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                <title>परमाणु शक्ति संपन्न भारत में कब होगी बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181062/when-will-girls-education-be-100-in-nuclear-power-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/4.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज में ऐसे कर्मचारियों का वर्ग तैयार करना था जो अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक कार्यों को संचालित कर सके। आधुनिक विज्ञान और अंग्रेजी भाषा के प्रसार में इस शिक्षा प्रणाली का योगदान रहा, किंतु इसने भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा और कौशल आधारित शिक्षण को काफी हद तक हाशिए पर पहुंचा दिया। उस समय महिलाओं की शिक्षा लगभग नगण्य थी। समाज में बाल विवाह, पर्दा प्रथा और लैंगिक असमानता जैसी कुरीतियां लड़कियों की शिक्षा में बड़ी बाधा थीं।<br />समाज सुधारकों का योगदान</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">+<br />ऐसे कठिन समय में सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिराव फुले ने बालिका शिक्षा की अलख जगाई। 1848 में उन्होंने लड़कियों के लिए पहला आधुनिक विद्यालय प्रारंभ किया।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने महिला शिक्षा और सामाजिक सुधारों को नई दिशा दी। बाद में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना।<br />डॉ. अंबेडकर का प्रसिद्ध संदेश</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।"<br />स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की साक्षरता दर लगभग 18 प्रतिशत थी। महिलाओं की साक्षरता तो 10 प्रतिशत से भी कम थी। संविधान निर्माताओं ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माना।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />समय-समय पर कोठारी आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, 1986, सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा नई शिक्षा नीति 2020 जैसे प्रयास किए गए। इन प्रयासों से शिक्षा का दायरा बढ़ा और लड़कियों की विद्यालयों तक पहुंच बेहतर हुई।.आज भारत की साक्षरता दर 77 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि महिला साक्षरता दर 70 प्रतिशत से अधिक है। यह प्रगति उत्साहजनक है, किंतु अभी भी पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता में अंतर बना हुआ है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व के सर्वाधिक शिक्षित देशों से सीख<br />विश्व में फिनलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान और नॉर्वे जैसे देशों की शिक्षा व्यवस्था विश्व में आदर्श मानी जाती है। फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />फिनलैंड में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन कौशल विकसित करना है। वहां बच्चों पर अनावश्यक परीक्षा का दबाव नहीं होता। शिक्षकों को अत्यंत सम्मान और स्वायत्तता प्राप्त है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> बालिका और बालक के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। सिंगापुर ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा साधन बनाया। वहां विज्ञान, गणित, तकनीक और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता है। शिक्षा को उद्योगों और रोजगार से जोड़ा गया है।<br />जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अनुशासन, नैतिकता, समयबद्धता और तकनीकी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। परिणामस्वरूप ये देश सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद आर्थिक महाशक्ति बन गए।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत में प्रतिभा की कोई कमी कभी भी नहीं रही है, किंतु शिक्षा व्यवस्था अभी भी परीक्षा-केंद्रित बनी हुई है। रटंत प्रणाली, विद्यालयों की असमान गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव आज भी चुनौतियां हैं।नई शिक्षा नीति 2020 ने इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षण और बहुविषयक अध्ययन पर बल दिया गया है। किंतु इसके वास्तविक लाभ तभी मिलेंगे जब इसका प्रभावी क्रियान्वयन हो। बालिका शिक्षा का सत प्रतिशत होना इसलिए भी आवश्यक है कि शिक्षित बेटी, समृद्ध परिवार</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />एक शिक्षित महिला अपने परिवार को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कार प्रदान करती है। वह अगली पीढ़ी की प्रथम शिक्षिका होती है।