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                <title>वैश्विक द्वंद्व के उपहार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">विश्व अर्थव्यवस्था की धमनियों में यदि किसी तत्व को रक्त की उपमा दी जाए तो वह निस्संदेह तेल है। विश्व के सभी देशों में भारत सहित पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ा दिए गए हैं इनमें सबसे कम भारत में ही पेट्रोलियम पदार्थों के रेट बढ़ाए गए हैं। यह थोड़ी राहत की बात हो सकती है परंतु भारत की जैसी अर्थव्यवस्था पर निश्चित तौर पर यह बढ़े हुए पेट्रोलियम पदार्थों के दाम आम जनता पर भारी पड़ सकते हैं। भारत में आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने का प्रभाव आम जनता पर हमेशा उनकी जेब पर भारी कटौती किए जाने का अंदेशा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184619/gifts-of-global-conflict"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/s-th.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विश्व अर्थव्यवस्था की धमनियों में यदि किसी तत्व को रक्त की उपमा दी जाए तो वह निस्संदेह तेल है। विश्व के सभी देशों में भारत सहित पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ा दिए गए हैं इनमें सबसे कम भारत में ही पेट्रोलियम पदार्थों के रेट बढ़ाए गए हैं। यह थोड़ी राहत की बात हो सकती है परंतु भारत की जैसी अर्थव्यवस्था पर निश्चित तौर पर यह बढ़े हुए पेट्रोलियम पदार्थों के दाम आम जनता पर भारी पड़ सकते हैं। भारत में आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने का प्रभाव आम जनता पर हमेशा उनकी जेब पर भारी कटौती किए जाने का अंदेशा रहता है। भारत एक विकासशील देश है और यहां की अर्थव्यवस्था बहुत ही संवेदनशील एवं परिवर्तनशील है भारत की जनसंख्या वैश्विक देश में अग्रणी मानी जाती है देश में यदि थोड़े से भी आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं तो इस पर देश की अर्थव्यवस्था पर भारी परिवर्तन परिलक्षित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोलियम पदार्थ केवल वाहनों का ईंधन भर नहीं हैं, बल्कि आधुनिक औद्योगिक सभ्यता की गति, उत्पादन, परिवहन, ऊर्जा और व्यापार की आधारशिला हैं। जब तेल की कीमतों में असंतुलित वृद्धि होती है तो उसका प्रभाव केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेतों की मिट्टी से लेकर कारखानों की मशीनों और आम आदमी की रसोई तक महसूस किया जाता है। आज वैश्विक स्तर पर बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों ने भारत सहित अनेक देशों की आर्थिक संरचना को झकझोर कर रख दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव, ओपेक देशों की उत्पादन नीतियां तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान ने कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर बना दिया। एक समय जो कच्चा तेल 60 से 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच उपलब्ध था, वह कई अवसरों पर 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गया। इसका सीधा प्रभाव उन देशों पर पड़ा जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर हैं। भारत अपनी कुल पेट्रोलियम आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का अर्थ है—देश के आयात बिल में भारी वृद्धि, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव और व्यापार घाटे का विस्तार।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि ने परिवहन लागत को तेजी से बढ़ाया। ट्रकों के भाड़े बढ़े तो फल, सब्जी, अनाज, दूध और दैनिक उपयोग की वस्तुएं महंगी हो गईं। किसान के लिए डीजल केवल वाहन चलाने का साधन नहीं, बल्कि सिंचाई और कृषि उपकरणों की शक्ति है। डीजल महंगा होने का अर्थ है खेती की लागत बढ़ना। इसका परिणाम यह हुआ कि उत्पादन महंगा हुआ और महंगाई की दर लगातार ऊपर जाने लगी। आम नागरिक की आय स्थिर रही लेकिन खर्चों में वृद्धि होती गई। मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग के लिए घरेलू बजट संतुलित करना कठिन हो गया।<br />प्रसिद्ध अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने एक बार कहा था कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें विकासशील देशों के लिए दोहरी चुनौती ह—एक ओर महंगाई बढ़ती है और दूसरी ओर विकास की गति धीमी पड़ती है।<br />         </p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में यही स्थिति आज अनेक देशों में दिखाई देती है। बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ गई। छोटे और मध्यम उद्योग, जो पहले ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मंदी से जूझ रहे थे, अब ऊर्जा लागत के दबाव में कमजोर पड़ने लगे हैं।।विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं ने भी चेतावनी दी है कि ऊर्जा संकट वैश्विक आर्थिक मंदी को और गहरा कर सकता है। जब परिवहन और उत्पादन महंगा होता है तो वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं। उपभोक्ता कम खरीदारी करते हैं, बाजार की मांग घटती है और उद्योगों का विस्तार रुकने लगता है। यही कारण है कि कई देशों में आर्थिक विकास दर अनुमान से कम रही। यूरोप में गैस और तेल संकट ने ऊर्जा आधारित उद्योगों को प्रभावित किया, जबकि एशियाई देशों में आयात लागत ने आर्थिक संतुलन बिगाड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी उद्योगपति हेनरी फोर्ड ने कहा था कि यदि उत्पादन और परिवहन महंगे हो जाएं तो बाजार की आत्मा कमजोर पड़ जाती है। आज यह कथन बिल्कुल सटीक प्रतीत होता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल व्यक्तिगत