<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/37885/tolerance" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Tolerance - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/37885/rss</link>
                <description>Tolerance RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अहिंसा कायरता नहीं बल्कि मानवता का उज्ज्वल प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">अहिंसा भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह केवल हिंसा का अभाव नहीं बल्कि प्रेम करुणा दया सहिष्णुता और आत्मबल का ऐसा महान संदेश है जो मानव जीवन को श्रेष्ठता की ओर ले जाता है। अहिंसा मनुष्य को दुर्बल नहीं बनाती बल्कि उसके भीतर साहस संयम और आत्मविश्वास का संचार करती है। यही कारण है कि भारतीय मनीषियों ने अहिंसा को धर्म का सर्वोच्च स्वरूप माना है। अहिंसा का अर्थ किसी भी जीव को मन वचन और कर्म से कष्ट न पहुंचाना है। यह केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं रहती बल्कि परिवार समाज राष्ट्र और पूरे विश्व को शांति और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184777/non-violence-is-not-cowardice-but-a-bright-symbol-of-humanity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002114816.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">अहिंसा भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह केवल हिंसा का अभाव नहीं बल्कि प्रेम करुणा दया सहिष्णुता और आत्मबल का ऐसा महान संदेश है जो मानव जीवन को श्रेष्ठता की ओर ले जाता है। अहिंसा मनुष्य को दुर्बल नहीं बनाती बल्कि उसके भीतर साहस संयम और आत्मविश्वास का संचार करती है। यही कारण है कि भारतीय मनीषियों ने अहिंसा को धर्म का सर्वोच्च स्वरूप माना है। अहिंसा का अर्थ किसी भी जीव को मन वचन और कर्म से कष्ट न पहुंचाना है। यह केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं रहती बल्कि परिवार समाज राष्ट्र और पूरे विश्व को शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अहिंसा की दृष्टि अत्यंत व्यापक और विराट है। इसमें संकीर्णता के लिए कोई स्थान नहीं है। यह किसी जाति धर्म भाषा प्रदेश अथवा संप्रदाय की सीमाओं में बंधी हुई विचारधारा नहीं है। जिस प्रकार गंगा का निर्मल जल सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध रहता है उसी प्रकार अहिंसा भी संपूर्ण मानवता के लिए समान रूप से उपयोगी है। यदि इसे किसी विशेष वर्ग या समुदाय तक सीमित कर दिया जाए तो इसका वास्तविक स्वरूप नष्ट हो जाएगा। अहिंसा का संदेश समस्त विश्व के लिए है और इसकी शक्ति किसी भी हथियार से अधिक प्रभावशाली मानी जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इतिहास इस बात का साक्षी है कि अहिंसा ने अनेक बार असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों को संभव बनाया है। भारत का स्वतंत्रता संग्राम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के बल पर अंग्रेजी शासन जैसी विशाल शक्ति को चुनौती दी। उन्होंने न तो हथियार उठाए और न ही हिंसा का सहारा लिया। फिर भी सत्याग्रह असहयोग आंदोलन और दांडी यात्रा जैसे आंदोलनों के माध्यम से उन्होंने पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांध दिया। करोड़ों भारतीयों की नैतिक शक्ति के सामने अंग्रेजी साम्राज्य को झुकना पड़ा। यह सिद्ध हो गया कि आत्मबल और सत्य पर आधारित अहिंसा किसी भी सैन्य शक्ति से अधिक प्रभावशाली हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अहिंसा का अर्थ कभी भी कायरता नहीं होता। कायर व्यक्ति भय के कारण संघर्ष से बचता है जबकि अहिंसक व्यक्ति अन्याय का सामना साहस और आत्मविश्वास के साथ करता है। अहिंसा वीरों का धर्म है क्योंकि इसके लिए अत्यंत धैर्य त्याग और आत्मसंयम की आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति क्रोध और प्रतिशोध की भावना पर विजय प्राप्त कर लेता है वही वास्तविक अर्थों में वीर कहलाता है। हिंसा करना सरल हो सकता है किंतु क्षमा करना और शांति बनाए रखना कहीं अधिक कठिन है। इसलिए अहिंसा दुर्बलों का नहीं बल्कि आत्मबल से परिपूर्ण व्यक्तियों का मार्ग है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अहिंसा मनुष्य को यह शिक्षा देती है कि वह अपने स्वार्थ के लिए किसी दूसरे के अधिकारों का हनन न करे। प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। किसी