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                <title>लापरवाही - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>सीएचसी प्रभारी डॉ. भास्कर यादव ड्यूटी से गायब, स्वास्थ्य सेवाएं ठप्प</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती।</strong>बस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर प्रभारी डॉ. भास्कर यादव के लगातार ड्यूटी से गायब रहने से पूरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर की व्यवस्था चरमरा गई है।</div><div><br /></div><div>सीएचसी गौर प्रभारी डॉ. भास्कर यादव खुद ड्यूटी से नदारद हैं तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर की स्वास्थ्य व्यवस्था की देखभाल कौन करेगा । प्रभारी के गायब रहने से सीएचसी के अंतर्गत अधिकांश आयुष्मान आरोग्य मंदिरों/उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर ताला लटक रहा है</div><div>        सूत्रों के अनुसार अधीक्षक डॉ. भास्कर यादव सीएचसी पर कभी रात्रि विश्राम नहीं करते है रात्रि में अधीक्षक के न रहने से ओपीडी व इमरजेंसी सेवा भगवान</div><div>डॉ.</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178132/chc-in-charge-dr-bhaskar-yadav-missing-from-duty-health-services"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260502-wa0067.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती।</strong>बस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर प्रभारी डॉ. भास्कर यादव के लगातार ड्यूटी से गायब रहने से पूरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर की व्यवस्था चरमरा गई है।</div><div><br /></div><div>सीएचसी गौर प्रभारी डॉ. भास्कर यादव खुद ड्यूटी से नदारद हैं तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर की स्वास्थ्य व्यवस्था की देखभाल कौन करेगा । प्रभारी के गायब रहने से सीएचसी के अंतर्गत अधिकांश आयुष्मान आरोग्य मंदिरों/उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर ताला लटक रहा है</div><div>    सूत्रों के अनुसार अधीक्षक डॉ. भास्कर यादव सीएचसी पर कभी रात्रि विश्राम नहीं करते है रात्रि में अधीक्षक के न रहने से ओपीडी व इमरजेंसी सेवा भगवान भरोसे चल रही है । जब अधीक्षक ही ड्यूटी से गायब रहेंगे तो लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई कौन करेगा? </div><div>डॉ. भास्कर यादव की मनमानी से सीएचसी गौर की स्थिति बदहाल हो गई है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।</div><div>   प्रभारी डा०भास्कर यादव स्वयं ड्यूटी से गायब होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गौर की दयनीय स्थिति को सुधारने में पूरी तरह फेल हैं और अधिकांश कर्मचारी मनचाहा ड्यूटी कर रहे हैं एवं ड्यूटी के दौरान कमरे में आराम फरमा रहे हैं ।</div><div><br /></div><div> आखिर कब ? स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदार कुंभकर्णी नियर से जगेंगे और कैसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर की अव्यवस्था दूर होगी ? जिसको लेकर पूरे जिले में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं । मीडिया टीम ने कई महीनो से लगातार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर का पड़ताल किया लेकिन कभी भी सीएचसी प्रभारी डा० भास्कर यादव के कमरे का ताला खुला नहीं मिला अर्थात हमेशा प्रभारी के कमरे में ताला लटकता रहता है । उक्त प्रकरण फोन के माध्यम से जानकारी लेना चाहा तो प्रभारी ने मीडिया के फोन को रिसीव नहीं किया और न ही बाद में एक ही बार कॉल बैक किया ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 18:52:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> जीवन की कीमत पर मौत की अठखेलियाँ </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
