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                <title>IAS - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>IAS RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>IAS Success Story: ASI की बेटी बनीं आईएएस अफसर, पढ़ें रूपल राणा की सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172364/ias-success-story-read-the-success-story-of-rupal-rana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(25).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी। ऐसे समय में उनके पिता जसवीर राणा ने मां और पिता – दोनों की भूमिका निभाई। पिता का मजबूत सहारा और भाई-बहनों का साथ रूपल के लिए सबसे बड़ी ताकत बना। पारिवारिक जिम्मेदारियों और भावनात्मक संघर्षों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।</p>
<h3>पढ़ाई में शुरू से रहीं अव्वल</h3>
<p>रूपल की शुरुआती पढ़ाई बागपत के जेपी पब्लिक स्कूल से हुई, जहां उन्होंने 10वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की और हाई स्कूल में 10 CGPA हासिल किए। इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने पिलानी से पूरी की। आगे चलकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की और वहां भी यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं।</p>
<h3>यूपीएससी में दो बार असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला</h3>
<p>शैक्षणिक जीवन में शानदार प्रदर्शन के बावजूद यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में रूपल को शुरुआती प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा। दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, रणनीति बदली और नई ऊर्जा के साथ तैयारी में जुट गईं। यही जज्बा आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।</p>
<h3>यूपीएससी 2024 में 26वीं रैंक हासिल</h3>
<p>लगातार मेहनत और आत्ममंथन का नतीजा आखिरकार रंग लाया। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में रूपल राणा ने ऑल इंडिया रैंक 26 हासिल कर ली। इस सफलता के साथ ही उनका आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हो गया और उन्होंने अपने पिता का नाम रोशन किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 19:32:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: ASI की बेटी बनीं आईएएस अफसर, पढ़ें रूपल राणा की सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171431/ias-success-story-read-the-success-story-of-rupal-rana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(25).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी। ऐसे समय में उनके पिता जसवीर राणा ने मां और पिता – दोनों की भूमिका निभाई। पिता का मजबूत सहारा और भाई-बहनों का साथ रूपल के लिए सबसे बड़ी ताकत बना। पारिवारिक जिम्मेदारियों और भावनात्मक संघर्षों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।</p>
<h3>पढ़ाई में शुरू से रहीं अव्वल</h3>
<p>रूपल की शुरुआती पढ़ाई बागपत के जेपी पब्लिक स्कूल से हुई, जहां उन्होंने 10वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की और हाई स्कूल में 10 CGPA हासिल किए। इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने पिलानी से पूरी की। आगे चलकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की और वहां भी यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं।</p>
<h3>यूपीएससी में दो बार असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला</h3>
<p>शैक्षणिक जीवन में शानदार प्रदर्शन के बावजूद यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में रूपल को शुरुआती प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा। दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, रणनीति बदली और नई ऊर्जा के साथ तैयारी में जुट गईं। यही जज्बा आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।</p>
<h3>यूपीएससी 2024 में 26वीं रैंक हासिल</h3>
<p>लगातार मेहनत और आत्ममंथन का नतीजा आखिरकार रंग लाया। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में रूपल राणा ने ऑल इंडिया रैंक 26 हासिल कर ली। इस सफलता के साथ ही उनका आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हो गया और उन्होंने अपने पिता का नाम रोशन किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 21:59:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: ASI की बेटी बनीं आईएएस अफसर, पढ़ें रूपल राणा की सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168506/ias-success-story-read-the-success-story-of-rupal-rana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(25).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी। ऐसे समय में उनके पिता जसवीर राणा ने मां और पिता – दोनों की भूमिका निभाई। पिता का मजबूत सहारा और भाई-बहनों का साथ रूपल के लिए सबसे बड़ी ताकत बना। पारिवारिक जिम्मेदारियों और भावनात्मक संघर्षों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।</p>