भी समाज या राष्ट्र के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। विवाद चाहे व्यक्तिगत हो या अंतरराष्ट्रीय उसका समाधान संवाद समझदारी और शांतिपूर्ण प्रयासों से खोजा जाना चाहिए। यदि शांति स्थापित करने के लिए त्याग और बलिदान देना पड़े तो उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। यही सच्ची अहिंसा का स्वरूप है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी सत्य है कि अहिंसा अन्याय को सहन करने की शिक्षा नहीं देती। अन्याय करना जितना बड़ा अपराध है उतना ही बड़ा अपराध अन्याय को कायरता के कारण स्वीकार कर लेना भी है। यदि किसी व्यक्ति समाज या राष्ट्र पर अत्याचार हो रहा हो तो उसका प्रतिकार करना आवश्यक है। अहिंसा का अर्थ यह नहीं कि मनुष्य अन्याय के सामने हाथ पर हाथ रखकर बैठा रहे। यदि देश धर्म समाज और मानवता की रक्षा के लिए आवश्यक हो तो साहसपूर्ण कदम उठाना भी कर्तव्य बन जाता है। इसलिए अहिंसा विवेकपूर्ण साहस का मार्ग है न कि निष्क्रियता का।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय संतों और महापुरुषों ने अपने जीवन से अहिंसा की महानता को सिद्ध किया है। भगवान महावीर ने संपूर्ण जीवन अहिंसा और करुणा का संदेश दिया। उन्होंने प्रत्येक जीव में आत्मा का वास माना और सभी के प्रति दया का व्यवहार करने की प्रेरणा दी। उनके विचार आज भी विश्वभर में शांति और सहअस्तित्व की भावना को मजबूत करते हैं। महात्मा बुद्ध ने भी प्रेम करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश देकर समाज की अनेक बुराइयों का विरोध किया। उन्होंने हिंसा और घृणा के स्थान पर मैत्री और करुणा को अपनाने की शिक्षा दी। उनके उपदेश आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस शिक्षा का वास्तविक अर्थ कायरता नहीं बल्कि घृणा का उत्तर प्रेम से देना है। यह मनुष्य के भीतर की महानता को प्रकट करता है और समाज में वैमनस्य के स्थान पर सद्भाव को बढ़ावा देता है।आधुनिक युग में जब संसार युद्ध आतंकवाद हिंसा और कट्टरता जैसी समस्याओं से जूझ रहा है तब अहिंसा की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। आज विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधाजनक तो बनाया है किंतु साथ ही विनाशकारी हथियारों का भी निर्माण किया है। ऐसे समय में यदि विश्व को स्थायी शांति चाहिए तो उसे अहिंसा सहिष्णुता और संवाद की राह अपनानी होगी। परिवार से लेकर अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक हर स्तर पर प्रेम विश्वास और सहयोग की भावना विकसित करनी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अहिंसा केवल युद्ध न करने का नाम नहीं है बल्कि अपने व्यवहार विचार और वाणी में भी शालीनता बनाए रखना है। कटु शब्द भी हिंसा का रूप होते हैं और मधुर वचन भी अहिंसा की अभिव्यक्ति बन सकते हैं। जब मनुष्य अपने भीतर से घृणा ईर्ष्या और द्वेष को समाप्त कर देता है तब उसके जीवन में शांति और संतोष का उदय होता है। यही शांति समाज और राष्ट्र तक पहुंचकर विश्व शांति का आधार बनती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः कहा जा सकता है कि अहिंसा मानव सभ्यता की सबसे महान उपलब्धियों में से एक है। यह कायरता नहीं बल्कि आत्मबल सत्य साहस और मानवता का उज्ज्वल प्रतीक है। अहिंसा हमें न्याय के लिए संघर्ष करना सिखाती है किंतु घृणा और प्रतिशोध के बिना। यह प्रेम करुणा और क्षमा के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य करती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में अहिंसा के आदर्शों को अपनाए तो विश्व में शांति सद्भाव और भाईचारे की स्थापना संभव है। यही वह मार्ग है जो मानवता को विनाश से बचाकर विकास समृद्धि और स्थायी शांति की ओर ले जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184777/non-violence-is-not-cowardice-but-a-bright-symbol-of-humanity</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184777/non-violence-is-not-cowardice-but-a-bright-symbol-of-humanity</guid>