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<div style="text-align:justify;">सिर्फ पंद्रह दिन के अन्तराल पर जल पर्यटन के दौरान खुशिया मना रहे बेगुनाह पर्यटकों के मौत के आगोश में समाने की दूसरी वारदात सामने आई है इससे पहले 10 अप्रैल को यूपी के वृंदावन में एक नाव पलटने से सोलह धार्मिक पर्यटको की नदी में डूबकर मौत हुई। पंजाब के लुधियाना और मुक्तेश्वर से श्रद्धालुओं का दल मथुरा वृंदावन के दर्शन करने के लिए पहुंचा था. 10 अप्रैल को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर निधिवन घूमने के बाद श्रद्धालु यमुना नदी में सैर करने की इच्छा जताई. 37 श्रद्धालु दो नाव में केसी घाट से घूमने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178077/hj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div style="text-align:justify;">सिर्फ पंद्रह दिन के अन्तराल पर जल पर्यटन के दौरान खुशिया मना रहे बेगुनाह पर्यटकों के मौत के आगोश में समाने की दूसरी वारदात सामने आई है इससे पहले 10 अप्रैल को यूपी के वृंदावन में एक नाव पलटने से सोलह धार्मिक पर्यटको की नदी में डूबकर मौत हुई। पंजाब के लुधियाना और मुक्तेश्वर से श्रद्धालुओं का दल मथुरा वृंदावन के दर्शन करने के लिए पहुंचा था. 10 अप्रैल को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर निधिवन घूमने के बाद श्रद्धालु यमुना नदी में सैर करने की इच्छा जताई. 37 श्रद्धालु दो नाव में केसी घाट से घूमने के लिए निकले थे.तभी स्टीमर पलट गया और सोलह लोगों की मौत हो गई। इस हादसे से कोई सबक नहीं लिया गया और ठीक बीस दिन के अंतराल के बाद </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में बरगी डैम के पास हुआ क्रूज नाब हादसा केवल एक दुःखद दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी पर्यटन व्यवस्था, सुरक्षा संस्कृति और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली त्रासदी है। एक सुखद सैर के लिए निकले लोग कुछ ही मिनटों में मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष करने लगे। नौ लोगों की मौत, कई लोगों का लापता होना और रेस्क्यू के दौरान सामने आई मां-बेटे की वह हृदयविदारक तस्वीर, जिसमें मौत के बाद भी मां अपने मासूम बच्चे को सीने से लगाए रही, किसी भी संवेदनशील समाज को भीतर तक झकझोर देने के लिए पर्याप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह दृश्य केबल मातृत्व की अमर करुणा का प्रतीक नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता का मौन अभियोग भी है। बरगी डैम लंबे समय से पर्यटन का आकर्षण रहा है। वर्ष 2006 से यहां क्रूज सेवा संचालित हो रही थी और इसे सुरक्षित माना जाता था। लेकिन किसी सेवा का लंबे समय तक चलना उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं हो सकता। सुरक्षा कोई दिखावटी व्यवस्था नहीं, बल्कि लगातार सतर्कता, प्रशिक्षण, उपकरणों की तैयारी और मौसम संबंधी चेतावनियों के पालन से जुड़ी जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस हादसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब मौसम विभाग ने एक दिन पहले 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाओं की चेतावनी दी थी, तब क्रूज संचालन की अनुमति क्यों दी गई? क्या पर्यटन से होने वाली  आय यात्रियों की जान से अधिक महत्वपूर्ण हो गई थी? घटना के समय क्रूज में लगभग 40 यात्री सवार थे, जबकि उसकी क्षमता करीब 90 लोगों की बताई गई। पहली नजर में यह लग सकता है कि क्षमता से कम यात्री होने के कारण जोखिम कम होना चाहिए था, लेकिन नाव या क्रूज की सुरक्षा केवल यात्रियों की संख्या से तय नहीं होती। मौसम, हवा की गति, पानी की स्थिति, यात्रियों की आवाजाही, संतुलन और आपातकालीन तैयारी, ये सभी कारक समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। जब तेज तूफान आया और यात्री ऊपर वाले डेक पर चले गए, तब वजन का संतुलन बिगड़ना स्वाभाविक था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घबराहट में लोगों का एक तरफ से दूसरी तरफ भागना स्थिति को और खतरनाक बना गया। लेकिन यही तो वह स्थिति थी जिसके लिए क्रूज प्रबंधन को पहले से तैयार होना चाहिए था। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि हादसे के समय लाइफ जैकेट यात्रियों के शरीर पर नहीं, बल्कि सीलबंद पन्नियों में बंद थीं। यह दृश्य सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविकता को उजागर करता है। लाइफ जैकेट कोई सजावटी वस्तु नहीं है जिसे आपातकाल आने पर पैकेट से निकाला जाए। ऐसे जल परिवहन में यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले ही लाइफ जैकेट पहनाना अनिवार्य होना चाहिए। यदि क्रूज के कर्मचारी हादसे के समय सीलबंद पैकेट फाड़कर जैकेट निकाल रहे थे, तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की खुली अवहेलना है। जब तक उपकरण उपयोग योग्य स्थिति में यात्रियों तक नहीं पहुंचते, तब तक उनका होना भी न होने के बराबर है। चश्मदीदों के अनुसार, करीब आधे घंटे तक लोग पानी और मौत से लड़ते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह आधा घंटा उन परिवारों के लिए जीवन का सबसे भयावह समय रहा होगा। किसी ने सीट पकड़ी होगी, किसी ने अपने बच्चे को बचाने की कोशिश की होगी, कोई मदद के लिए चीखा होगा, कोई प्रार्थना कर रहा होगा। लेकिन ऐसी स्थिति में सामान्य यात्री क्या कर सकता है? उसका जीवन पूरी तरह उन लोगों पर निर्भर होता है जिन पर संचालन, सुरक्षा और बचाव की जिम्मेदारी होती है। यदि वे प्रशिक्षित न हों, यदि सुरक्षा अभ्यास नियमित न हो, यदि आपातकालीन योजना केवल कागज पर हो, तो दुर्घटना के समय पूरी व्यवस्था बिखर जाती है। हादसे के बाद प्रशासन ने कुछ कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कीं, कुछ अधिकारियों को निलंचित किया और उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की। यह कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इतनी कार्रवाई पर्यास है? हर बड़े हादसे के बाद जांच समितियां बनती हैं, निलंबन होते हैं, बयान जारी होते हैं और भविष्य में सख्त नियम बनाने की घोषणा की जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन कुछ समय बाद वही डिलाई, वही लापरवाही और वहीं भूल फिर किसी दूसरी जगह नए हादसे का कारण बन जाती है। देश में अनेक दुर्घटनाओं का इतिहास बताता है कि हमारी समस्या नियमों की कमी से अधिक, नियमों के पालन की कमी है। पर्यटन विभाग द्वारा क्रूज संचालन के लिए नए और सख्त नियम तैयार करने की घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन यह घोषणा तभी सार्थक होगी जब इसे जमीन पर ईमानदारी से लागू किया जाए। हर जल पर्यटन सेवा में मौसम संबंधी चेतावनी के आधार पर संचालन रोकने का स्पष्ट नियम होना चाहिए। क्रूज या नाव में सवार होने से पहले प्रत्येक यात्री के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य होनी चाहिए। यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले दो मिनट का सुरक्षा निर्देश दिया जाना चाहिए। क्रूज स्टाफ को नियमित प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल से गुजरना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हर यात्रा से पहले सुरक्षा उपकरणों की जांच होनी चाहिए और उसका रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए। केवल टिकट बेचकर यात्रियों को पानी में भेज देना पर्यटन नहीं, गैरजिम्मेदारी है। इस हादसे ने यह भी दिखाया कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा को अक्सर औपचारिकता समझ लिया जाता है। चमकदार रिसॉर्ट, सुंदर टिकट काउंटर, आकर्षक प्रचार और मनोरंजन सुविधाएं तो बना दी जाती हैं, लेकिन सबसे जरूरी व्यवस्था मानव जीवन की सुरक्षा पीछे छूट जाती है। जब तक सुरक्षा को खर्च नहीं, निवेश माना जाएगा, तब तक ऐसे हादसों को रोका नहीं जा सकेगा। पर्यटन की सफलता केवल पर्यटकों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षित वापसी से मापी जानी