<h3>पढ़ाई में शुरू से रहीं अव्वल</h3>
<p>रूपल की शुरुआती पढ़ाई बागपत के जेपी पब्लिक स्कूल से हुई, जहां उन्होंने 10वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की और हाई स्कूल में 10 CGPA हासिल किए। इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने पिलानी से पूरी की। आगे चलकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की और वहां भी यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं।</p>
<h3>यूपीएससी में दो बार असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला</h3>
<p>शैक्षणिक जीवन में शानदार प्रदर्शन के बावजूद यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में रूपल को शुरुआती प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा। दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, रणनीति बदली और नई ऊर्जा के साथ तैयारी में जुट गईं। यही जज्बा आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।</p>
<h3>यूपीएससी 2024 में 26वीं रैंक हासिल</h3>
<p>लगातार मेहनत और आत्ममंथन का नतीजा आखिरकार रंग लाया। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में रूपल राणा ने ऑल इंडिया रैंक 26 हासिल कर ली। इस सफलता के साथ ही उनका आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हो गया और उन्होंने अपने पिता का नाम रोशन किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 11:22:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> जिले में एसआईआर अभियान की सफलता देख स्पेशल रोल ऑब्जर्वर ने की जिलाधिकारी की प्रशंसा</title>
                                    <description><![CDATA[नोटिस से डरने की जरुरत नहीं, 13 प्रपत्रों में से किसी एक पर दें सूचना, नहीं कटेगा नाम: स्पेशल रोल ऑब्जर्वर जेवीएम सुब्रमण्यम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164503/694feb0a019ad"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/p5-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>एसआईआर अभियान में जिलाधिकारी की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को राजनैतिक दलों ने भी सराहा</strong><br /><strong>नगर व ग्रामीण क्षेत्रों के बूथों पर जाकर बीएलओ व सुपरवाईजरों से की एएसडी मतदाताओं की समीक्षा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ललितपुर।</strong> जेवीएन सुब्रमण्डयम, आईएएस, (संयुक्त सचिव, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय)/विशेष रोल प्रेक्षक ने जिलाधिकारी सत्य प्रकाश के साथ आज शनिवार को कलैक्ट्रेट सभागार में निर्वाचक नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 के सम्बंध में समीक्षा बैठक की और जनपद के मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से एसआईआर कार्य का फीडबैक लिया। इसके साथ ही उन्होंने नगरीय व ग्रामीण पोलिंग बूथों पर जाकर बीएलओ एवं सुपरवाईजरों से एएसडी मतदाताओं की मैपिंग की प्रगति का जायजा भी लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पेशल रोल ऑब्जर्वर ने जनपद में कराये जा रहे एसआईआर अभियान की सफलता देखकर जिलाधिकारी सहित उनकी पूरी प्रशासनिक टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिला प्रशासन और राजनैतिक दलों ने मिलकर बहुत अच्छा कार्य किया है, उनकी मेहनत धरातल पर भी दिख रही है। आगे भी इसी सामन्जस्य के साथ कार्य करें। उन्होंने राजनैतिक दलों से अपील की कि वे जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध करायी गई एएसडी सूची में मतदाताओं की मैपिंग में सहयोग करें। उन्होंने सभी को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं काटा जाएगा, एएसडी के जो भी मतदाता हैं, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा, मतदाताओं को इस नोटिस से डरने की जरुरत नहीं है, आयोग द्वारा निर्धारित 13 दस्तावेजों में से एक पर सूचना उपलब्ध करायेंगे तो उनका नाम सूची में शामिल कर लिया जाएगा। ड्राफ्ट पब्लिकेशन के बाद भी यदि कोई मतदाता छूट जाता है तो उनका फार्म-6 भरवाकर सूची में शामिल कर लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में समस्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों ने रोल प्रेक्षक महोदय को अपना-अपना परिचरय दिया और एसआईआर के प्रति जिलाधिकारी और उनकी टीम की प्रशंसा करते हुए अपने-अपने सुझाव दिये। