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                <title>राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी? आप का बड़ा दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> क्या राघव चड्ढा समेत उन सभी 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर खुद को बीजेपी में विलय कर लिया है? कम से कम आम आदमी पार्टी ने तो यही दावा करते हुए राज्यसभा चेयरमैन से लिखित में अनुरोध किया है कि इन सभी सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए। इसने कहा है कि संविधान के विशेषज्ञों का यही कहना है और संविधान की 10वीं अनुसूची में भी ऐसा ही लिखा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस मामले में रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा, 'संविधान के कई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177431/aaps-big-claim-is-that-membership-of-7-mps-including"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)13.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> क्या राघव चड्ढा समेत उन सभी 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर खुद को बीजेपी में विलय कर लिया है? कम से कम आम आदमी पार्टी ने तो यही दावा करते हुए राज्यसभा चेयरमैन से लिखित में अनुरोध किया है कि इन सभी सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए। इसने कहा है कि संविधान के विशेषज्ञों का यही कहना है और संविधान की 10वीं अनुसूची में भी ऐसा ही लिखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस मामले में रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा, 'संविधान के कई जानकारों, देश के वरिष्ठ अधिवक्ता व संविधान के विशेषज्ञ कपिल सिब्बल और पीडीटी आचार्य ने साफ़ कर दिया है कि आप को तोड़कर बीजेपी में विलय करने का फ़ैसला लेने वाले सात लोगों की सदस्यता ख़त्म होगी। ये बहुत साफ़ तौर पर है।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संजय सिंह ने कहा कि कपिल सिब्बल जैसे संविधान के जानकारों की राय लेकर राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति को एक याचिका भेजी है जिसमें संविधान की 10वीं अनुसूची के मुताबिक इन सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए, इसके बारे में अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सभापति महोदय से मांग की है कि इसकी जल्द से जल्द सुनवाई करके अपनी ओर से न्यायपूर्ण फैसला दें। संविधान की 10वीं अनुसूची में भी साफ़ तौर पर लिखा गया है कि इस तरह की किसी भी तोड़फोड़ की इजाजत भारत का संविधान नहीं देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप के पूर्व राज्‍यसभा उपनेता राघव चड्ढा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि पार्टी के 10 में से 7 राज्‍यसभा सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं और बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह संख्या दो-तिहाई से ज्यादा है, इसलिए वे एंटी-डिफेक्शन कानून यानी दलबदल विरोधी कानून से बच सकते हैं।बागी सांसदों में राघव चड्ढा के अलावा अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल हैं। इनमें से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक शुक्रवार को ही बीजेपी में शामिल हो गए। स्वाति मालीवाल ने शनिवार को बीजेपी जॉइन करने की पुष्टि की।आप के इन सात सांसदों की बगावत के बाद अब आप के पास राज्‍यसभा में सिर्फ 3 सांसद बचे हैं- संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलवीर सिंह सीचेवाल।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सात सांसदों की बगावत पर आप के वरिष्ठ नेता और राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने पहले ही कहा था, 'यह गैरकानूनी, गलत, असंवैधानिक और संसदीय नियमों के खिलाफ है। हम इनकी पूरी सदस्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।'संजय सिंह ने कहा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांग रहे हैं और वे पंजाब से चुने गए 6 बागी सांसदों को वापस बुलाने की मांग करेंगे। हालांकि, संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।वरिष्ठ वकील और संविधान के विशेषज्ञ कपिल सिब्बल ने एचटी से कहा कि पार्टी खुद पहले मर्जर का फैसला नहीं ले ले तब तक कोई भी खुद से मर्जर नहीं कर सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पार्टी स्तर पर रेजॉल्यूशन पास करना ज़रूरी है। पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने एचटी से कहा कि ये 7 सांसद अयोग्यता से बच नहीं सकते। हालाँकि, सांसदों को वापस बुलाने यानी हटाने के अधिकार पर पूर्व पंजाब एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल ने साफ़ किया कि 'राइट टू रिकॉल' यानी वोटर द्वारा सांसद को बीच में हटाने का अधिकार संविधान में कहीं नहीं है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:32:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आप में सियासी भूचाल दलबदल कानून के घेरे में 7 राज्यसभा सांसदों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिसने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी में आई इस बड़ी टूट ने न केवल पार्टी के आंतरिक हालात को उजागर किया है बल्कि दलबदल विरोधी कानून की प्रासंगिकता और उसकी सीमाओं पर भी नई बहस छेड़ दी है। राज्यसभा के कई सांसदों द्वारा पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के बाद अब यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या ये सांसद अपनी सदस्यता बनाए रख पाएंगे या उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177385/political-turmoil-in-aap-future-of-7-rajya-sabha-mps"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/indian-politics-defection-crisis-jaychand-mirjafar-analysis.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिसने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी में आई इस बड़ी टूट ने न केवल पार्टी के आंतरिक हालात को उजागर किया है बल्कि दलबदल विरोधी कानून की प्रासंगिकता और उसकी सीमाओं पर भी नई बहस छेड़ दी है। राज्यसभा के कई सांसदों द्वारा पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के बाद अब यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या ये सांसद अपनी सदस्यता बनाए रख पाएंगे या उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे मामले के केंद्र में हैं राघव चड्ढा जिनके साथ कई अन्य सांसदों ने भी पार्टी छोड़ने का दावा किया है। इनके साथ संदीप पाठक अशोक मित्तल विक्रम साहनी हरभजन सिंह स्वाति मालीवाल और नरेंद्र गुप्ता जैसे नामों का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन सभी के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा का रुख किया है। इस दावे ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर संजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन को याचिका सौंपकर इन सात सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन सांसदों ने संविधान की दसवीं अनुसूची का स्पष्ट उल्लंघन किया है जो दलबदल को रोकने के लिए बनाई गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में दलबदल विरोधी कानून जिसे दसवीं अनुसूची के नाम से जाना जाता है वर्ष 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक दलों में स्थिरता बनाए रखना और निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पार्टी बदलने की प्रवृत्ति को रोकना था। इस कानून के तहत यदि कोई सांसद या विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कानून में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान है जो पार्टी व्हिप से जुड़ा हुआ है। यदि कोई सांसद सदन में अपनी पार्टी के निर्देशों के खिलाफ वोट करता है या मतदान से अनुपस्थित रहता है तो भी उसे अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी अनुशासन बना रहे और सरकार या विपक्ष की रणनीति प्रभावित न हो।</div>
