<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/37656/global-politics" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>global politics - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/37656/rss</link>
                <description>global politics RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका ने हिंद महासागर में पनडुब्बी से ईरान के युद्धपोत पर हमला किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">ईरान के इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर लगातार तेज होते हमलों के बीच अमेरिका ने हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत को पनडुब्बी से हमला कर डुबो दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद श्रीलंकाई नौसेना ने बचाव अभियान चलाया, जिसमें श्रीलंका के दक्षिणी तट पर डूब रहे ईरान के नौसैनिक जहाज से 32 लोगों को बचा लिया गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके साथ ही श्रीलंकाई नौसेना को समुद्र में डूबे ईरानी युद्धपोत से 87 लोगों के शव भी बरामद हुए। बताया जा रहा है कि ईरानी जहाज भारत द्वारा आयोजित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172570/america-attacked-irans-warship-with-a-submarine-in-the-indian"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/94uo77c8_torpedo-attack-on-iraninn-warship-by-us-navy-in-indian-ocean-_625x300_04_march_26.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान के इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर लगातार तेज होते हमलों के बीच अमेरिका ने हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत को पनडुब्बी से हमला कर डुबो दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद श्रीलंकाई नौसेना ने बचाव अभियान चलाया, जिसमें श्रीलंका के दक्षिणी तट पर डूब रहे ईरान के नौसैनिक जहाज से 32 लोगों को बचा लिया गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके साथ ही श्रीलंकाई नौसेना को समुद्र में डूबे ईरानी युद्धपोत से 87 लोगों के शव भी बरामद हुए। बताया जा रहा है कि ईरानी जहाज भारत द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू से वापस लौट रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना को लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि अमेरिकी पनडुब्बी से दागे गए एक टॉरपीडो ने हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया है। हेगसेथ ने पेंटागन में बुधवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मंगलवार रात ईरानी युद्धपोत पर किया गया यह हमला द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद किसी दुश्मन पर इस प्रकार का पहला हमला था।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरानी युद्धपोत पर हमले का वीडियो भी जारी किया। वीडियो में पनडुब्बी से दूर समुद्र में एक युद्धपोत पर निशाना लगाते और फिर उसपर टॉरपीडो से हमला करते हुए देखा जा सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दावा किया कि एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया गया, जिसे लगा कि वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस ने भारत के पड़ोस में अमेरिका की इस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि भारत के अतिथि– IRIS डेना, एक ईरानी नौसैनिक जहाज– को भारत के सामरिक आंगन में अमेरिका द्वारा टॉरपीडो से उड़ा दिया गया, जबकि वह भारत द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू से घर लौट रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">बचाव अभियान का नेतृत्व कर रहे श्रीलंका का दावा है कि इसमें कम से कम 80 नाविक मारे गए हैं, जबकि लगभग सौ अन्य गंभीर रूप से घायल हैं या अभी भी लापता हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172570/america-attacked-irans-warship-with-a-submarine-in-the-indian</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/172570/america-attacked-irans-warship-with-a-submarine-in-the-indian</guid>
                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 22:37:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/94uo77c8_torpedo-attack-on-iraninn-warship-by-us-navy-in-indian-ocean-_625x300_04_march_26.webp"                         length="8832"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-इस्राइल का साथ दिया तो माना जाएगा युद्ध की कार्रवाई, ईरान ने यूरोप को दी कड़ी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने यूरोपीय देशों को सीधी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि अगर यूरोप ने अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान में किसी भी रूप में भाग लिया, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई लगातार बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘डिफेंसिव एक्शन’ के नाम पर भी अगर कोई देश अमेरिका-इस्राइल अभियान में शामिल होता है, तो उसे आक्रामकता माना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172564/if-america-supports-israel-it-will-be-considered-an-act"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/download1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने यूरोपीय देशों को सीधी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि अगर यूरोप