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                <title>karnataka - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>वंदे मातरम् पर विवाद: राष्ट्रगीत के सम्मान से बड़ी नहीं हो सकती राजनीत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे समय में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राजनीति में राष्ट्रगीत की भूमिका, उसके सम्मान और दलों के पुराने रवैये पर बहस छेड़ दी है। 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन के समय सोनिया गांधी के कुछ हाव-भाव को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रगीत के गायन</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185453/controversy-over-vande-mataram-politics-cannot-be-bigger-than-respect"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे समय में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राजनीति में राष्ट्रगीत की भूमिका, उसके सम्मान और दलों के पुराने रवैये पर बहस छेड़ दी है। 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन के समय सोनिया गांधी के कुछ हाव-भाव को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रगीत के गायन को रोकने का संकेत दिया। इस आरोप के आधार पर कर्नाटक के मंगलुरु में भाजपा नेता विकास पुत्तूर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई नहीं होने पर कर्नाटक हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह मामला अभी आरोप और जांच के स्तर पर है। इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना कानून की प्रक्रिया पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। कांग्रेस की ओर से इस पूरे आरोप को खारिज किया गया है। विवादित दृश्य को लेकर कांग्रेस का कहना है कि सोनिया गांधी मंच पर लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने का संकेत दे रही थीं, न कि वंदे मातरम् रोकने का। दूसरी ओर भाजपा ने इसे राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ते हुए राजनीतिक और सार्वजनिक सवाल खड़े किए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लेकिन इस विवाद का एक बड़ा पक्ष केवल 15 अगस्त की घटना तक सीमित नहीं है। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और देश की राजनीति में बहस का इतिहास बहुत पुराना है। इसलिए आज जब राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, तब यह समझना भी जरूरी है कि अतीत में कांग्रेस ने वंदे मातरम् के संबंध में क्या रुख अपनाया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि समय के साथ इसके कुछ अंशों और धार्मिक संदर्भों को लेकर मुस्लिम लीग तथा कुछ मुस्लिम नेताओं ने आपत्ति जताई। 1930 के दशक में यह विषय कांग्रेस के सामने भी आया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1937 में मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर आपत्ति जताई थी। नेहरू अभिलेखागार में दर्ज दस्तावेजों के अनुसार, 17 अक्टूबर 1937 को मुस्लिम लीग ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में थोपने का आरोप लगाया था। इसके बाद कांग्रेस के भीतर भी इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">20 अक्टूबर 1937 को जवाहरलाल नेहरू ने सुभाषचंद्र बोस को लिखे पत्र में वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और उसके कुछ हिस्सों को लेकर चर्चा की। नेहरू ने लिखा कि गीत की ‘आनंदमठ’ वाली पृष्ठभूमि मुसलमानों को असहज कर सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि वंदे मातरम् को लेकर पैदा हुआ विरोध काफी हद तक सांप्रदायिक तत्वों द्वारा निर्मित था। यानी इतिहास को केवल एक पक्ष से देखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि उस समय कांग्रेस के भीतर भी गीत को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम् के इस्तेमाल पर विचार किया और 1937 में यह निर्णय सामने आया कि गीत के उन शुरुआती अंशों का इस्तेमाल किया जाए जिन पर व्यापक सहमति थी। नेहरू के अपने वक्तव्य से स्पष्ट है कि कांग्रेस ने इस विषय पर लंबे विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यहीं से आज की राजनीतिक बहस को एक ऐतिहासिक संदर्भ मिलता है। भाजपा इसे कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का उदाहरण बताती है, जबकि कांग्रेस और उसके समर्थक इसे उस समय की सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय बताते हैं। इतिहास में दर्ज तथ्यों को देखते हुए यह कहना अधिक उचित है कि वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस के भीतर उस दौर में महत्वपूर्ण राजनीतिक और वैचारिक बहस हुई थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रगीत है, जबकि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान है। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान होगा और स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम्’ को भी समान सम्मान दिया जाएगा। इसलिए वंदे मातरम् को केवल एक राजनीतिक दल या विचारधारा से जोड़कर देखना उसके ऐतिहासिक महत्व को छोटा करना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राष्ट्रगीत का सम्मान किसी सरकार, पार्टी या नेता की निजी संपत्ति नहीं है। यह स्वतंत्रता आंदोलन की उस विरासत का हिस्सा है जिसमें असंख्य लोगों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। यही कारण है कि इसके गायन के दौरान किसी भी प्रकार की अवमानना का आरोप गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लेकिन उतना ही जरूरी यह भी है कि आरोप को प्रमाण मान लेने के बजाय निष्पक्ष जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भाजपा लंबे समय से कांग्रेस पर तुष्टीकरण और अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति के आरोप लगाती रही है। इसके समर्थन में वह कांग्रेस नेताओं के पुराने बयानों का भी उल्लेख करती है। उदाहरण के लिए 2010 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने ‘सैफ्रन टेररिज्म’ यानी ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस बयान पर बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ। कांग्रेस के तत्कालीन महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने बाद में कहा था कि आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता और भगवा रंग को आतंकवाद से जोड़ना उचित नहीं है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2013 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के ‘हिंदू आतंकवाद’ संबंधी बयान पर भी विवाद हुआ। इसके बाद कांग्रेस ने स्वयं को उस शब्दावली से अलग करते हुए कहा था कि आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इन घटनाओं से यह जरूर स्पष्ट होता है कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के बयान समय-समय पर बड़े राजनीतिक विवादों का कारण बने हैं। हालांकि किसी नेता के बयान को पूरे दल की आधिकारिक विचारधारा मान लेना भी उचित नहीं है। राजनीति में बयान आते हैं, उन पर विवाद होता है और कई बार स्वयं दल को सफाई भी देनी पड़ती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वंदे मातरम् पर वर्तमान विवाद का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक संघर्ष का हथियार बनाने की प्रवृत्ति कब समाप्त होगी। भाजपा कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के प्रति असम्मान का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा पर राष्ट्रवाद के नाम पर राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। दोनों दलों की अपनी राजनीतिक दलीलें हैं, लेकिन आम नागरिक के लिए इससे बड़ा प्रश्न राष्ट्रीय सम्मान का है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी के मामले में भी यदि कोई आपत्तिजनक व्यवहार हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो यह भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए। लोकतंत्र में न तो किसी नेता को केवल पद के कारण कानून से ऊपर माना जा सकता है और न ही किसी राजनीतिक विरोधी पर बिना प्रमाण आरोप को अंतिम सत्य माना जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">देशभक्ति किसी दल की बपौती नहीं है।कांग्रेस हो या भाजपा, कोई भी राजनीतिक दल देशभक्ति का प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं रखता। भारत की आजादी किसी एक परिवार, पार्टी या संगठन की देन नहीं है। करोड़ों भारतीयों के संघर्ष, बलिदान और त्याग से देश स्वतंत्र हुआ। इसलिए ‘हमने देश आजाद कराया’ जैसी राजनीतिक मानसिकता से ऊपर उठना जरूरी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठाए जा सकते हैं। 