वाहन उपयोग को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि रेल, विमानन, शिपिंग और सार्वजनिक परिवहन की लागत को भी बढ़ाती हैं। विमान कंपनियों ने किराए बढ़ाए, मालवाहक कंपनियों ने अतिरिक्त शुल्क लगाए और इसका भार अंततः उपभोक्ता पर पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार ने समय-समय पर उत्पाद शुल्क में कटौती और राज्यों द्वारा वैट कम करने जैसे कदम उठाए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता ने राहत को सीमित रखा। दूसरी ओर सरकारों के सामने भी चुनौती थी क्योंकि ईंधन पर मिलने वाला कर राजस्व विकास योजनाओं और आधारभूत संरचना निर्माण का महत्वपूर्ण स्रोत है। यदि कर घटाए जाते हैं तो सरकारी आय प्रभावित होती है, और यदि कीमतें बढ़ती हैं तो जनता पर बोझ पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह एक जटिल आर्थिक संतुलन बन गया है। ऊर्जा संकट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि केवल पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता भविष्य के लिए सुरक्षित नहीं है। इसलिए विश्व अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। भारत ने सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में कई योजनाएं शुरू की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मंचों पर ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भारत के भविष्य की आवश्यकता बताया है। उनका मानना है कि यदि भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है तो ऊर्जा के क्षेत्र में आयात निर्भरता कम करनी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि केवल नीतियां बना देने से समस्या समाप्त नहीं होगी। आवश्यक है कि सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया जाए, ऊर्जा संरक्षण को जनआंदोलन बनाया जाए और वैकल्पिक ऊर्जा तकनीकों को सस्ता व सुलभ बनाया जाए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तेल उत्पादक और उपभोक्ता देशों के बीच संतुलित संवाद आवश्यक है, ताकि बाजार में कृत्रिम अस्थिरता कम हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि तेल की बढ़ती धार ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा कर दिया है। महंगाई, उत्पादन लागत, बेरोजगारी, व्यापार घाटा और आर्थिक असंतुलन जैसी समस्याएं इसी ऊर्जा संकट की परछाईं बनकर उभरी हैं। यदि विश्व को स्थिर और संतुलित आर्थिक विकास की ओर बढ़ना है तो ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों, संतुलित नीतियों और वैश्विक सहयोग को प्राथमिकता देनी होगी। अन्यथा पेट्रोल-डीजल की यह बढ़ती आग केवल इंजन ही नहीं, अर्थव्यवस्था की पूरी संरचना को धीरे-धीरे झुलसाती रहेगी।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 22:07:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आरबीआई के लक्ष्य से ऊपर पहुंची खुदरा महंगाई आम आदमी का बजट बिगड़ा खाद्य वस्तुओं और पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश में महंगाई ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जून महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है। पिछले 17 महीनों में यह पहला अवसर है जब महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई के 4 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर पहुंची है। इससे पहले मई में खुदरा महंगाई 3.95 प्रतिशत दर्ज की गई थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हुई वृद्धि का परिणाम मानी जा रही है। इसके साथ ही परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की जरूरत का लगभग हर सामान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183358/retail-inflation-reached-above-rbis-target-common-mans-budget-was"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas9.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश में महंगाई ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जून महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है। पिछले 17 महीनों में यह पहला अवसर है जब महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई के 4 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर पहुंची है। इससे पहले मई में खुदरा महंगाई 3.95 प्रतिशत दर्ज की गई थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हुई वृद्धि का परिणाम मानी जा रही है। इसके साथ ही परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की जरूरत का लगभग हर सामान महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर दिखाई देने लगा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जून महीने में खाद्य महंगाई बढ़कर 5.32 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मई में यह 4.78 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.45 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 5.09 प्रतिशत दर्ज की गई। यह स्पष्ट संकेत है कि गांव और शहर दोनों ही महंगाई की मार झेल रहे हैं। फल, सब्जियां, दालें, खाद्य तेल, दूध तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने रसोई का खर्च काफी बढ़ा दिया है। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए घर का बजट संभालना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हुई वृद्धि भी रही है। ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने का असर केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव हर उस वस्तु पर पड़ता है जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। किराना, फल-सब्जियां, दवाइयां, कपड़े, निर्माण सामग्री और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें भी परिवहन खर्च बढ़ने के कारण ऊपर चली जाती हैं। जून महीने में माल ढुलाई से जुड़ी सेवाओं की महंगाई दर बढ़कर लगभग 7.70 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो यह बताती है कि परिवहन लागत अब महंगाई का बड़ा कारण बन चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव भारत जैसे आयात पर निर्भर देश पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में वैश्विक परिस्थितियां बिगड़ने पर घरेलू बाजार में भी पेट्रोल और डीजल महंगे हो जाते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर अब सीधे आम नागरिक की जेब पर महसूस किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महंगाई बढ़ने का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के लिए नया आधार वर्ष और नई उपभोक्ता टोकरी लागू होने के बाद यह महंगाई का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। नई उपभोक्ता टोकरी में लोगों की वर्तमान जीवनशैली और खर्च के पैटर्न को अधिक वास्तविक रूप से शामिल किया गया है। इससे महंगाई का आकलन पहले की तुलना में अधिक सटीक माना जा रहा है। हालांकि इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि लोगों के दैनिक खर्च में वास्तविक बढ़ोतरी पहले के अनुमान से अधिक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महंगाई का सबसे अधिक असर निश्चित आय वाले परिवारों पर पड़ता है। जिन लोगों की आय सीमित है या जिनकी आय में नियमित वृद्धि नहीं होती, उनके लिए बढ़ती कीमतों के बीच खर्चों का संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वेतनभोगी कर्मचारी, छोटे व्यापारी, किसान, मजदूर और पेंशनभोगी सभी इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं। आवश्यक वस्तुओं पर अधिक खर्च होने के कारण लोग अन्य जरूरतों पर खर्च कम करने को मजबूर हो रहे हैं। इससे उपभोक्ता मांग पर भी असर पड़ सकता है, जो अर्थव्यवस्था की गति को प्रभावित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक का प्रमुख उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित रखते हुए आर्थिक विकास को संतुलित बनाए रखना है। आरबीआई ने खुदरा महंगाई के लिए 4 प्रतिशत का लक्ष्य निर्धारित किया है और 2 से 6 प्रतिशत के दायरे को स्वीकार्य सीमा माना गया है। हालांकि जून में महंगाई लक्ष्य से ऊपर पहुंच गई है, लेकिन यह अभी भी आरबीआई की निर्धारित ऊपरी सीमा 6 प्रतिशत से नीचे है। इसके बावजूद लगातार बढ़ती महंगाई केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का विषय बन सकती है। यदि आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बना रहता है तो ब्याज दरों को लेकर आरबीआई को अधिक सतर्क रुख अपनाना पड़ सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण नहीं पाया गया और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। दूसरी ओर यदि मानसून सामान्य रहता है, कृषि उत्पादन अच्छा होता है और सरकार समय रहते आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाने के कदम उठाती है तो खाद्य महंगाई में कुछ राहत मिल सकती है। अच्छी फसल से सब्जियों, अनाज और दालों की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना रहती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे महंगाई पर नियंत्रण रखना है तो दूसरी ओर आर्थिक विकास की गति भी बनाए रखनी है। इसके लिए खाद्य आपूर्ति को मजबूत करना, जमाखोरी पर सख्ती, परिवहन व्यवस्था को सुचारु रखना और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा। यदि आपूर्ति श्रृंखला मजबूत रहती है तो कीमतों पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक जानकारों का मानना है कि महंगाई केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आम नागरिक के जीवन स्तर से है। जब खाद्य पदार्थ, ईंधन और दैनिक उपयोग की वस्तुएं महंगी होती हैं तो परिवारों की बचत कम होने लगती है। उपभोक्ता खर्च घटता है और इसका प्रभाव पूरे आर्थिक तंत्र पर दिखाई देता है। इसलिए महंगाई पर नियंत्रण केवल सरकार या आरबीआई की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उत्पादन, आपूर्ति और बाजार व्यवस्था के बेहतर समन्वय से ही संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जून महीने के महंगाई के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था फिलहाल नई चुनौती का सामना कर रही है। पिछले 17 महीनों में पहली बार आरबीआई का लक्ष्य टूटना यह बताता है कि कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। यदि आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं और ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे समय में सरकार, रिजर्व बैंक और संबंधित एजेंसियों को समन्वित प्रयास करते हुए महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण के उपाय करने होंगे, ताकि आम नागरिक को राहत मिल सके और अर्थव्यवस्था संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ती रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">    <strong>  <em>कांतिलाल मांडोत</em></strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 19:57:38 +0530</pubDate>