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा कड़ी मेहनत के साथ जिले में एसआईआर कराया जा रहा है, जिससे वे सभी संतुष्ट हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने स्पेशल रोल आब्जर्वर को अवगत कराया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष प्रगाढ़ पुनपरीक्षण (एसआईआर)-2026 के सम्बंध में जनपद के राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ 6 बार बैठक की जा चुकी है, साथ ही एएसडी मतदाताओं का डाटा पेनड्राइव में उपलब्ध कराया जा चुका है। प्रतिनिधियों के द्वारा जो भी सुझाव या आपत्तियां दर्ज करायी जा रही हैं, उनके अनुसार सुधार की कार्यवाही निरंतर की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उप जिला निर्वाचन अधिकारी अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि जनपद में कुल 1063 पोलिंग बूथ थे, जिसे सम्भाजन के प्रस्ताव के आधार पर और निर्वाचन आयोग के अनुमोदन के उपरान्त बढ़ाकर 1156 किया गया है, परन्तु पोलिंग सेन्टरों की संख्या पूर्व की भांति ही है। क्योंकि इनमें पर्याप्त स्थान उपलब्ध है। उन्होंने राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से कहा कि किसी भी भ्रान्ति या सूचना के आदान प्रदान के लिए हमसे सम्पर्क करें।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के उपरान्त रोल प्रेक्षक महोदय ने नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र के पोलिंग बूथों का निरीक्षण कर एएसडी मतदाताओं की मैपिंग कर रहे बीएलओ से वार्ता की। उन्होंने नगर के वर्णी कॉलेज व पीएन इण्टर कॉलेज में बीएलओ व सुपरवाईजरों से वार्ता कर उनका हौसला बढ़ाया और एएसडी मतदाताओं की मैपिंग की अब तक की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि ललितपुर में सभी कार्मिक अच्छी टीम भाव से काम कर रहे हैं, जो धरातल पर दिख भी रहा है। 9.58 लाख से अधिक मतदाताओं के सापेक्ष मात्र 42 हजार अनमेप्ड मतदाताओं का होना कोई बड़ी बात नहीं है, जल्द ही इन्हें भी खोज लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने मौके पर उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिये कि ऐसे बूथ चिन्हित कर लें जिनमें एएसडी मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है और वहां पर विशेष अभियान चलाकर मैपिंग का कार्य करायें। इसी प्रकार उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के पीएम श्री सिविलियन विद्यालय जीरोन एवं बुन्देलखण्ड इण्टर कॉलेज जाखलौन पहंुचकर एएसडी मतदाताओं की समीक्षा की, मौके पर बीएलओ व कुछ ग्रामवासी उपस्थित मिले, उन्होंने ग्राम वासियों से एसआईआर फार्म के बारे में पूछा, जिस पर ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने फार्म भर दिया है और वे बीएलओ व बीएलए की भी सहायता कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर समस्त उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी समर सिंह, जिला सूचना अधिकारी डीएस दयाल, जिला संयोजक एसआईआर हरिराम निरंजन, राजनैतिक दलों में आम आदमी पार्टी जिलाध्यक्ष हरदयाल सिंह लोधी, बहुजन समाज पार्टी जिलाध्यक्ष अमन संतोष व भूपेन्द्र, भारतीय जनता पार्टी जिलाध्यक्ष हरीशचन्द्र रावत, इण्डियन नेशनल कांग्रेस जिलाध्यक्ष दयाराम श्रीवास, जसपाल सिंह, समाजवादी पार्टी से प्रमोद इमलिया, अरसद मंसूरी, अपना दल जिला महासचिव सोहन लाल निरंजन व विधानसभा अध्यक्ष पुरषोत्तक उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 19:49:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 33 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार: हिंदी मीडियम से पढ़े आदित्य कुमार बने IPS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163855/success-story-failed-33-times-but-still-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/news-2025-06-23t122040.787-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी नौकरी परीक्षाओं में हाथ आजमाना शुरू किया। वे 30 बार विभिन्न परीक्षाओं जैसे बैंक, KVS, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में फेल हुए। इसके बाद उन्होंने UPSC की परीक्षा देने का फैसला किया और यहां भी तीन बार असफलता का सामना किया। कुल मिलाकर वे 33 बार असफल हुए, लेकिन कभी भी अपने लक्ष्य से भटके नहीं।</p>
<p>वर्ष 2013 में आदित्य ने अपने गांव को छोड़कर दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2014 में पहले अटेम्प्ट में  प्रीलिम्स भी पास नहीं हुआ। 2015 में दूसरा प्रयास  में प्रीलिम्स और मेंस तो पास हुए, लेकिन इंटरव्यू में ओवरकॉन्फिडेंस के चलते फेल हो गए।</p>