1937 के निर्णयों और उसके पीछे की परिस्थितियों पर राजनीतिक बहस भी हो सकती है। कांग्रेस नेताओं के विवादित बयानों की आलोचना भी लोकतंत्र में स्वाभाविक है। लेकिन इस बहस का अंतिम उद्देश्य किसी दल को देशद्रोही साबित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज जैसे प्रतीकों का सम्मान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आज जरूरत इस बात की है कि वंदे मातरम् को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से आगे बढ़कर देश की नई पीढ़ी को उसके इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान के बारे में बताया जाए। जो गीत स्वतंत्रता सेनानियों के भीतर राष्ट्रभावना जगाता रहा, उसके सम्मान में किसी भी प्रकार की कमी देश के लोकतांत्रिक संस्कारों के लिए उचित नहीं हो सकती। लेकिन सम्मान के साथ न्याय और तथ्य भी जरूरी हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत अब जांच का विषय है। पुलिस और जरूरत पड़ने पर न्यायपालिका यह तय करेगी कि लगाए गए आरोपों में कितना तथ्य है। राजनीतिक दल अपनी-अपनी व्याख्या करते रहेंगे, लेकिन राष्ट्रगीत किसी दल का नहीं, पूरे राष्ट्र का है। इसलिए वंदे मातरम् का सम्मान राजनीतिक विवाद का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और लोकतांत्रिक मर्यादा का विषय होना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;">        *कांतिलाल मांडोत*</div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 20:08:40 +0530</pubDate>
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                <title>क्या अब धर्मस्थला में दबी लाशों के राज दफन ही रह जाएंगे? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">कर्नाटक के धर्मस्थल में कई शवों को दफनाने केस में नया मोड़ आया है इससे स्पष्ट हो रहा है कि सरकार धर्मस्थल का सच उजागर करना नहीं चाहती क्योकि इस के राजनीतिक नफे नुकसान का खतरे जुड़े हैं इस मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने शिकायतकर्ता सीएन चिनैयया को ही गिरफ्तार किया है।अब देर सवेर जांच भी बंद होने की संभावना है। चिनैय्या ने धर्मस्थल में कई हत्याओं, बलात्कारों और शवों को दफनाने का आरोप लगाया था। एसआईटी के चीफ प्रणव मोहंती ने शुक्रवार देर रात आरोपी से पूछताछ की थी और शनिवार की सुबह उसे अरेस्ट कर लिया गया।कर्नाटक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154170/will-the-secrets-of-the-dead-bodies-be-buried-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/download-(3).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">कर्नाटक के धर्मस्थल में कई शवों को दफनाने केस में नया मोड़ आया है इससे स्पष्ट हो रहा है कि सरकार धर्मस्थल का सच उजागर करना नहीं चाहती क्योकि इस के राजनीतिक नफे नुकसान का खतरे जुड़े हैं इस मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने शिकायतकर्ता सीएन चिनैयया को ही गिरफ्तार किया है।अब देर सवेर जांच भी बंद होने की संभावना है। चिनैय्या ने धर्मस्थल में कई हत्याओं, बलात्कारों और शवों को दफनाने का आरोप लगाया था। एसआईटी के चीफ प्रणव मोहंती ने शुक्रवार देर रात आरोपी से पूछताछ की थी और शनिवार की सुबह उसे अरेस्ट कर लिया गया।कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने गिरफ्तारी की पुष्टि की और कहा कि शिकायतकर्ता चिनैय्या को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया। वह पूर्व सफाई कर्मचारी है। उसने दावा किया कि उसने 1995 से 2014 तक इस क्षेत्र में काम किया था। आपको बता दें कि पश्चिमी घाट की सुंदर निचली ढलानों पर स्थित, 800 वर्ष पुराना तीर्थस्थल गांव, धर्मस्थल, कर्नाटक राज्य के दक्षिण कन्नड़ जिले के बेलथांगडी क्षेत्र में नेत्रवती नदी के तट पर स्थित है, जहां प्रतिदिन लगभग हजारों श्रद्धालु आते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मामले की शुरुआत 3 जुलाई 2025 को हुई जब कर्नाटक के धर्मस्थल मंदिर का एक 48 वर्षीय दलित कर्मचारी पुलिस अधीक्षक के सामने आया। कर्नाटक के धर्मस्थल मंदिर के इस पूर्व कर्मचारी का कहना था कि उसे बच्चों सहित सैकड़ों शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया। दरअसल धर्मस्थल मंजूनाथ मंदिर के पास तीर्थयात्रियों का एक समूह खड़ा है। प्रतिदिन लगभग 10,000 तीर्थयात्री इस मंदिर से गुजरते हैं।