सकता है, जो अभी हाशिए पर हैं. कर्नाटक के ‘चुनावी नाटक’ से पर्दा उठने के बाद यह तो तय हो गया है कि विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय महत्व से जुड़े बड़े मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों पर भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129387/the-story-of-the-karnataka-election-result-is-going-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/कर्नाटक-का-मुख्यमंत्री-कौन-बनेगा1.jpg" alt=""></a><br /><p><br /> <br />कर्नाटक चुनाव परिणाम की कहानी का राजस्थान तक असर होने वाला  हैं. जनता के जनादेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के लिए संदेश छिपे हैं. यही वजह है कि इस रिजल्ट की रोशनी में दोनों ही दल अपनी नई स्ट्रैटजी बनाने पर जोर दे रहे हैं. नई रणनीति में राज्य स्तर के उन बड़े नेताओं को मौका मिल सकता है, जो अभी हाशिए पर हैं. कर्नाटक के ‘चुनावी नाटक’ से पर्दा उठने के बाद यह तो तय हो गया है कि विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय महत्व से जुड़े बड़े मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों पर भी फोकस होगा.</p>
<p>राजस्थान की तरह कर्नाटक कांग्रेस में भी डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चुनाव से पहले ही शीतयुद्ध की स्थिति थी. पार्टी ने मार्च 2020 में डीके शिवकुमार को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर आगे किया, लेकिन सिद्धारमैया को भी पूरी तवज्जो दी. मुख्यमंत्री  की चाहत के बावजूद दोनों नेताओं ने एकजुटता के साथ चुनाव प्रचार किया। कार्यकर्ताओं तक भी एकता का मैसेज गया। यह भी बड़ी वजह रही कि कांग्रेस ने कर्नाटक का किला जीत लिया। चूंकि अगला विधानसभा चुनाव राजस्थान में है। भाजपा बड़े बहुमत से राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए तमाम दांवपेंच लगा रही है। आगामी चुनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रदेश दौरे बढ़ते जा रहे हैं। पिछले 8 महीनों यानी 240 दिन में पीएम मोदी 5 बार राजस्थान जा चुके हैं ।</p>
<p>भाजपा के लिए राजस्थान में जीत दर्ज करना जरूरी हो जाता है क्योंकि ये जीत राज्यसभा में अच्छी संख्या हासिल करने में मदद करेगी। साथ ही ये जीत लोकसभा चुनावों में भी फायदेमंद साबित होगी। कर्नाटक में मिली हार के बाद भाजपा अपने चुनाव प्रचार अभियान में बदलाव कर सकती है।  पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को चुनाव प्रचार में उतारने पर विचार कर सकती है। </p>
<p>राजे वर्तमान में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपने स्वयं के सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही हैं। राजस्थान में भाजपा के पास राजे के कद की कोई महिला नेता नहीं है। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में अपनी ताकत साबित की है। बताया जाता है कि  भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि पार्टी के आंतरिक आकलन ने ये संकेत दिया है कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव में मुश्किल से साधारण बहुमत हासिल कर पाएगी। फिलहाल भाजपा राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस के खिलाफ जीत के फॉर्मूले की तलाश कर रही है, सवाल ये भी है कि क्या भाजपा सत्तारूढ़ पार्टी के संभावित दलबदलुओं पर अतिनिर्भरता का जोखिम उठा सकती है?</p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान में आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले नेताओं सहित कई भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस मुक्त भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए हम कांग्रेस-युक्त भाजपा बन रहे हैं। भाजपा के अंदर ये सवाल भी उठने लगे हैं कि भाजपा सीटें खोने की कीमत पर पारंपरिक राजनीतिक परिवारों को चुनाव टिकट देने से कैसे इनकार करेगी।</p>
<p>राजस्थान में भाजपा ने 2013 में 200 विधानसभा सीटों में से 163 पर जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार पार्टी के लिए इतनी सीटें लाना एक चुनौती होगी। पिछले साल दिसंबर में हिमाचल प्रदेश के बाद, कर्नाटक दूसरा राज्य है जहां भाजपा ने एक के बाद एक सत्ता खो दी है।  </p>
<p>याद दिला दें कि हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने चार रैलियां की थी। डेढ़ महीने में पीएम मोदी ने करीब चार बार हिमाचल की जनता से मुलाकात की थी। कर्नाटक चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के बाबत भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रधानमंत्री  मोदी खुद भाजपा के पक्ष में धुआंधार चुनाव प्रचार कर रहे थे। लेकिन दोनों ही राज्यों के नतीजे भाजपा के खिलाफ चले गए। </p>
<p>ऐसे में राजस्थान के चुनाव प्रचार में भाजपा को मुख्यमंत्री पद का चेहरा पेश करने की जरूरत पड़ सकती है, और राजे एक बेहतरीन चेहरा मानी जा रही हैं, लेकिन इसमें पार्टी के अंदर राजे की मुखालफत करने वाले नेता सबसे बड़ी चुनौती बन सकते हैं। जानकारों का मानना है कि वसुंधरा राजे फैक्टर विधानसभा चुनाव 2023 और लोकसभा चुनाव 2024 में अहम रहेगा।</p>
<p>ऐसे में भाजपा को उन्हें लेकर जल्द ही कोई फैसला लेना पड़ेगा। जल्द ही उनकी भूमिका भी तय हो जाएगी। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और भाजपा कांग्रेस मुक्त भारत के अपने मिशन को राजस्थान जीत कर पूरा कर सकती है। याद दिला दें कि 2021 के राजस्थान की तीन विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव  में राजे चुनाव प्रचार में नहीं उतरी थी। उनकी जगह पर भाजपा ने  उनके भतीजे ज्योतिरादित्य सिंधिया को बुलाकर प्रचार करवाया था।</p>
<p>अब यदि बात कांग्रेस की करें तो 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की परेशानी मुख्य रूप से चुनाव अभियान के दौरान मुख्यमंत्री पद का चेहरा पेश करने को लेकर हुई थी। चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के ज्यादातर विधायकों ने व्यक्तिगत रूप से तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से कहा था कि वे तत्कालीन राज्य इकाई के प्रमुख पायलट की जगह गहलोत को मुख्यमंत्री के रूप में पसंद करते हैं। राहुल के पास इस पद के लिए गहलोत को चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।</p>
<p>पायलट फिलहाल भ्रष्टाचार के खिलाफ पांच दिवसीय यात्रा पर हैं, यात्रा 15 मई को खत्म हुई। कांग्रेस ने पायलट की यात्रा से खुद को पूरी तरह से दूर कर लिया है। ये ठीक वैसा ही है जैसे पिछले महीने 'भाजपा भ्रष्टाचार' के खिलाफ पायलट के अनशन से कांग्रेस ने खुद को दूर कर लिया था।पायलट समय-समय पर ये मांग भी रख चुके हैं कि मुख्यमंत्री को बदला जाए और पार्टी गहलोत के नेतृत्व में राजस्थान चुनाव न लड़े। ऐसे में चुनाव के नजदीक आते ही ये सवाल उठने लगा है कि क्या मंत्रिमंडल में गहलोत खेमा पायलट के वफादारों को लाने की सहमती जताएगा।<br />पायलट का कहना है कि अगर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा पर हमला करने से कांग्रेस कर्नाटक चुनाव जीत सकती है, तो राजस्थान में राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकारों (2003-08 और 2013-18) के दौरान कथित भ्रष्टाचार को उठाने की उनकी रणनीति का भी फायदा मिलेगा। कर्नाटक के नतीजों पर उनके ट्वीट में कांग्रेस के किसी नेता का नाम नहीं लिया गया और भाजपा की हार के लिए केवल 'भ्रष्टाचार' को जिम्मेदार ठहराया गया है।</p>
