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                <title>farmers income - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>farmers income RSS Feed</description>
                
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                <title>प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव तथा जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती ने किसानों को नई राह तलाशने के लिए प्रेरित किया है। यही कारण है कि आज बड़ी संख्या में किसान प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव केवल एक परंपरागत सोच की वापसी नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक शोध और व्यावहारिक अनुभवों से मजबूत हुआ एक नया कृषि आंदोलन बनता जा रहा है। गुजरात के जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय (जेएयू) के हालिया शोध ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183198/steps-towards-natural-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव तथा जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती ने किसानों को नई राह तलाशने के लिए प्रेरित किया है। यही कारण है कि आज बड़ी संख्या में किसान प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव केवल एक परंपरागत सोच की वापसी नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक शोध और व्यावहारिक अनुभवों से मजबूत हुआ एक नया कृषि आंदोलन बनता जा रहा है। गुजरात के जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय (जेएयू) के हालिया शोध ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है, बल्कि जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, पर्यावरण संतुलन और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में भी प्रभावी भूमिका निभाती है। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय ने सौराष्ट्र क्षेत्र के विभिन्न जिलों में मिट्टी के नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर प्राकृतिक खेती के प्रभावों का अध्ययन किया।  इस शोध में सामने आया कि जिन खेतों में लगातार पांच वर्षों तक प्राकृतिक खेती अपनाई गई, वहां मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.45 प्रतिशत से बढ़कर 0.93 प्रतिशत तक पहुंच गई। किसी भी कृषि भूमि के लिए ऑर्गेनिक कार्बन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यही मिट्टी की उर्वरता, सूक्ष्मजीवों की सक्रियता और पौधों के पोषण का आधार होता है। ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ने का अर्थ है कि मिट्टी अधिक जीवंत, उपजाऊ और दीर्घकाल तक उत्पादन देने में सक्षम हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शोध में यह भी पाया गया कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले खेतों में वर्षा और सिंचाई का पानी पहले की तुलना में कहीं अधिक मात्रा में मिट्टी के भीतर समा रहा है। पानी के समाने की दर 6.50 सेंटीमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 14.50 सेंटीमीटर प्रति घंटा हो गई। इससे वर्षा जल का बेहतर संरक्षण संभव हुआ और भूजल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिला। इसी प्रकार मिट्टी की नमी संग्रहण क्षमता 12.75 प्रतिशत से बढ़कर 19.84 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसका सीधा लाभ किसानों को सूखे की स्थिति में मिलता है क्योंकि मिट्टी लंबे समय तक नमी बनाए रखती है और फसलों को बार-बार सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;">मिट्टी की संरचना में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। प्राकृतिक खेती वाले खेतों में मिट्टी की छिद्रता 34.63 प्रतिशत से बढ़कर 41.08 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त हवा और पानी मिलना संभव हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं मिट्टी का घनत्व भी कम हुआ, जिससे भूमि अधिक भुरभुरी और खेती के लिए अनुकूल बनी। ऐसी मिट्टी में जड़ों का विकास बेहतर होता है और पौधे अधिक स्वस्थ रहते हैं। सौराष्ट्र के विभिन्न जिलों में किए गए अध्ययन से यह भी सामने आया कि ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा हर जिले में अलग-अलग है। पोरबंदर की मिट्टी में सबसे अधिक 0.82 प्रतिशत ऑर्गेनिक कार्बन दर्ज किया गया, जबकि गिर सोमनाथ में 0.75 प्रतिशत और जूनागढ़ में 0.72 प्रतिशत पाया गया। दूसरी ओर सुरेंद्रनगर, भावनगर और जामनगर में यह मात्रा अपेक्षाकृत कम रही। पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र का औसत ऑर्गेनिक कार्बन 0.57 प्रतिशत दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती का विस्तार होगा, वहां यह स्तर आने वाले वर्षों में और बेहतर हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती का सबसे बड़ा लाभ केवल खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का सीमित उपयोग, फसल अवशेषों का पुनर्चक्रण, जीवामृत और अन्य प्राकृतिक घोलों का प्रयोग तथा न्यूनतम जुताई जैसी तकनीकों से मिट्टी में कार्बन संग्रहण की क्षमता बढ़ती है। शोध के अनुसार प्राकृतिक खेती के माध्यम से प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष चार से आठ टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का जलवायु लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है और खेती जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहयोगी बनती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही कारण है कि आज प्राकृतिक खेती को केवल वैकल्पिक कृषि पद्धति नहीं बल्कि "क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर" के रूप में देखा जा रहा है। बदलते मौसम, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जल संकट जैसी परिस्थितियों में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए अधिक सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही है। कम लागत, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता इसे भविष्य की कृषि व्यवस्था का मजबूत आधार बना रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देशभर में प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में हजारों किसान इस पद्धति को अपना चुके हैं। केंद्र और राज्य सरकारें भी प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही हैं। किसानों के सफल अनुभव दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जो किसान पहले रासायनिक खेती छोड़ने को लेकर आशंकित थे, वे अब प्राकृतिक खेती के सकारात्मक परिणाम देखकर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती का आर्थिक पक्ष भी किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और महंगे कृषि रसायनों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत घटती है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध गोबर, गोमूत्र, जैविक अवशेष और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। इसके साथ ही प्राकृतिक तरीके से उत्पादित खाद्यान्न, फल और सब्जियों की बाजार में मांग भी बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बन रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी प्राकृतिक खेती का महत्व लगातार बढ़ रहा है। रासायनिक अवशेषों से मुक्त खाद्यान्न उपभोक्ताओं को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराते हैं। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के कारण लोग प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे किसानों के लिए नए बाजार और अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय का शोध यह स्पष्ट संदेश देता है कि प्राकृतिक खेती केवल भावनात्मक या पारंपरिक विचार नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित एक प्रभावी कृषि प्रणाली है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने, खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने जैसे अनेक क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ चुके हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यदि देश में प्राकृतिक खेती का दायरा लगातार बढ़ता है, तो यह केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के राष्ट्रीय उद्देश्यों को भी नई दिशा देगी। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय का यह शोध इसी परिवर्तन की मजबूत वैज्ञानिक पुष्टि है और यह विश्वास जगाता है कि भविष्य की समृद्ध खेती प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:09:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दासिया में बन रहे इथेनॉल प्लांट सभी मानकों का हो रहा पालन,अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य- निदेशक रोहन जायसवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती  जिले में रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दासिया गांव में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को लेकर सोमवार को रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कंपनी के निदेशक रोहन जायसवाल और अन्य अधिकारियों ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे पर्यावरण अनुकूल एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित बताया।रोहन जायसवाल ने कहा कि प्लांट में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार का अशोधित या हानिकारक अपशिष्ट जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182879/ethanol-plants-being-built-in-dacia-are-following-all-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260706-wa0065.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती  जिले में रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दासिया गांव में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को लेकर सोमवार को रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कंपनी के निदेशक रोहन जायसवाल और अन्य अधिकारियों ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे पर्यावरण अनुकूल एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित बताया।रोहन जायसवाल ने कहा कि प्लांट में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार का अशोधित या हानिकारक अपशिष्ट जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा तथा अपशिष्ट का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाएगा।एनओसी संबंधी सवालों के जवाब में कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय, प्रादेशिक और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सभी विभागीय अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किए जा चुके हैं। साथ ही जिला पंचायत एवं ग्राम पंचायत से भी अनुमति मिल चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार शिलान्यास से पूर्व मुख्य राजस्व अधिकारी की मौजूदगी में किसानों के साथ बैठक की गई थी, जिसके बाद नियमानुसार निर्माण कार्य शुरू कराया गया।