सामाजिक कुरीतियों का अंत भी।बाल विवाह, दहेज प्रथा, लैंगिक भेदभाव और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं को समाप्त करने में शिक्षा सबसे प्रभावी साधन है</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व बैंक सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मानना है कि महिलाओं की शिक्षा में निवेश किसी भी देश के आर्थिक विकास को तीव्र गति देता है। यदि भारत की प्रत्येक बेटी शिक्षित होगी तो देश की उत्पादकता और आर्थिक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />शिक्षित महिलाएं स्वास्थ्य, पोषण और परिवार नियोजन के प्रति अधिक जागरूक होती हैं। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।<br />आज महिलाएं विज्ञान, अंतरिक्ष, प्रशासन, राजनीति, सेना और उद्यमिता के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। शिक्षा उन्हें नेतृत्व और नवाचार की शक्ति प्रदान करती है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />महापुरुषों की दृष्टि में नारी शिक्षा<br />स्वामी विवेकानंद ने कहा</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"राष्ट्र की प्रगति का सबसे अच्छा मापदंड वहां की महिलाओं की स्थिति है।"डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का मत था कि<br />"महिलाओं का सशक्तिकरण और शिक्षा किसी राष्ट्र के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है।"पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था<br />"एक महिला को शिक्षित करना एक पीढ़ी को शिक्षित करना है।"</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />इक्कीसवीं सदी ज्ञान, विज्ञान और नवाचार की सदी है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की प्रत्येक बेटी शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगी। शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक चेतना, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय विकास का आधार है। मैकाले की शिक्षा प्रणाली से लेकर नई शिक्षा नीति तक भारत ने लंबी यात्रा तय की है, किंतु अभी मंजिल दूर है। यदि सरकार, समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थान मिलकर बालिका शिक्षा को शत-प्रतिशत अनिवार्य बनाने का संकल्प लें, तो भारत न केवल विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति बनेगा, बल्कि सबसे विकसित और ज्ञानवान राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ा होगा।<br />क्योंकि किसी राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यालयों में नहीं, बल्कि उसकी शिक्षित बेटियों की आंखों में स्वप्न बनकर पलता है।<br /><br />संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिंतक, स्तंभकार, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,<div>कविता,</div><div>संजीव-नी।<br />शिक्षा का कवच।<br /><br />शिक्षा का कवच।<br />कुछ देना ही तो आइये,<br />नन्हीं बालिकाओं को<br />स्वर्ण के गहने नहीं,<br />शिक्षा का कवच दें।<br />उनकी हथेलियों में<br />रोटी के साथ-साथ<br />कुछ अक्षर भी रख दें,<br />जो भूख से जुझतीं<br />उन्हें ज्ञान की कुंजी दें<br />अँधेरे बंद कमरों में<br />रोशन-दान बनती,<br />ज्ञान की रोशनी के लिए<br />बंद रास्तों पर<br />एक नया आकाश फैला देती,<br />उनकी आँखों में<br />सिर्फ़ स्वप्न ना रखें ,<br />उन तक पहुँचने के पंख भी दें।<br />उन्हें ज्ञान दें कि<br />अपने हिस्से की धूप<br />खुद चुन सकें।<br />किताबें जब उनके हांथों में होंगी,<br />तो सदियों के कई बोझ<br />आप उतर जाएँगे।<br />कलम उँगलियों से चलेंगीं<br />तक़दीर की कविता भी<br />लिखी जाएगी।<br />शिक्षित बालिका<br />अपना जीवन ही नहीं संवारती,<br />आने वाली पीढ़ियों के लिए<br />उजला दीप बन जाती।<br />आइये,<br />बेटी को शिक्षा का रक्षा-कवच दें,<br />ताकि वह<br />अपने सपनों, अपने अधिकारों<br />अपने अस्तित्व की रक्षा<br />स्वयं कर सके।<br /><br />संजीव ठाकुर, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:57:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्वावलंबन एवं स्व-रोजगार बेहतर विकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वयं की क्षमता, शक्ति एवं ऊर्जा को पहचानना आज के नव युवकों के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्वयं के विकास से तात्पर्य खुद के लिए अपनी क्षमता एवं योग्यता के अनुसार रोजगार की तलाश राष्ट्रीय हित में महत्वपूर्ण योगदान भी हो सकता है।