ने अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान में किसी भी रूप में भाग लिया, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई लगातार बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘डिफेंसिव एक्शन’ के नाम पर भी अगर कोई देश अमेरिका-इस्राइल अभियान में शामिल होता है, तो उसे आक्रामकता माना जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह प्रतिक्रिया जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को खत्म करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं। ईरान ने इसे सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने की तैयारी बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि वे सीधे युद्ध में शामिल नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है। यूरोपीय संघ ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन ने अमेरिकी बलों को अपने बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा है कि यदि सहयोगी देश मदद मांगते हैं, तो फ्रांस उनकी रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि फ्रांस अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">फ्रांस ने बताया कि प्रभावित देशों में लगभग चार लाख फ्रांसीसी नागरिक मौजूद हैं। हालात बिगड़ने पर उन्हें वाणिज्यिक और सैन्य उड़ानों के जरिए निकाला जा सकता है। इसी बीच क्षेत्र में हमलों का सिलसिला जारी है और रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले से तनाव और बढ़ गया है। ईरान का कहना है कि वह किसी भी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगा। यूरोप की संभावित भूमिका को लेकर आने वाले दिनों में हालात और स्पष्ट हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172564/if-america-supports-israel-it-will-be-considered-an-act</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/172564/if-america-supports-israel-it-will-be-considered-an-act</guid>
                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 22:28:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/download1.jpg"                         length="7382"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत–चीन-अमेरिकी संबंध, परिस्थिति-जन्य वैश्विक कुटनीति का नया दौर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>  </strong>भारत और चीन के रिश्ते कितने दूरगामी हैं, यह प्रश्न आज एशिया ही नहीं पूरी वैश्विक राजनीति की धुरी बन चुका है। चीन से दोस्ती भारत के लिए कोई नई बात नहीं है; यह इतिहास की धारा में कई उतार-चढ़ावों से होकर गुज़री है। 1954 में नेहरू और झोऊ एनलाई के बीच “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का नारा उभरा था, जब भारत 1947 में और चीन 1949 में स्वतंत्र राष्ट्र बने थे। दोनों देशों ने उभरती शीतयुद्ध राजनीति में तटस्थता और एशियाई एकता का सपना देखा था, किंतु 1962 के भारत-चीन युद्ध ने इस सपने को अफसाना बना दिया और विश्वास की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161261/india-china-us-relations-a-new-era-of-situational-global-diplomacy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(1)7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> </strong>भारत और चीन के रिश्ते कितने दूरगामी हैं, यह प्रश्न आज एशिया ही नहीं पूरी वैश्विक राजनीति की धुरी बन चुका है। चीन से दोस्ती भारत के लिए कोई नई बात नहीं है; यह इतिहास की धारा में कई उतार-चढ़ावों से होकर गुज़री है। 1954 में नेहरू और झोऊ एनलाई के बीच “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का नारा उभरा था, जब भारत 1947 में और चीन 1949 में स्वतंत्र राष्ट्र बने थे। दोनों देशों ने उभरती शीतयुद्ध राजनीति में तटस्थता और एशियाई एकता का सपना देखा था, किंतु 1962 के भारत-चीन युद्ध ने इस सपने को अफसाना बना दिया और विश्वास की दीवारें इतनी ऊँची खड़ी हुईं कि उसकी गूँज आज भी सीमा के पहाड़ों तक सुनाई देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">1962 के बाद चीन ने लद्दाख और हिमाचल के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण बढ़ाया, अक्साई चिन पर कब्ज़ा किया, और गलवान से डोकलाम तक हर दशक में कभी खुली तो कभी निहित झड़पें होती रहीं। अप्रैल 2020 के बाद एल ए सी पर चीन की आक्रामक तैनाती ने भारत को अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ क्वाड साझेदारी मज़बूत करने की ओर धकेला, और यही अमेरिकी असहजता का मूल भी है—क्योंकि वाशिंगटन चाहता है कि भारत उसका पूर्ण सामरिक मित्र बने, परंतु भारत अपनी स्वायत्त विदेश नीति छोड़ने को तैयार नहीं है।<br /><br />सितंबर 2025 में शंघाई सहयोग संगठन  की 25वीं बैठक ने अचानक एशिया की राजनीति में नया मोड़ ला दिया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात लंबी खाई को पाटने की कोशिशों से भर उठी। दोनों देशों ने सामरिक तनाव कम कर व्यापार, पर्यटन, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी और ऊर्जा गलियारों में सहयोग बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की। चीन को भी अहसास है कि अमेरिका की टैरिफ नीति और निर्यात प्रतिबंधों ने उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है और भारत एक विशाल बाज़ार के रूप में उसके लिए रणनीतिक राहत बन सकता है। दूसरी ओर भारत समझता है कि चीन से टकराव स्थायी समाधान नहीं है, क्योंकि सीमा विवाद के बावजूद 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार 136 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है, और आर्थिक वास्तविकता दोनों को एक-दूसरे से जोड़े बिना नहीं रख सकती।