कंपनी का दावा है कि परियोजना का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्लांट में किसानों से टूटे चावल, मक्का, भूसी सहित अन्य कृषि उत्पाद खरीदकर इथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब दो हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। प्रेसवार्ता के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव, भूजल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय लोगों की आशंकाओं से जुड़े सवाल भी उठाए गए, जिनका कंपनी प्रतिनिधियों ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि परियोजना का संचालन सभी वैधानिक और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा तथा संबंधित विभागों की नियमित निगरानी भी होती रहेगी। इस अवसर पर कंपनी के प्रोपराइटर सुधीर जायसवाल, यूनिट हेड आर.के. दुबे, चीफ कंसल्टेंट पी.एन. पांडेय, तकनीकी विशेषज्ञ तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि मौजूद रहे।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 21:58:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बकरी पालन व्यवसाय  ग्रामीणोंके आय का सबसे अच्छा साधन साबित हो रहा है।-डॉ. मणि शंकर द्विवेदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के पारंपरिक साधनों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती बेरोजगारी और कृषि पर बढ़ते दबाव के बीच बकरी पालन ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  हाल ही में हुडसा (हयूमन अपलिफ्टमेंट, डेवलपमेंट ऐंड सोशल अवेयरनेस) द्वारा प्रयागराज के गंगापार ग्रामीण क्षेत्र में किए गए एक सर्वेक्षण में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि बकरी पालन आज भी हजारों परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार है।सर्वेक्षण के दौरान विभिन्न गांवों में पशुपालकों, किसानों और</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गंगापार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182009/goat-rearing-business-is-proving-to-be-the-best-source"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260623-wa0115.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के पारंपरिक साधनों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती बेरोजगारी और कृषि पर बढ़ते दबाव के बीच बकरी पालन ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> हाल ही में हुडसा (हयूमन अपलिफ्टमेंट, डेवलपमेंट ऐंड सोशल अवेयरनेस) द्वारा प्रयागराज के गंगापार ग्रामीण क्षेत्र में किए गए एक सर्वेक्षण में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि बकरी पालन आज भी हजारों परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार है।सर्वेक्षण के दौरान विभिन्न गांवों में पशुपालकों, किसानों और युवाओं से बातचीत की गई। अध्ययन में पाया गया कि सीमित भूमि और संसाधनों वाले परिवारों के लिए बकरी पालन एक कम लागत वाला और लाभकारी व्यवसाय है। अनेक परिवारों ने बताया कि बकरियां उनके लिए संकट के समय आर्थिक सुरक्षा कवच का कार्य करती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह या अन्य आवश्यकताओं के लिए जरूरत पड़ने पर बकरियों की बिक्री से तत्काल नकदी उपलब्ध हो जाती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गंगापार क्षेत्र के ग्रामीण परिवेश में बकरियां स्थानीय वनस्पतियों और प्राकृतिक चरागाहों पर आसानी से पल जाती हैं, जिससे पालन-पोषण की लागत कम रहती है। यही कारण है कि छोटे किसान और भूमिहीन परिवार भी इस व्यवसाय को आसानी से अपना सकते हैं। सर्वेक्षण में यह भी देखा गया कि ग्रामीण किशोर और युवा पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ बकरी पालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।हुडसा के अध्ययन से यह भी ज्ञात हुआ कि महिलाओं की भागीदारी बकरी पालन में लगातार बढ़ रही है। अनेक ग्रामीण परिवारों में महिलाएं बकरियों की देखभाल कर परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षण, पशु चिकित्सा सेवाएं और बाजार से जुड़ाव उपलब्ध कराया जाए तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।बकरी के मांस और दूध की बढ़ती मांग ने भी इस व्यवसाय को अधिक लाभकारी बना दिया है। स्थानीय बाजारों में बकरियों की अच्छी कीमत मिलने से पशुपालकों को नियमित आय प्राप्त होती है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन को आजीविका के प्रभावी साधन के रूप में देखा जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;">हालांकि सर्वेक्षण में कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें पशुओं में रोगों का प्रकोप, गुणवत्तापूर्ण नस्लों की कमी, चारे की समस्या तथा पशु चिकित्सा सुविधाओं का अभाव प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, गैर-सरकारी संस्थाएं और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत कार्यरत संस्थान मिलकर इस क्षेत्र में निवेश करें तो बकरी पालन ग्रामीण विकास का एक मजबूत माध्यम बन सकता है।आज जब ग्रामीण भारत रोजगार और आय के नए अवसरों की तलाश में है, तब बकरी पालन एक ऐसा क्षेत्र है जो कम निवेश में अधिक लाभ और आत्मनिर्भरता की संभावना प्रदान करता है। प्रयागराज के गंगापार क्षेत्र में सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हुआ है कि बकरी पालन केवल एक परंपरागत व्यवसाय नहीं, बल्कि वर्तमान समय में भी ग्रामीण आजीविका, आर्थिक सशक्तिकरण और सतत विकास का एक प्रभावी साधन है।