<div style="text-align:justify;">निर्दलीय सदस्यों के लिए भी इस कानून में स्पष्ट नियम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि कोई निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदाता जिस स्वतंत्र उम्मीदवार को चुनते हैं वह बाद में किसी दल का हिस्सा बनकर उनकी अपेक्षाओं के साथ समझौता न करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि इस कानून में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी है जिसे विलय का प्रावधान कहा जाता है। इसके अनुसार यदि किसी दल के दो तिहाई या उससे अधिक सदस्य एक साथ किसी अन्य दल में शामिल हो जाते हैं तो इसे दलबदल नहीं बल्कि वैध विलय माना जाता है और ऐसे सदस्यों को अयोग्यता से छूट मिल जाती है। यही वह बिंदु है जिस पर इस पूरे मामले का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब सवाल यह है कि क्या आम आदमी पार्टी के इन सांसदों की संख्या दो तिहाई के आंकड़े तक पहुंचती है या नहीं। यदि यह संख्या पूरी होती है तो ये सांसद अपनी सदस्यता बचा सकते हैं अन्यथा इन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि दोनों पक्ष अपने अपने दावे कर रहे हैं और राजनीतिक गणित तेजी से बदल रहा है।इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी उपराष्ट्रपति के पास है जो इस मामले की सुनवाई करेंगे और तथ्यों के आधार पर फैसला देंगे। उनका निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण होगा क्योंकि वही तय करेगा कि संबंधित सांसद संसद में बने रहेंगे या नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सभापति का निर्णय अंतिम होने के बावजूद न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि दलबदल से जुड़े मामलों में सभापति के फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इसका मतलब है कि यदि किसी पक्ष को निर्णय से असंतोष होता है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं है बल्कि इसका प्रभाव पूरे देश की राजनीति पर पड़ेगा। यदि बड़ी संख्या में सांसद दलबदल कर बिना अयोग्यता के बच जाते हैं तो यह अन्य दलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। वहीं यदि कड़ी कार्रवाई होती है तो यह संदेश जाएगा कि दलबदल कानून अभी भी प्रभावी है और उसका उल्लंघन करने पर सख्त परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दलबदल विरोधी कानून अपने उद्देश्य को पूरी तरह से पूरा कर पा रहा है या इसमें सुधार की आवश्यकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून का उपयोग कई बार राजनीतिक हथियार के रूप में भी किया जाता है जिससे विधायकों और सांसदों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रभावित होती है। वहीं दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जाता है कि यदि यह कानून न हो तो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है और सरकारें गिरने का खतरा बना रह सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। दोनों पक्ष अपने अपने तर्कों के साथ जनता और संवैधानिक संस्थाओं के सामने अपनी बात रखेंगे। इस पूरे मामले पर देश की नजर बनी हुई है क्योंकि यह केवल सात सांसदों का मुद्दा नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा हुआ प्रश्न है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि दलबदल कानून भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि इसका उपयोग निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो ताकि लोकतंत्र की मूल भावना बनी रहे। आने वाले समय में सभापति का निर्णय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत देगा और यह तय करेगा कि राजनीति में दल बदल की प्रवृत्ति पर कितना नियंत्रण संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:18:42 +0530</pubDate>
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                <title>लोकप्रियता से विवाद तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राघव चड्ढा का हालिया राजनीतिक निर्णय केवल संसदीय गलियारों या राजनीतिक दलों के बीच की एक साधारण घटना नहीं है बल्कि इसने अंतर्जाल की आभासी दुनिया में भी अत्यंत गहरा और अभूतपूर्व प्रभाव छोड़ा है। आम आदमी पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में उनका सम्मिलित होना एक सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम की तरह प्रतीत हो सकता था परंतु कुछ ही घंटों के भीतर इसने सामाजिक संवाद के माध्यमों पर एक बड़े वैचारिक और संख्यात्मक बदलाव को जन्म दे दिया। विशेष रूप से छायाचित्र साझा करने वाले प्रमुख वैश्विक मंच पर उनके अनुगामियों की संख्या में आई आकस्मिक गिरावट ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177274/journey-from-popularity-to-controversy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/raghav-chadha-1696929862.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राघव चड्ढा का हालिया राजनीतिक निर्णय केवल संसदीय गलियारों या राजनीतिक दलों के बीच की एक साधारण घटना नहीं है बल्कि इसने अंतर्जाल की आभासी दुनिया में भी अत्यंत गहरा और अभूतपूर्व प्रभाव छोड़ा है। आम आदमी पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में उनका सम्मिलित होना एक सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम की तरह प्रतीत हो सकता था परंतु कुछ ही घंटों के भीतर इसने सामाजिक संवाद के माध्यमों पर एक बड़े वैचारिक और संख्यात्मक बदलाव को जन्म दे दिया। विशेष रूप से छायाचित्र साझा करने वाले प्रमुख वैश्विक मंच पर उनके अनुगामियों की संख्या में आई आकस्मिक गिरावट ने इस तथ्य को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया कि वर्तमान समय में राजनीति केवल विचारधारा या चुनावी कूटनीति तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि यह सीधे तौर पर जनता की संवेदनाओं और उनकी तत्काल आभासी प्रतिक्रियाओं से जुड़ गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि जिस दिन उन्होंने अपने राजनीतिक दल के परिवर्तन की सार्वजनिक घोषणा की थी उस समय उनके व्यक्तिगत