<p>इसके विपरीत गहलोत ने कांग्रेस की जीत का श्रेय राहुल, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी के जोशीले प्रचार और भाजपा के एक नेता द्वारा दायर 'फर्जी' मामले के जरिए राहुल को संसद की सदस्यता से अयोग्य करार दिए जाने को दिया। बकौल गहलोत पार्टी द्वारा उठाए गए भ्रष्टाचार के मुद्दे के अलावा कांग्रेस ने कर्नाटक में रचनात्मक विकास के एजेंडे पर जीत हासिल की।  <br />जब पायलट भाजपा शासन के तहत कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हैं, तो भाजपा गहलोत सरकार के तहत कथित भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करती है और कांग्रेस इस पर चुप्पी साध लेती है। वहीं पायलट हर बार गहलोत सरकार की नाकामी और उनकी सामाजिक कल्याण योजनाओं के फेल होने का मुद्दा उछालते रहते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री के रूप में राजे के कार्यकाल से संबंधित भ्रष्टाचार के पुराने आरोपों को उठाने के बजाय पायलट भाजपा को 'विभाजनकारी और सांप्रदायिक' राजनीति करने वाली पार्टी के रूप में निशाना बनाते रहते हैं।</p>
<p>कुछ जानकारों का ये मानना है कि कर्नाटक के नतीजे के बाद राजस्थान चुनाव में गहलोत बनाम राजे के बीच आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल सकता है, जिसमें दोनों नेताओं को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में नहीं तो अपनी-अपनी पार्टियों के मुख्य प्रचारकों के रूप में पेश किया जा सकता है।  </p>
<p>हाल ही में भाजपा ने राजस्थान में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है।  इसके बावजूद अब भी इसे लेकर तस्वीर साफ नहीं हो पाई है कि भाजपा में अगले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री  का चेहरा कौन होगा। भाजपा के कई नेता अब भी अलग-अलग दावे करते नजर आते हैं। वसुंधरा राजे  गजेंद्र सिंह शेखावत, और प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया तक के नाम का जिक्र हो चुका है। 2022 में अमित शाह और जेपी नड्‌डा राजस्थान दौरे के दौरान ये सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अगला चुनाव नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा, हिमाचल के बाद कर्नाटक के नतीजे के बाद संभवत: ये प्लान फेल है। <br />राजस्थान में कांग्रेस में मुख्यमंत्री  का चेहरे को लेकर कुछ भी साफ नहीं है । पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री  सचिन पायलट को मुख्यमंत्री  बनाने की मांग ने जोर पकड़े हुई है। वहीं अशोक गहलोत सोनिया गांधी के समक्ष राजस्थान के मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के नाम की सिफारिश मुख्यमंत्री  के लिए कर चुके हैं। पायलट समर्थक विधायक वेदप्रकाश सोलंकी और इंद्राज गुर्जर ने पायलट को मुख्यमंत्री  बनाने की खुलकर पैरवी कर चुके हैं। इससे पहले बसेडर से कांग्रेस विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा ने ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री  बनाने की मांग करते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत को यह समझना चाहिए कि उन्हें पार्टी ने बहुत कुछ दिया है अब युवाओं को मौका दिया जाए।</p>
<p><strong>अशोक भाटिया,</strong><br /><strong>वरिष्ठ  लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 May 2023 13:05:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>कब गीता ने ये कहा, बोली कहाँ कुरान।  करो धर्म के नाम पर, धरती लहूलुहान।।</title>
                                    <description><![CDATA[(राजनीति में धर्म आधारित लामबंदी साम्प्रदायिकता को दे रही चिंगारी, सांप्रदायिक पूर्वाग्रहों को रोजमर्रा की जिंदगी में काउंटर करने की जरूरत।)]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129108/when-did-geeta-say-that-where-is-quran"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/कब-गीता-ने-ये-कहा,-बोली-कहाँ-कुरान।--करो-धर्म-के-नाम-पर,-धरती-लहूलुहान.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p> </p>
<p>साम्प्रदायिकता हमारे देश में लोकतंत्र के लिए प्रमुख चुनौतियों में से एक थी और अब भी है। सांप्रदायिकता विभिन्न रूप ले सकती है जैसे बहुसंख्यक प्रभुत्व, धार्मिक पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता, और धार्मिक रेखाओं के साथ राजनीतिक लामबंदी। साम्प्रदायिक सोच अक्सर अपने स्वयं के धार्मिक समुदाय के राजनीतिक प्रभुत्व की खोज की ओर ले जाती है। हमारे संविधान निर्माताओं को इस चुनौती के बारे में पता था और इसलिए उन्होंने धर्मनिरपेक्ष राज्य मॉडल को चुना। इसके अलावा सांप्रदायिक पूर्वाग्रहों और प्रचार को रोजमर्रा की जिंदगी में काउंटर करने की जरूरत है और राजनीति के क्षेत्र में धर्म आधारित लामबंदी का मुकाबला करने की जरूरत है।</p>
<p>-डॉ. सत्यवान सौरभ  </p>
<p>साम्प्रदायिकता इस धारणा पर आधारित है कि भारतीय समाज धार्मिक समुदायों में बंटा हुआ है, जिनके हित न केवल भिन्न हैं, बल्कि एक-दूसरे के विरोधी भी हैं। यह धर्म से जुड़ी एक आक्रामक राजनीतिक विचारधारा है। हालाँकि, सांप्रदायिकता राजनीति के बारे में है, धर्म के बारे में नहीं। हालांकि सांप्रदायिकतावादी धर्म के साथ गहनता से जुड़े हुए हैं, व्यक्तिगत आस्था और सांप्रदायिकता के बीच कोई जरूरी संबंध नहीं है। साम्प्रदायिकता की विशिष्ट विशेषताओं में से एक इसका दावा है कि धार्मिक पहचान बाकी सभी चीजों से ऊपर है। भारत में साम्प्रदायिकता के बने रहने के लिए उत्तरदायी कारक केवल एक नहीं है। ऐतिहासिक तौर पर देखे तो अंग्रेजों ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दरार पैदा करके राष्ट्रवादी आकांक्षाओं को कमजोर करने के लिए फूट डालो और राज करो की नीति का इस्तेमाल किया। इसके परिणामस्वरूप दो समूहों के बीच सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया और यह माना जाता है कि भारत में ब्रिटिश शासन के जारी रहने के दौरान ही हिंदू-मुस्लिम विभाजन हुआ। भारत का विभाजन इसी नीति का अंतिम परिणाम था।</p>
<p>आज़ादी के बाद बनी रही सामाजिक-आर्थिक असमानता की खाई गहरी होती गई और जीवन की सामाजिक-आर्थिक आवश्यकता के प्रयोजन के लिए बहुसंख्यक समुदाय और अल्पसंख्यक समुदाय के बीच आंतरिक तनाव और तनाव भी सांप्रदायिक घृणा को बढ़ावा देता है। बड़े पैमाने पर गरीबी और बेरोजगारी लोगों में निराशा की भावना पैदा करती है। दोनों समुदायों के बेरोजगार युवाओं को धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा आसानी से फंसाया जा सकता है और उनके द्वारा सांप्रदायिक दंगों के लिए उपयोग किया जाता है। कट्टरवाद और सांप्रदायिकता में कुछ वैचारिक तत्व समान हैं। दोनों राजनीति और राज्य से धर्म को अलग करने की अवधारणा पर हमला करते हैं। दोनों ही सभी धर्मों में समान सत्य की अवधारणा के विरोधी हैं। यह धार्मिक समरसता और सहिष्णुता की अवधारणा के विरुद्ध है। राजनीति का साम्प्रदायिकीकरण होने से  भारत में चुनावी राजनीति अधिक खर्चीली और प्रतिस्पर्धी हो गई है। राजनीतिक दल चुनावी जीत के लिए उचित या गलत किसी भी साधन का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकिचा रहे हैं। यहां तक कि वे साम्प्रदायिक तनाव भी पैदा करते हैं और इसका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। इसलिए, एक प्रक्रिया के रूप में राजनीति का साम्प्रदायिकीकरण, भारत में साम्प्रदायिकता के विकास को समर्थन दे रहा है।</p>