निष्कर्षतः, यदि बकरी पालन को वैज्ञानिक तकनीकों, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़ा जाए तो यह ग्रामीण भारत के लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बकरी पालन आज भी प्रासंगिक है और आने वाले समय में ग्रामीण समृद्धि का एक मजबूत आधार बन सकता है।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 19:53:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मोदी की 12 वर्षों की सत्ता और आम आदमी: वादे, बदलाव और ज़मीनी हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181933/modis-12-years-in-power-and-common-mans-promises-change"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा बढ़ाया। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। स्वच्छ भारत मिशन ने ग्रामीण शौचालय कवरेज को तेज़ी से बढ़ाया। आयुष्मान भारत योजना ने 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा गरीब परिवारों तक पहुंचाया। जनधन खातों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया और कोविड काल में डीबीटी से करोड़ों लोगों को सीधी मदद मिली। </p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी लाभ के लिए बिचौलियों पर निर्भरता घटी। बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ा, जिससे UPI आज छोटे दुकानदार से लेकर ठेले वाले तक इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p><br />                हम बात करें इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भारत की तो इसमें भी प्रगति हुई है और कई सुधार अभी भी बाकी हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेज़ी आई। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, अटल टनल, और नए वंदे भारत ट्रेनें आम यात्रियों के सफर को तेज़ और सुरक्षित बनाने की कोशिश हैं। डिजिटल इंडिया के तहत इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच गांवों तक बढ़ी। इससे शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं मोबाइल पर आ गईं।</p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका फायदा समय की बचत और लागत में कमी के रूप में दिखा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी इंटरनेट की गुणवत्ता और बिजली की आपूर्ति असमान बनी हुई है। हालांकि कर और अर्थव्यवस्था में बदलाव तो हुआ है लेकिन महंगाई के कारण अभी उतनी राहत महसूस नहीं हुई है । GST लागू होने से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एकजुट हुई। छोटे व्यापारियों के लिए शुरू में जटिलता बढ़ी, लेकिन धीरे-धीरे फाइलिंग आसान हुई। नोटबंदी 2016 का मकसद काला धन और नकली नोट पर चोट था, लेकिन इसका तत्काल असर छोटे कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश की रफ्तार आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बनी रही। कोरोना के बाद रिकवरी तेज़ रही, लेकिन असंगठित क्षेत्र में रोज़गार और आय अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है।</p>
<p><br /> राजनीतिक संवाद और छवि की बात की जाये तो इसमें मोदी सरकार का कोई जोड़ नहीं है। मोदी की सरकार ने सीधे संवाद पर ज़ोर दिया। मन की बात, सोशल मीडिया और रैलियों के ज़रिए प्रधानमंत्री खुद जनता से जुड़े रहे। “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केंद्र में रहा। विरोधियों का आरोप रहा कि आलोचना को जगह कम मिली और मीडिया पर नियंत्रण बढ़ा। आम आदमी के लिए इसका असर यह हुआ कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तेज़ी से पहुंची, लेकिन विपरीत राय और स्थानीय समस्याएं कई बार राष्ट्रीय बहस में जगह नहीं बना पाईं।</p>
<p><br /> अलग हम इसकी ज़मीनी हकीकत जानें और यह पता करें कि क्या बदला? तो 12 साल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सरकार सीधे नागरिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पहले जहां फाइलों और दफ्तरों में काम अटकता था, अब ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स से काम होता है। गरीबों के लिए रसोई गैस, शौचालय, बिजली और बैंक खाता पहले से ज्यादा सुलभ हुए हैं। दूसरी तरफ, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय और शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती हैं। मध्यम वर्ग टैक्स और जीवनयापन की लागत को लेकर दबाव महसूस करता है। ग्रामीण भारत में कृषि पर निर्भरता और मौसम की मार अब भी जीवन को अनिश्चित रखती है।</p>
<p>मोदी की 12 साल की सत्ता ने आम आदमी की ज़िंदगी में बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल पहुंच के मामले में ठोस बदलाव लाए हैं। योजनाओं का लाभ पहले से ज्यादा पारदर्शी हुआ है। लेकिन रोज़गार, महंगाई और असमानता जैसे संरचनात्मक मुद्दे बने हुए हैं। आम आदमी के लिए यह कार्यकाल सुविधाओं में बढ़ोतरी और आर्थिक दबाव दोनों का मिश्रण रहा है। 