भारत की विशाल आबादी के हिसाब से भारत नौजवानों का देश है और भारत सरकार के लिए इतने युवा लोगों के लिए नौकरी उपलब्ध कराना संभव भी नहीं है कि सभी युवकों के लिए समुचित नौकरी का प्रबंध या इंतजाम कर सके। ऐसे में पढ़े-लिखे नौजवानों का यह महती दायित्व बन जाता है कि वह स्वयं की क्षमता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177998/self-reliance-and-self-employment-are-better-options"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa0163.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वयं की क्षमता, शक्ति एवं ऊर्जा को पहचानना आज के नव युवकों के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्वयं के विकास से तात्पर्य खुद के लिए अपनी क्षमता एवं योग्यता के अनुसार रोजगार की तलाश राष्ट्रीय हित में महत्वपूर्ण योगदान भी हो सकता है।भारत की विशाल आबादी के हिसाब से भारत नौजवानों का देश है और भारत सरकार के लिए इतने युवा लोगों के लिए नौकरी उपलब्ध कराना संभव भी नहीं है कि सभी युवकों के लिए समुचित नौकरी का प्रबंध या इंतजाम कर सके। ऐसे में पढ़े-लिखे नौजवानों का यह महती दायित्व बन जाता है कि वह स्वयं की क्षमता को पहचान कर मेक इन इंडिया या स्वावलंबी होने का भरसक प्रयास करें। स्वयं की क्षमता को पहचानने वाला व्यक्ति समाज में एक आदर्श बनकर उभरता है और उसकी  प्रसिद्धि समाज में स्वयं हो जाती है। युवक स्वयं का रोजगार बनाकर न सिर्फ खुद की बेरोजगारी दूर करता है, बल्कि वह दूसरों के लिए भी रोजगार का साधन बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह राष्ट्रीय हित में अत्यंत आवश्यक समीचीन तथा राष्ट्रीय विकास के लिए एक अच्छे सूचक के रूप में सामने आता है। स्वयं अपनी क्षमताओं को पहचानना एवं अपने अंदर के उद्यमी को रोजगार के लिए उपयोग में लाना मनुष्य का एक तरह का अलंकार या आभूषण ही है जो मनुष्य के लिए सुखी होने का बड़ा स्रोत है। वैसे भी नौकरी करके युवा एक तरह से परतंत्र, पराधीन हो जाता है और अपनी क्षमताओं का खुलकर प्रयोग नहीं कर पाता यही कारण है कि राष्ट्र के समग्र विकास में उसकी क्षमताओं का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।राष्ट्रीय योजना मेक इन इंडिया के अंतर्गत आव्हान किया गया है कि नौजवानों को अपनी शिक्षा,तकनीकी शिक्षा एवं स्किल का उपयोग कर भारत देश के लिए हर तरह के आवश्यक वस्तुओं का स्वयं निर्माण करें एवं दूसरे नौजवानों के लिए आदर्श स्थापित करें जिससे संपूर्ण देश स्वावलंबी बने।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वयं की क्षमताओं को पहचानने वाला व्यक्ति स्वतंत्र ,स्वाभिमानी होकर स्वयं पर पूर्ण विश्वास करने वाला आत्मविश्वासी व्यक्ति होता है। ऐसे में भविष्य में राहों में जितनी भी मुश्किल है या कठिनाई आती है उसका वह अपने ज्ञान और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला करने से नहीं चूकता है। अपनी क्षमताओं को पहचानने के कारण व्यक्ति अत्यंत सरल, सहज एवं आत्मविश्वासी होकर दूसरों की मदद करने से भी पीछे नहीं हटता। स्वयं का रोजगार तलाशने या अपने लिए कोई उद्यम बनाने में युवाओं में जो ज्ञान प्राप्त होता है फल स्वरूप वह युवा अत्यंत त्यागी तथा समाज के लिए सेवा भाव भी रखने वाला होता है। स्वावलंबन से दूसरों पर निर्भर होने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती एवं अपने ही ज्ञान तथा क्षमता से वह उन्नति के सोपान चढ़ते जाता है, एवं राष्ट्र के लिए एक धरोहर की तरह होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">खुद की क्षमता पहचान कर अपना उद्यम डालने से न सिर्फ समाज में विकास होता बल्कि देश में भी विकास के योगदान में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होता है। ऐतिहासिक तौर पर भी खुद की क्षमता पहचानने एवं अपनी उर्जा को सही दिशा में लगाने के कारण बड़े-बड़े महापुरुषों का जन्म हुआ है। जितने भी बड़े महापुरुष हुए हैं, वे पैदाइशी महापुरुष नहीं थे उन्होंने अपनी क्षमता, शक्ति एवं ज्ञान को पहचान कर उसमें समुचित एवं निरंतर परिश्रम कर एक नए मुकाम को हासिल किया था और तब ही वे महापुरुषों की श्रेणी में शामिल हुए हैं। पौराणिक तौर पर प्रभु श्री राम ने वन गमन कर रावण का वध किया और एक धार्मिक इतिहास बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी क्षमताओं को पहचान कर उसे सही दिशा देने का सबसे बड़ा उदाहरण एकलव्य है जिसने जंगल में धनुर्विद्या लगातार अभ्यास करके अर्जुन की तरह बहुत बड़े धनुर्विद्या के शूरवीर बने। कोलंबस ने भी अपनी शक्ति