<p>सांप्रदायिक विचारधाराओं, विभिन्न समुदायों के व्यवहार और प्रतिक्रियाओं को फैलाने में मीडिया की भूमिका काफी शक्तिशाली रही। लगभग हर बड़े साम्प्रदायिक दंगे में मीडिया द्वारा समर्थित अफवाहें भूमिका निभाती हैं। उदाहरण के लिए: 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे इस बात का एक प्रमुख उदाहरण हैं कि सांप्रदायिक तनाव के दौरान सोशल मीडिया कैसे सक्रिय भूमिका निभा सकता है।साम्प्रदायिकता की समस्या को और भी बदतर बनाने में राज्येत्तर तत्वों समेत बाहरी तत्वों का हाथ है। उनका मकसद अस्थिरता का माहौल बनाना और अल्पसंख्यक समुदाय की सहानुभूति हासिल करना है। सांप्रदायिकता की समस्या को दूर करने के लिए आज देश को मूल्य आधारित शिक्षा की अहम जरूरत है।  शिक्षा के माध्यम से करुणा, धर्मनिरपेक्षता, शांति, अहिंसा और मानवतावाद जैसे मूल्यों को प्रदान करने और समाज में वैज्ञानिक सोच का निर्माण करने पर जोर दिया जाना चाहिए। आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार वक्त की मांग है; विशेष रूप से सांप्रदायिक हिंसा से उत्पन्न आपराधिक न्याय प्रणाली की अक्सर आलोचना की जाती रही है। पुलिस प्रक्रियाओं और प्रथाओं में सुधार के लिए उपाय किए जाने चाहिए और समय पर न्याय दिलाने के लिए विशेष जांच और अभियोजन एजेंसियों की स्थापना की जानी चाहिए।</p>
<p>वैचारिक पूर्वाग्रह को दूर करना ऐसे समय फायदेमंद रहता है और न्यूज चैनल लोगों के विचारों और मानसिकता को प्रभावित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं, इसलिए जब वे एक समुदाय या धर्म के प्रति पक्षपाती होते हैं, तो इससे उन न्यूज चैनलों को देखने वाले लोगों के दृष्टिकोण में पूर्वाग्रह विकसित हो सकते हैं। इसलिए मीडिया को दर्शकों के सामने संतुलित राय पेश करने पर ध्यान देना चाहिए। सामाजिक और सांस्कृतिक मिलन को सुगम बनाने के लिए त्योहारों, उत्सवों और सामाजिक समारोहों की व्यवस्था करके विभिन्न संस्कृतियों को समझने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। धर्म के आधार पर यहूदी बस्ती और भौगोलिक अलगाव को रोकना, अंतर-धार्मिक विवाहों को बढ़ावा देना आदि को लिया जाना चाहिए। सांप्रदायिक जागरूकता पैदा करने में नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठन सांप्रदायिक जागरूकता पैदा करने, मजबूत सामुदायिक संबंध बनाने और सांप्रदायिक सद्भाव के मूल्यों को विकसित करने के लिए सरकार के साथ गठजोड़ कर सकते हैं। अतीत की विरासत का प्रसारण कर के देशवासियों को इतिहास के उन गौरवमयी क्षणों की याद दिलाने का प्रयास किया जाना चाहिए जिनमें राष्ट्र के हितों की रक्षा के लिए हिन्दू, मुस्लिम और सिक्ख एक साथ थे। इसके अलावा, लोगों को इस बात से अवगत कराया जाना चाहिए कि भारत की विविधता ने देश के लिए एकता के स्रोत के रूप में कैसे काम किया है।</p>
<p>समान नागरिक संहिता को सिद्धांत को संविधान के अनुच्छेद 44 में निर्धारित किया गया है। यूसीसी के बिना, यह देखा गया है कि प्रत्येक समुदाय के अलग और परस्पर विरोधी हित हैं। इसे लागू करने से धार्मिक मतभेदों को कम करने में मदद मिल सकती है। साम्प्रदायिकता हमारे देश में लोकतंत्र के लिए प्रमुख चुनौतियों में से एक थी और अब भी है। सांप्रदायिकता विभिन्न रूप ले सकती है जैसे बहुसंख्यक प्रभुत्व, धार्मिक पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता, और धार्मिक रेखाओं के साथ राजनीतिक लामबंदी। साम्प्रदायिक सोच अक्सर अपने स्वयं के धार्मिक समुदाय के राजनीतिक प्रभुत्व की खोज की ओर ले जाती है।हमारे संविधान निर्माताओं को इस चुनौती के बारे में पता था और इसलिए उन्होंने धर्मनिरपेक्ष राज्य मॉडल को चुना। इसके अलावा सांप्रदायिक पूर्वाग्रहों और प्रचार को रोजमर्रा की जिंदगी में काउंटर करने की जरूरत है और राजनीति के क्षेत्र में धर्म आधारित लामबंदी का मुकाबला करने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
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                <pubDate>Sun, 07 May 2023 12:54:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विरोधी, गोदी और अब गोली मीडिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">दर्जनों लोगों को तड़पा-तड़पा कर मारने का आरोपी जिन टीवी कैमरों को अपना अभेद्य सुरक्षा कवच समझता था, जिन कैमरों के साये में उसके चहरे पर मृत्यु का खौफ तो दूर, रंच मात्र का शक भी नहीं था| उन्हीं कैमरों के बीच से हुई गोलियों की बौछार ने माफिया और उसके भाई का पल भर में काम तमाम कर दिया| यह सब अचानक हुआ या पूर्व नियोजित साजिश के तहत, इसकी चर्चा इस समय गाँव की गलियों से लेकर शहर के नुक्कड़ों तक हो रही है| किसी भी निष्कर्ष पर न पहुँच पाने के बाद लोग यह कहते हुए बातचीत</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129087/anti-dock-and-now-tablet-media"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/विरोधी,-गोदी-और-अब-गोली-मीडिया.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">दर्जनों लोगों को तड़पा-तड़पा कर मारने का आरोपी जिन टीवी कैमरों को अपना अभेद्य सुरक्षा कवच समझता था, जिन कैमरों के साये में उसके चहरे पर मृत्यु का खौफ तो दूर, रंच मात्र का शक भी नहीं था| उन्हीं कैमरों के बीच से हुई गोलियों की बौछार ने माफिया और उसके भाई का पल भर में काम तमाम कर दिया| यह सब अचानक हुआ या पूर्व नियोजित साजिश के तहत, इसकी चर्चा इस समय गाँव की गलियों से लेकर शहर के नुक्कड़ों तक हो रही है| किसी भी निष्कर्ष पर न पहुँच पाने के बाद लोग यह कहते हुए बातचीत का विषय बदल देते हैं कि सच जल्द ही सबके सामने आएगा| वहीँ कुछ लोग यह भी आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि पकड़े गये तीनों हमलावरों को किसी बहाने से मौत के घाट उतारकर कहीं सत्य को सदा सर्वदा के लिए दफ़न ही न कर दिया जाए| आगे क्या होगा यह तो भविष्य के गर्त में है| लेकिन इस घटना के बाद से लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ पत्रकारिता, अब सन्देह की दृष्टि से देखा जाने लगा है| समाज के कुछ बुद्धिजीवियों ने अभी तक पत्रकारिता को विरोधी और गोदी मीडिया के रूप में वर्गीकृत कर रखा था| लेकिन अब वह गोली मीडिया के रूप में लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ का तीसरा वर्ग भी निर्धारित कर सकते हैं|</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">टीवी चैनलों की आई बाढ़ और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन ने पत्रकारिता के मायने आज पूरी तरह बदल दिये हैं| टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में हल्ला बोल पत्रकारिता के शोरगुल के बीच मूल्यों की तिलांजलि न जाने कब दी जा चुकी है| लेकिन प्रयागराज की घटना ने पत्रकारिता का जो नवीन चेहरा प्रस्तुत किया है, उससे चिन्तित हुए बिना नहीं रहा जा सकता| वरिष्ठ पत्रकारों से अक्सर उनके जानने वाले प्रेस का परिचय-पत्र बनवाने के लिए निवेदन करते रहते हैं| ताकि वह अपने वाहन पर प्रेस लिखा सकें तथा सरकारी विभागों में पत्रकारिता का रौब जमाकर अपना व्यक्तिगत काम करवा सकें| रजिस्ट्रार ऑफ़ न्यूजपेपर्स फॉर इण्डिया से किसी तरह रजिस्ट्रेशन नम्बर हासिल करने वाले अनेक सम्पादक ऐसे हैं जिनके अख़बार का धरातल पर कहीं कोई बजूद नहीं है| ऐसे सम्पादक शौकिया लोगों से सदस्यता शुल्क के नाम पर अच्छी खासी रकम वसूल कर, अपने अख़बार का परिचय-पत्र प्रदान करके पत्रकारिता धर्म का