खाते पर लगभग 14.6 मिलियन अनुगामी उपस्थित थे। इस घोषणा के मात्र 24 घंटे के भीतर यह संख्या तीव्रता से घटकर लगभग 13.3 मिलियन से 13.5 मिलियन के मध्य पहुँच गई। इसका प्रत्यक्ष अर्थ यह है कि लगभग 10 लाख से 11 लाख लोगों ने अत्यंत अल्प समय में उन्हें अननुगामित कर दिया। आंकड़ों में आई यह भारी गिरावट केवल गणितीय अंकों का खेल नहीं है बल्कि यह उस तीव्र भावनात्मक प्रतिक्रिया और रोष को दर्शाती है जो उनके समर्थकों के मध्य उत्पन्न हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटना इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि राघव चड्ढा की छवि लंबे समय से एक ऐसे युवा राजनेता की रही है जो पारंपरिक और रूढ़िवादी राजनीति की परिधि से बाहर दिखाई देते थे। उनकी पहचान केवल एक सांसद के रूप में स्थापित नहीं थी बल्कि वे एक ऐसे सार्वजनिक चेहरे के रूप में उभरे थे जिसने निरंतर युवाओं के ज्वलंत मुद्दों को स्वर दिया। उन्होंने अस्थायी सेवा कर्मियों, वितरण कर्मचारियों, पितृत्व अवकाश और तीव्र वितरण सेवाओं जैसे समकालीन विषयों को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाने का सफल प्रयास किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही प्रमुख कारण था कि उनके अनुगामियों में बहुत बड़ी संख्या उस युवा वर्ग की थी जिसे प्रायः नई पीढ़ी या आधुनिक युग की संतति कहा जाता है। परंतु जैसे ही उन्होंने अपनी राजनीतिक दिशा और निष्ठा को बदलने का निर्णय लिया उसी वर्ग की प्रतिक्रिया सबसे अधिक प्रखर और तीखी दिखाई दी। सामाजिक संवाद के मंचों पर अचानक एक संगठित अननुगामी अभियान प्रारंभ हो गया जिसमें सहस्रों नहीं अपितु लाखों लोगों ने सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी दर्ज की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अभियान ने वैश्विक स्तर पर यह सिद्ध कर दिया कि आभासी मंचों पर मिलने वाला जनसमर्थन अत्यंत अस्थिर हो सकता है और वह क्षण भर में विपरीत दिशा में मुड़ सकता है। जो लोग पूर्व में उनके समर्थन में सक्रिय थे वही लोग कुछ ही घंटों के भीतर उनके विरोध में खड़े दिखाई देने लगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संपूर्ण घटनाक्रम को गहराई से समझने हेतु यह देखना अनिवार्य है कि सामाजिक संवाद के ये आधुनिक माध्यम आज केवल मनोरंजन या सूचना के स्रोत नहीं रह गए हैं। ये अब एक प्रकार के तत्काल जनमत संग्रह के केंद्र बन चुके हैं जहाँ साधारण जन अपनी राय को तुरंत और प्रभावी ढंग से व्यक्त करते हैं। पूर्व के समय में जहाँ किसी राजनेता की लोकप्रियता का आकलन केवल चुनाव परिणामों, जनसभाओं की भीड़ या मतपेटियों से किया जाता था वहीं अब अनुगामियों की संख्या और उन पर प्राप्त होने वाली प्रतिक्रियाएं भी लोकप्रियता का एक अपरिहार्य मापदंड बन गई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राघव चड्ढा के प्रकरण में यह विषय भी चर्चा का केंद्र बना कि उनके पुराने आभासी संदेशों और लेखों में कुछ संपादन या परिवर्तन किए गए। कुछ समाचार रिपोर्टों में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि उन्होंने अपने आधिकारिक खातों से पूर्व में किए गए आलोचनात्मक लेखों को या तो पूरी तरह हटा दिया या उनकी संख्या कम कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस गतिविधि से जनमानस में यह धारणा सुदृढ़ हुई कि उनकी आभासी छवि को नए राजनीतिक वातावरण और नई पार्टी की नीतियों के अनुरूप ढाला जा रहा है। इस प्रकार की गतिविधियों ने आलोचना की अग्नि में घी डालने का कार्य किया क्योंकि उनके राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों ने इसे एक शुद्ध अवसरवादी कदम के रूप में प्रस्तुत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का एक और उल्लेखनीय पक्ष यह है कि यह प्रतिक्रिया केवल सामान्य उपयोगकर्ताओं तक ही सीमित नहीं रही बल्कि कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों और सार्वजनिक जीवन के प्रभावशाली लोगों ने भी उन्हें अननुगामित करने का निर्णय लिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह आक्रोश केवल व्यक्तिगत या भावनात्मक स्तर पर नहीं था बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और बौद्धिक प्रतिक्रिया थी जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोग सम्मिलित थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीति के विशेषज्ञों का यह तर्क है कि इस घटना के पीछे केवल एक दल बदलने का निर्णय नहीं है बल्कि उस निर्णय से जुड़ी जन-अपेक्षाएं और विश्वास का भंग होना सम्मिलित है। जब कोई राजनेता अपनी विशिष्ट पहचान एक विशेष विचारधारा या नैतिकता के आधार पर निर्मित करता है तो उसके समर्थक उसी वैचारिक धरातल पर उससे जुड़ते हैं। यदि वह राजनेता अचानक उस दिशा से पूर्णतः विपरीत कोई कदम उठाता है तो उन समर्थकों के लिए इस आकस्मिक बदलाव को स्वीकार करना और उसके साथ समन्वय बिठाना अत्यंत कठिन हो जाता है। यह स्थिति विश्वास के संकट को जन्म देती है जिसका परिणाम हम आंकड़ों की गिरावट के रूप में देखते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने यह भी प्रमाणित कर दिया है कि आभासी समर्थन कभी भी स्थायी संपत्ति नहीं होता। यह निरंतर बदलती परिस्थितियों और राजनेता के व्यवहार के अनुसार परिवर्तित होता रहता है। किसी नेता के पास लाखों की संख्या में अनुगामी होना उसकी चिरस्थायी लोकप्रियता का प्रमाणपत्र नहीं है। यह केवल उस विशिष्ट समय की मनोदशा को प्रतिबिंबित करता है। जैसे ही परिस्थितियां बदलती हैं या नेता के आचरण में विरोधाभास दिखाई देता है वैसे ही यह समर्थन रेत के महल की भांति ढह सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही यह गंभीर प्रश्न भी उपस्थित होता है कि क्या आभासी दुनिया में आई इस गिरावट का वास्तविक धरातल की राजनीति पर कोई निर्णायक प्रभाव पड़ेगा। राजनीतिक इतिहास के पन्ने यह बताते हैं कि सामाजिक मंचों की प्रतिक्रिया और वास्तविक चुनावी परिणाम सदैव एक समान नहीं होते। कई बार आभासी मंचों पर प्रचंड विरोध दिखाई देता है परंतु जमीनी स्तर पर उसका प्रभाव बहुत सीमित रहता है। इसलिए वर्तमान में यह कहना समय पूर्व होगा कि इस घटना से उनके दीर्घकालिक राजनीतिक भविष्य पर क्या और कितना प्रभाव पड़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तथापि यह स्वीकार करना भी अनिवार्य है कि इस संपूर्ण प्रकरण ने उनकी सार्वजनिक छवि को निश्चित रूप से प्रभावित किया है। किसी भी सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति विशेषकर एक राजनेता के लिए जनता का विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी और वास्तविक पूंजी होती है। जब उस विश्वास की नींव पर ही प्रश्नचिह्न अंकित होने लगें तो उसे पुनः स्थापित करना कोई सरल कार्य नहीं होता। इसके लिए केवल सुंदर वक्तव्य या विज्ञापन के माध्यम से किया गया प्रचार पर्याप्त नहीं होता बल्कि इसके लिए निरंतर कार्य, नैतिक स्पष्टता और एक पारदर्शी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में एक और रोचक पक्ष यह है कि अंतर्जाल की गति और उसके व्यापक प्रभाव ने राजनीति के व्याकरण