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                <title>Education - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Education RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छात्र सार्थक त्रिपाठी ने गणित में 95% अंक प्राप्त कर किया क्षेत्र और विद्यालय का नाम रोशन</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश। </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">राजधानी के विकास नगर स्थित RLB सेक्टर-3 के निवासी छात्र सार्थक त्रिपाठी ने अपनी शानदार शैक्षणिक उपलब्धि से न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम गर्व से ऊँचा कर दिया है। सार्थक ने हाल ही में घोषित परीक्षा परिणाम में गणित विषय में सर्वाधिक 95% अंक प्राप्त किए हैं, जबकि उनका कुल प्रतिशत 92% रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">सार्थक, अधिवक्ता  विवेक कुमार त्रिपाठी के पुत्र हैं और शुरू से ही पढ़ाई में मेहनती व अनुशासित छात्र माने जाते हैं। उनकी इस सफलता के पीछे उनकी लगातार मेहनत, लगन और पढ़ाई के प्रति समर्पण को मुख्य कारण बताया जा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176324/student-sarthak-tripathi-brought-glory-to-the-region-and-school"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-15-at-22.37.39.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश। </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">राजधानी के विकास नगर स्थित RLB सेक्टर-3 के निवासी छात्र सार्थक त्रिपाठी ने अपनी शानदार शैक्षणिक उपलब्धि से न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम गर्व से ऊँचा कर दिया है। सार्थक ने हाल ही में घोषित परीक्षा परिणाम में गणित विषय में सर्वाधिक 95% अंक प्राप्त किए हैं, जबकि उनका कुल प्रतिशत 92% रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">सार्थक, अधिवक्ता  विवेक कुमार त्रिपाठी के पुत्र हैं और शुरू से ही पढ़ाई में मेहनती व अनुशासित छात्र माने जाते हैं। उनकी इस सफलता के पीछे उनकी लगातार मेहनत, लगन और पढ़ाई के प्रति समर्पण को मुख्य कारण बताया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">विद्यालय की शिक्षिका अंशु रस्तोगी ने सार्थक की इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि, “सार्थक ने अपनी मेहनत और लगन से स्कूल का नाम रोशन किया है। वह अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा हैं।” उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि सार्थक आगे भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करते रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-15-at-22.37.39.jpeg" alt="छात्र सार्थक त्रिपाठी ने गणित में 95% अंक प्राप्त कर किया क्षेत्र और विद्यालय का नाम रोशन" width="1200" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, सार्थक के माता-पिता ने बताया कि उनके बेटे ने इस सफलता के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा, “हमें अपने बेटे पर गर्व है। उसकी मेहनत का ही यह परिणाम है। हम उसके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह आगे भी इसी तरह परिवार और समाज का नाम रोशन करता रहेगा।”</p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्र में भी सार्थक की इस उपलब्धि को लेकर खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया है। शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की उपलब्धियाँ यह दर्शाती हैं कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 23:03:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा कार्यकर्ता राष्ट्र के निर्माता होते है-विधायक राजमणि कोल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>  </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>कोराव (प्रयागराज)</strong></div>
<div>  </div>
<div>भारतीय जनता पार्टी बड़ोखर मंडल शारदा कान्वेंट स्कूल बड़ोखर में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 की दो दिवसीय कार्यशाला रविवार को समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में पार्टी के वक्ताओं ने संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन, सोशल मीडिया तथा सरकार की उपलब्धियों पर कार्यकर्ताओं को विस्तृत प्रशिक्षण दिया।</div>
<div>  </div>
<div>द्वितीय दिवस के चौथे सत्र में जिला उपाध्यक्ष राजेश्वरी तिवारी ने संगठन विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण विषय पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन का विस्तार केवल सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि समाज में राष्ट्रचेतना जागृत करने के लिए किया जाता है।</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172933/bjp-workers-are-the-builders-of-the-nation-mla"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/rajneeti2.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div> </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>कोराव (प्रयागराज)</strong></div>
<div> </div>
<div>भारतीय जनता पार्टी बड़ोखर मंडल शारदा कान्वेंट स्कूल बड़ोखर में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 की दो दिवसीय कार्यशाला रविवार को समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में पार्टी के वक्ताओं ने संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन, सोशल मीडिया तथा सरकार की उपलब्धियों पर कार्यकर्ताओं को विस्तृत प्रशिक्षण दिया।</div>
<div> </div>
<div>द्वितीय दिवस के चौथे सत्र में जिला उपाध्यक्ष राजेश्वरी तिवारी ने संगठन विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण विषय पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन का विस्तार केवल सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि समाज में राष्ट्रचेतना जागृत करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच बनाकर संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।</div>
<div> </div>
<div>पांचवें सत्र में भाजपा जिला मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार चतुर्वेदी ने बूथ प्रबंधन एवं ‘मन की बात’ कार्यक्रम पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि बूथ समितियों में सभी वर्गों का समावेश, निरंतर संवाद, सम्पर्क प्रवास और नियमित बैठकें ही “मेरा बूथ सबसे मजबूत” अभियान की आधारशिला हैं।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने बताया कि यदि बूथ स्तर पर नियमित अवलोकन और विश्लेषण के साथ कार्य किया जाए तो संगठन की मजबूती सुनिश्चित होती है। उन्होंने बूथ पर आयोजित होने वाले छह प्रमुख कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सामूहिक रूप से सुनने की संगठनात्मक रूपरेखा भी प्रस्तुत की।</div>
<div> </div>
<div>छठे सत्र में पूर्व जिला मंत्री अनिल मिश्र ने सोशल मीडिया, नमो ऐप, सरल ऐप तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग के बारे में कार्यकर्ताओं को बिंदुवार जानकारी दी और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर बल दिया।</div>
<div> </div>
<div>समापन सत्र को संबोधित करते हुए कोरांव विधायक राजमणि कोल ने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें उद्योगों के नाम पर केवल ऋण देकर संस्थाओं को बंद होने की स्थिति में छोड़ देती थीं, जबकि वर्ष 2017 के बाद भाजपा सरकार ने देश-विदेश से उद्योगों को लाकर युवाओं को रोजगार देने का कार्य किया है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना के साथ बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा किसानों-नौजवानों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। साथ ही सरकारी नौकरियों के साथ व्यापार और उद्योग के लिए नि:शुल्क ऋण योजनाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>कार्यशाला के समापन सत्र की अध्यक्षता प्रांतीय परिषद सदस्य रामअवध कुशवाहा ने की, जबकि स्वागत एवं आभार मंडल अध्यक्ष रामराज सिंह पटेल ने व्यक्त किया।</div>