2026 की सियासत इस बात पर टिकी होगी कि क्या सरकार इन बदलावों को स्थायी रोज़गार और आय में बदल पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:41:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Solar Pump: किसानों के लिए खुशखबरी! सरकार सोलर पंप पर दे रही 90% तक सब्सिडी</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Solar Pump Subsidy: प्रधानमंत्री</span> <span class="cf0">किसान</span> <span class="cf0">ऊर्जा</span> <span class="cf0">सुरक्षा</span> <span class="cf0">एवं</span> <span class="cf0">उत्थान</span> <span class="cf0">महाभियान</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">PM-KUSUM) </span><span class="cf0">के</span> <span class="cf0">तहत</span> <span class="cf0">किसानों</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span> <span class="cf0">लगाने</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">सरकार</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">ओर</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">बड़ी</span> <span class="cf0">राहत</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">जा</span> <span class="cf0">रही</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। योजना के अंतर्गत दो </span><span class="cf0">एचपी</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> की निर्धारित कीमत </span><span class="cf2">1,64,322 </span><span class="cf0">रुपये </span><span class="cf0">है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों को एक लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान कर रही हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">किसानों को 2 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> से लेकर 10 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> तक के </span><span class="cf0">सबमर्सिबल</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंपों</span><span class="cf0"> का लाभ मिल सकता है, जिन पर अधिकतम </span><span class="cf2">2,54,983</span> <span class="cf0">रुपये</span> <span class="cf0">तक की </span><span class="cf0">सब्सिडी</span><span class="cf0"> उपलब्ध है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की सिंचाई को निर्बाध</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163318/good-news-for-farmers-government-is-giving-subsidy-up-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/solar-pumpsubsidy.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Solar Pump Subsidy: प्रधानमंत्री</span> <span class="cf0">किसान</span> <span class="cf0">ऊर्जा</span> <span class="cf0">सुरक्षा</span> <span class="cf0">एवं</span> <span class="cf0">उत्थान</span> <span class="cf0">महाभियान</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">PM-KUSUM) </span><span class="cf0">के</span> <span class="cf0">तहत</span> <span class="cf0">किसानों</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span> <span class="cf0">लगाने</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">सरकार</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">ओर</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">बड़ी</span> <span class="cf0">राहत</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">जा</span> <span class="cf0">रही</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। योजना के अंतर्गत दो </span><span class="cf0">एचपी</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> की निर्धारित कीमत </span><span class="cf2">1,64,322 </span><span class="cf0">रुपये </span><span class="cf0">है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों को एक लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान कर रही हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">किसानों को 2 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> से लेकर 10 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> तक के </span><span class="cf0">सबमर्सिबल</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंपों</span><span class="cf0"> का लाभ मिल सकता है, जिन पर अधिकतम </span><span class="cf2">2,54,983</span> <span class="cf0">रुपये</span> <span class="cf0">तक की </span><span class="cf0">सब्सिडी</span><span class="cf0"> उपलब्ध है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की सिंचाई को निर्बाध बनाना और फसलों की उत्पादकता बढ़ाना है। पंजीकरण 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर किया जा रहा है।</span></p>
<p><span class="cf0">उत्तर प्रदेश के बांदा मण्डल के चारों जिलों में करीब 47,770 निजी </span><span class="cf0">नलकूप</span><span class="cf0"> कनेक्शन धारक किसान हैं, जिनके लिए </span><span class="cf0">पीएम</span><span class="cf0">-कुसुम योजना चलाई जा रही है। इस योजना से किसानों को न केवल ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी, </span><span class="cf0">बल्कि</span><span class="cf0"> डीज़ल और अन्य पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों </span><span class="cf0">पर</span><span class="cf0"> निर्भरता भी कम होगी। </span><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंपों</span><span class="cf0"> के माध्यम </span><span class="cf0">से</span><span class="cf0"> बिजली की खपत घटने से किसानों का खर्च कम होगा और अतिरिक्त सौर ऊर्जा को ग्रिड में बेचकर किसान अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। मंडल के लिए लगभग 2,000 </span><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पैनल</span><span class="cf0"> स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">ई-</span><span class="cf0">लाटरी</span><span class="cf0"> के जरिए होगा लाभार्थियों का चयन</span></strong></p>