निर्वहन कर रहे हैं| इसी सदस्यता शुल्क से ही सम्पादक जी के परिवार का खर्च चलता है| भले ही उनके अख़बार का पहचान-पत्र प्राप्त करने वाले उसका किसी भी हद तक दुर्पयोग क्यों न करते हों| यहाँ सदुपयोग के बारे में तो सोचना ही व्यर्थ है| अतीक और अशरफ के तीनों कातिलों के पास से जो डमी कैमरे बरामद हुए हैं| उनके बारे में अभी तक यह खुलासा नहीं हुआ है कि उनके माइक पर चिपका लोगो किस मीडिया संस्थान का है| लेकिन इससे इतना तो अनुमान लग ही जाता है कि कुछ टीवी चैनल भी फर्जी आईडी बनाने का कारोबार कर रहे हैं|</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">बीते लगभग पाँच वर्षों में इलेक्ट्रानिक तथा प्रिंट मीडिया के हुए जबरदस्त विस्तार के बाद पत्रकारों की संख्या बढ़ना स्वाभाविक है| जिसके कारण आज यदि कोई वरिष्ठ पत्रकार भी किसी बड़े अधिकारी के साथ अलग से समय लेकर किसी विषय पर चर्चा करना चाहे तो अधिकारीगण प्रायः समय देने से परहेज करते हैं| अब वह सिर्फ पत्रकारों की भीड़ को सम्बोधित करने के लिए ही समय देते हैं| अतीक-अशरफ की हत्या के बाद से सुरक्षा के नाम पर पत्रकारों से दूरी बनाना अब उनके लिए और भी अधिक आसान हो गया है| पत्रकारिता को दर्पण की भी संज्ञा दी गयी है, जिसका एकमात्र उद्देश्य सत्य को सार्वजनिक करना भर है| परन्तु यह तभी सम्भव है जबकि पत्रकारों को हर जगह आने-जाने की निर्बाध छूट हो| लेकिन 15 अप्रैल 2023 को रात साढ़े दस बजे प्रयागराज में हुए हत्याकाण्ड ने पत्रकारिता की इस स्वाभाविक स्वतन्त्रता को प्रतिबन्ध की बेड़ियों से जकड़ने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है| सरकार तथा उसके तन्त्र को इस हेतु अब पर्याप्त कारण मिल चुके हैं|</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अपराधियों को विश्वविख्यात बनाने का चलन भी इन दिनों भारतीय मीडिया में जबर्दस्त ढंग से व्याप्त है| जब भी कोई बड़ा अपराधी पकड़ा जाता है या फिर उसके मामले</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की सुनवाई शुरू होती है| तब लगभग सभी चैनल सिर्फ और सिर्फ उसी पर डिबेट करवाते हैं, वह भी निराधार एवं निष्कर्षहीन| किसी भी अपराधी को एक जेल से दूसरी जेल में सिफ्ट करते समय या अदालत ले जाते वक्त सभी चैनलों के रिपोर्टर रात-दिन एक करके उसका पीछा करते हैं| मार्ग में जब भी कहीं उन्हें अपराधी की गाड़ी के निकट पहुँचने का अवसर मिलता है तो एंकर ‘वह देखो, यह देखो....’ करके जोर-जोर चिल्लाने लगते हैं और कैमरामैन उस अपराधी को अपने कैमरे में कैद करने के लिए ऐसे जान लगा देता है जैसे वह कोई अपराधी न होकर ईश्वर तुल्य धर्मात्मा पुरुष हो, जिसके दर्शन करके चैनल के सारे दर्शक स्वयं को धन्य महसूस करेंगे| विश्व के शायद ही किसी देश में अपराधियों को इतना महिमामंडित किया जाता हो| हद तो तब हो गयी जब मेडिकल परिक्षण के लिए पुलिस जीप से उतारे गये अतीक और उसके भाई से पत्रकारों ने ‘सर’ का सम्बोधन करते हुए पूंछा कि ‘सर, कुछ कहना चाहेंगे आप|’ जिस देश का चौथा स्तम्भ अपराधियों की इतनी अधिक इज्जत करता हो, वहां के नवयुवक यदि यह कहते हैं कि वह बड़ा डॉन बनना चाहते हैं तो इसमें आश्चर्य जैसी कोई बात नहीं होनी चाहिए| सम्भवता संविधान विशेषज्ञ ही यह बात समझ सकते हैं कि जब किसी अपराधी पर न्यायालय में मुकदमा चल रहा हो और वह न्यायिक हिरासत में हो तब मीडिया को उससे बातचीत करने का कोई औचित्य नहीं बनता है| लेकिन यहाँ तो अपराधियों से बाकायदा उनका इस्टेटमेंट लेने का प्रयास किया जाता है| इसका उद्देश्य भला क्या हो सकता है? अपराधी को बचाना, फंसाना या फिर उसका चेहरा दिखाकर चैनल की टीआरपी बढ़ाना| सत्य का उदघटन इसे कहा नहीं जा सकता| क्योंकि किसी भी अपराधी के दोषी या निर्दोष होने का सत्य उसके साथ नहीं बल्कि उसकी पृष्ठभूमि में छुपा होता है| जहाँ कोई जाना नहीं चाहता है|</span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 May 2023 16:13:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिर क्यों जल रहा है मणिपुर ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal">  <br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कर्नाटक में बजरंगबली को दांव पर लगाकर आपको शायद पता नहीं होगा की देश का सीमांत प्रदेश मणिपुर बुरी तरह से जल रहा है .मणिपुर में भाजपा और नेशनल पीपुल्स पार्टी</span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोक जनशक्ति पार्टी और ंगा पीपुल्स फ्रंट की मिलीजुली सरकार है .डबल इंजिन की इस सरकार के इस समय हाथ-पांव फूले हुए हैं .दोनों सरकारें मिलकर भी मणिपुर की आग बुझाने में नाकाम साबित हो रहीं हैं .यहां बजरंगबली की जय बोलने वाला कोई नहीं है .</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मै भी आपकी तरह मणिपुर से बहुत दूर बैठा हूँ लेकिन मेरे पास तमाम सूत्र हैं जो मणिपुर के खौफनाक हालात</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129082/why-is-manipur-burning"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/आखिर-क्यों-जल-रहा-है-मणिपुर.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"> <br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कर्नाटक में बजरंगबली को दांव पर लगाकर आपको शायद पता नहीं होगा की देश का सीमांत प्रदेश मणिपुर बुरी तरह से जल रहा है .मणिपुर में भाजपा और नेशनल पीपुल्स पार्टी</span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोक जनशक्ति पार्टी और ंगा पीपुल्स फ्रंट की मिलीजुली सरकार है .डबल इंजिन की इस सरकार के इस समय हाथ-पांव फूले हुए हैं .दोनों सरकारें मिलकर भी मणिपुर की आग बुझाने में नाकाम साबित हो रहीं हैं .यहां बजरंगबली की जय बोलने वाला कोई नहीं है .</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मै भी आपकी तरह मणिपुर से बहुत दूर बैठा हूँ लेकिन मेरे पास तमाम सूत्र हैं जो मणिपुर के खौफनाक हालात को लगातार देश के लिए रिपोर्ट कर रहे हैं. इन्हीं रिपोर्ट्स के मुताबिक़ राज्य में मैतेई समाज को अनसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने की मांग के बाद हुई इस हिंसा शुरू हुई और अब इसे रोकने के लिए फ़ौज की मदद ली जा रही है. मणिपुर में दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं .खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमितशाह को इस मामले में सीधा हस्तक्षेप करना पड़ा है क्योंकि राज्य में डबल इंजिन की सरकार हालात से निबटने में नाकाम रही . केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने  मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से बात कर  राज्य की स्थिति का जायजा लिया. इसके अलावा केंद्रीय गृह सचिव</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आईबी के निदेशक और संबंधित अधिकारियों के साथ दो वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग बैठकें कीं. उन्होंने मणिपुर के पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बात की.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /> ‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आभूषणों की भूमि</span>’  <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माने और कहे जाने वाला  मणिपुर स्वतंत्रता के पहले भारत की एक  रियासत था । आजादी के बाद यह भारत का एक केंद्रशासित राज्य बना। यहाँ नागा तथा कूकी जाति की लगभग </span>60 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जनजातियाँ निवास करती हैं। यहाँ के लोग संगीत तथा कला में बड़े प्रवीण होते हैं। यहाँ कई बोलियाँ बोली जाती हैं। पहाड़ी ढालों पर चाय तथा घाटियों में धान की खेती होती है। मणिपुर से होकर एक सड़क बर्मा को जाती है।