को पूरी तरह परिवर्तित कर दिया है। पहले के युग में जहाँ किसी भी राजनीतिक निर्णय के प्रभाव को समझने और मापने में महीनों या वर्षों का समय लग जाता था वहीं अब मात्र कुछ ही घंटों में उस निर्णय की व्यापक प्रतिक्रिया जनता के सामने आ जाती है। यह परिवर्तन आधुनिक नेताओं के लिए एक बड़ी चुनौती भी है और एक अवसर भी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि वे सही और ईमानदार तरीके से इन माध्यमों का उपयोग करें तो वे सीधे जनता से संवाद स्थापित कर सकते हैं और अपनी नीतियों को स्पष्ट कर सकते हैं। परंतु यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं या उनके कार्यों में कथनी और करनी का अंतर दिखता है तो यही माध्यम उनके विरुद्ध एक शक्तिशाली शस्त्र के रूप में भी कार्य कर सकता है। राघव चड्ढा के मामले में यह दूसरी स्थिति अधिक प्रबलता से दिखाई देती है जहाँ उनकी वर्षों में निर्मित आभासी छवि अचानक एक बड़ी चुनौती के घेरे में आ गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह संपूर्ण घटना केवल एक व्यक्ति विशेष की कथा नहीं है बल्कि यह आधुनिक राजनीति के परिवर्तित होते हुए व्याकरण का एक सटीक उदाहरण है। यह इस तथ्य को रेखांकित करती है कि आज का मतदाता और नागरिक केवल मतदान दिवस पर ही सक्रिय नहीं होता बल्कि वह राजनेता के प्रत्येक निर्णय और गतिविधि पर सूक्ष्म दृष्टि रखता है और उस पर त्वरित प्रतिक्रिया देता है। अंततः यह कहा जा सकता है कि राघव चड्ढा के अनुगामियों में आई यह भारी कमी एक प्रतीक के रूप में कार्य करती है जो हमें यह चेतावनी देती है कि इस तीव्र गति वाले युग में राजनीति कितनी चंचल और अनिश्चित हो गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटना राजनेताओं के लिए एक सबक भी है कि लोकप्रियता प्राप्त करना जितना कठिन है उससे कहीं अधिक कठिन उसे नैतिकता और निरंतरता के साथ बनाए रखना है। आने वाले समय में यह देखना अत्यंत रोचक होगा कि क्या वे इस भीषण चुनौती को पुनः एक अवसर में परिवर्तित कर पाने में सफल होते हैं या यह घटना उनकी राजनीतिक छवि पर एक स्थायी और अमिट प्रभाव छोड़ जाती है। राजनीति और अंतर्जाल का यह संगम आने वाले वर्षों में जनमत के निर्माण की प्रक्रिया को और भी अधिक जटिल और दिलचस्प बनाने वाला है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177274/journey-from-popularity-to-controversy</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:26:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्मठ कार्यकर्ता लाल बहादुर साहू सभासद पद पर मनोनीत, क्षेत्र में हर्ष की लहर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज-</strong> नवनिर्वाचित प्रदेश सरकार द्वारा वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता लाल बहादुर साहू जी को सभासद पद पर मनोनीत किए जाने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लगभग 40 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी की सेवा कर रहे लाल बहादुर साहू जी ने संगठन में विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है।बताया जाता है कि जिला अध्यक्ष जमुना पार राजेश शुक्ला जी के आशीर्वाद से उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पार्टी के इस निर्णय को कार्यकर्ताओं ने सराहनीय कदम बताया है।इस अवसर पर संजय श्रीवास्तव ने प्रदेश नेतृत्व को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173646/wave-of-joy-in-the-area-as-hardworking-worker-lal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260319-wa0252.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज-</strong> नवनिर्वाचित प्रदेश सरकार द्वारा वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता लाल बहादुर साहू जी को सभासद पद पर मनोनीत किए जाने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लगभग 40 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी की सेवा कर रहे लाल बहादुर साहू जी ने संगठन में विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है।बताया जाता है कि जिला अध्यक्ष जमुना पार राजेश शुक्ला जी के आशीर्वाद से उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पार्टी के इस निर्णय को कार्यकर्ताओं ने सराहनीय कदम बताया है।इस अवसर पर संजय श्रीवास्तव ने प्रदेश नेतृत्व को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे कर्मठ और संघर्षशील कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलना चाहिए, जिन्होंने वर्षों तक निष्ठा के साथ पार्टी का झंडा बुलंद किया है। उन्होंने कहा कि लाल बहादुर साहू जी ने कभी किसी अन्य दल का रुख नहीं किया और हमेशा भाजपा के प्रति समर्पित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संजय श्रीवास्तव के नेतृत्व में साहू जी के निवास स्थान पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत एवं सम्मान किया। इस दौरान वरिष्ठ समाजसेवी राजेश साहू, मुकेश कुमार पाठक, कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय श्रीवास्तव, बाबूजी यादव, गुलाब कुशवाहा, राणा श्रीवास्तव सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 20:21:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से जिलाध्यक्ष प्रयागराज गंगापार निर्मला पासवान की स्नेहिल भेंट</title>
                                    <description><![CDATA[<div>  </div>
<p><strong>प्रयागराज। </strong></p>
<div>  </div>
<div>डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के प्रयागराज आगमन पर जिलाध्यक्ष प्रयागराज गंगापार निर्मला पासवान ने  (बमरौली एयरपोर्ट) परउनका स्वागत किया।</div>
<div>  </div>
<div>  इस अवसर पर जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान ने उपमुख्यमंत्री से आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया।</div>
<div>  </div>
<div>भेंट के दौरान क्षेत्र के संगठनात्मक कार्यों, जनसमस्याओं तथा आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी संक्षिप्त चर्चा हुई। </div>
<div>  </div>
<div>उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कार्यकर्ताओं को संगठन को और मजबूत करने तथा जनता की सेवा में निरंतर सक्रिय रहने का संदेश दिया।</div>
<div>  </div>
<div>जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान ने उपमुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिलती है और संगठन को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172946/district-president-prayagraj-gangapar-nirmala-paswans-affectionate-meeting-with-deputy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260308-wa0269-(1).jpg" alt=""></a><br /><div> </div>
<p><strong>प्रयागराज। </strong></p>
<div> </div>
<div>डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के प्रयागराज आगमन पर जिलाध्यक्ष प्रयागराज गंगापार निर्मला पासवान ने  (बमरौली एयरपोर्ट) परउनका स्वागत किया।</div>
<div> </div>