<p><span class="cf0">योजना का लाभ लेने </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> इच्छुक किसानों को </span><span class="cf1">upagriculture.up.gov.in </span><span class="cf0">पर पंजीकरण कराना अनिवार्य </span><span class="cf0">है</span><span class="cf0">। साथ ही, </span><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> की ऑनलाइन </span><span class="cf0">बुकिंग</span><span class="cf0"> भी इसी </span><span class="cf0">पोर्टल</span><span class="cf0"> से की जाएगी। किसानों का चयन ई-</span><span class="cf0">लाटरी</span><span class="cf0"> प्रणाली के द्वारा किया जाएगा। </span><span class="cf0">बुकिंग</span><span class="cf0"> करते समय किसानों को </span><span class="cf2">5,000 </span><span class="cf0">रुपये </span><span class="cf0">टोकन</span> <span class="cf0">मनी</span><span class="cf0"> के रूप में ऑनलाइन जमा </span><span class="cf0">करनी</span><span class="cf0"> होगी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">उपयुक्त </span><span class="cf0">बोरिंग</span><span class="cf0"> अनिवार्य, नहीं तो निरस्त होगा आवेदन</span></strong></p>
<p><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> के लिए निर्धारित </span><span class="cf0">बोरिंग</span> <span class="cf0">साइज</span><span class="cf0"> अनिवार्य है। 2 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> के लिए 4 इंच, 3 व 5 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> के लिए 6 </span><span class="cf0">इंच</span><span class="cf0">, 7.5 व 10 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> के लिए 8 </span><span class="cf0">इंच</span><span class="cf0"> जरूरी है। </span></p>
<p><span class="cf0">यदि सत्यापन के दौरान उपयुक्त </span><span class="cf0">बोरिंग</span><span class="cf0"> नहीं पाई जाती, तो आवेदन निरस्त कर </span><span class="cf0">टोकन</span> <span class="cf0">मनी</span><span class="cf0"> जब्त कर ली जाएगी। विभिन्न क्षमता </span><span class="cf0">वाले</span> <span class="cf0">पंपों</span><span class="cf0"> के लिए पानी की उपलब्धता की </span><span class="cf0">गहराई</span><span class="cf0"> भी निर्धारित की गई है</span><span class="cf3">—</span><span class="cf0">जैसे 2 </span><span class="cf0">एचपी</span> <span class="cf0">सरफेस</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> 22 </span><span class="cf0">फीट</span><span class="cf0"> तक, जबकि 10 </span><span class="cf0">एचपी</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> 300 </span><span class="cf0">फीट</span><span class="cf0"> तक के लिए उपयुक्त होता है। </span><span class="cf0">पोर्टल</span><span class="cf0"> पर </span><span class="cf0">जिलों</span><span class="cf0"> के अनुसार 2 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> और 3 </span><span class="cf0">एचपी</span> <span class="cf0">पंपों</span><span class="cf0"> के संयुक्त लक्ष्य प्रदर्शित किए जाएंगे।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">आवश्यकतानुसार </span><span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> चयन की सुविधा</span></strong></p>
<p><span class="cf0">किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार </span><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> का चयन कर </span><span class="cf0">बुकिंग</span><span class="cf0"> आगे बढ़ा सकते हैं। </span><span class="cf0">बुकिंग</span> <span class="cf0">कंफर्म</span><span class="cf0"> होने पर किसानों के </span><span class="cf0">पंजीकृत</span><span class="cf0"> मोबाइल नंबर पर संदेश भेजा जाएगा। निर्धारित समय पर शेष राशि बैंक चालान के माध्यम से जमा करना आवश्यक होगा, </span><span class="cf0">अन्यथा</span> <span class="cf0">चयन</span> <span class="cf0">स्वतः</span> <span class="cf0">निरस्त</span><span class="cf0"> कर दिया </span><span class="cf0">जाएगा</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">टोकन</span> <span class="cf0">मनी</span> <span class="cf0">जब्त</span> <span class="cf0">हो</span> <span class="cf0">जाएगी</span><span class="cf0">।</span></p>