लेकिन अब यही मणिपुर आग उगल रहा है .कारण साफ़ है की राज्य सरकार स्थानीय जनता की आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतरी .</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पांच साल पहले यहां भाजपा ने क्षेत्रीय राजनितिक दलों के साथ मिलकर अपनी पैठ बनाई और आज मणिपुर का मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास है </span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन वे यहां कमल खिलाने के बजाय आग से खेल रहे हैं.ये खेल भाजपा को अब भारीपाद रहा है. राज्य की सत्ता और जनता को बचने के लिए सरकार को मणिपुर में फ़ौज की तैनाती करना पड़ रही है .लेकिन भाजपा के असल बजरंगब</span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ली केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह इस नाकामी को मानने के लिए राजी नहीं हैं .हो भी नहीं सकते .</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोई तीन लाख की आबादी वाले मणिपुर को जलने से बचाने के लिए सुरक्षा बलों को  भेजा गया है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना और असम राइफल्स के </span>55 ‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कॉलम</span>’ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">को तैनात किया गया है. हालात के दोबारा बिगड़ने की सूरत में कार्रवाई के लिए सेना के </span>14 ‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कॉलम</span>’ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">को तैनाती के लिए तैयार रखा गया है. वहीं सेना और असम राइफल्स ने गुरुवार को चुराचांदपुर और इंफाल घाटी के कई इलाकों में फ्लैग मार्च किया और काक्चिंग जिले के सुगनु में भी फ्लैग मार्च किया गया. मणिपुर में स्थिति की निगरानी कर रहे केंद्र ने </span>‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रैपिड एक्शन फोर्स</span>’ (<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आरएएफ) की कई टीम को भी भेजा है.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मणिपुर में हिंसा के कारण हजारों  लोग विस्थापित हो गए हैं.  राज्य की आबादी में </span>53 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रतिशत हिस्से वाले गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे की मांग के खिलाफ चुराचांदपुर जिले के तोरबंग इलाके में </span>‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर</span>’ (<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एटीएसयूएम) के बुलाए गए </span>‘<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आदिवासी एकजुटता मार्च</span>’ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के दौरान हिंसा भड़क गई थी. नगा और कुकी आदिवासियों के इस मार्च में भड़की हिंसा ने रात में और गंभीर रूप ले लिया.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br />  <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थिति को देखते हुए गैर-आदिवासी बहुल इंफाल पश्चिम</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">काकचिंग</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थौबल</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिरिबाम और बिष्णुपुर जिलों और आदिवासी बहुल चुराचांदपुर</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांगपोकपी और तेंगनौपाल जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है. कर्फ्यू लगाने संबंधी अलग-अलग आदेश आठ जिलों के प्रशासन ने जारी किए गए हैं. गृह विभाग के एक आदेश में कहा गया कि शांति और सार्वजनिक व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए तत्काल प्रभाव से पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है. पूरे राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दरअसल  मैतेई समुदाय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को  जनजातीय वर्ग में शामिल करने की गुहार लगाई थी. इसी याचिका पर बीती </span>19 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अप्रैल को हाईकोर्ट ने अपना फैसले सुनाया. इसमें कहा गया कि सरकार को मैतेई समुदाय को जनजातीय वर्ग में शामिल करने पर विचार करना चाहिए. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इसके लिए चार हफ्ते का समय दिया. अब इसी फैसले के विरोध में मणिपुर में हिंसा हो रही है. हाईकोर्ट के फैसले का राज्य का जनजातीय वर्ग विरोध कर रहा है. जनजातीय संगठनों का कहना है</span>, '<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मैतेई समुदाय को अगर जनजातीय वर्ग में शामिल कर लिया जाता है तो वह उनकी जमीन और संसाधनों पर कब्जा कर लेंगे.</span>' <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विरोध में एक और तर्क दिया जाता है कि जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दोनों में मैतेई का दबदबा है.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली मैरीकॉम के राज्य मणिपुर की हिंसा को लेकर अभी सियासत बयानों तक सीमित है. कांग्रेस के राजीव गांधी और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र से राज्य में सामान्य स्थिति भाल करने का आग्रह किया .सवाल ये है की राज्य में जब बजरंगबली सरकार में बैठे हैं तब यहां हिलना कैसे हुई </span>? <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सवाल ये भी है की क्या राज्य सरकार का सूचना तंत्र इतना  कमजोर है कि उसे इस असंतोष की भनक तक नहीं लगी </span>? <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार नींद से तब जाएगी </span>,<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जब की हालात बेकाबू हो गए .</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मणिपुर को जलने से बचना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि इसे देश की</span> '<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऑर्किड बास्केट</span>' <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भी कहा जाता है। यहाँ ऑर्किड पुष्प की </span>500 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रजातियां पाई जाती हैं। समुद्र तल से लगभग </span>5 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हजार  फीट की ऊँचाई पर स्थित शिरोइ पहाड़ियों में एक विशेष प्रकार का पुष्प शिरोइ लिली पाया जाता है। शिरोइ लिली का यह फूल पूरे विश्व में केवल मणिपुर में ही पैदा होता है। इस अनोखे और दुर्लभ पुष्प की खोज फ्रैंक किंग्डम वॉर्ड नामक एक अंग्रेज ने </span>1946 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में की थी। यह खास लिली केवल मानसून के महीने में पैदा होता है। इसकी विशेषता यह है कि इसे सूक्ष्मदर्शी से देखने पर इसमे सात रंग दिखाई देते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुल </span>16  <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिलों वाले मणिपुर का इतिहास  ईसवी युग के प्रारम्भ होता है . यहां के राजवंशों का लिखित इतिहास सन </span>33 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ई. में पाखंगबा के राज्याभिषेक के साथ शुरू होता है. उसने इस भूमि पर प्रथम शासक के रूप में </span>120 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वर्षों (</span>33-154 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ई ) तक शासन किया. उसके बाद अनेक राजाओं ने मणिपुर पर शासन किया. आगे जाकर मणिपुर के महाराज कियाम्बा ने </span>1467, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">खागेम्बा ने </span>1597, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चराइरोंबा ने </span>1698, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गरीबनिवाज ने </span>1714, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भाग्यचन्द्र (जयसिंह) ने </span>1763, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गम्भीर सिंह ने </span>1825 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">को शासन किया .