<div> </div>
<div>जमुना प्रसाद मिश्र,पवन कुमार पटेल,सूर्यवली पांडेय,अमरेन्द्र कुशवाहा आदि ने अलग-अलग सत्रो की अध्यक्षता की 24 घंटे के प्रशिक्षण कार्यशाला में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 00:57:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भाजपा नेत्री सह समाजसेवी शेफाली गुप्ता ने महिलाओं के अधिकार, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>हजारीबाग, झारखंड:- </strong></div>
<div>  </div>
<div style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भाजपा नेत्री सह समाजसेवी शेफाली गुप्ता ने महिलाओं के अधिकार, शिक्षा, आत्मनिर्भरता एवं सशक्तिकरण को लेकर विशेष संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता से समाज एवं देश को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शेफाली गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए तथा शिक्षा को जीवन का सबसे बड़ा हथियार बनाना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब महिलाएं शिक्षित और आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी समाज और राष्ट्र का वास्तविक विकास संभव होगा। उन्होंने आगे कहा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172880/on-international-womens-day-bjp-leader-cum-social-worker-shefali"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/news-2.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>हजारीबाग, झारखंड:- </strong></div>
<div> </div>
<div style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भाजपा नेत्री सह समाजसेवी शेफाली गुप्ता ने महिलाओं के अधिकार, शिक्षा, आत्मनिर्भरता एवं सशक्तिकरण को लेकर विशेष संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता से समाज एवं देश को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शेफाली गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए तथा शिक्षा को जीवन का सबसे बड़ा हथियार बनाना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब महिलाएं शिक्षित और आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी समाज और राष्ट्र का वास्तविक विकास संभव होगा। उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ लेकर महिलाएं अपने जीवन को बेहतर बना सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और समाज में अपनी मजबूत पहचान बनाएं। समाज में महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान दिलाना हम सभी की जिम्मेदारी है, और इसके लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 19:46:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: कौन है IAS अफसर Farah Hussain, हर तरफ हो रही चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: भारत में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। हर साल देशभर के लाखों छात्र IAS, आईपीएस (IPS) या आईएफएस (IFS) अधिकारी बनने का सपना देखते हैं, लेकिन, उन्हें से कुछ लोग ही इस सपने को पूरा कर पाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अधिकारी फराह हुसैन (IAS Farah Hussain के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी का एग्जाम पास किया और आईएएस अधिकारी बनकर अपने परिवार का सपना पूरा किया। खास बात यह है कि Farah Hussain ऐसे परिवार से आती हैं जो उपलब्धियों से भरा हुई है,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162418/success-story-who-is-ias-officer-farah-hussain-is-being"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-farrah-hussain.jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: भारत में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। हर साल देशभर के लाखों छात्र IAS, आईपीएस (IPS) या आईएफएस (IFS) अधिकारी बनने का सपना देखते हैं, लेकिन, उन्हें से कुछ लोग ही इस सपने को पूरा कर पाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अधिकारी फराह हुसैन (IAS Farah Hussain के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी का एग्जाम पास किया और आईएएस अधिकारी बनकर अपने परिवार का सपना पूरा किया। खास बात यह है कि Farah Hussain ऐसे परिवार से आती हैं जो उपलब्धियों से भरा हुई है, जिनमें से पहले से ही कई लोग टॉप सरकारी पदों पर तैनात है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Farah Hussain का जन्म राजस्थान के झुंझुनू जिले में हुआ था। वह नवान गांव में एक मुस्लिम परिवार से आती हैं, जिसकी जड़ें सार्वजनिक सेवा में गहरी हैं। Farah Hussain ने हायर एजुकेशन की और इसके बाद IAS अधिकारी अपने परिवार का नाम रौशन किया।</p>
<p>बताया जा रहा है कि Farah Hussain ने राजस्थान के झुंझुनू में ही अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और इसके बाद वह मुंबई चली गईं। जहां पर उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। खबरों की माने, तो शुरू में Farah Hussainडॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन समय के साथ उनके लक्ष्य बदल भी गए।</p>
<p>वह पहले एक क्रिमिनल वकील बनीं और बाद में उन्होंन UPSC की तैयारी करना शुरू कर दिया। Farah Hussain ने 26 साल की उम्र में 2016 में यूपीएसई परीक्षा दूसरा अटेंप्ट दिया और एग्जाम पास कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 267 हासिल की।</p>
<p><strong>फराह खान के परिवार के अधिकतर लोग हैं सरकारी अधिकारी</strong></p>
<p>बताया जाता है कि फराह खान एक ऐसे परिवार से आती हैं। जहां अधिकतर लोग सरकारी अधिकारी है। उनके पिता का नाम अशफाक हुसैन हैं, जो एक जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत थे और साल 2016 में IAS के रूप में पदोन्नत हु। वहीं उनके चाचा का नाम लियाकत खान हैं।</p>
<p>वह एक सीनियर IPS अधिकारी थे और जो IG के रूप में रिटायर हुए। इसके अलावा वह वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे। वहीं उनके दूसरे चाचा का जाकिर खान है। वह ङी एक IAS अधिकारी हैं।</p>
<p>इसके अलावा आईएएस अधिकारी फराह की बड़ी बहन राजस्थान हाईकोर्ट में वकील हैं। उनके चचेरे भाई और ससुराल वाले भी अहम पदों पर कार्यरत हैं ।</p>
<p><strong>पति भी हैं आईएसएस अधिकारी</strong></p>
<p>खबरों की मानें, तो फराह खान के पति कमर उल जमान चौधरी भी एक IAS अधिकारी हैं, वह अभी जोधपुर में तैनात हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Dec 2025 13:13:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ कैरियर कॉन्वेंट कॉलेज में किंडरगार्टन क्लास प्रेजेंटेशन</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format2"><strong>कैरियर कान्वेंट कॉलेज में बच्चों के आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता का हुआ शानदार प्रदर्शन</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br /><strong>विकास नगर -लखनऊ</strong></p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा के साथ नैतिक और सामाजिक मूल्यों के समावेश को प्राथमिकता देते हुए, कैरियर कॉन्वेंट कॉलेज के प्री-प्राइमरी विंग ने 22 नवंबर  को कॉलेज ग्राउंड में किंडरगार्टन क्लास प्रेजेंटेशन का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम बच्चों के आत्मविश्वास, सीखने की क्षमता और मंच कौशल का अद्भुत संगम था, जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावकों और शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति दर्ज की गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/whatsapp-image-2025-11-22-at-18.14.53_c13e9a1d.jpg" alt="लखनऊ कैरियर कॉन्वेंट कॉलेज में किंडरगार्टन क्लास प्रेजेंटेशन" width="1200" height="800" /><br /><strong>प्रारंभिक शिक्षा भविष्य की नींव</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><br />कार्यक्रम की शुरुआत में कॉलेज के प्रिंसिपल श्री जॉबी जॉन ने सभी अतिथियों और अभिभावकों का हार्दिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161315/kindergarten-class-presentation-at-lucknow-career-convent-college"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/whatsapp-image-2025-11-22-at-18.14.53_c13e9a1d.