क्षमता को पहचानते अमेरिका की खोज की और गरीब मां बाप की संतान अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने अमेरिका का सर्वोच्च पद प्राप्त किया। राइट ब्रदर्स ने अपने ज्ञान का समुचित विकास एवं उपयोग कर हवाई जहाज की खोज की। खुद की शक्ति एवं ऊर्जा के विकास और स्वावलंबन का सबसे बड़े उदाहरण महात्मा गांधी रहे जिन्होंने ना सिर्फ अपनी क्षमता को पहचाना बल्कि पूरे हिंदुस्तानियों को दिशा दिखा कर स्वतंत्रता का आह्वान कर स्वाधीनता प्राप्त की और महात्मा गांधी के रूप में भारत में स्थापित हुए। खुद की क्षमता एवं शक्ति को पहचानने से व्यक्ति भी महानता की श्रेणी में खड़ा होकर देश के विकास में एक बड़ा सोपान अर्जित करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे सिर्फ व्यक्ति ही महान नहीं बनता बल्कि देश को भी महान बनाने में उसका योगदान बहुत ज्यादा तथा महत्वपूर्ण होता है। मनुष्य अपनी क्षमताओं को वैसे तो आसानी से पहचान नहीं पाता है लेकिन यदि वह अपनी अंतर शक्ति, विशेषताओं को किसी भी उम्र में भी पहचान कर उसका देश के लिए समुचित उपयोग कर सकता है इसीलिए मेक इन इंडिया के लिए युवकों को अपनी क्षमताओं शक्ति तथा ऊर्जा को पहचान कर नए नए उद्यम लगाकर देश के विकास में सहयोग करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह एक सकारात्मक चरित्र विकास की प्रथम पंक्ति होती है। इससे मनुष्य में और खासकर युवा वर्ग में निर्भीकता,कठोर श्रम करने की शक्ति एवं संयम जैसी विशेषताओं का प्रादुर्भाव होता है। व्यक्ति समाज एवं राष्ट्र की उन्नति में चार चांद लग जाते हैं। उन्नत शिक्षित परिश्रमी एवं सदाचारी युवाओं से ही कोई राष्ट्र महानता की श्रेणी में पहुंच जाता है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर,</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 17:41:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डॉ. प्रीति अदाणी का स्वाभिमान विज़न मध्य प्रदेश पहुंचा, 1,500 महिलाओं को मिलेगा सहयोग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">डी एस त्रिपाठी की रिपोर्ट</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> बदरवास, मध्य प्रदेश (एमपी) में अब स्थायी आय की तलाश कर रही महिलाओं को कमाई और आत्मनिर्भर बनने की नई राह मिलेगी। इसी दिशा में, अदाणी समूह की सामाजिक सेवा और विकास इकाई, अदाणी फाउंडेशन ने शिवपुरी जिले के बदरवास में अदाणी विकास केंद्र शुरू किया है, जिससे महिलाओं के लिए घर के पास ही व्यवस्थित रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। अदाणी फाउंडेशन के स्वाभिमान कार्यक्रम का अखिल भारत में 10 लाख महिलाओं को सतत आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य है। इसका फोकस महिलाओं को असंगठित और अनियमित काम से निकालकर बाजार से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177396/dr-preeti-adanis-swabhiman-vision-reaches-madhya-pradesh-1500-women"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260426-wa00451.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">डी एस त्रिपाठी की रिपोर्ट</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> बदरवास, मध्य प्रदेश (एमपी) में अब स्थायी आय की तलाश कर रही महिलाओं को कमाई और आत्मनिर्भर बनने की नई राह मिलेगी। इसी दिशा में, अदाणी समूह की सामाजिक सेवा और विकास इकाई, अदाणी फाउंडेशन ने शिवपुरी जिले के बदरवास में अदाणी विकास केंद्र शुरू किया है, जिससे महिलाओं के लिए घर के पास ही व्यवस्थित रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। अदाणी फाउंडेशन के स्वाभिमान कार्यक्रम का अखिल भारत में 10 लाख महिलाओं को सतत आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य है। इसका फोकस महिलाओं को असंगठित और अनियमित काम से निकालकर बाजार से जुड़े स्थायी आय के अवसरों तक पहुँचाने पर है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">करीब 48,000 वर्ग फुट में फैला यह केंद्र अपनी पूरी क्षमता पर 600 आधुनिक सिलाई मशीनों के साथ काम करेगा और इसे ट्रेनिंग और प्रोडक्शन दोनों के लिए तैयार किया गया है। यहाँ महिलाओं को व्यावहारिक कौशल सिखाए जाएँगे और नियमित रोजगार के अवसर मिलेंगे। जैसे-जैसे यह केंद्र अपना विस्तार करेगा, लगभग 1,500 महिलाओं को स्थायी आय मिलने की उम्मीद है, जिससे वे अपने परिवारों को अधिक आत्मविश्वास के साथ सहयोग कर सकेंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस केंद्र का उद्घाटन संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) के