इन जैसे महावीर महाराजाओं ने शासन कर मणिपुर की सीमाओं की रक्षा की.</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मणिपुर की स्वतंत्रता और संप्रभुता </span>19<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वीं सदी के आरम्भ तक बनी रही. उसके बाद सात वर्ष (</span>1819 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से </span>1825 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तक) बर्मी लोगों ने यहां पर कब्जा करके शासन किया. </span>24 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अप्रैल</span>, 1891 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के खोंगजोम युद्ध (अंग्रेज-मणिपुरी युद्ध ) हुआ जिसमें मणिपुर के वीर सेनानी पाउना ब्रजबासी ने अंग्रेजों के हाथों से अपने मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की। इस प्रकार </span>1891 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में मणिपुर ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया और </span>1947 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में शेष देश के साथ स्वतंत्र हुआ। ऐसे मणिपुर को सेना कि हवाले करने कि बजाय बजरंगबली कि हवाले किया जाये तो शायद वहां शांति हो जाए !</span></p>
<p class="MsoNormal"><br /><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राकेश अचल</span>   </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>विचारधारा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 May 2023 13:21:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धरना के पीछे न्याय या राजनीतिक साजिश?</title>
                                    <description><![CDATA[मामला देश की महिला कुश्ती पहलवानों को लेकर है जहां पर महिला कुश्ती पहलवानों का आरोप है कि रेशलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने महिला खिलाडियों का यौन शोषण किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129056/justice-or-political-conspiracy-behind-the-strike"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/full.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"> </p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9.5pt;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देश की वह बेटियां जो अपने दमखम से भारत ही नही बल्कि विश्व के कई देशों में तिरंगा की शान को बढाया और देश के लिए पदक भी जीतकर देश को गौरवान्वित किया है। विश्व के पहलवानों को धूल चटाने वाली देश की बेटियां को अपने ही देश में न्याय पाने के लिए धरना देना कितना उचित है</span><span style="font-size:9.5pt;">? </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार जहां बेटियों बेटी बचाओ बेटी पढाओ का नारा बुलंद कर रही है साथ ही बेटियों और महिलाओं के लिए तमाम योजनाएं भी संचालित है लेकिन फिर भी देश में देश की शान बेटियों को अपने हक की लडाई और न्याय के लिए धरना करना पड़े यह देश के लिए उचित संदेश नही है।</span><span style="font-size:9.5pt;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9.5pt;"> </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मामला देश की महिला कुश्ती पहलवानों को लेकर है जहां पर महिला कुश्ती पहलवानों का आरोप है कि रेशलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने महिला खिलाडियों का यौन शोषण किया है। जिसको लेकर महिला पहलवानों ने इसी वर्ष जनवरी में धरना प्रदर्शन किया था लेकिन सरकार के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच को लेकर शांत हुआ लेकिन तीन माह तक कोई संतोष जनक कार्यवाही न होने पर फिर से महिला पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन प्रारम्भ किया करीब एक हफ्ते के बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष ब्रज भूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया और एफआईआर दर्ज हुई। भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष ब्रज भूषण शरण सिंह के खिलाफ महिलाओं का यौन उत्पीड़न और पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। जिसमें एक नाबालिक सहित सात महिलाओं ने शिकायत की है। महिला कुश्ती पहलवानों के समर्थन में भाजपा की विरोधी दलों के नेता भी खूब राजनीति कर रहे है। क्योकि भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष ब्रज भूषण शरण सिंह भाजपा के गोंडा से सांसद है। और भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी है। हालांकि माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है और अब आगे की कार्यवाही पुलिस अपने स्तर से ही करेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9.5pt;"> </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">महिला पहलवानों के साथ विपक्ष की नेताओं और विरोधी दलों के लोगों का समर्थन कही न कही इस मामले को राजनीतिक रंग दे रहा है। ऐसे ही साहिनबाग धरना के समय भी सरकार के विरोधी दलों के लोग धरना देने वालों के साथ मिलकर विरोध और प्रदर्शन कर रहे थे। यदि खिलाड़ी अपने मांगों को लेकर धरना कर रहे है तो उसमें गैर राजनीतिक लोग शामिल हो तो बात कुछ समझ में आती है लेकिन राजनीति के लोग शामिल हो तो कुछ दाल में काला लगता है। क्योकि बृज भूषण शरण सिंह भाजपा के सांसद है इसकी कांग्रेस समेत सभी विरोधी दलों के लोग खिलाडियों को विरोध करने के लिए समर्थन दे रहे है जिससे विरोध और मजबूती से हो सके। लेकिन यहां एक सवाल उठता है कि आखिर पीड़ित पहलवानों ने उसी समय विरोध क्यों नही किया जब बृज भूषण शरण सिंह ने उनके साथ यौन उत्पीड़न किया। खिलाड़ियों को अपने कैरियर को लेकर कोई डर था कि विरोध करने पर उनका कैरियर खराब हो सकता है। यदि उस समय विरोध नही किये तो इस वर्ष के प्रारंभ से ही विरोध क्यों</span><span style="font-size:9.5pt;">? </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुछ लोग तो यह भी कहते है कि जो भी पहलवान बृज भूषण शरण सिंह पर आरोप लगा रहे है सभी लोग हरियाणा के महादेव रेशलिंग अकादमी से जुड़े है और यह अकादमी का पूरा कंट्रोल दीपेन्द्र हुड्डा के हाथों में है। हो सकता है कि कुश्ती संघ के अध्यक्ष का चुनाव को ध्यान में रखकर केवल बृज भूषण शरण सिंह को बदनाम किया जा रहा हो। हालांकि मामले की जांच पुलिस खुद करेगी जो भी सच्चाई होगी वह सब के सामने आयेगी। वैसे पहलवानों के धरना में राजनीति नेताओं