चाहिए। बरगी हादसा हमें यह याद दिलाता है कि लापरवाही कभी छोटी नहीं होती। बह धीरे-धीरे जमा होती है और एक दिन त्रासदी बनकर सामने आती है। मौसम चेतावनी को नजरअंदाज करना, यात्रियों को बिना लाइफ जैकेट यात्रा कराना, आपातकालीन तैयारी की कमी, प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव और निगरानी की ढिलाई, ये सब मिलकर मौत का कारण बने। इसलिए जिम्मेदारी केवल एक पायलट, हेल्पर या टिकट प्रभारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए। अब जरूरी है कि इस हादसे को केवल शोक और मुआवजे तक सीमित न किया जाए। मृतकों के परिवारों को न्याय, घायलों को सहायता और लापता लोगों के परिजनों को हर संभव सहयोग मिलना चाहिए। साथ ही, ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिसमें किसी भी पर्यटन सेवा को मौसम चेतावनी, सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ के बिना संचालन की अनुमति न मिले। बरगी डैम की त्रासदी से यदि व्यवस्था ने सचमुच सबक नहीं लिया, तो यह उन नौ मृतकों की स्मृति के साथ भी अन्याय होगा। यह हादसा एक चेतावनी है, पर्यटन आनंद दे सकता है, लेकिन सुरक्षा के बिना वही आनंद मृत्यु का सफर बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बरगी की डूबी हुई नाव केवल पानी में नहीं डूबी; उसके साथ व्यवस्था की लापरवाही, सुरक्षा की खोखली तैयारी और जवाबदेही को कमी भी उजागर हो गई। अब जरूरत है कि यह हादसा केवल खबर बनकर न रह जाए, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव की शुरुआत बने।यदि इन हादसों से सरकारों ने कोई सबक नही लिया तो यह सिलसिला खत्म नही होगा क्या पर्यटक जान की कीमत पर मौत के साए में पर्यटन की अठखेलियाँ कर जान गंवाते रहेंगे? (लेखक राष्ट्रवादी चिंतक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) सम्पर्क 9219179431</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:32:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जर्जर तारों से हो रही विद्युत आपूर्ति, हो सकता है बड़ा हादसा</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>महराजगंज। <em><span style="color:rgb(186,55,42);">(मनोज पाण्डेय)</span></em></strong> ठूठीबारी विद्युत उपकेंद्र अंतर्गत परसामलिक फीडर क्षेत्र के ग्राम पंचायत सेवतरी में विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते जर्जर तार कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। फिर भी विद्युत विभाग इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दे रहा है। विद्युत तार इस प्रकार से जर्जर हैं कि उसे जगह-जगह बांसों के सहारे बांधा गया है। मर्यादपुर निवासी लाइनमैन छोटू के रहमो-करम पर गांव का विद्युत सप्लाई चल रहा है।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-07/screenshot_20240720_183407_gallery.jpg" alt="Screenshot_20240720_183407_Gallery" width="1053" height="654" /></div>
<div>गांव में तार इतने जर्जर हैं कि प्रतिदिन टूटते हैं, जिससे आपूर्ति घंटों बाधित होती है। दूसरी ओर बिजली तार लगभग दो दशक पुराने हैं जिन्हें</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143391/electricity-supply-due-to-dilapidated-wires-can-lead-to-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/screenshot_20240720_183407_gallery.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>महराजगंज। <em><span style="color:rgb(186,55,42);">(मनोज पाण्डेय)</span></em></strong> ठूठीबारी विद्युत उपकेंद्र अंतर्गत परसामलिक फीडर क्षेत्र के ग्राम पंचायत सेवतरी में विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते जर्जर तार कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। फिर भी विद्युत विभाग इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दे रहा है। विद्युत तार इस प्रकार से जर्जर हैं कि उसे जगह-जगह बांसों के सहारे बांधा गया है। मर्यादपुर निवासी लाइनमैन छोटू के रहमो-करम पर गांव का विद्युत सप्लाई चल रहा है।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-07/screenshot_20240720_183407_gallery.jpg" alt="Screenshot_20240720_183407_Gallery" width="1053" height="654"></img></div>