<p>2016 में तीसरा प्रयास में एक बार फिर असफलता हाथ लगी। लेकिन 2017 में चौथे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और 630वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास किया।</p>
<p>2018 के UPSC रिजल्ट में 630वीं रैंक के साथ IPS कैडर मिला। आज आदित्य कुमार पंजाब के संगरूर जिले में एएसपी (असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर तैनात हैं। आदित्य के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 13:12:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: गरीबी से लड़कर IAS बना ये लड़का, संघर्ष भरी कहानी सुन आ जाएंगे आंसू </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। UP के बुलंदशहर के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले पवन कुमार ने यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS बने। पवन कुमार का बचपन छप्पर से बनी छत के कच्चे मकान में बीता। उनके जीवन की शुरुआत ही मुश्किलों से भरी थी और इन्हीं से गुजरकर वह एक IAS अधिकारी बने।</p>
<p><strong>मुकेश और किसान पिता के सपने</strong><br />पवन के पिता किसान थे और चाहते थे उनका बेटा कोई अच्छी नौकरी करके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163841/ias-success-story-this-boy-became-an-ias-after-fighting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-success-story-(12).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। UP के बुलंदशहर के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले पवन कुमार ने यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS बने। पवन कुमार का बचपन छप्पर से बनी छत के कच्चे मकान में बीता। उनके जीवन की शुरुआत ही मुश्किलों से भरी थी और इन्हीं से गुजरकर वह एक IAS अधिकारी बने।</p>
<p><strong>मुकेश और किसान पिता के सपने</strong><br />पवन के पिता किसान थे और चाहते थे उनका बेटा कोई अच्छी नौकरी करके परिवार का सहारा बने। यूपीएससी की तैयारी करते हुए पवन ने अपना हौंसला कम नहीं होने दिया। उनका एक ही लक्ष्य था IAS बनकर समाज सेवा करना।</p>
<p><strong>परिवार ने जोड़े पैसे</strong><br />पवन के अंदर पढ़ाई की ललक को देखते हुए पिता ने मजदूरी करके पढ़ाया। बुलंदशहर जिले के रघुनाथ गांव के रहने वाले पवन के पिता मुकेश मनरेगा में मजदूर और एक गरीब किसान रहे हैं। वह किसानी के साथ मजदूरी करके किसी तरह से परिवार पालते हैं।</p>
<p><strong>कम नहीं होने दी अपनी लगन</strong></p>
<p>पवन ने अपने मन में सिविल सेवा का सपना पूरे करने का निश्चय कर चुके थे। UPSC में उनकी मेहनत रंग लाई और वे अच्छ नंबरों से पास होकर आईएएस अफसर बन गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 10:55:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: डॉक्टरी छोड़ 2 बार पास की UPSC परीक्षा, कड़ी मेहनत से पहले IPS और फिर बनीं IAS</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IAS Success Story:</strong> यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह, पूर्व IPS अधिकारी मुद्रा गैरोला जो बाद में आईएएस अफसर बनीं। अपने पिता का सपना पूरा करते हुए सिविल सेवा में अपना करियर बनाने के लिए मेडिकल करियर छोड़ दिया।</p>
<p>IAS मुद्रा गैरोला, मूल रूप से उत्तराखंड के चमोली के कर्णप्रयाग की रहने वाली हैं। हालांकि, अब वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं। कम उम्र से ही पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने लगातार अपनी कक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163322/ias-success-story-left-medicine-and-passed-upsc-exam-twice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-mudra-gairola-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IAS Success Story:</strong> यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह, पूर्व IPS अधिकारी मुद्रा गैरोला जो बाद में आईएएस अफसर बनीं। अपने पिता का सपना पूरा करते हुए सिविल सेवा में अपना करियर बनाने के लिए मेडिकल करियर छोड़ दिया।</p>
<p>IAS मुद्रा गैरोला, मूल रूप से उत्तराखंड के चमोली के कर्णप्रयाग की रहने वाली हैं। हालांकि, अब वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं। कम उम्र से ही पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने लगातार अपनी कक्षा में टॉप रैंक हासिल की। उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए, मुद्रा ने अपनी कक्षा 10वीं की परीक्षा में 96% और कक्षा 12वीं में 97% अंक प्राप्त किए। उन्हें भारत की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी से उनकी उपलब्धियों के लिए पुरस्कार भी मिला था।</p>