केंद्रीय मंत्री और गुना लोकसभा क्षेत्र से सांसद  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया। इस कार्यक्रम में आसपास के गाँवों की 5,000 से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया, जो स्थानीय भागीदारी और आजीविका के अवसरों की मजबूत माँग को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर श्री सिंधिया ने कहा, “बदरवास में जो हम देख रहे हैं, वह सपनों को साकार होते देखने की ताकत है। मैं अदाणी ग्रुप के चेयरमैन  गौतम अदाणी और अदाणी फाउंडेशन को बधाई देता हूँ कि उन्होंने ऐसा मंच बनाया है, जहाँ कौशल वैश्विक बाजारों तक पहुँच सकता है। मेरी प्यारी दीदियों की आखों में उनका संकल्प स्पष्ट दिखाई देता है। उनकी उम्मीदें और सपने अब सार्थक आजीविका के जरिए साकार हो रहे हैं। यह केंद्र सशक्तिकरण का एक सच्चा इंजन है और मुझे पूरा भरोसा है कि अगले पाँच वर्षों में बदरवास के उत्पाद देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान बनाएँगे।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदाणी फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. अभिषेक लख्ताकिया ने कहा, “हमारी चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी के इस विश्वास से प्रेरित होकर कि महिलाओं का सशक्तिकरण सम्मानजनक आय से शुरू होता है, स्वाभिमान कार्यक्रम कौशल को स्थायी आय में बदलने पर काम करता है। महिलाओं को वास्तविक काम और बाजार से जोड़कर हम उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और परिवार व समाज में मजबूत भूमिका निभाने के लिए सक्षम बना रहे हैं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बदरवास में इस पहल से परिवारों की आय बढ़ने, अनौपचारिक काम पर निर्भरता घटने और पलायन की जरूरत कम होने की उम्मीद है, साथ ही स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत होगी। इन्फ्रास्ट्रक्चर, कौशल और बाजार तक पहुँच में निवेश करके अदाणी फाउंडेशन यह सुनिश्चित कर रहा है कि महिलाएँ नियमित आय कमा सकें और अपने तथा अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य बना सकें। अदाणी फाउंडेशन इस वर्ष 11 अगस्त को अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाएगा, जो भारत के कोने-कोने में समावेशी विकास के प्रति तीन दशकों की लगातार प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदाणी फाउंडेशन के बारे में जानकारी सन् 1996 से अदाणी फाउंडेशन, अदाणी ग्रुप की सामाजिक कल्याण और विकास इकाई के रूप में, अखिल भारत में स्थायी परिणामों के लिए रणनीतिक सामाजिक निवेश करता आ रहा है और लगातार सक्रिय व प्रतिबद्ध रहा है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, स्थायी आजीविका, जलवायु कार्रवाई और सामुदायिक विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और वंचित समुदायों के जीवन को सशक्त और समृद्ध बना रहा है। फाउंडेशन की रणनीतियाँ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों के साथ जुड़ी हुई हैं। वर्तमान में अदाणी फाउंडेशन 22 राज्यों के 7,247 गाँवों और शहरी वार्ड्स में काम कर रहा है और 1.33 करोड़ लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:38:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रोजगार मेले में 960 युवाओं को मिला रोजगार, ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने बांटा नियुक्ति पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री व जनपद के प्रभारी मंत्री ए.के. शर्मा ने शुक्रवार को काशी नरेश पीजी महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय विशाल रोजगार मेले का समापन करते हुए चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र और ऑफर लेटर वितरित किए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">रोजगार मेले में 83 कंपनियों ने भाग लिया, जिसमें करीब 4000 युवाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इनमें से 960 अभ्यर्थियों का विभिन्न कंपनियों में चयन हुआ। मौके पर ही ऑफर लेटर मिलने से चयनित युवाओं के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास देखने को मिला।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि ऐसे रोजगार मेले युवाओं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173235/960-youth-got-employment-in-the-employment-fair-energy-minister"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260313-wa0061-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री व जनपद के प्रभारी मंत्री ए.