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                <title>क्रूड के दाम गिरने पर भी सस्ता क्यों नहीं हो रहा तेल?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया में ब्रेंट क्रूड </span>70-75 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में होर्मुज बंद होने के बाद ये </span>115 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर तक पहुंचा था। लेकिन दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर के पेट्रोल पंप पर कीमत वही खड़ी है। तेल अभी भी </span>105 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर तक मिल रहा है जबकि सरकार </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">फीसदी एथेनॉल की मिलावट भी कर रही है। आम आदमी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब  क्रूड के दाम गिर रहे तब तेल सस्ता क्यों नहीं हो रहा है </span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब एक लाइन का नहीं है। इसके पीछे </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">कारण हैं। टैक्स ही</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182106/why-is-oil-not-becoming-cheaper-even-when-crude-prices"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas23.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया में ब्रेंट क्रूड </span>70-75 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में होर्मुज बंद होने के बाद ये </span>115 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर तक पहुंचा था। लेकिन दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर के पेट्रोल पंप पर कीमत वही खड़ी है। तेल अभी भी </span>105 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर तक मिल रहा है जबकि सरकार </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">फीसदी एथेनॉल की मिलावट भी कर रही है। आम आदमी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब  क्रूड के दाम गिर रहे तब तेल सस्ता क्यों नहीं हो रहा है </span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब एक लाइन का नहीं है। इसके पीछे </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">कारण हैं। टैक्स ही असली खेलता है- भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत का </span>50-55% <span lang="hi" xml:lang="hi">हिस्सा टैक्स होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इसमें केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और राज्य का वैट शामिल है। </span>2020 <span lang="hi" xml:lang="hi">में जब कोरोना में क्रूड </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर पर गिर गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी थी। नतीजा ये हुआ कि क्रूड सस्ता होने का फायदा पंप तक नहीं पहुंचा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भी वही पैटर्न है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सरकार अगर चाहे तो एक्साइज घटाकर तुरंत </span>5-7 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर राहत दे सकती है। लेकिन सरकार ऐसा नहीं करती क्योंकि तेल से मिलने वाला टैक्स राजकोष की सबसे बड़ी आमदनी है। बजट बैलेंस रखना है तो टैक्स घटाना मुश्किल है। कई बार होता ये है कि क्रूड गिरता है तो सरकार टैक्स बढ़ा देती है। क्रूड बढ़ता है तो कंपनियां कीमत नहीं बढ़ा पातीं। बीच में जनता फंस जाती है। तेल कंपनियों का घाटा और अंडर-रिकवरी- फरवरी </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में जब होर्मुज बंद हुआ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रूड </span>72 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर से बढ़कर </span>115 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर पर चला गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> लेकिन चुनाव और होर्मुज संकट के कारण सरकारी तेल कंपनियों ने कीमत नहीं बढ़ाई। नतीजा ये हुआ कि कंपनियों को प्रति लीटर </span>25 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए से ज्यादा का नुकसान होने लगा। </span>IMF <span lang="hi" xml:lang="hi">ने भी कहा था कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर नहीं रखी जा सकतीं। अब जब क्रूड गिरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंपनियां पहले अपने घाटे की भरपाई कर रही हैं। इसलिए क्रूड </span>70 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर पर आने के बाद भी कंपनियां </span>2-3 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर की कटौती कर रही हैं</span>, 10-15 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए की नहीं। डॉलर-रुपया का खेल- भारत </span>85% <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रूड आयात करता है। भुगतान डॉलर में होता है। अगर रुपया कमजोर है तो क्रूड भले सस्ता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के लिए महंगा पड़ता है। अभी </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर </span>72 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए के आसपास है। इसलिए क्रूड में </span>10% <span lang="hi" xml:lang="hi">गिरावट का असर सिर्फ </span>3-4% <span lang="hi" xml:lang="hi">ही दिखता है। जब रुपया मजबूत होता है और क्रूड गिरता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब ही असली राहत मिलती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर ये दोनों फैक्टर साथ आएं तो पेट्रोल </span>6-7 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर सस्ता हो सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">टाइम लैग और इन्वेंट्री का गणित- तेल कंपनियां क्रूड </span>30-45 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन पहले खरीदती हैं। यानी आज जो क्रूड </span>70 