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                <title>motor vehicle act - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>motor vehicle act RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑपरेशन वज्रपात के तहत थाना ओबरा पुलिस की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश -</strong> अपर पुलिस महानिदेशक, वाराणसी जोन, वाराणसी के आदेशानुसार तथा पुलिस उपमहानिरीक्षक, मीरजापुर परिक्षेत्र एवं पुलिस अधीक्षक सोनभद्र अभिषेक वर्मा के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय अनिल कुमार एवं क्षेत्राधिकारी ओबरा अमित कुमार के कुशल पर्यवेक्षण में थाना ओबरा पुलिस द्वारा ऑपरेशन वज्रपात के अंतर्गत सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अभियान के दौरान थाना ओबरा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन जांच की गई। चेकिंग के क्रम में यातायात नियमों का उल्लंघन करने, आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत न कर पाने तथा संदिग्ध परिस्थितियों में संचालित पाए गए कुल 05 मोटरसाइकिल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180988/major-action-taken-by-obra-police-station-under-operation-vajrapat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001716962.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश -</strong> अपर पुलिस महानिदेशक, वाराणसी जोन, वाराणसी के आदेशानुसार तथा पुलिस उपमहानिरीक्षक, मीरजापुर परिक्षेत्र एवं पुलिस अधीक्षक सोनभद्र अभिषेक वर्मा के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय अनिल कुमार एवं क्षेत्राधिकारी ओबरा अमित कुमार के कुशल पर्यवेक्षण में थाना ओबरा पुलिस द्वारा ऑपरेशन वज्रपात के अंतर्गत सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियान के दौरान थाना ओबरा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन जांच की गई। चेकिंग के क्रम में यातायात नियमों का उल्लंघन करने, आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत न कर पाने तथा संदिग्ध परिस्थितियों में संचालित पाए गए कुल 05 मोटरसाइकिल वाहनों को मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत सीज किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह अभियान क्षेत्र में अपराध एवं अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने, कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा आमजन में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जनसुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऑपरेशन वज्रपात के अंतर्गत ऐसे विशेष चेकिंग अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे। ओबरा पुलिस आमजन से अपील करती है कि वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन करें तथा वाहन से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज सदैव अपने साथ रखें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:43:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Driving License: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिन तक होगा वैध</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Driving License: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने तर्क दिया था कि दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। कंपनी का कहना था कि लाइसेंस की अवधि दुर्घटना से पहले समाप्त हो चुकी थी, इसलिए मुआवजा राशि चुकाने की जिम्मेदारी उस पर नहीं डाली जा सकती।</p>
<p>जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल की एकल पीठ ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि मोटर वाहन अधिनियम में ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिनों की ग्रेस अवधि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163296/driving-license-big-decision-of-high-court-driving-license-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/driving-license.jpg" alt=""></a><br /><p>Driving License: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने तर्क दिया था कि दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। कंपनी का कहना था कि लाइसेंस की अवधि दुर्घटना से पहले समाप्त हो चुकी थी, इसलिए मुआवजा राशि चुकाने की जिम्मेदारी उस पर नहीं डाली जा सकती।</p>