<div>गांव में तार इतने जर्जर हैं कि प्रतिदिन टूटते हैं, जिससे आपूर्ति घंटों बाधित होती है। दूसरी ओर बिजली तार लगभग दो दशक पुराने हैं जिन्हें जगह-जगह जोड़ा गया है। गांव में जर्जर विद्युत लाइन झूलती हुई दिखती है। जरा सी हवा चलने पर आपस में तार सट जाते हैं। ऐसे में जब तारों में चिगारी छूटती है तो ग्रामीण सिहर उठते हैं। विद्युत तार इतने जर्जर व नीचे हैं कि आए दिन टूटकर जमीन पर गिरते रहते हैं। आए दिन फाल्ट होने से उपभोक्ताओं को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</div>
<div> </div>
<div>उपभोक्ता ग्राम प्रधान प्रतिनिधि जीत बहादुर उर्फ भोला यादव, लालबहादुर यादव, राजकुमार अग्रहरी, मोहन अग्रहरी, शिवपूजन अग्रहरी, जनार्दन मौर्य, बेचन गुप्ता, जितेन्द्र , नरसिंह अग्रहरी, जगदीश यादव, भोला यादव, निजामुद्दीन, जंगी अग्रहरि, सुरेश अग्रहरी, दीपचंद, अखिलेश यादव आदि ने कहा कि गांव में जर्जर व ढीले तार से वैकल्पिक रूप से विद्युत सप्लाई दी जा रही है जो हादसे का सबब बन सकता है। उक्त लोगों ने बताया कि कई बार इन जर्जर तारों को बदलने की मांग की गई है पर किसी ने भी कोई सुध नहीं ली है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jul 2024 18:36:54 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही की भेंट चढ़ा बिजली विभाग का संविदा कर्मचारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रूद्रपुर, देवरिया।</strong> देवरिया जिले में सोमवार को एक संविदा बिजली कर्मचारी लापरवाही की भेंट चढ़ गया। जब वह 11 हजार की एचटी लाइन पर जम्पर जोड़ने के लिए चढ़ा हुआ था। उसी समय अचानक विद्युत आपूर्ति चालू हो गई और वह बुरी तरह झुलस कर नीचे गिर गया। जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील अंतर्गत पचलड़ी सबस्टेशन से एकौना थाना क्षेत्र के डढ़िया निवासी राजू उम्र 27 वर्ष पुत्र नेबूलाल संविदा पर कार्यरत था। सोमवार को लगभग 10 बजे वह 11 हजार की एचटी लाइन पर चढ़कर जम्पर जोड़</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136802/electricity-departments-contract-employee-becomes-victim-of-negligence"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/img-20231106-wa0004.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रूद्रपुर, देवरिया।</strong> देवरिया जिले में सोमवार को एक संविदा बिजली कर्मचारी लापरवाही की भेंट चढ़ गया। जब वह 11 हजार की एचटी लाइन पर जम्पर जोड़ने के लिए चढ़ा हुआ था। उसी समय अचानक विद्युत आपूर्ति चालू हो गई और वह बुरी तरह झुलस कर नीचे गिर गया। जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील अंतर्गत पचलड़ी सबस्टेशन से एकौना थाना क्षेत्र के डढ़िया निवासी राजू उम्र 27 वर्ष पुत्र नेबूलाल संविदा पर कार्यरत था। सोमवार को लगभग 10 बजे वह 11 हजार की एचटी लाइन पर चढ़कर जम्पर जोड़ रहा था। इसी दौरान अचानक विद्युत आपूर्ति चालू हो गई और वह बुरी तरह से झुलस गया। सूत्रों की माने तो जिस फीडर से जुड़े जम्पर को राजू जोड़ रहा था। वह काफी दिनों से खराब चल रहा था। जिसके लिए बिजली कर्मचारियों ने बार-बार जेई व एसडीओ को सूचित किया था। बावजूद इसके उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। आखिर विद्युत आपूर्ति किन परिस्थितियों में चालू हुई, जिससे लाइनमैन काल के गाल में समा गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची एकौना पुलिस ने आनन-फानन में शव को पीएम के लिए भिजवा दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके घटनास्थल पर पहुंचने से पहले शव को हटवा दिया। लाइनमैन राजू की मौत से जहां एक तरफ घर में मातम छाया हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ उपकेंद्र से जुड़े कर्मचारियों में खौफ समाया हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Nov 2023 17:35:01 +0530</pubDate>