<div> इस अवसर पर जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान ने उपमुख्यमंत्री से आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया।</div>
<div> </div>
<div>भेंट के दौरान क्षेत्र के संगठनात्मक कार्यों, जनसमस्याओं तथा आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी संक्षिप्त चर्चा हुई। </div>
<div> </div>
<div>उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कार्यकर्ताओं को संगठन को और मजबूत करने तथा जनता की सेवा में निरंतर सक्रिय रहने का संदेश दिया।</div>
<div> </div>
<div>जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान ने उपमुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिलती है और संगठन को मजबूती प्राप्त होती है। इस अवसर पर उपस्थित कार्यकर्ताओं ने भी उपमुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172946/district-president-prayagraj-gangapar-nirmala-paswans-affectionate-meeting-with-deputy</link>
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 00:59:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शंकराचार्य विवाद पर BJP में टकराव! सीएम योगी के खिलाफ हुए केशव-ब्रजेश, बगावत पर सियासत तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>शंकराचार्य विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा तूफान बनकर उभरा है, जो न केवल धार्मिक भावनाओं को छूता है, बल्कि सत्ताधारी भाजपा के भीतर गहरी दरार को भी उजागर कर रहा है। यह विवाद प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शुरू हुआ, जब ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके ब्राह्मण शिष्यों के साथ प्रशासन की ओर से कथित तौर पर बदसलूकी हुई। मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026 के आसपास) के दिन संगम स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य को रोका गया, और उनके शिष्यों की चोटी खींचने का आरोप लगा। शंकराचार्य ने इसे अपमान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170369/clash-in-bjp-over-shankaracharya-controversy-politics-intensifies-over-keshav-brajesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/images-(1)32.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>शंकराचार्य विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा तूफान बनकर उभरा है, जो न केवल धार्मिक भावनाओं को छूता है, बल्कि सत्ताधारी भाजपा के भीतर गहरी दरार को भी उजागर कर रहा है। यह विवाद प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शुरू हुआ, जब ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके ब्राह्मण शिष्यों के साथ प्रशासन की ओर से कथित तौर पर बदसलूकी हुई। मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026 के आसपास) के दिन संगम स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य को रोका गया, और उनके शिष्यों की चोटी खींचने का आरोप लगा। शंकराचार्य ने इसे अपमान बताया और योगी सरकार पर सनातन धर्म के अपमान का आरोप लगाया, यहां तक कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'कालनेमि' जैसी शक्तियों से जोड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला जल्द ही राजनीतिक रंग ले लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बिना नाम लिए शंकराचार्य को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि संविधान सबके ऊपर है, कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं। योगी ने 'कालनेमि' जैसे तत्वों का जिक्र कर सनातन धर्म को कमजोर करने वालों पर हमला बोला, जो अप्रत्यक्ष रूप से शंकराचार्य की ओर इशारा था। योगी की लाइन सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और कानून-व्यवस्था की थी, जिसमें उन्होंने जोर दिया कि मेला नियमों के तहत चलेगा और कोई अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन यहीं से योगी सरकार में टकराव की खबरें सामने आईं।</p>
<p style="text-align:justify;">उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने अलग सुर में बात की, जो योगी की लाइन से एकदम अलग है। केशव मौर्य ने शंकराचार्य को 'पूज्य' और 'भगवान शंकराचार्य' कहा। उन्होंने कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम है। उनसे प्रार्थना है कि वह अच्छे से स्नान करें। इस विषय को यहीं खत्म करें। केशव ने अपमान की जांच की मांग की और संतों के सम्मान पर जोर दिया। उनकी यह टिप्पणी शंकराचार्य के समर्थकों में सराही गई, जबकि योगी के कट्टर समर्थकों में इसे नरमी के रूप में देखा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी के साथ ही उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का बयान और भी तीखा आया। उन्होंने कहा कि चोटी नहीं खींचनी चाहिए थी। बल प्रयोग करना था तो लाठी उठा लेते। चोटी खींचना महाअपराध है। देखिएगा महापाप लगेगा। ब्रजेश ने इसे धार्मिक अपराध बताया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जोर दिया कि शिष्यों की चोटी खींचना पाप है, जो कई सालों तक लगेगा। यह बयान योगी की सख्ती से बिल्कुल उलट था, जहां योगी प्रशासन की कार्रवाई का बचाव कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भाजपा के भीतर जातीय और गुटबाजी का संकेत है। केशव मौर्य (पिछड़े वर्ग से) और ब्रजेश पाठक (ब्राह्मण) दोनों ही संतों के सम्मान को लेकर संवेदनशील दिखे, जबकि योगी (ठाकुर पृष्ठभूमि) पर ब्राह्मण असंतोष बढ़ा। कुछ रिपोर्ट्स में ब्रजेश को मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ब्राह्मण नाराजगी के बीच। शंकराचार्य के धरने और विरोध ने हिंदू संगठनों को भी बांट दिया, जहां कुछ योगी का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ संतों के सम्मान पर जोर दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत में योगी की अकेलेपन को साफ-साफ दिखा रहा है। जहां योगी कानून-व्यवस्था और मजबूत छवि पर अड़े हैं, वहीं उनके डिप्टी सीएम संतों की भावनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे भाजपा में दिल्ली-लखनऊ के बीच तनाव की अफवाहें भी तेज हुईं। वहीं इस सारे मुद्दों को लेकर विपक्ष भी कई जगह सरकार और भाजपी को घेर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/170369/clash-in-bjp-over-shankaracharya-controversy-politics-intensifies-over-keshav-brajesh</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 19:06:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CM के बयान पर शंकराचार्य का पलटवार, बोले— क्या समर्थन करने वाला ही माना जाएगा शंकराचार्य?</title>
                                    <description><![CDATA[<h3>  </h3>
<blockquote class="format1">प्रयागराज में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद मुख्यमंत्री और शंकराचार्य के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस विवाद में अपनी बात रखी है।</blockquote>
<hr />
<h2>🗣️ <strong>योगी आदित्यनाथ का बयान</strong></h2>
<p>उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि—</p>