<p>जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल की एकल पीठ ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि मोटर वाहन अधिनियम में ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिनों की ग्रेस अवधि का प्रावधान है। इस अवधि में लाइसेंस प्रभावी और वैध माना जाता है। कोर्ट के अनुसार, यही कानूनी प्रावधान इस मामले में लागू होता है और इसलिए ट्रिब्यूनल का निर्णय सही था।</p>
<p>यह मामला वर्ष 2003 के उस आदेश से संबंधित था, जिसे मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, जींद ने पारित किया था। हाईकोर्ट में इंश्योरेंस कंपनी की अपील का आधार केवल यह था कि चालक का लाइसेंस 04 जून 2001 को समाप्त हो गया था, जबकि दुर्घटना 04 जुलाई 2001 को हुई थी। लाइसेंस 06 अगस्त 2001 को नवीनीकृत हुआ, जिसे कंपनी ने पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन बताया था।</p>
<p>लेकिन हाईकोर्ट ने धारा 14 की व्याख्या करते हुए कहा कि लाइसेंस की समाप्ति के अगले दिन से 30 दिनों की अवधि तक लाइसेंस को वैध माना जाता है। इस गणना के अनुसार 05 जून 2001 से शुरू हुई अवधि का 30वां दिन 04 जुलाई 2001 पड़ता है—यानी वही दिन जब सुबह 10:45 बजे दुर्घटना हुई। इस आधार पर अदालत ने माना कि दुर्घटना के समय चालक का लाइसेंस कानूनी रूप से वैध था।</p>
<p>हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि कई न्यायिक फैसलों में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि यदि दुर्घटना 30 दिन की ग्रेस अवधि के भीतर हो, तो चालक को बिना लाइसेंस नहीं माना जा सकता। इसलिए इंश्योरेंस कंपनी की यह दलील कि लाइसेंस समाप्त था, कानून के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>अदालत ने 04 जनवरी 2003 को पारित ट्रिब्यूनल के आदेश को सही ठहराते हुए इंश्योरेंस कंपनी की अपील को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इंश्योरेंस कंपनियां केवल लाइसेंस की औपचारिक समाप्ति का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं, क्योंकि कानून ने ऐसी परिस्थितियों के लिए स्पष्ट और विशेष संरक्षण प्रदान किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 10:35:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Driving License: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिन तक होगा वैध</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Driving License: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने तर्क दिया था कि दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। कंपनी का कहना था कि लाइसेंस की अवधि दुर्घटना से पहले समाप्त हो चुकी थी, इसलिए मुआवजा राशि चुकाने की जिम्मेदारी उस पर नहीं डाली जा सकती।</p>
<p>जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल की एकल पीठ ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि मोटर वाहन अधिनियम में ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिनों की ग्रेस अवधि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162789/driving-license-big-decision-of-high-court-driving-license-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/driving-license.jpg" alt=""></a><br /><p>Driving License: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने तर्क दिया था कि दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। कंपनी का कहना था कि लाइसेंस की अवधि दुर्घटना से पहले समाप्त हो चुकी थी, इसलिए मुआवजा राशि चुकाने की जिम्मेदारी उस पर नहीं डाली जा सकती।</p>
<p>जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल की एकल पीठ ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि मोटर वाहन अधिनियम में ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिनों की ग्रेस अवधि का प्रावधान है। इस अवधि में लाइसेंस प्रभावी और वैध माना जाता है। कोर्ट के अनुसार, यही कानूनी प्रावधान इस मामले में लागू होता है और इसलिए ट्रिब्यूनल का निर्णय सही था।</p>
<p>यह मामला वर्ष 2003 के उस आदेश से संबंधित था, जिसे मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, जींद ने पारित किया था। हाईकोर्ट में इंश्योरेंस कंपनी की अपील का आधार केवल यह था कि चालक का लाइसेंस 04 जून 2001 को समाप्त हो गया था, जबकि दुर्घटना 04 जुलाई 2001 को हुई थी। लाइसेंस 06 अगस्त 2001 को नवीनीकृत हुआ, जिसे कंपनी ने पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन बताया था।</p>
<p>लेकिन हाईकोर्ट ने धारा 14 की व्याख्या करते हुए कहा कि लाइसेंस की समाप्ति के अगले दिन से 30 दिनों की अवधि तक लाइसेंस को वैध माना जाता है। इस गणना के अनुसार 05 जून 2001 से शुरू हुई अवधि का 30वां दिन 04 जुलाई 2001 पड़ता है—यानी वही दिन जब सुबह 10:45 बजे दुर्घटना हुई। इस आधार पर अदालत ने माना कि दुर्घटना के समय चालक का लाइसेंस कानूनी रूप से वैध था।</p>