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format2"><strong>कैरियर कान्वेंट कॉलेज में बच्चों के आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता का हुआ शानदार प्रदर्शन</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br /><strong>विकास नगर -लखनऊ</strong></p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा के साथ नैतिक और सामाजिक मूल्यों के समावेश को प्राथमिकता देते हुए, कैरियर कॉन्वेंट कॉलेज के प्री-प्राइमरी विंग ने 22 नवंबर  को कॉलेज ग्राउंड में किंडरगार्टन क्लास प्रेजेंटेशन का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम बच्चों के आत्मविश्वास, सीखने की क्षमता और मंच कौशल का अद्भुत संगम था, जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावकों और शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति दर्ज की गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/whatsapp-image-2025-11-22-at-18.14.53_c13e9a1d.jpg" alt="लखनऊ कैरियर कॉन्वेंट कॉलेज में किंडरगार्टन क्लास प्रेजेंटेशन" width="1200" height="800"></img><br /><strong>प्रारंभिक शिक्षा भविष्य की नींव</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><br />कार्यक्रम की शुरुआत में कॉलेज के प्रिंसिपल श्री जॉबी जॉन ने सभी अतिथियों और अभिभावकों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा उनकी भावी शिक्षा की नींव होती है। इस उम्र में सीखते हुए खेलने की कला ही उन्हें आत्मविश्वासी बनाती है।” प्रधानाचार्य के संबोधन के बाद, नन्हे-मुन्नों ने एक मनोहारी स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/whatsapp-image-2025-11-22-at-15.38.04_ce4bcf24.jpg" alt="लखनऊ कैरियर कॉन्वेंट कॉलेज में किंडरगार्टन क्लास प्रेजेंटेशन" width="1200" height="800"></img></h4>
<h4 style="text-align:justify;"><br /><strong>शैक्षणिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोहा मन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण में बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए एक-से-एक बढ़कर शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित प्रदर्शन शामिल थे। इन प्रस्तुतियों ने बच्चों के कौशल और अनुशासन का शानदार प्रदर्शन किया:</p>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;">शैक्षणिक विषय: बच्चों ने इंग्लिश एंड पार्ट्स ऑफ स्पीच पर आधारित रोचक गतिविधियाँ प्रस्तुत कीं, जो उनकी भाषा और व्याकरण की समझ को दर्शाती थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">सांस्कृतिक नाटक: नन्हे कलाकारों ने लोकप्रिय लोककथा स्लीपिंग ब्यूटी पर आधारित एक मनमोहक नाटक का मंचन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">रोल प्ले: बच्चों ने कम्युनिटी हेल्पर्स की थीम पर शानदार रोल प्ले प्रस्तुत किया, जिससे सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मनोरंजन: एक्शन सॉन्ग्स और डांस के साथ-साथ नैतिक संदेश देने वाले स्किट प्रदर्शन ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मंच पर छोटे-छोटे हाथों का ताल मिलाना और उनके चेहरे पर झलकता मासूम आत्मविश्वास, हर दर्शक के लिए गर्व और खुशी का पल था।</p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/whatsapp-image-2025-11-22-at-15.38.04_6cb97950.jpg" alt="लखनऊ कैरियर कॉन्वेंट कॉलेज में किंडरगार्टन क्लास प्रेजेंटेशन" width="1200" height="800"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>अतिथियों और अभिभावकों ने की सराहना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><br />कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शबाना खान (निदेशक व शिक्षाविद) और मधु नारायण (प्रिंसिपल, कैरियर गर्ल्स कॉलेज) उपस्थित रहीं। अतिथियों ने बच्चों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि, "आज के बच्चे अत्यधिक प्रतिभाशाली हैं और विद्यालय द्वारा प्रदान किया जा रहा यह मंच उनके व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।"</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/VvP1IAyX2C8" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कई अभिभावकों ने बच्चों के प्रदर्शन को देखकर भावुकता व्यक्त की और शिक्षिकाओं के योगदान को सराहनीय बताया।</strong></p>
<h4 style="text-align:justify;"><br /><strong>सफलता का श्रेय शिक्षकों को</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"> <br />कार्यक्रम का समापन प्रिंसिपल जॉबी जॉन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने इस सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह किंडरगार्टन क्लास प्रेजेंटेशन न केवल मनोरंजन का एक साधन था, बल्कि यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और अवसर मिलने पर नन्ही प्रतिभाएँ भविष्य में बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं। यह आयोजन बच्चों की सर्वांगीण शिक्षा के प्रति कॉलेज की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161315/kindergarten-class-presentation-at-lucknow-career-convent-college</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 20:49:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: किसान की बेटी बनी IAS अधिकारी, पढ़ें तपस्या परिहार की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: हर साल भारत में लाखों छात्र UPSC की परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही इस कठिनतम परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पाते हैं। जो इसे पास करते हैं, उनमें जुनून, समर्पण और कड़ी मेहनत का जबरदस्त मिश्रण होता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है IAS तपस्या परिहार की, जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल कर यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है।</p>
<p><strong>छोटे से गांव से निकली बड़ी सोच</strong></p>
<p>तपस्या मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160449/ias-success-story-farmers-daughter-becomes-ias-officer-read-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/3d89f015d491e6f505428e42844aa3f7.webp" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: हर साल भारत में लाखों छात्र UPSC की परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही इस कठिनतम परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पाते हैं। जो इसे पास करते हैं, उनमें जुनून, समर्पण और कड़ी मेहनत का जबरदस्त मिश्रण होता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है IAS तपस्या परिहार की, जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल कर यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है।</p>
<p><strong>छोटे से गांव से निकली बड़ी सोच</strong></p>
<p>तपस्या मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक छोटे से गांव जबेरा से आती हैं। उनके पिता किसान हैं और परिवार आर्थिक रूप से सामान्य स्थिति में था। गांव की एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली तपस्या ने संसाधनों की कमी को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने खुद को हमेशा पढ़ाई और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रखा।</p>
<p><strong>केंद्रीय विद्यालय से ILS लॉ कॉलेज तक</strong></p>
<p>तपस्या ने शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से की और आगे की पढ़ाई के लिए पुणे स्थित ILS Law College से कानून की डिग्री प्राप्त की। यहीं से उनके मन में UPSC की तैयारी करने का विचार जन्मा। कानून की पढ़ाई के दौरान उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखना शुरू किया।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में असफलता</strong></p>
