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                <title>fish farming - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>fish farming RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>श्रीभूमि सोनबील क्षेत्र के फाकुआ स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन के दो मिनट ठहराव की मांग तेज।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात:</strong>                  अनुसूचित जाति बहुल सोनबील क्षेत्र के फाकुआ गांव के विकास और क्षेत्रवासियों की यातायात सुविधा को ध्यान में रखते हुए गुवाहाटी-दुल्लभछड़ा एक्सप्रेस ट्रेन के फाकुआ रेलवे स्टेशन पर कम से कम दो मिनट के ठहराव की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी मांग को लेकर जनप्रतिनिधि एवं सेवानिवृत्त एडीसी नीलमणि दास ने गत 26 अगस्त को श्रीभूमि जिले के प्रभारी जिला आयुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। गुवाहाटी से दुल्लभछड़ा तक एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू होने से असम के विभिन्न क्षेत्रों के यात्रियों को सुविधा मिल रही है। स्थानीय लोगों ने इसके</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्रवासियों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186663/demand-for-two-minute-stoppage-of-express-train-at-fakua-station"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001746318.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात:</strong>         अनुसूचित जाति बहुल सोनबील क्षेत्र के फाकुआ गांव के विकास और क्षेत्रवासियों की यातायात सुविधा को ध्यान में रखते हुए गुवाहाटी-दुल्लभछड़ा एक्सप्रेस ट्रेन के फाकुआ रेलवे स्टेशन पर कम से कम दो मिनट के ठहराव की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी मांग को लेकर जनप्रतिनिधि एवं सेवानिवृत्त एडीसी नीलमणि दास ने गत 26 अगस्त को श्रीभूमि जिले के प्रभारी जिला आयुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। गुवाहाटी से दुल्लभछड़ा तक एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू होने से असम के विभिन्न क्षेत्रों के यात्रियों को सुविधा मिल रही है। स्थानीय लोगों ने इसके लिए सरकार, जनप्रतिनिधियों और रेलवे अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए फाकुआ में भी ट्रेन के ठहराव की मांग उठाई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्रवासियों के अनुसार, फाकुआ रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन के ठहराव की मांग को लेकर वर्ष 2024 से ही मालीगांव स्थित रेलवे के संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क किया जा रहा है। इस संबंध में कई बार ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक इस मांग पर ठोस निर्णय नहीं होने से लोगों में निराशा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि फाकुआ रेलवे स्टेशन के समीप स्थित सोनबील क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सोनबील की प्राकृतिक सुंदरता देखने के लिए विभिन्न स्थानों से विद्यार्थी, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि तथा सरकारी विभागों के अधिकारी भी पहुंचते हैं। ऐसे में फाकुआ स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव होने से पर्यटकों और अन्य यात्रियों की आवाजाही अधिक सुविधाजनक हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय नागरिकों के अनुसार, सोनबील क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग मछली पालन, कृषि और पशुपालन पर निर्भर हैं। आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के अनेक मेधावी विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करते हैं। फाकुआ में ट्रेन का ठहराव होने से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और आम यात्रियों को आवागमन में काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोगों का मानना है कि बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा होने तथा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। इसी मांग को लेकर करीमगंज सांसद कृपानाथ मालाह तथा जनप्रतिनिधि एवं सेवानिवृत्त एडीसी नीलमणि दास ने मालीगांव स्थित रेलवे के जीएम और डीआरएम से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर फाकुआ में ट्रेन के ठहराव की आवश्यकता से अवगत कराया था। उल्लेखनीय है कि गत 17 मार्च 2026 को लोकसभा में सांसद कृपानाथ मल्लाह ने दुल्लभछड़ा-गुवाहाटी एक्सप्रेस के फाकुआ सहित अरजीपुर और बिदारा स्टेशनों पर ठहराव की मांग भी उठाई थी। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं होने के कारण नीलमणि दास ने गत 26 अगस्त को एक बार फिर श्रीभूमि जिले के प्रभारी जिला आयुक्त से मुलाकात की। इस दौरान मालीगांव स्थित रेलवे के जीएम को संबोधित एक अनुस्मारक पत्र भी सौंपा गया। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की संयुक्त पहल से फाकुआ रेलवे स्टेशन पर गुवाहाटी-दुल्लभछड़ा एक्सप्रेस ट्रेन को जल्द ही कम से कम दो मिनट का ठहराव मिलेगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ट्रेन का महज दो मिनट का ठहराव भी फाकुआ और आसपास के पिछड़े क्षेत्रों के लिए शिक्षा, पर्यटन, रोजगार, व्यापार और आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। अब लोगों की नजर रेलवे के निर्णय पर टिकी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:32:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब कानपुर के खेतों, तालाबों में खिल रहे हैं मोती </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड स्थित ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड तकनीक के माध्यम से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से तैयार होने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183735/now-pearls-are-blooming-in-the-fields-and-ponds-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002109825.