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर पर मिल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो शायद मई के रेट पर खरीदा गया है जब क्रूड </span>90 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर पर था। दूसरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंपनियां फेजवाइज कीमतें बढ़ाती-घटाती हैं। </span>11 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन में </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">बार बढ़ोतरी का पैटर्न </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में देखा गया। अब गिरावट भी धीरे-धीरे पास ऑन हो रही है। दिल्ली में </span>9 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन में पेट्रोल </span>78 <span lang="hi" xml:lang="hi">पैसे सस्ता हुआ है। तो कब सस्ता होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर ब्रेंट क्रूड कई हफ्तों तक </span>80-85 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर के दायरे में रहा तो पेट्रोल-डीजल </span>2-5 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए लीटर सस्ता हो सकता है। लेकिन शर्त ये है कि सरकार एक्साइज न बढ़ाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपया स्थिर रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और होर्मुज जैसे नए संकट न आएं। क्रूड का दाम गिरना जरूरी है</span>, </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन काफी नहीं। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत </span>3 <span lang="hi" xml:lang="hi">चीजें तय करती हैं:  क्रूड का इंटरनेशनल रेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपया-डॉलर का रेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का टैक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक तीनों साथ में फेवर में नहीं आते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंप पर बोर्ड वही रहेगा। इसलिए अगली बार जब न्यूज में "क्रूड </span>10% <span lang="hi" xml:lang="hi">गिरा" दिखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो समझ लेना कि पंप पर असर सिर्फ </span>1-2 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए का आएगा। बाकी </span>8 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए टैक्स और घाटे की भरपाई में चले जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182106/why-is-oil-not-becoming-cheaper-even-when-crude-prices</link>
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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 16:56:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल के ताजा भाव हुए जारी, जानिए आपके शहर का ताजा रेट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Petrol Diesel Price: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर डालती हैं। रोज सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम जारी करती हैं। ये दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के आधार पर तय की जाती हैं।</p>
<p>ईंधन के दामों में मामूली बदलाव भी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है—चाहे वह ऑफिस जाने वाला कर्मचारी हो, ट्रांसपोर्ट से जुड़ा व्यवसाय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164925/petrol-diesel-price-latest-prices-of-petrol-diesel-released-know"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/petrol-diesel-price-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>Petrol Diesel Price: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर डालती हैं। रोज सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम जारी करती हैं। ये दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के आधार पर तय की जाती हैं।</p>
<p>ईंधन के दामों में मामूली बदलाव भी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है—चाहे वह ऑफिस जाने वाला कर्मचारी हो, ट्रांसपोर्ट से जुड़ा व्यवसाय हो या फिर फल-सब्जी बेचने वाला छोटा व्यापारी। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नजर रखना आज के समय में बेहद जरूरी हो गया है।</p>
<p>सरकार द्वारा लागू डेली प्राइस रिवीजन सिस्टम का मकसद पारदर्शिता बनाए रखना है, ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित या गलत जानकारी न मिले। इसी व्यवस्था के तहत देशभर में अलग-अलग शहरों में टैक्स और वैट के अनुसार पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग होते हैं।</p>
<h2><strong>आपके शहर में आज पेट्रोल-डीजल का भाव (31 दिसंबर 2025)</strong></h2>
<p></p>
<ul>
<li><span class="cf0">नई दिल्ली: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">94.72</span><span class="cf0"> रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल </span><span class="cf1">87.62</span><span class="cf0"> रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">मुंबई: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">104.21</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">92.15</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">कोलकाता</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">103.94</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">90.76</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">चेन्नई</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">100.75</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">92.34</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">अहमदाबाद</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">94.49</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">90.17</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">बेंगलुरु</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">102.92</span><span