<p>UPSC के पहले प्रयास में तपस्या प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर पाईं। यह असफलता किसी के भी आत्मविश्वास को डगमगा सकती है, लेकिन तपस्या ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी रणनीति पर पुनर्विचार किया और यह तय किया कि अगली बार तैयारी और मजबूत होनी चाहिए।</p>
<p><strong>बिना कोचिंग के की सेल्फ स्टडी</strong></p>
<p>दूसरे प्रयास में तपस्या ने कोचिंग पर निर्भर रहने के बजाय सेल्फ स्टडी को चुना। उन्होंने मॉक टेस्ट, करंट अफेयर्स, और लगातार रिवीजन पर फोकस किया। साथ ही सोशल मीडिया से दूरी बनाकर अपनी ऊर्जा सिर्फ पढ़ाई में लगाई। उनका मानना था कि सही रणनीति और निरंतरता ही सफलता की कुंजी है।</p>
<p><strong>AIR 23 और IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा</strong></p>
<p>तपस्या की मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल की। इस शानदार उपलब्धि के साथ वे IAS अधिकारी बनीं और लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गईं। उनका यह सफर बताता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार हों, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 20:31:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: कौन है IAS अफसर फराह हुसैन, हर तरफ हो रही चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: भारत में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। हर साल देशभर के लाखों छात्र IAS, आईपीएस (IPS) या आईएफएस (IFS) अधिकारी बनने का सपना देखते हैं, लेकिन, उन्हें से कुछ लोग ही इस सपने को पूरा कर पाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अधिकारी फराह हुसैन (IAS Farah Hussain के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी का एग्जाम पास किया और आईएएस अधिकारी बनकर अपने परिवार का सपना पूरा किया। खास बात यह है कि Farah Hussain ऐसे परिवार से आती हैं जो उपलब्धियों से भरा हुई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160315/ias-success-story-who-is-ias-officer-farah-hussain-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-farah-hussain.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: भारत में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। हर साल देशभर के लाखों छात्र IAS, आईपीएस (IPS) या आईएफएस (IFS) अधिकारी बनने का सपना देखते हैं, लेकिन, उन्हें से कुछ लोग ही इस सपने को पूरा कर पाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अधिकारी फराह हुसैन (IAS Farah Hussain के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी का एग्जाम पास किया और आईएएस अधिकारी बनकर अपने परिवार का सपना पूरा किया। खास बात यह है कि Farah Hussain ऐसे परिवार से आती हैं जो उपलब्धियों से भरा हुई है, जिनमें से पहले से ही कई लोग टॉप सरकारी पदों पर तैनात है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Farah Hussain का जन्म राजस्थान के झुंझुनू जिले में हुआ था। वह नवान गांव में एक मुस्लिम परिवार से आती हैं, जिसकी जड़ें सार्वजनिक सेवा में गहरी हैं। Farah Hussain ने हायर एजुकेशन की और इसके बाद IAS अधिकारी अपने परिवार का नाम रौशन किया।</p>
<p>बताया जा रहा है कि Farah Hussain ने राजस्थान के झुंझुनू में ही अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और इसके बाद वह मुंबई चली गईं। जहां पर उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। खबरों की माने, तो शुरू में Farah Hussainडॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन समय के साथ उनके लक्ष्य बदल भी गए।</p>
<p>वह पहले एक क्रिमिनल वकील बनीं और बाद में उन्होंन UPSC की तैयारी करना शुरू कर दिया। Farah Hussain ने 26 साल की उम्र में 2016 में यूपीएसई परीक्षा दूसरा अटेंप्ट दिया और एग्जाम पास कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 267 हासिल की।</p>
<p><strong>फराह खान के परिवार के अधिकतर लोग हैं सरकारी अधिकारी</strong></p>
<p>बताया जाता है कि फराह खान एक ऐसे परिवार से आती हैं। जहां अधिकतर लोग सरकारी अधिकारी है। उनके पिता का नाम अशफाक हुसैन हैं, जो एक जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत थे और साल 2016 में IAS के रूप में पदोन्नत हु। वहीं उनके चाचा का नाम लियाकत खान हैं।</p>
<p>वह एक सीनियर IPS अधिकारी थे और जो IG के रूप में रिटायर हुए। इसके अलावा वह वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे। वहीं उनके दूसरे चाचा का जाकिर खान है। वह ङी एक IAS अधिकारी हैं।</p>
<p>इसके अलावा आईएएस अधिकारी फराह की बड़ी बहन राजस्थान हाईकोर्ट में वकील हैं। उनके चचेरे भाई और ससुराल वाले भी अहम पदों पर कार्यरत हैं ।</p>
<p><strong>पति भी हैं आईएसएस अधिकारी</strong></p>
<p>खबरों की मानें, तो फराह खान के पति कमर उल जमान चौधरी भी एक IAS अधिकारी हैं, वह अभी जोधपुर में तैनात हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/160315/ias-success-story-who-is-ias-officer-farah-hussain-is</link>
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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 17:03:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेटवर्क काटने से दंगा शांत नहीं होता है </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी भी राष्ट्र की असली परीक्षा तब होती है जब उसकी सड़कों पर अराजकता का शोर हो और सत्ता के गलियारों में निर्णयों की बेचैनी। भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे लोकतंत्र में जब भी कहीं हिंसा, दंगा या तनाव की आग भड़कती है, तब प्रशासन की पहली प्रतिक्रिया होती है इंटरनेट बंद कर दो। यह निर्णय अब लगभग एक यांत्रिक प्रक्रिया बन चुका है, जैसे हर संकट का यही सार्वभौमिक इलाज हो। पर वास्तव में यह सवाल बार-बार उठाया जाना चाहिए कि क्या इंटरनेट बंद कर देना शांति का रास्ता है, या यह उस समाज की थकान और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156866/network-cutting-does-not-calm-the-riot"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/hindi-divas5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी भी राष्ट्र की असली परीक्षा तब होती है जब उसकी सड़कों पर अराजकता का शोर हो और सत्ता के गलियारों में निर्णयों की बेचैनी। भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे लोकतंत्र में जब भी कहीं हिंसा, दंगा या तनाव की आग भड़कती है, तब प्रशासन की पहली प्रतिक्रिया होती है इंटरनेट बंद कर दो। यह निर्णय अब लगभग एक यांत्रिक प्रक्रिया बन चुका है, जैसे हर संकट का यही सार्वभौमिक इलाज हो। पर वास्तव में यह सवाल बार-बार उठाया जाना चाहिए कि क्या इंटरनेट बंद कर देना शांति का रास्ता है, या यह उस समाज की थकान और शासन की असहायता का प्रतीक है जो संवाद के बजाय मौन को सुरक्षा समझ बैठा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इंटरनेट आज केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी धारा बन चुका है। यह शिक्षा का माध्यम है, व्यापार का आधार है, शासन का औज़ार है, और सबसे बढ़कर यह नागरिकता का दर्पण है। किसी नागरिक का बैंक खाता, राशन कार्ड, आधार प्रमाणीकरण, अस्पताल का अपॉइंटमेंट, स्कूल की परीक्षा, नौकरी की तलाश सब कुछ इसी डिजिटल ताने-बाने में जुड़ा है। जब किसी राज्य या जिले में इंटरनेट सस्पेंड कर दिया जाता है, तो यह केवल नेटवर्क का बटन बंद नहीं होता, बल्कि लाखों-करोड़ों जीवनों का प्रवाह रुक जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह निर्णय एक साथ संवाद, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और नागरिकता सब पर विराम लगा देता है। प्रशासनिक पक्ष का तर्क हमेशा यही रहता है कि इंटरनेट से अफवाहें फैलती हैं, गलत सूचनाएं फैलाकर भीड़ भड़काई जाती है, और इसलिए नेटवर्क बंद करना ज़रूरी है। यह तर्क सुनने में उचित लगता है, लेकिन असल में यह लोकतांत्रिक समाज की आत्मा