चिनैय्या ने दावा किया था कि12 साल बाद छिपने के बाद वह सामने आया है जो कभी अत्यंत प्रतिष्ठित धर्मस्थल मंदिर में सफ़ाई कर्मचारी के रूप में काम करता था, 3 जुलाई को पुलिस को बताया कि वह "बेहद भारी मन से और अपराधबोध की असहनीय भावना से उबरने के लिए" सामने आ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उसने कहा था कि अब, मुखबिर उन "सैकड़ों शवों" को निकालने में मदद करना चाहता है जिन्हें उसने 1995 से 2014 के बीच दफनाया था - उनमें से कई महिलाएं और लड़कियां थीं, जिनकी कथित तौर पर यौन उत्पीड़न के बाद हत्या कर दी गई थी, लेकिन उनमें बेसहारा पुरुष भी थे जिनकी हत्याओं का उसने दावा किया था कि उसने खुद गवाह बनकर देखी थी।</div>
<div style="text-align:justify;">इस पूर्व कर्मचारी ने पुलिस अधिकारी को शिकायत के साथ ही एक बहुत पुराने शव की खोपड़ी और कुछ अन्य चीजों को अपनी शिकायत के समर्थन में पुलिस को सोंपा और दावा किया कि यह उन्हीं शवों में से एक शव का अंग है जो उससे धर्मस्थल के जंगल में दबवाया गया था। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूर्व कर्मचारी को पुलिस ने अदालत में बयान दर्ज कराए जहां से उसे संरक्षित गवाह बतौर सुविधा दी गई। सैकड़ों शवों जिनमे की बच्चियों युवतियों के संदिग्ध अवस्था वाले शव भी बिना कानूनी कार्रवाई के मंदिर के पास जंगल मे दबाव बना कर दबवाने की शिकायत से समूचे कर्नाटक समेत देश सिहर उठा। आरोपों की गंभीरता कार्यकर्ताओं के लगातार दबाव और सार्वजनिक आक्रोश के बाद,  कांग्रेस पार्टी द्वारा शासित कर्नाटक सरकार ने हमले और हत्या के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे धर्मस्थल में महिलाओं और नाबालिगों सहित कई शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ शवों पर यौन उत्पीड़न के निशान थे। उन्होंने इस संबंध में मजिस्ट्रेट के सामने बयान भी दिया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां यह भी बता दें कि धर्मस्थला और आसपास के इलाकों से प्रासंगिक कालखंड में सैकड़ों लोगों की गुमशुदगी की शिकायत सामने आयीं जिनमे कई नाबालिग व बालिग लड़कियों की गुमशुदगी शामिल थी। रिकार्ड बताते हैं कि 1987 में, 17 वर्षीय पद्मलता के बलात्कार और हत्या के विरोध में कस्बे में मार्च आयोजित किए गए थे। इन प्रदर्शनों ने प्रभावशाली हस्तियों द्वारा कथित तौर पर मामले को छुपाने की कोशिशों को उजागर किया, लेकिन कथित तौर पर धमकी और कानूनी दबाव के चलते उन्हें दबा दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2012 में एक और किशोरी के साथ बलात्कार और हत्या के बाद, शहर में "सौजन्य के लिए न्याय" आंदोलन के साथ फिर से विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। वह मामला अभी तक अनसुलझा है। आपको बता दें कि 11 जुलाई को, वह व्यक्ति, पूरी तरह से काले कपड़े पहने हुए तथा अपनी आंखों को केवल एक पारदर्शी पट्टी से ढके हुए, अपना बयान दर्ज कराने के लिए बेल्थांगडी की एक स्थानीय अदालत में उपस्थित हुआ।शिकायत मे चिनैय्या ने बताया कि 1995 में सफाई कर्मचारी के रूप में मंदिर में शामिल हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपनी नौकरी की शुरुआत में, उसने नदी के किनारे लाशें देखीं। उसने बताया, "कई महिलाओं की लाशें बिना कपड़ों या अंतर्वस्त्रों के मिलीं। उस समय अधिकारियों को इसकी सूचना देने के बजाय,उसके पर्यवेक्षकों ने उसे पीटा और धमकी दी कि, "हम तुम्हें टुकड़ों में काट देंगे; हम तुम्हारे परिवार के सभी सदस्यों की बलि चढ़ा देंगे, जिसके बाद उसे "इन शवों को नष्ट करने" के लिए मजबूर होना पड़ा।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उसने बयान में बताया, "कई बार ये लाशें नाबालिग लड़कियों की होती थीं। उनके शरीर से फटे कपड़े और गुप्तांगों पर चोटें उनके साथ हुए क्रूर यौन उत्पीड़न का संकेत देती थीं।" और "कुछ लाशों पर तेज़ाब से जलने के निशान भी थे।"