की इंट्री कई सवाल पैदा करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रेशलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह भाजपा के गोंडा से सांसद है। </span><span style="font-size:9.5pt;">1988 </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से सक्रिय राजनीति में है और बृज भूषण सिंह अपने दबंग अंदाज के लिए जाने जाते है। </span><span style="font-size:9.5pt;">1991 </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोकसभा जीतकर सांसद बने और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के गोंडा के कैसरगंज से भाजपा सांसद है। उनका बेटा भी गोंडा सदर सीट से विधायक है। बृज भूषण सिंह भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा निकाली गई रथयात्रा के दौरान काफी सक्रिय रहे और पूर्वांचल समेत यूपी के तमाम क्षेत्र में रथयात्रा की सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने की जिम्मेदारी भी रही। वर्ष </span><span style="font-size:9.5pt;">1987 </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में बृज भूषण शरण सिंह एक बार खुद पुलिस अधीक्षक को पिस्टल सटा दी थी। </span><span style="font-size:9.5pt;">2021 </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में मंच पर एक युवा को थप्पड जड़ दिया था। बृज भूषण सिंह टाडा के आरोप में तिहाड़ जेल भी जा चुके है। अपने कार्यों की वजह से बृज भूषण सिंह </span><span style="font-size:9.5pt;">6 </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बार सांसद भी चुने गये। बृज भूषण शरण सिंह का कहना है कि किसी के आरोप लगाने से मै अपराधी नही हो सकता माननीय न्यायालय जब अपराधी कह देगा तो अपराधी कहा जा सकता है। हालांकि बृज भूषण शरण सिंह को माननीय न्यायालय पर पूरा विश्वास है। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी टी ऊषा ने महिला पहलवानों के द्वारा किये जा रहे धरना प्रदर्शन को अनुशासनहीन कार्य बताया गया। वैसे कुछ भी हो इस मामले को लेकर देश में राजनीतिक गर्माहट देखने को मिल रही है। जहां पर बृज भूषण सिंह के समर्थक इसे राजनीतिक साजिश सिद्ध करने पर तुले है वही महिला पहलवान और कुछ राजनीतिक दलों के लोग इस पर सख्त से सख्त कार्यवाही की इच्छा रखे है। यदि यह मामला सच में महिला खिलाडियों के उत्पीड़न का है तो इसमें रेशलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के ऊपर कार्यवाही होना जरूरी है क्योकि जो बेटियां देश को अपने मेहनत और लगन से</span><span style="font-size:9.5pt;">  </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तिरंगा की शान बढाकर खुश करती है वह बेटियां रोये यह सही नही है लेकिन यदि इन बेटियों के कंधे पर कोई राजनीति या साजिश की बंदूक रखकर निशाना लगा रहा है तो उस साजिश करने वालों के खिलाफ भी कार्यवाही जरूरी है क्योकि ऐसे ही साजिशकर्ता लोग देश की एकता और अखंडता के लिए घातक होते है। देश की एकता और अखंडता बनाये रखना देश के हर एक नागरिक की जिम्मेदारी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संतोष कुमार तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भदोही</span><span style="font-size:9.5pt;">, </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश</span><span style="font-size:9.5pt;"> </span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>विचारधारा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 May 2023 20:43:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रील और रियल लाइफ के विवादों में चर्चित फिल्म 'द केरल स्टोरी'</title>
                                    <description><![CDATA[ फिल्म 'द केरल स्टोरी' के भारत के दक्षिणी राज्य केरल की 32 हजार महिलाओं की कहानी है। फिल्म में दावा किया गया है कि इन महिलाओं को जबरन इस्लाम धर्म में शामिल किया गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129055/the-kerala-story-a-controversial-film-between-reel-and-real"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/the.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"> </p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9.5pt;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देश भर में फिल्म</span><span style="font-size:9.5pt;"> '</span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">द केरल स्टोरी</span><span style="font-size:9.5pt;">' </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">को लेकर काफी चर्चा है। जहां एक तरफ कुछ लोग फिल्म का विरोध कर रहा है तो दूसरी ओर राजनीति में भी फिल्म को लेकर हंगामा मचा हुआ है। कुछ लोग तो फिल्म को बायकॉट करने की मांग भी कर रहे है। इतना ही नही फिल्म द केरल स्टोरी को</span><span style="font-size:9.5pt;">  </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रिलीज होने को लेकर लोगों ने</span><span style="font-size:9.5pt;">  </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चुनौती भी दी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में किसी भी तरह से दखलंदाजी करने से मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सेंशर बोर्ड</span><span style="font-size:9.5pt;">  </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">का मामला है। फिल्म</span><span style="font-size:9.5pt;"> '</span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">द केरल स्टोरी</span><span style="font-size:9.5pt;">' </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में केरल की </span><span style="font-size:9.5pt;">32 </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हजार महिलाओं के जबरन धर्मांतरण कराने और आईएसआईएस में शामिल कराने की कहानी दिखाई गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> जो एक लड़की को किस तरह उसका माइंडवाश करके धीरे धीरे उसे उसके धर्म से पीछे हटाते हुए इस्लाम धर्म और फिर आतंकवादी बनाने तक की कहानी है। इस फिल्म में प्रदर्शित की गई इस कहानी को फर्जी बताते हुए समाज का एक तबका इसका विरोध कर रहा है और आरोप है कि इस फिल्म से साम्प्रदायिक भावना आहत होती है। फिल्म</span><span style="font-size:9.5pt;"> '</span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">द केरल स्टोरी</span><span style="font-size:9.5pt;">' </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">को सुदीप्तो सेन ने निर्देशित किया है जिसमें अदा शर्मा</span><span style="font-size:9.5pt;">, </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">योगिता बिहानी</span><span style="font-size:9.5pt;">, </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोनिया बलानी और सिद्धि इडनानी जैसे कलाकार अहम किरदार में है। इससे पहले इसका ट्रेजर और ट्रेलर रिलीज किया गया जिसके बाद से फिल्म का विरोध शुरू हो गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9.5pt;"> </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिल्म</span><span style="font-size:9.5pt;"> '</span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">द केरल स्टोरी</span><span style="font-size:9.5pt;">' </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के भारत