पर अविश्वास का बयान है। क्योंकि यदि कोई शासन यह मान ले कि उसके नागरिक इतने असंवेदनशील हैं कि केवल कुछ झूठे संदेशों से हिंसा पर उतर आएंगे, तो यह न केवल जनता की परिपक्वता पर, बल्कि शासन की नीतियों पर भी प्रश्नचिह्न है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इंटरनेट बंद करना अफवाहों का इलाज नहीं, बल्कि संवाद के पुल तोड़ देना है। यह उस विश्वास को तोड़ देता है जो किसी लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है राज्य और नागरिक के बीच भरोसे का रिश्ता। भारत अब दुनिया का वह देश बन गया है जहां सबसे अधिक बार इंटरनेट बंद किया जाता है। यह विडंबना ही है कि वही भारत जो डिजिटल इंडिया के नाम पर गर्व करता है, स्टार्टअप्स की राजधानी बनने का सपना देखता है, वही भारत डिजिटल अंधकार का सबसे बड़ा क्षेत्र भी बन चुका है। कहीं परीक्षा लीक के नाम पर, कहीं चुनावी अशांति के डर से, कहीं किसानों के आंदोलन के समय, तो कहीं किसी दंगे के बहाने नेटवर्क काट देना एक आसान प्रशासनिक आदत बन गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह सुविधा भले ही तत्कालिक राहत देती हो, पर यह लोकतंत्र के उस मूल विचार पर चोट करती है कि जनता को शासन में सक्रिय, जागरूक और संवादशील रहना चाहिए। दंगे या हिंसा के समय इंटरनेट बंद कर देना एक प्रकार का डिजिटल आपातकाल है। यह कदम उस संवैधानिक भावना के विपरीत है जो नागरिक को अभिव्यक्ति, सूचना और भागीदारी का अधिकार देती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में स्पष्ट कहा था कि इंटरनेट आज नागरिक के मूल अधिकारों का हिस्सा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एक जिला अधिकारी या गृह सचिव का एक आदेश पूरे राज्य की आवाज़ बंद कर सकता है। यह असंतुलन बताता है कि तकनीकी युग में भी लोकतंत्र के भीतर सत्ता और अधिकार के बीच कितना असमान समीकरण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब इंटरनेट बंद होता है, तब केवल अफवाहें नहीं रुकतीं, बल्कि सच भी बंद हो जाता है। मीडिया की आवाज़ थम जाती है, नागरिक समाज की रिपोर्टें रुक जाती हैं, और जो घटनाएं धरातल पर घट रही होती हैं, उनका कोई दस्तावेज़ नहीं बन पाता। इस स्थिति में जो सबसे बड़ी हानि होती है, वह है सत्य का अभाव। अफवाहें तब और अधिक प्रबल हो जाती हैं क्योंकि लोग अनुमान, भय और कल्पनाओं से अपनी कहानियां गढ़ने लगते हैं। इंटरनेट बंद कर देने से अफवाहें खत्म नहीं होतीं, बल्कि उनका रूप और भी अमूर्त और खतरनाक हो जाता है वे बिना प्रमाण के, बिना जवाबदेही के फैलती हैं। दरअसल हिंसा की जड़ किसी एक वायरल वीडियो या संदेश में नहीं होती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उसकी जड़ समाज के भीतर दशकों से पल रहे असमानता, भेदभाव और अविश्वास में होती है। इंटरनेट उस आग की चिंगारी हो सकता है, पर बारूद तो पहले से जमा होता है। शासन का कर्तव्य उस बारूद को हटाना है, न कि हवा रोक देना। जब प्रशासन इंटरनेट बंद करता है, तो वह इस सच्चाई से मुंह मोड़ लेता है कि हिंसा रोकने का उपाय तकनीकी नहीं, सामाजिक है। यह उपाय संवाद, शिक्षा, और पारदर्शिता से आता है, दमन से नहीं। कई बार यह भी देखा गया है कि इंटरनेट शटडाउन का निर्णय राजनीतिक रूप से सुविधाजनक हो जाता है। जब सरकारें चाहती हैं कि जनता को कुछ न दिखे, न सुने, न बोले, तब इंटरनेट बंद कर देना सबसे प्रभावी उपाय बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह दंगों तक सीमित नहीं रहा। अब यह विरोध प्रदर्शनों, आंदोलनों और कभी-कभी लोकतांत्रिक असहमति के समय भी लागू किया जाने लगा है। यह प्रवृत्ति बताती है कि सत्ता धीरे-धीरे सूचना पर नियंत्रण को शासन का पर्याय मानने लगी है। यह खतरनाक संकेत है, क्योंकि लोकतंत्र का सार ही सूचना की स्वतंत्रता और विचारों की बहुलता है। जब विचारों की आवाज़ें बंद होंगी, तब हिंसा सड़कों पर नहीं, समाज के भीतर होगी मौन और अनकही। आर्थिक दृष्टि से भी इसका दुष्परिणाम व्यापक है। प्रत्येक घंटे का इंटरनेट शटडाउन करोड़ों की हानि लाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">छोटे व्यापारी, ऑनलाइन सेवाएं, छात्र, चिकित्सक, किसान सब प्रभावित होते हैं। सबसे अधिक असर गरीब वर्ग पर पड़ता है जो सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और नौकरी की जानकारी के लिए मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर है। इंटरनेट बंद करना इसलिए केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय भी है, क्योंकि यह सबसे कमजोर को सबसे पहले चोट पहुंचाता है। इंटरनेट बंद करने की प्रवृत्ति को समझने के लिए हमें सत्ता की मानसिकता को समझना होगा। सत्ता के लिए नियंत्रण हमेशा सुरक्षा जैसा दिखता है, जबकि नागरिक के लिए वही नियंत्रण भय बन जाता है। जब शासन यह मान ले कि सुरक्षा का अर्थ संवाद को रोकना है, तब वह धीरे-धीरे उस औपनिवेशिक मानसिकता में लौट आता है जो जनता को शासित वर्ग मानती थी, सहभागी नहीं। स्वतंत्र भारत के लिए यह सबसे बड़ा नैतिक पतन होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज में शांति लाने का असली उपाय यह नहीं कि हम नेटवर्क काट दें, बल्कि यह कि हम सामाजिक नेटवर्क मजबूत करें। विश्वास, शिक्षा और आपसी संवाद के पुल बनाएं। शासन को तकनीकी दमन नहीं, बल्कि सूचना की साक्षरता पर ध्यान देना चाहिए। यदि जनता डिजिटल मीडिया की कार्यप्रणाली समझे, यदि लोग जानें कि फर्जी खबरों की पहचान कैसे करें, तो किसी भी अफवाह का असर सीमित रहेगा। इसी तरह, सरकार को भी तकनीकी विकल्पों पर विचार करना चाहिए। पूरे नेटवर्क पर प्रतिबंध के बजाय केवल उन विशेष प्लेटफार्मों या खातों को चिन्हित किया जाए जो हिंसा भड़काने में भूमिका निभा रहे हों।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह उपाय नियंत्रण और स्वतंत्रता दोनों के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है। दंगे और हिंसा से निपटने में प्रशासन को डर नहीं, विश्वास के साथ काम करना चाहिए। नागरिकों से संवाद करें, मीडिया को सही जानकारी दें, और सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहों का प्रतिवाद करें। सरकार चाहे तो इंटरनेट को बंद करने के बजाय उसे शांति का औज़ार बना सकती है‌ सही सूचनाएं प्रसारित करके, अफवाहों का तुरंत खंडन करके और जनता को सच से जोड़कर। यही तकनीकी युग की सबसे बड़ी ताकत है, और यही वह रास्ता है जो समाज को अंधकार से बाहर ला सकता है। यह भी स्मरण रहे कि हर बार जब इंटरनेट बंद किया जाता है, तब लोकतंत्र की सांसें कुछ पल के लिए थम जाती हैं। संवाद से ही समाज जीवित रहता है, और जब संवाद बंद होता है, तब भय और नफरत का शोर बढ़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसी लोकतांत्रिक शासन का यह दायित्व है कि वह भय से नहीं, विश्वास से शासन करे; दमन से नहीं, संवाद से व्यवस्था बनाए। इंटरनेट सस्पेंड करना आसान है, पर शांति बनाना कठिन है। और शासन की असली परिपक्वता उसी कठिनाई को स्वीकार करने में है। इसलिए अब समय है कि भारत इंटरनेट शटडाउन की अपनी नीति पर पुनर्विचार करे। उसे यह मानना होगा कि शांति नेटवर्क बंद करने से नहीं, नेटवर्क जोड़ने से आती है। हमें ऐसी शासन संस्कृति चाहिए जो सूचना से नहीं डरती, बल्कि उसे जिम्मेदारी से प्रयोग करना सिखाती है। हमें ऐसे नागरिक चाहिए जो तकनीक को नफरत का नहीं, समझ का माध्यम बनाएं। तभी डिजिटल इंडिया वाकई लोकतांत्रिक इंडिया बन पाएगा। अंततः प्रश्न यही है कि क्या हिंसा का जवाब मौन से दिया जा सकता है?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या शांति तब आएगी जब हर मोबाइल सिग्नल बंद कर दिया जाए, हर स्क्रीन अंधेरी कर दी जाए, हर नागरिक को चुप करा दिया जाए? नहीं शांति तब आएगी जब सच बोले जाने की हिम्मत होगी, जब संवाद बचेगा, जब लोग एक-दूसरे की बात सुन सकेंगे। इंटरनेट उस संवाद का सबसे बड़ा पुल है। उसे तोड़ देना शांति नहीं लाता, केवल अंधकार बढ़ाता है। लोकतंत्र में हर व्यक्ति की आवाज़ महत्वपूर्ण है। इंटरनेट उन आवाज़ों को जोड़ता है, उन्हें समाज के केंद्र में लाता है। जब किसी दंगे के समय यह आवाज़ बंद कर दी जाती है, तो हम न केवल संचार का रास्ता काटते हैं, बल्कि नागरिकता की आत्मा को भी मौन कर देते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और एक मौन समाज, चाहे वह कितना भी सुरक्षित दिखे, भीतर से हमेशा असुरक्षित होता है। इसलिए यह कहना नितांत आवश्यक है कि दंगे की आग बुझाने का उपाय नेटवर्क काटना नहीं, संवाद जलाए रखना है। इंटरनेट सस्पेंड कर देना समाधान नहीं, बल्कि उस बीमारी की स्वीकारोक्ति है जिसे हम ठीक करना ही नहीं चाहते। लोकतंत्र की सांसें तभी चलेंगी जब हर नागरिक, हर नेटवर्क और हर आवाज़ खुली रहेगी। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Oct 2025 15:47:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: कौन है IAS अफसर Farah Hussain, हर तरफ हो रही चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: भारत में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। हर साल देशभर के लाखों छात्र IAS, आईपीएस (IPS) या आईएफएस (IFS) अधिकारी बनने का सपना देखते हैं, लेकिन, उन्हें से कुछ लोग ही इस सपने को पूरा कर पाते हैं। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अधिकारी फराह हुसैन (IAS Farah Hussain के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी का एग्जाम पास किया और आईएएस अधिकारी बनकर अपने परिवार का सपना पूरा किया। खास बात यह है कि Farah Hussain ऐसे परिवार से आती हैं जो उपलब्धियों से भरा हुई है,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155718/who-is-the-success-story-ias-officer-farah-hussain-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-farah-hussain-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: भारत में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। हर साल देशभर के लाखों छात्र IAS, आईपीएस (IPS) या आईएफएस (IFS) अधिकारी बनने का सपना देखते हैं, लेकिन, उन्हें से कुछ लोग ही इस सपने को पूरा कर पाते हैं। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अधिकारी फराह हुसैन (IAS Farah Hussain के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी का एग्जाम पास किया और आईएएस अधिकारी बनकर अपने परिवार का सपना पूरा किया। खास बात यह है कि Farah Hussain ऐसे परिवार से आती हैं जो उपलब्धियों से भरा हुई है, जिनमें से पहले से ही कई लोग टॉप सरकारी पदों पर तैनात है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Farah Hussain का जन्म राजस्थान के झुंझुनू जिले में हुआ था। वह नवान गांव में एक मुस्लिम परिवार से आती हैं, जिसकी जड़ें सार्वजनिक सेवा में गहरी हैं। Farah Hussain ने हायर एजुकेशन की और इसके बाद IAS अधिकारी अपने परिवार का नाम रौशन किया।</p>
<p>बताया जा रहा है कि Farah Hussain ने राजस्थान के झुंझुनू में ही अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और इसके बाद वह मुंबई चली गईं। जहां पर उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। खबरों की माने, तो शुरू में Farah Hussainडॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन समय के साथ उनके लक्ष्य बदल भी गए।</p>
<p>वह पहले एक क्रिमिनल वकील बनीं और बाद में उन्होंन UPSC की तैयारी करना शुरू कर दिया। Farah Hussain ने 26 साल की उम्र में 2016 में यूपीएसई परीक्षा दूसरा अटेंप्ट दिया और एग्जाम पास कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 267 हासिल की।</p>
<p><strong>फराह खान के परिवार के अधिकतर लोग हैं सरकारी अधिकारी</strong></p>
<p>बताया जाता है कि फराह खान एक ऐसे परिवार से आती हैं। जहां अधिकतर लोग सरकारी अधिकारी है। उनके पिता का नाम अशफाक हुसैन हैं, जो एक जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत थे और साल 2016 में IAS के रूप में पदोन्नत हु। वहीं उनके चाचा का नाम लियाकत खान हैं। वह एक सीनियर IPS अधिकारी थे और जो IG के रूप में रिटायर हुए। इसके अलावा वह वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे। वहीं उनके दूसरे चाचा का जाकिर खान है। वह ङी एक IAS अधिकारी हैं।</p>
<p>इसके अलावा आईएएस अधिकारी फराह की बड़ी बहन राजस्थान हाईकोर्ट में वकील हैं। उनके चचेरे भाई और ससुराल वाले भी अहम पदों पर कार्यरत हैं ।</p>
<p><strong>पति भी हैं आईएसएस अधिकारी</strong></p>
<p>खबरों की मानें, तो फराह खान के पति कमर उल जमान चौधरी भी एक IAS अधिकारी हैं, वह अभी जोधपुर में तैनात हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 11:57:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: किसान की बेटी बनी IAS अफसर, गांव से सीधा UPSC की टॉप लिस्ट में</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: भारत</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">हर</span> <span class="cf0">साल</span> <span class="cf0">लाखों</span> <span class="cf0">छात्र</span> <span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">जैसी</span> <span class="cf0">कठिन</span> <span class="cf0">परीक्षा</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तैयारी</span> <span class="cf0">करते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">लेकिन</span> <span class="cf0">केवल</span> <span class="cf0">वही</span> <span class="cf0">सफल</span> <span class="cf0">होते</span> <span class="cf0">हैं</span> <span class="cf0">जो</span> <span class="cf0">दृढ़</span> <span class="cf0">निश्चय</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मेहनत</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">आत्मविश्वास</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">भरे</span> <span class="cf0">होते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">ऐसी</span> <span class="cf0">ही</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">प्रेरणादायक</span> <span class="cf0">कहानी</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">मध्य</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तपस्या</span> <span class="cf0">परिहार</span> <span class="cf0">की</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">जिन्होंने</span> <span class="cf1">UPSC 2017 </span><span class="cf0">में</span> <span class="cf0">ऑल</span> <span class="cf0">इंडिया</span> <span class="cf0">रैंक</span><span class="cf0"> 23 </span><span class="cf0">हासिल</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी</span> <span class="cf0">बनने</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">सपना</span> <span class="cf0">पूरा</span> <span class="cf0">किया</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">उनका</span> <span class="cf0">सफर</span> <span class="cf0">यह</span> <span class="cf0">बताता</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">कि</span> <span class="cf0">अगर</span> <span class="cf0">आपका</span> <span class="cf0">इरादा</span> <span class="cf0">मजबूत</span> <span class="cf0">हो</span> <span class="cf0">तो</span> <span class="cf0">सपने</span> <span class="cf0">हकीकत</span> <span class="cf0">बन</span> <span class="cf0">सकते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">छोटे</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">गांव</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">तक की उड़ान</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">तपस्या परिहार मध्य प्रदेश के </span><span class="cf0">नरसिंहपुर</span><span class="cf0"> जिले</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155462/ias-success-story-ias-officer-became-the-daughter-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-success-story.