class="cf0"> रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">89.02</span><span class="cf0"> रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">हैदराबाद: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">107.46</span><span class="cf0"> रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल </span><span class="cf1">95.70</span><span class="cf0"> रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">जयपुर: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">104.72</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल </span><span class="cf1">90.21</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">लखनऊ</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">94.69</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">87.80</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">पुणे</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">104.04</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">90.57</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">चंडीगढ़</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">94.30</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">82.45</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">इंदौर</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">106.48</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">91.88</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">पटना</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">105.58</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">93.80</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">सूरत</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">95.00</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">89.00</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
<li><span class="cf0">नासिक</span><span class="cf0">: </span><span class="cf0">पेट्रोल</span> <span class="cf1">95.50</span> <span class="cf0">रुपये</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">डीजल</span> <span class="cf1">89.50</span> <span class="cf0">रुपये</span></li>
</ul>
<p></p>
<h2><strong>पिछले दो साल से क्यों स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?</strong></h2>
<p>गौरतलब है कि मई 2022 के बाद से केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों द्वारा पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कटौती की गई थी। इसके बाद से देशभर में ईंधन की कीमतों में बड़ी राहत देखने को मिली और दाम काफी हद तक स्थिर बने हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/164925/petrol-diesel-price-latest-prices-of-petrol-diesel-released-know</link>
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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 10:24:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल सस्ता हुआ या महंगा? जानें आज के ताजा रेट्स </title>
                                    <description><![CDATA[<p>Petrol Diesel Price: हर दिन की शुरुआत अब सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ईंधन के ताजा रेट जारी करती हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। ये कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं।</p>
<p>ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों से लेकर फल-सब्जी बेचने वाले व्यापारियों तक, हर वर्ग इन दामों से प्रभावित होता है। सरकार की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163465/petrol-diesel-price-petrol-diesel-became-cheaper-or-costlier-know-todays"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/petrol-diesel-price-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>Petrol Diesel Price: हर दिन की शुरुआत अब सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ईंधन के ताजा रेट जारी करती हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। ये कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं।</p>
<p>ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों से लेकर फल-सब्जी बेचने वाले व्यापारियों तक, हर वर्ग इन दामों से प्रभावित होता है। सरकार की यह व्यवस्था पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लागू की गई है, ताकि उपभोक्ताओं को सही और स्पष्ट जानकारी मिल सके।</p>
<h3><strong>आपके शहर में आज पेट्रोल-डीजल के दाम</strong></h3>
<ul>
<li>
<p>नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.72, डीजल ₹87.62 प्रति लीटर</p>
</li>
<li>
<p>मुंबई: पेट्रोल ₹104.21, डीजल ₹92.15</p>
</li>
<li>
<p>कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94, डीजल ₹90.76</p>
</li>
<li>
<p>चेन्नई: पेट्रोल ₹100.75, डीजल ₹92.34</p>
</li>
<li>
<p>अहमदाबाद: पेट्रोल ₹94.49, डीजल ₹90.17</p>
</li>
<li>