<blockquote>
<p>“हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। कानून से ऊपर कोई नहीं है, मैं भी नहीं। सभी को मर्यादा में रहना होगा।”</p>
</blockquote>
<p>उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति मनमाने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169673/shankaracharyas-counterattack-on-cms-statement-said-will-shankaracharya-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/yogi-adityanath.jpg" alt=""></a><br /><h3> </h3>
<blockquote class="format1">प्रयागराज में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद मुख्यमंत्री और शंकराचार्य के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस विवाद में अपनी बात रखी है।</blockquote>
<hr />
<h2>🗣️ <strong>योगी आदित्यनाथ का बयान</strong></h2>
<p>उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि—</p>
<blockquote>
<p>“हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। कानून से ऊपर कोई नहीं है, मैं भी नहीं। सभी को मर्यादा में रहना होगा।”</p>
</blockquote>
<p>उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति मनमाने ढंग से किसी पीठ का आचार्य बनकर समाज में भ्रम नहीं फैला सकता।</p>
<hr />
<h2>🔁 <strong>स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार</strong></h2>
<p>सीएम योगी के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि—</p>
<ul>
<li>
<p>मुख्यमंत्री को तथ्यों की सही जानकारी नहीं है</p>
</li>
<li>
<p>वर्ष 2015 में वह शंकराचार्य नहीं थे</p>
</li>
<li>
<p>योगी आदित्यनाथ को महंत और मुख्यमंत्री का पद रिश्तेदारी के कारण मिला</p>
</li>
</ul>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि—</p>
<blockquote>
<p>“बीजेपी ऐसे लोगों को शंकराचार्य बनाना चाहती है जो सरकार की जी-हुजूरी करें। क्या जो समर्थन करे, वही शंकराचार्य कहलाएगा?”</p>
</blockquote>
<p>स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी दावा किया कि उन्हें देश की अन्य तीन पीठों के शंकराचार्यों से मान्यता मिल चुकी है और उनका विधिवत पट्टाभिषेक हुआ है।</p>
<hr />
<h2>🏛️ <strong>अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया</strong></h2>
<p>इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा—</p>
<blockquote>
<p>“कोई चाहे जैसा चोला पहन ले, उसकी वाणी उसकी पोल खोल देती है। शंकराचार्य पर अपमानजनक टिप्पणी करना पाप है।”</p>
</blockquote>
<p>उन्होंने इसे “शाब्दिक हिंसा” करार देते हुए सरकार समर्थकों पर भी कटाक्ष किया।</p>
<hr />
<h2>📍 विवाद की पृष्ठभूमि</h2>
<p>यह विवाद 18 फरवरी को मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान प्रयागराज में शुरू हुआ था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर दुर्व्यवहार और शिष्यों के साथ मारपीट का आरोप लगाया था, जिसे लेकर मामला तूल पकड़ गया।</p>
<hr />
<h2>📰 निष्कर्ष</h2>
<p>शंकराचार्य पद को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। मुख्यमंत्री, धार्मिक संत और विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गहराने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 17:28:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीजेपी पार्षद के बेटे हिमांशु ने दरोगा को थप्पड़ जड़ दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">वाराणसी बीजेपी पार्षद के बेटे हिमांशु ने दरोगा को थप्पड़ जड़ दिया</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>खबर:अमित राघव (ब्यूरो चीफ देहरादून)</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">ऊत्तर प्रदेश के वाराणसी के अलग-अलग जगह पर नए साल के दौरान लोगों की भारी भीड़ देखी गई. इसी दौरान वाराणसी पुलिस पर लोगों की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर बड़ी जिम्मेदारी रही, लेकिन इसी बीच एक ऐसी घटना वाराणसी जनपद में हुई जो इस समय चर्चा के केंद्र में है.<br />दरअसल वाराणसी के ही एक बीजेपी पार्षद के बेटे ने अपने साथियों संग बाइक ले जाने को लेकर एक दरोगा को ही थप्पड़ जड़ दिया. हालांकि इस मामले में उस पर मुकदमा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165112/himanshu-slapped-the-inspector"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/fb_img_1767377143590.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वाराणसी बीजेपी पार्षद के बेटे हिमांशु ने दरोगा को थप्पड़ जड़ दिया</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>खबर:अमित राघव (ब्यूरो चीफ देहरादून)</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">ऊत्तर प्रदेश के वाराणसी के अलग-अलग जगह पर नए साल के दौरान लोगों की भारी भीड़ देखी गई. इसी दौरान वाराणसी पुलिस पर लोगों की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर बड़ी जिम्मेदारी रही, लेकिन इसी बीच एक ऐसी घटना वाराणसी जनपद में हुई जो इस समय चर्चा के केंद्र में है.<br />दरअसल वाराणसी के ही एक बीजेपी पार्षद के बेटे ने अपने साथियों संग बाइक ले जाने को लेकर एक दरोगा को ही थप्पड़ जड़ दिया. हालांकि इस मामले में उस पर मुकदमा दर्ज हुआ है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बाइक ले जाने को लेकर हुआ था विवाद।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">स्वतंत्र प्रभात को मिली जानकारी के अनुसार वाराणसी के चौक थाना अंतर्गत मणिकर्णिका घाट द्वार के पास बीजेपी पार्षद के बेटे हिमांशु श्रीवास्तव को वहां तैनात चौकी प्रभारी अभिषेक त्रिपाठी ने बाइक के साथ आवागमन को लेकर मना किया. दरअसल यह बेहद व्यस्त इलाका है, यहां प्रमुख तिथियों पर पैदल चलना तक काफी मुश्किल है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>स्थानीय लोगों ने की हिमांशु की पिटाई</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच बात इतनी बढ़ गई की हिमांशु ने दरोगा को थप्पड़ जड़ दिया. इसके बाद स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई. हिमांशु के साथ उसके साथी भी मौजूद थे और युवकों की मनबढ़ई को देखकर स्थानीय लोगों ने भी आपत्ति जताते हुए पिटाई कर दी. इसके बाद हिमांशु का भी मंडलीय अस्पताल में उपचार कराया गया.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>दरोगा की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार दरोगा अभिषेक त्रिपाठी के तहरीर पर हिमांशु श्रीवास्तव के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया जा चुका है. इसके अलावा इसमें शामिल अन्य युवकों की भी पहचान की जाएगी और इन पर कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/165112/himanshu-slapped-the-inspector</link>