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: भारत</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">हर</span> <span class="cf0">साल</span> <span class="cf0">लाखों</span> <span class="cf0">छात्र</span> <span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">जैसी</span> <span class="cf0">कठिन</span> <span class="cf0">परीक्षा</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तैयारी</span> <span class="cf0">करते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">लेकिन</span> <span class="cf0">केवल</span> <span class="cf0">वही</span> <span class="cf0">सफल</span> <span class="cf0">होते</span> <span class="cf0">हैं</span> <span class="cf0">जो</span> <span class="cf0">दृढ़</span> <span class="cf0">निश्चय</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मेहनत</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">आत्मविश्वास</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">भरे</span> <span class="cf0">होते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">ऐसी</span> <span class="cf0">ही</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">प्रेरणादायक</span> <span class="cf0">कहानी</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">मध्य</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तपस्या</span> <span class="cf0">परिहार</span> <span class="cf0">की</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">जिन्होंने</span> <span class="cf1">UPSC 2017 </span><span class="cf0">में</span> <span class="cf0">ऑल</span> <span class="cf0">इंडिया</span> <span class="cf0">रैंक</span><span class="cf0"> 23 </span><span class="cf0">हासिल</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी</span> <span class="cf0">बनने</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">सपना</span> <span class="cf0">पूरा</span> <span class="cf0">किया</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">उनका</span> <span class="cf0">सफर</span> <span class="cf0">यह</span> <span class="cf0">बताता</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">कि</span> <span class="cf0">अगर</span> <span class="cf0">आपका</span> <span class="cf0">इरादा</span> <span class="cf0">मजबूत</span> <span class="cf0">हो</span> <span class="cf0">तो</span> <span class="cf0">सपने</span> <span class="cf0">हकीकत</span> <span class="cf0">बन</span> <span class="cf0">सकते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">छोटे</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">गांव</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">तक की उड़ान</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">तपस्या परिहार मध्य प्रदेश के </span><span class="cf0">नरसिंहपुर</span><span class="cf0"> जिले के छोटे से गांव </span><span class="cf0">जबेरा</span><span class="cf0"> की रहने वाली हैं। उनके पिता एक किसान हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण थी। लेकिन तपस्या ने कभी अपने सीमित संसाधनों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सफलता सिर्फ शहरों की नहीं होती, गांव की बेटियां भी अपने हौसले और मेहनत से देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर सकती हैं।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">केंद्रीय विद्यालय से शिक्षा और कानून की डिग्री</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">तपस्या की शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने </span><span class="cf1">ILS </span><span class="cf1">Law</span> <span class="cf1">College</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">पुणे</span><span class="cf0"> से कानून की डिग्री ली। </span><span class="cf0">कॉलेज</span><span class="cf0"> के दिनों में ही उनके मन में </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">का सपना आकार लेने लगा था। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी शुरू की।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">पहले</span> <span class="cf0">प्रयास</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">असफलता</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">लेकिन</span> <span class="cf0">हिम्मत</span> <span class="cf0">नहीं</span> <span class="cf0">हारी</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">तपस्या</span> <span class="cf0">ने</span> <span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">में</span> <span class="cf0">पहली</span> <span class="cf0">बार</span><span class="cf0"> 2016 </span><span class="cf0">में</span><span class="cf0"> प्रयास किया, लेकिन वे </span><span class="cf0">प्रीलिम्स</span><span class="cf0"> भी </span><span class="cf0">क्लियर</span><span class="cf0"> नहीं कर सकीं। इस असफलता से वे निराश जरूर हुईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद से सवाल किए, खुद को समझा और दोबारा तैयारी में लग गईं।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">सेल्फ</span> <span class="cf0">स्टडी</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">स्मार्ट</span><span class="cf0"> रणनीति बनी सफलता की कुंजी</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">दूसरे प्रयास में तपस्या ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी। उन्होंने </span><span class="cf0">कोचिंग</span><span class="cf0"> नहीं ली और पूरी तैयारी </span><span class="cf0">सेल्फ</span> <span class="cf0">स्टडी</span><span class="cf0"> से की। </span><span class="cf0">मॉक</span> <span class="cf0">टेस्ट</span><span class="cf0">, करंट </span><span class="cf0">अफेयर्स</span><span class="cf0"> और निरंतर </span><span class="cf0">रिवीजन</span><span class="cf0"> पर ध्यान दिया। उन्होंने </span><span class="cf0">सोशल</span><span class="cf0"> मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई में पूरा ध्यान लगाया और समय का भरपूर उपयोग किया।</span></p>
<p><span class="cf0">तपस्या की मेहनत रंग लाई और </span><span class="cf1">UPSC 2017 </span><span class="cf0">में</span> <span class="cf0">उन्होंने</span> <span class="cf1">AIR 23 </span><span class="cf0">हासिल</span> <span class="cf0">की</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">उनका</span> <span class="cf0">चयन</span> <span class="cf0">भारतीय</span> <span class="cf0">प्रशासनिक</span> <span class="cf0">सेवा</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">IAS) </span><span class="cf0">में</span> <span class="cf0">हुआ</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">आज</span> <span class="cf0">वे</span><span class="cf0"> न </span><span class="cf0">सिर्फ</span> <span class="cf0">अपने</span> <span class="cf0">गांव</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">राज्य</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">बल्कि</span> <span class="cf0">देशभर</span><span class="cf0"> की बेटियों के लिए </span><span class="cf0">एक</span><span class="cf0"> मिसाल बन चुकी हैं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 17:37:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IGNOU : इग्नू में दाखिले की अंतिम तिथि बढी, इस दिन तक करें आवेदन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IGNOU :</strong>    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू ) ने जुलाई 2025 सत्र के लिए दाखिले की अंतिम तिथि को 15 सितंबर से बढ़ाकर अब 30 सितंबर 2025 कर दिया है। इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मपाल ने बताया कि यह निर्णय उन विद्यार्थियों के हित में लिया गया है जो किसी कारणवश किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला नहीं ले पाए हैं। इग्नू में विभिन्न प्रकार के डिग्री एवं डिप्लोमा में दाखिले अभी चल रहे हैं। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।</p>