<p>अपनी स्कूली शिक्षा के बाद, उन्होंने मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई की, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल भी जीता। इसके बाद, अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी (MDS) का कोर्स करने के लिए दिल्ली चली गईं।</p>
<p>उनके पिता अरुण गैरोला, जिन्होंने 1973 में यूपीएससी परीक्षा दी थी, लेकिन सफल नहीं हो पाए थे, वह चाहते थे कि उनकी बेटी भी सिविल सेवा परीक्षा दे और आईएएस अधिकारी का प्रतिष्ठित पद हासिल करे।</p>
<p>अपने पिता की आजीवन आकांक्षा को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए, मुद्रा गैरोला ने अपनी मास्टर की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए खुद को समर्पित करने का साहसी निर्णय लिया। साल 2018 में अपने पहले प्रयास में इंटरव्यू राउंड तक पहुंचने के बावजूद, 2019 और 2020 में असफल प्रयासों के बावजूद, मुद्रा ने हार नहीं मानी।</p>
<p>उनके अटूट दृढ़ संकल्प ने 2021 में उन्हें सफलता दिलाई। उन्होंने परीक्षा में सफलतापूर्वक 165वीं रैंक हासिल की, जिससे उनका आईपीएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हुआ। लेकिन वह आईपीएस के पद से संतुष्ट नहीं थी, इसलिए साल 2022 में मुद्रा ने यूपीएससी परीक्षा फिर से दी और इस बार 53वीं रैंक हासिल करते हुए आईएएस अधिकारी का प्रतिष्ठित पद प्राप्त किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/163322/ias-success-story-left-medicine-and-passed-upsc-exam-twice</link>
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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 15:24:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 33 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार: हिंदी मीडियम से पढ़े आदित्य कुमार बने IPS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162830/success-story-failed-33-times-but-still-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/news-2025-06-23t122040.787-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी नौकरी परीक्षाओं में हाथ आजमाना शुरू किया। वे 30 बार विभिन्न परीक्षाओं जैसे बैंक, KVS, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में फेल हुए। इसके बाद उन्होंने UPSC की परीक्षा देने का फैसला किया और यहां भी तीन बार असफलता का सामना किया। कुल मिलाकर वे 33 बार असफल हुए, लेकिन कभी भी अपने लक्ष्य से भटके नहीं।</p>
<p>वर्ष 2013 में आदित्य ने अपने गांव को छोड़कर दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2014 में पहले अटेम्प्ट में  प्रीलिम्स भी पास नहीं हुआ। 2015 में दूसरा प्रयास  में प्रीलिम्स और मेंस तो पास हुए, लेकिन इंटरव्यू में ओवरकॉन्फिडेंस के चलते फेल हो गए।</p>
<p>2016 में तीसरा प्रयास में एक बार फिर असफलता हाथ लगी। लेकिन 2017 में चौथे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और 630वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास किया।</p>
<p>2018 के UPSC रिजल्ट में 630वीं रैंक के साथ IPS कैडर मिला। आज आदित्य कुमार पंजाब के संगरूर जिले में एएसपी (असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर तैनात हैं। आदित्य के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 18:43:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: डॉक्टरी छोड़ 2 बार पास की UPSC परीक्षा, कड़ी मेहनत से पहले IPS और फिर बनीं IAS</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IAS Success Story:</strong> यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह, पूर्व IPS अधिकारी मुद्रा गैरोला जो बाद में आईएएस अफसर बनीं। अपने पिता का सपना पूरा करते हुए सिविल सेवा में अपना करियर बनाने के लिए मेडिकल करियर छोड़ दिया।</p>
<p>IAS मुद्रा गैरोला, मूल रूप से उत्तराखंड के चमोली के कर्णप्रयाग की रहने वाली हैं। हालांकि, अब वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं। कम उम्र से ही पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने लगातार अपनी कक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162775/success-story-left-medicine-and-passed-upsc-exam-twice-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-mudra-gairola-(2).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IAS Success Story:</strong> यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह, पूर्व IPS अधिकारी मुद्रा गैरोला जो बाद में आईएएस अफसर बनीं। अपने पिता का सपना पूरा करते हुए सिविल सेवा में अपना करियर बनाने के लिए मेडिकल करियर छोड़ दिया।</p>