के. शर्मा ने शुक्रवार को काशी नरेश पीजी महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय विशाल रोजगार मेले का समापन करते हुए चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र और ऑफर लेटर वितरित किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रोजगार मेले में 83 कंपनियों ने भाग लिया, जिसमें करीब 4000 युवाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इनमें से 960 अभ्यर्थियों का विभिन्न कंपनियों में चयन हुआ। मौके पर ही ऑफर लेटर मिलने से चयनित युवाओं के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास देखने को मिला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि ऐसे रोजगार मेले युवाओं को रोजगार के अवसर देने के साथ उनके भविष्य को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने कौशल को लगातार बढ़ाने और पूरी ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मंत्री ने रोजगार मेले के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन की सराहना की। इस अवसर पर जिलाधिकारी शैलेष कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, पूर्व विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी व बड़ी संख्या में अभ्यर्थी मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 19:20:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समाजसेवी टीम पहुँची नैनी इंडस्ट्रीग ट्रेनिंग सेंटर कौशल विकास कार्यक्रम की दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी,प्रयागराज।</strong> क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाजसेवी शवागेश पांडेय एवं साधना पांडे अपनी टीम के साथ Naini Industrial Training Centre पहुँचे, जहाँ उन्होंने छात्र-छात्राओं को कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी।इस अवसर पर वागेश पांडेय ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में तकनीकी शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण युवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने छात्रों को विभिन्न ट्रेडों में उपलब्ध प्रशिक्षण, रोजगार के अवसरों और आत्मनिर्भर बनने के मार्ग के बारे में जागरूक किया।साधना पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि कौशल विकास कार्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार योग्य बनाते हैं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार के लिए भी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171819/social-worker-team-reached-naini-industry-training-center-and-gave"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260227-wa0242-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी,प्रयागराज।</strong> क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाजसेवी शवागेश पांडेय एवं साधना पांडे अपनी टीम के साथ Naini Industrial Training Centre पहुँचे, जहाँ उन्होंने छात्र-छात्राओं को कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी।इस अवसर पर वागेश पांडेय ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में तकनीकी शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण युवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने छात्रों को विभिन्न ट्रेडों में उपलब्ध प्रशिक्षण, रोजगार के अवसरों और आत्मनिर्भर बनने के मार्ग के बारे में जागरूक किया।साधना पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि कौशल विकास कार्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार योग्य बनाते हैं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित करते हैं। उन्होंने छात्राओं को विशेष रूप से तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान टीम के सदस्यों ने छात्रों के प्रश्नों का उत्तर दिया और उन्हें सरकारी एवं गैर-सरकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की। संस्थान के प्राचार्य एवं स्टाफ ने समाजसेवियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के मार्गदर्शन कार्यक्रम छात्रों के भविष्य निर्माण में सहायक सिद्ध होते हैं।