<p>  </p>
<p>उन्होंने आगे बताया कि जिन विद्यार्थियों ने पहले से किसी अन्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155405/the-last-date-for-admission-in-ignou-ignou-should-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ignou-admission-last-date-extended.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IGNOU :</strong>  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू ) ने जुलाई 2025 सत्र के लिए दाखिले की अंतिम तिथि को 15 सितंबर से बढ़ाकर अब 30 सितंबर 2025 कर दिया है। इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मपाल ने बताया कि यह निर्णय उन विद्यार्थियों के हित में लिया गया है जो किसी कारणवश किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला नहीं ले पाए हैं। इग्नू में विभिन्न प्रकार के डिग्री एवं डिप्लोमा में दाखिले अभी चल रहे हैं। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने आगे बताया कि जिन विद्यार्थियों ने पहले से किसी अन्य संस्थान में नियमित पाठ्यक्रम रेगुलर मोड में दाखिला ले रखा है, वे भी इग्नू से एक अतिरिक्त डिग्री या डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। यह उनके करियर विकल्पों को बढ़ाने में मदद करेगा और उन्हें दो - दो विषयों का गहरा ज्ञान दिलवाने में मददगार होगा।</p>
<p> </p>
<p>क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मपाल ने बताया कि जिन विद्यार्थियों ने जुलाई 2025 तक द्वितीय और तृतीय वर्ष में अपना री - रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है, उन्हें 200 रुपये लेट फीस का भुगतान करके 30 सितंबर तक विश्वविद्यालय द्वारा एक और अवसर प्रदान किया गया है। इग्नू में दाखिला प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। विद्यार्थी अपने एंड्रॉइड फोन या कंप्यूटर के माध्यम से https://ignouadmission.samarth.edu.in/ वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यदि किसी विद्यार्थी को आवेदन करने में कोई कठिनाई आती है, तो वे अपने नज़दीकी अध्ययन केंद्र या क्षेत्रीय केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 17:59:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी विद्यालयों में गिरती शिक्षा की गुणवत्ता: जवाबदेही किसकी ? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">    शिक्षा का महत्व निर्विवाद है, फिर भी अधिकतर सरकारी विद्यालयों में ‘शिक्षा की गुणवत्ता’, दिन-प्रतिदिन चिन्ताजनक होती जा रही है। यह एक कटु सत्य है कि, ‘‘हमारे देश के अनेक नेता, उच्चाधिकारी और प्रभावशाली लोग अपनी सन्तानों को विदेशों में अच्छी शिक्षा के लिए भेजते हैं या निजी स्तर के महंगे विद्यालयों में दाखिला दिलाते हैं। वहीं दूसरी ओर, सरकारी विद्यालय, जो देश की अधिकांश जनता के लिए शिक्षा प्राप्त करने का प्रमुख साधन हैं, उपेक्षित हैं और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।’’ क्या यह संयोग मात्र है या इसके पीछे हमारी प्रणाली की प्राथमिकताओं और जवाबदेही</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   </div>
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<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154125/quality-of-declining-education-in-government-schools-accountability"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/unnamed2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">  शिक्षा का महत्व निर्विवाद है, फिर भी अधिकतर सरकारी विद्यालयों में ‘शिक्षा की गुणवत्ता’, दिन-प्रतिदिन चिन्ताजनक होती जा रही है। यह एक कटु सत्य है कि, ‘‘हमारे देश के अनेक नेता, उच्चाधिकारी और प्रभावशाली लोग अपनी सन्तानों को विदेशों में अच्छी शिक्षा के लिए भेजते हैं या निजी स्तर के महंगे विद्यालयों में दाखिला दिलाते हैं। वहीं दूसरी ओर, सरकारी विद्यालय, जो देश की अधिकांश जनता के लिए शिक्षा प्राप्त करने का प्रमुख साधन हैं, उपेक्षित हैं और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।’’ क्या यह संयोग मात्र है या इसके पीछे हमारी प्रणाली की प्राथमिकताओं और जवाबदेही की कमी का गहरा सम्बन्ध है? सवाल यह उठता है कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता दिन-प्रतिदिन गिरती जा रही है, इसकी जवाबदेही किसकी है?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   प्रथम दृष्टया, सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में कमी के कई कारण हैं। जैसे-बुनियादी ढांचे की कमी, शिक्षकों की अपर्याप्त संख्या, किसी विद्यालय में अगर पर्याप्त संख्या में शिक्षक हैं भी तो वो अपनी जिम्मेदारी निष्ठा से नहीं निभाते, प्रशिक्षण का अभाव, आधुनिक शिक्षण विधियों का उपयोग न होना आदि प्रमुख समस्याएं हैं। इसके अलावा, सरकारी विद्यालयों को नीतिगत उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">  इसी दरम्यान यह सवाल पनपना जायज है कि, ‘‘जब देश के नीति-निर्माता और प्रभावशाली वर्ग के लोग अपनी सन्तानों को सरकारी विद्यालयों से दूर रखते हैं, तो स्वाभाविक रूप से इन संस्थानों के प्रति उनकी जवाबदेही कम हो जाती है। यदि उनके अपने बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे होते, तो शायद इनकी स्थिति सुधारने के लिए अधिक गम्भीर प्रयास किए जाते।’’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह स्थिति न केवल सामाजिक असमानता को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा के अधिकार जैसे संवैधानिक वादे को भी कमजोर करती है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे, समाज के आर्थिक स्तर से कमजोर वर्गों से आते हैं, जिनके लिए निजी स्कूलों में पढ़ना आर्थिक रूप से सम्भव नहीं है। यदि इन विद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा, तो हम एक ऐसी पीढ़ी तैयार करेंगे, जो अवसरों की कमी के कारण पिछड़ जाएगी। यह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर अन्याय है, बल्कि देश के समग्र विकास के लिए भी हानिकारक है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">  इस समस्या का समाधान तभी सम्भव है, जब नीति-निर्माता और समाज का प्रभावशाली वर्ग सरकारी शिक्षा प्रणाली को अपनी प्राथमिकता बनाए। एक सुझाव यह हो सकता है कि सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों के लिए सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई को अनिवार्य किया जाए। इससे न केवल जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि नीतियों में सुधार के लिए ठोस कदम भी उठाए जाएंगे। इसके साथ ही, शिक्षकों के प्रशिक्षण, स्कूलों में संसाधनों की उपलब्धता और नियमित निगरानी जैसे कदमों को प्राथमिकता देनी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘शिक्षा’ किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है। यदि हम चाहते हैं कि हमारा देश प्रगति के पथ पर अग्रसर हो, तो सरकारी विद्यालयों को मजबूत करना होगा। यह तभी सम्भव है, जब हमारी प्रणाली में जवाबदेही और समानता का भाव जागे। नेताओं और उच्चाधिकारियों को यह समझना होगा कि उनकी सन्तानों का भविष्य देश के हर बच्चे के भविष्य से जुड़ा है। सरकारी विद्यालयों को नजरअन्दाज करना, न केवल शिक्षा के क्षेत्र में असमानता को बढ़ावा देता है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक प्रगति को भी बाधित करता है। ऐसी परिस्थितियों में जरूरी यह है कि हम इस दिशा में ठोस और त्वरित कदम उठाएं, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार मिले।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 17:23:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
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