<p><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> स्थापित होने के बाद स्थल परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई </span><span class="cf0">किसान</span> <span class="cf0">स्थल</span> <span class="cf0">बदलता</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">तो</span> <span class="cf0">संपूर्ण</span><span class="cf0"> अनुदान की राशि उससे वसूल की जाएगी।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 14:03:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Solar Pump: किसानों के लिए खुशखबरी! सरकार सोलर पंप पर दे रही 90% तक सब्सिडी</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Solar Pump Subsidy: प्रधानमंत्री</span> <span class="cf0">किसान</span> <span class="cf0">ऊर्जा</span> <span class="cf0">सुरक्षा</span> <span class="cf0">एवं</span> <span class="cf0">उत्थान</span> <span class="cf0">महाभियान</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">PM-KUSUM) </span><span class="cf0">के</span> <span class="cf0">तहत</span> <span class="cf0">किसानों</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span> <span class="cf0">लगाने</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">सरकार</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">ओर</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">बड़ी</span> <span class="cf0">राहत</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">जा</span> <span class="cf0">रही</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। योजना के अंतर्गत दो </span><span class="cf0">एचपी</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> की निर्धारित कीमत </span><span class="cf2">1,64,322 </span><span class="cf0">रुपये </span><span class="cf0">है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों को एक लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान कर रही हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">किसानों को 2 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> से लेकर 10 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> तक के </span><span class="cf0">सबमर्सिबल</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंपों</span><span class="cf0"> का लाभ मिल सकता है, जिन पर अधिकतम </span><span class="cf2">2,54,983</span> <span class="cf0">रुपये</span> <span class="cf0">तक की </span><span class="cf0">सब्सिडी</span><span class="cf0"> उपलब्ध है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की सिंचाई को निर्बाध</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162376/good-news-for-farmers-government-is-giving-subsidy-up-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/solar-pumpsubsidy.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Solar Pump Subsidy: प्रधानमंत्री</span> <span class="cf0">किसान</span> <span class="cf0">ऊर्जा</span> <span class="cf0">सुरक्षा</span> <span class="cf0">एवं</span> <span class="cf0">उत्थान</span> <span class="cf0">महाभियान</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">PM-KUSUM) </span><span class="cf0">के</span> <span class="cf0">तहत</span> <span class="cf0">किसानों</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span> <span class="cf0">लगाने</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">सरकार</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">ओर</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">बड़ी</span> <span class="cf0">राहत</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">जा</span> <span class="cf0">रही</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। योजना के अंतर्गत दो </span><span class="cf0">एचपी</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> की निर्धारित कीमत </span><span class="cf2">1,64,322 </span><span class="cf0">रुपये </span><span class="cf0">है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों को एक लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान कर रही हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">किसानों को 2 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> से लेकर 10 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> तक के </span><span class="cf0">सबमर्सिबल</span> <span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंपों</span><span class="cf0"> का लाभ मिल सकता है, जिन पर अधिकतम </span><span class="cf2">2,54,983</span> <span class="cf0">रुपये</span> <span class="cf0">तक की </span><span class="cf0">सब्सिडी</span><span class="cf0"> उपलब्ध है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की सिंचाई को निर्बाध बनाना और फसलों की उत्पादकता बढ़ाना है। पंजीकरण 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर किया जा रहा है।</span></p>
<p><span class="cf0">उत्तर प्रदेश के बांदा मण्डल के चारों जिलों में करीब 47,770 निजी </span><span class="cf0">नलकूप</span><span class="cf0"> कनेक्शन धारक किसान हैं, जिनके लिए </span><span class="cf0">पीएम</span><span class="cf0">-कुसुम योजना चलाई जा रही है। इस योजना से किसानों को न केवल ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी, </span><span class="cf0">बल्कि</span><span class="cf0"> डीज़ल और अन्य पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों </span><span class="cf0">पर</span><span class="cf0"> निर्भरता भी कम होगी। </span><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंपों</span><span class="cf0"> के माध्यम </span><span class="cf0">से</span><span class="cf0"> बिजली की खपत घटने से किसानों का खर्च कम होगा और अतिरिक्त सौर ऊर्जा को ग्रिड में बेचकर किसान अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। मंडल के लिए लगभग 2,000 </span><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पैनल</span><span class="cf0"> स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">ई-</span><span class="cf0">लाटरी</span><span class="cf0"> के जरिए होगा लाभार्थियों का चयन</span></strong></p>