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                <title>आरसीसी रोड़ में नाली निर्माण कार्य बरती जा रही लापरवाही</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात -</strong></div>
<div>  </div>
<div>मसौली बाराबंकी। हाइवे से ग्राम पंचायत दादरा के अंदर जाने वाली पक्की सड़क पर होने वाले जलभराव को खत्म करने के लिए लोकनिर्माण विभाग द्वारा बनवाई जा रही आरसीसी रोड़ में नाली निर्माण कार्य बरती जा रही लापरवाही लोगो के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। तेज हवा के साथ उड़ती धूल से राहगीर एव दुकानदार परेशान है।</div>
<div>  </div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-04/img-20230413-wa0058.jpg" alt="IMG-20230413-WA0058" /></div>
<div>  </div>
<div>      बताते चलें कि लखनऊ अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग से ग्राम पंचायत दादरा को जाने वाली पक्की सड़क पर थोड़ी सी बारिश में जलभराव हो जाता हैं जिससे लोगो को कई कई दिन तक गंदे पानी से निकलना पड़ता</div>
<div> </div>
<div>जलनिकासी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/128838/drain-construction-work-is-being-done-carelessly-in-rcc-road"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-04/img-20230413-wa0059.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात -</strong></div>
<div> </div>
<div>मसौली बाराबंकी। हाइवे से ग्राम पंचायत दादरा के अंदर जाने वाली पक्की सड़क पर होने वाले जलभराव को खत्म करने के लिए लोकनिर्माण विभाग द्वारा बनवाई जा रही आरसीसी रोड़ में नाली निर्माण कार्य बरती जा रही लापरवाही लोगो के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। तेज हवा के साथ उड़ती धूल से राहगीर एव दुकानदार परेशान है।</div>
<div> </div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-04/img-20230413-wa0058.jpg" alt="IMG-20230413-WA0058"></img></div>
<div> </div>
<div>   बताते चलें कि लखनऊ अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग से ग्राम पंचायत दादरा को जाने वाली पक्की सड़क पर थोड़ी सी बारिश में जलभराव हो जाता हैं जिससे लोगो को कई कई दिन तक गंदे पानी से निकलना पड़ता है और डामर सड़क क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। लोकनिर्माण विभाग ने ग्रमीणों को जलभराव से निजात दिलाने के लिए हाइवे से ग्राम पंचायत के अंदर तक आरसीसी सड़क एव जलनिकासी के लिए नाली का निर्माण करा रही है। लाखो रुपये के हुए टेंडर के बाद ठेकेदार द्वारा बरती जा रही अनियमिता लोगो के लिए भारी साबित हो रही हैं। आरसीसी सड़क निर्माण में ठेकेदार की मनमानी के कारण पत्थर के बजाय ईंट की गिट्टी डालकर निर्माण कार्य किया गया है। वही नाली को सीधी न बनाकर टेढ़ी बना दी गयी हैं।</div>
<div> </div>
<div>जलनिकासी के लिए नाली खोदकर मिट्टी को मेन सड़क मार्ग में डालकर छोड़ दिया गया है और नाली का निर्माण भी कर दिया गया है लेकिन मिट्टी  को सड़क पर ही छोड़ दिया गया जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि  मिट्टी को नहीं हटाने से वाहन फंस रहे हैं। तथा कई दुपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो गए व कई वाहन इसमें अब तक फंस चुके हैं। तथा हवा चलने पर धूल दुकानों में भरती है जिससे बिक्री के लिए रखी सामग्री खराब हो रही हैं। ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से सड़क मार्ग से मिट्टी व कचरे को हटाने की मांग की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Apr 2023 21:03:47 +0530</pubDate>
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