<br /><br />उधर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हालिया महीनों में बढ़ती निकटता ने एशिया में शक्ति संतुलन को नई दिशा दे दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से हुई बैठकों ने दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को पुनर्जीवित कर दिया है। पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी रक्षा उपकरण खरीदने की नई योजनाएँ और वाशिंगटन द्वारा पाकिस्तान को ‘क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोगी’ का दर्जा देने से भारत की सुरक्षा चिंताएँ बढ़ना स्वाभाविक है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह वही अमेरिका है जिसने 1999 के कारगिल युद्ध और 1971 के बांग्लादेश युद्ध में पाकिस्तान की हिफ़ाज़त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, इसलिए भारत जानता है कि शक्ति संतुलन का कोई भी समीकरण स्थायी नहीं होता। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका पाकिस्तान का इस्तेमाल चीन और रूस के विरुद्ध अपनी पश्चिमी एशिया रणनीति के हिस्से के रूप में करेगा, और भारत-अमेरिका मित्रता भी केवल साझा हितों पर आधारित है, स्थायी भावनाओं पर नहीं।<br /><br />भारतीय दृष्टिकोण से, आज की कूटनीति का सच यह है कि जितना अविश्वसनीय अमेरिका है, उतना ही अविश्वसनीय चीन भी। दोनों देशों का इतिहास भारत के प्रति अवसरवादी रहा है। यही कारण है कि भारत की विदेश नीति ‘बहुध्रुवीयता’ और ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर आधारित है—जहाँ भारत न तो चीन के ब्लॉक में पूरी तरह शामिल होगा, न अमेरिका के प्रभाव में आएगा। एससीओ  सम्मेलन में में भारत-चीन की नज़दीकी और ब्रिक्स -प्लस ढांचे में नए आर्थिक सहयोग की संभावनाएँ यह संकेत देती हैं कि एशिया अपनी शर्तों पर अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती देने की स्थिति बना रहा है। चीन-रूस-भारत त्रिकोण अमेरिका,नाटो  चिंताओं का मुख्य कारण है, क्योंकि यह त्रिकोण ऊर्जा, रक्षा, तकनीक, और क्षेत्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर पश्चिमी देशों के दबदबे को कम कर सकता है।<br /> </p>
<p style="text-align:justify;">चीन के लिए, भारत-अमेरिका निकटता रणनीतिक दबाव बढ़ाती है, जबकि भारत-चीन तालमेल उसे दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और इंडो-पैसिफिक में बेहतर स्थिति दे सकता है। भारत के लिए, चीन से संबंध सुधरने का अर्थ है LAC पर तनाव में कमी, व्यापार में निर्भरता नियंत्रित करना और वैश्विक महंगाई व सप्लाई-चेन संकट से बचाव। जबकि अमेरिका इस पूरे बदलते परिदृश्य को एशिया में अपने प्रभाव के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है, और यह चिंता सिर्फ सामरिक नहीं बल्कि आर्थिक भी है, क्योंकि अमेरिकी उद्योग चीन-भारत सहयोग को अपने बाज़ार हितों के विपरीत मानते हैं।<br /><br />इन बदलते समीकरणों के बीच सवाल यही है कि क्या भारत-चीन का सहयोग अमेरिका के खिलाफ प्रभावी रणनीतिक विकल्प बन सकता है? सच यह है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थायी मित्र या स्थायी शत्रु जैसा कुछ नहीं होता; केवल स्थायी हित होते हैं। भारत और चीन जब अपने हितों के आधार पर एक-दूसरे के करीब आते हैं तो यह एशिया को अधिक स्वायत्त और बहुध्रुवीय बनाता है, परंतु सीमा विवाद, ताईवान-दक्षिण चीन सागर तनाव, और चीन-पाकिस्तान गठजोड़ जैसे कारक भारत को पूरी तरह निश्चिंत नहीं होने देते। भारत की चुनौती यह है कि वह अमेरिका और चीन दोनों के साथ संतुलन बनाते हुए अपनी सामरिक स्वतंत्रता बनाए रखे।</p>
<p style="text-align:justify;">शंघाई सम्मेलन का यह नया समीकरण आने वाले वर्षों में एशिया-प्रशांत की राजनीति को पुनः परिभाषित कर सकता है। भारत और चीन जब साझा आर्थिक हितों, ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापारिक गलियारों पर साथ खड़े होते हैं, तो यह अमेरिका की टैरिफ रणनीति और एशियाई राजनीति की धुरी को भी बदल देता है। भविष्य बताएगा कि यह सहयोग स्थायी रणनीति बनता है या एक और अस्थायी कूटनीतिक अध्याय। किंतु इतना स्पष्ट है कि भारत-चीन की नई राह यदि टिकाऊ साबित होती है, तो एशिया की शक्ति संतुलन रेखाएं बदल जाएंगी और अमेरिका का प्रभाव सीमित होगा और यदि यह राह फिर बाधित होती है, तो भारत को अपनी सुरक्षा और आर्थिक नीति में नए विकल्प तलाशने होंगे। यही अंतरराष्ट्रीय संबंधों का शाश्वत सत्य है कि विश्व राजनीति में न कोई स्थाई दोस्त होता है न स्थाई दुश्मन केवल स्थाई हित होते हैं, और भारत उसी हित-नीति पर आगे बढ़ रहा है।<br /><br /><br /></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<div>
<div> </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161261/india-china-us-relations-a-new-era-of-situational-global-diplomacy</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/161261/india-china-us-relations-a-new-era-of-situational-global-diplomacy</guid>
                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 16:27:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/download-%281%297.jpg"                         length="11475"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        