<p><span class="cf0">योजना का लाभ लेने </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> इच्छुक किसानों को </span><span class="cf1">upagriculture.up.gov.in </span><span class="cf0">पर पंजीकरण कराना अनिवार्य </span><span class="cf0">है</span><span class="cf0">। साथ ही, </span><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> की ऑनलाइन </span><span class="cf0">बुकिंग</span><span class="cf0"> भी इसी </span><span class="cf0">पोर्टल</span><span class="cf0"> से की जाएगी। किसानों का चयन ई-</span><span class="cf0">लाटरी</span><span class="cf0"> प्रणाली के द्वारा किया जाएगा। </span><span class="cf0">बुकिंग</span><span class="cf0"> करते समय किसानों को </span><span class="cf2">5,000 </span><span class="cf0">रुपये </span><span class="cf0">टोकन</span> <span class="cf0">मनी</span><span class="cf0"> के रूप में ऑनलाइन जमा </span><span class="cf0">करनी</span><span class="cf0"> होगी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">उपयुक्त </span><span class="cf0">बोरिंग</span><span class="cf0"> अनिवार्य, नहीं तो निरस्त होगा आवेदन</span></strong></p>
<p><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> के लिए निर्धारित </span><span class="cf0">बोरिंग</span> <span class="cf0">साइज</span><span class="cf0"> अनिवार्य है। 2 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> के लिए 4 इंच, 3 व 5 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> के लिए 6 </span><span class="cf0">इंच</span><span class="cf0">, 7.5 व 10 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> के लिए 8 </span><span class="cf0">इंच</span><span class="cf0"> जरूरी है। </span></p>
<p><span class="cf0">यदि सत्यापन के दौरान उपयुक्त </span><span class="cf0">बोरिंग</span><span class="cf0"> नहीं पाई जाती, तो आवेदन निरस्त कर </span><span class="cf0">टोकन</span> <span class="cf0">मनी</span><span class="cf0"> जब्त कर ली जाएगी। विभिन्न क्षमता </span><span class="cf0">वाले</span> <span class="cf0">पंपों</span><span class="cf0"> के लिए पानी की उपलब्धता की </span><span class="cf0">गहराई</span><span class="cf0"> भी निर्धारित की गई है</span><span class="cf3">—</span><span class="cf0">जैसे 2 </span><span class="cf0">एचपी</span> <span class="cf0">सरफेस</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> 22 </span><span class="cf0">फीट</span><span class="cf0"> तक, जबकि 10 </span><span class="cf0">एचपी</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> 300 </span><span class="cf0">फीट</span><span class="cf0"> तक के लिए उपयुक्त होता है। </span><span class="cf0">पोर्टल</span><span class="cf0"> पर </span><span class="cf0">जिलों</span><span class="cf0"> के अनुसार 2 </span><span class="cf0">एचपी</span><span class="cf0"> और 3 </span><span class="cf0">एचपी</span> <span class="cf0">पंपों</span><span class="cf0"> के संयुक्त लक्ष्य प्रदर्शित किए जाएंगे।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">आवश्यकतानुसार </span><span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> चयन की सुविधा</span></strong></p>
<p><span class="cf0">किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार </span><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> का चयन कर </span><span class="cf0">बुकिंग</span><span class="cf0"> आगे बढ़ा सकते हैं। </span><span class="cf0">बुकिंग</span> <span class="cf0">कंफर्म</span><span class="cf0"> होने पर किसानों के </span><span class="cf0">पंजीकृत</span><span class="cf0"> मोबाइल नंबर पर संदेश भेजा जाएगा। निर्धारित समय पर शेष राशि बैंक चालान के माध्यम से जमा करना आवश्यक होगा, </span><span class="cf0">अन्यथा</span> <span class="cf0">चयन</span> <span class="cf0">स्वतः</span> <span class="cf0">निरस्त</span><span class="cf0"> कर दिया </span><span class="cf0">जाएगा</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">टोकन</span> <span class="cf0">मनी</span> <span class="cf0">जब्त</span> <span class="cf0">हो</span> <span class="cf0">जाएगी</span><span class="cf0">।</span></p>
<p><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">पंप</span><span class="cf0"> स्थापित होने के बाद स्थल परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई </span><span class="cf0">किसान</span> <span class="cf0">स्थल</span> <span class="cf0">बदलता</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">तो</span> <span class="cf0">संपूर्ण</span><span class="cf0"> अनुदान की राशि उससे वसूल की जाएगी।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Dec 2025 17:27:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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