<p>बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92, डीजल ₹89.02</p>
</li>
<li>
<p>हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46, डीजल ₹95.70</p>
</li>
<li>
<p>जयपुर: पेट्रोल ₹104.72, डीजल ₹90.21</p>
</li>
<li>
<p>लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69, डीजल ₹87.80</p>
</li>
<li>
<p>पुणे: पेट्रोल ₹104.04, डीजल ₹90.57</p>
</li>
<li>
<p>चंडीगढ़: पेट्रोल ₹94.30, डीजल ₹82.45</p>
</li>
<li>
<p>इंदौर: पेट्रोल ₹106.48, डीजल ₹91.88</p>
</li>
<li>
<p>पटना: पेट्रोल ₹105.58, डीजल ₹93.80</p>
</li>
<li>
<p>सूरत: पेट्रोल ₹95.00, डीजल ₹89.00</p>
</li>
<li>
<p>नासिक: पेट्रोल ₹95.50, डीजल ₹89.50</p>
</li>
</ul>
<h3><strong>पिछले दो साल से कीमतें स्थिर क्यों?</strong></h3>
<p>मई 2022 के बाद केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स में कटौती की थी। इसके बाद से ईंधन की कीमतों में बड़ी स्थिरता देखने को मिली है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं।</p>
<h3><strong>ईंधन की कीमतें किन कारणों से तय होती हैं?</strong></h3>
<ul>
<li>
<p>कच्चे तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर ईंधन महंगा हो जाता है।</p>
</li>
<li>
<p>डॉलर के मुकाबले रुपया: भारत कच्चा तेल आयात करता है। रुपया कमजोर होने पर कीमतें बढ़ती हैं।</p>
</li>
<li>
<p>सरकारी टैक्स: केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स कीमतों का बड़ा हिस्सा होते हैं, इसी कारण राज्यों में दाम अलग-अलग होते हैं।</p>
</li>
<li>
<p>रिफाइनिंग लागत: कच्चे तेल को पेट्रोल-डीजल में बदलने की प्रक्रिया पर आने वाला खर्च भी कीमतों को प्रभावित करता है।</p>
</li>
<li>
<p>मांग और आपूर्ति: त्योहारों या खास मौसम में मांग बढ़ने से कीमतों पर असर पड़ सकता है।</p>
</li>
</ul>
<h3><strong>SMS से ऐसे जानें अपने शहर का रेट</strong></h3>
<p>अगर आप रोजाना अपने शहर के पेट्रोल-डीजल के दाम जानना चाहते हैं, तो SMS के जरिए भी जानकारी मिल सकती है—</p>
<ul>
<li>
<p>Indian Oil: शहर का कोड लिखकर “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें</p>
</li>
<li>
<p>BPCL: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें</p>
</li>
<li>
<p>HPCL: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें</p>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/163465/petrol-diesel-price-petrol-diesel-became-cheaper-or-costlier-know-todays</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/163465/petrol-diesel-price-petrol-diesel-became-cheaper-or-costlier-know-todays</guid>
                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 10:45:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें हुई जारी, जान लें आज के ताजा भाव  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>Petrol Diesel Price: भारत में हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की रोशनी से नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीज़ल की नई दरों के साथ होती है। सुबह 6 बजे तेल विपणन कंपनियां (OMCs) देशभर में ईंधन की ताज़ा कीमतें जारी करती हैं। ये दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, साथ ही डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर निर्भर करती हैं। इसलिए पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें रोजमर्रा की ज़िंदगी पर सीधा असर डालती हैं—चाहे वह ऑफिस जाने वाला कर्मचारी हो, किसान हो या सब्ज़ी बेचने वाला।</p>
<p>सरकार द्वारा अपनाई गई यह पारदर्शी प्रणाली उपभोक्ताओं को सही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162863/petrol-diesel-price-new-prices-of-petrol-and-diesel-released"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/petrol-diesel-price2.jpg" alt=""></a><br /><p>Petrol Diesel Price: भारत में हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की रोशनी से नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीज़ल की नई दरों के साथ होती है। सुबह 6 बजे तेल विपणन कंपनियां (OMCs) देशभर में ईंधन की ताज़ा कीमतें जारी करती हैं। ये दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, साथ ही डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर निर्भर करती हैं। इसलिए पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें रोजमर्रा की ज़िंदगी पर सीधा असर डालती हैं—चाहे वह ऑफिस जाने वाला कर्मचारी हो, किसान हो या सब्ज़ी बेचने वाला।</p>
<p>सरकार द्वारा अपनाई गई यह पारदर्शी प्रणाली उपभोक्ताओं को सही कीमत की जानकारी सुनिश्चित करती है ताकि लोग किसी भ्रम में न रहें और अपनी बजट प्लानिंग सटीक रख सकें।</p>
<h2><strong>आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव (08 दिसंबर 2025)</strong></h2>
<div class="TyagGW_tableContainer">
<div class="group TyagGW_tableWrapper flex w-fit flex-col-reverse">
<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th>शहर</th>
<th>पेट्रोल (रुपये/लीटर)</th>
<th>डीज़ल (रुपये/लीटर)</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>नई दिल्ली</td>
<td>94.72</td>
<td>87.62</td>
</tr>
<tr>
<td>मुंबई</td>
<td>104.21</td>
<td>92.15</td>
</tr>
<tr>
<td>कोलकाता</td>
<td>103.94</td>
<td>90.76</td>
</tr>
<tr>
<td>चेन्नई</td>
<td>100.75</td>
<td>92.34</td>
</tr>
<tr>
<td>अहमदाबाद</td>
<td>94.49</td>
<td>90.17</td>
</tr>
<tr>
<td>बेंगलुरु</td>