<p>IAS मुद्रा गैरोला, मूल रूप से उत्तराखंड के चमोली के कर्णप्रयाग की रहने वाली हैं। हालांकि, अब वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं। कम उम्र से ही पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने लगातार अपनी कक्षा में टॉप रैंक हासिल की। उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए, मुद्रा ने अपनी कक्षा 10वीं की परीक्षा में 96% और कक्षा 12वीं में 97% अंक प्राप्त किए। उन्हें भारत की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी से उनकी उपलब्धियों के लिए पुरस्कार भी मिला था।</p>
<p>अपनी स्कूली शिक्षा के बाद, उन्होंने मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई की, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल भी जीता। इसके बाद, अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी (MDS) का कोर्स करने के लिए दिल्ली चली गईं।</p>
<p>उनके पिता अरुण गैरोला, जिन्होंने 1973 में यूपीएससी परीक्षा दी थी, लेकिन सफल नहीं हो पाए थे, वह चाहते थे कि उनकी बेटी भी सिविल सेवा परीक्षा दे और आईएएस अधिकारी का प्रतिष्ठित पद हासिल करे।</p>
<p>अपने पिता की आजीवन आकांक्षा को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए, मुद्रा गैरोला ने अपनी मास्टर की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए खुद को समर्पित करने का साहसी निर्णय लिया। साल 2018 में अपने पहले प्रयास में इंटरव्यू राउंड तक पहुंचने के बावजूद, 2019 और 2020 में असफल प्रयासों के बावजूद, मुद्रा ने हार नहीं मानी।</p>
<p>उनके अटूट दृढ़ संकल्प ने 2021 में उन्हें सफलता दिलाई। उन्होंने परीक्षा में सफलतापूर्वक 165वीं रैंक हासिल की, जिससे उनका आईपीएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हुआ। लेकिन वह आईपीएस के पद से संतुष्ट नहीं थी, इसलिए साल 2022 में मुद्रा ने यूपीएससी परीक्षा फिर से दी और इस बार 53वीं रैंक हासिल करते हुए आईएएस अधिकारी का प्रतिष्ठित पद प्राप्त किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 10:49:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Success Story: कौन है IAS अफसर Farah Hussain, हर तरफ हो रही चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: भारत में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। हर साल देशभर के लाखों छात्र IAS, आईपीएस (IPS) या आईएफएस (IFS) अधिकारी बनने का सपना देखते हैं, लेकिन, उन्हें से कुछ लोग ही इस सपने को पूरा कर पाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अधिकारी फराह हुसैन (IAS Farah Hussain के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी का एग्जाम पास किया और आईएएस अधिकारी बनकर अपने परिवार का सपना पूरा किया। खास बात यह है कि Farah Hussain ऐसे परिवार से आती हैं जो उपलब्धियों से भरा हुई है,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162418/success-story-who-is-ias-officer-farah-hussain-is-being"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-farrah-hussain.jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: भारत में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। हर साल देशभर के लाखों छात्र IAS, आईपीएस (IPS) या आईएफएस (IFS) अधिकारी बनने का सपना देखते हैं, लेकिन, उन्हें से कुछ लोग ही इस सपने को पूरा कर पाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अधिकारी फराह हुसैन (IAS Farah Hussain के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी का एग्जाम पास किया और आईएएस अधिकारी बनकर अपने परिवार का सपना पूरा किया। खास बात यह है कि Farah Hussain ऐसे परिवार से आती हैं जो उपलब्धियों से भरा हुई है, जिनमें से पहले से ही कई लोग टॉप सरकारी पदों पर तैनात है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Farah Hussain का जन्म राजस्थान के झुंझुनू जिले में हुआ था। वह नवान गांव में एक मुस्लिम परिवार से आती हैं, जिसकी जड़ें सार्वजनिक सेवा में गहरी हैं। Farah Hussain ने हायर एजुकेशन की और इसके बाद IAS अधिकारी अपने परिवार का नाम रौशन किया।</p>
<p>बताया जा रहा है कि Farah Hussain ने राजस्थान के झुंझुनू में ही अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और इसके बाद वह मुंबई चली गईं। जहां पर उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। खबरों की माने, तो शुरू में Farah Hussainडॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन समय के साथ उनके लक्ष्य बदल भी गए।</p>