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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 00:03:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Uttrakhand]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> अमेठी के चौमुखी विकास को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिली रानी शाम्भवी सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[अमेठी में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण एवं युवा अवसरों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164238/694bf86ae33fa"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/1--(1)3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> अमेठी की पूर्व विधायक एवं भारतीय जनता पार्टी की मजबूत स्तंभ अमेठी महारानी गरिमा सिंह , उनके पुत्र  अनंत विक्रम सिंह  तथा उनकी बहु रानी शाम्भवी सिंह  ने उत्तर प्रदेश में सुशासन, सुरक्षा और विकास के प्रतीक बने  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  से शिष्टाचार भेंट कर अमेठी के सर्वांगीण विकास को लेकर ठोस एवं निर्णायक चर्चा की।इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  की दृढ़ इच्छाशक्ति से उत्तर प्रदेश आज विकास, कानून-व्यवस्था और सुशासन के नए युग में प्रवेश कर चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब भारतीय जनता पार्टी की नीतियों और नेतृत्व में विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।प्रतिनिधिमंडल ने अमेठी में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण एवं युवा अवसरों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखते हुए कहा कि भाजपा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएँ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँच रही हैं और अमेठी इसका सशक्त उदाहरण बनने की क्षमता रखता है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने अमेठी के विकास को लेकर पूर्ण प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र पर कार्य कर रही है और किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय या भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आश्वस्त किया कि अमेठी को भी प्रदेश के अग्रणी विकासशील जनपदों की श्रेणी में लाने के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी।यह भेंट स्पष्ट संदेश देती है कि अमेठी अब खोखले वादों की राजनीति से बाहर निकलकर भाजपा के विकास, राष्ट्रवाद और सुशासन के मॉडल के साथ मजबूती से खड़ा है। यह संवाद अमेठी में भाजपा की सशक्त उपस्थिति और जनविश्वास को और अधिक मजबूत करने वाला सिद्ध होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/164238/694bf86ae33fa</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 19:57:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोहरे ने छीन ली एक ज़िंदगी: यमुना एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसे में भाजपा नेता राजू यादव की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज- </strong>प्रयागराज के प्रतापपुर क्षेत्र के निवासी और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रताप सिंह उर्फ राजू यादव की यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा के पास हुए भीषण सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा घने कोहरे के कारण हुआ, जब एक्सप्रेसवे पर दृश्यता बेहद कम हो गई और एक के बाद एक कई वाहन आपस में टकरा गए। जानकारी के अनुसार, राजू यादव अपनी कार से दिल्ली की ओर जा रहे थे। मथुरा के समीप अचानक घने कोहरे में बस और कार की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक इलेक्ट्रिक बस में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163514/fog-took-away-one-life-bjp-leader-raju-yadav-died"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/002.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज- </strong>प्रयागराज के प्रतापपुर क्षेत्र के निवासी और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रताप सिंह उर्फ राजू यादव की यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा के पास हुए भीषण सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा घने कोहरे के कारण हुआ, जब एक्सप्रेसवे पर दृश्यता बेहद कम हो गई और एक के बाद एक कई वाहन आपस में टकरा गए। जानकारी के अनुसार, राजू यादव अपनी कार से दिल्ली की ओर जा रहे थे। मथुरा के समीप अचानक घने कोहरे में बस और कार की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक इलेक्ट्रिक बस में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई, जिसने आसपास खड़ी कई कारों और बसों को भी अपनी चपेट में ले लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आग और टक्कर के बीच अफरा- तफरी मच गई। हादसे में राजू यादव के साथ यात्रा कर रहे तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। राजू यादव को बचाया नहीं जा सका। इस भीषण दुर्घटना में उनके अलावा भी कई लोगों की मौत की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं। अखिलेश प्रताप सिंह उर्फ राजू यादव भारतीय जनता पार्टी के प्रभावशाली और जमीनी नेता माने जाते थे। वह थाना सराय ममरेज क्षेत्र के निवासी और स्वर्गीय बंशीधर यादव के पुत्र थे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिता के निधन के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अपने सरल स्वभाव व सक्रियता के बल पर क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई। वह कई मंत्रियों के करीबी भी माने जाते थे। राजू यादव के निधन की खबर जैसे ही प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में फैली, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। हजारों की संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि और संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। उनके परिवार में तीन बेटियां और दो बेटे हैं। एक हंसता–खेलता परिवार आज गहरे दुख में डूबा है। यह हादसा न सिर्फ एक नेता की मौत है,बल्कि क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसने हर आंख को नम और हर दिल को भारी कर दिया है। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/163514/fog-took-away-one-life-bjp-leader-raju-yadav-died</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 17:28:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी धन का दुरुपयोग या भू-माफिया को संरक्षण? पार्क के हरित क्षेत्र को नष्ट करने पर शासन से शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) साहित्य प्रचार विभाग के जिला संयोजक, प्रकाश वीर आर्य ने गोविंद नगर, ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क में बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण और हरित क्षेत्र के विनाश को लेकर जिलाधिकारी कानपुर नगर, नगर आयुक्त नगर निगम और मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पार्क के 70% हरित क्षेत्र को जानबूझकर इंटरलॉकिंग टाइल्स से पाट दिया गया है, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट आदेशों की खुली अवमानना है।