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड स्थित ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड तकनीक के माध्यम से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से तैयार होने वाले मोती करीब 50 लाख रुपये में बिकने का अनुमान है, जबकि मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस परियोजना का निरीक्षण कर अधिकारियों को इसे जनपद के अन्य खेत तालाब लाभार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत भूमि संरक्षण अनुभाग द्वारा ग्राम सम्भुआ निवासी श्रीमती रश्मि वर्मा के खेत में 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा एवं तीन मीटर गहरा खेत तालाब निर्मित कराया गया है। योजना के तहत उन्हें खेत तालाब निर्माण पर 50 प्रतिशत (अधिकतम ₹52,500) का अनुदान डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। कृषि विभाग एवं मणि एग्रो हब के सहयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने तालाब में मोती की खेती शुरू की। वर्तमान में इस परियोजना को लगभग नौ माह पूरे हो चुके हैं तथा करीब 18 माह में मोती तैयार हो जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परियोजना की विशेषता यह है कि चयनित सीपियों में विशेष साँचे (मोल्ड) प्रत्यारोपित किए गए हैं, जिन पर सीपी प्राकृतिक रूप से मोती की परतें चढ़ाती है। इसी प्रक्रिया से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल तैयार किए जा रहे हैं। सामान्य गोल मोतियों की तुलना में ऐसे डिजाइनर पर्ल आभूषण एवं सजावटी बाजार में अधिक मांग वाले उत्पाद माने जाते हैं, जिससे बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। वहीं सामान्य सीपियों में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता भी बढ़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">परियोजना के साथ मत्स्य पालन को भी जोड़ा गया है। रश्मि वर्मा ने बताया कि उनके दूसरे खेत तालाब में मत्स्य पालन किया जा रहा है और अब तक तीन बार मत्स्य उत्पादन किया जा चुका है। इससे प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। उन्होंने अन्य किसानों से भी खेत तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित न रखकर मत्स्य पालन, मोती की खेती तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 17:37:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तालाब में 30 कुंतल मछलियां मरीं,मत्स्य पालक को लाखों का नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[न्याय के लिए चौकी से कोतवाली तक भटक रहा पीड़ित,कार्रवाई का इंतजार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182231/30-quintals-of-fish-in-the-pond-loss-of-lakhs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260628-wa0358.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>लालगंज (रायबरेली)</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरेनी थाना क्षेत्र के तिवारीपुर कला गांव में तालाब में पाली गई मछलियों के संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिलने का मामला सामने आया है।घटना से मत्स्य पालक को लाखों रुपये के नुकसान का दावा किया गया है। पीड़ित ने गांव के ही एक युवक पर तालाब में जहरीला पदार्थ डालने का संदेह जताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।तिवारीपुर कला निवासी हरिश्चंद्र पुत्र गोवर्धन के अनुसार,उन्होंने तालाब में मत्स्य पालन कर रखा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनका कहना है कि 27 जून की सुबह जब वह तालाब पर पहुंचे तो वहां लगभग सभी मछलियां मृत अवस्था में तैरती मिलीं।पीड़ित की मानें तो करीब 30 कुंतल मछलियां मर गईं,जिससे उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।हरिश्चंद्र ने बताया कि तालाब में जहरीला पदार्थ डाल दिया,जिसके कारण मछलियों की मौत हुई।उन्होंने गांव के पिंटू निर्मल पर संदेह जताते हुए सरेनी थाने में तहरीर देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।पीड़ित का आरोप है कि भोजपुर पुलिस चौकी में शिकायत करने के बावजूद उसे अब तक न्याय नहीं मिला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं रविवार को पीड़ित ने कोतवाली पहुंचकर भी मामले की शिकायत की है।पीडित का कहना है कि वह पुलिस चौकी भोजपुर और सरेनी कोतवाली के बीच लगातार चक्कर लगाने को मजबूर हैं,लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।वहीं,सूत्रों की मानें तो चौकी इंचार्ज भोजपुर द्वारा मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।अब क्या सच क्या झूठ यह पुलिस की जांच का विषय है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:33:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है : जिलाधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div>  </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राणी विज्ञान विभाग तथा जिला प्रशासन सिद्धार्थनगर के संयुक्त तत्वावधान में किसानों में  पैंगेसियस मछली पालन की आधुनिक तकनीकों, व्यवसायिक संभावनाओं तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्नत करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध सभागार में “पैंगेसियस मछली पालन किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे   जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी. एन. ने कहा कि मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन  का यह  संयुक्त प्रयास  अत्यंत  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है।</div>