<p>वह पहले एक क्रिमिनल वकील बनीं और बाद में उन्होंन UPSC की तैयारी करना शुरू कर दिया। Farah Hussain ने 26 साल की उम्र में 2016 में यूपीएसई परीक्षा दूसरा अटेंप्ट दिया और एग्जाम पास कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 267 हासिल की।</p>
<p><strong>फराह खान के परिवार के अधिकतर लोग हैं सरकारी अधिकारी</strong></p>
<p>बताया जाता है कि फराह खान एक ऐसे परिवार से आती हैं। जहां अधिकतर लोग सरकारी अधिकारी है। उनके पिता का नाम अशफाक हुसैन हैं, जो एक जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत थे और साल 2016 में IAS के रूप में पदोन्नत हु। वहीं उनके चाचा का नाम लियाकत खान हैं।</p>
<p>वह एक सीनियर IPS अधिकारी थे और जो IG के रूप में रिटायर हुए। इसके अलावा वह वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे। वहीं उनके दूसरे चाचा का जाकिर खान है। वह ङी एक IAS अधिकारी हैं।</p>
<p>इसके अलावा आईएएस अधिकारी फराह की बड़ी बहन राजस्थान हाईकोर्ट में वकील हैं। उनके चचेरे भाई और ससुराल वाले भी अहम पदों पर कार्यरत हैं ।</p>
<p><strong>पति भी हैं आईएसएस अधिकारी</strong></p>
<p>खबरों की मानें, तो फराह खान के पति कमर उल जमान चौधरी भी एक IAS अधिकारी हैं, वह अभी जोधपुर में तैनात हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Dec 2025 13:13:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 33 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार: हिंदी मीडियम से पढ़े आदित्य कुमार बने IPS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161615/success-story-failed-33-times-but-still-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/news-2025-06-23t122040.787-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी नौकरी परीक्षाओं में हाथ आजमाना शुरू किया। वे 30 बार विभिन्न परीक्षाओं जैसे बैंक, KVS, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में फेल हुए। इसके बाद उन्होंने UPSC की परीक्षा देने का फैसला किया और यहां भी तीन बार असफलता का सामना किया। कुल मिलाकर वे 33 बार असफल हुए, लेकिन कभी भी अपने लक्ष्य से भटके नहीं।</p>
<p>वर्ष 2013 में आदित्य ने अपने गांव को छोड़कर दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2014 में पहले अटेम्प्ट में  प्रीलिम्स भी पास नहीं हुआ। 2015 में दूसरा प्रयास  में प्रीलिम्स और मेंस तो पास हुए, लेकिन इंटरव्यू में ओवरकॉन्फिडेंस के चलते फेल हो गए।</p>
<p>2016 में तीसरा प्रयास में एक बार फिर असफलता हाथ लगी। लेकिन 2017 में चौथे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और 630वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास किया।</p>
<p>2018 के UPSC रिजल्ट में 630वीं रैंक के साथ IPS कैडर मिला। आज आदित्य कुमार पंजाब के संगरूर जिले में एएसपी (असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर तैनात हैं। आदित्य के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 11:20:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>Success Story: 33 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार: हिंदी मीडियम से पढ़े आदित्य कुमार बने IPS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161243/success-story-failed-33-times-but-still-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/news-2025-06-23t122040.787-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी नौकरी परीक्षाओं में हाथ आजमाना शुरू किया। वे 30 बार विभिन्न परीक्षाओं जैसे बैंक, KVS, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में फेल हुए। इसके बाद उन्होंने UPSC की परीक्षा देने का फैसला किया और यहां भी तीन बार असफलता का सामना किया। कुल मिलाकर वे 33 बार असफल हुए, लेकिन कभी भी अपने लक्ष्य से भटके नहीं।</p>
<p>वर्ष 2013 में आदित्य ने अपने गांव को छोड़कर दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2014 में पहले अटेम्प्ट में  प्रीलिम्स भी पास नहीं हुआ। 2015 में दूसरा प्रयास  में प्रीलिम्स और मेंस तो पास हुए, लेकिन इंटरव्यू में ओवरकॉन्फिडेंस के चलते फेल हो गए।</p>
<p>2016 में तीसरा प्रयास में एक बार फिर असफलता हाथ लगी। लेकिन 2017 में चौथे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और 630वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास किया।</p>
<p>2018 के UPSC रिजल्ट में 630वीं रैंक के साथ IPS कैडर मिला। आज आदित्य कुमार पंजाब के संगरूर जिले में एएसपी (असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर तैनात हैं। आदित्य के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 14:46:08 +0530</pubDate>
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