                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:48:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/1002114816.jpg"                         length="52027"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहनशीलता का अभाव और बढ़ता आत्महत्या का संकट, बदलते समाज की बड़ी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज का समाज तेजी से बदल रहा है। तकनीक, प्रतिस्पर्धा, रिश्ते, करियर, और जीवनशैली हर स्तर पर दबाव बढ़ा रहे हैं। इन परिवर्तनों का सबसे गहरा प्रभाव हमारे किशोरों, युवाओं और परिवारों पर पड़ रहा है। बीते कुछ वर्षों में टीनेजर्स और छात्र–छात्राओं में आत्महत्या की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि देखने को मिली है। कभी पढ़ाई का दबाव, कभी लव मैरेज में मतभेद, तो कभी पति–पत्नी के विवाद या सोशल मीडिया की आभासी वास्तविकताएं है।ये सभी कारण आज जीवन समाप्त करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सहनशीलता का अभाव  संकट की जड़ में छिपा बड़ा कारण है।सहनशीलता जिसका</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161499/lack-of-tolerance-and-increasing-suicide-crisis-is-a-big"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(2)5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज का समाज तेजी से बदल रहा है। तकनीक, प्रतिस्पर्धा, रिश्ते, करियर, और जीवनशैली हर स्तर पर दबाव बढ़ा रहे हैं। इन परिवर्तनों का सबसे गहरा प्रभाव हमारे किशोरों, युवाओं और परिवारों पर पड़ रहा है। बीते कुछ वर्षों में टीनेजर्स और छात्र–छात्राओं में आत्महत्या की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि देखने को मिली है। कभी पढ़ाई का दबाव, कभी लव मैरेज में मतभेद, तो कभी पति–पत्नी के विवाद या सोशल मीडिया की आभासी वास्तविकताएं है।ये सभी कारण आज जीवन समाप्त करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहनशीलता का अभाव  संकट की जड़ में छिपा बड़ा कारण है।सहनशीलता जिसका अर्थ कठिन परिस्थितियों को धैर्य और समझदारी से संभालने की क्षमता है।आज की पीढ़ी में तेजी से घटती जा रही है।तकनीक और सोशल मीडिया ने जीवन को त्वरित बना दिया है। अब मनुष्य का धैर्य, प्रतीक्षा और संघर्ष जैसी मूल योग्यताएँ कमज़ोर पड़ रही हैं। हर चीज़ तुरंत चाहि।सफलता, मान्यता, प्यार, सराहना और समाधान। जब अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, तब निराशा गहरी होती है। यह निराशा धीरे-धीरे अवसाद का रूप लेने लगती है और कई बार युवा इसे अंत का रास्ता समझ बैठते हैं। किशोरों और छात्रों में बढ़ती आत्महत्या का मुख्य कारण शिक्षा का दबाव सबसे बड़ा कारक रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिणाम आधारित शिक्षा का बोझ हम युवाओ पर जुल्म कर रहे है।आज छात्र सिर्फ पढ़ाई नहीं कर रहे, बल्कि प्रतिस्पर्धा की दौड़ में संघर्ष कर रहे हैं। बोर्ड का तनाव,कॉलेज प्रवेश का दबाव,करियर की अनिश्चितता, कोचिंग संस्थानों की रेसदोस्तों और समाज से तुलना यह सब एक छात्र के मन पर गहरा दबाव डालता है।नौंवी की छात्रा,दसवीं औरकिशोर वय के बच्चे दूसरी,तीसरी या पांचवी मंजिल से कूदकर जान देने की घटना हम हररोज अखबार में पढ़ते है।यह समाज पर काला कलंक है।शिक्षित समाज मे किसी कारणवश आत्महत्या करना तकलीफदेह है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असफलता समाज में एक कलंक की तरह देखी जाती है। बच्चे इस डर से घबरा जाते हैं कि वे माता–पिता, स्कूल या समाज की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरेंगे। यही दबाव कई बार उन्हें खुद को खत्म करने की ओर धकेल देता है। शहरों में अलगाव और अकेलापनअनेक छात्र घर से दूर हॉस्टल या किराए पर रहते हैं।जिससे अकेलापन, परिवार से दूरीऔरभावनात्मक सहयोग का अभाव इन कारणों से मानसिक तनाव बढ़ता है और नकारात्मक विचार मजबूत होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> सोशल मीडिया की तुलना की बीमारी इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट जैसे माध्यमों पर दिखती परफेक्ट लाइफ युवा मन को भ्रमित कर देती है।वे अपने जीवन की तुलना दूसरों से करते हैं और खुद को असफल मान लेते हैं। टीनेजर्स में आत्महत्या का क्रेज  फैशन नहीं, गंभीर बीमारी है।समाज किस तरफ जा रहा है।आज किशोरों में आत्महत्या को कभी-कभी साहस आखिरी कदम या समाधान के रूप में देखा जाने लगा है, जो बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है। भावनात्मक परिपक्वता का अभाव बढ़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किशोर मन तेजी से बदलता है। गुस्सा, प्रेम, असफलता और तनाव के समय वे निर्णय लेने में जल्दबाजी करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">भावनाओं पर नियंत्रण न होने से वे तत्काल प्रतिक्रिया में खतरनाक कदम उठा लेते हैं। लव रिलेशनशिप में टूटन12-18 वर्ष की उम्र में किशोर पहली बार प्रेम और आकर्षण की भावनाएँ महसूस करते हैं।