</div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>मुख्य आरोप और चौंकाने वाले तथ्य: </strong>हरित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163501/complaint-to-the-government-on-misuse-of-government-funds-or"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/unnamed.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) साहित्य प्रचार विभाग के जिला संयोजक, प्रकाश वीर आर्य ने गोविंद नगर, ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क में बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण और हरित क्षेत्र के विनाश को लेकर जिलाधिकारी कानपुर नगर, नगर आयुक्त नगर निगम और मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पार्क के 70% हरित क्षेत्र को जानबूझकर इंटरलॉकिंग टाइल्स से पाट दिया गया है, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट आदेशों की खुली अवमानना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मुख्य आरोप और चौंकाने वाले तथ्य: </strong>हरित क्षेत्र का विनाश: शिकायतकर्ता के अनुसार, पार्क के लगभग 70% हरित क्षेत्र (घास और पुराने पौधे) को अवैध रूप से इंटरलॉकिंग टाइल्स से पाट दिया गया है। NGT के आदेशानुसार, पार्कों में केवल वॉकिंग ट्रैक (अधिकतम 5% क्षेत्रफल) ही पक्का किया जा सकता है। अवैध धार्मिक/पक्के निर्माण: पार्क के हरित क्षेत्र में दो वर्ष पूर्व एक 10x20 फीट का धार्मिक चबूतरा बना दिया गया था, जिसे नगर निगम के अधिकारियों ने 'पुराना निर्माण' बताकर कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण आज पार्क में हरियाली की जगह कब्ज़े के बड़े-बड़े ढांचे खड़े हो गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सार्वजनिक धन का दुरुपयोग: शिकायत में आरोप है कि इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने का कार्य सार्वजनिक धन (विधायक/सांसद निधि, आदि) का दुरुपयोग है, जिसका सीधा उद्देश्य हरित क्षेत्र को 'ऑक्सीजन ज़ोन' से हटाकर अवैध निर्माण को संरक्षण देना प्रतीत होता है। यह धारा 324 BNS के अंतर्गत एक आपराधिक कृत्य है। अधिकारियों पर गंभीर आरोप: श्री आर्य ने IGRS और RTI पर अधिकारियों द्वारा झूठी आख्या (जैसे 'निर्माण पुराना है' या 'शिकायत निस्तारित है') लगाने का आरोप लगाया है। यह कार्य न केवल प्रशासन को गुमराह करने का, बल्कि दोषी अधिकारियों को बचाने का भी स्पष्ट प्रयास है।</div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>तत्काल कार्रवाई की मांग:</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा नेता ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई और IPC/BNS की सुसंगत धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया जाए। उन्होंने 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की है: तत्काल ध्वस्तिकरण और बहाली: पार्क में मौजूद अवैध धार्मिक निर्माण और नए इंटरलॉकिंग टाइल्स को हटाकर, माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 70% हरित क्षेत्र को पार्क के मूल रूप में तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए। कार्रवाई का विवरण: की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण और अवैध निर्माण हटाने की समय-सीमा 7 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए। आर्य ने चेतावनी दी है कि यदि इस अत्यंत गंभीर शिकायत पर नियमानुसार और कठोर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वह पूरे प्रकरण को लेकर माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष अवमानना याचिका  दायर करने के लिए बाध्य होंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 16:49:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पूर्व जिला पंचायत सदस्य, प्रतिष्ठित व्यवसाई दिनेश कौशल के सौजन्य से जरुरतमंदो मे भेंट किए गए शाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>  शुकुलबाजार अमेठी।</strong> प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रबुद्धजनों के सहयोग से संस्था कृष्णा जन कल्याण सेवा संस्थान रजि द्वारा क्षेत्र मे विभिन्न स्थानों पर संस्था प्रबंधक समाजसेवी पी.के.तिवारी के नेतृत्व मे अति जरुरतमंदो को गर्म कपड़े वितरित करने का यथासंभव प्रयास किया जा रहा है। उसी क्रम मे शुकुलबाजार के प्रतिष्ठत व्यवसायी एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य दिनेश कौशल के सौजन्य से संस्था प्रबंधक समाजसेवी पी.के.तिवारी ने अति जरुरतमंदो  में  गर्म शाल भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया।</div>
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<div style="text-align:justify;">वहीं गर्म शाल  पा कर  गरीबों  ने भारतीय जनता पार्टी के मंडल महामंत्री एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रतिष्ठित व्यापारी दिनेश</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162746/shawls-were-presented-to-the-needy-courtesy-of-former-district"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/2--(1)2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> शुकुलबाजार अमेठी।</strong> प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रबुद्धजनों के सहयोग से संस्था कृष्णा जन कल्याण सेवा संस्थान रजि द्वारा क्षेत्र मे विभिन्न स्थानों पर संस्था प्रबंधक समाजसेवी पी.के.तिवारी के नेतृत्व मे अति जरुरतमंदो को गर्म कपड़े वितरित करने का यथासंभव प्रयास किया जा रहा है। उसी क्रम मे शुकुलबाजार के प्रतिष्ठत व्यवसायी एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य दिनेश कौशल के सौजन्य से संस्था प्रबंधक समाजसेवी पी.के.तिवारी ने अति जरुरतमंदो  में  गर्म शाल भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं गर्म शाल  पा कर  गरीबों  ने भारतीय जनता पार्टी के मंडल महामंत्री एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रतिष्ठित व्यापारी दिनेश कौशल एवं समाजसेवी पी के तिवारी को दुआंए  देते हुए उनके दीर्घायु होने की कामना की। समाजसेवी पी के तिवारी की निस्वार्थ भावना एवं कुशल नेतृत्व मे संस्था द्वारा कराए जा रहे पुनीत कार्यों की समाज का प्रत्येक वर्ग सराहना कर रहा है और उनका उत्साहवर्धन एवं सहयोग भी कर रहा है वहीं समाजसेवी पी के तिवारी ने कहा कि दिनेश कौशल का संस्था द्वारा कराए जा रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रत्येक कार्यों मे यथासंभव सहयोग करते रहते हैं जिससे संस्था को बल मिलता है और कहा कि वह प्रबुद्धजनों के सहयोग एवं मार्गदर्शन मे भविष्य मे और भी बेहतर से बेहतरीन करने की कोशिश करेंगे और  समाज के प्रति समर्पित रहेंगे। वहीं पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि जरूरतमंदों की सहायता करके आत्मसुकून प्राप्त होता है, माता-पिता के बताए हुए पद चिन्हों पर चलते हुए हर जरूरतमंदों की यथासंभव मदद करने का प्रयास करते हैं। बताते चलें दिनेश कौशल द्वारा धार्मिक सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी निभाई जाती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 20:18:54 +0530</pubDate>
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