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                <title>nagar panchayat biskohar - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>nagar panchayat biskohar RSS Feed</description>
                
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                <title>गायत्री मंत्र से होता है आत्मिक उत्थान और संकटों का निवारण - कैलाश नाथ तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नगर पंचायत बिस्कोहर क्षेत्र के भरौली कैथोलिया में चल रहे पांच दिवसीय संगीतमय श्रीमद पावन प्रज्ञा पुराण कथा एवं गायत्री महायज्ञ के चौथे दिन रविवार रात श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर रहे। कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने अपने प्रवचन में कहा कि 24 कलाओं से पूर्ण महाप्रज्ञा गायत्री का अवतार हो चुका है और मां गायत्री ही कामधेनु , कल्पवृक्ष तथा पारसमणि के समान हैं, जो साधक के जीवन को सुख, समृद्धि और ज्ञान से भर देती हैं।उन्होंने कहा कि मां गायत्री की आराधना का सर्वोत्तम माध्यम गायत्री मंत्र है। इसी मंत्र की महिमा बताते</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173053/gayatri-mantra-leads-to-spiritual-upliftment-and-resolution-of-problems"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773061956410.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नगर पंचायत बिस्कोहर क्षेत्र के भरौली कैथोलिया में चल रहे पांच दिवसीय संगीतमय श्रीमद पावन प्रज्ञा पुराण कथा एवं गायत्री महायज्ञ के चौथे दिन रविवार रात श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर रहे। कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने अपने प्रवचन में कहा कि 24 कलाओं से पूर्ण महाप्रज्ञा गायत्री का अवतार हो चुका है और मां गायत्री ही कामधेनु , कल्पवृक्ष तथा पारसमणि के समान हैं, जो साधक के जीवन को सुख, समृद्धि और ज्ञान से भर देती हैं।उन्होंने कहा कि मां गायत्री की आराधना का सर्वोत्तम माध्यम गायत्री मंत्र है। इसी मंत्र की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि महर्षि विश्वामित्र ने यही दिव्य मंत्र भगवान श्रीराम को प्रदान किया था। आगे चलकर प्रभु श्रीराम ने शबरी को नवधा भक्ति के रूप में इसी मंत्र की दीक्षा दी थी, जिससे उनका जीवन धन्य हो गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को कथा का  रसपान करते हुए कहा कि गायत्री मंत्र की संध्या साधना हर नर-नारी को नियमित रूप से करनी चाहिए। इससे मन की शुद्धि होती है, आत्मिक शक्ति बढ़ती है और जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं।कथा के दौरान भजन-कीर्तन और प्रवचन सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए ।</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर मिठाई लाल यादव, आदर्श राम मौर्या, जंगली यादव, लवकुश यादव, स्वामीनाथ तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 22:33:54 +0530</pubDate>
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                <title> प्रेम भाव व प्रेम के भूखे होते है  भगवान : आचार्य रामयस</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong> नगर पंचायत बिस्कोहर के भगत सिंह नगर वार्ड, फूलपुर राजा में चल रही श्रीमद्भागवत पुराण कथा के तीसरे दिन रविवार की रात्रि को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीधाम अयोध्या से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य रामयस दास जी महाराज ने अपने जीवनोपयोगी उपदेशों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य ने कहा कि दीर्घायु होने के लिए मनुष्य को प्रतिदिन प्राणायाम अवश्य करना चाहिए, इससे जीवन में संयम और इंद्रियों पर नियंत्रण बना रहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान भाव और प्रेम के भूखे होते हैं, न कि भोग-विलास के।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कथा के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161539/69245b72dce40"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/1763986006013-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong> नगर पंचायत बिस्कोहर के भगत सिंह नगर वार्ड, फूलपुर राजा में चल रही श्रीमद्भागवत पुराण कथा के तीसरे दिन रविवार की रात्रि को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीधाम अयोध्या से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य रामयस दास जी महाराज ने अपने जीवनोपयोगी उपदेशों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य ने कहा कि दीर्घायु होने के लिए मनुष्य को प्रतिदिन प्राणायाम अवश्य करना चाहिए, इससे जीवन में संयम और इंद्रियों पर नियंत्रण बना रहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान भाव और प्रेम के भूखे होते हैं, न कि भोग-विलास के।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कथा के दौरान महाराज ने विदुर चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि दासीपुत्र होने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के राजसी भोग को त्यागकर विदुर के घर साधारण केले के छिलके भी प्रेमवश स्वीकार किए। यह प्रसंग दिखाता है कि प्रभु के लिए सच्ची भक्ति और निर्मल भाव ही सर्वोपरि हैं।आचार्य रामजस दास जी ने कश्यप ऋषि और दिति की कथा का भी भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि दिति की उद्विग्न अवस्था में गर्भाधान होने के कारण उनके गर्भ से असुर पुत्र हिरण्याक्षऔर हिरण्यकश्यप का जन्म हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दुष्ट प्रवृत्तियों के विनाश हेतु भगवान ने वराह अवतार धारण कर हिरण्याक्ष का वध किया। कहा कि भगवान समय-समय पर भक्तों की रक्षा व धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते रहते हैं। इस दौरान सुधीर कुमार त्रिपाठी , राजेश अवस्थी उर्फ कालिया बाबा, चंद्रप्रकाश गुप्ता, सदानंद शुक्ला, विवेक शुक्ला, प्रिंस पांडे, रोहित गुप्ता, सरोज यादव, मुग्गुन मौर्य, लड्डू लाल भारती, बृजेश गुप्ता, अर्जुन त्रिपाठी, विजय त्रिपाठी, कल्लू पांडेय सहित बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 18:49:46 +0530</pubDate>
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