चिनैय्या ने पुलिस और अदालत को बताया है कि वह ब्रेन-मैपिंग और पॉलीग्राफ़ सहित किसी भी परीक्षण के लिए तैयार है, और सामूहिक दफ़न स्थलों की पहचान करने को तैयार है। आने वाले दिनों में कुछ स्थलों की खुदाई की जा सकती है। मंदिर के पर्यवेक्षकों से जुड़े एक व्यक्ति ने उसके ही परिवार की एक लड़की का यौन उत्पीड़न किया, जिससे दहशत होकर दिसंबर 2014 में, वह अपने परिवार के साथ धर्मस्थल से भाग गया और अपने ठिकाने के बारे में किसी को नहीं बताया।उन्होंने बताया कि तब से परिवार पड़ोसी राज्य में छिपकर रह रहा है और अपना निवास स्थान बदल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चिनैय्या की बताई गई 13 जगहों पर खुदाई की गई। वहां एक कंकाल मिला। लेकिन वह एक आदमी का था। कुछ हड्डियां मिलीं, जो कुछ समय पहले आत्महत्या करने वाले एक शख्स की बताई जा रही हैं। इतना ही नहीं, इस खुदाई के दौरान सुजाता भट्ट नाम की महिला सामने आई। उसने दावा किया था कि उसकी बेटी अनन्या भट्ट 2003 में लापता हो गई थी। उसने धर्मस्थल में बेटी को मारे जाने का आरोप लगाया लेकिन मामला तूल पकड़ा तो वह सच्चाई कुछ और ही निकली। उसकी कोई बेटी ही नहीं थी। बाद में महिला भी अपने बयान से पलट गई। उसने एक यूट्यूबर पर आरोप लगाया कि उसने जबरन उससे झूठ कहलवाया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चिनैय्या के आरोपों की जांच के लिए गठित एसआईटी ने शनिवार उसे गिरफ्तार कर लिया। उसकी 10 दिन की हिरासत मांगी गई है।हालांकि कुछ  लोगों का आरोप है कि मंदिर के प्रबंधन से एक बड़ा प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का जुडाव है इसी के चलते सिर्फ निपटाउ तरीके से आरोपों की जांच और कुछ स्थानो की खुदाई की गई शुरुआत में खुदाई के काम के लिए उपलब्ध आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल नहीं किया गया और अब शिकायत कर्ता को सिर्फ इस आधार पर झूठा ठहराया गया कि उस ने जो मानव खोपड़ी महिला की बता कर साक्ष्य बतौर सोंपी वह जांच में पुरुष की निकली। अब शिकायत कर्ता एसआइटी की कस्टडी में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई कद्दावर राजनीतिक लोग मामले को हिन्दू मंदिरों की बदनामी करने की साजिश और विदेश से इस के लिए धन की मदद का आरोप लगाकर जांच के काम को रोकने के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं। यहां यह भी बता दें कि धर्मस्थल क्षेत्र के आसपास के पुलिस थानो में गुमशुदा बच्चियों व अन्य का कोई रिकार्ड उपलबध नहीं होने का दावा किया गया है। यह सब संकेत करता है कि दाल में कुछ काला है  लेकिन प्रभुत्व शाली लोगों के खिलाफ इतना पुराना और संगीन मामलों की कोई जांच निष्पक्ष नतीजा सामने लाएगी इस को लेकर शुरुआत में ही आशंका बनी थी। लगता है धर्मस्थल के इर्द-गिर्द हुए पाप अब कभी नहीं खुल पाएंगे! चिनैय्या के साथ कोई अनहोनी होने की आशंका को भी नकारा नहीं जा सकता। अब वह एसआइटी के शिकंजे मे है। हालांकि राज्य के गृह मंत्री ने जांच जारी रखने की बात कही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 17:20:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेडीएस और भाजपा के बीच हुआ गठबंधन, कांग्रेस के लिए चुनौती </title>
                                    <description><![CDATA[<p>2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपनी ताकत को कर्नाटक में बढ़ाने के लिए जेडीएस से यह गठबंधन किया है। वहीं जेडीएस के लिए भी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए यह गठबंधन जरूरी था। दोनों दलों की कर्नाटक में इस वर्ष विधानसभा चुनाव में हुई बुरी हार ने एक दूसरे को करीब लाने में मदद की है। </p>
<p>कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। उनके साथ हुई इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134950/alliance-between-jds-and-bjp-a-challenge-for-congress"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/650d877f9c360.jpg" alt=""></a><br /><p>2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपनी ताकत को कर्नाटक में बढ़ाने के लिए जेडीएस से यह गठबंधन किया है। वहीं जेडीएस के लिए भी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए यह गठबंधन जरूरी था। दोनों दलों की कर्नाटक में इस वर्ष विधानसभा चुनाव में हुई बुरी हार ने एक दूसरे को करीब लाने में मदद की है। </p>