<div>  </div>
<div>उन्होंने विशेष रूप से पैंगेसियस मछली पालन को कम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173243/fisheries-can-become-an-important-and-profitable-medium-to-increase"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773406513101-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div> </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राणी विज्ञान विभाग तथा जिला प्रशासन सिद्धार्थनगर के संयुक्त तत्वावधान में किसानों में  पैंगेसियस मछली पालन की आधुनिक तकनीकों, व्यवसायिक संभावनाओं तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्नत करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध सभागार में “पैंगेसियस मछली पालन किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे   जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी. एन. ने कहा कि मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन  का यह  संयुक्त प्रयास  अत्यंत  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने विशेष रूप से पैंगेसियस मछली पालन को कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीक बताया। जिलाधिकारी ने किसानों को सरकार की विभिन्न मत्स्य योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों को अपना कर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं। साथ ही उन्होंने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो कविता शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के लिए आयोजित यह  प्रशिक्षण कार्यक्रम  कृषि और मत्स्य क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम में प्राणी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार वर्मा ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों और यहां अध्ययन के लाभों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में स्वागत संबोधन विज्ञान  संकाय की अधिष्ठाता प्रो प्रकृति राय ने किया ।  </div>
<div> </div>
<div> आचार्य डॉ. विनीता रावत, मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक नन्द किशोर प्रसाद,  एक्वा डॉक्टर सॉल्यूशंस कोलकाता के डॉ देब तनु  बर्मन, गौरव एक्वा यूनिवर्स, महाराजगंज के संस्थापक वीर गौरव, जंतु  विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने हैचरी प्रबंधन तथा सहायक आचार्य एवं सह-संयोजक डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने रोग निदान के विषय में प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो नीता यादव , अधिष्ठाता वाणिज्य संकाय प्रो सौरभ , डॉ लक्ष्मण सिंह, डॉ विशाल गुप्ता, डॉ अविनाश प्रताप सिंह सहित लगभग एक सौ पचास  किसानों  ने  प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 19:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा, इन जिलों में बनेगी मत्स्य मंडियां</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Haryana News: हरियाणा सरकार राज्य में </span><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> पालन (</span><span class="cf2">Fish</span> <span class="cf2">Farming</span><span class="cf2">) </span><span class="cf0">को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत </span><span class="cf0">फरीदाबाद</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">गुरुग्राम</span><span class="cf0"> और हिसार जिलों में आधुनिक </span><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> मंडियां स्थापित की जाएंगी, जिससे मछली पालक किसानों को सीधा बाजार और बेहतर दाम मिल सकेगा।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">झींगा मछली </span><span class="cf0">प्रोसेसिंग</span><span class="cf0"> यूनिट और एकीकृत </span><span class="cf0">एक्वा</span><span class="cf0"> पार्क</span></strong></p>
<p><span class="cf0">राज्य सरकार झींगा मछली उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक </span><span class="cf0">प्रोसेसिंग</span><span class="cf0"> यूनिट </span><span class="cf0">भी</span><span class="cf0"> स्थापित करने जा रही है। इसके साथ ही, </span><span class="cf0">भिवानी</span><span class="cf0"> जिले के गांव </span><span class="cf0">गरवा</span><span class="cf0"> में 24.5 एकड़ भूमि पर 98.90 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत </span><span class="cf0">एक्वा</span><span class="cf0"> पार्क </span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159811/haryana-fish-farming-will-get-a-boost-in-haryana-fish"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/haryana-fish-farming.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Haryana News: हरियाणा सरकार राज्य में </span><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> पालन (</span><span class="cf2">Fish</span> <span class="cf2">Farming</span><span class="cf2">) </span><span class="cf0">को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत </span><span class="cf0">फरीदाबाद</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">गुरुग्राम</span><span class="cf0"> और हिसार जिलों में आधुनिक </span><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> मंडियां स्थापित की जाएंगी, जिससे मछली पालक किसानों को सीधा बाजार और बेहतर दाम मिल सकेगा।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">झींगा मछली </span><span class="cf0">प्रोसेसिंग</span><span class="cf0"> यूनिट और एकीकृत </span><span class="cf0">एक्वा</span><span class="cf0"> पार्क</span></strong></p>