<td>102.92</td>
<td>89.02</td>
</tr>
<tr>
<td>हैदराबाद</td>
<td>107.46</td>
<td>₹95.70</td>
</tr>
<tr>
<td>जयपुर</td>
<td>104.72</td>
<td>90.21</td>
</tr>
<tr>
<td>लखनऊ</td>
<td>94.69</td>
<td>87.80</td>
</tr>
<tr>
<td>पुणे</td>
<td>104.04</td>
<td>90.57</td>
</tr>
<tr>
<td>चंडीगढ़</td>
<td>94.30</td>
<td>82.45</td>
</tr>
<tr>
<td>इंदौर</td>
<td>106.48</td>
<td>91.88</td>
</tr>
<tr>
<td>पटना</td>
<td>105.58</td>
<td>93.80</td>
</tr>
<tr>
<td>सूरत</td>
<td>95.00</td>
<td>89.00</td>
</tr>
<tr>
<td>नासिक</td>
<td>95.50</td>
<td>89.50</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<h2><strong>दो साल से कीमतें स्थिर क्यों?</strong></h2>
<p>मई 2022 में केंद्र और कई राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कटौती की थी। उसी समय से देश में ईंधन की कीमतों में बड़ी स्थिरता देखी जा रही है।</p>
<p>हालांकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव लगातार जारी है, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव सीमित रखा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/162863/petrol-diesel-price-new-prices-of-petrol-and-diesel-released</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/162863/petrol-diesel-price-new-prices-of-petrol-and-diesel-released</guid>
                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 10:13:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें हुई जारी, जान लें आज के ताजा भाव  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>Petrol Diesel Price: ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने बुधवार, 26 नवंबर की सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीज़ल के ताज़ा दाम जारी कर दिए। कंपनियों के डेली प्राइस रिवीजन मैकेनिज़्म के तहत हर रोज़ कीमतें अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल के रुझान और रुपये–डॉलर विनिमय दर के आधार पर अपडेट की जाती हैं, ताकि उपभोक्ताओं को पारदर्शी और सटीक फ्यूल प्राइसिंग मिल सके।</p>
<p>देश में फ्यूल की कीमतें तकनीकी रूप से ग्लोबल क्रूड मार्केट से जुड़ी हैं, लेकिन टैक्स ढांचे, रेगुलेटरी नीतियों और राजनीतिक परिस्थितियों के चलते लंबे समय से घरेलू स्तर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161717/petrol-diesel-price-new-prices-of-petrol-and-diesel-released"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/petrol-diesel-price2.jpg" alt=""></a><br /><p>Petrol Diesel Price: ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने बुधवार, 26 नवंबर की सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीज़ल के ताज़ा दाम जारी कर दिए। कंपनियों के डेली प्राइस रिवीजन मैकेनिज़्म के तहत हर रोज़ कीमतें अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल के रुझान और रुपये–डॉलर विनिमय दर के आधार पर अपडेट की जाती हैं, ताकि उपभोक्ताओं को पारदर्शी और सटीक फ्यूल प्राइसिंग मिल सके।</p>
<p>देश में फ्यूल की कीमतें तकनीकी रूप से ग्लोबल क्रूड मार्केट से जुड़ी हैं, लेकिन टैक्स ढांचे, रेगुलेटरी नीतियों और राजनीतिक परिस्थितियों के चलते लंबे समय से घरेलू स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। 2022 में क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने पर केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर 8 रुपये और डीज़ल पर 6 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाकर उपभोक्ताओं को राहत दी थी। इसके बाद से OMCs घरेलू मार्जिन और अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव को संतुलित करते हुए कीमतों में स्थिरता बनाए हुए हैं।</p>
<p>नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, आज अधिकतर मेट्रो और बड़े शहरों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें अपरिवर्तित रहीं, जबकि नोएडा, भुवनेश्वर और लखनऊ में हल्की गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और मुंबई में 103.50 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रहा।</p>
<p>चेन्नई में पेट्रोल 100.80 रुपये, जबकि कोलकाता में 105.41 रुपये प्रति लीटर रहा। नोएडा में कीमत 0.27 रुपये घटकर 94.85 रुपये हो गई, जबकि भुवनेश्वर में 0.38 रुपये की कमी के साथ यह 100.97 रुपये दर्ज की गई। तिरुवनंतपुरम में कीमत 0.18 रुपये बढ़कर 107.48 रुपये प्रति लीटर हो गई।</p>
<p>डीज़ल कीमतों में भी स्थिरता देखी गई, हालांकि नोएडा, लखनऊ और भुवनेश्वर में मामूली कमी दर्ज की गई। दिल्ली में डीज़ल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर कायम रहा, जबकि मुंबई में 90.03 रुपये और चेन्नई में 92.39 रुपये रहा। नोएडा में डीज़ल 0.31 रुपये घटकर 87.98 रुपये हो गया।</p>
<p>लखनऊ में कीमत 0.17 रुपये कम होकर 87.81 रुपये रही, जबकि भुवनेश्वर में यह 0.37 रुपये की गिरावट के बाद 92.55 रुपये दर्ज हुई। तिरुवनंतपुरम में आज डीज़ल की कीमत 0.30 रुपये बढ़कर 96.48 रुपये प्रति लीटर हो गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161717/petrol-diesel-price-new-prices-of-petrol-and-diesel-released</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/161717/petrol-diesel-price-new-prices-of-petrol-and-diesel-released</guid>
                <pubDate>Wed, 26 Nov 2025 10:44:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>

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