<p>कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। उनके साथ हुई इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद थे। </p>
<p>कर्नाटक में पूर्व प्रधान मंत्री एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व वाला जनता दल (सेक्युलर) या जेडीएस अब एनडीए गठबंधन का हिस्सा आधिकारिक तौर पर बन गया है। </p>
<p>इस गठबंधन और मुलाकात की पुष्टि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी ट्विट कर कर दी है। उन्होंने कहा है कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जद(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी से हमारे वरिष्ठ नेता और गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में मुलाकात हुई है। <br />मुझे खुशी है कि जेडीएस ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा बनने का फैसला किया है। हम एनडीए में उनका तहे दिल से स्वागत करते हैं। यह एनडीए और माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को और मजबूत करेगा।  माना जा रहा है कि कर्नाटक में दोनों ही दलों के करीब आने से कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में कड़ी टक्कर मिल सकती है। </p>
<p>इस महीने की शुरुआत में, भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बीएस येदियुरप्पा ने दोनों दलों के गठबंधन को लेकर दावा किया था। उन्होंने  कहा था कि भाजपा के राष्ट्रीय नेता कर्नाटक की 28 लोकसभा सीटों में से चार  जेडीएल के साथ साझा करने पर सहमत हो गए हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा था कि भाजपा और जेडीएस का गठबंधन होगा। इससे हमें बड़े पैमाने पर दोनों ही दलों को मजबूती मिलेगी। बीएस येदियुरप्पा ने दावा किया था कि दोनों दलों का गठबंधन होने से कर्नाटक में 25 से 26 लोकसभा सीटों पर जीती जा सकती है।  </p>
<p><span style="background-color:rgb(53,152,219);color:rgb(255,255,255);"><strong>2019 के चुनाव में भाजपा को कर्नाटक से मिली थी 25 सीट</strong></span><br />2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने कर्नाटक में 25 सीटें जीतकर अपनी शानदार कामयाबी का परचम लहराया था। इसके साथ ही उसके समर्थित निर्दलीय ने एक सीट पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस और जद(एस) ने 2019 का लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था। <br />उस चुनाव में कांग्रेस 21 सीटों पर और जद(एस ) 7 सीटों पर लड़ी थी। </p>
<p>उनके बीच गठबंधन के बावजूद बीते लोकसभा चुनाव में दोनों को मात्र एक-एक सीट पर ही जीत मिली थी।अब पांच वर्ष बाद जेडीएस 2024 के लोकसभा चुनाव में मात्र 4 सीट पर ही लड़ेगी। इस तरह से वह पिछले के मुकाबले करीब आधी सीटों पर ही चुनाव में उतरेगी। पिछले लोकसभा चुनाव में 9.74 प्रतिशत वोट मिले थे। </p>
<p>ऐसे में जेडीएस का अब अच्छा-खासा प्रभाव राज्य में माना जा रहा है। इस गठबंधन के होने से कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ेगी। वहीं भाजपा पहले से ज्यादा मजबूत होकर सामने आ सकती है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 18:35:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>   भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री शेट्टर ने विधायक पद से दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात- </strong></p>
<p>कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जताने के बाद असंतुष्ट पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर ने रविवार को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने पार्टी बनायी, उन्हें पार्टी से बाहर किया जा रहा है। छह बार के विधायक शेट्टर (67) ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि वह भाजपा भी छोड़ देंगे। इसके बाद कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता बी एस येदियुरप्पा ने शेट्टर की भाजपा छोड़ने के फैसले के लिए आलोचना की और कहा कि लोग उन्हें इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/128877/former-bjp-chief-minister-shettar-resigns-from-the-post-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-04/5433..jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात- </strong></p>