के दक्षिणी राज्य केरल की </span><span style="font-size:9.5pt;">32 </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हजार महिलाओं की कहानी है। फिल्म में दावा किया गया है कि इन महिलाओं को जबरन इस्लाम धर्म में शामिल किया गया और उन्हें सीरिया भेजा गया। फिल्म अपने ट्रेलर के रिलीज के बाद से ही विवादों में आ गया और लोगों ने इसकी रिलीज रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करनी शुरू कर दी। याचिका में</span><span style="font-size:9.5pt;"> '</span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सबसे खराब तरह के अभद्र भाषा</span><span style="font-size:9.5pt;">' </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और</span><span style="font-size:9.5pt;"> '</span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऑडियो-विजुअल प्रचार</span><span style="font-size:9.5pt;">' </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के आधार पर इसकी रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई। </span><span style="font-size:9.5pt;">2 </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मई को सुप्रीम कोर्ट ने</span><span style="font-size:9.5pt;"> '</span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">द केरल स्टोरी</span><span style="font-size:9.5pt;">' </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के खिलाफ दायर की याचिकाओं पर सुनवाई से साफ इंकार कर दिया। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिली है इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर फिल्म को चुनौती देनी है तो आपको सभी सबूतों के साथ सही तरीके से चुनौती देनी होगी। फिल्म को लेकर कुछ नेता ने फिल्म की कहानी को संघ परिवार की झूठ की फैक्ट्री का उत्पाद तथा</span><span style="font-size:9.5pt;"> '</span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">झूठ का पुलिंदा</span><span style="font-size:9.5pt;">' </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया। इतना ही नही कुछ लोग तो इस कहानी को लेकर सबूत देने वालों को ईनाम की भी घोषणा की गई है। हालांकि फिल्म के निर्देशक सुदिप्तो सेन और निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने फिल्म की कहानी के सच्ची घटनाओं पर आधारित होने का दावा किया है। विरोध किए जाने के बावजूद वे अपनी बात पर कायम हैं। हालांकि सेशर बोर्ड ने इस फिल्म में कुछ सीन को काट दिया है जिसमें विवाद की संभावना थी। लेकिन द केरल फिल्म अब नेताओं और विभिन्न संगठनों के लिए एक बड़ा मुद्दा बना है।</span><span style="font-size:9.5pt;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9.5pt;"> </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यदि केरल में आईएसआईएस की बात की जाये तो इसे नकारा नही जा सकता है क्योकि</span><span style="font-size:9.5pt;">  </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच एजेंसी एनआईए ने भी अपने जांच में इसकी पुष्टि की है और कई लोग आईएसआईएस से सम्पर्क में पाये गये। और कई लोग शामिल भी हुए। हालांकि आंकडों की बात की जाये तो इसमें अंतर हो सकता है और फिल्म में आंकडा अलग हो वह दूसरी बात है। लेकिन जिस तरह द केरला स्टोरी की कहानी है। उसे लेकर लोग राजनीति करने से पीछे नही हो रहे है। भाजपा के समर्थक फिल्म की कहानी को सही ठहराने पर लगे है वही कांग्रेस समेत अन्य लोग इस फिल्म को गलत बता रहे है। लेकिन द केरल स्टोरी का जब से ट्रेलर जारी हुआ था तभी से लोग सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष में बाते कर रहे है। और फिल्म के रिलीज हो जाने के बाद भी चर्चा का बाजार गर्म है। जी लोग फिल्म देखकर आ रहे है वो लोग फिल्म के निर्माता और कलाकारों के हिम्मत और कार्य की सराहना कर रहे है। जबकि कुछ लोग इस फिल्म को माहौल को बिगाड़ने वाली फिल्म बता कर विरोध में भी है।</span><span style="font-size:9.5pt;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9.5pt;"> </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वैसे देश में फिल्मों को लेकर आये दिन चर्चा रहती है। लोग फिल्मों की कहानी को रियल समझ करके उलझ जाते है जबकि कुछ फिल्मों को छोड़कर बाकी फिल्में केवल काल्पनिक होती है लेकिन कही न कही फिल्म में उद्देश्य छिपा रहता है जो फिल्म की कहानी से कुछ हद तक मेल करता है और संदेश भी देता है। जिस तरह द केरल स्टोरी में एक मां जब अपनी बेटी से मिलती है तो वह एक आतंकवादी बन चुकी होती है और अब उसकी बेटी नही रहती। कुछ ऐसी ही घटना वर्ष </span><span style="font-size:9.5pt;">2017 </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में चर्चा में आई थी जहां पर एक मां ने भी गुहार लगाई थी कि उसकी बेटी को सरकार बचा ले क्योकि वह परिवार को छोड़कर कही अन्यत्र चली गई थी जो कार्य सही नही था।</span><span style="font-size:9.5pt;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9.5pt;"> </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देश में फिल्में समाज को आइना दिखाने का काम करती है। लोगों को इस पर राजनीति नही करनी चाहिए। बहुत ऐसी फिल्में आई है जिसमें समाज की बुराईयों और हकीकत को दिखाने का प्रयास किया गया है। ठीक वैसे ही सभी फिल्मों का एक संदेश देना होता है। जो फिल्में समाज में दिखाने का प्रयास करना चाहिए। वैसे किसी भी फिल्म को रिलीज होने देने या न होने देने के लिए देश में सेंशर बोर्ड है जो किसी भी फिल्म के हर बिन्दुओं की अपने स्तर से जांच करके जरूरत पडती है तो कुछ सीन को काट भी देती है। तभी रिलीज होने की अनुमति देती है। तो ऐसे मामलों पर तो आम आदमी या नेताओं को कुछ कहना ही नही चाहिए कि फिल्म में क्या दिखाया जा रहा है क्या नही दिखाया जा रहा है। सौ की एक बात यदि आपको अच्छी लगे तो फिल्म देखिए न अच्छी लगे तो छोड़ दीजिए। बेवजह उस विषय को लेकर क्यों अपना समय खराब करें। लेकिन कुछ लोग है जो केवल इस तरह के मौके के तलाश में रहते है कि इस मुद्दे को हवा देकर राजनीति करें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9.5pt;">  </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">किसी भी फिल्म को लेकर उसकी निगरानी सेंशर बोर्ड करता है क्या उचित है क्या अनुचित है इसका फैसला बोर्ड के जिम्मेदार लोग बखूबी जानते है। आम आदमी को केवल यह निश्चित करना है कि यह फिल्म देखनी है कि नही। यदि देखनी है तो देखें यदि न देखनी है तो न देखे। लेकिन किसी मुद्दे को लेकर देश की एकता और अखंडता को बनाये रखने में हम सभी को सहयोगी होना चाहिए। क्योकि भारत देश की पहचान पूरे विश्व में अनेकता में एकता को लेकर है। इसलिए हम सभी देशवासियों को किसी भी स्तर पर देश की एकता और अखंडता बनाये रखना जरूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9.5pt;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संतोष कुमार तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भदोही</span><span style="font-size:9.5pt;">, </span><span lang="hi" style="font-size:9.5pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश</span><span style="font-size:9.5pt;"> </span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 May 2023 20:38:37 +0530</pubDate>
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