<p><span class="cf0">राज्य सरकार झींगा मछली उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक </span><span class="cf0">प्रोसेसिंग</span><span class="cf0"> यूनिट </span><span class="cf0">भी</span><span class="cf0"> स्थापित करने जा रही है। इसके साथ ही, </span><span class="cf0">भिवानी</span><span class="cf0"> जिले के गांव </span><span class="cf0">गरवा</span><span class="cf0"> में 24.5 एकड़ भूमि पर 98.90 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत </span><span class="cf0">एक्वा</span><span class="cf0"> पार्क </span><span class="cf0">उत्कृष्ठता</span><span class="cf0"> केंद्र बनाया जाएगा। इस केंद्र के लिए </span><span class="cf0">निविदाएं</span><span class="cf0"> (टेंडर) </span><span class="cf0">जारी</span><span class="cf0"> की जा चुकी हैं। यहां झींगा व मछली उत्पादन के साथ-साथ प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सिरसा में खारे पानी की </span><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> परियोजना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">प्रधानमंत्री </span><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> संपदा योजना (</span><span class="cf2">PMMSY) </span><span class="cf0">के तहत सिरसा जिले के गांव पोहड़का </span><span class="cf0">में 25 एकड़ भूमि पर खारे पानी की </span><span class="cf0">जलकृषि</span><span class="cf0"> विकास परियोजना स्थापित की जाएगी। इसका उद्देश्य झींगा और मछली पालन के लिए उपयुक्त जल स्रोतों का वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित करना है।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> किसानों के लिए </span><span class="cf0">इंफ्रास्ट्रक्चर</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">सब्सिडी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">मत्स्य</span> <span class="cf0">किसानों</span><span class="cf0"> की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश में 25 </span><span class="cf0">मत्स्य</span> <span class="cf0">कोल्ड</span> <span class="cf0">स्टोर</span><span class="cf0"> बनाए जा चुके हैं, जबकि 18 </span><span class="cf0">कोल्ड</span> <span class="cf0">स्टोर</span><span class="cf0"> निर्माणाधीन हैं। इनमें से 10 </span><span class="cf0">कोल्ड</span> <span class="cf0">स्टोर</span><span class="cf0"> पर किसानों को </span><span class="cf0">सब्सिडी</span><span class="cf0"> दी जा चुकी है।</span></p>
<p><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> पालन मंत्री श्याम सिंह </span><span class="cf0">राणा</span><span class="cf0"> ने बताया कि इस </span><span class="cf0">वित्त</span> <span class="cf0">वर्ष</span> <span class="cf0">में</span><span class="cf0"> 13 </span><span class="cf0">करोड़</span> <span class="cf0">रुपये</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">सब्सिडी</span> <span class="cf0">वितरित</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">जा</span> <span class="cf0">चुकी</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">और</span> <span class="cf0">केंद्र</span> <span class="cf0">सरकार</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">अतिरिक्त</span><span class="cf0"> 20 </span><span class="cf0">करोड़</span> <span class="cf0">रुपये</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">बजट</span> <span class="cf0">मांगा</span> <span class="cf0">गया</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सौर ऊर्जा से सुसज्जित तालाब</span></strong></p>
<p><span class="cf0">राज्य सरकार </span><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> किसानों को </span><span class="cf0">सोलर</span> <span class="cf0">सिस्टम</span><span class="cf0"> लगाने के लिए 45 लाख रुपये का अनुदान पहले ही जारी कर चुकी है। </span><span class="cf0">राणा</span><span class="cf0"> ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन किसानों को अभी </span><span class="cf0">सब्सिडी</span><span class="cf0"> नहीं मिली है, उन्हें जल्द से जल्द राशि प्रदान की जाए।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">भेड़-बकरी पालन को भी बढ़ावा</span></strong></p>
<p><span class="cf0">श्याम सिंह </span><span class="cf0">राणा</span><span class="cf0"> ने भेड़ और बकरी के दूध उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष केंद्र स्थापित करने </span><span class="cf0">की</span><span class="cf0"> योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उच्च नस्ल की भेड़ें </span><span class="cf0">बीपीएल</span><span class="cf0"> परिवारों को निशुल्क दी जाएंगी, और भेड़-बकरी बीमा योजना अगले वर्ष से पूरी तरह निशुल्क होगी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">खरीफ सीजन 2025-26 की स्थिति</span></strong></p>
<p><span class="cf0">राज्य सरकार ने किसानों के हित </span><span class="cf0">में</span><span class="cf0"> खरीफ खरीद प्रक्रिया को भी तेज किया है। अब तक 2.99 लाख किसानों से 61.48 लाख टन धान की खरीद की जा चुकी है, जिसमें से 60.58 लाख टन धान का उठान पूरा हो गया है। किसानों के खातों में 14,336 करोड़ 92 लाख रुपये की राशि सीधे भेजी जा चुकी है।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 10:50:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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