<p>कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जताने के बाद असंतुष्ट पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर ने रविवार को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने पार्टी बनायी, उन्हें पार्टी से बाहर किया जा रहा है। छह बार के विधायक शेट्टर (67) ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि वह भाजपा भी छोड़ देंगे। इसके बाद कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता बी एस येदियुरप्पा ने शेट्टर की भाजपा छोड़ने के फैसले के लिए आलोचना की और कहा कि लोग उन्हें इस कदम के लिए क्षमा नहीं करेंगे।</p>
<p>उत्तर कर्नाटक के एक प्रभावशाली लिंगायत नेता एवं हुब्बालि-धारवाड़ मध्य सीटसे विधायक शेट्टर ने कहा कि कुछ लोगों ने अपने निहित स्वार्थ के चलते इस बार उन्हें चुनाव मैदान में नहीं उतारने की साजिश रची। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आज जो मूल रूप से भाजपा से हैं उन्हें पार्टी से बाहर किया जा रहा है। आज मैं अपने घर से बाहर हो रहा हूं। मुझे मेरे ही घर से निकाल दिया गया है। इससे मुझे गहरा आघात पहुंचा है। इस पृष्ठभूमि में मैंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें समायोजित नहीं करने का कोई कारण नहीं बताया है। शेट्टर ने कहा, ‘‘क्या आयु कारक एक कारण था? नहीं। क्या कोई स्वास्थ्य समस्या थी? मेरा स्वास्थ्य अच्छा है। क्या मैं कोई क्लब चलाता था या गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल था या क्या मैं उपद्रवी हूं? ऐसा कुछ नहीं था। कोई सीडी (सेक्स स्कैंडल) नहीं था।’’ पार्टी में अपने योगदान को याद करते हुए, शेट्टर ने कहा कि उन्होंने पिछले 30 वर्षों से इसे बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम किया और भाजपा ने भी उन्हें पद और सम्मान दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘मेरे काम की वजह से ग्रामीण इलाकों में पार्टी की मौजूदगी है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी मजबूत हुई है।’’ येदियुरप्पा के एक बयान के बारे में पूछे जाने पर शेट्टर ने सवाल किया कि येदियुरप्पा ने (एक दशक से अधिक पहले) भाजपा क्यों छोड़ी थी और कर्नाटक जनता पार्टी का गठन किया। (येदियुरप्पा बाद में भाजपा में लौट आए थे)। येदियुरप्पा ने कहा था कि पार्टी ने शेट्टर को सत्ता और पद दिया, लेकिन इसके बावजूद वह संगठन छोड़ रहे हैं। शेट्टर ने सवाल किया, ‘‘येदियुरप्पा को भी एक अच्छा पद दिया गया था। उन्होंने भाजपा क्यों छोड़ी?’’</p>
<p>यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने का मन बना लिया है, उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अभी तक किसी से व्यक्तिगत रूप से संपर्क या बात नहीं की है।’’ शेट्टर ने दोहराया कि उन्होंने किसी पार्टी में शामिल होने का फैसला नहीं किया है। येदियुरप्पा ने शेट्टर के भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने की बात को रेखांकित करते हुए सवाल किया, ‘‘हमने शेट्टर के साथ क्या अन्याय किया है? उनके क्षेत्र के लोग उन्हें माफ नहीं करेंगे।’’ पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने शेट्टर को टिकट के लिए अपने परिवार के किसी सदस्य का नाम देने का सुझाव दिया था।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने शेट्टर को राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय मंत्री बनाने की भी पेशकश की थी। येदियुरप्पा ने कहा कि पार्टी ने उनसे राजनीति से संन्यास लेने के लिए नहीं कहा था। उन्होंने सवाल किया, “आप (शेट्टर) कांग्रेस में क्यों जा रहे हैं? क्या हमने आपसे कहा कि हम आपको सत्ता नहीं दे रहे?”भाजपा नेता येदियुरप्पा ने सवाल किया, “हमने उनके साथ क्या अन्याय किया है? उन्होंने कांग्रेस में जाने का फैसला पहले ही कर लिया है। उन्हें जाने दें।” येदियुरप्पा ने कहा कि कोई भी ताकत भाजपा को कर्नाटक में एक बार फिर सत्ता में आने से नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा, “हम पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Apr 2023 23:54:45 +0530</pubDate>
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