ब्रेकअप या अस्वीकार किया जाना उनके लिए बड़ा सदमा होता है। वे इसे जीवन मृत्यु का प्रश्न समझ बैठते हैं।पति पत्नी के विवाद और आत्महत्या परिवार की टूटन का परिणाम है।विवाहिक संबंधों में बढ़ते तनाव भी आत्महत्या का बड़ा कारण बन रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आजआर्थिक दबाव अहंकार मनमुटाव बातचीत की कमी अविश्वास ने अलग कर दिया है।इन समस्याओं ने रिश्तों को कमजोर कर दिया है। लव मैरेज में अक्सर अपेक्षाएँ अधिक होती हैं। जब वास्तविकता कल्पना से भिन्न होती है, तो टकराव बढ़ता है। रोजाना होने वाले झगड़े कई बार मानसिक स्वास्थ्य को इतने प्रभावित कर देते हैं कि लोग चरम निर्णय लेने लगते हैं। समाज में आत्महत्या को बढ़ावा देने वाले अन्य कारक भी है। किशोर नशे की गिरफ्त में आने पर जल्द गुस्सा करते हैं और मानसिक नियंत्रण खो देते हैं। परिवार में भावनात्मक दूरीभी कारणभूत है।अब संयुक्त परिवारों की जगह छोटे परिवार आ गए हैं।बच्चे मोबाइल में, माता–पिता नौकरी में व्यस्त  बातचीत और भावनात्मक जुड़ाव खत्म हो रहा है।आर्थिक असमानता और बेरोजगारीमुख्य कारण है। युवाओं में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। मीडिया में आत्महत्या की खबरों की ग्लैमराइजेशन पर प्रभाव पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगातार समाचार चैनल और सोशल मीडिया पर इन घटनाओं की विस्तृत कवरेज इससे जुड़े जोखिम को बढ़ाती है। समाधान ढूंढना होगा। इस संकट से बाहर कैसे निकले? आत्महत्या रोकी जा सकती है। यदि परिवार, समाज, स्कूल और सरकार मिलकर प्रयास करें। परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।बच्चों से बात करें। बच्चों की भावनाओं को समझें। उन्हें सुनें ।गलतियों पर गुस्सा न करें, बल्कि समझाएं।किसी से  तुलना बंद करें।हर बच्चा अलग है।उसे अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने दें। असफलता को स्वीकार करना सिखाएं। असफलता ही सफलता की सीढ़ी है।यह भाव बच्चों में बचपन से बनाना जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्कूल और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य ,सहायता, काउंसलिंग सेंटर,हेल्पलाइन,तनाव प्रबंधन कार्यशालाएँ,खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम और परीक्षा परिणाम पर संतुलित नीति से छात्रों पर दबाव कम किया जा सकता है।  समाज की जिम्मेदारी आत्महत्या के मामलों को सनसनीखेज बनाने से बचें। भावनात्मक सहयोग की संस्कृति विकसित करें।पड़ोस और समाज में संवाद बढ़ाएं।नशे को रोकने के लिए अभियान चलाएं। डिजिटल दुनिया के प्रति जागरूकता लाए।सोशल मीडिया की अवास्तविक दुनिया से बच्चों को परिचित कराना है।स्क्रीन टाइम कम करानाऔरपरिवार के साथ समय बढ़ाना है।इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकतादेनी है।आवश्यक होने पर  मनोचिकित्स काउंसलर मनोवैज्ञानिक से सहायता लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मानसिक बीमारी भी उतनी ही वास्तविक है जितनी शारीरिक बीमारी।सहनशीलता बढ़ाना ही समाधान की कुंजी है।आज की पीढ़ी को तकनीक ने बहुत कुछ दिया है, परंतु उसने मनुष्य की भावनात्मक शक्ति और सहनशीलता को कमजोर भी किया है। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम अपने बच्चों और युवाओं में,धैर्य ,सहनशीलता, जीवन कौशलऔर  भावनात्मक मजबूती विकसित करें। आत्महत्या कोई समाधान नहीं है।यह एक स्थायी समस्या के लिए अस्थायी निर्णय है। यदि परिवार, स्कूल और समाज सही समय पर सही कदम उठाएँ, तो लाखों जीवन बचाए जा सकते हैं। हमें एक ऐसा वातावरण बनाना होगा जिसमें हर बच्चा, हर युवा और हर परिवार संकट के समय संवाद करें, समाधान ढूंढें, और जीवन को महत्व दें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161499/lack-of-tolerance-and-increasing-suicide-crisis-is-a-big</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/161499/lack-of-tolerance-and-increasing-suicide-crisis-is-a-big</guid>
                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 16:52:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/download-%282%295.jpg"                         length="8032"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        