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 21:53:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में जेल से रिहा होने के बाद कैदियों को मिलेगा रोजगार, शुरू हुआ वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Haryana News: <span class="cf0">हरियाणा</span> <span class="cf0">जेल</span> <span class="cf0">विभाग</span> <span class="cf0">ने</span> <span class="cf0">हरियाणा</span> <span class="cf0">कौशल</span> <span class="cf0">रोजगार</span> <span class="cf0">निगम</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf0">एचकेआरएन</span><span class="cf0">) </span><span class="cf0">के</span> <span class="cf0">साथ</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">महत्वपूर्ण</span> <span class="cf0">एमओयू</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">हस्ताक्षर</span> <span class="cf0">किए</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इस</span> <span class="cf0">समझौते</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">तहत</span> <span class="cf0">जेलों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">वोकेशनल</span> <span class="cf0">ट्रेनिंग</span> <span class="cf0">प्राप्त</span> <span class="cf0">करने</span> <span class="cf0">वाले</span> <span class="cf0">कैदियों</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">एचकेआरएन</span> <span class="cf0">पोर्टल</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">रजिस्टर</span> <span class="cf0">किया</span> <span class="cf0">जाएगा</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">ताकि</span> <span class="cf0">जेल</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">रिहा</span> <span class="cf0">होने</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बाद</span> <span class="cf0">उन्हें</span> <span class="cf0">रोजगार</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">अवसर</span> <span class="cf0">मिल</span> <span class="cf0">सकें</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">वे</span> <span class="cf0">आत्मनिर्भर</span> <span class="cf0">बन</span> <span class="cf0">सकें</span><span class="cf0">।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">पांच</span> <span class="cf0">जेलों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">शुरू</span><span class="cf0"> होंगे कोर्स</span></strong></p>
<p><span class="cf0">जेल विभाग के </span><span class="cf0">महानिदेशक</span><span class="cf0"> आलोक राय ने प्रेस </span><span class="cf0">कॉन्फ्रेंस</span><span class="cf0"> में बताया कि हरियाणा की </span><span class="cf0">गुरुग्राम</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">अंबाला</span><span class="cf0">, करनाल, </span><span class="cf0">पानीपत</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">फरीदाबाद</span><span class="cf0"> जेलों में </span><span class="cf0">वोकेशनल</span><span class="cf0"> ट्रेनिंग के साथ-साथ </span><span class="cf0">आईटीआई</span><span class="cf0"> कोर्स भी शुरू</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160915/haryana-prisoners-will-get-employment-after-being-released-from-jail"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/haryana-news---2025-11-20t124409.632.jpg" alt=""></a><br /><p>Haryana News: <span class="cf0">हरियाणा</span> <span class="cf0">जेल</span> <span class="cf0">विभाग</span> <span class="cf0">ने</span> <span class="cf0">हरियाणा</span> <span class="cf0">कौशल</span> <span class="cf0">रोजगार</span> <span class="cf0">निगम</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf0">एचकेआरएन</span><span class="cf0">) </span><span class="cf0">के</span> <span class="cf0">साथ</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">महत्वपूर्ण</span> <span class="cf0">एमओयू</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">हस्ताक्षर</span> <span class="cf0">किए</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इस</span> <span class="cf0">समझौते</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">तहत</span> <span class="cf0">जेलों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">वोकेशनल</span> <span class="cf0">ट्रेनिंग</span> <span class="cf0">प्राप्त</span> <span class="cf0">करने</span> <span class="cf0">वाले</span> <span class="cf0">कैदियों</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">एचकेआरएन</span> <span