<p>हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि कई न्यायिक फैसलों में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि यदि दुर्घटना 30 दिन की ग्रेस अवधि के भीतर हो, तो चालक को बिना लाइसेंस नहीं माना जा सकता। इसलिए इंश्योरेंस कंपनी की यह दलील कि लाइसेंस समाप्त था, कानून के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>अदालत ने 04 जनवरी 2003 को पारित ट्रिब्यूनल के आदेश को सही ठहराते हुए इंश्योरेंस कंपनी की अपील को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इंश्योरेंस कंपनियां केवल लाइसेंस की औपचारिक समाप्ति का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं, क्योंकि कानून ने ऐसी परिस्थितियों के लिए स्पष्ट और विशेष संरक्षण प्रदान किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 12:41:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Driving License: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिन तक होगा वैध</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Driving License: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने तर्क दिया था कि दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। कंपनी का कहना था कि लाइसेंस की अवधि दुर्घटना से पहले समाप्त हो चुकी थी, इसलिए मुआवजा राशि चुकाने की जिम्मेदारी उस पर नहीं डाली जा सकती।</p>
<p>जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल की एकल पीठ ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि मोटर वाहन अधिनियम में ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिनों की ग्रेस अवधि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162338/driving-license-big-decision-of-high-court-driving-license-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/driving-license.jpg" alt=""></a><br /><p>Driving License: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने तर्क दिया था कि दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। कंपनी का कहना था कि लाइसेंस की अवधि दुर्घटना से पहले समाप्त हो चुकी थी, इसलिए मुआवजा राशि चुकाने की जिम्मेदारी उस पर नहीं डाली जा सकती।</p>
<p>जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल की एकल पीठ ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि मोटर वाहन अधिनियम में ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिनों की ग्रेस अवधि का प्रावधान है। इस अवधि में लाइसेंस प्रभावी और वैध माना जाता है। कोर्ट के अनुसार, यही कानूनी प्रावधान इस मामले में लागू होता है और इसलिए ट्रिब्यूनल का निर्णय सही था।</p>
<p>यह मामला वर्ष 2003 के उस आदेश से संबंधित था, जिसे मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, जींद ने पारित किया था। हाईकोर्ट में इंश्योरेंस कंपनी की अपील का आधार केवल यह था कि चालक का लाइसेंस 04 जून 2001 को समाप्त हो गया था, जबकि दुर्घटना 04 जुलाई 2001 को हुई थी। लाइसेंस 06 अगस्त 2001 को नवीनीकृत हुआ, जिसे कंपनी ने पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन बताया था।</p>
<p>लेकिन हाईकोर्ट ने धारा 14 की व्याख्या करते हुए कहा कि लाइसेंस की समाप्ति के अगले दिन से 30 दिनों की अवधि तक लाइसेंस को वैध माना जाता है। इस गणना के अनुसार 05 जून 2001 से शुरू हुई अवधि का 30वां दिन 04 जुलाई 2001 पड़ता है—यानी वही दिन जब सुबह 10:45 बजे दुर्घटना हुई। इस आधार पर अदालत ने माना कि दुर्घटना के समय चालक का लाइसेंस कानूनी रूप से वैध था।</p>
<p>हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि कई न्यायिक फैसलों में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि यदि दुर्घटना 30 दिन की ग्रेस अवधि के भीतर हो, तो चालक को बिना लाइसेंस नहीं माना जा सकता। इसलिए इंश्योरेंस कंपनी की यह दलील कि लाइसेंस समाप्त था, कानून के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>अदालत ने 04 जनवरी 2003 को पारित ट्रिब्यूनल के आदेश को सही ठहराते हुए इंश्योरेंस कंपनी की अपील को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इंश्योरेंस कंपनियां केवल लाइसेंस की औपचारिक समाप्ति का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं, क्योंकि कानून ने ऐसी परिस्थितियों के लिए स्पष्ट और विशेष संरक्षण प्रदान किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Dec 2025 11:30:28 +0530</pubDate>
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