class="cf0">पोर्टल</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">रजिस्टर</span> <span class="cf0">किया</span> <span class="cf0">जाएगा</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">ताकि</span> <span class="cf0">जेल</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">रिहा</span> <span class="cf0">होने</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बाद</span> <span class="cf0">उन्हें</span> <span class="cf0">रोजगार</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">अवसर</span> <span class="cf0">मिल</span> <span class="cf0">सकें</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">वे</span> <span class="cf0">आत्मनिर्भर</span> <span class="cf0">बन</span> <span class="cf0">सकें</span><span class="cf0">।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">पांच</span> <span class="cf0">जेलों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">शुरू</span><span class="cf0"> होंगे कोर्स</span></strong></p>
<p><span class="cf0">जेल विभाग के </span><span class="cf0">महानिदेशक</span><span class="cf0"> आलोक राय ने प्रेस </span><span class="cf0">कॉन्फ्रेंस</span><span class="cf0"> में बताया कि हरियाणा की </span><span class="cf0">गुरुग्राम</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">अंबाला</span><span class="cf0">, करनाल, </span><span class="cf0">पानीपत</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">फरीदाबाद</span><span class="cf0"> जेलों में </span><span class="cf0">वोकेशनल</span><span class="cf0"> ट्रेनिंग के साथ-साथ </span><span class="cf0">आईटीआई</span><span class="cf0"> कोर्स भी शुरू किए जा रहे हैं। सभी जेलों में कक्षाओं के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवा दिए गए हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">इस </span><span class="cf0">एमओयू</span> <span class="cf0">पर</span><span class="cf0"> जेल विभाग के चीफ </span><span class="cf0">प्रोबेशन</span> <span class="cf0">ऑफिसर</span><span class="cf0"> विशाल सिंह और </span><span class="cf0">एचकेआरएन</span><span class="cf0"> की </span><span class="cf0">जीएम</span><span class="cf0"> अंबिका </span><span class="cf0">पटियाल</span><span class="cf0"> ने हस्ताक्षर किए। इन </span><span class="cf0">कोर्सों</span><span class="cf0"> का औपचारिक शुभारंभ 6 दिसंबर को </span><span class="cf0">गुरुग्राम</span><span class="cf0"> में सुप्रीम कोर्ट के </span><span class="cf0">जस्टिस</span><span class="cf0"> द्वारा किया जाएगा, हालांकि सभी पांचों जेलों में कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।</span></p>
<p><span class="cf0">महानिदेशक</span><span class="cf0"> आलोक राय ने बताया कि हर साल करीब 50 हजार लोग जेल में आते हैं और इतने ही बाहर जाते हैं। विभाग का उद्देश्य है कि जेल में आने वाले हर व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार की ट्रेनिंग </span><span class="cf0">दी</span><span class="cf0"> जाए, ताकि वे रिहा होने के बाद </span><span class="cf0">स्वरोजगार</span><span class="cf0"> शुरू कर सकें या नौकरी प्राप्त कर सकें। विभाग इस बात की भी </span><span class="cf0">मॉनिटरिंग</span><span class="cf0"> करेगा कि कितने कैदियों ने बाहर आने के बाद रोजगार पाया या </span><span class="cf0">स्वरोजगार</span><span class="cf0"> शुरू किया।</span></p>
<p><span class="cf0">आलोक राय ने यह भी </span><span class="cf0">बताया</span> <span class="cf0">कि</span><span class="cf0"> हरियाणा की जेलों में कैदियों द्वारा बनाए </span><span class="cf0">गए</span><span class="cf0"> आर्ट और </span><span class="cf0">क्राफ्ट</span><span class="cf0"> उत्पादों की प्रदर्शनी </span><span class="cf0">सूरजकुंड</span><span class="cf0"> हस्तशिल्प मेले में लगाई गई थी, जहां लगभग 2 करोड़ रुपये का सामान बिका। अब गीता जयंती महोत्सव सहित अन्य आयोजनों में भी जेल विभाग को निशुल्क </span><span class="cf0">स्टॉल</span><span class="cf0"> मिल रहे हैं, जहां कैदियों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 12:44:28 +0530</pubDate>
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